बाराबंकी पुलिस भयभीत

पशु अतिचार अधिनियम की अधिकांश धाराएं जमानतीय हैं या गौ वध के छोटे छोटे मामलों में जमानत पा चुके लोगों को इस अधिनियम के तहत यह लिख कर जेल भेजा जा रहा है कि इनके बाहर रहने से समाज में भय का वातावरण कायम हो रहा है. गवाह गवाही देने से कतरा रहे हैं इसलिए 3 (1) उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत वाद दर्ज कर गिरफ्तार किया जा रहा है, जबकि दिलचस्प बात यह है कि थाना मसौली जनपद बाराबंकी के रहने वाले पीर गुलाम को कुछ दिन पूर्व गौ वध निवारण अधिनियम में जेल भेजा गया था वह जमानत प्राप्त कर एक आटा चक्की पर मजदूरी का काम कलर जीवन यापन कर रहा था कि थाना अध्यक्ष राय सिंह यादव ने उसके खिलाफ गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम का प्रयोग करते हुए रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को भेजी कि इसके बाहर रहने से गवाहों में भय व्याप्त है, गवाह गवाही देने से मुकर सकते हैं जबकि गौ वध निवारण अधिनियम में थाना अध्यक्ष राय सिंह यादव व दो अन्य दरोगा व कुछ सिपाही गवाह हैं . पीर गुलाम के बाहर रहने से यह पुलिस के अधिकारी, कर्मचारी भयभीत हैं और गवाही देने से मुकर सकते हैं. उसके बाद पीर गुलाम को घर से बुला कर जेल भेज दिया गया.
सुमन
लो क सं घ र्ष !
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