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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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    पृथ्वी से एक बड़ा सौर तूफान (Solar Storm) टकराया है, जिससे पावर ग्रिड और जीपीएस सिस्टम पर असर पड़ सकता है। पढ़ें पूरी खबर...


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    देश में गेहूं का सरप्लस स्टॉक है, लेकिन इसके बावजूद गेहूं का आयात किया जा रहा है। जानिये क्यों किया जा रहा है ऐसा। फोटो पर क्लिक कर पढ़ें क्या है पूरी खबर...


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    फेसबुक पर या उसके बाहर जितने भी लोग इस वक्त जिंदा हैं उनके जीवन में पहली और अंतिम बार यह मौका आया है, करतार सिंह सराभा की फांसी को इस साल पूरे सौ साल हो गए. भारत खासकर उत्तर भारत से अभी तक मैंने ऐसा कोई समाचार अथवा पोस्ट नहीं देखी जिससे पता चले कि सराभा को किसी ने याद किया है ?
    बारहाल हम लोगो ने पिछले इतवार को ब्राम्पटन में एक भव्य समारोह का आयोजन किया था जिसकी रपट यहाँ पढी जा सकती है :

    करतार सिंह सराभा शताब्दी समारोह ब्राम्पटन कनाडा में संपन्न ब्राम्पटन (कनाडा). गदरी नेताओं के सपनों का भारत अभी बनाना बाकी है, गदरी तहरीक को आगे बढ़ाने का दायित्व वर्तमान भारत...

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    हर प्रकार की आतंकवादी राजनीति शासक वर्गों की ही राजनीति और अर्थनीति के प्रतिक्रियास्वरूप पैदा होती है और फिर शासक वर्गों की सत्ता उसे हथियार के बल से खत्म करना चाहती है, जो कभी भी सम्भव नहीं हो पाता। आतंकवाद या तो अपने ख़ुद के अन्तरविरोधों और कमजोरियों का शिकार होकर समाप्त होता है या उसे जन्म देने वाली परिस्थितियों के बदल जाने पर समाप्त हो जाता है। शासक वर्ग जब भी भाड़े की सेना-पुलिस और हथियारों के बूते आतंकवाद को दबाने की कोशिश करता है, तो वस्तुत: पूरे प्रभावित इलाके की जनता के खिलाफ ही बर्बर अत्याचारी अभियान के रूप में एक युद्ध छेड़ देता है। तीसरी बात, आतंकवादी राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती और जाहिर है कि उसका समर्थन नहीं किया जा सकता। लेकिन आतंकवाद – चाहे प्रतिक्रियावादी (तालिबान, अल-कायदा और लश्करे तैय्यब जैसा) हो या क्रान्तिवादी (जैसे कि "वामपन्थी"उग्रवाद), अपने दोनों ही रूपों में वह साम्राज्यवादी-पूँजीवादी राज्यसत्ताओं की अन्यायपूर्ण एवं दमनकारी नीतियों का नतीजा होता है, अथवा राजकीय आतंकवाद के प्रतिक्रियास्वरूप पैदा होता है। जब जनक्रान्ति की ताकतें कमजोर होती हैं और ठहराव और प्रतिक्रिया का माहौल होता है जो ऐसे में दिशाहीन विद्रोह और निराशा की एक अभिव्यक्ति आतंकवाद के रूप में सामने आती है।
    हर प्रकार की आतंकवादी राजनीति शासक वर्गों की ही राजनीति और अर्थनीति के प्रतिक्रियास्वरूप पैदा होती है और फिर शासक वर्गों की सत्ता उसे हथियार के बल से खत्म करना चाहती है, जो कभी भी सम्भव नहीं हो पाता। आतंकवाद या तो अपने ख़ुद के अन्तरविरोधों और कमजोरियों का शिकार होकर समाप्त होता है या उसे जन्म देने व…

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    The item list received under the RTI act reveals that Parliamentarians, earning over Rs 1.4 lakh with perks, are relishing items like 'fish fried with chips' at Rs 25, mutton cutlet at Rs 18 and mutton curry with bone at Rs 20.

    The cost for procuring raw items of dish like stew vegetables comes to about Rs 41.25 while the MPs are getting it for Rs 4.

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    India signs biggest wheat import deals in over a decade - trade sources

    Indian flour millers and the local units of global trading giants have sewn up deals to import 500,000 tonnes of premium Australian wheat since March, trade sources said, the biggest such purchases in over a decade, despite surplus stocks at home.

    Read more -- http://reut.rs/1BJ4OjC

    IN.REUTERS.COM|BY BY MAYANK BHARDWAJ


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    जो लोग सस्ता मकान चाहते हैं, उनके लिए सरकार नया कानून बना रही है। क्या है यह कानून जानने के लिए फोटो पर क्लिक करें...

    इस तरह की काम की खबरों के लिए Economic Times Hindi फेसबुक पेज को लाइक करें।


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    Gopal Rathi added a new photo.
    12 hrs · 
    Gopal Rathi's photo.


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    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुस्लिम संगठनों और इमामों से कहा है कि वे मुसलमानों को 'ब्राह्मण धर्म और वैदिक संस्कृति' से मुकाबला करने के लिए तैयार करें। पढ़ें खबर...


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    Lalu Prasad Yadav ने यह फोटो ट्वीट की और उनके मुताबिक इसमें जवाहर लाल नेहरू शीर्षासन कर रहे हैं, जबकि Narendra Modi सही तरीके से योगासन नहीं कर रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर...


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    UP leads the pack, followed by Tamil Nadu & Maharashtra.

    Govt has assigned number of cities each state/union territory can nominate under the 100 Smart Cities project as well as those to be developed under AMRUT.

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    Current Feed Content

    • समाजवादी पार्टी- धरतीपुत्र युग से पुत्र युग में संक्रमण काल का संकट

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 18:07:26 +0000
      समाजवादी पार्टी का संक्रमण काल  किसी विचारक या नेता की राजनीतिक और वैचारिक विरासत पर दावा करना जितना आसान होता है, असलियत में उन विचारों और मूल्यों के साथ निभा पाने की राह उतनी ही कंकरीली होती है।...

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    • योग पर ये नज़रे इनायत क्यों?

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 17:09:30 +0000
      योग पर ये नज़रे इनायत क्यों? 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस क्या घोषित किया गया, केंद्र सरकार और हिन्दू पुनरुत्थांवादियो की बांछे खिल गयी। क्यों? 1. यह सरकार मात्र लोगों का ध्यान मूलभूत समस्याओं से...

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    • संघी फ़ासीवाद का जवाब है गदरी विचारधारा – करतार सिंह सराभा शताब्दी समारोह में अमोलक सिंह

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 16:15:09 +0000
      करतार सिंह सराभा शताब्दी समारोह ब्राम्पटन कनाडा में संपन्न ब्राम्पटन (कनाडा). गदरी नेताओं के सपनों का भारत अभी बनाना बाकी है, गदरी तहरीक को आगे बढ़ाने का दायित्व वर्तमान भारत के नौजवानों पर है. गदर...

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    • मिशनरीज ऑफ चैरिटी प्रमुख सिस्टर निर्मला का निधन

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 15:55:58 +0000
      नई दिल्ली। मदर टेरेसा के बाद मिशनरीज ऑफ चैरिटी की प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने वाली सिस्टर निर्मला जोशी का आज सुबह निधन हो गया। वह 81 साल की थीं। मिशनरीज ऑफ चैरिटी के एक अधिकारी के हवाले से मीडिया...

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    • तुम्हारा बाप ज़िन्दगी भर जेल में रहा लेकिन मुझे एक भी चिट्ठी नहीं लिखा-मेरी माँ का दर्द

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 15:52:41 +0000
      मेरी माँ का दर्द इस वीडियो को देखने के बाद मेरी माँ ने कहा, "तुम्हारा बाप ज़िन्दगी भर जेल में रहा लेकिन मुझे एक भी चिट्ठी नहीं लिखा "असीमा भट्ट ( की फेसबुक टाइमलाइन से साभार) असीमा...

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    • रिहाई मंच ने जारी की सपा सरकार के 40 बड़े अपराधों की सूची, सरकारी हमले के खिलाफ होगा धरना

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 13:53:35 +0000
      यूपी में पत्रकारों, आरटीआई कार्यकर्ताओं, महिलाओं, दलितों व आमजन पर सरकारी हमले के खिलाफ होगा धरना  लखनऊ। रिहाई मंच ने प्रदेश में इंसाफ मुहिम छेड़ते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार करोड़ों रूपयों के...

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    • क्या मोदी सरकार 'भ्रष्टाचार मुक्त'और 'जवाबदेह'है?

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 13:22:24 +0000
      नई दिल्ली। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी)- माकपा ने सवाल किया है कि क्या मोदी सरकार 'भ्रष्टाचार मुक्त'और 'जवाबदेह'है? माकपा पोलित ब्यूरो ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज...

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    • Now journalism in India seems to be endangered as much as blogging in Bangladesh!

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 06:41:13 +0000
      Where do stand the Indian Scribes? I wonder what happened to Indian Press! We dare not to blackout those politicians who happen to be responsible for the killing of Media persons one after one. Nor...

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    • YOGA – THE BEST GIFT FROM INDIA TO HEAL THE WORLD

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 05:29:10 +0000
      By celebrating the first World Yoga Day, on 21 June 2015, Prime Minister Narendra Modi used the UN platform deftly to promote Yoga worldwide. As a Holistic Healer, since 1975, I can say, Yoga is the...

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    • जानें अफ्रीकी देशों के साथ दोस्ती बढ़ाने की कोशिशों के निहितार्थ

      Posted:Mon, 22 Jun 2015 18:21:05 +0000
      अफ्रीकी देशों के साथ दोस्ती नई दिल्ली। विदेश विभाग में प्रधानमंत्री की रूचि के मद्देनज़र नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद ग्रहण करने के दूसरे साल में विदेश मंत्रालय ने और बहुत बड़ा कार्यक्रम बना रखा है...

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    • योगा की मार्केटिंग

      Posted:Mon, 22 Jun 2015 17:36:03 +0000
      जागो हिन्दुओं जागो, मोदी जब तक देश के प्रधानमंत्री हैं, देश में विभिन्न धर्मों के मध्य माहौल सौहार्दपूर्ण नहीं रह सकता        21 जून का विशेष महत्व है भौगोलिक दृष्टिकोण से, साधारण शब्दों में बयान...

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    • YOGA MUST REACH TO GANDHI'S 'LAST PERSON': INTERNATIONAL YOGA DAY

      Posted:Mon, 22 Jun 2015 17:26:45 +0000
      An apolitical Yoga day for all can have better impact and it must reach towards the 'Last Person' Gandhi told about.  First International Yoga day was observed today along the world....

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    • क्रिकेट का नया बाजार बांग्लादेश

      Posted:Mon, 22 Jun 2015 17:15:15 +0000
      क्रिकेट का नया बाजार बांग्लादेश। आईपीएल कैसिनों का रंगारंग विस्तार भारत की यह हार सनसनीखेज और धोनी का यह बयां कि मुस्ताफिज की गेंदे समझ में नहीं आ रही। ललित मोदी तो राजघराने को भी बख्श नहीं रहे हैं।...

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    • राष्ट्रीय प्रवक्ता का यू टर्न : बरास्ता राज्यसभा

      Posted:Mon, 22 Jun 2015 17:00:08 +0000
      राष्ट्रीय प्रवक्ता का यू टर्न : बरास्ता राज्यसभा राईट / लेफ़्ट / वन वे और यू टर्न सड़क के नियम हैं सुरक्षा सुगमता घूम कर तीन सौ साठ डिग्री राजनीति की सड़क पर अबाउट टर्न होते हैं नपुंसक तर्कों के...

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    • Yoga Business Boom BOOM! Hegedewar Death Anniversary Yoga Global is now the Hinduization

      Posted:Mon, 22 Jun 2015 16:49:27 +0000
      Yoga Business Boom BOOM! Hegedewar Death Anniversary Yoga Global is now the Hinduization, COPLETE BHAGWAKARAN agenda of HRD! It involves mind blowing business for the Patanjali Children of AUSH...

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    • भोपाल गैस पीड़ित बोले, योग से इलाज कराओ, मप्र में हो रही है योगके नाम पर धन की बर्बादी

      Posted:Mon, 22 Jun 2015 16:24:01 +0000
      योग से गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य को कोई फायदा नहीं पहुँचता-मप्र सरकार भोपाल। एक तरफ सारी दुनिया में योग दिवस मनाया जा रहा हैतो दूसरी तरफ केसरिया मध्य प्रदेश में सरकार का कहना है कि गैस पीड़ितों को दी...

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    প্রাসঙ্গিক ভাবনা / ড. মোঃ নূরুল আমিন
    ফাঁসির রায় ও মুজাহিদের আক্ষেপ
    গত ১৬ জুন বাংলাদেশ জামায়াতে ইসলামীর সেক্রেটারি জেনারেল ও বাংলাদেশ সরকারের সাবেক সমাজকল্যাণ মন্ত্রী জনাব আলী আহসান মোহাম্মদ মুজাহিদের আপিল মামলার রায় প্রকাশিত হয়েছে। ২০১৩ সালে আন্তর্জাতিক অপরাধ ট্রাইব্যুনাল ১৯৭১ সালে মুক্তিযুদ্ধের সময় কথিত মানবতাবিরোধী অপরাধ সংঘটনের অভিযোগে জনাব মুজাহিদকে মৃত্যুদণ্ড দিয়েছিলেন। জনাব মুজাহিদ ট্রাইব্যুনালের এই রায়ের বিরুদ্ধে আপিল করেন। সুপ্রিম কোর্টের আপিল বিভাগ এই দিন তার চূড়ান্ত রায়ে ট্রাইব্যুনাল প্রদত্ত মৃত্যুদণ্ড বহাল রাখেন।
    আপিল বিভাগের রায়ে জনাব মুজাহিদকে একটি হত্যা মামলা থেকে খালাস এবং বুদ্ধিজীবী হত্যার ষড়যন্ত্র, পরিকল্পনা ও সহযোগিতার অভিযোগে ট্রাইব্যুনাল প্রদত্ত মৃত্যুদণ্ড বহাল রাখা হয়েছে।
    রায়ের পরপর জনাব মুজাহিদের আইনজীবী ও সুপ্রিম কোর্ট বার এসোসিয়েশনের সভাপতি খন্দকার মাহবুব হোসেন এই রায়ে অসন্তোষ প্রকাশ করে বলেছেন যে, ঢালাও অভিযোগে জনাব মুজাহিদকে মৃত্যুদণ্ড দেয়া হয়েছে। এদিকে কারাগারে আইনজীবীদের সাথে সাক্ষাৎকালে জনাব মুজাহিদ নিজেকে নির্দোষ দাবি করে বলেছেন, কাকে কোথায় কখন, কীভাবে হত্যার জন্য দেশের সর্বোচ্চ আদালত তার মৃত্যুদণ্ড বহাল রেখেছেন তা তার বোধগম্য নয়।
    জনাব মুজাহিদ নগণ্য কোনও ব্যক্তি নন; এই দেশের ইসলামী আন্দোলন ও অন্যতম বৃহত্তম রাজনৈতিক দলের মহাসচিব। তিনি ২০০১ থেকে ২০০৬ পর্যন্ত সরকারের সমাজকল্যাণ মন্ত্রী হিসেবে সাফল্যের সাথে দায়িত্ব পালন করেছেন। মন্ত্রিত্বকালে তার বিরুদ্ধে দুর্নীতি, স্বজনপ্রীতি, দল প্রীতি অথবা ক্ষমতার অপব্যবহারের কোনও অভিযোগ উঠেনি এবং এমনকি মন্ত্রিত্বের পরও সেনা সমর্থিত কেয়ারটেকার সরকার থেকে শুরু করে প্রতিহিংসাপরায়ণ আওয়ামী লীগ সরকার পর্যন্ত তন্ন তন্ন করে তার বিরুদ্ধে দুর্নীতি, ক্ষমতার অপব্যবহার অথবা তার মন্ত্রণালয়ে সংঘটিত কোনও অনিয়ম তালাশ করে পায়নি। সততা, নিষ্ঠা ও দেশপ্রেমের উজ্জ্বল দৃষ্টান্ত রেখে তিনি মন্ত্রিত্ব করেছেন, সর্বদা দেশের স্বার্থকে প্রাধান্য দিয়েছেন। তার মতো স্বনামধন্য একজন ব্যক্তিকে ফাঁসির দণ্ড দেয়া হয়েছে। ভুক্তভোগী হিসেবে কি অপরাধে, কাকে, কখন, কিভাবে হত্যার অভিযোগে ফাঁসির মতো দণ্ড তিনি পেয়েছেন তা জানার তার অধিকার রয়েছে। কিন্তু পত্র-পত্রিকায় প্রকাশিত রিপোর্ট অনুযায়ী তিনি তা জানেন না। তার এই আক্ষেপটি অত্যন্ত গুরুত্বপূর্ণ এবং যে মানবতা ও মানবিক মূল্যবোধ রক্ষার জন্য আমরা উদগ্রীব তার স্বার্থে এই বিষয়টির সুরাহ হওয়া প্রয়োজন বলে আমি মনে করি।
    জনাব মুজাহিদের মৃত্যুদ- নিয়ে ইতোমধ্যে বেশ কিছু আন্তর্জাতিক সংস্থা ও ব্যক্তিত্ব তাদের মতামত ও উদ্বেগ পেশ করেছেন। খ্যাতনামা বৃটিশ আইনজীবী ও পার্লামেন্টারিয়ান এবং মানবাধিকার প্রবক্তা লর্ড কার্লাইল এই বিচারকে ন্যায়ভ্রষ্ট ও রাজনৈতিক প্রতিহিংসার বহিঃপ্রকাশ বলে উল্লেখ করেছেন। তিনি বিচারের মান, সাক্ষীদের সাক্ষ্যের গ্রহণযোগ্যতা, আদালতের কথিত বৈষম্যমূলক আচরণ, বিচারকদের নিরপেক্ষতা প্রভৃতি নিয়েও প্রশ্ন তুলেছেন এবং বলেছেন যে, যে সাক্ষ্য-প্রমাণের ভিত্তিতে জনাব মুজাহিদকে ফাঁসির দণ্ড দেয়া হয়েছে তা নিম্নমানের এবং তার আন্তর্জাতিক গ্রহণযোগ্যতা নেই।
    ব্রাসেলস ভিত্তিক আন্তর্জাতিক সংস্থা নো পিস উইদাউট জাস্টিস (ঘচডঔ) নন ভায়েলেন্ট রেডিক্যাল পার্টি ও এনআরপিটিটি এই রায়ের প্রতিবাদ জানিয়ে রোম সংবিধি অনুযায়ী ভিক্টিমের সঠিক বিচার নিশ্চিত করার আহ্বান জানিয়েছেন। সংস্থার আইন উপদেষ্টা এলিসন স্মীথ কর্তৃক প্রদত্ত এই বিবৃতিতে বাংলাদেশের আন্তর্জাতিক অপরাধ ট্রাইব্যুনাল কর্তৃক আন্তর্জাতিক আইন ও আন্তর্জাতিক মানদণ্ড অনুযায়ী যুদ্ধাপরাধ বিচারের যথাযথ প্রক্রিয়া ও ন্যায্যবিচার নিশ্চিত না করায় তাদের অব্যাহত উদ্বেগের কথা উল্লেখ করা হয়। এতে বলা হয় ইতঃপূর্বে এই ট্রাইব্যুনাল যেসব রায় দিয়েছিল তা নিয়ে আন্তর্জাতিক মহল যথেষ্ট উদ্বেগ ও প্রতিবাদ জানিয়েছিল, কেননা যে প্রক্রিয়ায় সেখানে বিচার কাজ চলেছে তাতে অভিযুক্তের ন্যায়বিচার পাওয়ার ন্যায্য অধিকার বারবারই লঙ্ঘিত হয়েছে। তাদের মতে মুজাহিদের মৃত্যুদ-ের রায়টি হচ্ছে সেই ভ্রান্ত বিচার প্রক্রিয়া ও অন্যায্য রায়ের সর্বশেষ উদাহরণ। বিবৃতিতে বলা হয়, আন্তর্জাতিক মহলের উদ্বেগের পেছনে আরও যেসব কারণ ছিল তার মধ্যে রয়েছে আইসিটির বিচারকদের আইনের মূলনীতিসমূহ প্রয়োগে ব্যর্থতা, আসামী পক্ষের সাক্ষীর সংখ্যা ভয়াবহভাবে সীমিত করে দেয়া প্রভৃতি। বিবৃতিতে বলা হয় যে, বিরোধী রাজনৈতিক দলের নেতৃত্বকে প্রাধান্য দিয়ে অভিযোগের তদন্ত করা হয়েছে এবং তদন্তে রাজনৈতিক প্রভাব প্রতিফলিত হয়েছে। এতে ট্রাইব্যুনাল কর্তৃক দণ্ডপ্রাপ্তদের দণ্ড স্থগিত করে বাংলাদেশ কর্তৃক অনুস্বাক্ষরিত রোম সংবিধি অনুযায়ী অভিযুক্তদের জন্য সঠিক বিচার নিশ্চিত করার প্রক্রিয়া শুরু করার আহ্বান জানানো হয়।
    পাঠকদের নিশ্চয়ই মনে আছে যে, শুরু থেকেই আন্তর্জাতিক আইন ও যুদ্ধাপরাধ বিশেষজ্ঞ ও সংস্থা এবং মানবাধিকার সংগঠনসমূহ বাংলাদেশের আন্তর্জাতিক অপরাধ ট্রাইব্যুনাল আইনের প্রয়োগ ও মান নিয়ে বিভিন্ন প্রশ্ন উত্থাপন করে তাকে গ্রহণযোগ্য মানে উন্নীত করার জন্য বেশ কিছু সুপারিশ পেশ করেছিলেন। কিন্তু বাংলাদেশ সরকার তার কোনটিই গ্রহণ করেননি। অভিযুক্তদের বিচারের ক্ষেত্রে সরকার আন্তর্জাতিকভাবে স্বীকৃত ফৌজদারী আইন ও সাক্ষ্য আইনের কার্যকারিতা স্থগিত রাখা ছাড়াও তাদের বেলায় সংবিধান প্রদত্ত মানবাধিকারসমূহও বাতিল করে রাখা হয়। ফলে ন্যায়বিচার থেকে বঞ্চিত হবার একটি ধারণা তাদের মধ্যে সৃষ্টি হয় এবং বাস্তবে তার প্রতিফলনও ঘটে। এ প্রেক্ষিতে এনপিডব্লিউজে'র দাবি অনুযায়ী রোম সংবিধি অনুযায়ী ভিকটিমদের সঠিক বিচার নিশ্চিত করার আহ্বানের যৌক্তিকতা অস্বীকার করার উপায় নেই।
    এখন বুদ্ধিজীবী হত্যা ও তার সাথে জনাব মুজাহিদের সম্পৃক্ততা নিয়ে কিছু বলা জরুরি বলে আমি মনে করি।
    এই স্তম্ভে আমি বহুবার বলেছি যে, বুদ্ধিজীবী হত্যার মানবিক বিষয়টিকে আওয়ামী লীগ রাজনৈতিক ইস্যুতে পরিণত করেছে। নিরপেক্ষ দৃষ্টিতে এর গভীরে গিয়ে প্রকৃত অপরাধীদের খুঁজে বের করে শাস্তির ব্যবস্থা না করে ঢালাও দোষারোপের মাধ্যমে তারা জাতির একটা উল্লেখযোগ্য অংশকে বিভ্রান্ত করেছে। তাদের উদ্দেশ্য ও আচরণে তারা কখনো অকৃত্রিম ও আন্তরিক ছিলেন না। তারা আজ পর্যন্ত প্রায় ১৫ বছর ক্ষমতায় রয়েছেন। কিন্তু এই দীর্ঘ সময়েও তারা নিহত বুদ্ধিজীবীদের প্রকৃত সংখ্যা নির্ণয় করতে পারেননি। ১৯৭২ সালে তথ্য মন্ত্রণালয়ের এক প্রকাশনায় ২২ জন বিশ্ববিদ্যালয় শিক্ষক, ৫৯ কলেজ শিক্ষক, ২৭০ জন মাধ্যমিক স্কুল শিক্ষক, ৬৩৯ জন প্রাথমিক স্কুল শিক্ষক, ১৩ জন সাংবাদিক, ৫০ জন ডাক্তার এবং অন্যান্য পেশার ১৭ জন মিলিয়ে ১০৭০ জন শহীদ বুদ্ধিজীবীর কথা উল্লেখ করা হয়েছিল। এই তথ্য সূত্রের ভিত্তিতে ১৯৮৩ সালে বাংলা একাডেমি পত্র-পত্রিকায় বিজ্ঞাপন দিয়ে তাদের পূর্ণাঙ্গ বিবরণ সংগ্রহের চেষ্টা করে। কিন্তু তা কখনো পাওয়া যায়নি। ঐ বছরই ১৪ জন বুদ্ধিজীবীর স্মৃতির একটি প্রদর্শনী হয়। ১৯৮৫ সালে একাডেমির তরফ থেকে শহীদ বুদ্ধিজীবী স্মৃতিকোষ নামক একটি গ্রন্থ প্রকাশিত হয় এবং এতে ২৫০ জনের অনেকেরই আবাসিক ঠিকানা খুঁজে পাওয়া যায়নি। এরপর ১০ খন্ডে তারা স্মৃতি গ্রন্থ প্রকাশ করেন যাতে ২৩৮ জনের পূর্ণাঙ্গ পরিচয় স্থান পায়। এই ২৩৮ জনের বাইরে একাডেমি আর কোনও তালিকা সংগ্রহ বা প্রকাশ করতে পারেনি। আওয়ামী লীগ একাধিকবার ক্ষমতায় গিয়েও এই অসম্পূর্ণ কাজটি সম্পূর্ণ করেনি। তাদের প্রথম মেয়াদে বুদ্ধিজীবী হত্যার রহস্য উন্মোচনের জন্য জহির রায়হানকে আহ্বায়ক করে একটি কমিটি গঠন করা হয়েছিল। জানা যায় যে, উক্ত কমিটি অপরাধীদের চিহ্নিত করে অনেক সাক্ষ্য-প্রমাণও সংগ্রহ করেছিলেন। কিন্তু সংগৃহীত সাক্ষ্য প্রমাণ আওয়ামী লীগের অনুকূলে ছিল না। ফলে তদন্তের ফলাফল রসাতলেই শুধু যায়নি জহির রায়হান তথ্য-প্রমাণসহ অপহৃত হয়ে নশ্বর পৃথিবী থেকে বিদায় নিতেও বাধ্য হয়েছেন। বলাবাহুল্য, ১৯৭২ সালের ২৫ জানুয়ারি ঢাকা প্রেস ক্লাবে এক সাংবাদিক সম্মেলনে জহির রায়হান ঘোষণা করেন যে, বুদ্ধিজীবী হত্যাকান্ডের পেছনের নীলনকশা উদ্ঘাটনসহ মুক্তিযুদ্ধের সময়ের অনেক গোপন ঘটনার নথিপত্র প্রামাণ্য দলিল তার কাছে আছে যা প্রকাশ করলে সদ্য স্বাধীন বাংলাদেশের মন্ত্রিসভায় ঠাঁই নেয়া অনেক নেতার কুকীর্তি ফাঁস হয়ে পড়বে। তিনি ৩০ জানুয়ারি সন্ধ্যায় প্রেস ক্লাবে এ সংক্রান্ত একটি ফিল্ম শো প্রদর্শনেরও ঘোষণা দেন। মজার ব্যাপার হচ্ছে এই ৩০ জানুয়ারি সকালেই তার কায়েতটুলির বাসায় একটি টেলিফোন আসে যাতে বলা হয় তার বড় ভাই (নিখোঁজ) শহীদুল্লাহ কায়সার মীরপুর ১২নং সেকশনে আছেন। তাৎক্ষণিকভাবে তিনি সকালেই ভারতীয় বাহিনীর এক মেজরের সাথে মীরপুর যান। জহির রায়হান আর বাসায় ফিরে আসেননি। তার এই অন্তর্ধানকে নিয়ে পত্র-পত্রিকায় বহু লেখালেখি হয়েছে কিন্তু ফলাফল শূন্য। দৈনিক আজকের কাগজের ৮ ডিসেম্বর '৯৩ সংখ্যায় "জহির রায়হানের হত্যাকারী রফিক এখন কোথায়"শিরোনামে একটি রিপোর্ট ছাপা হয়। এতে জহির রায়হানের নিখোঁজ হওয়া নিয়ে আওয়ামী লীগের শীর্ষ একজন নেতার কথিত মন্তব্য অন্তর্ভুক্ত ছিল। জহিরের নিখোঁজ নিয়ে পত্র-পত্রিকায় লেখালেখি হবার পর ঐ নেতা নাকি জহিরের বড় বোন নাফিসা কবিরকে ডেকে নিয়ে বলেছিলেন, "জহিরের নিখোঁজ নিয়ে এরকম চীৎকার করলে তুমিও নিখোঁজ হয়ে যাবে।"জহির বড় ভাই-এর সন্ধানে গিয়ে নিখোঁজ হন এবং প্রাপ্ত তথ্যানুযায়ী বুদ্ধিজীবী হত্যা সংক্রান্ত যে তথ্যপ্রমাণ তার কাছে ছিল এবং তিনি ৩০ জানুয়ারি যা প্রকাশ করার প্রতিশ্রুতি দিয়েছিলেন তা যাতে করতে না পারেন তার জন্যেই তাকে অপহরণ করে রফিক নামে এক ব্যক্তি তাকে হত্যা করেছিল। পত্র-পত্রিকায় এই তথ্যও প্রকাশিত হয়েছিল। এই রফিকের রাজনৈতিক পরিচয় আওয়ামী লীগ প্রকাশ করেনি এবং জহির হত্যার বিচারও করেনি। বুদ্ধিজীবী হত্যার প্রকৃত রহস্য এখানেই নিহিত। এই রহস্যের কূল-কিনারা না করে আওয়ামী লীগ রাজনৈতিক প্রতিদ্বন্দ্বীদের ওপর দোষ চাপিয়ে তাদের নির্মূল করার ষড়যন্ত্র বাস্তবায়ন করছে বলে দেশবাসী মনে করেন। এমতাবস্থায় জনাব মুজাহিদের পক্ষে আক্ষেপ করা অত্যন্ত স্বাভাবিক। তিনি ফাঁসির দণ্ড পেয়েছেন। কেন পেয়েছেন তিনি যেমন জানেন না, যারা দণ্ড দিয়েছেন তারাও সম্ভবত জানেন না। এমতাবস্থায় ইনসাফের স্বার্থে ট্রাইব্যুনালের রায়ের কার্যকারিতা স্থগিত করে আন্তর্জাতিক তত্ত্বাবধানে গঠিত একটি নিরপেক্ষ ট্রাইব্যুনালই ন্যায় বিচার নিশ্চিত করতে পারে বলে আমার দৃঢ় বিশ্বাস।

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    • केस्को का फ्रेन्चाइजी करार निरस्त किये जाने का स्वागत

      Posted:Wed, 24 Jun 2015 17:29:19 +0000
      केस्को की तुलना में आगरा में हो रहा है 325 करोड़ रूपये का सालाना नुकसान आगरा का फ्रेन्चाइजी करार भी निरस्त किया जाये      लखनऊ। उप्र सरकार द्वारा केस्को का फ्रेन्चाईजी करार निरस्त किये जाने का स्वागत...

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    • Protest demonstration against the sexual harassment of a female PhD. scholar

      Posted:Wed, 24 Jun 2015 17:12:20 +0000
      Protest demonstration against the sexual harassment of a female PhD. scholar in D.U by a Prof. of St. Stephens college.  June 24, 2015, New Delhi. Disha Student organisation organized a protest...

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    • जलसंकट मध्य प्रदेश का

      Posted:Wed, 24 Jun 2015 16:53:06 +0000
      भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को झीलों का शहर भी कहा जाता है, वर्षों से यहाँ के तालाब नगरवासियों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत रहे हैं, लेकिन पिछले करीब एक दशक से देश के अन्य शहरों की तरह भोपाल...

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    • Who is afraid of Fascism? Skeletons tumble down from every RSS cupboard!

      Posted:Wed, 24 Jun 2015 16:02:23 +0000
      Who is afraid of Fascism? Skeletons tumble down from every RSS cupboard! Who is afraid of Fascism? We, the Indian people are not the flocks of lambs! As the Ultimate Genie treats us. Let us stand...

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    • फासिज्म के केसरिया राजकाज में जनपक्षधरता निषिद्ध है

      Posted:Wed, 24 Jun 2015 15:27:35 +0000
      फासिज्म के केसरिया राजकाज में जनपक्षधरता निषिद्ध है और किसी सक्रियता का मतलब है बजरंगी धर्मोन्माद। बाकी सब कुछ प्रतिबंधित है। हम लगातार कह रहे हैं कि फासिज्म के केसरिया राजकाज में जनपक्षधरता निषिद्ध...

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    • राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

      Posted:Wed, 24 Jun 2015 10:05:00 +0000
      राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश फिल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) के शासी निकाय व सोसायटी के अध्यक्ष पद पर गजेन्द्र चौहान की नियुक्ति के विरोध में...

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    • अडवाणी जी सम्भावना की बात नहीं, आपातकाल लग चुका है

      Posted:Wed, 24 Jun 2015 09:11:58 +0000
      जब कार्पोरेट घरानों ने पूरे मीडिया को खरीद लिया हो और वे सरकार के साथ सौदा कर रहे हों, तो किसी विरोध की जगह कहाँ रह जाती है। पिछले दिनों अस्सी से अधिक पत्रकारों की हत्याएं हो चुकी हैं पिछले दिनों...

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    • समाजवादी पार्टी- धरतीपुत्र युग से पुत्र युग में संक्रमण काल का संकट

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 18:07:26 +0000
      समाजवादी पार्टी का संक्रमण काल  किसी विचारक या नेता की राजनीतिक और वैचारिक विरासत पर दावा करना जितना आसान होता है, असलियत में उन विचारों और मूल्यों के साथ निभा पाने की राह उतनी ही कंकरीली होती है।...

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    • योग पर ये नज़रे इनायत क्यों?

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 17:09:30 +0000
      योग पर ये नज़रे इनायत क्यों? 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस क्या घोषित किया गया, केंद्र सरकार और हिन्दू पुनरुत्थांवादियो की बांछे खिल गयी। क्यों? 1. यह सरकार मात्र लोगों का ध्यान मूलभूत समस्याओं से...

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    • मुहब्बत में हर जंग जायज और फिर भी न लड़ सकें हम

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 16:40:12 +0000
      जो जैसे हांक लें, चूंकि हम हुए ढोर डंगर, नागरिक नहीं मेरी महजबीं, माफ करना कि पहली सी मुहब्बत नहीं है। न दिल में, न दिमाग में। न वो जुनून है। न मजनूं बनकर फिरने का जिगर है और न फरहाद हैं हम और न...

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    • संघी फ़ासीवाद का जवाब है गदरी विचारधारा – करतार सिंह सराभा शताब्दी समारोह में अमोलक सिंह

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 16:15:09 +0000
      करतार सिंह सराभा शताब्दी समारोह ब्राम्पटन कनाडा में संपन्न ब्राम्पटन (कनाडा). गदरी नेताओं के सपनों का भारत अभी बनाना बाकी है, गदरी तहरीक को आगे बढ़ाने का दायित्व वर्तमान भारत के नौजवानों पर है. गदर...

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    • Mumbai Press Club condemns killing of Journalist Sandeep Kothari

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 16:03:48 +0000
      PRESS CLUB CONDEMNS KILLING OF JOURNALIST SANDEEP KOTHARI The Mumbai Press Club expresses its shock over the killing of Madhya Pradesh-based journalist Sandeep Kothari, who has been burnt to death...

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    • मिशनरीज ऑफ चैरिटी प्रमुख सिस्टर निर्मला का निधन

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 15:55:58 +0000
      नई दिल्ली। मदर टेरेसा के बाद मिशनरीज ऑफ चैरिटी की प्रमुख की जिम्मेदारी संभालने वाली सिस्टर निर्मला जोशी का आज सुबह निधन हो गया। वह 81 साल की थीं। मिशनरीज ऑफ चैरिटी के एक अधिकारी के हवाले से मीडिया...

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    • तुम्हारा बाप ज़िन्दगी भर जेल में रहा लेकिन मुझे एक भी चिट्ठी नहीं लिखा-मेरी माँ का दर्द

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 15:52:41 +0000
      मेरी माँ का दर्द इस वीडियो को देखने के बाद मेरी माँ ने कहा, "तुम्हारा बाप ज़िन्दगी भर जेल में रहा लेकिन मुझे एक भी चिट्ठी नहीं लिखा "असीमा भट्ट ( की फेसबुक टाइमलाइन से साभार) असीमा...

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    • रिहाई मंच ने जारी की सपा सरकार के 40 बड़े अपराधों की सूची, सरकारी हमले के खिलाफ होगा धरना

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 13:53:35 +0000
      यूपी में पत्रकारों, आरटीआई कार्यकर्ताओं, महिलाओं, दलितों व आमजन पर सरकारी हमले के खिलाफ होगा धरना  लखनऊ। रिहाई मंच ने प्रदेश में इंसाफ मुहिम छेड़ते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार करोड़ों रूपयों के...

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    • क्या मोदी सरकार 'भ्रष्टाचार मुक्त'और 'जवाबदेह'है?

      Posted:Tue, 23 Jun 2015 13:22:24 +0000
      नई दिल्ली। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी)- माकपा ने सवाल किया है कि क्या मोदी सरकार 'भ्रष्टाचार मुक्त'और 'जवाबदेह'है? माकपा पोलित ब्यूरो ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज...

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    *****Is Narendra Modi Not a SICK MAN?*****
    Ashok T Jaisinghani
       Yoga Asanas have NOT made Narendra Modi HEALTHY. He is a SICK MAN who is SUFFERING from chronic SLEEPLESSNESS, as he gets ONLY 3 HOURS of SLEEP in a day.

       In the International Yoga Day program of June 21 at Rajpath in New Delhi, telecast by DOORDARSHAN and other TV channels, how many viewers saw the TREMOR in Modi's HAND, as he was using his thumb and one finger to alternately close his left and right nostrils to perform the breathing exercises? 

       Overworked and exhausted Narendra Modi is a SICK MAN. He requires MEDICAL treatment, PROPER DIET, ADEQUATE REST and MORE SLEEP. Modi should SLEEP for at least 6 HOURS daily to be in REALLY GOOD HEALTH. Adequate SLEEP is necessary for WORKING EFFICIENTLY and for AVOIDING MISTAKES, which may even CAUSE ACCIDENTS.

       Yoga Asanas CANNOT give GOOD HEALTH to anyone who does NOT FOLLOW the LAWS of NATURE. Nobody can DEFY the LAWS of NATURE and still REMAIN HEALTHY. 

       With a waistline of about 58 inches, and suffering from INSOMNIA, and with signs of TREMOR in his hands, Narendra Modi CAN NEVER be a ROLE MODEL for those who seek GOOD HEALTH. Making Modi his ROLE MODEL, who will like to become FAT to get a 58-inch waist, suffer from INSOMNIA and have TREMOR in HANDS? 

       The PEOPLE of India DON'T NEED any Yoga LESSONS from Prime Minister Narendra Modi, but they want GOOD GOVERNANCE from him. The GOVERNMENT of India must provide unadulterated PURE FOOD, CLEAN WATER, clothing, shelter, education, employment and SECURITY to ALL PEOPLE. There must be justice, communal harmony and PEACE in the whole country. 

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    CC News Letter 24 June - Is BDS Replacing Iran As Israel's Blackmail Card?

    Dear Friend,

    If you think the content of this news letter is critical for the dignified living and survival of humanity and other species on earth, please forward it to your friends and spread the word. It's time for humanity to come together as one family! You can subscribe to our news letter here http://www.countercurrents.org/subscribe.htm. You can also follow us on twitter, http://twitter.com/countercurrents and on Facebook, http://www.facebook.com/countercurrents

    In Solidarity
    Binu Mathew
    Editor
    www.countercurrents.org


    UN Report Details Israeli War Crimes In Gaza
    By Jean Shaoul

    http://www.countercurrents.org/shaoul240615.htm

    The report into Israel's war on Gaza last summer by the United Nations Human Rights Council (UNHRC) found that both Israel and Hamas committed war crimes during Israel's war on Gaza last summer. But while some newspaper headlines may give the impression of equal blame, the UNHRC's commission of inquiry nevertheless highlighted the disproportionate nature of the killings—2,251 Palestinians of whom 1,462 were civilians were killed and 11,231 injured, compared to just 67 Israeli soldiers along with 6 civilians killed and 1,600 injured


    Is BDS Replacing Iran As Israel's Blackmail Card?
    By Alan Hart

    http://www.countercurrents.org/hart240615.htm

    My own view is that the BDS movement as it currently is should now give priority to putting its act together to press the governments of the major powers to put Israel on notice that it will be isolated and sanctioned by the whole world if it does not end its defiance of international law and denial of justice for the Palestinians


    Thoughts On Pope Francis' Laudato Si
    By Herman Daly

    http://www.countercurrents.org/daly240615.htm

    The encyclical calls out the opponents and forces them to defend themselves. To give them the benefit of the doubt, they may really think that Francis is rendering to God what actually belongs to Caesar's oligarchy. But neither Caesar, nor the market, nor technology created us, or the earth that sustains us. Thanks to Francis for making that very clear when so many are denying it, either explicitly or implicitly


    BP Data Suggests We Are Reaching Peak Energy Demand
    By Gail Tverberg

    http://www.countercurrents.org/tverberg240615.htm

    Some people talk about peak energy (or oil) supply. They expect high prices and more demand than supply. Other people talk about energy demand hitting a peak many years from now, perhaps when most of us have electric cars. Neither of these views is correct. The real situation is that we right now seem to be reaching peak energy demand through low commodity prices. I see evidence of this in the historical energy data recently updated by BP (BP Statistical Review of World Energy 2015)


    The Die Is Cast - To Survive We Must Be Friends
    By Lionel Anet

    http://www.countercurrents.org/anet240615.htm

    What's needed is for the power behind the political leaders to imagine their future and their children's future. We must help them see that, furthermore, it's possible to do it before it's too late; also, it may be possible to start on that track very soon. We need to follow up on the Encyclical "Laudatum Si' " by Pope Francis, and the Lancet Health and climate change: policy responses to protect public health. We only have a narrow window of opportunity to change humanity's direction, how narrow that opportunity is can only be found out after it's too late


    Militarism's Hostages
    By John Scales Avery

    http://www.countercurrents.org/avery240615.htm

    Do our "Defense Departments" really defend us? Absolutely not! Their very title is a lie. The military-industrial complex sells itself by claiming to defend civilians. It justifies vast and crippling budgets by this claim; but it is a fraud. For the military-industrial complex, the only goal is money and power. Civilians like ourselves are just hostages. We are expendable. We are pawns in the power game, the money game


    The B Vocabulary: The Western Left And Its Sterile 'Field of Ideas'
    By Ramzy Baroud

    http://www.countercurrents.org/baroud240615.htm

    Over the year, I realized that the term 'left' is not exclusive to a political ideology, but a mode of thinking championed mostly by self-tailored 'leftist' western intellectuals. I grew to dislike it with intensity. But that has not always been the case


    In Memory Of Martin Luther King— What If?
    By A D Hemming and Bati Ahmed

    http://www.countercurrents.org/hemming240615.htm

    To knock down any attacks on patriotism Dr King could have exposed this deal with the Nazi devil at Ft Hunt had this information been available at the time. The facts on the Nazi spy network of Rienhard Gehlen get through to the most brutal truths about the fraud of the Cold War and all that came from it including Vietnam


    Comforting A Baby Is Violent
    By Robert J. Burrowes

    http://www.countercurrents.org/burrowes240615.htm

    If you want a powerful adult, do not frighten a baby or child out of expressing their feelings


    Suggestions To Muslim Personal Law Board
    By Mike Ghouse

    http://www.countercurrents.org/ghouse240615.htm

    While applauding the position taken by the All India Muslims Personal Law Board (AIMPLB), we hereby acknowledge a few key points about the politics of International Yoga Day and pleased to make a few suggestions. It is a delicate issue, and I pray that Muslims will follow the principles set in motion by Prophet Muhammad (pbuh) and commit to mitigating the conflicts and nurturing goodwill for the common good of the society


    Sri Lanka: Sub-Inspector And His Assistant Convicted,
    Sentenced To Death For Murder
    By Asian Human Rights Commission

    http://www.countercurrents.org/ahrc240615.htm

    On 23 June 2015, the Negombo High Court judge M.Z. Razeen found Sub Inspector Suresh Gunaratne and one of his assistants guilty of murdering Gerald Mervin Perera in November 2004. The two policemen have been sentenced to death. Another case of torture is pending against the same Sub Inspector and several other police officers who were attached to Wattala Police Station in 2002 for torturing and seriously injuring the victim, Gerald Mervin Perera. Gerald suffered a kidney failure because of the torture he suffered in custody in 2002


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    The Yoga Drive Un-Constitutional, Un-Pluralistic

    21 Jun 2015 logo 0 commentsShare |      
    The politics of hatred gives way to lies and deceit, controversies and uncertainties; for hatred has no leg to stand on its own. The hate-others juggernaut of Hindutva has proved it umpteen times, more so since its political wing, the BJP came to power at the Centre with thumping but democratically disproportionate majority and has been pushing the nation ahead with non-inclusive governance. After many provocative, anti-minority and un-Constitutional statements, now deceitful lies like 'no communal riot has occurred in the country during the last one year' and creating controversies like bid to impose compulsory yogasurya namaskar and saraswati vandana, the practices of a particular religious culture, on our plural Bharat amount to violation of the very spirit of the Constitution of India and the secular fabric of the nation.
    Calling yoga a mere exercise is a folly. Yoga is in fact an act of Hindu meditation as averred by Vishwa Hindu Parishad leader Praveen Togadia, who said that 'the utterance of word 'Om' and the practice of surya namaskar are integral to yoga and hold supreme importance'. But the practitioners of controversies have tried to hoodwink the religious minorities, saying that those who do not like to chant 'Om' can take the name of Allah. This shows their frantic bid to ensure maximum participation in yoga celebrations on 21 June.
    It is not that all Hindutva leaders are ready to buy the idea that the word 'Om' can be replaced with Allah while doing yoga. Dr. Togadia has already opposed it, saying that 'the use of word Allah during yoga would be an insult to Lord Shiva'. So why are you urging Muslims to participate in the yoga celebrations, and thereby causing an insult to your deity? Some gullible members of the minority community might fall prey to their gameplan but Muslims know for certain that bowing before anyone or anything created by one Supreme Allah, the Creator and Master of the universe and all that lie between the heavens and the earth, is tantamount to indulging in shirk (polytheism) and they will never do this.
    It is in the fitness of things that some Muslim and Christian organisations like All India Muslim Personal Law Board, Jamaat-e-Islami Hind and Roman Catholic Church-operated Diocesan Society of Education have voiced their strong objection to this un-Constitutional move of the Government. It is high time all minority leaders shared a platform to tell the nation why participation in these acts of meditation like yogasurya namaskar and saraswati vandana are detrimental to the respective beliefs of the minorities as well as to the secular ethos of the nation.


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    Dear Mr. Palash Biswas, 

    Many thanks for sharing your thoughts. For quite some time, I have been calling for making NGOs self reliant through creating a business model while establishing credentials for receiving the donations. I do not know whether NGOs which are active and filing returns have been taken off the list of registered organisations. I think, we need to have clear cut stories or list of such NGOs which you think have been victimized. Also, we need to have the list of NGOs whose FCRA has been cancelled. Needless to say, organisation espousing a particular vision can not have monopoly in India to be treated as bonafide organisation namely RSS supported organisations. I think ,we need to have clear listing so that forums which are active such as National Confederation of Dalit Organisations NACDOR www.nacdor.org.in  may take up the issue. NACDOR has taken up the issue submitting memo to Prime Minister on December 5,2014.

    I would also alternatively take up the issue through NAFMOR which is a group , I created without having a single real meeting but through online collaborations and discussions. I have made submission to PM .

    With warmest regards

    Dr.M.Mukhtar Alam

    2015-06-24 14:03 GMT+05:30 Palash Biswas <palashbiswaskl@gmail.com>:
    फासिज्म के केसरिया राजकाज में जनपक्षधरता निषिद्ध है और किसी सक्रियता का मतलब है बजरंगी धर्मोन्माद।बाकी सब कुछ प्रतिबंधित है।
    पलाश विश्वास
    Gopal Rathi's photo.

    हम लगातार कह रहे हैं कि फासिज्म के केसरिया राजकाज में जनपक्षधरता निषिद्ध है और किसी सक्रियता का मतलब है बजरंगी धर्मोन्माद।बाकी सब कुछ प्रतिबंधित है।

    समझ में आनी चाहिए कारपोरेटवकील के जिम्मे सौंप दी है हमने अपनी आजादी और ढोर डंगर की तरह महाजिन्न हमें हांके जा रहा अडानी अंबानी की विश पूरी करने के लिए।बिलियन बिलियन  डालरों का कमीशन कितना होगा हिसाब लगाते रहिये।

    अब जनप्रतिरोध के झंडे जो उठाये हैं,शामत उनकी है और उन्हें होश नहीं है तनिको।विदेशी फंड अब पीएमओ या संघ परिवार से नत्थी होने पर मिलेगा।वरना लािसेंस कैंसिल है।
    नेट  गवर्नेंस का अमेरिकी एजंडा अब संघ परिवार का एजंडा है।भारत सरकार ने शरणार्थियों के चार्टर पर दस्तखत नहीं किये।शरणार्थी समस्या अभी चालू आहे।सबसे ज्यादा शरणार्थी भारत में वर्क परमिट जिंदगी जी रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत के न्याय क्षेत्र में भी भारत नहीं है।अपराध करने के बाद राजनीतिक संरक्षण में भगोड़े पेरिस हिल्टन के साथ सेल्पी खिंचवाने मगन हैं और चुनौती खुलकर देते हैं कि कोई उनका ऎउखाड़ नहीं सके हैं क्योंकि तमाम हाई प्रोफाइल चियारिये चियारिनें उनकी जेब में है।भारत रत्न वहीं है जो जहर पिलाने खिलाने का विज्ञापन करें और जनप्रतिनिधि भी वे ही हैं।

    हम बार बार कह रहे हैं कि जनपक्षधर सामाजिक पर्यावरण कार्यकर्ताओं को को ही वैकल्पिक मीडिया का रास्ता बनाना है।पत्रकारिता भी उन्हें ही करनी है।जन आंदोलन और वैकल्पिक मीडिया मिलकर बचे खिुचे लोकतंत्र को बचानाे की दजिम्मेदारी हमारी है।
    मीडिया में हमारे साथी जिंदा जलाये जा रहे हैं और मीडिया में खामोशी है।हम खुद जलाये जाने के इंतजार में हैं।
    जन आंदोलन के मोरेच पर भी अजब सन्नाटा है और शटर तेजी से बंद होने लगा है।दुकानें अब चलेंगी नहीं दोस्तोंं कि बाहुबलियों और धनपशुओ,माफिया,बिल्डरों और प्रोमोटरों की हुकूमत है,धर्मोन्माद राष्ट्रीयता है और बजरंगी हमारी सेनाएं हैं।

    अब लीजिये,साथियों ने खबर दी है कि  सरकार ने देश भर में कुल 2,406 गैर सरकारी संगठनों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इनमें वे एनजीओ भी शामिल हैं जो स्कूलों और अस्पतालों का संचालन करते हैं। पंजीकरण रद्द करने के मद्देनजर गैर सरकारी संगठन विदेशी चंदा हासिल नहीं कर पाएंगे।
    जिन गैर सरकारी संगठनों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं उनमें महाराष्ट्र सबसे ऊपर है, जिसके 964 एनजीओ के लाइसेंस रद्द हुए हैं। उत्तर प्रदेश के 740, कर्नाटक के 614 और तमिलनाडु के 88 गैर सरकारी संगठनों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि लाइसेंस रद्द करने की यह प्रक्रिया 19 जून से आज के बीच हुई।
    एनजीओ ने अपने सालाना रिटर्न पेश नहीं किए और अन्य विसंगतियां भी हुईं जिनके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 'विदेशी योगदान नियमन कानून'के तहत इन एनजीओ के पंजीकरण रद्द करने का फैसला किया।

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    Please join and circulate.
    Solidarity,
     Kiran Shaheen
    FIND WHAT YOU LOVE AND LET IT KILL YOU - Bukovski

    From: All India Peoples Forum AIPF <allindiapeoplesforum@gmail.com>
    Date: 24 June 2015 at 22:27
    Subject: Anti-Emergency Day, 26 June, Jantar Mantar, 4 pm onwards - pl join, and share widely
    .





    All India People's Forum

     

    Labour Rights, Land Rights Campaign

     

    Marking the Anniversary of the Emergency and 
    Protesting Today's Undeclared Emergency

     

    EMERGENCY THEN AND NOW

    Bol ki Lab Azad Hai Tere – Speak Out For Your Lips Are Free

     

    An Evening of Protest

    Public Meeting and Cultural Programme

     

    26 June, 4 pm, Jantar Mantar

     

    Participants
    Atul Sood

    Shamsul Islam

    Vishnu Nagar

    Asad Zaidi

    Manglesh Dabral

    Kiran Shaheen

    Kavita Krishnan

    Ragini Performance by Satbir Shramik

    Nishant Natya Manch

    Sangwari

    And others


    A selection of short films will also be screened: 



    1. Music Video Gaon Chorab Nahi  / Hindi / 5 min/ Directed by K P Sasi
        Theme: People's struggle

    2. Trailer of documentary Factory/ Hindi / 3 min 27 sec / Directed by Rahul Roy
    Theme : Labour issue

    3.Trailer of documentary  Muzzafarnagar Baaqi Hai / Hindi with EST/ 12 min 27 sec / Directed by Nakul Sahni

    Theme : Fascism and new economic agenda

    4. Music video Chal Chaliye / Hindi/ 5 min/ Directed by Majma
    Theme: Dream for a better society

    5. Music video Ye Hitler Ke Sathi / Hindi and English / By Sahir Shambaji Bhagat / 11 min 35 sec

    Theme : Critique of Modi government in support of FTII students

    6. Musical  Excerpt from documentary Vira Pedica Company Hawa/ Odiya with EST/ Sung by Bhagwan Manjhi and directed by Samrendra Dash/ 1 min 23 Sec

    Theme : People's struggle against big corporations in Odisha

     


    Friends, 

    A year ago, a Government was elected at the Centre, promising good days. A year later, what have people got?

    ·     Anti-worker labour law changes, crackdown on workers' rights- without consulting workers!

    ·     Anti-farmer changes in Land Acquisition law, allowing grab of  land without farmers' consent!

    ·     Women's rights to dress, live freely, marry who they please under attack from groups backed by the Government

    ·     Bans on right to eat food of one's choice  

    ·     Minorities and Dalits are facing increased violent attacks, with communal and casteist forces enjoying Government protection  

    ·     Appointment of sub-standard persons as heads of institutions, with Sangh connections or pro-Modi sycophancy as sole qualification.

    ·     Ban culture – crackdown on activists and citizens critical of the Govt

    ·     Open encouragement of groups involved in killing of rationalist activists like Dabholkar and Pansare  

    ·     Instead of tackling issues in the North East and Kashmir political initiatives and scrapping AFSPA, we have a controversial action in Myanmar, promoting jingoism and tension with neighbours     

    In 1975, the Congress Government imposed Emergency on the country, crushing voices of dissent and democratic rights.

    40 years later, in 2015, it seems again as though the Modi Government has imposed an undeclared Emergency.

     

    On 26 June, to mark the anniversary of the Emergency and to protest the undeclared Emergency today, please join an evening of protest with speeches, poetry and cultural programme at Jantar Mantar  4 pm onwards.

     

    All India People's Forum (AIPF)



    -- 
    All India People's Forum (AIPF)

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    Situation in Nepal Tarai with reference Anglo Nepalese War

           Situation in Nepal Tarai with reference Anglo Nepalese War  

     

     

               Anglo Nepalese War with   Reference to Gurkha Rule over Uttarakhand & Himachal -6

    History of Gorkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) -127    

       History of Uttarakhand (Garhwal, Kumaon and Haridwar) -648

                              By: Bhishma Kukreti (A History Student)

     

      In west of Kalinadi (plains of Kumaon, Garhwal and Himachal), Nepalese Force was weaker than East India Company. However, in east of Kalinadi, in Nepal Tarai, strategically Nepalese force was stronger than East India Company.

          Gurkha reached to Nepal Tarai before East India could reach and capture the territory. Tarai was also affected by Malaria from April to October and Company officials would not accommodate such seasonal diseases. However, East India Company appointed Jamindar for collecting tax from farmers. Company was not interested for looking after the citizen interests. There was also not clear demarcation of border of Nepal and Company in Tarai region.

     In 1811, Barely Magistrate came to know that Gurkah built a fort at Kheri. Kheri and nearby region was understood under Awadh Nabab. Barely Magistrate was aware that by 1809, there was no Gurkha right on Kheri. In Nepal Tarai there used to take place such many dispute incidents between Gurkha and East India Company.

             Nepal Tarai was important for Gurkha and East India Company. The Sal forests were gold mines for Gurkha. There were wild animals too in those forests and were commercially important. Sal was exported all over North and East India. Animals and their body parts were exported. The agriculture was also beneficial in this part.

            Due to various disputes factors in North, Central and West India, Governor General Wellesley and other Governor Generals made policies to be neutral with Gurkha for the time being. Therefore, Bhim Sen Thapa got chance to expand its territory in Tarai.

     Bhim Sen Thapa was aware of strength of East India Company. Even then Thapa continued to capture the Territory of East India Company. The Tirhut Magistrate informed that from 1712 -1812, Gurkha captured more than 200 villages of East India Company. Gurkha captured five eight Pargnas of Khairigar; Gurkha used to show rights on many villages of Moradabad. Gurkha captured many villages of Gorakhpur and Saran regions. Company officials were aware of Gurkha acts but were involved in settling other territories and were not to take head on with Gurkha. East India Company only used to wrote letters about border disputes.

     

    ** Most of references and details were taken from Dr Dabral

     

    Copyright@ Bhishma Kukreti Mumbai, India, bckukreti@gmail.com25/6/2015

    History of Garhwal – Kumaon-Haridwar (Uttarakhand, India) to be continued… Part -649

    *** History of Gorkha/Gurkha /Nepal Rule over Kumaun, Garhwal and Himachal (1790-1815) to be continued in next chapter 

     

    (The History of Garhwal, Kumaon, Haridwar write up is aimed for general readers)

    XX

                        Reference

     

    Atkinson E.T., 1884, 1886, Gazetteer of Himalayan Districts …

    Hamilton F.B. 1819, An Account of Kingdom of Nepal and the territories

    Colnol Kirkpatrik 1811, An Account of Kingdom of Nepal

    Dr S.P Dabral, Uttarakhand ka Itihas part 5, Veer Gatha Press, Dogadda

    Bandana Rai, 2009 Gorkhas,: The Warrior Race

    Krishna Rai Aryal, 1975, Monarchy in Making Nepal, Shanti Sadan, Giridhara, Nepal

    I.R.Aryan and T.P. Dhungyal, 1975, A New History of Nepal , Voice of Nepal

    L.K Pradhan, Thapa Politics:

    Gorkhavansavali, Kashi, Bikram Samvat 2021 

    Derek J. Waller, The Pundits: British Exploration of Tibet and Central Asia page 172-173

    B. D. Pande, Kumaon ka Itihas

    Sharma , Nepal ko Aitihasik Rup Rekha

    Chaudhari , Anglo  –Nepalese Relations

    Pande, Vasudha , Compares Histriographical Traditions of Gorkha Rule in Nepal and Kumaon

    Pradhan , Kumar, 1991, The Gorkha Conquests , Oxford University Press

    Minyan Govrdhan Singh , History of Himachal Pradesh

    A.P Coleman, 1999, A Special Corps

    Captain Thomas Smith, 1852,Narrative of a Five Years Residence at Nepal Vol.1

    Maula Ram/Mola Ram  , Ranbahadurchandrika and Garhrajvanshkavya

    J B Fraser , Asiatic Research

    Shyam Ganguli, Doon Rediscovered

    Minyan Prem Singh, Guldast Tabarikh Koh Tihri Garhwal

    Patiram Garhwal , Ancient and Modern

    Tara Datt Gairola, Parvtiy Sanskriti

    John Premble, Invasion of Nepal

    Chitranjan Nepali, Bhimsen Thapa aur Tatkalin Nepal

     

    XXX

    History Gurkha /Gorkha Rule over Garhwal, Kumaon, Uttarakhand; Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Pauri Garhwal, Udham Singh Nagar Kumaon, Uttarakhand; Sirmour Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Chamoli Garhwal, Nainital Kumaon, Uttarakhand; Kangara Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Rudraprayag Garhwal, Almora Kumaon, Uttarakhand; Baghat Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Tehri Garhwal, Champawat Kumaon, Uttarakhand; Punar Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Uttarkashi Garhwal, Bageshwar Kumaon, Uttarakhand;  Nahan Himachal; History Gurkha /Gorkha Rule over Dehradun Garhwal, Pithoragarh Kumaon, Uttarakhand; History Himachal; 

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