लालकिले पर गीता महोत्सव का आशय फिर वही मुक्तबाजारी नस्ली वर्चस्व।
योजना आयोग खत्म इसलिए क्योंकि वह सुधार अश्वमेध के माफिक नहीं।
कुल मिलाकर यह देश फिर वही महाभारत है और धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे हर कोई वध्य है जो निमित्त नियतिबद्ध हैं और सता के नस्ली वर्चस्व के लिए विधर्मी विदेशी हैं,भारतीय नागरिक हरगिज नहीं।
पलाश विश्वास
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संगीतबद्ध हो गयी आज की सुबह।
फोन पर अशोक जयसिंघानी में बच्चों की आवाज में गीत सुनाया और कहा कि इसे जेल में गा सकते हैं और अब जेलयात्रा कभी भी संभव है।
पूरा देश जेलखानै है,ऐसा हम जयसिंघानी जी को बता नहीं सकते।
मनचाहा राजकाज निबट जाने के बाद राजनीति का साध्वी जिहाद का अंजाम यह कि साध्वी निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणियों के मुद्दे पर राज्यसभा में पिछले एक सप्ताह से चला आ रहा गतिरोध आज सभापति द्वारा एक प्रस्ताव पढ़ने के बाद समाप्त हो गया।
इसी बीच विपक्ष की गैरहाजिरी में कारपोरेटकेसरिया हित में एक झटके से 1382 कानून अप्रासंगिक बताकर राजकाज तेज करने केलिए खत्म कर दिये गये हैं,हमने इस पर लिखा भी है।लेकिन हमें अभी नहीं मालूम कि उन खत्म किे कानून कौन कानून हैं और राजकाज उनसे कैसे बाधित हो रहा था।उनके खत्म हने का सीधा फायदा किन्हें है।
संसद और संसद के बाहर कोई पूछने वाला भी नहीं है।बहरहाल साध्वी चुनाव प्रचार करेंगी दिल्ली में और संसद भी बहाल है।
गौरतलब है कि प्रस्ताव में संसद के सभी सदस्यों, मंत्रियों और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से सार्वजनिक बयानों में हर कीमत पर शिष्टता बरतने की बात कही गई है। इस तरह के बयान को लेकर विपक्ष की मांग पर आज अंतत: सहमति बन गई और उच्च सदन में तीन बार के स्थगन के बाद प्रश्नकाल के दौरान सभापति द्वारा यह बयान पढ़े जाने के पश्चात सदन में सामान्य ढंग से कामकाज चलने लगा।
इसी बीच राष्ट्रीय राजधानी में कुछ गिरजाघरों को कथित रूप से क्षतिग्रस्त किए जाने की घटनाओं की पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने आज कहा कि देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और वह इस प्रकार के मामलों की एसआईटी से जांच कराएगी।
लोकसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के एंटो एंटनी ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि दिल्ली समेत विभिन्न क्षेत्रों में चर्चो पर लगातार हमले हो रहे हैं। ऐसे हमलों पर कार्रवाई नहीं होने से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। सरकार को इस दिशा में पहल करनी चाहिए।
इसी बीच चेन्नै से खबर है कि छह महीने पहले भाजपा के साथ गठबंधन करने वाली एमडीएमके ने अपना नाता तोड़ लिया है। पार्टी की बैठक में एनडीए से अपना नाता तोड़ने का प्रस्ताव पारित किया है।
एमडीएमके ने दावा किया है कि गठबंधन में शामिल होने के दौरान पीएम मोदी सहित सभी भाजपा नेताओं ने स्वीकार किया था कि वे श्रीलंका का समर्थन नहीं करें गे, लेकिन वे लोग दोबारा वापिस अपने ट्रैक पर आ गए। भाजपा तमिलों के खिलाफ काम करती रही है। मोदी ने राजपक्षे को चुनाव के लिए बधाई दी है।
अगर यह सच है ते पहेली यह है कि बाकी तामिल राजनीति क्यों केसरिया है।
इन्हीं परिस्थितियों के बीच आज सुबह ही पुणे से अशोक जयसिंघानी का फोन आया और कहा उन्होंने हम लोग जो लिख बोल रहे हैं,वह तो खुल्ला खेल है।तमाशा पुराना है।
उन्होंने कहा कि सारे समझदार लोग जानते हैं।
सही कहा है उन्होंने हमने तो एफडीआई को डालर छापने के मोदी उपक्रम बतौर चिन्हित भी किया है और औपनिवेशिक ब्रिटिश राजकाज का हवाला देकर औपनिवेशिक जमाने में नोट छापकर लूटने के खिलाफ बाबासाहेब के शोध का हवाला भी दिया है।जाहिर है कि हम नया कुछ भी नहीं कह रहे हैं।प्राब्लम आफ रुपी न पढ़ा हो तो पढ़ लीजिये तुरंत।
हम इसका क्या इलाज निकालें कि इस देश के सबसे बड़े अर्थशास्त्री के नजदीकी रिश्तेदार इल्युमिनेटी और जायनी घराने से हैं और वे हिंदुत्व का शास्त्रीय राग अलाप रहे हैं।
समझने वाली बात यह भी है कि नोबेल पुरस्कार जिस नोबेल महासय के नाम है,वे डायनामाइट के आविस्कारक हैं और हथियारों का उनका कारोबार है।
हथियारों के कारोबार का शांति और प्रगति से क्या नाता है ,इसका खुलासा वियतनाम के कसाई हेनरी कीसिंजर और बाराक ओबामा को मिले नोबेल शांति पुरस्कारों की दास्तां है।
हम क्या करें कि इस देश में आम नागरिकों की सुनवाी होती ही नहीं और न भीड़ में किसी चेहरे की कोई पहचान होती है।
आलोकित मंच से सुभाषित सूक्तियों से हम देश और समय की नब्ज बूझने की कवायद करते हुए तजिंदगी गुलामी ही जीते हैं।
आपस में हम संवादहीनता के रिश्ते निभाते हुए आग के दरिया से हजारों कोस दूर रहते हैं जबकि उस आग के दरिया को पार किये बिना मुहब्बत होगी नहीं।
लालकिले पर गीता महोत्सव का आशय फिर वही मुक्तबाजारी नस्ली वर्चस्व।
योजना आयोग खत्म इसलिए क्योंकि वह सुधार अश्वमेध के माफिक नहीं।
कुल मिलाकर यह देश फिर वही महाभारत है और धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे हर कोई वध्य है जो निमित्त नियतिबद्ध हैं और सता के नस्ली वर्चस्व के लिए विधर्मी विदेशी हैं,भारतीय नागरिक हरगिज नहीं।
इस हिंदुत्व के आलम का नतीजा यह कि मुसलमानों में केसरियाकरण इतना तेज हुआ है कि त्रेपन साल से बाबरी मस्जिद की लड़ाई लड़ने वाले हाशिम साहब अब मोदी महाराज की कदमबोशी के लिए बेताब है।
मुक्तबाजारी नस्ली रंगभेदी हिंदुत्व के एजंडे में अल्पसंख्यकों का यह हाल है तो दलितों,आदिवासियों के सारे राम और बीरसा हनुमान हुए जा रहे हैं।
आनंद तेलतुंबड़े के मुताबिक दलितों पर अत्याचार बढ़ गये हैं और अल्पसंख्यकों का जीना हराम हो गया है।
हस्तक्षेप में पटना में प्रतिरोध के सिनेमा की रपटे सिलसिलेवार जो हस्तक्षेप में छपी हैं,उन्हें जरुर पढ़लें,क्योंकि उन्हें पढ़े बिना हमारे लिखे का संदर्भ प्रसंग समझ में नहीं आयेगा।जिसके बिना यह कयामत तो जारी ही रहनी है और हो हल्ला मचाने की नौटंकी से मजमा लगेगा जरुर,पैसे भी होंगे वसूल जरूर,लेकिन हालात नहीं बदलेंगे।
गौर तलब है कि बाबरी मस्जिद के मुख्य मुद्दई हाशिम अंसारी ने गुरुवार को मामले के हल के लिए पीएम मोदी से मिलने की बात कही है। इससे पहले उन्होंने इस मुकदमे की पैरवी नहीं करने और रामलला को आजाद करने की बात कही थी। साथ ही, उन्होंने इस मामले के समाधान के लिए हनुमानगढ़ी के महंत और अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष ज्ञानदास के अलावा अयोध्या के अच्छे और ईमानदार हिंदुओं का साथ भी मिलने की बात कही है।
बिल्कुल सही कहा है कि आर्य वंशज हिंदुत्व की शरण में जाये बिना धर्मोन्मादी हिंदुत्व को अपनाये बिना इस देश में पिलव्कत किसी के वजूद का कोई मतलब ही नहीं ठैरा।
हाशिम साहेब के कहे का मतलब अक्षरशः तब तक नहीं समझ में आयेगा जबतक कि न अंधेरा चीरकर हम रोशनियों के जलवे से इस कयामत का रेशां रेशां बेनकाब कर पायें।
हम नहीं मानते कि हाशमी साहेब रातोंरात बदल गये होंगे।बदले वे हालात हैं,जिनमें उन्हें मोदी की शरण में जाने के अलावा कोई राह नहीं सूझ रही है।यह बहुसंख्य जनगण की हालत है जो बदलते हालात में असहाय और लाचार हो गये हैं।
हमें और बारीकी से पढ़ने की जरुरत है कि उन्होंने क्यों कहा, "जो लोग मेरी मुखालफत करते हैं, वह चाहते हैं कि रामलला जेल में रहें और वह एमपी, एमएलए बनते रहें।" यही नहीं, हाशिम ने नरेंद्र मोदीकी शान में कसीदे भी पढ़ डाले। उन्होंने कहा, "मोदी अच्छे आदमी हैं। उनकी 'हिसाब दो'वाली नीति काफी अच्छी है, क्योंकि राजनीति करने वाले हुकूमत का पैसा लेकर फायदा उठाते हैं। मोदी ठीक कहते हैं कि पहले जो पैसा दिया है, उसका हिसाब दो। कम से कम जो एमपी और एमएलए पैसा लेकर आते हैं और खर्च नहीं करते उनसे हिसाब तो मांग रहे हैं।"
गीता महोत्सव,संस्कृत का अनिवार्य पाठ और इंडिया टीम का समवेत स्वर साध रहे हैं हाशिम साहेब और तम दूसरे लोग,जिनके साथ हम खभी खड़े ही नहीं थे।हम उनसे बेवफाई की शिकायत करने के तो कतई हकदार ही नहीं हैं।
हमने शुरु से लिखा है कि लालकिले पर गीता महोत्सव का आशय यह है कि दावे अब सिर्फ अयोध्या,मथुरा और काशी पर नहीं है,दावे दिल्ली की तमाम ऐतिहासिक निर्माण पर है तो सारी पुरातात्विक विरासतें भी दांव पर हैं।इतिहास भूगोल दांव पर है।दांव पर है सभ्यता,संस्कृति,मनुश्यता,प्रकृति और पर्यावरण भी।
मुझे हिचक नहीं कि हाशिम साहेब इस आशय को बेशक समझ गये हैं और रालला की शरण में जाकर मुसलमानों के लिए अमन चैन मांगने की यह तरकीब निकाली है उन्होंने। मौजूदा हालात में जिसे गलत भी नहीं ठहराया जा सकता है ।
और समाचार एजंसी भाषा की ओर से प्रसारित इस खबर पर भी गौर करें कि
यूपी बीजेपी अध्यक्ष का दावा, प्राचीन तेजो महालय मंदिर का हिस्सा है ताजमहल
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बहराइच: दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल को वक्फ बोर्ड के हवाले किए जाने की मांग के बीच उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने आज यह कहकर विवाद को नया मोड दे दिया कि विश्व ऐतिहासिक विरासत ताजमहल प्रचीन तेजो महालय मंदिर का हिस्सा है।
बाजपेयी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि मुगल शासक शाहजहां ने मंदिर की कुछ जमीन को राजा जय सिंह से खरीदा था। बाजपेयी का दावा है कि इससे संबंधित दस्तावेज अभी भी मौजूद हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की संपत्तियों पर कब्जा जमाये बैठे उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री आजम खां की नजर अब विश्व विरासत इमारत ताजमहल पर है।
उन्होंने कहा कि ताजमहल में पांच वक्त की नमाज पढ़ने का आजम का सपना कभी नहीं पूरा हो पाएगा।
वक्फ मंत्री आजम ने मुतवल्लियों के 13 नवंबर को हुए सम्मेलन में कहा था कि वह राज्य सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड से कहेंगे कि वह ताजमहल को बोर्ड की संपत्ति बनाए और उन्हें (आजम को) उसका मुतवल्ली नियुक्त कर दें।
इस बयान पर जब संवाददाताओं ने आजम से सवाल किए तो वह पलट गए और कहा कि आप लोग मजाक को गंभीरता से क्यों ले लेते हो।
इसके बाद आगरा के एक संगठन इमाम-ए-रजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मांग की कि वे ताजमहल को वक्फ की संपत्ति घोषित करें और मोहर्रम के दौरान वहां मातम की इजाजत दें।
शियाओं के प्रमुख धर्मगुरुओं ने हालांकि ताज को शिया वक्फ बोर्ड की संपत्ति माने जाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि विश्व विरासत इमारतों को ऐसे विवादों से दूर रखना चाहिए।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल ला बोर्ड के प्रवक्ता यासूब अब्बास ने बताया कि जहां तक मुमताज महल का सवाल है, वह शिया थीं लेकिन ताजमहल देश की विरासत है और इसे सुन्नी या शिया वक्फ बोर्डों में से किसी को भी नहीं सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड अपनी मस्जिदों और मदरसों का रखरखाव तो कर नहीं पा रहे हैं, ताजमहल कैसे संभालेंगे। अगर ताजमहल वक्फ बोर्ड को सौंपने का मुद्दा उठा तो शिया और सुन्नी टकराव की मुद्रा में आ जाएंगे, इसलिए ताजमहल को झगड़े से दूर रखना चाहिए।
मोदी महाराज का राजकाज
दरअसल हमारे सामने चुनौती यह भी है कि न सिर्फ अस्मिताओं के आर पार,बल्कि भाषाओं और बोलियों, साहित्य और संस्कृति के माध्यमों और विधाओं की दीवारे तहस नहस करके भारत जोड़ने का कार्यभार है हम पर।
मोदी महाराज जो भी जो कह रहे हैं, जो उनका राजकाज है और विकास की जो उनकी परिकल्पना है और उनका जो हीरक चतुर्भुज है,उसका आशय लाल किले पर गीता महोत्सव से खुलता है।
उसका नाता सीधे संस्कृत के अनिवार्य पाठ के लेकर स्मृति ईरानी की अति सक्रियता है और सोवियत माडल योजना आयोग को खारिज करते हुए नई टीम इंडिया की पेशकश करते हुए मोदी का खुल्लमखुल्ला ऐलाने जंग है कि योजना आयोग सुधारोन्मुख विकास के माफिक नहीं है।
गौरतलब है कि योजना आयोग का गठन 1950 में पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने किया था। आयोग को आजाद भारत के आर्थिक विकास की योजना बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। योजना आयोग पंचवर्षीय योजनाओं के जरिए देश के औद्योगिक और कृषि विकास में अपना योगदान देता है।
गौरतलब है कि स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए भाषण में मोदी ने कहा था कि योजना आयोग अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। नई संस्था की जरूरत है। तब से ही सरकार योजना आयोग के विकल्पों पर काम कर रही है।
गौरतलब है कि बैठक में उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत, ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक, गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल, छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। हालांकि, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जीऔर जम्मू-कश्मीरके सीएम उमर अब्दुल्ला नहीं आए। ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस इस प्रस्ताव के खिलाफ हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योजना आयोग में बदलाव का वक्त आ चुका है। देश को एक नई व्वयस्था की जरूरत है।
उन्होंने कहा, "योजना आयोग की जगह एक उपयुक्त निकाय होना चाहिए ताकि देश की ताकत का मजबूती के साथ उपयोग किया जा सके।"
वहीं, कांग्रेस ने मोदी सरकार के फैसले को अलोकतांत्रिक करार दिया है। कांग्रेस का कहना है कि इससे केंद्र और राज्य दोनों के बीच संबंध प्रभावित होंगे।
इससे भी दिमाग की बत्ती नहीं जली तो विदेश मंत्री का विश्व हिंदू परिषद,दुर्गा वाहिनी,बजरंगी दल समेत संघ परिवार के नेत-ृत्व पर खुल्ला दावा है जो अब न विदेश मंत्री बतौर सक्रिय है और न देशहित में उनकी राजनयिक कोई भूमिका है और धर्मोन्मादी राष्ट्रवाद का पताका उठाते हुए भगवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करनेका ऐलान कर रही हैं वे।
सुषमा स्वराज ने रविवार को लाल किला मैदान में गीता की '5151वीं वर्षगांठ' पर कहा था कि इसे राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की बस औपचारिकता मात्र बाक़ी है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के इस बयान पर विवाद धर्म बनाम धर्मनिरपेक्षता का फर्जी महाभारत छिड़ गया है और विपक्षी पार्टियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
संघ परिवार के हिंदुत्व एजंडे में फर्जी जिहाद के तमाम सिपाहसालारों की अपनी अपनी रंग बिरंगी दुरंगी भूमिका है और इसका खुलासा हम बार बार करते रहे हैं।
कुल मिलाकर यह देश फिर वही महाभारत है और धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे हर कोई वध्य है जो निमित्त नियतिबद्ध हैं और सता के नस्ली वर्चस्व के लिए विधर्मी विदेशी हैं,भारतीय नागरिक हरगिज नहीं।
इसी के बीच जो अमेरिका हम बनने को बेताब है ,उस जन्नत की हकीकत भी वहीं सनातन नस्लवागद है और अमेरिका में पुलिस के हाथों कई अश्वेत लागों की हत्या के विरोध में प्रदर्शन जारी है और न्यूयॉर्क में शनिवार को एक बड़े विरोध प्रदर्शन के लिए तैयारी चल रही है।
समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, अश्वेत लोगों की हत्या को लेकर पिछले बुधवार को शुरू हुआ प्रदर्शन लगातार पांचवे दिन रविवार को भी जारी रहा।
ग्रैंड ज्यूरी द्वारा अफ्रीकी अमेरिकी एरिक गार्नर की हत्या के आरोपी पुलिस अधिकारी पर आरोप तय नहीं करने के फैसले के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन दिनों-दिन व्यापक रूप लेता जा रहा है।
काश्मीर आख्यान
श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1983 के बाद पहली बार किसी ने इस स्टेडियम में रैली करने की हिम्मत की है। मोदी ने कहा कि पहाड़ का पानी और जवानी देश के काम आना चाहिए। भाजपा ने इस रैली में एक लाख लोगों के जुटने का दावा किया है। मोदी ने कहा कि सरकार बनने के बाद मैं हर महीने जम्मू-कश्मीर आया हूं। पीएम ने कहा कि कश्मीर के लोगों के प्यार को मैं विकास के साथ वापस लौटाऊंगा। मोदी ने कहा कि कश्मीर में पानी से बिजली पैदा होगी, तो मुसीबत दूर होगी। मोदी ने कहा कि कश्मीर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं ..
बहराहाल,चुनाव नतीजे चाहे कुछ हो,हकीकत यह है कि काश्मीर में अभी उम्मीदें बाकी हैं जिसे आर्थिक सुधारों के अजबकि राष्ट्रीयझंडा लेकर संविधान मनाने वाले अश्वमेध से रौंदता जा रहा है नस्ली धर्मोन्मादी सत्तावर्ग।
काश्मीर में राष्ट्रीय झंडे के साथ संविधान दिवस मनाने का तात्पर्य जिनके समझ में नहीं आया वे गौर करें कि जम्मू कश्मीर में प्रथम चरण के चुनाव में हुए रिकार्ड मतदान को दोहराते हुए दूसरे चरण में भी 71 फीसदी मतदान हुआ है।
वहीं, अलगाववादियों के चुनाव बहिष्कार के आह्वान को 18 सीटों पर मतदाताओं ने फिर से नजरअंदाज कर दिया।
इसके विपरीत,काश्मीर के सांबा में बोले नरेंद्र मोदी, नौजवान अब एके 47 नहीं, एंड्रायड वन चाहता है।वहीं, श्रीनगर में सोमवार को मोदी की रैली को देखते हुए अधिकारियों ने रैली स्थल पर 4,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदीसोमवार को जम्मू-कश्मीरमें हैं। मोदी सांबा के विजयपुर में अपनी रैली को संबोधित कर चुके हैं। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीरस्टेडियम में एक बड़ी रैली को भी संबोधित किया। बीजेपी नेताओं के मुताबिक इस रैली में 1लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद है।
मोदी की रैली के दौरान शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम के आसपास सेना ने सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी है और श्रीनगर शहर को किले में तब्दील कर दिया गया है। खुद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर हर घंटे सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा कर रहे हैं।
यह बात कुछ समझने वाली नहीं है।
बायोमेट्रिक डिजिटल देश में आंतरिक सुरक्षा का आलम यह और प्रधानमंत्री काश्मीर की बुनियादी समस्याओं को बिना छुए मुक्ताबाजारी हिंदुत्व राग अलपते हुए कहते हैंः सरकार में इरादा है, तो वह बदलाव ला सकती है, लेकिन जम्मू कश्मीर की सरकारों ने कभी जनता की परवाह नहीं की।
सिर पर पगड़ी पहने हुए मोदी ने कहा कि मैं अभिभूत हूं कि मुझे प्रेमनाथ डोगरा की पगड़ी पहनाई गई। मोदी ने कहा कि भाजपा का मंत्री है सबका साथ, सबका विकास। मोदी ने कहा कि विस्थापितों का गुनाह क्या था, कि वो देश के लिए मर मिटने वाले लोग थे।
कालाधन बाबा,कालाधन राजनीति
मजा इस बात का भी लीजिये कि विदेशों से कालाधन वापस लाने के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए योगगुरु बाबा रामदेव ने अब मोदी सरकार को चेतावनी दी है। बाबा रामदेव ने कहा कि कालाधन वापस लाने के लिए जनता ने मोदी सरकार को मौका दिया है। एक वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक अगर सरकार कालाधन वापस लाने में किसी तरह की सुस्ती दिखाती है तो वह एक बार फिर रामलीला मैदान में उतरेंगे और पूरे देश में आंदोलन करेंगे। हालांकि रामदेव ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे पर पूरा भरोसा है।
ये वे बाबा हैं जो बुरका पहनकर रामलीला मैदान से भागे थे और भ्रष्टाचर विरोधी कालाधन वापस लाओ ब्रिगेड के अन्यतम सिपाहसालार हैं।
इस ब्रिगेड का आधा अब सत्तादखल के लिए संघ परिवार से साझा के लिए शिवसेना मोड में है।आधा हकीकत आधा फसाना अजब गजब अफसाना है।
मोदी की आराधना है तो भाजपा के खिलाफ गाना बजाना है और सत्ता में शामिल हो जाना है।
आधा ब्रिगेड अन्ना और क्रेन बेदी हैं जो भाजपी न्त्थी है।
अब कालाधन का किस्सा भी यह कि स्विटजरलैंड सबूत मांग रहा है और मारीशस हांगकांग के रास्ते कालाधन सफेद होकर विदेशी निवेशको की आस्था के साथ साथ ग्लोबल हिंदुत्व है और वही नहीं,अमेरिका इजराइल की अगुवाई में हिटलर मुसोलिनी के अधूरे काम यानी अनार्यों के सफाया का एजंडा है।
बहरहाल,स्विट्जरलैंड ने भारत से साफ कहा है कि वह काले धन पर सबूत के साथ आएं। विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के लिए भारत के लगातार बढ़ रही तथाकथित कोशिशों के बीच स्विट्जरलैंड ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में किसी तरह के 'टटोलने के अभियान' में सहयोग नहीं करगा। स्विट्जरलैंड का कहना है कि भारत के अधिकारी अपनी स्वतंत्र जांच किए बिना स्विस बैंकों में सभी भारतीय खाताधारकों के नाम की जानकारी नहीं मांग सकते है।
तो बाबा फिर देश परिक्रमा के तेवर पर हैं और चूंकि वे अपनी कंपनियों के सीईओ है तो देश के सीईओ के खिलाफ उनकी इस ब्रांड बूस्टिंग सफारी का पाठ मौजूदा सत्ता विमर्श और समीकरण व्याकरण को समझने में मददगार होगा जरुर।
मत चूको चौहान।
सोलह दिसंबर का जश्न
द्रोपदी न होती तो महाभारत न होता।
दरअसल असली कुरुक्षेत्र तो द्रोपदी की देह पर ही लड़ा गया।
उसी द्रोपदी देहे किंतु कुरुक्षेत्रे धर्मक्षेत्रे जन्म जन्मातर कर्मफल नियतिबद्ध निमित्तमात्र कोवद्य़बना देने का गीता प्रवचन है जो भगवान के बोल हैं,वे दरअसल नवनाजीवादी विमर्श हैछगैरजरुरी विजातीय जनसंख्या का सफाया।
स्त्री देह आखेट ही महाभारत का प्रस्थानबिंदू है तो मनुस्मृति का स्त्री को शूद्र बताने का विधान ही हिंदुत्व है तो हिंदू साम्राज्यवाद की नींव भी वही भागवत गीता है जिसे एक दूसरी कलिकालीन स्त्री राष्ट्रीय ग्रंथ बनाने की प्रस्तावना कर रही हैं।
सारे कांड लंकाकांड से लेकर अयोध्या कांड राजधानी के गर्भनाल से जुड़े हैं,जहां बांग्ला बोलने वाले तमाम लोग बांग्लादेशी है तो नेपाली गुरखे हैं और बाकी हिमालय के लोग रंगरुटों और बर्तन मांजो जमात है और स्त्री देह आखेट है।
सोलह दिसंबर का जश्न अब भी जारी है।
बलात्काकांड की वजह से मृतात्माओं के महानगर,जहां आधा महानगर समाधियों,मकबरों और तन्हा तन्हा आलीशान महलों का है,राजधानी नई दिल्ली में नये साल का जश्न फिर सोलह दिसंबर बतर्ज मनाया जा रहा है।
हमने कल ही बंगालभर में स्त्री उत्पीड़न की घटनाओं को ब्लागों में डाला और आज फिर वहीं खेल दिल्ली में खुल्लमखुल्ला।
राजधानियों में तो बलात्कार सत्ता का महोत्सव है और राजधानियों से बहुत दूर यह रोजमर्रे की हकीकत है।
अगर स्त्री उत्पीड़न की सारी वारदातें दर्ज हों तो देशभर के सारे अखबारों के पन्ने कम पड़ जायेंगे।सारे अखबारों में तब रवींद्र सरोवर नजर आयेगा।
रोज पूर्वोत्तर के बच्चों के बच्चों पर हमले होते हैं तो रोज बलात्कार भी होते हैं और रोज रोज मोमबत्ती जुलूस भी निकलते हैं और जंतर मंतर में किसी न किसी का धरना प्रदर्श होता है।जनपथ से लेकर संसद और संसद से लाइव टीवी परदे पर रात दिन चौबीसों घंटे सातों दिन विचित्र किस्म के नुक्कड़ नाटक होते हैं।
सत्ता विमर्श में तस्वीर का यह दूसरा रुख है जो बेपर्दा होता नहीं है।
दरअसल हम इस नस्ली पुरुषतांत्रिक समाज में स्त्री देह के आखेट को ही सफलता का चरमोत्कर्ष मानते हैं और रूपहले माध्यमों का कथासार भी यही है,जहां जिंदगी की आहटें बमश्किल दर्ज हो पाती हैं।
समूचा साहित्य अब अनंत देहगाथा है।सारी विधायें अब नंगी स्त्रीदेह है।कला का चरमोत्कर्ष भी फिर वही वस्त्रहरण।
स्त्रीविरुद्धे भोग की अनंत रात है,जिसी तपिश से हम जी रहे हैं और मर भी रहे हैं,जो दरअसल घर घर की कहानी भी है।
क्योंकि सेक्सस्लेव औरतें ही सती सावित्रियां हैं और इसी सतीत्व प्रतिमान के तहत स्त्री का अस्तित्व ही पल छिन पल छिन दांव पर लगा है।इसीलिए जिंदगी उसके लिए पल पल मरण है।
पुरुषतांत्रिक समाज,नस्लभेदी ,रंगभेदी,जातिवादी समाज व्यवस्था में स्त्री को अपनी देह से मुक्ति तो मिलेगी नहीं,उसको अपनी देह बेचने की आजादी जरुर मिल सकती है और यह मर्दों के भोग के खातिर मुक्तबाजारी उत्तरआधुनिक विमर्श और सौंदर्यबोध दोनों हैं।
हालात बदलते नहीं हैं और जैसे कि हमारे युवा साथी बीपी गौतम लिखते हैं कि कातिल बदल जाते हैं,खंजर बदल जाते हैं,हालात बदलते नहीं हैं।
साहेब कयामत का मंजर यही है।
जब तक न जागे खेत खलिहान,जब तक न जागे देश के नौजवान और जब तक इस पुरुषतांत्रिक मनुस्मृति के खिलाफ सेक्स दासी बना दी गयीं औरतें चहारदीवारियां लांघ कर मर्द सांढ़ संस्कृति के खिलाफ चित्रांगदा बनकर तमाम धनुर्धरों के खिलाफ हानीमून के लिए नहीं,बल्कि इस राज्यतंत्र को बदलने के लिए युद्ध शुरु नहीं करतीं तब तक हालात वहीं रहेंगे कि कातिल बदल जाते हैं,खंजर बदल जाते हैं,हालात बदलते नहीं हैं।
ज़ी मीडिया ब्यूरो की इस खबर पर गौर करेंः
नई दिल्ली: उबर टैक्सी रेप मामले में सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उबर टैक्सी सर्विस सेवा बंद कर दी है। दिल्ली सरकार ने इस टैक्सी सेवा को फिलहाल बंद कर दिया है जिसपर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई है। उबर टैक्सी में ही शुक्रवार को एक महिला से ड्राइवर ने रेप किया था। एक टैक्सी सेवा में रजिस्टर्ड ड्राइवर के दिल्ली में पैसेंजर से रेप करने के आरोप के बाद दूसरे कैब ऑपरेटर्स पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि दूसरी कैब सर्विस कितनी सुरक्षित है?
शुक्रवार रात दिल्ली में एक महिला के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने वाला 32 वर्षीय कैब चालक एक बार पहले भी बलात्कार के मामले में जेल जा चुका है। गौर हो कि रविवार को अपने गृहनगर मथुरा से गिरफ्तार किया गया शिवकुमार यादव पहले भी अपराधी रह चुका है। टैक्सी सेवा मुहैया कराने वाली अमेरिकी कंपनी उबेर इंडिया को दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच में शामिल होने का निर्देश दिया। पुलिस ने उबेर इंडिया के अधिकारियों से पूछताछ भी की।
दिल्ली पुलिस ने आज उबेर कैब सर्विस के अधिकारियों से पूछताछ की। रिपोर्ट के अनुसार, उबेर ने इस घटना के मद्देनजर अपने गुड़गांव ऑफिस को बंद कर दिया है।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि घटना समाज पर एक धब्बा है और इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि मेरा मानना है कि इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक घटना नहीं हो सकती। हम इन घटनाओं से काफी दुखी हैं। कड़े कदम उठाने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि मौजूदा कानूनों को और असरदार तरीके से लागू किए जाने की जरूरत है तथा समाज में धारणा में बदलाव होना चाहिए। सोलह दिसंबर की सामूहिक बलात्कार घटना के दो साल पूरे होने से कुछ दिन पहले हुई इस घटना के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली दिल्ली पुलिस की आलोचना हो रही है।
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