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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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  • 09/30/15--09:06: दुखवा मैं कासे कहुं? बहुत कठिन है डगर,बहुत कड़ी है धूप! साथी संभलकर चलना! साथी हाथ बढ़ाना! परमाणविक सैन्य राष्ट्र भी जनता को कुचलने में कम है क्योंकि जनता जब बगावत पर उतर जाती है तो किसी गैस चैंबर या किसी तिलिस्म की दीवारों में उन्हें मार देना मुश्किल ही नहीं,नामुमकिन है।इसी के मुकाबले हिंदू राष्ट्रवाद का यह आतंकवाद प्रलयंकर है,जिसे कोई लेकिन आतंकवाद कह नहीं रहा है। इसीलिए नये सिरे से आतंक से निबटने की यह सहमति है और यूं समझ लीजिये कि आगे फिर आतंक के खिलाफ युद्ध घनघोर है और अमेरिका को खुल्ला न्यौता है कि उनकी कंपनियां हम पर राज करें ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह और अपनी पूरी सैन्य शक्ति के साथ निर्ममता के साथ भारतीय जनता को उसी तरह मटियामेट कर दें जैसे मटियामेट यूरोप का आधा नक्शा है,मटियामेट लातिन अमेरिका है,मटियामेट नियतनाम है,मटियामेट इराक से सलेकर अफगानिस्तान है,सारा मध्यपूर्व है,अफ्रीका और एशिया है। पलाश विश्वास

  • दुखवा मैं कासे कहुं?

    बहुत कठिन है डगर,बहुत कड़ी है धूप!

    साथी संभलकर चलना!

    साथी हाथ बढ़ाना!

    परमाणविक सैन्य राष्ट्र भी जनता को कुचलने में कम है क्योंकि जनता जब बगावत पर उतर जाती है तो किसी गैस चैंबर या किसी तिलिस्म की दीवारों में उन्हें मार देना मुश्किल ही नहीं,नामुमकिन है।इसी के मुकाबले हिंदू राष्ट्रवाद का यह आतंकवाद प्रलयंकर है,जिसे कोई लेकिन आतंकवाद कह नहीं रहा है।


    इसीलिए नये सिरे से आतंक से निबटने की यह सहमति है और यूं समझ लीजिये कि आगे फिर आतंक के खिलाफ युद्ध घनघोर है और अमेरिका को खुल्ला न्यौता है कि उनकी कंपनियां हम पर राज करें ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह और अपनी पूरी सैन्य शक्ति के साथ निर्ममता के साथ भारतीय जनता को उसी तरह मटियामेट कर दें जैसे मटियामेट यूरोप का आधा नक्शा है,मटियामेट लातिन अमेरिका है,मटियामेट नियतनाम है,मटियामेट इराक से सलेकर अफगानिस्तान है,सारा मध्यपूर्व है,अफ्रीका और एशिया है।



    पलाश विश्वास

    Many of my blogs removed.Speech recorded and missing!


    बहुत कठिन है डगर,बहुत कड़ी है धूप!

    साथी संभलकर चलना!

    साथी हाथ बढ़ाना!


    निजी दुःखों,तकलीफों,सदमों की हदबंदी को तोड़ने का वक्त यह है क्योंकि कयामतों से दसों दिशाओं से घिरे हुए हैं हम।


    इस तिलिस्म में कैद हम छटफटा रहे हैं और देश न सिर्फ मृत्यु उपत्यका में तब्दील है,बल्कि वह अब मुकम्मल गैस चैंबर बना दिया गया है और सारी खिड़कियां,दरवाजे और यहांतक कि रोशनदान तक बंद हैं।


    बेइतंहा तन्हाई है।

    तन्हाई हजारों सालों की है।


    यह तन्हाई हड़प्पा की है और मोहंजोदोड़ो की भी।

    यह तन्हाई माया और इंका सभ्यताओं की भी है।


    हम सिर्फ उस विरासत को ढो रहे हैं,तन्हाई की विरासत।


    तन्हाई में गीत कोई गुनगुनाते हुए फसल काटने का समय भी यह नहीं है क्योंकि सारे खेत खलिहान घाटी में आग लगी है।


    हमारी तन्हाई आग के हवाले हैं।

    इस तन्हाई के महातिलिस्म को तोड़े बिना आजादी गुलामी और कयामतों के मंजर से मिलने के कोई आसार नहीं हैं।


    आइये,सबसे पहले अस्मिताओं में कैद हमारे वजूद को आजाद करें।सबसे पहले रीढ़ को सीधी कर लें जो सुतल रही कहीं किसी कोने में या हालात ने उसे तोड़ मरोड़ कर कचरा पेटी में डाला हुआ है।हम तूफां के गुजर जाने का इंतजार चूंकि कर नहीं सकते और सफर के लिए कारवां शुरु करने से पहले शुतुरमुर्ग लबादा उतार फेंकने की जरुरत भी है बहुत।


    बहुत कठिन है डगर,बहुत कड़ी है धूप!

    साथी संभलकर चलना!

    साथी हाथ बढ़ाना!


    जैसे कि मंगलेश डबराल ने लिखा है हमारे अपराजेय साथी का चले जाना,वह बेदह बड़ा सदमा है,हम तमाम लोगों के लिए।


    हमारे प्रिय कवि वीरेन डंगवाल पूरे तीन साल कैंसर को हराते हुए चल दिये।तो अब 16 मई के बाद लिखी जा रही कविताओं की प्रासंगिकता और घनघोर है।


    कोई लड़ाई कविता के बिना लड़ी नहीं जा सकती और उत्पादन कोई लोकगीत के बिना हो सकता नहीं है।


    यह कविता को नींद से जगाने का वक्त है और दुनियाभर के कवियों के अंगड़ाई लेकर जागने का सही वक्त है।

    तुनीर में वाण हैं तो निकालो भइये और फिर चूकना नहीं चौहान।


    इस मृत्यु उपत्यका की दीवारों को ढहाने की जरुरत सबसे ज्यादा है। इस गैस चैंबर के सारे दरवाजे,सारी खिड़कियां और सारे रोशनदान खोलने की जरुरत है।


    हम सबसे पहले अपने अखबारों और अपने साहित्य से बेदखल हो गये। क्योंकि बाजार ने दुनियाभर के मेहनतकशों के हाथ पांव काटने के लिए सबसे पहले साहित्य,संस्कृति और मीडिया पर कब्जा जमा लिया।


    हमने फिर दुनियाभर में लघुपत्रिका और वैकल्पिक मीडिया का आंदोलन चलाया।


    बिना संसाधन मुक्त बाजार में उस आंदोलन की सद्गति जनांदोलनों के अवसान के साथ साथ,विचारधारा और इतिहास की मृत्यु घोषणाओं के साथ साथ होती रही और हम इस आंदोलन के टिमटिमाते दिये से कटकटेला अंधियारा का मुकाबला कर रहे हैं।


    फिर इंटरनेट और सोशल मीडिया से हमने देश दुनिया को जोड़ने की मुहिम चलायी।अब सोशल मीडिया भी बेदखल है।


    बायोमेट्रिक,क्लोन,रोबोट नागरिकों का देश अब डिजिटल है।


    अमेरिका और भारत में नये सिरे सहमति हो गयी है आतंक को खत्म करने के लिए।आतंक के विरुद्ध अमेरिका के युद्ध में इजराइल और ब्रिटेन के साथ भारत भी पार्टनर है,तो इस नयी सहमति का मतलब क्या है,यह समझना जरुरी है।


    क्योंकि जर्मनी,जापान और ब्राजील के साथ भारत की खास भूमिका रही है संयुक्त राष्ट्र के नये सिरे से तय विकास,गरीबी उन्मूलन और आर्थिक सुधारों के सत्रहह सूत्री संपूर्ण निजीकरण,संपूर्ण विनिवेश का एजंडा पास कराने में।


    गौरतलब है कि भारत की आजादी के लिए इऩ्हीं जर्मनी और जापान से मदद मांगने के अपराध में हमने अपने इतिहास में नेताजी को फासिस्ट बना दिया।और कोई सूरत बनी नहीं कि नेताजी फिर घर वापस होते।इतना पक्का इंतजाम हो गया।


    टाइटैनिक बाबा भारत को और भारतीय अर्थव्यवस्था को टाइटैनिक में तब्दील करने लगे हैं।


    जहाज में छेदा है और यहजहाज डूबने वाला है जैसे समूचा देश अब डूब में तब्दील है।


    ऐसा इसलिए हो रहा है कि हम सही मायने में न मजहब समझ रहे हैं,न सियासत समझ रहे हैं औरन हुकूमत।

    अर्थव्यवस्था हमारे लए सरदर्द का सबब भी नहीं है।


    लोग जोड़ घटाव गुणा भाग भूल गये हैं और हम अस्मिताओं, जातियों और मजहबों के समीकरण सादने में लगे उन्माद हैं।


    धर्मोन्माद धर्म नहीं होता और न धर्मोन्माद कोई राष्ट्रवाद होता है।नेतीजे बेहद भयंकर हैं कि मुहब्बत लापता है।लापता है सच।लापता है धर्म।लापता है आस्था।


    उत्पादक समुदायों के नरसंहार के वास्ते,खेती,बिजनेस और इंडस्ट्री भी अमेरिकी प्राइवेट सेक्टर के हवाले करने का चाकचौबंद इंतजाम है।


    शर्मनाक है कि हमारा प्रधानमंत्री राकस्टार जैसा आचरण कर रहे हैं और निजी कंपनियों के सीईओ को खींचकर सेल्फी निकाल रहे हैं और हम बल्ले बल्ले हैं।


    शर्म किसी को आ नहीं रही है।


    थोड़ी शर्म तो इस स्वतंत्र संप्रभु देश के नागरिकों को होनी चाहिए कि कैसे निजी क्षेत्र के प्रबंधकों के लिए हमारा प्रधानमंत्रित्व बिछा बिछा है रेड कार्पेट की तरह कि हमारे सारे संसाधन वे लूट लें,जलजंगल जमीन पहाड़ रण समुंदर औरमरुस्थल वे लूट लें औरमेहनतकश तबकों,किसानों,व्यापारियों और देशी उद्योगपतियों का वे सफाया कर दें।


    देश अब मुकम्मल मुक्त बाजार है और डजिटल देश है तो पूंजी अबाध है।संपूर्ण निजीकरण है और संपूर्ण विनिवेश है।


    एफडीआई में भारतवर्ष ने चीन और अमेरिका को पछाड़ दिया है।

    दरअसल यही है हिंदू राष्ट्र का एजंडा।


    प्रधानमंत्री विदेशयात्रा पर है और अमेरिकी प्राइवेट सेक्टर के हवाले हमारे तमाम संसाधन कर रहे हैं तो इस देश के सबसे बड़े दिवालिये प्राइवेटाइज्ड रिजर्व बैंक के राजपाट खोये राजन ने त्योहारी मौसम के मुताबिक ब्याज दरों में कटौती कर दी और डाउ कैमिकल्स के वकील घोषणा कर रहे हैं कि अर्थव्यवस्था में तेजी आयेगी।


    अर्थव्यवस्था तेज नहीं होती।

    अर्थव्यवस्था या तो कमजोर होती है या मजबूत होती है।


    तेज शेयर बाजार होता है।

    तेज भाव होते हैं।

    तेज बाजार के सांढ़ और अस्वमेध के घोड़े होते हैं।


    वे सही कह भी रहे हैं।बिहार में फिर कुरुक्षेत्र सजा है और कुरुवंश में महाभारत जातियों का है।


    लोकतंत्र का कोई उत्सव नहीं हो रहा है कहीं,सर्वत्र बाजार का कार्निवाल है प्रलयंकर।


    सारे के सारे लोग कबंध हैं और चेहरे सिरे से गायब हैं।


    अश्वमेध के घोड़े दौड़ रहें हैं तेज तो बहुत तेज दौड़ रहे हैं मुक्त बाजार के सारे साँढ़।कयामतें रची जा रही हैं और कयामते ढहाई जा रही हैं।ढाये जा रहे हैं जुल्मोसितम।हम फिर भी सन्नाटा के कारीगर।


    मेहनतकशों के हकहकूक की चर्चा देश द्रोह है।

    धर्मोन्मादी बाजार का विरोध भी देशद्रोह है।


    जनांदोलन जब तेज होता है तब वह या तो उग्रवाद है या फिर आतंकवाद है।


    परमाणविक सैन्य राष्ट्र भी जनता को कुचलने में कम है क्योंकि जनता जब बगावत पर उतर जाती है तो किसी गैस चैंबर या किसी तिलिस्म की दीवारों में उन्हें मार देना मुश्किल ही नहीं,नामुमकिन है।इसी के मुकाबले हिंदू राष्ट्रवाद का यह आतंकवाद प्रलयंकर है,जिसे कोई लेकिन आतंकवाद कह नहीं रहा है।


    इसीलिए नये सिरे से आतंक से निबटने की यह सहमति है और यूं समझ लीजिये कि आगे फिर आतंक के खिलाफ युद्ध घनघोर है और अमेरिका को खुल्ला न्यौता है कि उनकी कंपनियां हम पर राज करें ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह और अपनी पूरी सैन्य शक्ति के साथ निर्ममता के साथ भारतीय जनता को उसी तरह मटियामेट कर दें जैसे मटियामेट यूरोप का आधा नक्शा है,मटियामेट लातिन अमेरिका है,मटियामेट नियतनाम है,मटियामेट इराक से सलेकर अफगानिस्तान है,सारा मध्यपूर्व है,अफ्रीका और एशिया है।


    जनता लामबंद हो अस्वमेधी फौजों के लिए ,इसलिए बहुत जरुरी है कि सारे शंबूक फिर जाग जायें।


    कलबुर्गी ,दाभोलकर और पानसारे की तरह सारे शंबूक फिर सर कटाने  के लिए फिर हो जाये तैयार क्योंकि स्त्री अब भी दासी है।द्रोपदी को निर्वस्त्र करने का सिलसिला जारी है और गांधारी के सारे बेटे खेत हैं।


    मनुसमृति अनुशासन के मुताबिक सबकुछ हो रहा है।

    क्योंकि मनुस्मृति धर्मग्रंथ नहीं है कोई ,वह तो मुकम्मल अर्थशास्त्र है,वर्चस्व,आधिपात्य और नस्ली हुकूमत,सियासत और मजहब का जो अब मुक्त बाजार का अंध धर्मोन्मादी राष्ट्रवाद है।


    हम ममता बनर्जी के आभारी हैं कि सत्तर साल से तहखानों में रखे हुए नेताजी से जुड़े दस्तावेज सारे वे सार्वजनिक करने लगी हैं।


    नेताजी जिंदा हैं या मुर्दा,यह अब बेमतलब बहस है। कातिलों ने जाहिर है कि कोई सुराग नहीं छोडा़ तो जिंदा नेताजी को दफन करनेवालों के खिलाफ कोई सबूत भी नहीं होंगे।


    इन दस्तावेजों से जो साबित हुआ है वह बहुत खास है।गांधी जिसे पागलदौड़ कहते थे,विकास और तकनीक के सफेद झूठ का प्रदाफास होने लगा है।


    साबित हुआ है कि नेताजी कोई ङिजलन न थे,न मुसोलिनी थे नेताजी और न तेजो से उनकी कोई रिश्तेदारी थी।


    वे बाबासाहेब डा,अबेडकर की तरह हर कीमत पर हिंदू राष्ट्र के खिलाफ थे और हिंदुत्व के पुनरूत्थान को नेताजी मुल्क और इंसानियत के खिलाफ मान रहे थे।


    दोनों को लेकिन हिंदुत्व ने अवतार हिंदुत्वका बना दिया है और इन झूठी मूर्तियों को गिराने और ढहाने की जरुरत सबसे ज्यादा है।


    हम इस कदर बूतपरस्त हैं कि हमें रब से कोई मुहब्बत नहीं है और हमारी रूह में नफरत का लावा दहक रहा है।


    हमें बूत से मुहब्बत है जीते जागते इंसान या इंसानियत से कोई मुहब्बत नहीं है।


    हम बूत जिसका बनाते हैं,वह रब हो या इंसान,उसको हमारे धंधे के सांचे में गढ़ते हैं कि मह रब को कातिल बना देते हैं और कातिल को पिर रब बना देते हैं।बाकी कटकटेला अंधियारा है।


    1938 से लेकर 1947 के जो दस्तावेज ममता दीदी ने सार्वजनिक किये हैं,उनसे साबित फिर हुआ कि हिंदुत्ववादी ताकतें बंगाल का विभाजन पर आमादा थीं ,इसीलिए कोलकाता में निर्णायक डायरेक्ट एक्शन हुआ,जिसके लिए अबतक मुसलमानों.मुस्लिम लीग और सुहारावर्दी को जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।


    इन दस्तावेजों से भारतीय बहुजन समाज, दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों,पिछड़ों के रहनुमा बंगाल के भुला दिये गये पहले प्रधानमंत्री फजलुल हक और उनकी कृषक प्रजा पार्टी के इतिहास का पता चलता है।


    कृषक प्रजा पार्टी  हिंदुत्व और इस्लाम के झंडेवरदारों के मुकाबले जमींदारों और रियासतों के खिलाफ रैयतों और प्रजाजनों के हकहकूक की लड़ाई लड़ रही थी।जो भूमि सुधार के लिए लगातार जारी किसान आदिवासी विद्रोह की विरासत थी।


    नेताजी ने जोगेंद्रनाथ मंडल को बरिशाल से बुलाकर कोलकाता नरग निगम का मेयर पार्षद बनाया था,जिनने बाद में मुकद बिहारी मल्लिक के साथ मिलकर बाबासाहेब को संविधान सभा में पहुंचाया था।बहुलता और विविधता और लोकतंत्र के कितने हक में थे नेताजी, आजाद हिंद फौज के इतिहास भूगोल की तरह यह वाकया भी काबिलेगौर है।


    इन दस्तावेजों से साबित है कि नेताजी किसानों और आदिवासियों और मेहनतकशों के हकहकूक के लिए प्रजा कृषक पार्टी और फजलुल हक को समर्थन देने की पेशकश लगातार कांग्रेस नेतृत्व से कर रहे थे।


    सारी हिंदुत्ववादी ताकतें जमींदारों और रियासतों के हित में रैयतों और बहुजनों के खिलाफ,फजलुल हक के खिलाफ लामबंद थी।


    प्रजाजनों और किसानों और बहुजनों की बंगाल की उस पहली सरकार को समर्थन देने से कांग्रेस ने सिरे से इंकार कर दिया और फिर फजलुल हक की सरकार भी गिरवा दी।


    1901 में ठाका में ही मुस्लिम लीग का गठन हुआ था और न बंगाल में और न बाकी देश में कोई उसे हवा पानी दे रहा था और पाकिस्तान के जनक मुहम्मद अली जिन्ना ने भी उसे खास तरजीह नहीं दी क्योंकि उसे आम मुसलमानों का कोई समर्थन उसी तरह न था जैसे हिंदू महासभा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कट्टर हिंदुत्व को हिंदुओं ने कोई समर्थन नहीं दिय।


    तब नेताजी वामपंथियों समेत तमाम लोगों को जोड़कर भारत को आजाद करने का ख्वाब जी रहे थे।


    जबकि कांग्रेस का नेतृत्व एक तरफ हिंदू महासभा तो दूसरी तरफ मुस्लिम लीग को तरजीह देकर दो राष्ट्र के सिद्धांत के तहत सत्ता और जनसंख्या के हस्तातंरणकी तैयारी कर रही थी।


    इस एजंडा के तहत भारतीय राजनीति में वध सिर्फ नेताजी का नहीं हुआ,पहला महिषासुर ते फजलुल हक खेत रहे जिनका नामलेवा आजद भारत में कोई नहीं है।


    दूसरे वध हुए बलुचिस्तान के सीमांत गांधी और आदिवासियों, दलितों और मुसलमानों,सिखों और मेहनतकशों के वध का अनंत सिलसिला अब हिंदू राष्ट्रवाद है और हिंदुत्व का एंजडा है।


    यह निर्लज्ज एजंडा हिंदू बहुल नेपाल की आर्थिक नाकेबंदी कर रहा है और नेपाल के लोकतांत्रिक नया संविधान रद्द करवाकर एकमुश्त हिंदू राष्ट्र और राजतंत्र की वापसी के लिए नेपाल में लगातार लगातार हस्तक्षेप कर रहा है।


    भारत के इस सामंती साम्राज्यवादी हिंदुत्व के खिलाफ नेपाल में भारतीय मीडिया का बहिष्कार है और वहां भारतीय सारे चैनलों का प्रसारण बंद है।


    शर्मिंद हम फिर भी नहीं हो रहे और न विरोध हम जता रहे हैं कि नेपाल में भारत के प्रधानमंत्री का पुतला और भारतीय झंडा दोनों जल रहे हैं।हम बिना वजह बेगुनाहों को मौत के घाट उतार रहे हैं।


    हिंदुत्व का यही एजंडा है विभाजन का जो अब कश्मीर को अलग करने पर आमादा है क्योंकि कश्मीर घाटी के मुसलमानों को पाकिस्तान हांके बिना कोई सूरत नहीं है कि भारत हिंदू राष्ट्र बन सके।यह हम बार बार लिख बोल रहे हैं।


    हिंदुत्व का यही एजंडा था कि बंगाल में मुस्लिम बहुमत और पंजाब की मुसलमान आबादी को अलग किये बिना हिंदू राष्ट्र अंसभव था।वैसा ही हुआ और इसीलिए भारत का विभाजन हो गया।


    आजाद हिंद फौज भारत में दाखिल होते या फजलुल हक,सीमांत गांधी और नेताजी एक साथ होते या गांधी और अंबेडकर आदिवासियों को तरजीह दिये रहते तो बंटवारा इतना आसान भी नहीं होता और न किसी हत्यारे की गोली से गांधी का सीना छलनी हुआ रहता और न आज भी रोजाना गांधी का सीना लहूलुहान हो रहा है और उसपर गोलियों की बौछार हो रही है।


    नेतीजी नहीं लौटे तो भारत की किस्मत बदल गयी और नेताजी भारत में कतई दाखिल न हो,इसके लिए नेताजी के मणिपुर के मोइरांग में तिरंगा फहराने के तुरंत बाद भारतीय राष्ट्रीय नेतृत्व और हिंदुत्ववादी ताकतों की आपातकालीन बैठक भी कोलकाता में हुई और भारत के बंटवाकरे  का चाकचौबंद इंतजाम हो गया।बांटवारे का सिलसिला लेकिन थमा नहीं है।यही हिंदुत्व का पुनरूत्थान है।


    दुखवा मैं कासे कहुं?

    बहुत कठिन है डगर,बहुत कड़ी है धूप!

    साथी संभलकर चलना!

    साथी हाथ बढ़ाना!

    परमाणविक सैन्य राष्ट्र भी जनता को कुचलने में कम है क्योंकि जनता जब बगावत पर उतर जाती है तो किसी गैस चैंबर या किसी तिलिस्म की दीवारों में उन्हें मार देना मुश्किल ही नहीं,नामुमकिन है।इसी के मुकाबले हिंदू राष्ट्रवाद का यह आतंकवाद प्रलयंकर है,जिसे कोई लेकिन आतंकवाद कह नहीं रहा है।


    इसीलिए नये सिरे से आतंक से निबटने की यह सहमति है और यूं समझ लीजिये कि आगे फिर आतंक के खिलाफ युद्ध घनघोर है और अमेरिका को खुल्ला न्यौता है कि उनकी कंपनियां हम पर राज करें ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह और अपनी पूरी सैन्य शक्ति के साथ निर्ममता के साथ भारतीय जनता को उसी तरह मटियामेट कर दें जैसे मटियामेट यूरोप का आधा नक्शा है,मटियामेट लातिन अमेरिका है,मटियामेट नियतनाम है,मटियामेट इराक से सलेकर अफगानिस्तान है,सारा मध्यपूर्व है,अफ्रीका और एशिया है।



    [Sign Petition] Dear India, stop interfereing in Nepal. Thanks!

    Please sign and circulate widely. Endorsements can also be sent directly to Anand Swaroop Verma

    [Sign Petition] Dear India, stop interfereing in Nepal. Thanks!

    We, the undersigned extend full support to the people of Nepal on the occasion of the promulgation of their Constitution. We oppose the interference of the Indian…

    ASIAPROGRESSIVE.COM



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    https://youtu.be/dt2xUV0c8JgLet Me Speak Human! The Inflated Economy kills not only Agrarian communities,it would kill Indian Business as well as Industry!

    I am not a politician.I have not to reach the masses in the same way as the politicians and Icons do reach.Just I am speaking the relevant issues for the survival of humanity and nature and I have nothing to do with political equations.But I am not allowed to speak.We have been displaced from Print,we have been deprived of civic and human rights and now,we have to be deported from social media.Just because we,the Indians live in a digital India which has reduced the economy into an inflated balloon without blood,flesh or bone just for trickling trickling growth.


    Indian people have no space for public hearing.Even I being a part of media for forty two years at least and associated with Indian Express,I am not allowed to speak out human!I have been warning the CII,FICCI and Indian Inc that the domestic market flooded with foreign capital,companies and interests would not only kill the nature,nature associated people,it would also kill Indian business and industries.


    The financial management is only concerned with only one problem and it is the maintenance of cash liquidity,the supply of cash and purchasing power to the public so that the markets would be space into the space!They seem not to be interested to address the basic problems of the economy not at all.


    FM lauds RBI move to cut rates quite aggressively to boost the market.The Market is already boosted with seventh pay commission recommended and the pay calculator yet to be implemented.Government employees crowd the market hoping better payscale,bonus and allowances.But they remain quite unaware of the fact that the labour laws being modified,service span reduced to 33 years and payscale linked to productivity ,they might be declared inefficient any time.


    Reset development 17 point goals development has the singular point of agenda which is total privatization,total disinvestment and total FDI.Already India overlapped USA and China in FDI flow.Foreign companies taking over every sector would not afford the bear the overloaded manpower in any sector and large scale retrenchment seems quite mandatory.Anybody might lose ob anywhere,anytime.The children would have to opt for service sector as only source of employment in digital India is outsourcing and so our political leader is behaving like a Rock Star in the silicon valley to ensure total surveillance of biometric,digital,robotic,cloned citizenship deprived of privacy and sovereignty.


    India becomes south Global amidst diplomatic disaster as India,essentially a hindu Nation right since 15th August,1947 with transfer of power and transfer of population,inflicted with continuous partition,inflicted with continuous population,inflicted with unprecedented violence continuous,continuous displacement and continuous refugee influx.


    Thus,India intervenes in Nepal which is going to prove a diplomatic disaster for India and united States of America as the globe is not going to remain as unipolar for many a days as Russia rises from the dust and it has warned that it would not allow the Lebiya drama in Seria! Neither China would tolerate any external intervention.

    Indian Hindu Nation wants Nepal to become a Hindu Nation ruled by monarchy again!


    But the sovereign Nepal has opted for a secular and democratic constitution.India ends in economic blockade of Nepal.Now,people in Nepal burn the effigy of Indian PM and they burn Indian flag.Indian TV  Channels blocked.Now Nepal has to seek Chinese help.It means India clears the decks for a Chinese intervention in Nepal.It is diplomatic disaster for Indian and US diplomacy which want to stop China!

    Let us come back to Economy.Lastweek,the united Nations adopted 17 ambitious goals(SDGs),which aim to wipe out poverty ,fight inequality and tackle climate change over next 15 years!


    I am most concerned with this climate change.As Kolkata is very very hot in winter and six sasons have reduced to one.That is Summer only,Rains come within Summer and the winter is also submerged into Summer.


    The class rule,the caste class hegemony rooted in Manusmriti and behaving Hindutva to reduce political leadership into the agent of marketing agent,the military state is not concerned with environment, ecology, biocycle or climate change.


    The humanity is deculturized,deprived of language, dialects, linguistics, phonetics and aesthetics!

    As Sundrelal Bahuguna warned long before that the glaciers melting and glaciers convert themselves into deserts and humanity would be deprived of food and water.I am explaining this human calamity,this Greek Tragedy we opted.And I am blocked!

    Indian Express reports:

    Modi ahead of us ... visits need to be backed up with action on ground: Raghuram Rajan

    Modi ahead of us ... visits need to be backed up with action on ground: Raghuram Rajan

    Reserve Bank Governor Raghuram Rajan today described Prime Minister Narendra Modi as being "ahead of us" but said his visits abroad need to be backed up with "action on the ground".

    Pay off time for PM Modi: India displaces China, US as the top FDI destination in 2015

    First Post reports:


    The report titled "India grabs investment league pole position" was forwarded by the Finance Ministry, according to a PTI report. The report has come just as Modi has concluded his tour of Ireland and the US. He is slated to visit the UK in November.


    The FT report said India has attracted $31 billion of FDI in the first half of 2015, ahead of $28 billion of China and $27 billion of the US.


    "A ranking of the top destinations for greenfield investment (measured by estimated capital expenditure) in the first half of 2015 shows India at number one, having attracted roughly $3 billion more than China and $4 billion more than the US," the FT report said.


    The report also said the country is in the pole position to pass both China and US in FDI flows this year as it has outperformed others in economic growth, bucking the apparent slowdown in emerging markets.


    "With midyear data on greenfield FDI now in, 2015 looks to be a milestone year for India following its impressive performance in 2014," the report said.


    India is tracking well ahead of where it was at this time last year: it has more than doubled its midyear investment levels, attracting $30 billion by the end of June 2015 compared with $12 billion in the first half of last year.


    India's achievement this year is particularly significant, considering that 97 of the 154 countries that are counted as emerging markets are seeing a decline in capital spend year on year in greenfield projects, the report pointed out.


    The report said that in 2014 India ranked fifth in terms of capital investment, after China, the US, the UK and Mexico.


    "In a year when many major FDI destinations posted declines, India experienced one of 2014's best FDI growth rates, increasing its number of projects by 47%," it said.


    That year India saw a capital inflow of $24 billion, while China topped with $75 billion and the US at the second slot with $51 billion. The UK with a $35 billion capex was the thrid and Mexico ($33 billion) the fourth.


    For sure, the FT report will help the government answer the criticisms on frequent foreign tours made by Modi and also the slow pace of some of the much-needed reforms. The officials are already projecting the report as a stamp of approval for the various measures taken by the government over the last one year.


    "In the past one year, the government has initiated a number of measures to improve the investment climate and ease of doing business. Several policy initiatives and reforms have also been undertaken. The higher FDI inflows are reflective of the growing positive sentiment about India as an investment destination," economic affairs secretary Shaktikanta Das has told the Business Standard.


    With inputs from PTI

    And the alarming reality:

    Oct 01 2015 : The Economic Times (Kolkata)

    Revival Hopes Push Valuations Ahead of Profit Growth

    

    

    FY15 NET PROFIT for one out of every three of the BSE 500 companies is lower than what it was 5 years ago; PEs above FY11 average levels

    ET Intelligence Group: The gap between reality and expectations has widened in Dalal Street as investors continue to bet on hopes of a revival in the Indian economy. The outcome is valuations of some of the top companies running well ahead of their profit growth.

    And, chances are that a greater number of market participants would bet on a better economic environment after RBI's decision to aggressively cut rate. They also hope that lenders would pass on the cheaper rate.

    According to the ETIG's analysis, the current trailing PE multiples of 121 out of BSE200 stocks are above their five-year-ago (FY11) average levels. The cause of concern is that the FY15 net profit for one out of every three companies is lower than what it was five years ago.

    Market trackers believe that the bloom in valuation reflects high hopes of a better profit growth in the next two years.

    "Growth stories for these companies have changed over the past five years. Their current valuation multiples reflect the growth expectation in the next two-three years," said Hitesh Agrawal, research head, Reliance Securities.

    He added that companies with sound management and proven business models would continue to command higher valuation despite a profit deceleration caused by slack demand. Most of the 39 com A panies (out of 121) that reported lower profits compared with the five-year-ago level belong to cyclical sectors like banking, capital goods, cement and power. The rest are in businesses like entertainment and media, fast moving consumer goods (FMCG), pharmaceuticals, real estate and telecom.

    ACC, Adani Power, Bajaj Finserv, BHEL, Crompton Greaves, Grasim Industries, Hindalco, Larsen & Toubro, Shree Cement, Tata Power, and Wockhardt are some of the companies that continue to enjoy higher PE multiples but reported lower profits for the full year ended March 31, 2015 than that recorded five years ago.

    "Over the past two fiscals, we have witnessed that analysts begin the year with high growth expectations only to taper them by the end of the year. Investors are now hoping that growth will resume in the next two years, which has generated valuation froth," said Daljeet Singh Kohli, MD, IndiaNivesh.



    

    




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    Lathi Charge on Left Activists in Central Kolkata creates Chaos while office employees were returning HOME.Police did not spare them!

    রক্তাক্ত বামেদের লালবাজার অভিযান: রণক্ষেত্রে বেন্টিঙ্ক স্ট্রিট, পুলিসের বেপরোয়া লাঠি চার্জ, মাথা ফাটল দীপক দাশগুপ্তের


    Palash Biswas

    Photo from 24 Ghanta Live with thanks!

    I am afraid that this unprecedented violence to reset the power politics equations has to continue further and the opponent sides in the battle would not spare the masses hitherto detached and watching,enjoying the yet another Tamasha LIVE on TV.

    It is senseless politics as Mamata Banerjee administration opted again for Lathi Charge on Left Activists in Central Kolkata creates Chaos while office employees were returning HOME.Police did not spare them!


    The scenario looked like some Dhobighat where the police instead of the washing people were beating,thrashing without mercy men and women like some clothes to be cleaned!


    It is a repeat of NABANA Abhiyan.It seems the Lft has decided to fight it out right into the heart of Kolkata and the Left Forces intensify the all out attack against Mamata Banerjee regime and she,her government and police together gear up to answer the bricks with stones.


    Pardon me,anybody would condemn the brutal lathicharge on innocent masses anywhere anytime,but it looks not to be a perfect Marxist Mass Movement as the Left Activists have opted to concentrate in Kolkata only which would be never enough for return of the Left Rule for yet another time.


    Thus it happened.The Kolkata Police on Thursday yet again lathi-charged on the Communist Party of India (Marxist) members, injuring several people.


    I want to remind that this is like a repeat incident when on August 27, the Left activists including CPI(M) Politburo member Biman Bose and 25 policemen were injured during pitched battle with the police when the cops tried to stop their march to the state secretariat.

    Left parties protest against law and order situation, in

    Kolkata, Police lathicharge protesterspic.twitter.com/fd3TAJKiG2

    — ANI (@ANI_news) October 1, 2015


    As per the latest report, the Left activists along with CPI members were beaten seriously while they were marching their rally towards the Lal Bazaar Police Headquarter, opposing the stance taken by the police and the state government on August 27.


    In Thursday's incident, CPI-M Central Committee member Deepak Dasgupta was injured by the lathi-charge and was bleeding from his head. Also, reports say that women have been lathi-charged by the male policemen.


    Though the state chief secretariat had advised the police to handle the situation carefully and not to opt for lathi-charge, the police used bricks to disperse the crowd, alleged the protesters.


    The CPI-M party workers alleged that many of their members were injured by the police. Some had even alleged that while trying to flee the scene, they were being chased and were made to suffer the pain of lathis.

    However, police claimed that they were made to receive rotten eggs from the protesters.


    CPM TMC clash in MurshidabadCPM, TMC workers clash in Murshidabad. ANI


    Mind you,West Bengal witnessed sporadic cases of violence in the first few hours of the nationwide strike called by Left-affiliatedtrade unions on 2nd September. Over 15 crore people from 10 trade unions were expected to join a nationwide one-day strike that is underway since morning.

    In Murshidabad district's Berhampore, Trinamool Congress supporters allegedly pelted stones on CPM supporters leaving several injured. Left leader, Moinul Hassan and seven others, including two women were seen attacked by Trinamool Congress supporters. They were seriously injured in the brick batting and are admitted to the local hospital.




    On August 27, the CPI(M) affiliated All India Kisan Sabha (AIKS) along with ten other Left Front affiliated peasant fronts organised the march to the secretariat in support of their 17-point charter of demands on issues such as farmer suicides and farmers's rehabilitation who affected by the recent floods.

    Then,a rally led by the Left peasant's organisations in the city turned violent after the police stopped their 'Nabanna Abhijaan'– march to the state secretariat on Thursday. The Left supporters started brick-batting and pushed the guard rails against the police officers, leaving as many as 25-30 officers with serious injuries.

    Memories of another day!

    রক্তাক্ত বামেদের লালবাজার অভিযান: রণক্ষেত্রে বেন্টিঙ্ক স্ট্রিট, পুলিসের বেপরোয়া লাঠি চার্জ, মাথা ফাটল দীপক দাশগুপ্তের

    বামেদের লালবাজার অভিযান ঘিরে অগ্নিগর্ভ পরিস্থিতি ধর্মতলা অঞ্চলে। শহরের বিভিন্ন প্রান্ত থেকে লালবাজারমুখী তিনটি মিছিলে পুলিসের সঙ্গে ধ্বস্তাধ্বস্তি শুরু হয়ে গেছে বাম সমর্থকদের। বেন্টিক স্ট্রিটে মিছিল আটকে দিয়েছে পুলিস। ধর্মতলায় প্রাথমিক ব্যারিকেড ভেঙে পড়েছে। পাঁচ স্তরীয় নিরাপত্তা ব্যবস্থার তৃতীয় স্তর ভাঙার পরেই রণক্ষেত্রের চেহারা নেয় বেন্টিঙ্ক স্ট্রিট সহ গোটা ডালহাউসি চত্ত্বর।পুলিসকে লক্ষ্য করে পচা ডিম, ইঁট ছোড়ার অভিযোগ। পাল্টা ব্যাপক লাঠি চার্জ করছে পুলিস। এই ধ্বস্তাধ্বস্তিতে অসুস্থ হয়ে পড়েছেন বর্ষীয়ান সিপিএম নেতা বিমান বসু। বামেদের লালবাজার অভিযান প্রতিহত করতে নজিরবিহীন নিরাপত্তার বন্দোবস্ত। রীতিমতো পাঁচ স্তরীয় নিরাপত্তা বলয় গড়ে তোলা হয়েছে। প্রথম স্তরে মহিলা পুলিসবাহিনী, দ্বিতীয় স্তরে ঢাল বাহিনী, তৃতীয় স্তরে তৈরি রাখা হয়েছে লাঠি বাহিনী। এর পরেই প্রস্তুত রাখা হয়েছে RAF-কে। পরবর্তী স্তরে লোহা ও ফাইবারের ব্যারিকেডও দাঁড় করিয়ে দেওয়া হয়েছে। একেবারে শেষে রাখা  হয়েছে জলকামানকে। পুলিসি এই তত্‍পরতাকে কটাক্ষ করেছেন সিপিএমের রাজ্য সম্পাদক সূর্যকান্ত মিশ্র।

    http://zeenews.india.com/bengali/kolkata/lalbazar-abhiyan_132114.html



    • Lathi ChargeImage courtesy: Team iamin

    Then Several Left activists including CPI(M) Politburo member Biman Bose and 25 policemen were injured as Left Front supporters fought a pitched battle with the police when the cops tried to stop their march to the state secretariat. The Police resorted to lathicharge in Kolkata (rpt) in Kolkata, used water canons and lobbed teargas shells in Howrah (rpt) in Howrah to disperse the agitating Left Front activists.

    On 2nd September,Members of trade unions clash with police in Kolkata.

    আইন রক্ষার দাবিতে আজ

    লালবাজার অভিযান

    নিজস্ব প্রতিনিধি

    কলকাতা, ৩০শে সেপ্টেম্বর— ফাইল মাথায় টেবিলের তলা থেকে বেরিয়ে আসুক পুলিশ। শাসক দলের 'অর্ডার'নয়, 'ল্য'মেনেই অন্তত কাজ করুক পুলিশ প্রশাসন। মহানগরীর নাগরিক জীবনকে সুরক্ষিত রাখুন আইনের রক্ষকরা।


    দাবি এই শহরের মানুষের। কলকাতাবাসীর সেই দাবিকে সোচ্চারে পৌঁছে দিতেই বৃহস্পতিবার বিকালে লালবাজার অভিযানে যাবেন এই শহরের হাজার হাজার বামফ্রন্ট কর্মী। দলদাসের ভূমিকা থেকে সরে এসে পুলিশ আইনশৃঙ্খলা রক্ষা করুক, লালবাজারে গিয়েই কলকাতার মানুষের সেই আবেদন জানিয়ে আসবেন বামফ্রন্ট নেতৃত্ব। বৃহস্পতিবার বিকাল পাঁচটায় শহরের তিন জায়গা থেকে মিছিল যাবে কলকাতা পুলিশের সদর দপ্তর লালবাজারে। ওয়াই চ্যানেল-ডোরিনা ক্রসিং, সুবোধ মল্লিক স্কোয়ার এবং কলেজ স্কোয়ার থেকে আলাদা আলাদা তিনটি মিছিল হবে। আগে ঠিক ছিল মহম্মদ আলি পার্ক থেকে একটি মিছিল যাবে লালবাজারের দিকে। যদিও পুলিশের বারংবার অনুরোধে তা পরিবর্তন করে কলেজ স্কোয়ার থেকেই মিছিল করার সিদ্ধান্ত নিয়েছে কলকাতা জেলা বামফ্রন্ট। বিমান বসু, সূর্য মিশ্র, মহম্মদ সেলিমসহ রাজ্য বামফ্রন্টের নেতৃবৃন্দ মিছিলে অংশ নেবেন।


    তবে কলকাতা জেলা বামফ্রন্টের ডাকে বৃহস্পতিবার লালবাজার চলো কর্মসূচিতে কলকাতা পুলিশ আদৌ সহযোগিতার পথে যে হাঁটবে না তা বুধবার কলকাতা বামফ্রন্টের প্রতিনিধিদলের সঙ্গে আলোচনাতে তা পরিষ্কার করে দিয়েছেন পুলিশের শীর্ষ আধিকারিকরা। লালবাজার অভিযান নিয়ে বুধবার দুপুর ১টা নাগাদ সদর দপ্তরে পুলিশ প্রশাসনের অনুরোধে কলকাতা জেলা বামফ্রন্টের প্রতিনিধিরা আলোচনায় বসেছিলেন। বৈঠকে বারেবারে উঠে আসে মঙ্গলবার রাতে বেলেঘাটায় তৃণমূলীদের আক্রমণ এবং সেই সঙ্গে পুলিশের নিষ্ক্রিয়তার কথাও। এদিনের বাম প্রতিনিধিদলের নেতৃত্ব দেন কলকাতা জেলা বামফ্রন্টের বর্ষীয়ান নেতা দিলীপ সেন। প্রতিনিধিদলে ছিলেন অনাদি সাহু, তরুণ ব্যানার্জি, জীবন সাহা, প্রবীর দে, তপন মিত্র প্রমুখ। কলকাতা পুলিশের তরফে এদিনের বৈঠকে বসেছিলেন কলকাতা পুলিশের যুগ্ম কমিশনার (সদর) রাজীব মিশ্রসহ লালবাজার পার্শ্ববর্তী এলাকার তিন ডেপুটি পুলিশ কমিশনার। উপস্থিত ছিলেন কলকাতা পুলিশের যুগ্ম কমিশনার (ইনটেলিজেন্স) দিলীপ ব্যানার্জি।


    পুলিশের তরফে প্রথম থেকেই মিছিল না করার প্রস্তাব দেওয়া হয়েছিলো। বামফ্রন্ট প্রতিনিধিরা দৃঢ়তার সঙ্গেই তা নাকচ করে দেন। এরপরে পুলিশ তিন দিক থেকে আসা মিছিলকে এক জায়গায় মিশিয়ে দেওয়ার প্রস্তাব দেয়। কিন্তু এই প্রশ্নেও নিজেদের ঘোষিত কর্মসূচির অবস্থান থেকে সরেননি বাম প্রতিনিধিদল। কলকাতা পুলিশের যুগ্ম কমিশনার (সদর) রাজীব মিশ্রকে পরিষ্কার বলে দেওয়া হয়, বৃহস্পতিবারের লালবাজার চলো কর্মসূচি শান্তিপূর্ণভাবেই হবে। তবুও পুলিশ আটকে দিলে যেখানে আটকে দেবে সেখানে দাঁড়িয়েই চলবে বিক্ষোভ সমাবেশ। লালবাজার চলো অভিযানের ডেপুটেশন খোদ পুলিশ কমিশনারের হাতেই দেওয়া হবে বলে এদিন পরিষ্কার জানিয়ে দিয়েছেন প্রতিনিধিদল।


    পরে বামফ্রন্ট নেতৃত্ব স্পষ্টভাবে জানান, আমরা শান্তিপূর্ণভাবেই কর্মসূচি করতে চাই। তবে যদি পুলিশ বাধা দেয়, আমাদের মিছিল আটকে দেয় তবে সেই বাধা অতিক্রম করেই লালবাজার পর্যন্ত যেতে বদ্ধপরিকর থাকবেন মিছিলে অংশগ্রহণকারী মানুষজন। পুলিশের কথায় কর্মসূচির চরিত্র বদলে যাবে না। পুলিশ যদি অবাঞ্ছিত পরিস্থিতি তৈরি করতে চায় তাহলে তার দায় বর্তাবে সরকার, প্রশাসনের ওপরেই।


    গোটা দেশের বিভিন্ন রাজ্যে অপরাধের হার ও প্রবণতা নিয়ে সমীক্ষা চালানো একটি বেসরকারি সংস্থার সর্বশেষ রিপোর্টে দেখা গেছে, গত তিন বছরে কলকাতা শহরে অপরাধ বৃদ্ধির হার ৭৩.১৭শতাংশ। সংগঠিত অপরাধ, ডাকাতির ঘটনার হার প্রায় ৪৯ শতাংশ। ন্যাশনাল ক্রাইম রেকর্ড ব্যুরোর সাম্প্রতিক রিপোর্ট জানাচ্ছে কেবলমাত্র ২০১৪ সালেই কলকাতা শহরে কগনিজেবল অফেন্স অর্থাৎ গ্রেপ্তারি পরোয়ানা জারি হয়েছে এমন অপরাধের সংখ্যা ২৬হাজার ১৬১টি।


    প্রকাশ্যে শহরের রাস্তায় তৃণমূলী দুষ্কৃতীদের গুলির লড়াইয়ে প্রাণ হারাচ্ছেন সাধারণ যুবক, সামান্য কলেজের ছাত্র সংসদ নির্বাচনে তৃণমূলের গুলিতে পুলিশ অফিসার লুটিয়ে পড়ছেন রাস্তায়, নির্বাচনের দিন তৃণমূলের গুলি লেগে হাসপাতালে ভর্তি হচ্ছেন পুলিশকর্মী - এ দৃশ্যই ক্রমেই সহজলভ্য হয়ে উঠেছে কলকাতা মহানগরীতে। রাতের কলকাতায় পুলিশি নজরদারি বলে যে কিছু নেই তা বারবার প্রমাণ হতে থাকা সত্ত্বেও কোন ব্যবস্থা নেননি উর্দিধারীরা। শাসক তৃণমূলের শীর্ষস্তর থেকে আসা প্রশ্রয়েই যে দুষ্কৃতীরা বেপরোয়া হয়ে উঠেছে তা বারেবারে প্রমাণিত হয়েছে। সূত্রপাত হয়েছিল ২০১১ সালের নভেম্বরের প্রথম সপ্তাহেই। সেদিনই মুখ্যমন্ত্রী ইঙ্গিত দিয়েছিল, অপরাধীরা যাই করুক না কেন তৃণমূলের ছাতার তলায় থাকলে সাত খুন মাফ। ২০১১ সালের ৬ই নভেম্বর রাতে শব্দবিধি লঙ্ঘনের দায়ের ভবানীপুর থানার পুলিশ চারজনকে গ্রেপ্তার করে। প্রতিবাদে রাতেই তৃণমূলীরা থানায় হামলা চালায়, ঘেরাও করে। খবর পৌঁছায় মুখ্যমন্ত্রীর কানে। মধ্যরাতেই সপার্ষদ মুখ্যমন্ত্রী হাজির থানায়। তৎকালী পুলিশ কমিশনার রঞ্জিত পচনন্দার সামনেই অভিযুক্তদের ছাড়িয়ে নিয়ে চলে যান মুখ্যমন্ত্রী। সেদিনই যে ছবি আঁকা হয়েছিল তার পুনরাবৃত্তি ঘটেছে শহরের সব প্রান্তেই।


    বেলেঘাটায় মঙ্গলবার রাতে তৃণমূলী হামলার ঘটনায় এদিন রাত পর্যন্ত কাউকে গ্রেপ্তার করে উঠতে পারেনি পুলিশ। সুকান্ত মঞ্চের সামনে সেই জায়গাতেই এদিন প্রতিবাদ সভা করার কথা ছিল। কিন্তু সেখানেই তৃণমূলীরা এদিন মঞ্চ বেঁধে রাখে যাতে বামফ্রন্ট নেতৃত্ব সেখানে সভা করতে না পারে। পুলিশ এখানেও দর্শকের ভূমিকায়। পুলিশ-তৃণমূলী এই যৌথ সন্ত্রাসের প্রতিবাদে ও লালবাজার অভিযান সফল করার আহ্বানে এদিন রাতে বেলেঘাটা থানার বিপরীতে প্রতিবাদ সভা হয়। বক্তব্য রাখেন মানব মুখার্জি, অনাদি সাহু, রূপা বাগচী, জামির মোল্লা, ইন্দ্রজিৎ ঘোষ, ধ্রুবজ্যোতি চক্রবর্তী, ফরওয়ার্ড ব্লকের ঝুমা দাস। সভাপতিত্ব করেন প্রশান্ত চ্যাটার্জি।


    'লালবাজার চলো'কর্মসূচি সফল করতে এদিন দুপুরে কলকাতা কর্পোরেশনে শ্রমিক-কর্মচারীরা মিছিল করেন। মিছিল শেষে সভাও হয়। কলকাতা কর্পোরেশন এলাকার ১৪১টি ওয়ার্ড এলাকাতেই এদিন চলে প্রচার অভিযান, মিছিল, পথসভা।

    - See more at: http://ganashakti.com/bengali/news_details.php?newsid=72910#sthash.K3VO4DqH.dpuf








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    When Narendra Modi CRIED in USA . . . 
    *****Not Even ONE Lady Wiped Modi's TEARS!*****

            by Ashok T Jaisinghani

       It is a GREAT PITY that NOT even ONE kind-hearted LADY in the audience took the GOLDEN OPPORTUNITY of using her HANDKERCHIEF for WIPING the TEARS of our great Prime Minister Narendra Modi, when he CRIED publicly in USA, especially as he was SHEDDING TEARS for the STRUGGLES of the WOMAN who has been his MOTHER! 

       Narendra Modi had started WEEPING as soon as he remembered his POOR MOTHER who had struggled hard to bring him up, for which she had to work as a MAID-SERVANT who CLEANED UTENSILS and FILLED WATER in the houses of other people. He also stated that his MOTHER had even WORKED as a LABORER. 

       Did ALL the LADIES present in the program held on September 27 at the FACEBOOK headquarters in San Jose, California, think that Narendra Modi was shedding FALSE TEARS like any ACTOR of Bollywood or any ROCKSTAR of Hollywood? Why even ONE LADY did NOT use her HANDKERCHIEF to WIPE the TEARS of Narendra Modi, the GREATEST and MOST POPULAR Prime Minister of India? 

    *****Did Modi CRY to get VOTES of POOR Biharis?*****

       Women know that many children CRY to ATTRACT the ATTENTION of others to themselves! By SHEDDING TEARS while talking about his POOR MOTHER, was Narendra Modi desperately trying to DRAW the ATTENTION of the POOR VOTERS of Bihar, especially the WOMEN, to vote for "HIM" in the Assembly elections? Or do his TEARS INDICATE his EXTREME FEAR that his party, the BJP, will get BADLY DEFEATED in the Bihar Assembly elections! 

       Will the POOR PEOPLE of Bihar TRUST and VOTE for the party of a high-flying FLAMBOYANT ROCKSTAR like Narendra Modi who is always HOBNOBBING and dealing with the RICHEST PERSONS of the world, ALL of whom are BILLIONAIRES? Should the POOR PEOPLE of Bihar believe in his BOMBASTIC BOGUS PROMISES, when the BJP just will NEVER be ABLE to keep them?  

    *****Should Children SHED TEARS for POOR PARENTS?*****

       Will Prime Minister Narendra Modi answer these BIG QUESTIONS: Should the children of CRORES of POOR maidservants, farmers and laborers SHED TEARS whenever they think about their HARD-WORKING PARENTS? Will Doordarshan and other TV producers show the CRORES of such children SHEDDING TEARS in the programs telecast on their channels? If Narendra Modi CRIES and SHEDS TEARS because his MOTHER cleaned utensils and filled water, why does he ask the Indian children and others to SWEEP the STREETS and CLEAN DIRTY TOILETS with JHAADOOS in his Swachchh Bharat Abhiyaan, when such work is MUCH WORSE and more demeaning? 

       Should we all CRY and SHED TEARS when we remember that Mahatma Gandhi, known as the "FATHER of the NATION," even cleaned TOILETS?  
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    Black lies spread by the champions of merit

    http://www.merinews.com/article/black-lies-spread-by-the-champions-of-merit/15910074.shtml

     

    Sankara Narayanan

     

    01 October, 2015

     

    "To stop talking of caste is to shut one's eyes to the most important single reality of Indian situation. One does not end caste merely by wishing it away. A 5000 year long selection of abilities has been taking place. Certain castes have become especially gifted. Thus for instance the Marwari Bania is on top with regard to industry and finance and the Saraswat Brahmin in respect of intellectual pursuits. It is absurd to talk about competing with these castes unless others are given preferential opportunities and privileges," expressed candidly, albeit brutally, by Dr. Ram Manohar Lohia in his book "The Caste System".

     

    Lohia in his book added, "I must here make distinction between opportunities for employment and those for education. No one should be turned away from the portals of an educational institution because of his caste. Society would be perfectly justified in turning those away from its employment whom it has so far privileged. Let them earn their living elsewhere. Society is required alone to equip them with the necessary educational ability."

    What was absurd for Dr. Lohia has become, once again, the pet theme of the upper castes after the coronation of Narendra Modi. "Caste-based reservation's time is over. Job quota should be only on economic criterion,'' thunders RSS chief Mohan Bhagwat, duly Manish Tewari of Congress endorsing the view. Classes carried this matter to foreign shores too.

     

    TV news anchor Anchor Barkha Dutt's programme telecast from New York on September 23 at 9 PM (IST) in the context of the agitation of the Patel community in Gujarat is a pointer. The programme consisted of two parts. (i) A discussion with a number of Patels at an apparently Patel-owned restaurant in New Jersey. (ii) An interview and discussion with the renowned economist Prof. Jagdish Bhagwati of the Columbia University telecast in between the above discussion.

     

    At the end of questions to a number of individuals and their answers, the anchor asked those who wanted a review of the Reservation policy, changing it from caste-based Reservation to income-based Reservation to lift their hands and keep them lifted until she completed counting. All hands went up and she announced this fact. Perhaps to make matters doubly sure, she asked those who did not want such review of the Reservation policy to lift their hands and again she announced that not a single hand went up.

     

    Trailers of the interview with Prof. Bhagwati were telecast from the previous day to whet the appetite of viewers including an assertion of the professor that Reservation policy of India is a "disaster". He seemed to justify the agitation of the Patels on the basis of a rhetorical question: "If 90% of seats are reserved and a middle class family has to do with only 10% unreserved seats for its youth, what can such a family do?"

     

    Mr. P.S. Krishnan, former Secretary to GoI, Ministry of Welfare (also Member, National Commission for SCs and STs, Special Commissioner for SCs and STs, Member-Secretary, National Commission for Backward Classes Member, Expert Committee on Backward Classes etc), issued a detailed rebuttal in the media to each and every point discussed in the New Jersey talk show and Bhagwati's ill-informed utterances. Here under the correct information provided by the former secretary:

     

    Media objectivity should have required Barkha to gather an assemblage of SCs, STs and Socially and Educationally Backward Classes (BCs) and put the same questions to them. If she had done so she would have got exactly the opposite result. Media objectivity should have also required her to mention the proportions of the population in India of the two sets of communities holding the two views.

     

    A participant explained that earlier the condition of the BCs was bad. Therefore, caste-based Reservation was then necessary and Patels had accepted it. According to him, conditions have now changed and there is no need for Reservation for those castes. That well-meaning gentleman seems to have been cut off from the realities in Gujarat.

    He does not seem to be aware that before Madhav Singh Solanki, the first CM of Gujarat from the BCs came to power in 1980. None of the previous CMs (who were Brahmins/ Banias/ Patels) introduced Reservation for BCs. It was only Solanki who first introduced Reservation of a mere 10% for BCs in 1980. Immediately, some people of the upper castes, including prominently Patels, pounced upon the SCs who had nothing to do with the Reservation for BCs.

     

    Apparently, it was not only dislike of Reservation for BCs that provoked them, but a deep-seated inherited hostility to the SCs who had traditionally been only farm-servants and other labourers at beck-and-call of the upper castes. The fact that through Reservation for SCs, introduced in 1943 by the initiative of Dr Ambedkar, some SC persons had begun to get educated, progress and occupy positions of dignity was too much for the upper castes to stomach.

     

    Again in 1985, the State Government under Solanki announced increase in the BC Reservation quota to 28% as recommended by the Rane Commission, closer to the population of BCs. There was a widespread agitation against the Reservation by Patels and other upper caste students resulting in the withdrawal of the proposed increase. Later it was again introduced (27%) in 1994 in line with the Mandal Commission's recommendations and the GoI's order of 1990 thereon.

     

    The gentleman who said things have changed does not seem to be aware of the continuing practices of "Untouchability" and caste-based discriminations against SCs, including social and economic boycott, in Gujarat as in most States and regions of India. He also does not seem to be aware that in all parameters of development, welfare and life the SCs and STs are at the bottom, the Socially Advanced Castes (SACs) such as Patels, Brahmins, Banias are at the top, and the BCs come in between, usually closer to the SCs and STs than to the SACs.

     

    In Focus

    Barkha who comes off in TV programmes as well-informed in many matters must be aware of these facts, but did not seem to find it necessary to take the trouble of informing them of these facts.Should the presentations and programmes relating to Social Justice including Reservation she anchors not free from instinctive birth-based biases?

     

    Bhagwati, also a Gujarati, does not seem to be aware that in Gujarat the total per cent of Reservation is only 49% in posts in the services of the State as well as in seats in educational institutions. He does not seem to be aware that the Constitution of India as interpreted by the Supreme Court does not permit Reservation for social classes (SCs, STs and BCs) to exceed 50%. He also does not seem to be aware that except one State all other States abide by this limit.

     

    Another fact he is not aware of is that the single State's case where total Reservation has gone up to 69% (not 90% even in that State) is still before the Supreme Court. All these facts must have been known to the generally well-informed Barkha. But she did not find it necessary to place the record straight so that Bhagwati's comments could be based on realities and not some non-existent 90% Reservation chimera.

     

    Yet another important factor, which a learned Professor and an experienced media anchor should have laid their hands on, before entering into a free-wheeling attack on the Reservation policy of India, which was initiated by wise Maharajas well before Independence in order to rectify the imbalance, in governance and administration, of the monopoly or near-monopoly of a few castes and exclusion of most of the castes accounting for the bulk of the population, was to find out correct facts about the extent of Reservation in education, especially professional education, which is the main bone of contention.

     

    Taking medical, dental, physiotherapy and engineering colleges, the number of seats to which Reservation applies, namely, Government colleges, Government-Aided colleges (only 75% seats in Government-Aided colleges, the rest being management quota), and Autonomous colleges, is 11531, while the number of seats to which Reservation does not apply, namely, Private and "self-financing" colleges, PPP colleges and management quota part of Government-Aided colleges is 63438.

    Out of the seats to which Reservation applies, only 49% is reserved for SCs, ST and BCs; this comes to 5650 seats, the remaining 5881 being unreserved seats. Adding this also, the total number of unreserved seats rises to 69319. The ratio is 7.5% seats Reserved and 92.5% Unreserved seats.

     

    The 90% mentioned by Bhagwati is correct; but it is the proportion of Unreserved seats. Is there any room, for complaint by Patels or other SACs? Was it not the duty of one of the most renowned Professors of Economics in the world and one of the senior-most Indian Anchors to have taken these figures into account before indulging in imaginary chimeras of 90% Reservation and nostrums based on such utterly wrong diagnosis?

     

    Bhagwati vehemently characterized the Reservation policy of India as a "disaster". When Barkha drew him out further by specifically asking him whether this comment applied only to reservation for BCs and not Reservation for SCs and STs, he made it clear beyond doubt that his opposition was to Reservation for SCs and STs also. Both of them seemed to be unaware that Reservation policy which has prevented a disaster in India by giving part relief and hope for the deprived people of India who form the vast majority of the Indian population.

     

    Bhagwati referred to the Reservation policy as Mandal-based policy. Perhaps, he is not aware that Reservation in India started long before Mandal, that its beginnings were in 1902 and that it had covered the whole of peninsular India well before Independence and its main protagonists were enlightened and socially responsive Maharajas, and that even at the Central level, Reservation for SCs began before Independence in 1943 by the efforts of Dr Ambedkar, who was also an illustrious alumnus of the same Columbia University where Bhagwati's interview took place.

     

    Based on his diagnosis, which is totally off the mark, Bhagwati made the following suggestions:(I)Vastly increase the number of Unreserved seats. It will be unconstitutional to create and increase seats and not provide Reservation in them. In fact, even in the existing Unreserved private educational sector of seats, SCs, STs and BCs are kept out by flouting a Constitutional Amendment that was passed with virtual unanimity in 2005 empowering the State (the Central and State Governments) to reserve, by law, seats in educational institutions including private institutions for SCs, STs and Bcs. Since then the successive Governments at the Centre and most of the State Governments have been flouting this Constitutional amendment by not moving to get the required legislation passed.

     

    (2) Move from Reservation to "giving handicaps" in terms of marks even up to 30%. Bhagwati did not seem to be aware and Barkha did not inform him that the Supreme Court has laid down that in the case of BCs, the handicap of marks for admission should not exceed 10%, i.e., to say no BC should be admitted to Reserved seats unless his/her qualifying marks (in the qualifying examination) is within 10% of the marks obtained by the last of the Unreserved candidate admitted. In the final examination, at the end of the course, there is no handicap for SCs, STs or BCs. The marks they have to get for passing or for a Class/Division is the same for all candidates of all social classes.

     

    Reservation Not Cause of Vast Unemployment

    The story is the same in the employment sector also, though Bhagwati did not specifically refer to this. The total number of posts in the public sector in Gujarat, namely, the State Government, quasi-Government and local bodies is 711,000. Assuming an approximately 30-year cycle and, therefore, assuming approximately 3 per cent of posts falling vacant annually, the total number of posts that may be filled in each year may be 21330, of which reserved seats (@49%) would be 10452. The total number of educated job seekers registered in employment exchanges in Gujarat is 905,500. The reserved seats constitute only 1.15% of the total educated unemployed.

     

    Reservation cannot be blamed for the problems of poor members of the SACs who certainly deserve sympathy and appropriate help but not Reservation. The Arjun Sengupta Committee's Report has shown that poverty is much more among SCs, STs, BCs and Muslims than among SAC Hindus. The vast unemployment problem cannot be solved by the Reservation policy (Reservation policy was never intended to solve the unemployment problem but to counter inequality and imbalance in the composition of governance and administration and educational opportunities) or by tampering with the Reservation policy.

     

    Duty of Governments, Anchors, Scholarly Commentators and SACs in National Interest

    Anchors like Barkha and eminent scholars who comment on Reservation in a free-wheeling manner, taking a predictable position which is based on their birth, must familiarize themselves with the facts which the former secretary has provided them and realize that the purpose for which Reservation was started is yet unfulfilled and that purpose and the Constitutional mandate requires the adoption by all Governments of the full gamut of Social Justice measures (of which Reservation is only a part and not the whole) and implement them sincerely and enable the SC, ST and BC and every caste and tribe of them, to reach a level of Equality with SACs in all parameters and become capable of securing their due share of employment in and outside Government, seats in education at all levels in open competition, and really put an end to "Untouchability".

     

    It is the duty of the SACs to fully cooperate with this and voluntarily abjure from imposing "Untouchability" on SCs, while seeking legitimate help for the really poor among them within the range of the Constitution. Periodic sniping at the Reservation and Social Justice policies and hampering or sabotaging their full implementation will hinder the growth and development of the nation and its economy, which is our common goal and which is essential for effectively tackling widespread poverty, unemployment and underemployment.

     

    (The article is based on the response of Mr. P.S. Krishnan, Former Secretary, Govt. of India over the reservation issue. The author can be reached at psn.1946@gmail.com)

    .
    Arun Khote
    On behalf of
    Dalits Media Watch Team
    (An initiative of "Peoples Media Advocacy & Resource Centre-PMARC")
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    Press release – Rajasthan Police lathi-charge protesting school girls #WTFnews

    Posted by :kamayani On : October 1, 2015

    There is an ongoing  using the RTI to monitor and improve the quality of  in Rajasthan called Shiksha Ka Sawaal. The campaign was began after student protests at the Bhim Girl's school in Rajasthan. A number of similar protests began taking place all over schools in Rajasthan and the campaign spread. Yesterday a number of young  on protest in the district of Tonk were lathi-charged by the police.

    Activists demand lodging of FIR against concerned police officers
    A series of protests against the state of education and teacher shortages have been ongoing by students of  schools across Rajasthan. Today on the 30th of September, girls from Chauru (Aligarh), district Tonk, Rajasthan were lathi-charged by police persons while on protest. Some of the girls were seriously injured and have been hospitalised.

    Representatives of people's movements in Rajasthan report that police were sent to lathi charge the girls at the time at which they were supposed to meet the District Collector and the District Education Officer to discuss their problems. Activists asserted that the girls have the right to protest the dismal situation and quality of education in their schools. All children have the right to quality education. The girls had come out to protest the lack of teachers in their school and I instead of responses to their rightful demands, the girls faced physical and psychological violence.

    This is a shameful incident for the Rajasthan Government and its Department of Education. The present  government, the district administration and the police, collectively responded to the protesting girls with violence and cruelty. According to the Right to Education no child must face any kind of corporal punishment. The actions of the police are unconstitutional and illegal.

    A delegation of activists went to meet the DGP who admitted that the operation the police carried out was wrong and also spoke of taking action.

    Activists have made the following demands:
    1. An FIR be immediately registered against the policemen who carried out the operation
    2. The girls who have been seriously injured must get free medical care and compensation
    3. The District Collector and the District Education Officer must go meet the girls in hospital and those in the school in order to help stabilise the situation and help build trust and alleviate the legitimate fears of the girls
    4. The criteria and standards laid down for education must be immediately met including sanctioning adequate teachers and providing adequate infrastructure

    The following persons went to submit a memorandum to the Director General of Police: Renuka Pamecha, Nisha Sidhu, Kavita Srivastava, Kamal Tak, Mukesh Goswami, Bishambar.

    We are:
    the Shiksha ka Sawaal Abhiyan, PUCL, Soochna evum Rozgar Adhikar Abhiyan, Rajasthan Shiksha Vimarsh, NFIW, Mahila Poonarvas, Samuh Samiti,  Adhikar Kendra, Mazdoor Kisan Shakti Sangathan, Bharat Gyan Vigyan Samiti

    स्कूली बालिकाओं के साथ पुलिस की बर्बरता के खिलाफ जनसंगठनों का विरोध
    एवं
    मुख्य सचिव एवं डीजीपी से दोषी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग

    प्रेस नोट

    टोंक जिले के चोरु(अलीगढ) गाँव की छात्रों द्वारा की जा रही शिक्षकों की मांग पर बालिकाओं के साथ हुए लाठीचार्ज पर अनेक जनसंगठन पुलिस महानिदेशक से मिले साथ ही मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजा गया. संगठनों का कहना था कि जब जिला कलेक्टर या जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा बालिकाओं के साथ बातचीत का समय था उस वक्त पुलिस भिजवाकर बालिकाओं के ऊपर लाठी चलवाई गई. संगठनो का मानना है कि स्कूली बालिकाएं शिक्षा के अधिकार के तहत शिक्षकों की कमी की पूर्ती के लिए अगर सड़क पर भी विरोध करने उतर आईं तो यह उनका जायज हक़ था क्योंकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है. बालिकाओं की इस मंशा की सराहना करने के बजाय उनके साथ शारीरिक और मानसिक हिंसा की गई जो किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और निंदनीय है.
    यह राजस्थान सरकार और शिक्षा विभाग के लिए शर्मनाक बात है. अच्छी शिक्षा मांगने के लिए प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर वर्तमान भाजपा सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस ने क्रूरता एवं संवेदनहीनता दिखाई. बाल न्याय कानून के अनुसार बच्चों के प्रति किसी भी सूरत में किसी भी तरह की यातना नहीं दी जा सकती है इसके बावजूद पुलिस का यह बर्ताव किशोर न्याय (देखरेख) एवं संरक्षण अधिनियम के तहत दंडनीय है. जब विभिन्न जनसंगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस महानिदेशक से मिलने गया तो उन्होंने माना कि पुलिस की यह कार्यवाही गलत थी उन्होंने समुचित कार्यवाही करने बात भी कही.
    समस्त जनसंगठनों की ओर से निम्न मांग की गई:-
    दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराइ जाये.
    गंभीर रूप से घायल बालिकाओं का मुफ्त इलाज करवाया जाये एवं उन्हें मुआवजा दिया जाये.
    अस्पताल में भर्ती बलिकोँ एवं स्कूल में अध्ययनरत बकिलाओं से जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी मिलने जाए ताकि स्थितियों पुनः सामान्य हो सकें और बालिकाओं के मन में भरोसा कायम हो सके और पुलिस का खौफ भी निकल सके.
    स्कूल की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरुरी मापदंडों को पूरा किया जाये. शिक्षकों की उपलब्धता तुरंत सिनिश्चित की जाये, मूलभूत सुविधाओं को अति शीघ्र पूरा किया जाये.
    निम्न लोग पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन देने गए: रेणुका पामेचा, निशा सिद्दू, कविता श्रीवास्तव, कमल टाक, मुकेश गोस्वामी, विश्वम्भर
    हम हैं:-
    शिक्षा का सवाल अभियान, पीयूंसीएल, सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान, राजस्थान, शिक्षा विमर्श, एनएफआईडब्ल्यू, महिला पुनर्वास समूह समिति, दलित अधिकार केंद्र, मजदूर किसान शक्ति संगठन, भारत ज्ञान विज्ञानं समिति
    JOINT MEMORANDUM OF ORGANISATIONS

    Jaipur,
    30th September, 2015

    Sh, CS Rajan,
    Chief Secretary,
    Government of Rajasthan,
    Jaipur 302001

    Sh. Manoj Bhatt,
    DGP Rajasthan Police,
    Jaipur: 302015

    Subject: Immediate lodging of FIRs against the police in the matter of lathi charge of young students in Aligarh, Tonk District

    Dear Sirs,

    Please find enclosed the the press cutting which shows how the local police in Tonk lathi charged the young girls who were protesting rightfully for teachers in their school as they wanted to study.

    This protest should have heartened the district administration and instead of sending the police, the District Collector or the District Education Officer should have gone to the place and dialogued with the girls. They should have been encouraged in their quest for good education and not beaten up.

    Many of them now are in the hospital, physically injured and traumatised. Many were abused physically, touched and pushed. Is this the gift that the Government of Rajasthan and the Rajasthan police wishes to give its girls who are keen on education.

    We are keen that some steps are taken immediately the suggestions are as follows:
    · Suspension is not good enough, criminal cases must be lodged against the police officials who carried out lathi charge.
    · The District Collector, Education Secretary (primary)must make a visit to the area and console the girls and help them come out of the trauma of police action.
    · Sufficient teachers should be appointed and quality education be delivered.

    With regards,
    Kavita Srivastava ( PUCL, General Secretary)

    Renuka Pamecha ('s' Rehabilitation Group)

    Nisha Sidhu (NFIW)

    Mukesh Goswami (Shiksha ka Sawal)

    Vishwambhar (Digantar)


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     An Open letter to Dr Shashi Tharoor - A.K. Biswas,
            Mainstream, VOL LIII No 40,
            New Delhi, September 26, 2015
                           
       http://www.mainstreamweekly.net/article5956.html

    ... Let me point out, by 1911 Bengal, which was ahead in educational progress, presented a picture of peculiar interest for appreciation. W. H. Thompson, Superintendent of Census Operations of Bengal had observed that "The extent of literacy among males of the bhadralok seems to have reached its limit." As an alumni of St Xavier College, Calcutta, you (Shashi Tharoor), I guess need no elucidation of word 'bhadralok', who actually is an exclusive caste club for Brahmans, Baidyas and Kayasthas. The official, however, underlined that in the case of all three the last decade (1901-1911) "has shown great progress" in female education. Speaking factually, this self-styled bhadralok club did everything to frustrate the educational aspirations of all others in Bengal. The opponents of the Gokhale education bill were Sir Surendra Nath Banerjea whereas Mohammad Ali Jinnah and Madan Mohan Malviya extended their support.

    And ahead of Gokhale, coincidentally, M.K. Gandhi appeared on the scene as the icing on the cake. In his Hind Swaraj or Indian Home Rule, he displayed his inner self in 1909, "The ordinary meaning of education is knowledge of letters. To teach boys reading, writing and arithmetic is called primary education. A peasant earns his bread honestly. He has ordinary knowledge of the world. But he cannot write his own name. What do you propose to do by giving him a knowledge of letters? Will you add an inch to his happiness?....it is not necessary to make this education compulsory. Our ancient school system is enough..... We consider your modern school to be useless." The avatar of peace, swadeshi and non-violence consigned the issue of education for the masses to the abyss of darkness and ignorance. Could a greater violence to human progress and national prosperity be inflicted non-violently than what the Father of the Nation did? The beneficiaries had all good reasons to project him for the nation as what they did after his obscurantist, malefic outburst against education for the masses.

    So, when an American journalist wanted to point her finger to the pitfalls in the preachings of some of such tall leaders, she was dismissed as anti-Indian and lackey of imperialism. She wrote, "[......] if Indian self-government were established tomorrow, and if wealth rushed in, succeeding poverty in the land, India, unless she reversed her own views as to her 'untouchables' and as to her women, must still continue in the frontline the earth's illiterates...." [Italicised by this writer] This was Katherine Mayo, an erudite scholar. You know the intrinsic importance of Mayo's warning and the guideline for emancipation of India. The Indian attitude either to her untouchables or to her women has not changed at all. The untouchables have been rechristened as Scheduled Castes whom Gandhiji disgraced and disenfranchised millions by terming them as harijan, a word that actually means a bastard whose mother is without morality. ...
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    PRESS RELEASE 

    For Immediate Release                                                          28thSeptember, 2015

    Supreme Court dismisses Govt. of MP's Application denying right to land to thousands of adult sons of Sardar Sarovar oustees

    Right to land of every adult son as per 2000 & 2005 judgement remains intact

    NBA welcomes Order: SC Order establishes large scale pending R&R

    New Delhi: In a significant Order, the Social Justice Bench of the Supreme Court comprising Jst. Madan Lokur and Jst. Uday Umesh Lalit today dismissed an Application filed by the Government of Madhya Pradesh (GoMP) / Narmada Valley Development Authority (NVDA) seeking a 'modification / clarification' of the Apex Court's previous judgements of 2000 and 2005, thereby denying right to land of a few thousand adult sons of the Sardar Sarovar Project (SSP) affected farmers.  

    The Hon'ble Court held among other things that the Application by State of MP suffers from gross delay / laches having being filed many years after the judgements were issued (upholding the right to land of the SSP adult sons) and the rights / entitlements already accrued to the oustees in principle cannot be taken away. The Bench also had to take note of the fact that while the entitlement of most of the adult sons have already been recognized many many years ago, one set of oustees have been offered land / Special Rehabilitation Package (5.5. lakhs for 5 acres) since the judgement of 15/3/2005 of the Apex Court and another set of oustees are being denied the same; this would result in a clear violation of Article 14 of the Constitution which guarantees a fundamental right to equality. Terming this "not to be good governance", the Court summarily dismissed the Application.    

    Arguing for the oustees, Adv. Sanjay Parikh stated that besides being un-maintainable, the Application is based on a gross misinterpretation of the 2011 judgement of the Apex Court, in the Omkareshwar Dam case, which is not applicable to the Sardar Sarovar oustees. He said that as per the Narmada Tribunal Award and the 2005, 2005 judgements, all adult sons are un-disputably entitled to 5 acres of cultivable and irrigable land. He also informed the Court that the NCA, R&R Sub-Group and the GRA, all 3 authorities concerned with the SSP oustees have already taken decisions / issues orders to the effect that the Omkareshwar judgement if not applicable on SSP and the SSP adult sons are entitled to land allotment separately.

    NBA and all the SSP oustees welcome the Order of the Hon'ble Court which is not just an affirmation of the judgements of 2000 and 2005 of the Court, but also is a vindication of the rights and struggle of thousands of adivasis and other farmers, who have been waiting for land-based rehabilitation since many years and many of their families have also faced unlawful submergence in the previous years.

    The effect of today's order is that all the adult sons of the Sardar Sarovar Oustees would be entitled to and have to be allotted 5 acres of cultivable land separately. This includes hundreds of farmers who have been entangled in the fake registries scam (almost 2000 + oustees to be finalized by the Jst. Jha Commission), 1,500 oustees who been received only one instalment of cash but could not purchase land and hundreds of those who have been given uncultivable land out of the land bank. About 500 applications pending before the GRA (M.P.) can also now be immediately decided in the favour of the adult sons on the basis of today's order.

    The Respondents in this case were represented by Adv. Sanjay Parikh, assisted by Adv. Clifton Rozario and Adv. Ninni Susan and Medha Patkar, who is a petitioner-in-person in the connected matters. GoMP was represented by ASG Adv. Patwalia and the NCA by ASG Tushar Mehta.  

    Mukesh              Babu Awasya                      Rahul Yadav                  Contact Ph: 09179148973 


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    'पर्याप्त पुनरावृत्ति से लोगों की मनोवैज्ञानिक समझ बनाकर यह साबित करना नामुमकिन है कि एक चौकोर वर्ग, असल में एक गोलाकार चक्र है. ये महज शब्द हैं और शब्दों को तब तक तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है जब तक कि वे विचारों का जामा पहनाकर उन्हें बदल ना दे.'
    -जोसेफ गोएबल्स
    आईआईटी मद्रास प्रशासन द्वारा आंबेडकर पेरियार स्टडी सर्किल (एपीएससी) पर लगाए गए प्रतिबंध पर छिड़े विवाद के बीच में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गेनाइजर ने प्रतिबंध का विरोध करने वालों को कम्युनिस्ट बताते हुए एक लंबा लेकिन भ्रमित संपादकीय अनमास्किंग स्यूडो आंबेडकराइट्स लिखा. इस प्रतिबंध ने देश और देश के बाहर विरोध को जन्म दिया था. संपादकीय ने विरोध करने वालों पर आंबेडकर को नहीं जानने का इल्जाम लगाया और कहा कि आंबेडकर हिंदूपरस्त थे और कम्युनिस्टों के खिलाफ थे. बेशक इसने एपीएससी पर प्रतिबंध को जायज ठहराया। दिलचस्प बात यह थी कि अपने मूल मुद्दे पर जोर डालने के लिए संपादकीय एनाइहिलेशन ऑफ कास्ट एक उद्धरण से शुरू होता है, जिसे आखिरकार आंबेडकर डॉट ओआरजी पर मेरे द्वारा पेश किए गए डिजिटल संस्करण से बड़े आलस के साथ उठाया गया था (न कि मूल पाठ से), और उसे मोटे अक्षरों में छापा गया: 'ब्राह्मणवाद वह जहर है जो हिंदू धर्म को बर्बाद कर देगा. अगर आप ब्राह्मणवाद को खत्म करते हैं तभी आप हिंदू धर्म को बचने में कामयाब हो पाएंगे.'अगर किसी भी तरह से एक झूठ को दोहराते रहने की गोएबलीय मंशा को परे भी कर दें, तो किसी को भी इस पर हैरानी होगी कि एक ऐसे उद्धरण का इस्तेमाल ही क्यों किया गया, जिसमें हिंदू धर्म के लिए तारीफ या हमदर्दी की झलक तक नहीं है. 1936 में सुधारवादी हिंदुओं से मुखातिब आंबेडकर ने यह समझाने की कोशिश की थी हिंदू धर्म को कौन सी बीमारी खाए जा रही है और कहा था कि ब्राह्मणवाद ही वह बीमारी है. सवाल यह उठता है कि क्या ब्राह्मणवाद को हिंदू धर्म से अलगाया जा सकता है? असल में, वे एक ही चीज के दो अलग अलग नाम हैं, जैसा कि खुद आंबेडकर ने ही कहीं दूसरी जगह साफ भी किया है. ऐतिहासिक तौर पर देखें तो हिंदू धर्म जैसी कोई चीज नहीं है; यह सिंधु नदी की दूसरी ओर मौजूद धर्म यानी ब्राह्मणवाद के लिए इस्तेमाल में लाया गया एक मध्ययुगीन शब्द है.

    बड़े बड़े झूठ

    बाबासाहेब आंबेडकर: राइटंग्स एंड स्पीचेज के पहले खंड के 78वें पन्ने पर मौजूद उस उद्धरण पर कूद कर जाने से पहले, संपादक को इस किताब की भूमिका में ही आंबेडकर का एक बेहतर उद्धरण मिल सकता था: 'मुझे तसल्ली होगी अगर मैं हिंदुओं को इस बात का अहसास करा सका कि वे भारत के बीमार लोग हैं और उनकी बीमारी दूसरे भारतीयों की सेहत और खुशहाली के लिए खतरे की वजह है.'यह इतना बता देने के लिए काफी है कि आंबेडकर हिंदुओं और हिंदू धर्म के लिए क्या सोचते थे. अगर आरएसएस सुनने को उत्सुक ही है तो अपने आखिरी दिनों तक खुद को विकसित करते रहने वाले आंबेडकर ने कहा था: 'अगर हिंदू राज हकीकत बन गया, तो इसमें संदेह नहीं कि यह इस मुल्क के लिए सबसे बड़ी तबाही होगा. हिंदू लोग चाहे जो कहें, यह लोकतंत्र के साथ नहीं चल सकता है. हिंदू राज को किसी भी कीमत पर रोकना होगा.' [पूर्वोक्त, खंड 8, पृ.358]. यह बात आंबेडकर ने अपनी किताब थॉट्स ऑन पाकिस्तान ऑर पार्टिशन ऑफ इंडिया में कही थी, जो आंबेडकर में काट-छांट करके उन्हें मुसलमानों से नफरत करने वाला बताने के लिए, आखिरकार आरएसएस की पसंदीदा किताब है. आंबेडकर की एक और किताब, हिंदू धर्म का दर्शन हिंदू धर्म के 'एक जीवन शैली'होने के दावे का जायजा लेती है और इसे 'आजादी, बराबरी, भाईचारे'के खिलाफ तथा इंसाफ और उपयोगिता के लिहाज से इसकी खामियों के आधार पर इसे पूरी तरह खारिज करते हैं. जब वे यह लिख रहे थे 'हिंदू धर्म ज्ञान को फैलाने को बढ़ावा देना तो दूर, अंधकार का सिद्धांत है'या 'हिंदू धर्म का दर्शन ऐसा है कि इसे इंसानियत का धर्म नहीं कहा जा सकता है'तो वे यकीनन हिंदुओं की तारीफ तो नहीं ही कर रहे थे. बेशक, ये बातें गोएबल्स के भक्तों को अपना यह झूठ फैलाते रहने से नहीं रोक सकेंगी कि आंबेडकर एक महान हिंदू थे.

    संपादकीय एक और हास्यास्पद कहानी सुनाता है कि एपीएससी पर प्रतिबंध का विरोध करने वाले कम्युनिस्ट थे. क्या आईआईटी के निदेशक को उनकी इस अलोकतांत्रिक कार्रवाई के खिलाफ लिखने वाले देश के जाने-माने वैज्ञानिक लोग कम्युनिस्ट हैं? जैसा कि संयुक्त राज्य अमेरिका में उदारवादियों को कम्युनिस्ट कहा जाता है, यहां आरएसएस तार्किक और लोकतांत्रिक लोगों को कम्युनिस्ट कहता है! भारत के कैंपस कभी भी कम्युनिस्ट नहीं रहे, जैसा कि आरएसएस का इल्जाम है. अगर ऐसा रहा होता तो आरएसएस कभी भी अपने कोटर से निकल पाने में कामयाब नहीं हुआ होता. बहरहाल, आंबेडकर के बारे में यह जो बड़ी बात कहता है वो ये है कि आंबेडकर कम्युनिस्ट विरोधी थे.

    यह सही है कि खुद आंबेडकर ने ही कहा था कि वे कम्युनिस्टों के खिलाफ हैं. हालांकि आरएसएस को यह अच्छे से पता होगा कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा था. उन्होंने ऐसा इसलिए कहा था कि उन्होंने देखा कि वे उसी [आरएसएस] के कुल-खानदान से हैं- वे कम्युनिस्ट ब्राह्मण लड़कों का एक गिरोह थे जो मार्क्सवादी उसूलों की रटंत लगाते थे लेकिन जातियों की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए ब्राह्मणवादी चरित्र दिखाते फिरते थे. 

    उनका कम्युनिस्ट-विरोधी रुख असल में तब के बंबई के कम्युनिस्टों के साथ हुए उनके कड़वे अनुभव से जन्मा था, जिन्होंने उनके कहने के बावजूद अपने तहत आने वाले कपड़ा मिलों में दलित मजदूरों के खिलाफ भेदभाव के व्यवहार को सुधारा नहीं. तब दलितों के लिए अलग सुराहियां होती थीं और उन्हें बेहतर मजदूरी वाले बुनाई विभाग में काम करने की आजादी नहीं थी, क्योंकि उसमें टूटे हुए धागों को थूक की मदद से जोड़ना पड़ता था. आंबेडकर ने हड़ताल में अपने शामिल होने की पूर्वशर्त के रूप में उनसे इस व्यवहार को रोकने को कहा, लेकिन उन्होंने महीनों तक इसकी अनदेखी की. जब उन्होंने हड़ताल तोड़ने की धमकी दी, केवल तभी जाकर वे माने. इसके बावजूद आंबेडकर 1938 की ऐतिहासिक हड़ताल में उनके साथ शामिल हुए, लेकिन वह खाई पाटी नहीं जा सकी. कम्युनिस्टों ने 1952 के आम चुनाव में एक खुला आंबेडकर विरोधी रवैया अपनाया और इन वजहों से आंबेडकर ने कम्युनिस्ट विरोधी बातें कहीं.

    इस तरह जहां आंबेडकर का कम्युनिस्ट विरोध ज्यादातर जाति के मामले में कम्युनिस्टों के व्यवहार से प्रभावित हुआ, वहीं उनके लेखन में इस बात के भी उतने ही सबूत मौजूद हैं जो कम्युनिज्म के लिए उनकी हमदर्दी की तरफ भी इशारा करते हैं. यह सही है कि वैचारिक लिहाज से अपने शुरुआती दिनों से फेबियनवाद से गहरे प्रभावित रहे आंबेडकर मार्क्सवादी नहीं थे. उन्होंने मार्क्सवाद से अपनी असहमतियों को जाहिर किया है, लेकिन कभी भी उन्होंने द्वंद्वात्मक भौतिकवाद, ऐतिहासिक भौतिकवाद और वैज्ञानिक समाजवाद के इसके बुनियादी सिद्धांत के स्तर पर जाकर बहस नहीं की. उन्होंने बजाहिर तौर पर 'आधार-अधिरचना'के चुनौती दिए जा सकने वाले जड़ सिद्धांत को भी चुनौती नहीं दी, जिसकी जाति को लेकर कम्युनिस्ट व्यवहार को बनाने में अहम भूमिका है. इसके बजाए, उन्होंने खुद को भी [आधार-अधिरचना के] इस फंदे में गिर जाने दिया और उन्होंने यह साबित करने में भारी मेहनत की कि हमेशा ही, राजनीतिक क्रांतियों से पहले धार्मिक क्रांतियां होती हैं. इस तरह दुर्भाग्य से उन्होंने असल में जातियों को अधिरचना यानी ऊपरी ढांचे का हिस्सा मान लिया. आंबेडकर सिर्फ एक बार अपेक्षाकृत विस्तृत बहस में गए और तभी उन्होंने, अपनी मृत्यु से महज एक महीना पहले, काठमांडु में मार्क्सवाद की बौद्ध धर्म के साथ तुलना की थी. उन्होंने साफ साफ कहा था कि बौद्ध धर्म और मार्क्सवाद, दोनों का मकसद एक ही था, लेकिन उन्हें हासिल करने के रास्ते अलग अलग थे. इसे समझाते हुए उन्होंने मार्क्सवाद में दो मुद्दों पर खामियां देखीं: एक कि मार्क्सवाद अपनी पद्धति के रूप में हिंसा का इस्तेमाल करता है और दूसरा कि यह लोकतंत्र में यकीन नहीं करता. हालांकि यहां भी वे मार्क्सवाद के सिद्धांत के बजाए, उसके व्यवहार को ही ध्यान में रख कर बोल रहे थे, लेकिन इससे यह बात साफ हो जाती है कि उन्हें किन बातों पर मार्क्सवाद से दिक्कत थी. चूंकि मकसद के मामले में मार्क्सवाद से उनकी कोई असहमति नहीं थी, तो उनकी बेकरारी इसकी बराबरी का एक ऐसा विकल्प खोजने की थी, जिसमें मार्क्सवाद की खामियां न हों। उन्होंने खुद को इस बात का कायल किया कि यह विकल्प बौद्ध धर्म था. ऐसे में, आरएसएस के लिए यह साफ हो जाना चाहिए कि आंबेडकर को कम्युनिस्ट-विरोधी और भगवापरस्ती के रंग में रंगना उसी के लिए भारी पड़ सकता है.

    और झूठ का कारोबार

    एक तरफ आरएसएस आंबेडकर को एक भगवा प्रतीक के रूप में अपनाने के लिए बेकरार रहा है, लेकिन दूसरी तरफ यह उनके रेडिकल विचारों को बर्दाश्त नहीं करता, जैसा कि एपीएससी के वाकए से साफ जाहिर है. संपादकीय ने एपीएससी पर पाबंदी को एक स्वायत्त संस्थान द्वारा की गई एक दंडात्मक कार्रवाई के रूप में जायज ठहराया है, जिसका सरकार से कोई लेना देना नहीं है. इसका यह सोचना पूरी तरह से अपमानजनक है कि भारतीय लोग भाजपा की मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के संदिग्ध तौर-तरीकों के बारे में नहीं जानते. इस पद के लिए पूरी तरह से नाकाबिल, प्रधानमंत्री के 'विशेषाधिकार'के रूप में नियुक्त, ईरानी इसी 'विशेषाधिकार'का इस्तेमाल करते हुए (अपनी तरह के) उतने ही नाकाबिल लोगों को अकादमिक अहमियत के राष्ट्रीय संस्थानों में नियुक्त करती रही हैं. येल्लाप्रगदा सुदर्शन राव की विवादास्पद नियुक्ति दोहराने के लिहाज से काफी जगजाहिर है: वे आरएसएस के अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना (एबीआईएसवाई) के आंध्र प्रदेश अध्याय के मुखिया थे जिनका शोध का कोई इतिहास नहीं है, उन्हें प्रतिष्ठित भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) का मुखिया बना दिया गया. अपने हिंदुत्व और ब्राह्मणवाद का गर्व से प्रदर्शन करने वाले राव ने आशंका के मुताबिक तीन इतिहासकारों को आईसीएचआर के पैनल का सदस्य बनाया: उनमें सभी एबीआईएसवाई से जुड़े हैं, नारायण राव उसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, ईश्वर शरण विश्वकर्मा उसके अखिल भारतीय महासचिव हैं और निखिलेश गुहा उसके बंगाल अध्याय के मुखिया हैं. ईरानी धड़ल्ले से शीर्ष संस्थानों में हिंदुत्वपरस्त या भाजपापरस्त व्यक्तियों की नियुक्ति कर रही हैं. आईआईएएस, शिमला के अध्यक्ष के रूप में चंद्रकला पाडिया, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में गिरीश चंद्र त्रिपाठी, वीएनआईटी, नागपुर के अध्यक्ष के रूप में विश्राम जामदार की नियुक्तियां मीडिया में आई कुछेक मिसालें हैं. आईआईटी दिल्ली के निदेशक; आईआईटी मुंबई के निदेशक मंडल के अध्यक्ष अनिल काकोडकर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति और मंत्रालय के अनेक अधिकारियों के साथ उनके मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हालिया विवाद, आरएसएस के हिंदुत्व के एजेंडे को लागू करने में उनके मनमानी से भरे तरीकों को दिखाते हैं. इसको मद्देनजर, एक गुमनाम शिकायत पर उनके द्वारा गौर किया जाना और आईआईटी मद्रास द्वारा भारी सरगर्मी के साथ एपीएससी पर पाबंदी लगाने की कार्रवाई यकीनन ही एक मामूली प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है.

    मुद्दे पर जब बहस तेज हुई, तो इसके सारे तथ्य खुल कर सामने आए. एपीएससी द्वारा जिस तथाकथित दिशा-निर्देश के बारे में बताया जा रहा था कि एपीएससी ने उसका उल्लंघन किया है, वे दिशा निर्देश असल में उस कथित उल्लंघन के वाकए के बाद लागू किए गए. उन्हें एपीएससी की उस बैठक के चार दिनों के बाद, 18 अप्रैल को जारी किया गया था. उनकी मान्यता वापस लेने वाले डीन ने पहले आंबेडकर और पेरियार के नामों पर अपनी नाखुशी जताई थी, और पर्याप्त रूप से अपने ब्राह्मणवादी झुकाव को जाहिर किया था. अजीबोगरीब रूप से यह इल्जाम लगाया गया कि एपीएससी की गतिविधियां छात्रों को दो गुटों में बांट रही थीं. हालांकि यह तथ्य अपनी जगह पर कायम है कि हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करने वाले विवेकानंद स्टडी सर्किल, आरएसएस शाखाएं, हरे रामा-हरे कृष्णा, वंदे मातरम, ध्रुव जैसे छात्र संगठन खुलेआम सांप्रदायिक आधार पर छात्रों को बांट रहे हैं, जिन्हें आईआईटी प्रशासन से अनेक तरह सरपरस्ती हासिल होती रही है. क्या हिंदुत्व संगठनों के प्रभाव में, अलग शाकाहारी मेस बनाने का आईआईटी मद्रास का फैसला छात्रों को बांटने वाला नहीं हैॽ असल में, एपीएससी ने इस कदम के खिलाफ 2014 में 'व्हीट ऑर मीट, डोन्ट सेग्रीगेट'अभियान चलाया था. जो भी हो, इतनी बदनामी के बाद आईआईटी प्रशासन को आरएसएस के फासीवादी खेल के खिलाफ विरोध जताने वालों की मांग के आगे झुकते हुए पीछे हटना पड़ा और एपीएससी की मान्यता को बहाल करना पड़ा.

    एपीएससी की जीत ने अनेक कैंपसों में ऐसे ही स्टडी सर्किल की शुरुआत करने और हिंदुत्व के संदेश का प्रतिरोध करने के लिए प्रेरित किया है. प्रतिष्ठित फिल्म ऐंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का एक और कैंपस भी ऐसी एक और हिंदुत्व नियुक्ति के प्रतिरोध में सुलग रहा है. शाबास छात्रो, सिर्फ आप लोग ही भारत के लिए सचमुच के अच्छे दिन ला सकते हैं!

    अनुवाद: रेयाज उल हक
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    29.09.2015

    अटाली की महिलाओं की आवाज़

    -डॉ. संध्या म्हात्रे व नेहा दाबाड़े

    (..........पिछले अंक से जारी)

    इरफान इंजीनियर व इन लेखकों का एक तथ्यान्वेषण दल, हरियाणा के बल्लभगढ़ के नजदीक अटाली गांव पहुंचा। यहां 25 मई और 1 जुलाई 2015 को साम्प्रदायिक हिंसा हुई थी। गांव के लगभग 150 मुस्लिम परिवारों में से अधिकांश अटाली छोड़कर भाग गए हैं। केवल कुछ ही परिवार वहां अब भी रह रहे हैं और वह भी इसलिए क्योंकि उनके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है।

    महिलाओं द्वारा हिंसा

    लगभग सभी समाजों और समुदायों में महिलाएं हाशिए पर रहती हैं और परिवार, समुदाय व गांव की निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बहुत कम होती है। विवाद की स्थिति में भी अक्सर देखा जाता है कि शांति की पुनर्स्थापना के प्रयासों और दोनों पक्षों के बीच बातचीत में उनकी भूमिका नगण्य होती है। यह स्पष्ट है कि ऐसी शांति, जिसकी स्थापना में 50 प्रतिशत आबादी की कोई भूमिका ही नहीं होगी, कभी स्थायी और पूर्ण नहीं हो सकती। अनुभव बताता है कि शांति निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं के योगदान को न तो नजरअंदाज किया जा सकता है और न कम करके आंका जा सकता है।

    परंतु हिंसा और महिलाओं पर केन्द्रित साहित्य हमें बताता है कि महिलाओं का इस्तेमाल हिंसा करने के लिए भी किया जा सकता है और किया जाता है। महिलाएं हिंसा की शिकार और हमलावर दोनों हो सकती हैं। 25 मई की हिंसा के बाद हमारी पहली यात्रा के दौरान हमें यह जानकर आश्चर्य व दुःख दोनों हुआ कि जिस हिंसक भीड़ ने मुस्लिम महिलाओं पर हमला किया था और उनके घरों पर पत्थर फेंके थे, उसमें महिलाएं भी शामिल थीं। एक ओर हम देख रहे थे कि महिलाएं बैलगाड़ी में घूंघट डालकर बैठी हुईं थीं तो दूसरी ओर वे खुलेआम हिंसा में भाग भी ले रहीं थीं।

    अपनी पहली यात्रा के दौरान हम उन मुस्लिम महिलाओं से मिले, जिनके घरों में तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी। उनमें से कुछ हाल में आर्थिक दृष्टि से समृद्ध हुए परिवारों की थीं। ऐसे परिवार, "शांति वार्ताओं"व विवाद से जुड़े कानूनी मसलों में बहुत रूचि ले रहे थे। अपने मकानों और घर के सामान को हुए नुकसान को हमें दिखाते हुए उनमें से कई रो पड़ीं।

    पिछले कई वर्षों से, सभी समुदायों और धर्मों की महिलाएं एक दूसरे के घर आती-जाती थीं और विभिन्न त्योहारों पर एक दूसरे से मिलती थीं। हिंसा के बाद, मुस्लिम महिलाओं का जाट महिलाओं पर से विश्वास उठ गया है। मुस्लिम महिलाओं के अनुसार, जाट महिलाएं ट्रकों में भरकर आसपास के गांवों में गईं और वहां के उन मर्दों को चूडि़यां भेंट कीं, जो हिंसा में भाग नहीं ले रहे थे।   

    शांति के पैरोकार        

    हिंसा की शिकार महिलाओं से मिलने के बाद, हमने जाट महिलाओं से मिलने का निर्णय किया ताकि हम यह समझ सकें कि उन्हें हिंसा में भाग लेने के लिए कैसे उकसाया गया। जब हम उनके घरों में पुरूषों से बातचीत कर रहे थे तब वे दरवाजों या पर्दों के पीछे छुपकर हमारी बातें सुन रहीं थीं। परंपरा के अनुसार, वे बातचीत में हिस्सा नहीं ले सकती थीं। जिन महिलाओं से हमने बातचीत की, उनमें से कुछ शांति स्थापना के प्रति उत्सुक दिखीं। उनका कहना था कि मुसलमानों को गांव में लौट आना चाहिए और गांव में मस्जिद बनने पर भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं थी। ये महिलाएं मुख्यतः उन जाट परिवारों की थीं, जिनके पुरूष भी समस्या का सुलझाव इसी ढंग से चाहते थे।

    इसके बाद हमने यह तय किया कि हम महिलाओं के एक समूह से पुरूषों की गैर-मौजूदगी में मिलेंगे। हमारे अनुरोध पर गांव के समृद्ध जाट परिवारों की कुछ महिलाएं इकट्ठा हुईं। हमने एक मंदिर के प्रांगण में उनसे बातचीत की। महिलाएं तीस से साठ वर्ष आयु समूह की थीं। हमने पुरूषों को वहां से जाने के लिए बहुत मुश्किल से मनाया और महिलाओं को उनका घूंघट हटाने के लिए राजी करना भी उतना ही मुश्किल था। हमने उनसे 25 मई (जिस दिन पहली बार हिंसा हुई थी) के घटनाक्रम के बारे में बताने को कहा। उन्होंने ऐसा अभिनय किया मानो वे कुछ जानती ही न हों और हमारे प्रश्नों के गोलमोल जवाब दिए।

    फिर  धीरे-धीरे हमने उनसे दूसरे मुद्दों पर बातचीत शुरू की, जिनमें गांव में महिलाओं की स्थिति शामिल थी। हमने उनसे जानना चाहा कि उनका शिक्षा का स्तर पुरूषों से कम क्यों है? वे उनकी तुलना में घर से बाहर कम क्यों निकलती हैं? सार्वजनिक स्थानों पर महिलाएं क्यों नहीं दिखतीं और निर्णय लेने की प्रक्रिया से उन्हें अलग क्यों रखा जाता है? इसके बाद वे कुछ खुलीं और उन्होंने हमसे बातचीत प्रारंभ की। उन्होंने हमें बताया कि मुस्लिम महिलाएं उनके खेतों में काम करती थीं और उनसे उनके करीबी रिश्ते थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुसलमानों को न तो गांव में लौटना चाहिए और ना ही उन्हें मस्जिद बनाने दी जानी चाहिए। यह तब, जबकि सबसे कट्टर मुस्लिम-विरोधी जाट पुरूष तक यह कह रहे थे कि अगर मुसलमान उनके द्वारा दायर किए गए मामले वापिस ले लें और मस्जिद न बनाने या इस संबंध में निर्णय को अदालतों पर छोड़ने के लिए राजी हो जाएं, तो वे गांव वापिस आ सकते हैं। परंतु महिलाएं तो किसी भी कीमत पर मुसलमानों को गांव में आने देने के लिए तैयार नहीं थीं।

    उन्होंने अपनी बात बिना किसी लागलपेट के कही। उन्हे इस बात का कोई संकोच नहीं था कि वे हम जैसे अजनबियों के सामने इतनी असहिष्णुतापूर्ण बातें कह रहीं हैं। उन्होंने कहा कि गांव के मुसलमान, फकीर समुदाय के हैं और जाटों द्वारा दी गई जमीनों और अन्य सहायता के बल पर ही जीते आए हैं। महिलाओं का कहना था कि अटाली में मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी। कुछ महिलाओं ने कहा कि गांव के बाहर मस्जिद बनाई जा सकती है। ऐसा ही प्रस्ताव कुछ जाट पुरूषों ने भी रखा था परंतु अन्य महिलाओं का कहना था कि न तो गांव के अंदर, न बाहर और ना ही कहीं और मस्जिद बननी चाहिए। एक महिला की शिकायत थी कि मस्जिदों में लाऊडस्पीकर लगे रहते हैं और उनसे अजान दी जाती है जिससे परीक्षाओं के दौरान बच्चों को परेशानी होती है (शब्बीर अली ने हमें वह लिखित समझौता दिखलाया जिसमें मुसलमानों ने यह वायदा किया था कि वे लाऊडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करेंगे)।

    मुसलमानों-जिनमें से अधिकांश को नीचे दर्जे के मजदूर माना जाता था-का एक छोटा सा हिस्सा आर्थिक दृष्टि से समृद्ध हो गया है और अपनी बात जोर देकर कहने लगा है। यह तबका जाट पंचायतों द्वारा निर्धारित गांव की परंपराओं का पालन करने से इंकार करने लगा है। यह जाटों को स्वीकार्य नहीं है। पक्की मस्जिद इस विद्रोह का प्रतीक बन सकती थी और गैर-हरियाणवी उलेमा गांव के मुसलमानों को इस्लामिक सिद्धांतों का ज्ञान देने लग सकते थे। इससे सामाजिक यथास्थिति परिवर्तित हो जाती और गांव का बरसों पुराना पदानुक्रम और परंपराएं टूटने लगतीं।

    हमने यह समझने की कोशिश की कि ये महिलाएं, जिनका अपने समुदाय में निचला दर्जा है और जिन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है, वे मुसलमानों के प्रति इतना कड़ा रूख क्यों अपना रहीं हैं? एक अधेड़ महिला ने यह चिंता व्यक्त की कि अगर मस्जिद बन जाएगी तो अन्य गांवों के मुसलमान वहां नमाज पढ़ने आने लगेंगे। कुछ महिलाओं ने कहा कि मुसलमान, गांव की जाट लड़कियों के साथ भाग जाते हैं जिससे गांव की परंपराओं और संबंधित परिवार व समुदाय की इज्जत पर बट्टा लगता है। परंतु वे किसी मुस्लिम लड़के के जाट लड़की के साथ भागने का एक भी उदाहरण नहीं दे सकीं। यह स्पष्ट था कि वे बाहरी तत्वों को जाट परंपराओं के लिए खतरे के तौर पर देखती हैं। अंतर्धार्मिक तो छोडि़ए उन्हें अंतर्जातीय विवाह भी मंजूर नहीं थे। वे चाहती थीं कि गांव के युवक, पुरानी परंपराओं के अनुसार माता-पिता द्वारा पसंद की गई युवती से ही विवाह करें, चाहे उनका शिक्षा का स्तर कितना ही ऊंचा क्यों न हो और उन्होंने गांव के बाहर की दुनिया कितनी ही क्यों न देख रखी हो।

    पितृसत्तात्मकता के प्रति महिलाओं का मोह

    हमने यह समझने का प्रयास किया कि महिलाएं हिंसा की ओर प्रवृत्त क्यों हुईं और उनके मन में मुसलमानों के प्रति पूर्वाग्रह क्यों पैठे हुए हैं। इसका उत्तर दिया 60 साल की कृष्णा ने, जो एक भजन गायिका हैं और अपने भाषणों में आग उगलती हैं। उन्होंने कहा कि गांव की महिलाएं भजन गाने के लिए इकट्ठा होती हैं और एक साथ मिलकर वाराणसी की तीर्थयात्रा पर जाती हैं। यही वे दो मौके हैं जब उनके साथ पुरूष नहीं होते। कृष्णा, महिलाओं के एक ऐसे ही समूह की नेता हैं और इस पर बहुत गर्व महसूस करती हैं। जब साध्वी प्राची अटाली आईं तब कृष्णा ने अपने समूह की सभी महिलाओं के साथ उनकी सभा में भाग लिया। साध्वी प्राची, भाजपा सांसद हैं और पितृसत्तात्मक हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा की कट्टर पैरोकार हैं। वे मुसलमानों के बारे में अनर्गल बातें कहने के लिए भी मशहूर हैं। साध्वी ने गांव की महिलाओं से कहा कि मुसलमान मूलतः धोखेबाज होते हैं और उन्हें किसी भी स्थिति में गांव में मस्जिद बनाने नहीं दी जानी चाहिए। साध्वी प्राची  दुबारा अटाली आकर वहां की महिलाओं को आगे की राह दिखाना चाहती थीं परंतु प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी। इस मुद्दे पर महिलाओं ने प्रशासन के प्रति रोष व्यक्त किया। साध्वी की यात्रा ने कृष्णा को अटाली की जाट महिलाओं का सर्वमान्य नेता बना दिया।

    महिलाओं ने हमें यह भी बताया कि उन्हें यह पता था कि गांव के युवा, जिनमें उनके लड़के शामिल थे, 25 मई को हिंसा करने की योजना बना रहे थे और वे उनकी "रक्षा"करने के लिए उनके साथ गईं थीं। जब इन युवकों को गिरफ्तार किया गया तो मां बतौर उनका यह कर्तव्य था कि वे इसका बदला लें और अपने बच्चों की मदद करें। इसलिए अब वे इस बात पर दृढ़ हैं कि मुसलमान गांव के युवकों के खिलाफ दायर किए गए मामले वापिस लें और कभी गांव वापिस न आएं।

    हिंसा में महिलाओं की भागीदारी

    हिंसा में महिलाओं की भागीदारी असामान्य नहीं है। बल्कि गुजरात, मुंबई और कंधमाल में हुए दंगों कि रपटों से तो ऐसा लगता है कि महिलाओं द्वारा हिंसा अपवाद नहीं बल्कि नियम सा बन गया है।

    तनिका सरकार व अन्य कई अध्येताओं का कहना है कि महिलाओें की आक्रामकता, उनकी कुंठा से उपजती है। घरों में उनके विरूद्ध हिंसा होती है और परिवार व समाज में उनका निचला दर्जा होता है। ये महिलाएं अपने निचले दर्जे को तो चुनौती नहीं देतीं परंतु दंगों में पुरूषों का मोहरा बनने के लिए आसानी से तैयार हो जाती हैं।

    निष्कर्ष

    हमारे समाज के पितृसत्तात्मक ढांचे के प्रकाश में यह समझना अधिक मुश्किल नहीं है कि हिंसा व साम्प्रदायिक तनाव के माहौल में महिलाओं का दमन और उनकी वंचना और बढ़ जाती है। दंगों के दौरान महिलाओं को आगे कर दिया जाता है। वे भड़काऊ नारे लगाती हैं और ईट-पत्थर फेंकती हैं परंतु दंगों के बाद, उन्हीं महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर जाने की आज्ञा नहीं होती और ना ही शांति स्थापना के प्रयासों में उनकी कोई भागीदारी होती है।

    वे पंचायतों की सदस्य नहीं बन सकतीं। वे अपने घरों को लौट जाती हैं और अपने चेहरे पर घूंघट डाल लेती हैं। इस तरह, 'सशक्तिकरण'का भ्रम उत्पन्न कर महिलाओं का इस्तेमाल घृणा व हिंसा फैलाने के लिए किया जाता है। उनके साथ जो भेदभाव और शोषण होता है उसका कोई विरोध नहीं होता। यह स्थिति महिला आंदोलन के लिए एक चिंता का विषय है। धर्मनिरपेक्ष संगठनों और नागरिक समाज की यह जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं की साम्प्रदायिक हिंसा में भागीदारी की बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रित करें और महिलाओं को सही अर्थों में सशक्त बनाने का प्रयास करें। (मूल अंग्रेजी से अमरीश हरदेनिया द्वारा अनुदित)



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    30 September 2015
     
    Previous edition: House Speaker Boehner quits after five stormy years
     
    UK must prepare for war with Russia: Army calls for fleet of battle tanks to take on Putin | 30 Sept 2015 | Britain must invest in its fleet of main battle tanks to meet an increasing threat of ground war with Russia, senior Army officers have warned. It comes as tensions between Nato countries and Moscow continued to mount, with Russia threatening "nuclear counter measures" over a[n insane U.S.] plan to bolster nuclear facilities in Germany. Last year the British Army took part in live-fire Nato exercise in Poland with more than 100 armoured vehicles. Operation Black Eagle "highlighted the British Army's ability to deploy an armoured battlegroup at short notice anywhere in the world in support of the nation's allies."
     
    Russian parliament unanimously approves use of troops in Syria | 30 Sept 2015 | The upper chamber of the Russian parliament has unanimously given a formal consent to President Putin to use the nation's military in Syria to fight terrorism at a request from the Syrian President Bashar Assad. Consent was necessary for deployment of troops for foreign combat missions under the Russian constitution. The request for use of force was sent by the president after considering the large number of Russian citizens, who went to join terrorist groups fighting in Syria, head of the presidential administration Sergey Ivanov told media.
     
    Russia, Iran, Iraq and Syria setting up 'joint information center' to coordinate anti-ISIS operations | 26 Sept 2015 | Russia, Iran, Iraq and Syria have agreed to establish a joint information center in Baghdad to coordinate their operations against [CIA, Mossad, and Saudi Arabia-backed] Islamic State (IS, formerly ISIL/ISIS) [but still I-CIA-SIS] militants, according to sources. The information center in the Iraqi capital will be headed by an officer of one of the founding countries on a rotating basis. Rotation will take place every three months. According to the source, Iraq will run the center for the next three months.
     
    France launches air strikes against Islamic State in Syria | 27 Sept 2015 | France said on Sunday it had launched its first air strikes against Islamic State militants in Syria, in an effort to stem its growing presence there. "Our country thus confirms its resolute commitment to fight against the terrorist threat represented by Daesh (Islamic State). We will strike each time that our national security is at stake," the French Presidency said in a statement. France, which has so far only taken part in strikes in Iraq, began reconnaissance flights over Syria earlier this month in order to gather information on Islamic State positions.
     
    Putin to UN: Export of so-called democratic revolutions continues globally | 28 Sept 2015 | The export of the so-called democratic revolutions continues, as the international community fails to learn from mistakes, which have already been made, Russian President Vladimir Putin said addressing the UNGA. He cited the example of the revolutions in the Middle East, when people wished for change, "but how did that turn out?" He said that instead of triumph of democracy "we have violence and social disaster," where no one cares about human rights, including the right to life.
     
    Putin: All countries should respect Ukraine's sovereignty | 27 Sept 2015 | The sovereignty of all states, including Ukraine, should be respected, Russian President Vladimir Putin told CBS's '60 Minutes,' stressing that he knows "for sure" that the US was involved in the ouster of President Yanukovich in 2014...Putin said that Russia respects the sovereignty of Ukraine, adding that "at no time in the past, now or in the future has or will Russia take any part in actions aimed at overthrowing the legitimate government." He added that Moscow "would like other countries to respect the sovereignty of other states, including Ukraine. Respecting the sovereignty means preventing coups, unconstitutional actions and illegitimate overthrowing of the legitimate government." It is "absolutely unacceptable" to address issues through unconstitutional means, he said referring to the coup in Ukraine in February 2014.
     
    135 civilians killed in alleged coalition airstrike on Yemen wedding | 29 Sept 2015 | The bombing of a wedding party in Yemen by an apparent Saudi Arabia airstrike has killed 135 people. The Saudi-led coalition [of war criminals, terrorists, and sociopaths], which has air supremacy in the area, denied responsibility for the tragedy. Two missiles tore through two tents in the Al-Wahijah village in southwestern Yemen, where a wedding celebration was underway. The UN estimates that 135 people died in the attack. Many of the dead were women and children, witnesses said.
     
    Anonymous Attacks Saudi Government over Crucifixion of Protester | 29 Sept 2015 | Hacker group Anonymous claims it has attacked the Saudi government over a high court's recent decision to crucify and behead a teenage boy because he protested the regime. Amid tacit approval from the West, Anonymous hackers moved to fight the young man's execution directly by shutting down official Saudi government websites. Anonymous claims its hackers will continue to launch attacks until justice is served.
     
    Canadian military ponders integrated force with U.S. to respond to hotspots --Canadian Forces planning document says integrated forces 'conceptual development' is underway --Forces would operate in same manner as those controlled by North American Aerospace Defence Command | 28 Sept 2015 | The Canadian military has been working on a plan to create with the United States a bi-national integrated military force to deploy to hot spots around the world. The so-called Canada-U.S. Integrated Forces would be the result of an agreement between the two countries under which air, sea, land and special operations forces would be jointly deployed under unified command, outside Canada.
     
    'Karma Police': Illegal GCHQ operation to track 'every visible user on the internet' | 26 Sept 2015 | New documents shared by whistleblower Edward Snowden reveal GCHQ [Government Communications Headquarters] mass-surveyed "every visible user on the internet," codenaming the operation Karma Police after a popular song by Radiohead. The mission was started in 2009, without the agency obtaining legal permission to carry out the operation. Also there was no Parliamentary consultation or public scrutiny, documents published by the Intercept website show. The UK spy agency is responsible for providing intelligence by intercepting communications between people or equipment; the data is handed over to the British government and armed forces.
     
    Four Britons fighting with Islamic State put on UN sanctions list | 29 Sept 2015 | Four British citizens fighting with Islamic State militants in Syria are to be subject to UN sanctions in the first such move in a decade, Downing Street has said. The UK government took the drastic step of asking for some of its own nationals to face UN travel bans and asset freezes, amid increasing alarm about the hundreds of Britons being tempted to travel to Iraq and Syria...A No 10 spokesman said: "As well as the domestic measures we have introduced, such as the power to seize passports, these sanctions are a powerful tool -- freezing an individual's assets and imposing a global travel ban on them."
     
    Afghan Taliban seize Kunduz city center in landmark gain | 29 Sept 2015 | Taliban fighters on Monday battled their way into the center of Kunduz, a city in northern Afghanistan, and seized the provincial governor's office in one of the militant group's biggest territorial gains in 14 years, witnesses and officials said. In a major setback for Afghan forces, who abandoned a provincial headquarters for the first time since 2001, the insurgents raised their white banner over the central square and freed hundreds of fellow militants from the local jail. The insurgents launched a surprise, three-pronged offensive before dawn, and by evening had captured the governor's compound and provincial police headquarters, said Zabihullah Mujahid, spokesman for the hardline Islamist movement.
     
    Shell Oil Pulls the Plug on Arctic Oil Exploration | 29 Sept 2015 | After sinking eight years and more than $8 billion into the effort, Shell Oil is pulling out of the Arctic Ocean. The company dropped the surprising news in a Sunday night press release. Shell officials said the company safely drilled a well more than mile beneath the floor of the Chukchi Sea this summer. They found indications of oil and gas there, but not enough to warrant further exploration.
     
    Groups opposing Trans Pacific Partnership secrecy not 'radicals' - lawyer | 28 Sept 2015 | A group seeking to challenge the secrecy of Trans Pacific Partnership (TPP) are not "wild eyed radicals" and simply want existing law to be upheld, their lawyer claims. On Monday eight applicants, led by University of Auckland's Professor Jane Kelsey, are seeking a declaration that Trade Minister Tim Groser acted unlawfully when he issued a blanket refusal of an Official Information Act request for information relating to TPP negotiations. The hearing is taking place in the High Court in Wellington before Justice David Collins...While some draft texts and other documents have been leaked, the negotiations have largely been held in secret.
     
    Carly Fiorina on giving HP servers to NSA: 'I felt it was my duty' | 29 Sept 2015 | Former HP CEO and Republican presidential candidate Carly Fiorina says she felt obligated to hand over servers to the NSA to carry out an illegal Bush administration surveillance program." I felt it was my duty to help, and so we did," Fiorina told Yahoo! News Monday, referring to her compliance with a request for servers from Michael Hayden, the director of the National Security Agency at the time. The NSA needed the new servers for the warrantless domestic surveillance program it operated from 2001 to 2007, part of a larger initiative codenamed "Stellar Wind." Congress gave the program legal cover in 2008, but multiple federal courts have ruled that the program violated the Constitution.
     
    Stage backdrop collapses on Carly Fiorina in front of screaming crowd; troll in audience accuses Trump of mishap| 27 Sept 2015 | Carly Fiorina narrowly escaped injury this evening after a stage backdrop collapsed on her during a campaign event in San Antonio, Texas. Fiorina, who is ranked third in the Republican Presidential nomination race alongside Marco Rubio, was taking part in a Q&A session for female business owners when the accident happened. Midway through the event at the Marriott Hotel, the stage backdrop, made up of curtains held in place with metal poles, dropped forward to cries from the crowd. After the curtains fell, one crowd member [pea-brain] shouted out 'Trump!',seeming to accuse the current Republican frontrunner of causing the accident, according to the Texas Tribune.
     
    Why did a Ted Cruz super PAC give $500,000 to Carly Fiorina's? | 31 July 2015 | A super PAC supporting former tech executive Carly Fiorina's run reported raising 3.5 million -- with a half-million dollar lift from a super PAC supporting GOP presidential rival Sen. Ted Cruz (R-Tex.). The pro-Cruz PAC, Keep the Promise I, reported the disbursement Friday in a document filed with the Federal Election Commission.
     
    NH poll shows Trump up, Bush falling, and Sanders widening lead | 25 Sept 2015 | A new WMUR/CNN poll in New Hampshire, conducted by the University of New Hampshire Survey Center, shows new leaders emerging for both parties in the race for the White House. Among Democrats, New Hampshire voters favor Bernie Sanders over Hillary Clinton by a margin of 16 percentage points. The Vermont senator is up 46 percent to Clinton's 30 percent, with Joe Biden coming in at 14 percent. Clinton's favorability is still high, with 67 percent, but Sanders also trumps her in favorability, with 78 percent.
     
    GOP front-runner Donald Trump calls NAFTA trade deal a 'disaster,' says he'd 'break' the deal [Awesome!] | 24 Sept 2015 | Republican presidential front-runner Donald Trump says he wants to be able to slap tariffs on U.S. companies that choose to make their products overseas, and he's willing to violate existing trade deals to do it. In an interview with CBS' "60 Minutes" that will be broadcast Sunday, the billionaire businessman says he won't be stopped by deals such as the North American Free Trade Agreement if elected president. "We will either renegotiate it or we will break it," Trump said of the landmark free trade agreement between the U.S., Canada and Mexico, panning it as "a disaster."
     
    Republicans, Planned Parenthood square off in Congress | 29 Sept 2015 | U.S. congressional Republicans on Tuesdaychallenged Planned Parenthood's eligibility for federal funds, while the health organization's president said defunding it would restrict women's access to care and disproportionately hurt low-income patients. A series of videos that purport were edited to show that Planned Parenthood improperly sells fetal tissue to researchers for profit has reignited anti-abortion voters' fervor during a turbulent Republican presidential primary campaign. At a five-hour House committee hearing, Planned Parenthood President Cecile Richards appeared alone to respond to hostile questioning from Republicans, some of whom have vowed to shut down the U.S. government if federal support for the organization is not cut off.
     
    Georgia executes Kelly Gissendaner, despite plea from Pope Francis | 30 Sept 2015 | Convicted murder conspirator Kelly Renee Gissendaner was put to death by lethal injection at 12:21 a.m.Wednesday, despite a flurry of last-ditch efforts to stay the execution. Lawyers for the only woman on Georgia's death row filed multiple appeals with high courts of both the United States and the state of Georgia. Gissendaner, 47 and a mother of three, was scheduled to die by lethal injection at 7 p.m. ET Tuesday evening for her role in the 1997 murder of her husband, Douglas Gissendaner.
     
    Freddie Gray pleaded for medical attention while in back of police van, but was ignored because officers thought he could be faking | 27 Sept 2015 | Freddie Gray cried out for medical assistance when he was in the back of a Baltimore police van, but one of the officers in the vehicle said he wasn't sure if the young man was faking his injuries. Officer William Porter, who has been charged with manslaughter in the spinal injury death of the 25-year-old in April, told investigators that he spoke with the driver of the van about the need for treatment, according to statementsrevealed by the Baltimore Sun. 'Help me up,' Gray reportedly said before responding affirmatively when Porter asked if he needed a medic. Porter then supposedly told van driver Caesar Goodson Jr, that the booking center would not take Gray in when he was in medical distress, but the two officers did not take him for treatment.
     
    Warmest September on Record Possible for NYC, Chicago | 28 Sept 2015 | The summerlike temperatures that continued through mid-September could result in the warmest September on record for some across the Midwest and the Northeast. Even though some cooler and closer-to-average temperatures are expected through the end of the month, the surplus of abnormally high temperatures so far this month may be too much to overcome. The result could be record-setting warmth in many major cities.
     
    September on track to be the warmest on record in Denver --The month is also expected to be in the top ten driest on record | 26 Sept 2015 | The leaves are turning golden along the Front Range, but jackets are likely to remain packed away as temperatures are on track to make this the warmest September on record in Denver. The average temperature for Denver this month as of Saturday morning clocks in at 69.6 degrees, said Frank Cooper of the National Weather Service in Boulder. That beats the record set in 1948 by 1.3 degrees, Cooper said, adding that the rest of the month is likely to follow suit with warm temperatures.
     
    Sinkhole swallows car, caravan at campsite near Queensland's Rainbow Beach | 27 Sept 2015 | A major sinkhole has swallowed vehicles at a popular camping spot near Queensland's Rainbow Beach overnight. The sinkhole, bigger than a football field and several metres deep, developed at Inskip Point around midnight. A car, caravan, a camper trailer and tents were swallowed almost immediately. Queensland Parks and Wildlife Services (QPWS) said 150-metre sinkhole is three metres deep and takes up a large part of the MV Beagle campsite.
     
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    CLG Editor-in-Chief: Lori Price. Copyright © 2015, Citizens for Legitimate Government ® All rights reserved.

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    In Solidarity
    Binu Mathew
    Editor
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    India's Beef Ban Turns Bloody, Consumes A Man's Life
    By Countercurrents.org

    http://www.countercurrents.org/cc300915.htm

    A fifty year old Muslim man was beaten to death, and critically injured his 22 year old son by a mob of about 100 people alleging that the family ate beef in the house, in a bizarre incident near the capital city of India, New Delhi. The Indian Express reported that the incident took place on Monday night at around 10 PMin Dadri village, North Western Uttar, around 45 km from New Delhi


    Malcolm X: His Philosophy In The Struggle Against Racism And Injustice
    By Douglas Allen

    http://www.countercurrents.org/allen300915.htm

    Recently we marked the fiftieth anniversary of the assassination of Malcolm X (February 21, 1965), and this occasion brought some media focus to his life and significance. This was in contrast to the earlier, U.S., mass media's stereotyping, vilification, and dismissal of Malcolm X as some hate-filled, violent madman during his lifetime and the overwhelming marginalization and silencing of his message during the past fifty years


    "Iraqis Are The Saddest And One Of The Angriest Populations In The World"
    By Eric Zuesse

    http://www.countercurrents.org/zuesse300915.htm

    The 2015 Global Emotions survey from Gallup finds that, "Iraqis Are Among the Saddest and One of the Angriest Populations in the World."


    Rumblings of Discontent in Saudi Arabia
    By Thomas C. Mountain

    http://www.countercurrents.org/mountain300915.htm

    Discontent is brewing in Saudi Arabia, that bastion of reaction on the Arabian Peninsula, with the Saudi Royal Family seeing some of its worst internal dissent in decades. The new King has endowed his favorite son with command of the Saudi military, amongst other major responsibilities, and now the Saudi people find themselves in a Vietnam style quagmire in Yemen, something new to the Saudi people


    Gandhi Jayanti, Gandhi's Dream
    By Robert J. Burrowes

    http://www.countercurrents.org/burrowes300915.htm

    Gandhi's dream of a world without violence might be fanciful. But, as John Lennon once sang, he is 'not the only one'. Many of us share this dream. Are you a dreamer too?


    Shankar Guha Niyogi: The Man Who Showed Us How Development Should Look Like
    By Lalit Shukla

    http://www.countercurrents.org/shukla300915.htm

    Niyogi struggled throughout his life for an alternative development under the rule of law. His work is a great example to learn how development should look like. In present conditions, when thinking of alternative development makes you threat to national security, state is protecting only corporate interests and justice is not available to poor and underprivileged, people are bound to revolt. An open war is going on between a powerful state equipped with modern arm technologies and poor people struggling for their survival. We have to take side and clear our politics. There is no other way


    An Unusual Dialogue On Kashmir
    By Ghulam Mohammad Khan

    http://www.countercurrents.org/khan300915.htm

    As I left the shop, the owner laughed. My legs lurched as I walked. I scampered back to my room. I sobbed as I reclined on the bed. After a short silent contemplation I asked myself, 'When I crossed Lakhanpur, I lost my identity there and then.'

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  • 10/01/15--10:56: The sun that belongs to us
  • The sun that 
    belongs to us
    top logo
    October 2015

    Dear Palash 

    Namdeo Dhasal says of Ambedkar, mixing heady conviction with potent love: 

    You are that Sun 
    You are that one—who belongs to us.
    Earlier in this paean, he looks us in the eye and says: 

    Everyone is, as a matter of fact, as complete as the Sun 
    That protects and preserves all; including the cactus; 
    And uses the dew that forms on petals 
    To heal all pain
    And what kind of demons will such a sun slay? 

    The powdered bones of those afflicted with sin are being scattered from high above in the sky 
    And they vanish; the sun is setting over the lands ruled by demons— 
    The devils who plucked the leaves of mythology from a blossoming spring; 
    The devils who made my throat sing songs that condemned all regions of evil.
    We read these words thanks to Dilip Chitre, someone so drenched in the light shed by Namdeo's Marathi that he became one with that light, and rendered such radiant versions in English (see A Current of Blood or read the full poem here.) What did Ambedkar do to receive such absolute love and claim a place as perennial as the sun? Ambedkar told us to annihilate caste. The blueprint for this was Annihilation of Caste, published on 15 May 1936.
    Now Annihilation of Caste: The Annotated Critical Editionhailed as a 'superb, high-grade critical edition' even by professors of ethics who find virtues in Gandhi despite him swearing by the caste-affirming Bhagvad Gita—makes its way into the world as a paperback. On its striking new cover Ambedkar pierces through the haloed image of Gandhi. (For this, as for all Navayana covers, we have the inimitable Akila Seshasayee to thank.) But wait, could Arundhati Roy have discussed Ambedkar without dwelling upon Gandhi? Could Ambedkar have critiqued caste and not discussed Hinduism, its Vedas andshastras that he said needed to be dynamited? Let's ask questions, and answer them with more questions. If you have not yet read this antidote to Hinduism, grab AoC as part of our October-only offer where you can choose three of these four must-have books for Rs 850 (instead of Rs 1170):Annihilation of CasteThe South African Gandhi, Bhagwan Das's In Pursuit of Ambedkar and Dhasal's A Current of Blood.
    Das, an un-acclaimed pioneer of scholarship on Ambedkar, offered a devastating critique of Gandhi in his soft-spoken way. Speaking of the connection between Hindutva and Gandhi, he did not mince words:
    In my opinion, the Hindutva organisations would like to bring the dalits, who are actually not Hindus, into the Hindu fold and leave them there, at the bottom of the heap. Now, that is also what Gandhi attempted to do. He used to tell the dalits that God had created them simply to serve the so-called upper castes and that they should carry on with their caste occupations in the hope that in their next life they would be born in a higher caste. That is also what the Hindutva project is all about.
    We commemorate October because this was the time when Ambedkar formally left the fold of Hinduism that he found lacking in reason, morality and love, and embraced Buddhism in 1956. In The Buddha and His Dhamma, published posthumously, he fuses the values of what's called European Enlightenment (a blend of some of the finest ideas floating around then) with those of the antigod credo of Buddha, and charts a path out of caste. Ambedkar here collapses all difference between centres and peripheries, declaring that every periphery is at the centre of the world. Which brings to mind this recent essay that tells us how one of Europe's key Enlightenment philosophers, David Hume, may have benefited from the work of Jesuit missionaries who carried the Buddha's ideas to the 'centre' of Europe in the early 18th century.For Slavoj Žižek, a philosopher for our times, Ambedkar is a new hero, but in Agitating the Frame (Rs 250), Žižek is equally interested in the place of violence in the Buddhist system of moral conduct. 

    Haunted by a halo

    And yes, Gandhi's day of birth looms on the horizon, reminding us that history is often both a tragedy and a farce. The publication of The South African Gandhi: Stretcher-Bearer of Empire by Ashwin Desai and Goolam Vahed has caused much anxiety and grief. UnlikeRajmohan Gandhi who begins to defend his grandfather without even reading the book, Patrick French says in his review in Outlook that 'it will no longer be possible to look at the Mahatma's South African years without considering his role as a stretcher-bearer of Empire.' In the days to come you will also find many excerpts, but there's no substitute to reading the book.
    But if you are tired of Gandhi, we understand. Let Dhasal, then, have the last word: 

    And I plunge a sharpened shovel into my own heart too; 
    And soak the pages of your life with warm blood; 
    And arouse the only honest thing in me.

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    देश

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 09:21:19 PM

    मुंबई ! जमायत-ए-उलेमा (अरशद मदनी) राष्ट्रीय गैर मुनाफा वाली संस्था जिसने मुंबई में 11 जुलाई 2006 को श्रृंखलाबद्ध ट्रेन ..

    विदेश

    पाकिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 09:26:40 PM

    संयुक्त राष्ट्र ! अफगानिस्तान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने पाकिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि ये आतंकवादी सीमा पार कर अफगानी नागरिकों को प्रताड़ित करते हैं।

    खेल

    हीना का स्वर्णिम निशाना,शीर्ष पर रहा भारत

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 08:56:47 PM

    नयी दिल्ली ! पूर्व विश्व चैंपियन हीना सिद्धू ने डा. कर्णी शूटिंग रेंज में आठवीं एशियाई एयर गन चैंपियनशिप के अंतिम दिन बुधवार को स्वर्णिम चमक बिखेर कर भारतीय खेल प्रेमियों को जश्न मनाने का मौका दे दिया। भारत छह स्वर्ण सहित कुल 17

    प्रादेशिकी

    भदौरा जमीन घोटाले की जांच रिपोर्ट अभी तक क्यों नहीं आई?

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 10:04:43 PM

    बिलासपुर ! पूर्व महापौर श्रीमती वाणी राव की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन से पूछा है कि भदौरा जमीन घोटाले की जांच रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं आई ..

    अर्थजगत

    कालेधन वाले सजा भुगतने के लिए तैयार रहें

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 08:51:34 PM

    नयी दिल्ली ! विदेशी कालेधन का खुलासा कर इस पर लगने वाले भारी जुर्माने और कारावास की सजा से बचने की चाहत रखने वालों के लिए शुरू की गयी अनुपालन खिडकी आज बंद हो गयी और अब इस तरह के कालेधन वालों को जुर्माने के साथ ही कारावास की सजा

    

    सम्पादकीय

    विश्वशांति का ढोंग

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 11:12:02 PM

    पुराना गीत है तुम्हींने दर्द दिया है, तुम्हींदवा देना। आज जब दुनिया आतंकवाद के दर्द से कराह रही है और अमरीकी राष्ट्रपति, शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित बराक ओबामा 

    कर बोझ बढ़ाना ही हल नहीं

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 04:14:44 AM
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    शहरों की बढ़ती आबादी और उसी अनुपात में हो रहे क्षेत्र विस्तार के साथ साधन-सुविधाएं जुटाने का सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। शहरों को अपनी वित्तीय जरुरतों को पूरा करने के 

    डिजिटल गुलामी का दौर

    29, SEP, 2015, TUESDAY 10:56:29 PM

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक बार फिर अमरीका में अपनी वाहवाही करवा रहे हैं। न्यूयार्क से लेकर कैलिफोर्निया तक। मीडिया मालिक, कार निर्माता, साफ्टवेयर दिग्गज हर कोई उनकी 

    पंचायती राज में अफसरशाही

    29, SEP, 2015, TUESDAY 03:58:38 AM
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    गांवों में विकास कार्यों के निर्णय पंचायत प्रतिनिधि नहीं अफसर ले रहे हैं। अफसरों को जो उचित लगता है वे सरपंच से कहकर प्रस्ताव मंगा लेते हैं और उस कार्य को मंजूरी दे दी जाती 

    मक्का हादसे के सबक

    28, SEP, 2015, MONDAY 11:42:32 PM

    सऊदी अरब के विश्वप्रसिद्ध धार्मिक शहर मक्का में 15 दिनों के भीतर दो दर्दनाक हादसे हुए और कई बेकसूर लोग अकाल मौत के शिकार हुए। 12 सितंबर को मशहूर अल हरम मस्जिद की छत पर क्रेन 

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    LET CONGRESS SEARCH RAHUL FIRST – MUKHTAR ABBAS NAQVI
    SC DISMISSES SOMNATH BHARTI'S PLEA
    QUALIFICATION IS TOUGHER THAN WINNING MEDAL AT RIO: MARYKOM
    DYNAMOS GETS ANOTHER BRAZILIAN, SIGNS VINICIUS
    CONTROVERSIAL MUTU WANTS TO GET THINGS ON TRACK DURING ISL
    NO LIQUOR TO BE SERVED DURING 1ST T20 AT DHARAMSHALA

    आलेख

    विकास के बगैर आरक्षण

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 11:20:16 PM
    Posted by:कुलदीप नैय्यर

    कुलदीप नैय्यर : जब आजादी मिली तो विभिन्न समुदाय के नेताओं को देश की निष्पक्षता में इतना भरोसा था कि उनमें से कोई भी आरक्षण नहीं चाहता था। मुस्लिम नेताओं 

    रूस फिर से महाशक्ति के रूप में लौटा

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 11:17:25 PM
    Posted by:विनय शुक्ला

    विनय शुक्ला : २८सितम्बर को न्यूयार्क में संयुक्तराष्ट्र महासभा के 70 वें अधिवेशन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन

    अल्पपोषण दर में कमी लाना एक बड़ी चुनौती

    29, SEP, 2015, TUESDAY 11:00:18 PM
    Posted by:डॉ. हनुमंत यादव

    डॉ. हनुमन्त यादव : बच्चों में ऊंचाई और वजन के मापन द्वारा अल्प-पोषण का आकलन किया जाता है एवं रोग संबंधी एवं जैव रासायनिक सूचकांकों के आधार पर अल्पपोषित ब��

    राजनैतिक भ्रष्टाचार और उससे मुक्ति

    29, SEP, 2015, TUESDAY 10:58:20 PM
    Posted by:शीतला सिंह

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    • BJP should stop playing communal politics in the name of cow- Swami Agnivesh

      Posted:Fri, 02 Oct 2015 04:49:47 +0000
      DO NOT MAKE COW PROTECTION COMMUNAL AND VIOLENT DHARNA AT JANTAR MANTAR FROM 11  AM ON GANDHI JAYANTI DAY New Delhi. World Council of Arya Samaj leader Swami Agnivesh has condemned in the strongest...

      पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/
          
    • Police brutally attacked Left Front rally in Kolkata

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 18:51:27 +0000
      Kolkata. Police brutally attacked Left Front rally in Kolkata. More than 200 activists belonging to Left Parties were injured. Even activists were not spared by police . Women and elders injured in...

      पूरा आलेख पढने के लिए देखें एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दें http://hastakshep.com/
          
    • उत्तर प्रदेश में कानून नहीं बल्कि जंगल राज व्याप्त है – दारापुरी

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 17:52:16 +0000
      दादरी में बीफ और कानपुर में आतंकवादी के नाम पर मुसलमानों को मारने वालों के विरुद्ध हो सख्त कार्रवाई – आइपीएफ लखनऊ 1 अक्तूबर, 2015। उत्तर प्रदेश में हाल में भीड़ द्वारा दो लोगों को पीट-पीट कर...

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    • संघी गिरोह लगातार मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाकर साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ रहा है

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 17:34:40 +0000
      देश में बढ़ रही साम्प्रदायिक हमले की कार्यवाही के खिलाफ माकपा ने धरना दिया लखनऊ 1 अक्टूबर। देश भर में संघी गिरोह द्वारा मुस्लिमों को निशाना बना कर बढ़ रही घटनाओं के खिलाफ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी...

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    • शुरू हुई झारखंड में जन अधिकार यात्रा

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 17:11:39 +0000
      रांची। आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक अधिकारों पर हो रहे हमलों के विरुद्ध लोगों को संगठित करने के उद्देश्य से आज झारखंड में एक दस दिवसीय जन अधिकार यात्रा शुरू हुई। यह यात्रा मुख्य रूप से निम्न मुद्दों...

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    • P.M. Modi: India's Greatest Embarrassment

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 16:41:39 +0000
      Opinion on Narendra Modi's achievement may vary, but not on his lowly conduct and pettiness. It was most embarrassing for us as Indians to watch our Prime Minister   asking the Indian community...

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    • हिन्दू राष्ट्र में हिन्दू बनने की चाह में शम्बूक वध भूल गए

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 16:20:35 +0000
      दलितों को हिन्दू न मानने की परंपरा बहुत पुरानी है। उसी परंपरा का निर्वाह नागपुरी मुख्यालय करता है… हिन्दू बनने की चाह में शम्बूक वध को भूल कर एक दलित मंदिर चला गया और उसकी हत्या कर दी गयी। कहने...

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    • अकाल का धनकुबेरों को भी इंतजार होता है मुनाफा पैदा करने के लिए

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 15:17:36 +0000
      भूख से होने वाली मौतें और किसान आत्महत्याएं कभी भी सत्ता के लिए चिंता का विषय नहीं बनती आत्महत्या करने वाले हर 10 किसानों में एक किसान छत्तीसगढ़ का छत्तीसगढ़ देश में सबसे गहरे कृषि संकट से गुजर रहा है...

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    • कब तक लुटते रहेंगे मेरे गांव के लोग

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 14:35:22 +0000
      लुट रहा किसान, व्यवस्था मस्त है 1757 में ईस्ट इण्डिया कम्पनी का राज स्थापित होने के बाद से कम्पनी की टैक्स उगाही व राजस्व प्राप्ति का सबसे बड़ा जरिया कृषि भूमि पर लगान का था। उसके लिए कम्पनी और उसके...

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    • भाजपा के समक्ष बहुजन डाइवर्सिटी मिशन की अपील

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 14:08:03 +0000
      भाजपा के समक्ष  बहुजन डाइवर्सिटी मिशन की अपील  प्रतिष्ठा में, अध्यक्ष, भाजपा,बिहार प्रदेश. मान्यवर,     सर्वप्रथम हम राष्ट्रीय महत्व के बिहार विधानसभा चुनाव -2015  में आपकी पार्टी की भारी सफलता की...

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    • हिंदू राष्ट्रवाद का यह आतंकवाद प्रलयंकर है, जिसे कोई लेकिन आतंकवाद कह नहीं रहा

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 13:46:03 +0000
      हिंदू राष्ट्रवाद का यह आतंकवाद प्रलयंकर है, जिसे कोई लेकिन आतंकवाद कह नहीं रहा है। दुखवा मैं कासे कहुं? बहुत कठिन है डगर, बहुत कड़ी है धूप! साथी संभलकर चलना! साथी हाथ बढ़ाना! परमाणविक सैन्य राष्ट्र...

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    • Women Convention-Challenges before Indian Women in Contemporary India

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 13:08:25 +0000
      Women Convention Challenges before Indian Women in Contemporary India Conference Room, 2nd Floor ND Tiwari Bhawan, Near Gandhi Peace Foundation Deen Dayal Upadhyaya Marg, Near ITO October 2-3, 2015...

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    • यह एक 'अखलाक'की नहीं अखलाक की हत्या है

      Posted:Thu, 01 Oct 2015 12:54:22 +0000
      अपराधी देश की राजनीति की मुख्यधारा में आ गये हैं अमर सिंह मुलायम और भाजपा दोनों के नेताओं से मिलते रहते हैं व आज़म खान भी चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसे समय में ओवैसी की अति सक्रियता क्या गुल खिलायेगी?...

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    • Our 'Servant' Modi as PM should understand that money his government is spending on such extravaganzas is not his personal money.

      Posted:Wed, 30 Sep 2015 18:37:34 +0000
      Our 'Servant' Modi as PM should understand that money his government is spending on such extravaganzas is not his personal money. India-Africa forum summit : Kurtas for Africa heads of...

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    • इंसानों के खून का प्यासा नागपुरी गिरोह खूंखार मुद्रा में आ चुका है

      Posted:Wed, 30 Sep 2015 18:26:41 +0000
      मोदी का विकास माने कद्दू मोदी का विकास देश को 1947 की स्थिति में ले जाना चाहता है वर्तमान समय में देश की मानसिक हालत 1947 के आस पास पहुँच गयी है और सही मायने में भारत पाकिस्तान विभाजन की जिस त्रासदी...

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    • #DADRI – INTENTIONAL MURDER ON THE PRETEXT OF BEEF-EATING

      Posted:Wed, 30 Sep 2015 18:10:29 +0000
      CFD CALL UPON THE UP POLICE TO ARREST AND PROSECUTE ALL THE ATTACKERS OF  BISARA VILLAGE, DADRI FOR INTENTIONAL MURDER ON THE PRETEXT OF BEEF-EATING            It is shocking that a helpless Muslim...

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    देश
    02, OCT, 2015, FRIDAY 03:46:39 AM

    नई दिल्ली ! पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) के नेता हार्दिक पटेल ने बुधवार को कहा कि अगर लोग चाहेंगे तो वह ..

    विदेश

    आतंकवादियों ने लीबिया तेल के सुरक्षा बलों पर किया हमला

    02, OCT, 2015, FRIDAY 04:35:17 AM

    बेंघाजी (लीबिया) इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकवादियों ने उत्तरी अफ्रीकी राज्य में आज लीबिया के मुख्य तेल बंदरगाहों में रखवाली करने वाले बलों पर हमला किया। सुरक्षा अधिकारियों ने कहा आईएस आतंकवादियों ने सिडेर बंदरगाह के गेट के पास 

    खेल

    क्रिकेट को राजनीति से दूर रखे भारत

    01, OCT, 2015, THURSDAY 09:09:32 PM

    कोलकाता | भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला पर बरकरार असमंजस की स्थिति के बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष शहरयार खान ने गुरुवार को भारत से आग्रह किया कि वह खेल को राजनीति से दूर रखे। शहरयार ने 

    प्रादेशिकी

    उपमुख्यमंत्री के रिश्तेदार को विज्ञापन के ठेके देने का आरोप

    02, OCT, 2015, FRIDAY 05:09:35 AM

    नई दिल्ली ! राजधानीवासियों को खुद को ईमानदार होने का भरोसा दिलाकर सत्ता में काबिज हुई आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया पर उनके रिश्तेदारों को विज्ञापन का ठेका देने की शिकायत सामने आई है। दिल्ली सरकार ने इसी वर्ष 526 करोड़ का बजट विज्ञापन विभाग ..

    अर्थजगत

    विशेष रियायत अवधि पूरी ,काला धन कानून लागू

    02, OCT, 2015, FRIDAY 03:35:10 AM

    नई दिल्ली ! काला धन कानून सितंबर में विशेष रियायत अवधि पूरी होते ही गुरुवार को लागू हो गया। सरकार ने कहा कि इस रियायत अवधि में देश के 638 लोगों ने कुल 3,770 करोड़ रुपये (58 करोड़ डॉलर) विदेश में जमा रखने की घोषणा की। राजस्व सचिव हंसमुख 

    

    सम्पादकीय

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    नेपाल-भारत संबंधों की परीक्षा

    02, OCT, 2015, FRIDAY 11:25:10 PM

    सुदीर्घ संघर्ष, अथक प्रयत्न व निरंतर जद्दोजहद के बाद आखिरकार नेपाल में नया संविधान लागू हुआ। राजतंत्र की समाप्ति और लोकतंत्र की ओर पहला कदम बढ़ाने में भारत ने नेपाल का 

    नाबालिगों के हाथ अवैध हथियार

    02, OCT, 2015, FRIDAY 04:04:14 AM
    Author Image

    उम्र 17 साल और काम नशीली दवाएं बेचना। ऐसी एक सूचना पर जब पुलिस ने उनके ठिकाने पर दबिश दी तो पता चला कि वे सिर्फ दवाएं ही नहीं बेचते बल्कि वे गुनाह के उस रास्ते पर कदम रख चुके 

    धर्म बनाम इंसानियत

    01, OCT, 2015, THURSDAY 11:27:37 PM

    मानवता की रक्षा के लिए धर्म की स्थापना हुई और अब धर्म की रक्षा का प्रश्न इतना बड़ा हो गया है कि उसके लिए मानवता छोडऩी पड़े तो कोई हर्ज नहीं। दिल्ली से सटे दादरी इलाके के 

    सहकारिता में गड़बड़झाला

    01, OCT, 2015, THURSDAY 01:59:58 AM
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    जब कांग्रेस सत्ता में थी तब प्राय: सहकारी संस्थाओं में उसके लोग थे। सत्ता बदलने के साथ संस्थाओं में लोग भी बदल गए और अब प्राय: संस्थाओं में सत्तारुढ़ भाजपा के लोग 

    विश्वशांति का ढोंग

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 11:12:02 PM

    पुराना गीत है तुम्हींने दर्द दिया है, तुम्हींदवा देना। आज जब दुनिया आतंकवाद के दर्द से कराह रही है और अमरीकी राष्ट्रपति, शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित बराक ओबामा 

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    ताजा वीडियो

    REASON BEHIND INCIDENT IS 'EXCITEMENT' - EX BJP MLA
    LEOPARD FREED FROM METAL POT, GOT IT'S HEAD STUCK DURING A SIP
    COMMUNAL POISON SPREADING UNDER MODI REGIME – SHEHZAD TO NNIS
    BIHAR BUGLE: EC BANS PUBLICATION OF EXIT POLLS FROM OCT 12
    PM MODI'S POST US VISIT RALLIES IN BIHAR CUT BY HALF
    MANY MORE SHIPS OF THIS CLASS REQUIRED: REAR ADMIRAL TO NNIS
    KEJRIWAL, MAMATA LASH OUT AGAINST THE CENTRE
    5 GET DEATH, 7 LIFE FOR 2006 MUMBAI TRAIN SERIAL BLAST
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    DID PCB TAKE A U-TURN ON ITS STAND AGAINST INDIA?
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    आलेख

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    हर क्षेत्र पर हावी है भूमंडलीकरण

    02, OCT, 2015, FRIDAY 11:20:28 PM
    Posted by:डॉ. गिरीश मिश्र

    गिरीश मिश्र : आज अगर हम अर्थशास्त्र की दुनिया को देखें तो स्पष्ट हो जाएगा कि अर्थशास्त्री दो भागों में बंटे हुए हैं। उनमें से कुछ भूमंडलीकरण के प्रबल 

    लालू यादव का ओबीसी कार्ड

    02, OCT, 2015, FRIDAY 11:18:30 PM
    Posted by:अन्य

    उपेन्द्र प्रसाद : राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू यादव बिहार के इस चुनाव को अपने अंतिम चुनाव की तरह ले रहे हैं और इसके द्वारा अपने बेटों को राजनीति में 

    गुडग़ांव में एक अच्छी पहल

    01, OCT, 2015, THURSDAY 11:09:08 PM
    Posted by:ललित सुरजन

    ललित सुरजन : मैंउस दिन संयोगवश दिल्ली में ही था। अखबारों में पढ़ा कि गुडग़ांव शहर को सप्ताह में एक दिन वाहनमुक्त रखने का प्रयोग किया जा रहा है। नागरिक

    किसान का मायाजाल

    01, OCT, 2015, THURSDAY 11:05:57 PM
    Posted by:डॉ. भरत झुनझुनवाला

    डॉ. भरत झुनझुनवाला : केन्द्र सरकार ने फसल बीमा पर दी जाने वाली सब्सिडी को बढ़ा दिया है। अब किसानों द्वारा दिये गये प्रीमियम पर 40 से 75 प्रतिशत तथा तथा जा��

    विकास के बगैर आरक्षण

    30, SEP, 2015, WEDNESDAY 11:20:16 PM
    Posted by:कुलदीप नैय्यर

    कुलदीप नैय्यर : जब आजादी मिली तो विभिन्न समुदाय के नेताओं को देश की निष्पक्षता में इतना भरोसा था कि उनमें से कोई भी आरक्षण नहीं चाहता था। मुस्लिम नेता

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    News Updates from CLG
    01 October 2015
     
    Previous edition: UK must prepare for war with Russia: Army calls for fleet of battle tanks to take on Putin
     
    13 Killed in Shooting at Oregon's Umpqua Community College | 01 Oct 2015 | [3:54 pm ET] Thirteen people were dead and more than about 20 others were injured after a gunman opened fire Thursday morning on the campus of Umpqua Community College in southwest Oregon, authorities told NBC News. It wasn't immediately known whether the gunman was among the dead after the shooting near Roseburg, which was called in at 10:38 a.m. (1:38 p.m. ET), officials said. State Attorney General Ellen Rosenblum told NBC News simply that he had been "neutralized." Mercy Medical Center in Roseburg said it was treating nine patients, with three more expected. Sacred Heart General Hospital in Eugene, a major trauma center, told NBC News it was expecting three patients by helicopter. Students and faculty were being bused to the Douglas County Fairgrounds.
     
    Oregon shooting: Reports of 10 dead at Umpqua Community College | 01 Oct 2015 | Preliminary information indicates 10 people were killed and more than 20 others injured in a shooting at Oregon's Umpqua Community College on Thursday, said Oregon State Police spokesman Bill Fugate. Douglas County Commissioner Chris Boice told CNN that the shooter is in custody. It was not immediately clear whether the shooter was injured. "We arrived to find multiple patients in multiple classrooms. Law enforcement was on scene and had the shooter neutralized," Douglas County Fire Marshal Ray Shoufler told CNN. He said that two patients died while being transported to a hospital.
     
    Ten federal agents and a therapy dog are already en route to Oregon mass-shooting site; Sandy Hook invoked bywww.legitgov.org --Student witness: [Alleged] shooter was alive and in handcuffs. [This statement directly contradicts media reports that the shooter was 'neutralized.' -- Oddity #1]; Law enforcement armed with assault rifles --109 officers on scene --At least one gunman involved --More ATF agents heading to Portland, OR, to boost team *already in place* --Students being 'patted down' --Umpqua Community College on lockdown --Canine unit sniffing cars in parking lot for explosives | 01 Oct 2015 | [Wires. This item will be updated.]
     
    Obama authorizes $20mn in 'non-lethal' military aid and training for Ukraine regime | 30 Sept 2015 | One day after Ukraine announced that US instructors would start training the country's special forces, President Obama has authorized the provision of up to 20 million to Ukraine via the State Department to fund training and other similar activities. The announcement of additional funds allocated for the training of Ukrainian troops follows a statement by President [sic] Petro Poroshenko, who said that American instructors will start training Ukrainian special-operations troops [war criminals] this November. "We have agreed that the best US instructors will finally start training the Ukrainian special forces, our special-operations troops, starting from November," Poroshenko said in New York after meeting representatives of the Ukrainian diaspora living in the US.
     
    US military favors keeping troops in Afghanistan beyond 2016 [Yes, the CIA's poppy fields and opium pipelines need to be managed.] | 30 Sept 2015 | In a potential major shift in policy, U.S. military leaders want to keep at least a few thousand U.S. troops in Afghanistan beyond 2016...Keeping any substantial number of troops in Afghanistan beyond next year would mark a sharp departure from President Barack Obama's existing plan, which would leave only an embassy-based security cooperation presence of about 1,000 military personnel by the end of next year.
     
    Watchdog report finds numerous problems with Pentagon-led $1.6 billion Iraqi army 'training' program | 01 Oct 2015 |As the battles to retake the Iraqi cities of Ramadi and Baiji have stalled, the U.S.-led operation to 'train and assist' the Iraqi Army is facing its own internal problems, according to a Pentagon Inspector General report released Wednesday. The 48-page report is critical in its observations of the day-to-day workings of Operation Inherent Resolve's Iraqi train and assist program. The issues involve miscommunication between coalition training personnel and their command, delivery of incomplete equipment, unknown supply warehouse contents and inadequate billeting for Iraqi Army personnel...When the program started in Oct 2014, just a few months after the Iraqi army was routed from Mosul by the Islamic State, approximately 1.6 billion was allocated to help train 12 Iraqi brigades arm and supply I-CIA-SIS.
     
    Putin: Claims that Russian jets killed civilians in Syria emerged before airstrikes started | 01 Oct 2015 | Reports of alleged casualties among civilians caused by Russian airstrikes in Syria emerged even before Russian warplanes were launched for their first combat mission, President Vladimir Putin said, branding such reports 'information attacks.' "Other nations have been bombing Syrian territory for over a year," Putin told the Russian human rights council on Thursday, stressing that the US-led coalition invades the Syrian airspace with no UN mandate or invitation from Damascus. "We have such an invitation and we intend to fight against terrorist organizations and them only," Putin added.
     
    Russian Air Force in Syria deploying over 50 planes and choppers - Defense Ministry | 01 Oct 2015 | Russia's Air Force fleet in Syria includes over 50 warplanes and helicopters, a spokesman for the Defense Ministry said, reporting eight overnight sorties. Previously Russia hadn't revealed any detail of its contingent in Syria, which started an aerial campaign on Wednesday to help the Syrian Army fight against terrorist troops. The fleet includes the latest Su-24M and Su-25 ground attack planes, he said.
     
    Senior Secret Service Official Proposed Embarrassing a Critic in Congress | 30 Sept 2015 | A senior Secret Service official suggested to one of his deputies that they leak to the news media unflattering information uncovered in a government database about a Republican House committee chairman who had been sharply critical of the agency, according to a report made public Wednesday by an internal government watchdog agency. The findings, released by the inspector general for the Department of Homeland Security, said that dozens of Secret Service agents had inappropriately intruded on a network that contained files on people who had been rejected by the agency's application process. The agents discovered that the committee chairman, Representative Jason Chaffetz, Republican of Utah, had applied to be an agent in 2003, but had not been hired because "better qualified applicants existed," the report said.
     
    Carly Fiorina Really Was That Bad | 25 Sept 2015 | Her silver tongue honed by decades in corporate marketing, Carly Fiorina has used two debates, and a steely determination on the campaign trail, to climb near the top of the polls for the Republican nomination. But Americans should pause on her biggest professional credential for our highest office: a short, disastrous stint atop one of America's iconic technology companies, Hewlett-Packard. In 2009, Portfolio magazine ranked her the 19th worst C.E.O. of all time and described her as a "consummate self-promoter" who was "busy pontificating on the lecture circuit and posing for magazine covers while her company floundered." ...[Fiorina] banked 21 million in severance payments as part of the more than 100 million in compensation she received during what one critic called her "destructive reign of terror" (which included pushing for H.P. to acquire five corporate jets).

    Kevin McCarthy credits Benghazi committee for Clinton damage | 30 Sept 2015 | Democratic presidential front-runner Hillary Clinton's campaign is claiming vindication after Kevin McCarthy, a top Republican lawmaker on track to become the next speaker of the House, credited the Select Committee on Benghazi for damaging Clinton's poll numbers -- a surprising admission [of truth] from a party that has sought to portray the investigation as even-handed and non-partisan. "Let me give you one example," McCarthy said, citing his conservative credentials during an appearance on Fox News Tuesday night. "Everybody thought Hillary Clinton was unbeatable, right? But we put together a Benghazi special committee, a select committee. What are her numbers today? Her numbers are dropping. Why? Because she's untrustable. But no one would've known any of that had happened had we not fought and made that happen."

    Hurricane Joaquin Upgraded to 'Extremely Dangerous' Category 4 Storm | 01 Oct 2015 | As Connecticut dries out from a drought-snuffing drencher, Hurricane Joaquin continues to gather strength as it approaches the Eastern seaboard. Joaquin was upgraded to an "extremely dangerous category 4 hurricane" Thursday afternoon by the National Weather Service. The weather service forecasts Joaquin will batter the Bahamas through Thursday night with "hurricane force winds...storm surges...and heavy rain." Joaquin continues on a projected track that would take it near the U.S. East Coast by the weekend.
     
    Joaquin upgraded to a major category 3 hurricane | 30 Sept 2015 | Hurricane Joaquin continues to strengthen northeast of the Bahamas. As of 8 p.m. Joaquin has sustained winds of 115 mph, making it a category 3 hurricane. It continues to move southwest at 6 mph. Gov. McAuliffe declared a state of emergency for Virginia Wednesday afternoon, followed by the City of Norfolk also declaring a state of emergency.
     
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