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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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    (हस्तक्षेप.कॉम) आपातकाल कब खत्म हुआ जी? अपराधी फासिस्ट नस्ली सत्ता का नरसंहार कब थमा है जी?

    Current Feed Content

    • OPEN LETTER TO PM NARENDRA MODI-NOT TO SIGN TRANS-PACIFIC PARTNERSHIP

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 17:38:32 +0000
      OPEN LETTER TO PM NARENDRA MODI – NOT TO SIGN TRANS-PACIFIC PARTNERSHIP  Jon Rappopport, An American Investigative Journalist who graduatedmagna cum laude from Harvard Law School, in his...

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    • आपातकाल कब खत्म हुआ जी? अपराधी फासिस्ट नस्ली सत्ता का नरसंहार कब थमा है जी?

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 17:15:13 +0000
      जर जोरू जमीन जल जंगल जमीन सब कुछ निशाने पर अपराधी फासिस्ट नस्ली सत्ता का नरसंहार कब थमा है जी? लालकृष्ण आडवाणी ने आशंका जताई है कि आपातकाल दोबारा भी लग सकता है। महामहिम जंगखोर लौहपुरुष रामरथी संघ...

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    • पेंच ही पेंच हैं, जगेन्द्र की हत्या को आत्महत्या साबित करने की सपा सरकार की पुलिस की कहानी में

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 16:06:55 +0000
      अजीत सिंह यादव, आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ ) की ओर से 16जून को जगेन्द्र की हत्या की पड़ताल के लिए खुटार गए थे। जगेन्द्र के परिजनों व अन्य लोगों से उन्होंने घटना की जानकारी ली थी। पूरे घटनाक्रम...

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    • देवादिदेव शिव के नाम पर बसे गांव का नाम अब स्नैपडील नगर है

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 15:47:35 +0000
      देवादिदेव शिव के नाम पर बसे गांव का नाम अब स्नैपडील नगर है। हिंदुत्व और मुक्त बाजार के इस रसायन पर गौर जरूर करें। यह कमाल उत्तर प्रदेश के दंगाग्रस्त जनपद में हो गया है और अभी तक शत-प्रतिशत हिंदुत्व...

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    • ग्रीनपीस इंडिया को सोसाइटी पंजीकरण निरस्त करने के संदर्भ में कारण बताओ नोटिस

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 14:24:48 +0000
      चेन्नई 19 जून 2015। ग्रीनपीस इंडिया को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जिसमें उसके संचालन और वित्तीय मामलों पर उठ रहे सवाल को लेकर उसके सोसाइटी पंजीकरण को निरस्त करने की धमकी दी गयी है। ग्रीनपीस...

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    • सरकारी आतंक के खिलाफ वो 121 दिन

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 14:08:11 +0000
      'मौलाना खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस और आई.बी. अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिए धरना'लिखा हुआ रिहाई मंच के काले रंग के बैनर, जिस पर दाढ़ी-टोपी वाले एक शख्स की फोटो लगी थी, को हर उस शख्स ने देखा...

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    • न स्वच्छ भारत, न स्वस्थ भारत

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 12:58:38 +0000
      देश की राजधानी दिल्ली ने पिछले दिनों एक बहुत ही करुण प्रकरण का हास्यास्पद अंत देखा। राजधानी के बड़े हिस्से में और वास्तव में अपेक्षाकृत संपन्न दक्षिणी दिल्ली को छोड़क़र, राजधानी के ज्यादातर इलाकों में...

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    • कॉरपोरेट घरानों से यारी छोड़े और बढ़ी बिजली कीमतें तत्काल वापस ले अखिलेश सरकार – आइपीएफ

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 12:20:24 +0000
      लखनऊ, 19 जून। सरकार के दबाब में उ0 प्र0 विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली की कीमतों में की गयी भारी वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) ने इसे महंगाई से पीड़ित प्रदेश की...

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    • WTO-GATS Quit India – India is not for Sale

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 11:57:17 +0000
      AIFRTE 4TH NATIONAL COUNCIL GIVES A NATIONAL CALL " WTO-GATS Quit India – India is not for Sale " The 4th National Council Meeting of the All India Forum for Right to Education (AIFRTE) was held...

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    • पत्रकार दोस्तों जगेन्द्र तो मर गए, क्या आप जिंदा हैं ?

      Posted:Fri, 19 Jun 2015 00:18:56 +0000
      पत्रकार दोस्तों, जगेन्द्र सिंह के जिंदा जलाकर मार दिए जाने के बाद उनका परिवार अब बिखर चुका है। बीबी-बच्चे सड़क पर आ गए हैं और अचानक जिंदगी की छोटी-मोटी जरूरतों तक के लिए भी वे दूसरों पर मोहताज हो गए...

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    • जगेन्द्र हत्याकांड – तो किसने मारा जगेन्द्र को

      Posted:Thu, 18 Jun 2015 23:49:12 +0000
      दुनिया भर में चर्चित शाहजहाँपुर में हुए पत्रकार जगेन्द्र हत्याकांड को हत्या और आत्म हत्या के बीच उलझाने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार पर हत्यारोपी मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा...

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    • यूपी में सुरक्षित नहीं महिलाएं – रिहाई मंच

      Posted:Thu, 18 Jun 2015 17:38:00 +0000
      यूपी में सुरक्षित नहीं महिलाएं यूपी में व्याप्त जंगल राज के खिलाफ 25 जून शाम 4 बजे गांधी प्रतिमा, जीपीओ हजरतगंज लखनऊ पर होगा धरना लखनऊ 18 जून 2015। रिहाई मंच ने कहा है कि गोरखपुर में सपा विधायक...

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    • EMERGENCY yet again? No one else but the junked RSS Iron Man confirmed it.

      Posted:Thu, 18 Jun 2015 16:58:25 +0000
      EMERGENCY yet again? No one else but the junked RSS Iron Man confirmed it. Not me, not my friends, but LK Advani, who once upon a time led the Ram Rath ytara and yet in another time he was projected...

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    • लालकृष्ण आडवाणी का पश्चाताप !

      Posted:Thu, 18 Jun 2015 14:36:57 +0000
      लालकृष्ण आडवाणी श्री लालकृष्ण आडवाणी का नाम इतिहास में देश को हिन्दू फासीवाद की और धकेलने के लिए याद किया जायेगा। उनकी सज्जनता सौम्यता एक कुटिल आवरण है जो आरएसएस के लोगों को बचपन से सिखाया जाता है कि...

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    • सूट बिकता है बोलो खरीदोेगे-'गुड इन्वेस्टमेंट''लालजी'को 54 करोड़ का फ़ायदा

      Posted:Thu, 18 Jun 2015 13:54:32 +0000
      'गुड इन्वेस्टमेंट'प्रधानमंत्रीजी का सूट 4.31 करोड रुपये में ख़रीदने वाले सूरत के हीरा व्यापारी लालजी पटेल की जमीन सूरत महानगर पालिका नें योजना में बदलाव कर स्पोर्ट्स कांपलेक्स के लिये...

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    • तब जबरदस्ती भू अधिग्रहण के लिए तोप चलाई जाएगी!!!

      Posted:Thu, 18 Jun 2015 12:14:37 +0000
           नई दिल्ली। भू अधिग्रहण बिल पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के समक्ष ''भूमि अधिकार आंदोलन''के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नेअपनी आपत्तियों को दर्ज कराया। बीती 16 जून 2015 को   आपतच्तियां दर्ज कराने...

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    हिंदू राष्ट्र का शंखनाद।भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए योग, शाखा और साधना अहम त्रिकोण,संघ परिवार का खुलासा।
    पलाश विश्वास

    योग दिवस मनाने का आशय हिंदू राष्ट्र का निर्माण है,ऐसा हम बार बार कह रहे हैं।लोगों को लग सकता है कि विशुद्ध योग को हम लोग खामखां हिंदुत्व से जोड़ रहे हैं।आडवाणी जी अपने इमरजेंसी वाले बयान से बदल गये हैं और संघ परिवार का राजपथ पर राजयोग 


    राजसूय का मतलब फिर वही भारतीयसेनाओं,सुरक्षा बलों का हिदूकरण और राष्ट्र का हिंदू सैन्य राष्य्र बनाने का कार्यक्रम है।आपातकाल का मतलब आप पिछले पचास साल से जारी संसदीय सहमति के जनसंहारी राजकाज से समझें हो या नहीं, योग दिवस के वैश्विक आयोजन से ग्लोबल हिंदू साम्राज्यवाद का एजंडा खुलकर सामने आ गया है।
    योगदिवस की पूर्व संध्या पर फैशन कन्या पूनम पांडेय का योग वीडियो वाइरल है और राजपथ पर ललित मोदी की मित्र शिल्पा सेट्टी जलवा बिखेरेंगी लेकिन इस चकाचौंध और सेनाओं की देशभक्ति के संग संग मुसलमानों को योग के लिए मजबूर करने के कतरब के मध्य मोदी दीदी मिलन आसन के माहौल में संघ परिवार ने हिंदू राष्ट्र का शंखनाद कर दिया है।

    नमो चुनाव क्षेत्र वाराणसी से भारत को महाबारत बना देने 

    की युद्धघोषणा हो गयी है।

    हिंदुत्व के मुद्दे पर संघ किसी तरह का समझौता नहीं करेगा। भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए योग, शाखा और साधना अहम त्रिकोण हैं। यह बयान वाराणसी के निवेदिता शिक्षा सदन मे चल रहे संघ के पुनश्चर्या शिविर में अनुशांगिक इकाइयों के पदाधिकारियों संग अलग-अलग बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत ने दिया है। इस बैठक में सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, शिव नारायण, रामचंद्र, इंद्रेश कुमार जैसे संघ के पदाधिकारी मौजूद थे। सूत्रों की मानें तो भागवत की मौजूदगी में राम मंदिर निर्माण से लेकर कश्मीर में धारा 370 की सामप्ति तथा घर वापसी जैसे मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा हुई।
    गौरतलब है कि अब तोगड़िया फिर से एक नेता के रूप में उभर रहे हैं और पूरे देश में घूमकर कट्टरहिंदुत्व का पाठ पढ़ा रहे हैं। ... संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बार बार दावा किया है  "भारत में रहने वाला हर कोई हिंदू है." 

    खबरों के मुताबिक भागवत की मौजूदगी में राम मंदिर निर्माण से लेकर कश्मीर में धारा 370 की सामप्ति तथा घर वापसी जैसे मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा हुई। बैठक में इस बात पर जोर रहा कि अब मंदिर निर्माण के लिए ज्यादा इंतजार करना ठीक नहीं है। एक बार फिर पहले की तरह देशव्यापी जन आंदोलन के जरिए माहौल बनाकर सरकार को इस बारे में फैसला लेने के लिए विवश किया जा सकता है। सरकार कानून या फिर बीच का रास्ता निकाल इस बारे में निर्णय ले। 

    21 को वाराणसी में योग करेंगे भागवत 

    भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए योग, शाखा और साधना को माध्यम बनाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत 21 जून को अर्न्तराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मोदी के बनारस में योग करते दिखेंगे। महमूरगंज स्थित निवेदिता शिक्षा सदन में पूर्ण गणवेशधारी संघ के वरिष्ठ व चुनिंदे स्वयंसेवकों की मौजूदगी में सुबह की शाखा के बाद योग का कार्यक्रम होगा। 

    बयान नहीं भाषण देते हैं 

    भागवत ने बनारस पहुंचने पर मंडुआडीह स्टेशन पर मौजूद मीडिया के सवालों के जवाब में इतना ही कहा कि 'बयान देने वाले दूसरे हैं, वह सिर्फ भाषण देते हैं'। इस बयान के अलग-अलग निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। किसी ने इसे आडवाणी प्रकरण से जोड़ा तो संघ के लोगों ने माना कि वह किसी राजनीतिक बयान से दूर विचारधारा और सिद्धांतों की बात स्वयंसेवकों के बीच रखते हैं।

    दूसरी तरफ,पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ संचालक मोहनराव भागवत के खिलाफ पटना में मुकदमा दर्ज करने के लिए अदालत में परिवाद पत्र दाखिल किया गया है। उनपर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से सरकारी धन का दुरुपयोग करने और दूसरे धर्मों के लोगों की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है। परिवाद पत्र पटना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकरी की अदालत में शनिवार को दायर किया गया है।

    फतुहा के बेला पंचायत के पूर्व मुखिया देव कुमार सिंह ने अदालत में आइपीसी की धारा 295 (ए) और 120 (बी) के तहत परिवाद पत्र दायर किया। याचिका पर अगली सुनवाई सोमवार (22 जून) को होगी। सिंह ने अदालत से अनुरोध किया है कि कदमकुआं थाने में आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।

    शिकायतकर्ता ने मोहन राव भागवत की ओर से केंद्र सरकार द्वारा 17 जून को जारी पुस्तिका पर आपत्ति जताई है। पुस्तिका में नमाज के आसनों को योग का आसन बताया गया है। इसके अलावा उन्होंने योग दिवस के आयोजन पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने और नमाज को योग से जोड़कर मुस्लिम धर्मावलंबियों को जबरन योग में शामिल कराने की हिंदुत्व का वर्चस्व कायम करने की साजिश बताया है।


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    CC News Letter 20 June - Racism In USA: Psychology And Perception Fail The System

    Dear Friend,

    If you think the content of this news letter is critical for the dignified living and survival of humanity and other species on earth, please forward it to your friends and spread the word. It's time for humanity to come together as one family! You can subscribe to our news letter here http://www.countercurrents.org/subscribe.htm. You can also follow us on twitter, http://twitter.com/countercurrents and on Facebook, http://www.facebook.com/countercurrents

    In Solidarity
    Binu Mathew
    Editor
    www.countercurrents.org


    Worldwide Displaced Population Reaches Record 59.5 Million In 2014
    By Evan Blake

    http://www.countercurrents.org/blake200615.htm

    Worldwide forcible displacement due to armed conflict or persecution is at its highest level in recorded history, according to a report released Thursday by the Office of the United Nations High Commissioner for Refugees (UNHCR). The annual Global Trends Report: World at War estimates that a record 59.5 million people were forcibly displaced by the end of 2014, with the largest recorded annual increase of 8.3 million and a staggering increase of 22 million from merely a decade ago


    Racism In USA:Psychology And Perception Fail The System
    By Dr. Vivek Kumar Srivastava

    http://www.countercurrents.org/srivastava200615.htm

    The worst fears are here to stay. In USA again on the racial grounds innocent people have been killed in African-American church by a very young white fellow. Nine people died on the scene at the Emanuel African Methodist Episcopal Church when young white men shot them dead. A 21 year old young white men Dylann Roof was arrested and presented before the magistrate on the charge of killing nine innocent black people. Dylann Roof also raised racially inflammatory statements during killing. This killing has brought out reality of racial structure in the US society


    Why Are Some Lebanese Sunni Muslims Becoming
    Sympathetic Toward Da'ish (ISIS)?
    By Franklin Lamb

    http://www.countercurrents.org/lamb200615.htm

    The extreme' ideology of Da'ish and its embrace of brutal violence have allowed it to quickly attract the attention of millions worldwide and is estimated to have resulted in thousands of recruits, many being from Lebanon. The group's ability to effectively leverage social media and disseminate its message -- with near instantaneous global repostings -- has enhanced its success. Governments around the world-including Lebanon have been ineffective in significantly curtaining its actions


    Weeding Roses In Kabul
    By Martha Hennessy

    http://www.countercurrents.org/hennessy200615.htm

    Of the estimated six million child laborers in Afghanistan, 60,000 work in Kabul, competing for meager wages. They sell bread and shine shoes on the streets to support their families so that they may eat. The June 2015 CIA World Fact Book reports that it is impossible to estimate the numbers of children out of school, however, in Afghanistan's teen and adult population, the literacy rate is 38.2%. Among females over age 14, only 24.2% can read and write. How can the street children achieve a better life if they remain illiterate?


    European/Russian Crisis Created By Washington
    By Paul Craig Roberts

    http://www.countercurrents.org/roberts200615.htm

    The hope is that Washington will cause its European vassals to rebel by pushing them too hard into conflict with Russia. The hope that European countries will be forced into an independent foreign policy also seems to be the basis of the Russian government's strategy. Perhaps intellectuals can help to bring this hope to fruition. If European politicians were to break from Washington's hegemony and instead represent European interests, Washington would be deprived of cover for its war crimes. Washington's aggressions would be constrained by an independent European foreign policy. The breakdown of the neoconservative unipower model would be apparent even to Washington, and the world would become a safer and better place


    International Yoga Day: Yoga Must Reach To Gandhi's 'Last Person'
    By Ravi Nitesh

    http://www.countercurrents.org/nitesh200615.htm

    There is an ongoing debate over Yoga. Unfortunately this debate is not concerned with objective of yoga, rather only on its socio-political aspect that took religious turn by questioning if all religions should do yoga


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    (हस्तक्षेप.कॉम) भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए योग, शाखा और साधना अहम त्रिकोण, संघ परिवार का खुलासा

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    Sushanta Kar
    June 20 at 11:55am
     
    এটা সর্বজনবিদিত যে, শিক্ষাপ্রতিষ্ঠানে যথাযথ শিক্ষা প্রদান করা হলে, গৃহশিক্ষকের প্রয়োজনীয়তা থাকার কথা নয়। তথাপি প্রাইভেট টিউশন ছাড়া আজকাল চলেই না। এই প্রাইভেট টিউশনির সুফল আর কুফল নিয়ে অনেক দিন থেকেই আমাদের রাজ্য সহ দেশের জনগণ বিশেষত পড়ুয়াদের মা-বাবারা চর্চা করেই যাচ্ছে। এই সমস্যা রাজ্যের হাইকোর্ট অব্দি গড়িয়েছে। এই সমস্যা কিন্তু আমাদের দেশেই সীমাবদ্ধ নয়। দেশের বাইরেও এর চর্চা আছে। আমেরিকা অস্ট্রেলিয়ায় প্রাইভেট টিউশনির সংস্কৃতি কখনোই ছিল না, কিন্তু এখন প্রায় সব দেশেই তার চল হয়েছে। তবে গৃহশিক্ষকতা নিয়ে প্রতিবেশী বাংলাদেশ সম্প্রতি সর্বপ্রকার প্রাইভেট টিউশনি, এমনকি কোচিং সেন্টার বন্ধেও কঠোর আইন কার্যকর করেছে। কিন্তু আমাদের রাজ্যে সমস্যাটা দেখা দিয়েছে সরকারি ও সরকার নিয়ন্ত্রিত বিদ্যালয়ের শিক্ষকদের নিয়ে। আইন আমাদের দেশেও আছে। কিন্তু তা কতটুকু বাস্তবায়ন হয় তা সকলেই দেখছে। যার ফলে আমাদের দেশে জনগণ আইনের প্রতি সম্মান দেখাতে দ্বিধাগ্রস্ত।...সুদীপ নাথের (Sudip Nath FreeLancer) প্রবন্ধ ...বাকিটা পড়ুন...
    ঈশানের পুঞ্জমেঘ: প্রাইভেট টিউশনি ও শিক্ষা অধিকার আইন
    ishanerpunjomegh.blogspot.com

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    Fact finding report on Shirdi caste atrocity


    A FACT-FINDING REPORT OF THE CASTEIST KILLING OF A DALIT YOUTH IN SHIRDI ON 16TH MAY, 2015

    This is a report of the nine-member fact finding team constituted under the banner of Jatiya Atyachar Virodhi Kruti Samiti (JAVKS) to inquire into the brutal murder of a Dalit youth, Sagar Subash Shejwal, in Shirdi (Ahmednagar district) on 16th May, 2015. The team went to Shirdi on 21st May, 2015. Its members were Rahul Gaikwad (JAVKS), Kishore Kamble (Ambedkar Centre for Justice and Peace), Sudhir Dhawale (JAVKS), Harshali Potdar (Republican Panthers), Suvarna Salve (Republican Panthers), Babita Kesharwani (Advocate), Kritika Agarwal (Tata Institute of Social Sciences), Sushmita Verma (Committee for Protection of Democratic Rights) and Paankhi Agrawal (Committee for Protection of Democratic Rights). The team was assisted by local journalists – Nitin Shelke and Raj Dunbade. It met the family of the victim, the family's advocate, a few local activists and the DySP of Shirdi police station.

    Background of caste atrocities in Ahmednagar District

    Ahmednagar district is on the border of Marathwada and much of Marathwada's socio-political situation, especially regarding severe caste oppression has its influence over this region. The list of atrocities against scheduled caste and scheduled tribes in this district is long: In village Limpangaon (Dhangarwadi), taluka Srigonda 16 houses and 20-25 shanties of Scheduled Castes, Scheduled tribes, Nomadic tribes and members of religious minorities were burnt. In the same taluka, village Dhawalgaon, Janabai Borge, a woman belonging to Matang community was burnt alive. In April 2014, the upper castes of Chibhalegaon, taluka Srigonda banned and refused to cremate a Dalit woman. Srigonda happens to be a hometown of an earlier State tribal minister, Babanrao Pachapute. In the same district a Dalit youth called Dipak Kamble from Bhabhulgao, taluka Karjat was severely beaten. Suman Kale a woman belonging to the Nomadic tribe too was brutally raped and killed. Walekar, a Dalit Youth of Paithan, Shegaon taluka was killed by cutting him into pieces. In 2008, Baban Misal, a matang youth of Jamkhed taluka was similarly killed.

    A year back, on 1st January 2013three young men of Sonai village, taluka Nevasa, Ahmednagar, Sandip Raju Dhanwar, Sachin Somlala Dharu and Tilak aliase Rahul Raju Kandare, from the Mehtar community were drowned to death in a septic tank, by a mob of upper caste men. One of those killed was in love with the daughter of an upper caste farmer, who was among those accused. This matter was suppressed by the authorities for almost a month. Sonai Village is the hometown of Ex-M.P. and senior leader Yashawantrao Gadakh Patil.

    On 28th April, 2014, a 17 year old Dalit youth was brutally murdered in Kharda village, Jamkhed tehsil, by three Maratha youth for speaking to a girl from the Maratha community.

    On 20th October, 2014, three members of Jadhav family in Javkheda village, Pathardi taluka, were brutally murdered by upper caste community of the same village. Instead of treating the matter as a caste atrocity under which the upper caste assailants should have been arrested, the police arrested the victim's relatives.

    In 2014, 110 cases of caste atrocities have been registered in police stations across Ahmednagar. Since most cases go unregistered the actual count of atrocities is much more.

    Despite the spate of brutal atrocities over scheduled castes in Ahmednagar, the administration is refusing to give serious attention to the matter.

    The Shirdi Incident

    Sagar Shejwal, a 21 year old boy from a Hindu Mahar family, was a final year student of nursing. He was studying in Nashik and had come to visit his home in Shirdi for the marriage of his cousin. In the afternoon of 16th May around 12 pm, Sagar along with two of his friends went to BM beer shoppe. Around 1 pm, when they were seated just behind the bar, Sagar's phone rang. The ringtone was a popular Marathi song praising Ambedkar- Tumhi kitihi lava Shakti/ Tumhi kitihi ladva yukti/ Tumhi kara re kitihi halla / Mazbut Bhimacha quilla ( Use as much force as you can/ Scheme as much as you want/Shout all you want/ Bhim's fortress is strong). An accused, Vishal Kote and Rupesh Wadekar who were seated near Sagar with six other men shouted at Sagar and told him to stop the ringtone. After some time, Sagar called out to Anil, an acquaintance of his who was seated with Vishal's group. Hearing this, Rupesh shouted, "Aye bhenchud band kar!" (Stop it, sisterfucker!). Then Vishal and Rupesh came to Sagar and asked him his full name. Then they started kicking and thrashing him.

    Sagar's acquaintance, Anil, who was with Vishal told the assailants that he knew Sagar personally. But this did not pacify them. In the commotion that followed, one of Sagar's friend, Avinash Pachore who is 16 years old, ran away to his home out of fear and to inform the family. The accused also punched and kicked Satish Vasant Gaikwad, Sagar's friend, in his stomach and hit him with a bottle on his back and neck.   The beating and shouting continued behind the bar for around 15minutes. Thereafter, they dragged Sagar in front of the bar and slapped and beat him there for another 5 minutes. When Satish tried to save Sagar, he was held back by three men. The assault which took place in front of the bar has been captured by a CCTV camera which shows eight assailants. Then, Vishal and Rupesh forced Sagar to get on their motorbike and the other men rode on two other motorbikes. The assailants went off on the highway.  Satish ran toward Sagar's home to inform about the attack.

    This entire incident at the bar lasted for around 20-25 minutes. At the start of the thrashing, the hotel manager called up the hotel owner who was in Aurangabad and the owner called up Shirdi police station and asked the Police Inspector in charge, Pramod Wagh to send over help at the beer bar.  But Pramod Wagh refused to give any help and said that he did not have time, that he was going for lunch. (The distance between the bar and the police station is 1- 2 minutes by vehicle and 3-5 minutes by foot).  After Sagar's relatives were informed of the violent fight, they went to the police station asking for police help. Pramod Wagh again refused to help and said that he did not have time and asked them to sort out things by themselves. He demanded an AC car from them to search for Sagar. He rudely asked them to get out of his room. Even after Sagar was kidnapped, the police did not act immediately. An FIR was registered at around 5.45 pm and the accused were charged under sections 363, 366, 143, 147, 148, 149.

    Meanwhile, the relatives had started searching the area for Sagar. At around 6pm, they found his dead body near Shingwe village (shivar) on government land, which is some 6-7 kms away from the beer bar. The body was found by the relatives and two constables from Shirdi police station accompanying them after inquiring from one of the accused, Somanth Wadekar. Sagar had been stripped naked except socks and there were marks of motorcycle tires being run over him all over his body and also marks of being crushed by heavy stones. A gold chain that he used to wear was also missing. The relatives informed the police about the location of the body. The police reached there to conduct a panchnama at around 6.30 pm. The body was taken to a nearby Gramin hospital where Sagar was officially declared dead.

    After that, when Sagar's relatives, friends and the public came to know of the murder, several of them came to Shirdi police station. Around 3000 men and women gheraoed the police station and demanded that the police arrest the accused immediately. They spoke against the apathy with which the police had dealt with the issue that the police had failed to take action to stop the attack on Sagar in the beer bar, his kidnapping and the eventual murder even after constant complaints. In course of the public outcry, there was stone pelting at a Gujrat state transport bus. The scooti of Somnath Wadekar was set on fire. Shirdi was declared shut on 16th night and 17th of May. The body was sent for post-mortem investigation. The body was handed over to family at 1pm on 17th may. On 17th, around 10,000 to 11,000 people collected outside the police station. The relatives refused to claim the body until the accused were arrested and immediate action was taken against them.

    According to Satish Gaikwad's medical report (of rural hospital, Rahata), he has suffered physical trauma on back of head, one eye, neck, chest, arms, thighs, abdomen, nose, ankle and arms. According the Adv. Anil Shejwal, Sagar's PM report shows that he died due to internal injuries and blood clotting.

    Somnath Dattuba Wadekar, (43 years old, a gym instructor) – was arrested by the police on 16th after a tipoff by Sagar's relatives. He was sleeping in his house at that time. The other two accused, Vishal Ashok Kote  and Rupesh Ashok Waddekar were found in Goa and Sunil Kisan Jadhav was arrested in Solapur. They have been booked under Sections 302 (murder), 363 (kidnapping), 366, 395 (dacoity), 201(causing disappearance of evidence of offence), 143 (unlawful assembly), 147 (rioting), 149 (offenses committed by unlawful assembly in pursuance of common object) of the Indian Penal Code and Sections 3 (2) (v) and 3 (1) (x) of the Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act. The case was filed in Rahata taluka court, Ahmednagar district.

    Vishal and Rupesh are history-sheeters. Vishal has charges of robbery, kidnapping and rape charges against him. On searching Rupesh's shop two pistols were found, one on 17th of May and the other on 21stof May.

    Vishal Kote is a Maratha, a dominant caste group of Maharashtra. Somnath and Rupesh Wadekar are from the Rairand (Baharupi) community (scheduled as nomadic tribe in Maharashtra). Sunil Jadhav and Rama Shivaji Jadhav belongs to Waddar community, a denotified tribe. Other accused are Deepak and Shoaib Sheikh. The name of one of the accused could not be confirmed.

    Issues that have emerged from the fact-finding

    Police Apathy

    This case makes visible the apathy and caste bias rooted in the police system.

    It was possible for Pramod Wagh to send a constable or two among those who were on duty at the time of the incident to the beer bar to sort things out. But he did not do so and only gave absurd excuses to the family as they tried time and again to ask for his help.

    The locals have also informed the fact finding team that the accused Vishal Kote and police inspector Pramod Wagh were well acquainted and on good terms with each other (it has been alleged that a photograph at Vishal Kote's home shows the two of them eating a meal together).

    On the night of 16th May when there was a public outcry over the murder, the police provided protection to the family of the accused. On the other hand, the family of the victim which faces the threat of violent retaliation for having filed the police complaint have not been given any police protection.

    In both the FIR registered on 16th and the remand report drafted on 17th,  the lyrics of the ringtone which was at the centre of the atrocity were not even mentioned. This conveys an attempt to make Sagar's murder sound like any other murder and not recognize its casteist dimensions. It was under public pressure on the night of 16th and on 17th that the police added the sections under Atrocities Act to the FIR.

    Sagar's family has demanded that Pramod Wagh not only be suspended but also be registered as a co-accused in the murder case.

    Caste Dynamics

    Shirdi (Rahata Taluka, Ahmendnagar district) is a small town with a population of around 36,000 but with a large floating population since it is a well-known pilgrimage centre. At the time of 2009 general elections, there were around 13 lakh voters in the Shirdi constituency, out of which around 40 percent were Marathas, 30 percent were Dalits and Muslims combined and rest were mainly from OBC communities such as Waddars.  In these elections, the Shirdi Lok Sabha seat was reserved for SC candidates. This was not acceptable to the dominant castes in the town. Since then caste polarization appears to have intensified in Shirdi.  This has been accompanied by a rising trend of caste violence in the region.

    The principal accused, Vishal Kote, belongs to the Maratha caste which has political and economic dominance in the region.  Kote is the dominant caste group in Shirdi, owning a large proportion of property in Shirdi and dominating its local political institutions.

    It also needs to be noted that the police inspector Pramod Wagh who refused to take action which could have prevented Sagar's murder is also from the Maratha community and has cordial relations with Vishal Kote.

    The case is not simply a matter of a drunken fight which went out of hand under the influence of alcohol. It was a systematically conducted assault and murder on account of the caste of the victim. Vishal and the co-accused got angry over the ringtone that praised Ambedkar's fight for dalits. When they came over to Sagar's table, Vishal asked him his name before starting to thrash him. Therefore it appears that Sagar's caste identity which could easily have been made out from his surname was enough for them to continue with the assault.

    The beating did not stop at the bar. The assailants kidnapped Sagar and made a journey of 7 kms at the outskirts of Shirdi to isolated fields where Sagar was brutally assaulted. His clothes had been ripped off indicating attempts to humiliate him. The humiliation and the brutal assault which led to Sagar's death falls within the pattern of atrocities on dalits who have been murdered by dominant castes, where the attackers do not simply wish to kill the person but inscribe physical marks of their dominant status on the body of the victims in form of injuries and mutilations.

    The case should also not be taken as an isolated incident which can be explained in terms of the sadistic psyche of Vishal and Rupesh who are history-sheeters. The active connivance of six other youth in bringing about this tragedy shows that the group was motivated by a mentality that perceives Dalits as sub-human beings.

    Sagar represented a generation of dalit youth who are getting well-educated and moving up the social ladder. Sagar was to complete nursing studies in two months time and his younger brother has appeared for 12th standard state board exams. Sagar's choice of ringtone depicts his pride in the Ambedkarite struggle. The hindu Mahar and neo-buddhist communities in the town also have a strong anti-caste consciousness and tend to live together in socially well –knit neighbourhoods. Sagar's home is in Bhim Nagar colony near the Shirdi market area where lanes and houses are marked by blue flags and the pictures of Buddha, Ambedkar and Sai baba.

    Political Patronage

    The team could not confirm if the accused are affiliated to any political party or had any political patrons. More inquiry needs to be made into the connections that the accused have with political bosses which can perhaps serve to explain why the eight youth could assault and kill with a sense of impunity. Rupesh is said to be affiliated with NCP and Shiv Sena.

    On 19th May, a news programme about the Shirdi murder was to be telecast live by a Marathi news channel whose team had come to
    Shirdi to cover the atrocity. At the very time of the telecast, the cable connection across Shirdi was disconnected. This attempt to suppress public anger over the incident by withholding information from people shows that the goons in Shirdi have connections with powerful politicians and mafia.

    Victim's family

    Sagar is survived by his parents, an elder sister, Ashwini Shinde, who is married and a younger brother, Akash Shejval. Needless to say, the family is traumatized by the incident. Sagar's father who works in the Sai Sansthan trust repeatedly told us that he could not comprehend how a ringtone could have escalated into a cold blooded murder of his son. The family and relatives hold the police responsible for their failure to take timely action to prevent the atrocity. They want strictest punishment for the guilty police officers. While the family is supported by neighbours and relatives in its hour of crisis, it lives in constant threat of being attacked for filing the complaint and pursuing the matter actively.

    The advocate who is representing the family is Anil Shejwal who is Sagar's uncle.

    Demands made to DySP by Fact finding team

    • The fact finding team met DySP Y. D. Patil at Shirdi police station on 21st May. He had admitted to the team that the entire incident could have been avoided if the police inspector on duty (Pramod Wagh) had taken timely action and sent constables to the bar to stop the fight. This statement has been recorded by the team. He also informed us that the police had seized the motorbikes of the accused and Sagar's clothes as evidence. The fact-finding team gave in written its following demands to DySP. He promised the team that he would forward the letter to superintendent of police of the district. The letter contained the following demands:
    • To book PI Pramod Wagh as co-accused and charge him under the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989.
    • Confiscate and sealing the property of the accused who are absconding.
    • The words in the ringtone should be mentioned in the FIR.
    • The police protection given to the family of the accused should be removed and provided to the family of the victim.

    Observations of the Fact Finding Team

    Sagar's murder is not simply a case of murder, but is a caste atrocity. It once again brings to light the complicity of police in violence against scheduled caste community members. The failure of the Shirdi police to take timely action which could have prevented the tragedy is not simply a lapse in duty but is a manifestation of the caste and class biases by which the police function. It is not by accident that the police failed to intervene in the assault and murder of Sagar who was from a dalit caste and an economically less privileged family. Why did the police provide protection to the accused's family and not to the victim's family? Why was strict action not taken against PI Pramod Wagh by higher-up police officials despite understanding fully well that he did not carry out his duty of maintaining law and order?

    Simply suspending police officers for doing nothing to prevent caste atrocities is not sufficient. In this case, it is likely that Pramod Wagh had been informed by the hotel owner at the time when the attack was going on at his shop that Vishal Kote was one of the attackers. After all, Shirdi is a small town where historysheeters like Vishal and Rupesh are notorious. It is also very much possible that since Pramod Wagh shares cordial relations with Vishal Kote and since both are from the Maratha community, he deliberately did not take any action to confront Vishal and stop the fight. Thus, Pramod Wagh and scores of police officers like him are not acting under any "good faith" but are accomplices to murder and actively participate in perpetuation of atrocities against scheduled castes and tribes.  They should be tried under the Atrocities Act.

    The friendly relations between Pramod Wagh and a historysheeter like Vishal, and the disconnecting of cable connection in what appears to be a pre-planned move to blackout the news programme on the Shirdi murder points towards a nexus between police, politicians and local goons. The goons are needed by them for maintaining their dominance by generating fear among their opponents and forcibly extracting goods and services from public for their benefit. The goons receive political patronage and police protection. As a result, they become more fearless in spreading terror and troubling the local population. The nexus is stronger in Shirdi, given the town's wealth on account of being a famous pilgrimage place.

    Violence against upwardly mobile and assertive dalits is employed by casteist forces as a way of putting the scheduled castes "in their place." Events around Sagar's murder started because the accused were angered by a ringtone which praises the strength of the ambedkarite struggle. In Maharashtra, April and May are months of celebration across villages and towns to commemorate the birth anniversaries of Jyotiba Phule, Dr. Ambedkar, Shivaji Maharaj and Gautam Buddha. Large scale functions and rallies are organized by scheduled caste communities to convey their pride over their achievements and commitment to fighting caste system. These programmes depict upward mobility among dalits and Buddhists and their unity. For the upper and dominant castes, such assertion by scheduled castes is seen as a threat to their dominance. They are angered by the show of dalit assertion and the refusal of the historically oppressed groups to tolerate upper caste tyranny. Thus, systematic and coordinated attacks on such programmes and their organisers are quite common across Maharashtra.

    The nexus between state and casteist forces and the unrest among the dominant castes over gradual upward mobility of scheduled castes has together contributed to the rising trend of caste atrocities in the state. Maharashtra bears a shameful record of having one of the lowest conviction rates (around 3%) in caste atrocity cases and one of the highest number of registered cases of atrocities in the country. This highlights the casteist and feudal character of the machinery of the state government. Ahmednagar , a seat of sugar barons who come from the dominant castes,  has the maximum number of caste atrocity cases in the state and yet the government has not taken serious measures to prevent such crimes and punish the criminals. Instead it has put in place dubious schemes such as Mahatma Gandhi Tanta Mukti Abhiyaan  which are actually perpetuating the power of casteist forces at the local level and institutionalising Brahmanical practices as part of the state. The mockery created by this scheme of justice is evident from the fact that Khairlanji received the MGTMA award three years after the brutal murder of members of the Bhotmange family!

    In several cases of registered caste atrocities, the police have filed cross-complaints against the victim's family, such as in case of Javkheda killings. But what the team was heartened to know in Sagar's case was the immediate protest by thousands of local population in Shirdi at the police station. It is primarily because of such public assertion where people gathered in large numbers, gheraoed the police station and refused to leave until the accused were arrested that the police took some action to find the accused and book them under the caste atrocities act. This has once again shown that where the state machinery is prejudiced, the dominant castes are powerful and local goons are protected by police, collective struggle by scheduled castes is indispensable for justice to be done.

    Demands of Fact finding Team

    • Book PI Pramod Wagh as co-accused and also charge him under the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989. He should be immediately dismissed from the service.
    • Vishal Kote and Rupesh Wadekar who have several serious charges against them –murder, kidnapping, rape – should be charged under Maharashtra Control of Organised Crime Act.
    • The relations between Pramod Wagh and the accused Vishal Kote should be investigated by the police.
    • One of Sagar's family members should be given a governmentjob.
    • Ahmednagar should be declared a caste atrocity prone district as per the provision as per the provisions of the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989.
    • SC and ST families who face the risk of atrocities should be given license for possession of arms for self-defense.
    • Fast track courts should be established to deal with caste atrocities cases to ensure that the guilty are punished without much delay.
    • Mahatma Gandhi Tanta Mukti Abhiyaan should be scrapped immediately.
    • The Government of Maharashtra bears responsibility for the high number of atrocities under its tenure and should immediately resign.

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    Press Release – Father's Day – Request for sensitive, balanced and gender just coverage


    PRESS RELEASE
     
    Bangalore19th June, 2015
     
    Father's Day – Request for sensitive, balanced and gender just coverage
     
     
    Dear Editor,
     
    "Fathers' Day" is coming up on June 21. Some "men's rights" groups in India have indicated that they intend to observe it on the previous day, June 20.
     
     
    In the past, there has been much insensitive and unbalanced reporting – perhaps thanks to the clout the influentialpatriarchal groups staging such events carry. Alas, such coverage has included support for a foreign consulate employee based in Bangalore, charged with raping his three-year-old daughter.
     
    It would be gratifying if media houses could be sensitive, restrained and balanced in their coverage of such events this year. Greater awareness of issues related to gender equality is not only desirable in itself, it would enhance journalistic professionalism
     
    To be sure, the rights of women are by no means opposed to those of men. Instead, equal treatment in law and in social dealings implies that men are also delivered from patriarchy. Men are also deemed to be fully capable of expressing emotions, taking responsibility for child care and other care work – in other words being fully human.
     
    It is not surprising that some of the "men's rights" groups also have women as members. Patriarchy is channelled not only through men but also women who are co-opted into its working, including in the perpetration of violence against other women. 
     
    Inside a large number of families, there is tremendous amount of domestic violence, including dowry deaths and child sexual abuse, not to mention psychological abuse. While a small percentage of domestic violence may be directed against men, in the overwhelming majority of instances, violence is directed against women and children. 
     
    We therefore urge circumspection on the part of media houses in the coverage of events related to "Fathers' Day" staged by groups with a thinly disguised misogynist and patriarchal agenda.
     
    Yours Sincerely,
     
    All India Progressive Women's Association (AIPWA)
    Alternative Law Forum (ALF)
    Aneka
    Karnataka Sex Workers Union (KSWU)
    Karnataka Sexual Minorities Forum (KSMF)
    Manthan Law
    People's Union for Civil Liberties (PUCL) – Karnataka
    Praja Rajakiya Vedike (PRV)
    Sangama
    Vimochana
    Nora Kropp – women's rights activist
    Pushpa Achanta – women's rights activist
    Subir Ghosh – journalist/ researcher
    Uma V Chandru – women's rights activist
     
    For more information contact: 87628 04192 (Jayaram), 99729 02460 (Rajesh)

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    Shutdown on 21st death anniversary of Qazi Nisar Ahmad, ,ISIS flags appeared in Anantnag. Daily " Chattan " Srinagar: Saturday, June 20 :


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    My dear friends , The Pune Prison Pact derailed the caste eradication train . It continued in the Constitution drafted by him when he allowed reservation to only those ex-Untouchables who believed in the Hinduism !






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    For Prime Minister Narendra Modi's 'Make in India' programme to be a success, it would require an immediate end to the culture of 'Steal from India' by the country's rich and rogue business houses.

    Super rich defaulters push Indian banks towards collapse - What is worse is that just the top 30 cases of default account for a Rs 1.21 lakh crore, which is almost...

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    सवाल ये है कि विकास किसका? औद्योगिक घरानों का, जनता या फिर विस्थापितों का जिन्होंने विकास के नाम पर अपनी जमीन दे दी?


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    AIFRTE 4TH NATIONAL COUNCIL GIVES A NATIONAL CALL " WTO-GATS Quit India – India is not for Sale " ‪#‎WarriorsParade‬

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    Lawyer informs his eyesight can't be restored, court observes it's not going to make any difference whether he stays in jail or outside.

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  • 06/20/15--14:14: लोग धीरे-धीरे ‘ललितगेट’ को भूल जाएंगे! : पुष्परंजन (Article) आज से कोई सवा तीन साल पहले लंदन की एक अदालत में ललित मोदी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। कोर्ट की यह घटना 20 मार्च 2012 की है। एक निजी सुरक्षा कंपनी ‘पेज ग्रुप’ ने 2010 में ललित मोदी को अपनी सेवाएं दी थीं। ‘पेज ग्रुप’ ने बकाया 65 हजार पाउंड (लगभग 65 लाख 69 हजार रुपये) नहीं मिलने पर ललित मोदी को अदालत में घसीटा था। ललित मोदी जिस के.के. मोदी ग्रुप नामक बिजनेस हाउस के सर्वेसर्वा होने का दावा अपने पोर्टल पर करते हैं, वह 2.8 अरब डॉलर की कंपनी बताई जाती है।
  • लोग धीरे-धीरे 'ललितगेट'को भूल जाएंगे! : पुष्परंजन (Article)
    आज से कोई सवा तीन साल पहले लंदन की एक अदालत में ललित मोदी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। कोर्ट की यह घटना 20 मार्च 2012 की है। एक निजी सुरक्षा कंपनी 'पेज ग्रुप'ने 2010 में ललित मोदी को अपनी सेवाएं दी थीं। 'पेज ग्रुप'ने बकाया 65 हजार पाउंड (लगभग 65 लाख 69 हजार रुपये) नहीं मिलने पर ललित मोदी को अदालत में घसीटा था। ललित मोदी जिस के.के. मोदी ग्रुप नामक बिजनेस हाउस के सर्वेसर्वा होने का दावा अपने पोर्टल पर करते हैं, वह 2.8 अरब डॉलर की कंपनी बताई जाती है। 

    लोग धीरे-धीरे 'ललितगेट'को भूल जाएंगे!

    20, JUN, 2015, SATURDAY 11:38:30 PM
    पुष्परंजन

    आज से कोई सवा तीन साल पहले लंदन की एक अदालत में ललित मोदी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। कोर्ट की यह घटना 20 मार्च 2012 की है। एक निजी सुरक्षा कंपनी 'पेज ग्रुप'ने 2010 में ललित मोदी को अपनी सेवाएं दी थीं। 'पेज ग्रुप'ने बकाया 65 हजार पाउंड (लगभग 65 लाख 69 हजार रुपये) नहीं मिलने पर ललित मोदी को अदालत में घसीटा था। ललित मोदी जिस के.के. मोदी ग्रुप नामक बिजनेस हाउस के सर्वेसर्वा होने का दावा अपने पोर्टल पर करते हैं, वह 2.8 अरब डॉलर की कंपनी बताई जाती है। के.के. मोदी ग्रुप के एग्रो कैमिकल, तंबाकू, चाय-बेवरिज, शिक्षा, इंटरटेनमेंट, खुदरा व्यापार, नेटवर्क मार्केटिंग, इतालवी-थाई रेस्टोरेंट जैसे वेंचरों में 28 हजार कर्मचारी काम करते हैं। 10 मई 2010 को भारत छोडक़र लंदन भाग जाने वाले ललित मोदी की कहानियों में जितने 'कट'हैं, उतने सालों-साल चलने वाले किसी सीरियल में भी नहीं मिलेंगे।
    एक दिवालिया व्यक्ति के पास आज की तारीख में कितनी कंपनियां हैं? ललित मोदी के पोर्टल खोलिये, और उसकी कंपनियां, वेंचर्स को सिलसिलेवार पढ़ लीजिए। कलरबार कॉस्मेटिक्स, बीना फैशन, हांगकांग में शंघाई टांग नामक इंटरनेशनल क्लोथिंग चेन, दक्षिण दिल्ली में रेस्टोरेंट-'इगो इटैलियन, इगो थाई, इगो-33 कैफे', स्ट्रैटफोर्ड युनिवर्सिटी वर्जिनिया व इग्नू से टाईअप कर 'एमएआईआई'ग्रेजुएट, अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम का शिक्षा व्यापार, जिसमें 20 लाख छात्र रजिस्टर्ड हैं। एग्रोकैमिकल बनाने वाली कंपनी 'इंडोफिल इंडस्ट्री लिमिटेड के भारत में तीन हजार वितरक, 38 हजार डीलर, 29 डिपो हैं। सालाना 2800 करोड़ टर्नओवर वाली तंबाकू कंपनी 'गोडफ्रे फिलिप्स इंडिया'की दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई, आंध्र के गुंटूर में शाखाएं हैं, जिसके जरिये अफ्रीकी देशों से लेकर, एशिया, दक्षिण-मध्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तक फैला तंबाकू का कारोबार है। फोर्स-टेन, जैसलमेर, ओरिजिनल्स, अल्टीमा जैसे ब्रांड वाले तंबाकू की सप्लाई ललित मोदी की कंपनी करती है। भारत में दुनिया की नामी सिगार कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूटर, सभी बड़े शहरों में सिगार के गोदाम हैं। 'टी सिटी'ब्रांड से असम, दार्जिलिंग और ग्रीन टी के निर्माता, पान बिलास, पान मसाला, फंडा मिंट-फंडा गोली के मालिक भी हैं ललित मोदी। मोदी हेल्थकेयर प्लेसमेंट के जरिये अमेरिका, यूरोप में नर्सों का 'निर्यात'भी करते हैं। 'मोदी केयर'का 2700 शहरों में 40 सेंटर, ट्वेंटीफोर सेवन डिपार्टमेंटल स्टोर चल रहा है। पूरे भारतवर्ष में ऐसे सौ रीटेल स्टोर खोलने की योजना है। भारत में पैरिस की सबसे ग्लैमरस 'देसांगे सैलून'की शाखाएं मोदी ग्रुप द्वारा खोली गई हैं। कार्पोरेट ट्रेवल के क्षेत्र में 'बेकन ट्रेवल'के नाम से मोदी ग्रुप का भारत में कारोबार है। 'मोदी इंटरप्राइजेज'से जुड़ी कंपनी 'गोडफ्रे गु्रप'ने तमिलनाडु के 36 लाख सिगरेट पीने वाले ग्राहकों पर अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए मई 2009 में 470 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
    विश्वास नहीं होता कि इतनी ही राशि (470 करोड़ रुपये) के लिए ललित मोदी भगोड़ा बन गया। इतने सारे धंधे चलाने वाले व्यक्ति का सालाना टर्न ओवर कम से कम दस हजार करोड़ होना चाहिए। अभी मोदी समूह की अचल संपत्ति का कोई हिसाब नहीं मिला है। मोदी नगर से लेकर ग्वालियर, जयपुर और देश के सभी मेट्रो शहरों में कई लाख करोड़ की अचल संपत्ति का आकलन इस परिवार को जानने वाले करते हैं। ऐसे औद्योगिक घराने का व्यक्ति लंदन की अदालत में खुद को दिवालिया घोषित कर ले, और उसके तीन साल बाद दुनिया के सर्वाधिक महंगे मोंटेनीग्रो के रिसार्ट पर मस्ती करता मिल जाए, तो इससे बड़ा फरेब क्या हो सकता है? ललित मोदी इस देश में नहीं है, लेकिन उसकी कंपनियां हज़ारों करोड़ मुनाफे कमा रही हैं। ललित मोदी के विरूद्ध पहली बार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) 'रेड कॉर्नर नोटिस'भेजेगा। तब भी वह भारत नहीं आया तो क्या मोदी की कंपनियों के खाते, उसकी चल-अचल संपत्तियां कुर्क की जाएंगी? इस देश में हर साल हजारों गरीबों की संपत्ति इसलिए कुर्क कर ली जाती है, क्योंकि वह समय पर कर्ज नहीं चुका पाते।  
    भारतीय मूल के विवादास्पद ब्रिटिश सांसद कीथ वाज के माध्यम से वीजा और ट्रेवल डॉक्यूमेंट रातोंरात दिलाने का आधार 'मानवीय'था, ऐसा जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज स्वीकार करती हैं, तो जुगुप्सा का भाव पैदा होता है। इस 'मानवीय आधार'पर निर्णय से पहले प्रवर्तन निदेशालय से पूछना क्यों जरूरी नहीं समझा गया? ललित मोदी की कैंसर पीडि़त पत्नी के लिए सुषमा जी को 'मानवीय आधार'दिखता है, लेकिन तंबाकू के कारोबार करने वाले मोदी ग्रुप ने न जाने कितने हजार लोगों को कैंसर बांटा होगा, उनके परिजनों के प्रति क्या कोई मानवीय आधार है? जिस प्रधानमंत्री कार्यालय की सहमति के बगैर केंद्र सरकार के किसी मंत्रालय में पत्ता तक नहीं हिल रहा था, ऐसे माहौल में यह कैसे संभव था कि विदेशमंत्री सुषमा स्वराज अकेले फैसला ले लेतीं? कुछ तो गड़बड़ है।
    जस्टिस उमेशचन्द्र बनर्जी अब इस दुनिया में नहीं रहे। पर उन्होंने अपनी डायरी में दर्ज टिप्पणी में ललित मोदी से पूरी सहानुभूति दिखाई थी। न्यायमूर्ति बनर्जी की धारणा थी कि ललित मोदी के साथ जो कुछ हुआ, वह सब कुछ तत्कालीन संप्रग सरकार और उनके अधिकारियों का किया-धरा था। ये वही जस्टिस उमेशचन्द्र बनर्जी थे, जो गोधरा ट्रेन अग्निकांड की जांच कर रहे थे। उनका निष्कर्ष था कि गोधरा ट्रेन के डिब्बों में आग, महज 'एक दुर्घटना'थी। क्या गोधरा से लेकर गांधीनगर तक का सियासी गलियारा ललित मोदी में कोई दिलचस्पी ले रहा था? ललित मोदी के ताजा बयानों से पता चलता है कि उसने कैसे सत्ता-विपक्ष के नेताओं को बगलगीर कर रखा था।
    यों, दुनिया के हर हिस्से में सत्ता के शार्टकट रास्ते का पता ललित मोदी को है। भारतीय मूल के विवादास्पद ब्रिटिश सांसद कीथ वाका के माध्यम से वीकाा और ट्रेवल डॉक्यूमेंट रातोंरात दिलाने का आधार क्या सचमुच 'मानवीय'था? विश्वास नहीं होता। पैसे लेन-देन के मामले में कीथ वाका का कैरेक्टर कितना ढीला है, यह ब्रिटिश संसद के गलियारों में विचरण करने वालों को पता है। कीथ वाका को न जाने कितनी बार पैसों की गड़बड़ी के कारण जिम्मेदार पदों से हटाया गया है। एक भागे हुए अभियुक्त की मदद, उस अभियुक्त से वकील पति और बेटी के व्यावसायिक व निजी संबंधों के बीच जो अदृश्य लक्ष्मण रेखा है, उसे क्या सुषमा स्वराज जैसी परिपक्व, समझदार मंत्री अनजाने में कैसे पार कर सकतीं हैं?
     पैंतालीस साल तक कमल खिलाते रहने, बीच में जेपी की 'संपूर्ण क्रांति'से जुड़े रहने के बाद, पहली बार सुषमा स्वराज के दामन पर कीचड़ उछला है। स्वराज परिवार इससे इंकार करने की हालत में नहीं है कि ललित मोदी से पिछले 20 वर्षों से निजी संबंध रहे हैं। इतना निजी कि स्वराज कौशल और उनकी बेटी बांसुरी कौशल ने मोदी के पक्ष में केस लडऩे का पैसा तक नहीं लिया था। ऐसा कैसे हो सकता है? निजी संबंध तो कई पुश्तों से वसुंधरा राजे से भी थे। लेकिन जब फोरेक्स उल्लंघन की जांच में प्रत्यर्पण विभाग के अधिकारी आगे बढ़ रहे थे, तो मोदी की कंपनी 'आनंद हेरिटेज होटल प्रायवेट लिमिटेड'(एएचएचपीएल) के जरिये 2006 में जयपुर के आमेर पैलेस इलाके में दो हवेलियों की खरीद का पता चला, जिसे 2010 में गहलोत सरकार के आने के बाद सीका कर दिया गया था। मोदी की कंपनी 'आनंद हेरिटेज होटल प्रायवेट लिमिटेड' (एएचएचपीएल) और वसुंधरा राजे के सांसद बेटे दुष्यंत सिंह और उनकी पत्नी निहारिका की कंपनी 'नियंत हेरिटेज होटल प्रायवेट लिमिटेड' (एनएचएचपीएल) ने मॉरिशस से हवाला पैसों को कैसे वैध रूप दिया, इसे जानकर देश का आम आदमी भी हैरान रह जाता है।
    यह मोदी-राजे लिंक का जादू था कि दुष्यंत सिंह के दस रुपये के शेयर की कीमत 96 हज़ार 190 रुपये हो गई। मॉरिशस की कंपनी 'विल्टन इंवेस्टमेंट लिमिटेड'ने ऐसे दो करोड़, 10 लाख, 83 हजार, 348 शेयर खरीदे। दुष्यंत और निहारिका की कंपनी ने दस रुपये वाले पांच हजार शेयर खरीदे थे, या उससे ज़्यादा? क्या दुष्यंत की कंपनी में वाकई ललित ने 11.63 करोड़ रुपये लगाये थे? वित्त मंत्री को बिना देर किये इसे स्पष्ट करना चाहिए। 'मॉरिशस ट्रेल'का सारा खेल मार्च 2007 से लेकर जनवरी 2009 के बीच हुआ है। दुष्यंत सिंह दावा करते हैं कि उनकी कंपनी 'नियंत हेरिटेज होटल प्रायवेट लिमिटेड'के माध्यम से जो कुछ लेन-देन हुआ, सभी वैध हैं। आयकर और 'कंपनी लॉ'में इसकी बाकायदा इंट्री है।
    ललित मोदी, 'डी कंपनी'से अपनी जान की दुहाई देते हुए देश से निकल लेने का जो तर्क दे रहे हैं, वह गढ़ी हुई कहानी भी हो सकती है। लंदन जाने से कोई सुरक्षित नहीं हो जाता। डी कंपनी, या किसी अंतरराष्ट्रीय अपराधी गैंग के लिए लंदन से लेकर मोंटेनीग्रो के रिसार्ट पर अपने किसी 'टारगेट'को ठोक देना कौन सी बड़ी बात है? प्रिंसेस डायना की रहस्यमय मौत इसका प्रमाण है कि ब्रिटेन दुनिया भर के हाईप्रोफाइल अपराधियों से भरा पड़ा है। फरवरी 2013 में बकिंघम पैलेस के सामने हत्या हो गई थी। अप्रैल 2009 में महाराष्ट्र खुफिया विभाग के जिस कमिशनर डी. शिवनंदन ने छोटा शकील गैंग से खतरे को देखते हुए ललित मोदी और उसके परिवार की सुरक्षा की अनुसंशा की थी, वही अधिकारी साल भर बाद मुंबई पुलिस का कमिश्नर होता है, और उनकी सुरक्षा एक समीक्षा के बाद वापिस ले ली जाती है। मोदी ने अपनी सुरक्षा के वास्ते हर बार 'बीजेपी माइंडेड'होने की दुहाई दी है। सवाल यह है कि इस देश में जिसकी सुरक्षा पुलिस वापिस ले लेती है, क्या उसे देश से भाग जाना चाहिए?
    'ललितगेट'कांड में होगा क्या? सुषमा स्वराज पद छोड़ती हैं, या वसुंधरा? या फिर, दोनों में से कोई भी नहीं! कई कयास लग रहे हैं। लेकिन इतना तो हुआ कि अब 'भ्रष्टाचार मुक्त सरकार'का ताल ठोको कार्यक्रम कम हो जाएगा। यूपीए-टू के लिए यह एक ऐसा हथियार है कि जब भी '2जी स्पैक्ट्रम'और 'कोलगेट'की आवाज उठेगी, उसके प्रतिरोध में 'ललितगेट'का प्रक्षेपास्त्र छोड़ा जाएगा। लोगों की याददाश्त बहुत छोटी है। चंद दिन बाद आपातकाल की चालीसवीं बरसी शुरू होगी। उससे पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इतना लोम-विलोम होगा कि लोग धीरे-धीरे 'ललितगेट'को भूल जाएंगे!

     

    pushpr1@rediffmail.com

    पुष्परंजन के आलेख


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    सुबह 9 बजे कपड़े की इस फैक्ट्री में एक कर्मचारी को करंट लग गया। कर्मचारियों ने अधिकारियों से उसे अस्पताल ले जाने की बात कही, लेकिन प्रबंधन ने अस्पताल ले जाने से मना कर दिया।इसके बाद कर्मचारी को भर्ती कराया गया। वहीं फैक्ट्री में मजदूर की मौत की अफवाह फैल गई। इससे आक्रोशित कर्मचारियों ने फैक्ट्री में तोड़फोड़ शुरू कर दी और आग लगा दिया। उन्होंने अधिकारियों के वाहनों में भी आग लगा दी। उनके साथ मारपीट भी की गई। फैक्ट्री के शीशे तोड़ दिए गए।

    ओरिएंटल क्राफ्ट कंपनी में शनिवार को कर्मचारियों ने फैक्ट्री में आग लगाई। 12 दमकल गाड़ियों ने आग को काबू किया।

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    भोग + उपभोग = योग 
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    कभी स्वदेशी का डंका बजाने वाले दुनिया भर मे घूम घूम कर विदेशी निवेश अर्थात बहुराष्ट्रीय कंपनियों को न्यौता देकर भारत बुला रहे है l इन विदेशी कंपनियों के माध्यम से यहाँ के नागरिकों के भोग और उपभोग का स्तर बढ़ा कर विकास का सपना दिखाने वालो के निशाने पर अब योग है l योग को सर्कस बना कर ही दम लेंगे ये पाखंडी l

    Gopal Rathi's photo.


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    सुषमा जी भाजपा के "चाल,चरित्र और चेहरे"की सच्ची एवं वास्तविक प्रतिनिधि हैं.दरअसल यही असली भाजपाई चेहरा है,जिसके बाहरी आवरण पर सादगी का लेप है,जो स्वयंभू तरीके से ईमानदार भी है और इस स्वघोषित ईमानदारी की पूरी ठसक भी उसमें मौजूद है.अपनी निगाह में वे सबसे बड़े राष्ट्रभक्त भी हैं और इस नाते कौन राष्ट्रभक्त है,कौन नहीं,ये सर्टिफिकेट बांटने का अधिकार भी वे स्वयं के पास आरक्षित समझते हैं.
    लेकिन इस ऊपरी परत की कलई जब-जब उतरती है तो जो सुषमा स्वराज प्रकट होती हैं,वो न तो सादगी की प्रतिमूर्ति हैं,न ईमानदारी की,वह तो आन्ध्र प्रदेश के कुख्यात रेड्डी बंधुओं की संरक्षक है.याद कीजिये जब बेल्लारी में सोनिया गांधी के खिलाफ वे चुनाव लड़ने उतरीं.उनका यह अंदाज किसी को भी भा सकने वाला था कि परिवारवाद की राजनीति को चुनौती देने के लिए वे मैदान में उतरीं.लेकिन इस लड़ाई से उन्होंने अर्जित किये वो कुख्यात रेड्डी बन्धु,जो इतने बड़े खनन माफिया हैं कि उन्होंने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की सीमा ही खोद डाली.ममतामयी दिखने वाली सुषमा जी की ममता इन माफिया बंधुओं पर बरसी और वे इन माफिया बंधुओं की "माँ"हो गयीं.यही भाजपाई "चाल,चरित्र और चेहरा"है जो निकलता तो परिवारवाद की राजनीति को चुनौती देने है,लेकिन अपने लिए माफिया बंधुओं का एक नया परिवार जुगाड़ लाता है.
    भाजपा का यही असली रंग है कि मंत्री बनते हुए शपथ तो शुद्ध,परिष्कृत हिंदी मे ये कानून और संविधान की लेते हैं.लेकिन जब मानवता दर्शाने की बारी आती है तो मानवता,उनकी एक कानून के भगोड़े पर बरसती है. तहलका घोटाले में एक लाख रूपया रिश्वत लेते हुए पकडे जाने के बावजूद,कारगिल युद्ध में ताबूतों में कमीशन खाने के बावजूद,येदियुरप्पा और रेड्डी बंधुओं के भ्रष्टाचार के बावजूद वे ईमानदारी के सबसे बड़े झंडाबरदार हैं.ललित मोदी जैसे कानून के भगौड़ों की मदद करने के बावजूद उनके राष्ट्रवाद पर लेश मात्र भी आंच नहीं आती.
    इनसे कहिये कि आप भ्रष्टाचार कर रहे हैं तो गिनाने लगेंगे कि पिछले कांग्रसी राज में कितना भ्रष्टाचार हुआ !अरे महाराज,पिछले राज में भ्रष्टाचार न हुआ होता तो जनता,उन्हें उखाड़ क्यूँ फेंकती ?इसलिए जनता ने उन्हें धूल चटा दी.पर आप ये बताओ हुजूर कि जो यह नारा था कि "बहुत हुई जनता भ्रष्टाचार से लाचार,अबकी बार ......",उसका मतलब क्या ये था कि- बहुत हुई जनता कांग्रेसी भ्रष्टाचार से लाचार,अब देखो भाजपाई भ्रष्टाचार की बहार ?
    इस दोमुंहे "चाल,चरित्र और चेहरे"पर वह पुराना हिंदी फ़िल्मी गीत सटीक बैठता है कि-
    "दान का चर्चा घर-घर पहुंचे,लूट की दौलत छुपी रहे,
    क्या मिलिए ऐसे लोगों से,जिनकी फितरत छुपी रहे,
    नकली चेहरा सामने आये,असली सूरत छुपी रहे"




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     it. So a white man who committed such crime is 'disturbed', 'alone', 'suffering from ailments' and what not but not a terrorist. I wish to see the reaction of 'George W Bush' who so proudly declared 'islamic Fascism' once upon a time. Will the White Americans come over this fascist mindset that all the blacks are inferiors, thieves and goons ? And let them also know the history that America was originally a country of the blacks and coloured people till one day Europeans converted it into a white dominated zone. Let the history be explained impartially.
    Some of the country's earliest antiterrorism legislation was passed to stop the Ku Klux Klan. So why do we assume that terrorists must come from somewhere else?
    NYTIMES.COM|BY BRIT BENNETT


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    I won't do yoga on June 21 ‪#‎YogaDay‬

    I won't have the government dictate my fitness choices, especially if they are linked to religion, nationalism and patriotism It is insulting to both the practice and the practitioner to have it th...

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    Recent attacks by ‪#‎armed‬ ‪#‎rebels‬ put the spotlight yet again on the‪#‎Indian‬ State's failure to engage the people of the ‪#‎Northeast‬ in an inclusive way. | http://goo.gl/F4qvaM


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