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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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    Rajan, who himself has been IMF's Chief Economist and is among the few to have rightly predicted the financial crisis of 2007, has triggered a debate among policymakers and economists with his warning against central banks globally being pushed into "competitive monetary policy easing".

    With Raghuram Rajan ringing alarm bells about the world economy facing the Great Depression-like problems, an IMF research paper has countered his views.

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  • 06/28/15--14:32: Article 21
  • इन दिनों पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी. चिदंबरम समाजवादी किस्म की अर्थव्यवस्था के धुन्वाधार प्रवक्ता हो रक्खे हैं. हर हफ्ते 'इंडियन एक्सप्रेस' में उनका एक आर्टिकल आता है (जो दो-तीन हिंदी अख़बारों में भी अनुदित होकर छपता है), जो दर्शाता है कि वह मोदी सरकार की उग्रवादी-अर्थव्यवस्था से बहुत त्रस्त हैं. उन्हें गाँव, गरीब, किसान, खेती की जमीन, असंगठित क्षेत्र के मजूरों आदि के अस्तित्व की बहुत चिंता सता रही. लेकिन चिदंबरम ऐसा क्यों कर रहे? मोदी और जेटली तो उन्हीं के बोये पौंधों को सींच रहे हैं. चिदंबरम तो मनमोहन और मोंटेक सिंह के साथ 1991 की ऐतिहासिक नव उदारवादी और फ्री मार्किट इकॉनोमी के मास्टर माइंड रहे हैं. ऐसा हृदयपरिवर्तन क्यों? क्या मुक्त अर्थव्यवस्था का चरित्र समझ आ गया या विपक्ष में रहने पर ढोंग कर रहे?

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    ঘুষ নিয়েছিলেন রায়না, জাদেজা!

    ভারতের রাজনৈতিক অঙ্গনে এই মুহূর্তে তোলপাড় লোলিত মোদীকে নিয়ে। এবার লোলিত মোদী তোলপাড় ফেললেন ভারতীয় ক্রিকেট অঙ্গনেও। তাঁর ফাঁস হওয়া একটি ই-মেইল থেকে জানা গেছে ভারতের এক রিয়েল এস্টেট টাইকুনের কাছ থেকে বিশাল অঙ্কের ঘুষ নিয়েছিলেন রবীন্দ্র জাদেজা ও সুরেশ রায়না। ঘুষ...

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    The worrisome aspect, the officials say, is that in both the axes the leadership is in the hands of Kashmiri boys, who have joined the ranks of militancy recently, the sources said.

    Large inflow of hawala funds from gulf countries and more Kashmiri youths getting sucked into militancy are dangerously stoking terrorism in the Valley.

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    our respected freedom-fighter, Shakeel Bakshi, who painstakingly archives recent Kashmiri history, thrown into central jail, Srinagar!

    ‪#‎FreeShakeelBakshi‬ ‪#‎EndAllOccupations‬ ‪#‎FreeKashmir‬‪#‎FreeAllPoliticalPrisoners‬

    Abu Nouman's photo.

    ISL Patron Shakeel Bakshi Lodged In Central Jail ‪#‎Srinagar‬ !!

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    Sr. Valsa John who used to work for the rights of land, water and forests of Santhal Adivasis in Jhaarkhand, was murdered by the mining mafia on November 15, 2011. Sr. Valsa was the third leader who was killed during the same struggle. Meghnath and Biju made a documentary film on her and screened the film to her relatives in Ernakulam three days back. I also happened to be there. I was deeply moved to hear the remark of the closest relatives of Sr. Valsa, that they came to know who Sr. Valsa was through this documentary film. Friends of Sarat Chandran also experienced similar moments from the closest relatives of Sarat, who began to understand who he was after his death. I am sure there are a number of living or dead activists in this country, who are unknown to their closest relatives even today, for having consciously chosen to lead a life different from others. But does it really require death to facilitate human understanding? In a way, it is nobody's fault. Perhaps such situations only reflect the absurdity of speaking Spanish to a Japanese. Let us only hope that the different paths will become accepted paths in future, so that another generation can pursue a `new different path'. The documentary film `Taking Side' by Meghnath and Biju Toppo will be screened at the Kerala International Short and Documentary Film Festival on June 30, 2015. Those who would prefer to explore the uniqueness of the dead who left behind some foot prints, may listen to this song:

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  • 06/28/15--14:42: Rajouri Kadal Today
  • Rajouri Kadal Today

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    Clashes erupted in central Srinagar following congregational prayers at historic Grand Mosque, ...

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    KU today: A full day of protests amid rains. Classwork suspended. Total Lock down. All 4 demanding release of Muzamil

    Kashmir University Students Union's photo.
    Kashmir university students today strongly protested against the arrest of a fellow student of English department. Muzamil Farooq Dar who hails from Pulwama and is pursuing his PG in English was arrested by JK police on baseless charges a day before outside the campus. Classwork remained suspended and hundreds of students, despite heavy rain and fasting, shouted slogans for release of Muzamil. Students after marching through campus locked Sir Syed Gate and Moulana Rumi Gate. Latter students also locked down gates of administration block. A sit in was also held in front of VC secretariat. 
    Students vowed to continue the protests till Muzamil is not released.

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    Raising a flag against wrongdoing can be an invitation to disaster, especially in UP |

    Raising a flag against wrongdoing can be an invitation to disaster, especially in UP

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    नीति (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफर्मिंग इंडिया) आयोग की बैठक में 72 केंद्रीय योजनाओं में से 36 को फिलहाल खत्म किए जाने पर चर्चा हुई. योजनाएं कौन सी हैं, इसका तो खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन जरूररतमंद आम जनता को राहत पहुंचाने अधिकाँश योजनाएं बनाई गई थी. मोदी सरकार का इंस्टीट्यूट यह नहीं चाहता कि देश के आम लोगों पर रूपया खर्च किया जाए, बहाने बहाने से सब ख़त्म करने की कवायद चल रही है. अब देश का ट्रांसफर्मिंग करके इंडिया बनाना ही है तो मदद अडानियों, अम्बानियों, बिड़लाओं, भारती मित्तलों, टाटाओं जैसे लोगों को करना ही पड़ेगा. आम आदमी तो सिर्फ वोट देकर सरकार बनाता है......

    खोज परिणाम

    1. Live हिन्दुस्तान की नीति आयोग की बैठक के लिए कहानी चित्र

      नीति आयोग की बैठक में केंद्रीय योजनाओं में ...

      Live हिन्दुस्तान-27/06/2015
      नीति आयोग की उप-समूह के संयोजक मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को बैठक के बाद कहा, योजनाओं की संख्या में कमी और योजनाओं के दो समूह बनाने को लेकर एक व्यापक सहमति बनी है। सिफारिशों को 5 जुलाई तक ...
      नीति आयोग की बैठक में सीएम राजे ने दिए सुझाव
      News Channel (प्रेस विज्ञप्ति) (ब्लॉग)-27/06/2015
    2. Live हिन्दुस्तान की नीति आयोग की बैठक के लिए कहानी चित्र
      Live हिन्दुस्तान

      ललित मोदी प्रकरण: नीति आयोग की बैठक में शामिल ...

      Zee News हिन्दी-27/06/2015
      नई दिल्ली-जयपुर : राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शनिवार को दिल्ली मेंनीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिले बिना ही जयपुर लौट गईं। अटकलें हैं कि पाटी ...
      एनडीटीवी खबर
      Sahara Samay
      दैनिक जागरण
      पंजाब केसरी
      Khabar Mantra
    3. आईबीएन-7 की नीति आयोग की बैठक के लिए कहानी चित्र

      नीति आयोग की बैठक में अखिलेश ने जताई बजट आवंटन पर ...

      नीति आयोग की बैठक में आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय बजट के आवंटन के खिलाफ खुलकर अपनी ... लेकिन साल 2015-16 में केंद्रीय बजट में राज्यों की राय जाने बिना एकाएक योजनाओं के पुनर्गठन का जो निर्णय लिया ...
    4. ललितगेट : वसुंधरा को 'अभयदान', नीति आयोग की बैठक ...

      प्रभात खबर-27/06/2015
      नयी दिल्ली : राजस्थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने के बाद जयपुर रवाना हो गईं हैं. पहले यह खबर आई थी कि वह आज पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिल सकतीं हैं जिसमें वह ललित मोदी मामले ...
    5. अमित शाह से मिले बिना लौटीं वसुंधरा

      आज तक-27/06/2015
      राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिले बगैर वापस चली गईं. गौरतलब है कि शनिवार को वो नीति आयोग की बैठक के लिए वो दिल्ली में मौजूद थीं. इस दौरान कयास लगाए जा रहे थे कि राजे ललित मोदी विवाद पर बीजेपी ...
    6. बेंगलुरु विधानसभा में नीति आयोग की उप-समिति की ...

      एनडीटीवी खबर-23/06/2015
      बैंगलुरू: खुले में शौच जैसी समस्या का 2019 तक भारत में पूरी तरह ख़त्म करने और देश भर में साफ़-सफाई का माहौल बनाने के लिए राष्ट्रीय नीति आयोग कीउप-समिति की बैठक बेंगलुरु के विधानसभा भवन में बुलाई गई है, जिसकी अध्यक्षता ...
    7. नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेने सीएम दिल्ली ...

      प्रभात खबर-26/06/2015
      रांची : नीति आयोग की बैठक 27 जून को होगी. मुख्यमंत्री रघुवर दास शुक्रवार की शाम बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली चले गये. वह शनिवार कोदिन के 10 बजे नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लेंगे. इसके बाद दिन के एक बजे दिल्ली से रांची ...
    8. किसी से मिले बिना जयपुर लौटी राजे

      प्रातःकाल-18 घंटे पहले
      श्रीमती राजे नीति आयोग की बैठक में भाग लेने के लिए शनिवार सुबह यहां आई थीं। ललित मोदी प्रकरण में नाम आने के बाद विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है । इस प्रकरण के सामने आने के बाद उनकी यह पहली दिल्ली यात्रा थी और ...
    9. नवभारत टाइम्स

      दिल्ली में वसुंधरा के काफिले में भिड़ी कारें, बस ...

      दैनिक भास्कर-27/06/2015
      नई दिल्ली/जयपुर. शनिवार सुबह मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जब दिल्ली पहुंची तो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि नीति आयोग की बैठक से ज्यादा उनका इंतजार मीडिया को होगा। इंतजार ऐसा कि मुख्यमंत्री के एयरपोर्ट से निकलते ही ...
    10. नीति आयोग उपसमूह की बैठक सपन्न

      Chhattisgarh Khabar-07/06/2015
      रायपुर | एजेंसी: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नीति आयोग के उप समूह की बैठक रविवार को संपन्न हुई. ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं को जोड़कर उनका कौशल उन्नयन जरूरी है. कौशल उन्नयन के लिए कृषि और सहयोगी क्षेत्रों को जोड़नेकी ...

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    बिहार के मधेपुरा से सांसद पप्पू यादव एक नए विवाद में फंस गए हैं। जहानाबाद में अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे पप्पू यादव ने नेताओं को जमकर गालियां दीं और उन्हें नाग बताया।


    यह 19 फ़रवरी 2013 की बात है। जे०एन०यू० के भारतीय भाषा केन्द्र में मण्टो की कहानियों को लेकर हिन्दी और उर्दू वालों में विवाद हो गया। हिन्दी वाले कहें, मण्टो हमारा लेखक है। उर्दू वाले कहें -- अजी मण्टो तो उर्दू में लिखता था, आपका कैसे हो गया? बस, तब से आज तक यह विवाद चला आ रहा है। देखिए, सब कितने गुस्से में हैं।

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  • 06/28/15--15:03: Nainital rainy season
  • Nainital rainy season

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  • 06/28/15--20:11: Re: Nainital rainy season
  • Excellent pix.
    S. Islam

    On Mon, Jun 29, 2015 at 3:33 AM, palash biswas <> wrote:

    Nainital rainy season

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    Rape fastest growing crime in India, says US report


    WASHINGTON: Rape is the fastest growing crime in India, but still remains under-reported, according to the a US report on human right violations released on Friday.


    According to official statistics, there were 33,707 cases of rape nationwide in 2013, the latest year for which data were available. This was an increase of 35.2 Per cent over 2012.


    Women in conflict areas, such as in India-held Jammu and Kashmir, the north-east, Jharkhand and Chhattisgarh, as well as vulnerable women, including Dalit or tribal women, were often victims of rape or threats of rape.


    National crime statistics indicated that, compared with other caste affiliations, rape was most often perpetrated against Dalit women.


    Although the law prohibits child abuse, it remained common in schools and institutional settings. The government failed to educate the public adequately against child abuse or to enforce the law.


    The Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) remained in effect in Nagaland, Manipur, Assam, and parts of Tripura. The AFSPA allows Indian security agencies to use deadly force to "maintain law and order" if the central government declares a state or union territory as a "disturbed area".


    Non-governmental agencies claim that due to immunity provisions of the AFSPA, the armed forces were not held responsible for the deaths of civilians in India-held Jammu and Kashmir.


    Insurgents in the north-eastern states and the Maoist belt also committed serious abuses and were responsible for numerous cases of murder, kidnapping, torture, rape, extortion, and the use of child soldiers, the report said.


    According to India's Internal Displacement Monitoring Centre, 540,000 persons were displaced by conflicts and instability in Kashmir, the north-eastern states and the Maoist belt.


    The most significant human rights problems in India were police and security force abuses, including extra-judicial killings, torture, and rape.


    Widespread corruption contributed to ineffective responses to crime, including those against women and members of scheduled castes or tribes. Societal violence based on gender, religious affiliation, and caste or tribe also continued, the US report said.

    Ms Vinaya Malati Hari

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    The Telegraph

    Land bill hearing score: one for, 33 against



    Basant Kumar Mohanty


    New Delhi, June 28: A joint parliamentary panel examining the Narendra Modi government's land acquisition bill has been flooded with objections to the proposed legislation from those who have deposed before it so far, sources have said.


    The Confederation of Indian Industry is the only one among 34 individuals and organisations to have supported the changes the bill seeks to make to the current law, passed in December 2013 under UPA rule, the sources added.


    "An overwhelming majority among the 502 email representations the committee has received too have opposed the bill," a source said.

    The 30-member panel, drawn from both Houses and headed by BJP member S.S. Ahluwalia, will hold a last round of public interactions on June 29 and 30. It has to hand its report in before the monsoon session starts on July 21.


    In the previous session, the government failed to get the bill through the Rajya Sabha, where it lacks the numbers, in the face of a largely united Opposition that has dubbed the bill "anti-farmer". It had, therefore, to reissue it in ordinance form.


    Most of the objections the panel has received relate to the provisions that make the social impact assessment (SIA) and landowners' consent optional for certain kinds of projects and dilute the five-year deadline after which any unused land must be returned. (See chart)


    Sources said Ram Singh, a Delhi School of Economics professor, was one of those who had deposed before the committee.


    Contacted by The Telegraph, Singh refrained from going into the specifics of the position he had taken before the committee but explained his general concerns about the bill.


    He said that dropping the SIA and the five-year deadline to begin land utilisation could lead to excess acquisition.

    An SIA surveys the families living in and around the project area and identifies those that would be affected by the project and to what extent. An SIA is mandatory for all land acquisitions under the current law.


    "One key objective of the SIA is to ascertain whether a project indeed serves the public interest. There's no other way to find that out," Singh said.


    The dilution of the provision for land-losers' consent has been tagged "undemocratic" by the All India Democratic Women's Association (AIDWA), the women's wing of the CPM.


    "It removes people's right to have a say in land acquisition. The SIA and consent (requirements) should apply to all projects," said Archana Prasad, a JNU professor who was part of the AIDWA delegation that met the panel.

    Singh said the government should not acquire land for public-private-partnership (PPP) or private projects. In a research paper, he has cited instances of direct land purchase by industry, such as the Kakinada Special Economic Zone in Andhra Pradesh buying over 4,000 acres directly from farmers.


    Singh said multi-national companies produce different parts of a product in different countries and assemble them later but Indian companies tend to do everything at one place and therefore need more land.


    P.S. Krishnan, a former secretary in the erstwhile welfare ministry and an expert on issues of social justice, has written to the panel saying acquisition of tribal land in scheduled areas should be avoided.


    He suggested extending the same provision to the Dalits as well as tribals living outside the scheduled areas -that is, areas dominated by tribals in central, eastern and northeastern India.


    .Arun Khote
    On behalf of
    Dalits Media Watch Team
    (An initiative of "Peoples Media Advocacy & Resource Centre-PMARC")

    Pl visit on FACEBOOK : 
    Peoples Media Advocacy & Resource Centre- PMARC has been initiated with the support from group of senior journalists, social activists, academics and  intellectuals from Dalit and civil society to advocate and facilitate Dalits issues in the mainstream media. To create proper & adequate space with the Dalit perspective in the mainstream media national/ International on Dalit issues is primary objective of the PMARC.

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  • 06/29/15--01:38: The Politics of Yoga
  • The Politics of Yoga

    28 Jun 2015 logo 0 commentsShare |      
    The much-hyped International Yoga Day (IYD) passed but not with the ease as well as response its proponents had expected from all quarters. The filing of a case against Prime Minister Narendra Modi, BJP president Amit Shah and RSS supremo Mohan Bhagwat in a court in Patna just a day before the "event" for giving a "religious colour" to yoga and thereby hurting people's sentiments, Goa Education Department's withdrawal of its controversial circular asking all schools in the State to send their students for a yoga drill, Nagaland, Mizoram and other church leaders' call to Christians not to observe IYD, Muslim groups' fatwa calling it "un-Islamic", and above all the row over BJP general secretary Ram Madhav questioning Vice-President Hamid Ansari's "absence" at the Yoga Day celebrations in the Capital have all gone to sour the controversial event.
    The IYD observance has cost our public exchequer millions of rupees. Reports confirm that the Tourism Ministry has spent about Rs 10 crore on marketing the event in India and around the world. The marketing exercise included publicity on TV, radio, hoardings and billboards, brochures, besides in print media, etc. Besides, the Ministry of AYUSH, which is spearheading the project, allotted Rs 5.5 crore to the Information and Broadcasting Ministry for publicity. In a country where, to mention only a few challenges, 14 crore poor people are fighting hunger, where potable water is scarce in thousands of villages, where poor, landless farmers are committing suicides on being unable to pay debt, where millions of children belonging to downtrodden families drop out or remain totally unlettered, and where poor labourers and villagers have still to defecate in the open, this misuse of public money on a controversial exercise is nothing short of sheer wastage.
    As we said last week, yoga coupled with surya namaskar is a typical ritual of Hindu religion and culture and this should not be imposed on the minorities of our plural nation as it is 'detrimental to the respective beliefs of the minorities as well as to the secular ethos of the nation'. It is a good sign that Muslims and Christians have to a large extent kept from participating in this political exercise. As for those who proved gullible enough to participate therein, they should know for certain that there is no use of appeasing the powers-that-be as the Master and Sustainer of the world is Allah and He will make us accountable for our deeds done here in the Day of Judgement. They should stick to their beliefs and practices.


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    It appears to be a badly made up case of police.Higher
     authorities should intervene.
    খুলনায় ইফতার মাহফিল থেকে গৃহবধূসহ ২৪ নারী গ্রেফতার
    # স্টটে বোমা পাওয়ার কথা বলা হয়নি
    # থানায় নিয়ে বোমা পাওয়ার কথা প্রচার(news from Sangram)
    Posted by: Shah Abdul Hannan <>

    খুলনা অফিস ঃ খুলনায় ইফতার মাহফিল থেকে গৃহবধূ ও শিক্ষার্থীসহ ২৪ জনকে গ্রেফতার করা হয়েছে। রোববার দুপুরে কয়রা উপজেলা সদরের গোবরা গ্রামের মাওলানা আব্দুর হাই এর বাড়ি থেকে তাদেরকে গ্রেফতার করা হয়। পরে পুলিশ তাদেরকে থানায় নিয়ে ৩টি হাত বোমা ও বোমা তৈরির সরঞ্জাম দিয়ে মিডিয়াকর্মীদের ডেকে নিয়ে প্রচার করেছে। তবে প্রত্যক্ষদর্শীরা জানায়, পুলিশ যখন তাদেরকে ধরে নিয়ে গেছে তখন কোন বোমা-টোমা ছিল না। ইফতারির জন্য তৈরি সামগ্রী পুলিশ নিয়ে গেছে। এ সময় মহিলাদের সাথে থাকা শিশু-কিশোরদের কান্না ও চিৎকার শোনা গেলেও পুলিশের ভয়ে কেউ এগিয়ে আসতে সাহস পায়নি। পুলিশ যখন বাচ্চাদের কাছ থেকে তাদের মাকে টেনে হেঁচড়ে নিয়ে যায় তখন তাদের কান্নায় এলাকার পরিবেশ ভারী হয়ে উঠলেও পুলিশের মারমুখী আচরণে কোন পরিবর্তন দেখা যায়নি। 
    গ্রেফতারকৃতরা হলেন-ফাতেমা বেগম (৪৫), তানজিলা (১৭), সাকিলা (২৩), আছিয়া (৪০), আসমা বানু (৪৫), শাহিনা পারভীন (২৫), মমতাজ পারভীন (৩০), হালিমা পারভীন (৪০), আসুরা বেগম (৪৫), মরিয়ম বেগম (৫৪), তহুরা খাতুন (২১), জহুরা খাতুন (৫৫), তাসলিমা বেগম (৪০), তাসলিমা বেগম (২৫), মোমেনা খাতুন (২৪), কোহিনুর বেগম (২৪), খালেদা বেগম (৪৯), আনোয়ারা বেগম-১ (৫০), আনোয়ারা বেগম-২ (৩০), নাজমা বেগম (২২), ইসমত আরা (১৯), ফরিদা বেগম (৫৪),  লাইলী বেগম ৪৭) ও জাকিয়া বেগম (৪৭)।
     গোবরা গ্রামের বাসিন্দা মকবুল হোসেন, জাহাঙ্গীর ও বাচ্চু জানায়, বাচ্চাদের সামনে থেকে মাকে যেভাবে টেনে হেঁচড়ে পুলিশ নিয়ে গেছে তা ভাষায় বর্ণনা করা যায় না। মনে হচ্ছে, পুলিশ প্রতিযোগিতায় নেমেছে কে কত গ্রেফতার করতে পারে। আর ঈদ-পূজা আসলে এ ধরনের গ্রেফতার বাণিজ্য বেড়ে যায়। মহিলাদের উপর এ ধরনের বর্বরতা আর কখনো দেখিনি। 
    কয়রা থানার ভারপ্রাপ্ত কর্মকর্তা হরেন্দ্রনাথ সরকার জানান, জামায়াতের নারীকর্মীরা ওই বাড়িতে গোপনে  বৈঠকে বসেছে এমন সংবাদের ভিত্তিতে বাড়িটি ঘেরাও করে ২৮ জনকে আটক করা হয়। ২৮ জনের মধ্যে ৪ জনের বয়স কম হওয়ায় তাদেরকে ছেড়ে দেয়া হয়। ওসি জানান, ঘটনাস্থল থেকে ৩টি বোমা ও বোমা তৈরির সরঞ্জাম উদ্ধার করা হয়েছে। এ ঘটনায় বিস্ফোরক আইনে মামলা দায়ের করা হয়েছে। এ মামলায় আটককৃত ২৪ জনকে বিস্ফোরক মামলায় গ্রেফতার দেখানো হয়েছে। 
    কয়রা উপজেলা চেয়ারম্যান আ খ ম তমিজ উদ্দিন বলেন,  পবিত্র রমযান মাসে গ্রামের মহিলারা একত্রিত হয়ে ইফতার মাহফিলের আয়োজন করে। গৃহস্থালির কাজের কারণে দুপুরের মধ্যেই তারা ইফতার মাহফিলের কার্যক্রম শেষ করে। আলোচনা চলাকালে বাড়িটি পুলিশ ঘিরে ফেলে বাড়ি থেকে গৃহবধূ, স্কুল, কলেজ ও মাদরাসা পড়ুয়া শিক্ষার্থীদের আটক করে। পরে তাদেরকে থানায় নিয়ে শুনেছি বোমা ও বোমা তৈরীর সরঞ্জাম দিয়ে মামলা সাজিয়েছে। তিনি রোযাদার মহিলা ও শিক্ষার্থীদের উপর পুলিশের এ ন্যক্কারজনক ঘটনার তীব্র  নিন্দা ও প্রতিবাদ জানিয়েছেন। 
    ইফতার মাহফিল থেকে গৃহবধূ ও শিক্ষার্থীসহ ২৪ জনকে গ্রেফতার করায় তাদের নিঃশর্ত মুক্তির দাবি ও সাজানো ঘটনার তীব্র নিন্দা ও প্রতিবাদ জানিয়েছেন বাংলাদেশ জামায়াতে ইসলামীর কেন্দ্রীয় কর্মপরিষদ সদস্য ও খুলনা মহানগরী আমীর মাওলানা আবুল কালাম আজাদ ও সেক্রেটারি অধ্যাপক মাহফুজুর রহমান, খুলনা উত্তর জেলা আমীর মাওলানা ইমরান হোসেন, খুলনা দক্ষিণ জেলা সেক্রেটারি এডভোকেট মোস্তাফিজুর রহমান, কয়রা উপজেলা আমীর অধ্যাপক সোহরাব হোসেন ও সেক্রেটারি মাওলানা মিজানুর রহমান। 
    বিবৃতিতে নেতৃবৃন্দ বলেন, পুলিশের এই ন্যক্কারজনক ঘটনায় প্রমাণ হয় ধর্মপ্রাণ কোন নারী-পুরুষ এ সরকারের কাছে নিরাপদ না। নিজ ঘরে বসে যখন মহিলারা কুরআন-হাদিসের কথা বলে তখনও তাদের উপর নির্যাতন চালাবার মধ্য দিয়ে আরেকবার প্রমাণিত হলো আওয়ামী ফ্যাসিবাদী এই সরকার ও তার লালিত পুলিশ বাহিনী ইসলামের বিপক্ষে অবস্থান নিয়েছে। নেতৃবৃন্দ অবিলম্বে রোজাদার মহিলাদের মুক্তি দিয়ে তার শিশু সন্তানদের কাছে ফেরত দেয়ার দাবি জানান।

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