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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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    जल सत्याग्रह का 24वां दिन : सत्याग्रहियों के पैरों की हालत गंभीर

    Posted by संघर्ष संवाद on सोमवार, मई 04, 2015


    आज 4 मई को 24 वें दिन जल सत्याग्रह जारी है, स्वास्थ्य बहुत ज्यादा ख़राब हो रहा है पर अपने हक के लिए लड़ने का उत्साह अभी भी है । निरंतर स्वस्थ ख़राब होने के बावजूद लोगो में लड़ने की शक्ति बढ़ती जा रही है । नर्मदा बचाओ आन्दोलन की विज्ञप्ति; - 

    घोगलगाँव में ओम्कारेश्वर डूब प्रभावितों का जल सत्याग्रह 23 दिन बाद भी पुरे उत्साह से जारी रहा। 

    आज 23वें दिन जिला चिकित्सा अधिकारी खंडवा डा. आर सी पनिका ने फिर से घोगल गाँव पहुँच कर सत्याग्रहियों के पैरों की जाँच की और बताया की 23 लोगों के पैरों की हालत
    अति गंभीर है। पैरों की ऊपर की खाल निकल गयी है।उन्होंने सुजन और खुजली की शिकायत भी पायी । उन्होंने अग्राह किया की सत्याग्रही इलाज ले लें, पर सभी सत्याग्रही इलाज न करने की अपनी बात पर कायम हैं । -
    वही आज सत्याग्रह कर रहे लोगों की हालत बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी है , उन्हें चलने और खड़े रहने में भी बहुत तकलीफ  हो रही है ।कुछ लोगों को शौच इत्यादि के लिए भी उन्हें उठा कर ले जाना पड़ रहा है । उनके पैर गल गए है और अत्याधिक पीड़ा हो रही है नर्मदा बचाओ आन्दोलन की वरिष्ट कार्यकर्ता चितरुपा पालित ने बताया की जहाँ तक विस्थापितों के पुनर्वास का प्रश्न है, ओम्कारेश्वर बांध बना रही सरकारी कंपनी एन एच डी सी ने आज तक जितना लाभ कमाया है उसमे से ही सम्पूर्ण पुनर्वास हो सकता है। उल्लेखनीय है कि गत वर्षों में बांध का निर्माण कर रही सरकारी एन एच डी सी कंपनी ने ओम्कारेश्वर और इंदिरा सागर बांध से लगभग 4000 करोड़ रूपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह मुनाफा जिन विस्थापितों के सर्वस्व त्याग के बाद कमाया है यदि इसका एक हिस्सा ही पुनर्वास पर खर्च किया जाये तो सभी प्रभावितों का सम्पूर्ण पुनर्वास हो सकता है। अतः स्पष्ट है कि सरकार के पास संसाधनों की कमी नहीं है कमी है तो इच्छा शक्ति की। सरकार को अपनी इच्छा शक्ति दिखाते हुए तत्काल सभी प्रभावितों का पुनर्वास पूरा करना चाहिए। आज भोपाल में भी अलग अलग संघठनो एवं समूहों द्वारा भोपाल के बड़े तालाब के पास जल सत्याग्रह के समर्थन में प्रदर्शन किया गया और हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया । प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बताया की बिना पुनर्वास डूब लाना अन्याय है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहवेलना भी है । वही प्रदर्शन कारियों ने सैकड़ों लोगो को इस मुद्दे से अवगत भी करवाया । - See more at: http://www.sangharshsamvad.org/2015/05/24.html#sthash.lGlveGxi.dpuf


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    बंगाल में लास वेगास के मुक्कों का मुकाबला जारी

    मोदी दीदी पीपीपी विकास के राजमार्ग पर साथ साथ

    तो धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण से अगले विधानसभा चुनावों में भी अपराजेय दीदी

    एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

    बंगाल में ममता बनर्जी का अंध विरोध करने वाले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की विदाई का मंच तैयार है और उनकी जगह सीबीआई क्लीन चिट धारक दीदी के कभी खासमखास रहे मुकुल राय की ताजपोशी तय है।इसी बीच संसद में मोदी की सरकार को तमाम जरुरी कानून पास कराने में निर्णायक मदद के बाद बंगाल के विकास का एजंडा लेकर आ रहे हैं मोदी और दीदी मोदी एक ही मंच से जनता को न केवल संबोधित करेंगे,बल्कि राज्य के विकास के लिए दीदी ने बाकायदा पत्र लिखकर मोदी के साथ एकांत में बैठक के लिए वक्त मांगा हुआ है।


    वह वक्त भी तय हो गया है।


    शारदा फर्जीवाड़ा मामले में जो सबसे ज्यादा आरोपों के घेरे में थे,वे मुकुलरायअब कलंकमुक्त हैं और वामदलों,कांग्रेस और चिटपुट विपक्ष के सफाये के लिए बंगाल के संपूर्म केसरियाकरण के लिए वे अमितशाह के सिपाहसालार होंगे।मंत्र मदन मित्र हालांकि महीनों से जेल में हैं लेकन उनका मंत्रित्व सही सलामत है।


    सांसद कुणाल घोष और मदन मित्र के अलावा तृणमूल के बाकी अभियुक्तों के खिलाप मामला रफा दफा है और हाल में जो दीदी और उनके परिजनों को शारदा मामले में घेरा जा रहा था,निवेशकों को मुआवजा दिलाने का आंदोलन चल रहा था,वह सबकुछ शारदा कांड के साथ रफा दफा है।


    गौरतलब है किशारदा  चिटफंड घोटाले की सीबीआई जांच में तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं की गिरफ्तारी और कुछ से पूछताछ के बाद से मोदी और ममता के बीच दूरियां और बढ़ गई थी।


    अब हालात पूरी तरह बदल गये हैं।कोलकाता नगर निगम और पालिका चुनावों में भाजपा को किसी नगर निगम या पालिका की सत्ता नहीं मिली लेकिन कखास कोलकाता में भाजपा को तीन की जगह सात सीटें मिल गयीं तो दीदी के पार्षद114 हैं।वामदलों की संख्या 15 तक सिमट गयी और पांच सीटें हासिल करके कांग्रेस पीछे छूट गयी।सबको इस धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण से नुकसान हो रहा है सिवाय तृणमूल और भाजपा के।


    भाजपा के वोट और जनाधार बढ़ रहे हैं और बंगाल का केसरियाकरण अभूतपूर्व है।फिरभी भाजपा के नेता कार्यकर्ता और समर्थक  बेचैन हैं कि देश से लेकर विदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीकी वाहवाही हो रही है लेकिन पश्चिम बंगाल में नरेन्द्र मोदीका कोई जलवा नहीं है।उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि हिंदुत्व ब्रिगेड के रण हुंकार के बावजूद जिस पश्चिम बंगाल के लिए केंद्र सरकार से लेकर संघ परिवार और भाजपा की टीमें अलग अलग स्तर पर ऐड़ी चोटी की मेहनत कर रही थीं, वहां पार्टी का ऐसा हश्र क्यों है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि राज्य में आगे होने वाले विधानसभा में पार्टी का क्या हाल होगा? अभी के निकाय चुनाव के नतीजे को देखें तो साफ एहसास हो जाएगा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जीके सामने बीजेपी टिक नहीं पाएगी।



    बंगाल में रातोंरात केसरिया राजकाजअसंभव है। इसके बजाय प्राक्सी राजकाज जाहिर है, केसरिया एजंडा है


    मोदी और दीदी की लड़ाई सुनहली मुलाकातों में बदलने लगी है क्योंकि पालिका चुनाव निबट गये हैं और विधानसभा चुनावों से पहले न वाम वापसी के संकेत हैं और कांग्रेस के अटूट बने रहने के।जाहिर है कि मुक्कों का मुकाबला फिलहाल स्टट्रैटिजिक टाइम आउट के दौर में है और पीपीपी विकास के मंच पर दीदी ममता साथ साथ हैं।


    जाहिर है कि बंगाल में लास वेगास के मुक्कों का मुकाबला चल रहा है पिछले लोकसभा चुनावों के पहले से,जबसे अमितशाह ने बंग विजय अभियान का ऐलान किया हुआ है।लास वेगास का मुकाबला तो तुरंत खत्म हो गया है लेकिन बंगाल में दीदी मोदी का वेगास मुकाबला खत्म होने के आसार  नही है।हीरों से जड़ी बेल्ट आखिर किसके पास है,ऐसा कहा नहीं जा सकता।लेकिन मां मटी मानुष की सत्ता के मुकाबले फिलहाल कोई विपक्ष नहीं है।


    गौरतलब है कि अमेरिकी शहर लास वेगास के एमजीएम ग्रैंड अरीना में सदी का सबसे बड़ा मुक्कों का मुकाबला। 16,500 लोगों ने इस अरीना में महा मुकाबले को देखा। लेकिन सबसे दिलचस्प है किसे कितना पैसा मिला, जो पहले से तय है। अमेरिका के फ्लायड मेयवेदर को मैच जीतने के बाद 1142 करोड़ मिले। हालांकि मैनी पैक्वे हार गए हैं फिर भी अच्छी खबर यह है कि उन्हें हारने के लिए 761 करोड़ रुपए मिलेंगे। वैसे, जीतने वाले को 6.34 करोड़ रुपए की हीरों से जड़ी एक बेल्ट भी मिलेगी। इस मुकाबले को देखने के लिए हॉलीवुड अभिनेताओं, गायकों और रसूखदारों में होड़ मची थी। इस महा जंग पर 20 हजार करोड़ का सट्टा भी लगा हुआ था।


    घौरतलब है कि  लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ बढ़ी तकरार के बाद ममता बनर्जी का मोदी के साथ छत्तीस का आंकड़ा चल रहा था। तृणमूल के सांसद लोकसभा में केन्द्र सरकार का कड़ा विरोध कर रहे हैंऔर राज्यसभा में अगवाड़े पिछवाडे़ की घनघोर मौकापरस्त राजनीति के तहत तमाम कायदे कानून बदलने में निर्णायक मदद भी कर रहे हैं।


    इससे पहले कई बार प्रधानमंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक में ममता ने शिरकत नहीं की थी। हालांकि एक बार दिल्ली में उन्होंने मोदी से मुलाकात की थी।


    मीडिया की खबरों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति अपने रूख में बदलाव लाते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 9 मई को उनकी अगवानी को तैयार हो गई हैं। एयरपोर्ट पर सिर्फ अगवानी ही नहीं, बल्कि ममता बनर्जी उनके साथ बैठक भी करेंगी। उनके साथ दो कार्यक्रमों में शिरकत भी करेंगी। मोदी के दौरे के मद्देनजर ममता ने जिला दौरे के अपने कार्यक्रम को छोटा कर लिया है।


    नवान्न (राज्य सचिवालय) सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी प्रोटोकॉल के अनुसार एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री की अगवानी करेंगी। उनके साथ दो कार्यक्रमों में शामिल होंगी।


    मोदी के साथ बैठक का समय भी तय किया गया है।


    नवभारत टाइम्स ने साफ साफ लिखा है कि तीन साल पहले 2012 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रोटोकॉल तोड़ दिया था। तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कोलकाता दौरे पर पहुंचे थे लेकिन ममता बनर्जी एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने नहीं पहुंची थीं। 9 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता पहुंचने वाले हैं लेकिन इस बार ममता बनर्जी उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचेंगी। ममता और मोदी में राजनीतिक मतभेद के बावजूद दोनों के बीच एक नई केमिस्ट्री विकसित हो रही है। इस नई केमिस्ट्री के कारण तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता मुकुल रॉय के लिए अब सीमित विकल्प बचे हैं।


    ममता अब तक बीजेपी पर हमलावर थीं। दूसरी तरफ बीजेपी टीएमसी के बागी नेता मुकुल रॉय को काफी तवज्जो दे रही थी। टीएमसी सूत्रों का कहना है कि मुकुल बीजेपी के लिए अहम थे लेकिन ममता पार्टी की भीतर उनकी अहमियत कम करती गईं। अब ममता ने फैसला किया है कि वह बीजेपी सरकार को मुद्दों के आधार पर समर्थन देंगी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि हम बीजेपी सरकार को बिल बाइ बिल और बॉल बाई बॉल समर्थन देंगे।


    ममता इस बार कुछ ज्यादा करना चाहती हैं। पांच मई को ममता पांच दिनों के लिए आसनसोल जाने वाली थीं लेकिन उन्होंने पीएम की वजह से इस दौरे को कैंसल कर दिया। अब वह आसनसोल 10 मई को जाएंगी। कोल माइंस बिल और खान एवं खनिज बिल के जरिए ममता मोदी सरकार के करीब पहुंच रही हैं। ममता बनर्जी ने मोदी सरकार के अहम जीएसटी बिल का भी समर्थन किया है। ऐसा सबकुछ योजनाबद्ध तरीके से हो रहा है। ममता भारत और बांग्लादेश के साथ रिश्ते सुधारने में अहम भूमिका अदा कर रही हैं। दोनों को एक दूसरे से फायदे हैं। मोदी को जो मदद चाहिए वह ममता कर रही हैं और ममता को बंगाल में जो मदद चाहिए वह मोदी कर रहे हैं।


    बंगाल में मुकुल रॉय लगातार अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं। उन्हें पार्टी से लेकर संसद तक में अपने पदों से हाथ धोना पड़ा। उन्हें तृणमूल कांग्रेस में कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा। मुकुल नई पार्टी बनाने पर विचार कर रहे हैं। बीजेपी के लोगों को भी इस बारे में पता है। बीजेपी के लिए भी अब मुकुल कोई मुद्दा नहीं हैं। पार्टी महासचिव और बंगाल के बीजेपी प्रभारी सिद्धार्थ नाथ सिंह एक बार भाग मुकुल भाग के स्लोगन से साथ दिखे थे। बीजेपी नेता चाहते हैं कि मुकुल किसी तरह चर्चा में रहें ताकि ममता को परेशान करने का मौका हाथ में रहे। मोदी सरकार यह भी नहीं चाहती कि मुकुल की वजह से ममता से जो समर्थन मिल सकता है उसे हासिल करने में कोई दिक्कत हो।

    http://navbharattimes.indiatimes.com/state/other-states/kolkata/mamata-more-important-to-modi-than-mukul/articleshow/47164645.cms




    मोदी-ममता एक दूसरे के भरोसेमंद : कांग्रेस

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक दूसरे के भरोसेमंद हैं। सीबीआई के आक्रमण से बचने के लिए ममता मोदी पर भरोसा कर रही हैं और संसद में जनविरोधी विधेयकों को पारित कराने के लिए प्रधानमंत्री तृणमूल कांग्रेस प्रमुख पर भरोसा कर रहे हैं। ममता-मोदी के बीच का रिश्ता दिन ब दिन गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इनके बीच काफी समानता देखी जा रही है। प्रधानमंत्री धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करते हैं तो ममता मौलवादी शक्तिओं को मजबूत बनाने की राजनीति करतीं हैं।


    "यह सिर्फ प्रोटोकॉल"

    तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से मोदी की अगवानी किए जाने के बारे में टिप्पणी करने से मना कर दिया है। पार्टी का बस इतना कहना है कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का शामिल होना प्रोटोकॉल के सिवाय कुछ भी नहीं।


    तृणमूल-भाजपा में गुप्त समझौता : वाम

    वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बोस ने दावा किया कि तृणमूल और भाजपा के बीच गुप्त समझौता पहले से ही है। गत लोकसभा चुनाव के बाद से अब तक दोनों पार्टियों के बीच की बयानबाजी महज दिखावा थी। वाम दलों को इसकी आशंका पहले से थी। एनडीए और भाजपा के बिना तृणमूल कांग्रेस की कोई गति नहीं है।



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    Unprecedented Parliamentary consensus to speed up Reform Express


    352 votes against 37,Constitution Amendment Bill to implement the Goods and Services Tax (GST) passed


    GST implemented,DTC has to be implemented sooner or later. 


    Palash Biswas


    GST implemented,DTC has to be implemented sooner or later. Biggest tax reform in decades.However,it's a Bill the previous government pushed hard in the Parliament without much success, but could well see the light of the day under the Modi-led National Democratic Alliance (NDA) government, albeit in a diluted form.


    Salaman Khan captured national attention and Convicted Salman reaches home, won't go to jail till May 8.Salman Khan was convicted of culpable homicide not amounting to murder in the 2002 hit-and-run case with all charges proved against him. Significantly, the court held that Salman was driving under the influence of alcohol. As the court delivered the verdict, Salman had tears in his eyes. 

    The long-pending GST Bill was approved by Lok Sabha on Wednesday after a walkout by Congress even as government vowed to compensate states for any revenue loss and assured that the new uniform indirect tax rate will be much less than 27 per cent recommended by an expert panel.


    As it has been the tradition in all these years of neoliberal childrens` hegemonial regime,this or that incident overlapping the process of legislation,RSS Siblings ie BJP and Congress managed to pass GST bill which has to be endorsed by Rajyasabha.Every law is amended in similar way to accomplish the reform agenda of ethnic cleanising.But the media just continued to focus on Salman to deprive the citizens the opportunity to witness the merger of different colors and ideologies in the Parliament which activates the Money Making Guillotine thirsty of every Indian drop of blood.


    Amusing it might sound,Congress supports the measure, but it boycotted the vote in the lower house, demanding the bill be first reviewed by a parliamentary panel.Further complicating matters are the competing interests of the central and state governments, which want to protect their tax revenue and retain fiscal control. The bill also needs the approval of more than a half of India's 29 states.


    The battle has already led to several compromises on the bill, leading some analysts to say India could end up being saddled with a badly designed tax.Exemptions and exceptions have also been worked into the bill. The tax does not apply to alcohol, for example, and petroleum products will be taxed separately at first. Manufacturing states will be allowed to levy an additional tax of 1 percent on supply of goods.


    GST, which is proposed to be implemented from April 1, 2016, will subsume excise, service tax, state VAT, entry tax,octroi and other state levies.




    Thus,the Constitution Amendment Bill to implement the Goods and Services Tax (GST), originally mooted by the UPA, was passed by 352 votes against 37 after the government rejected the opposition demand of referring it to Standing Committee.Approval in the Lok Sabha marks an important victory for Modi's ruling Bharatiya Janata Party (BJP), but the bill still must pass in the Rajya Sabha. The opposition, including the Congress party, is stronger there.But as it proved to be rather a cake walk with Congress support,it would not be a hurdle whatsoever.


    The Land Acquisition Bill dispute seems to be an excellent game changer which proved to be an umbrella for all sorts of reform legislation.


    However,Prime Minister Narendra Modi was not present in the House at the time of voting.Corporate  lawyer Arun Jaitley managed the show.


    Opposition members moved several amendments to the bill which were negated. Some members like Saugata Roy of Trinamool Congress and B Mahtab did not move some of the amendments after assurances by the Finance Minister.




    Replying to the debate on the bill before Congress walked out, Finance Minister Arun Jaitley said the proposal to reform the indirect taxes has been pending for the last 12 years and his predecessor P Chidambaram had also mooted it during UPA rule.


    On Tuesday, the lower house discussed the Constitution Amendment Bill for the enactment of the goods and services tax (GST) Act amidst stiff opposition and demand for it to be referred back to the Standing Committee for a deliberation on changes made to it after the lapse of its 2011 version.


    And even as the avalanche of criticism from AIDMK, BJD, TRS, CPI(M), YSRCP and others threatened to derail it, the support assured by opposition Congress could see the Bill, which will bring about a unified indirect tax regime across states, go through today when it comes up for voting.



    Rejecting the Opposition demand for referring the Bill to the Standing Committee, he said the panel has alreadyexamined various provisions of the new legislation and several of its suggestions have been incorporated.


    "A bill is not a dancing instrument that it will be jumping from Standing Committee to Standing Committee," he said.


    Commending the bill, he said this is a "very important moment" because the whole process of indirect taxation in India will change once the GST is implemented.


    With regard to a recommendation of an expert panel for revenue-neutral GST rate of 27 per cent, Jaitley said it is


    "too high" and will be "much diluted".


    He said GST would ensure seamless and uniform indirect tax regime besides lowering inflation and promoting growth in the long run as he sought to allay concerns of the states that they would be hurt by its implementation.


    Earlier,the Lok Sabha took up the long-delayed Goods and Services Tax Bill for consideration on Tuesday after the Speaker rejected the Opposition's demand to refer the key reform measure to a Parliamentary Standing Committee.


    Deputy Speaker M Thambidurai, who was in the Chair, said Finance Minister Arun Jaitley had recommended against referring the Bill to the standing committee, which was accepted.


    In the procedural wrangle the lasted over an hour-and-a-half, the Opposition insisted on referring the 122nd Constitution Amendment Bill to the Standing Committee on Finance, reasoning that it was a different Bill than the one drawn up by the previous UPA regime.

    Congress, BJD, AIADMK and CPI (M) slammed the government for what they called "bypassing" the Standing Committees by refusing to refer several bills to them.


    Jaitley, however, countered this by saying that referring the Bill to a panel will delay the Bill by another year, robbing states from reaping its benefits. He argued that the Standing Committee has already deliberated on the new tax regime for the past two-and-a-half years and there was a broad consensus on the Bill in the empowered committee of state Finance Ministers. The government aims at enforcing the new tax regime from the next fiscal.

    He said all Congress-ruled states have supported the Bill, which, he said would benefit the TMC -ruled West Bengal and BJD-ruled Odisha most.


    He appealed to the opposition parties to "rise above partisan" considerations, saying:  "No purpose will be served by delaying the passage of the crucial bill as it will be the states that will suffer financially".


    Jaitley said the government proposed three more Bills on the powers of the Centre and the states. GST Bill is a Constitution Amendment Bill that requires the ratification of at least 50 per cent of the state legislatures.


    B Mahtab of the BJD had raised the issue of referring the Bill to the Parliamentary Standing Committee, stating it was required because it was an entirely new Bill and citing the example of the Company Laws Amendment Bill, which was sent to the Parliamentary panel twice. Referring to fear of delaying the implementation of the new tax regime, Mahtab suggested that the standing committee could be told to submit its report by first week of July to enable the Parliament to clear the Bill in the Monsoon session.  


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    वैशाख २९ गते मंगलबार भूकम्पपीडित नेपालीका लागि १ दिने उपवास बस्न डा. सी. के. राउतद्वारा अपील
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    वैशाख २३ गते, राजबिराज। नेपालमा यही वैशाख १२ गते गएको महाभूकम्पको प्रलयबाट गुज्रिरहेका नेपाली जनतासँगको सद्‍भाव र राहतका लागि डा. सी. के. राउतले देश-विदेशका सम्पूर्ण कार्यकर्ता, शुभचिन्तक र आम-जनतालाई वैशाख २९ गते (मई १२ तारीख) मंगलबार १ दिने उपवास बस्न र  कम-से-कम सो बराबरको अन्न-दान गर्न सबैलाई अनुरोध गरेको छ।  

    भूकम्पपीडितका लागि राहत सामग्री आफ्नो ईच्छाले नजीकको कुनै पनि विश्वासिलो संघ-सस्था वा सरकारी निकायमा गएर सीधै जम्मा गर्न हुन अनुरोध पनि गरिएको छ। भूकम्पपिडीतको लागि चलाइएको सो अभियानलाई व्यापक बनाउन यो सूचनालाई गाउँ-स्तरसम्म जन-जन माझ पुर्‍याउन रेडियो, टेलिविजन, समाचार-पत्र, लाउड-स्पीकर माइकिंग आदि माध्यमबाट समेत प्रचार-प्रसार गरिदिनुहुन सम्बन्धित सबैलाई अनुरोध गरिन्छ। 

    वैशाख १२ गते नेपालमा भूकम्प गए लगत्तै डा. सी. के. राउत नेतृत्वको स्वतन्त्र मधेश गठबन्धनका कार्यकर्ताहरू काठमाडौं र आसपासका क्षेत्रहरूमा सक्रिय भएर उद्धार तथा राहत कार्यमा संलग्न हुँदै आएका छन्। मधेशी जनताबाट संकलित राहतलाई समेत भूकम्प-प्रभावित क्षेत्रमा पुर्‍याउदै आएका छन्। 

    (नोट: स्वास्थ्यको कारणले उपवास बस्न अनुपयुक्त हुनेले उपवास नबसी सीधै अन्नदान गर्नुहुन अनुरोध गरिएको छ।) 




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    इटहरीमा भारतीय प्रधानमन्त्रीको पुत्ला दहन

    नेपालको पूर्व–पश्चिम महेन्द्र राजमार्ग ६० वर्षअघि भारतीय सहयोगमा बनेको थियो। नेपालको तराई जिल्लाहरूलाई आपसमा जोड्ने र नेपालभर यात्रा गर्न सबैभन्दा सजिलो र छिटो यो मार्गमाथि मंगलबार भारतीय प्रधानमन्त्रीको पुत्ला जलाइएको छ।

    इटहरीका विद्यार्थी संगठनहरुले मंगलबार भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीको पुत्ला जलाएका छन्। भर्खरै नेपालमा गएको भूकम्पको समयमा नेपालमा आएर भारतीय सेनाले जथाभावी गरेको भन्दै उनीहरुले विरोधमा पुत्ला जलाएको बताएका छन्।

    क्याम्पसबाट निस्केका विद्यार्थीहरुको समूहले क्याम्पसको दक्षिणमा पर्ने महेन्द्र राजमार्गमाथि उभिएर मंगलबार विहान मोदीको पुत्ला जलाइएको थियो। पुत्ला दहनका क्रममा विद्यार्थी नेताहरुले 'भारतीय हस्तक्षेप बन्द गर'जस्ता नारासमेत लगाएका थिए।

    पुत्ला दहन कार्यक्रममा एमालेको अनेरास्ववियुका केही नेताको सहभागिता थियो भने नेकपा माओवादी र एमाओवादीसँग सम्बद्ध विद्यार्थी संगठनहरु र किराँत राई विद्यार्थी संगठनको सहभागिता थियो। अन्य केही विद्यार्थी संगठनहरु सहभागि हुने भनेपनि पनि सहभागिता नजनाएको विद्यार्थी नेता अरुण राईले बताए।

    उद्धार गर्न भन्दै नेपाल आएका भारतीय सेनाले नेपालको सार्वभौमिकतामाथि आँच आउने काम गरेको विद्यार्थी संगठनका स्थानिय नेताहरुले बताएका छन्। उनीहरुले भारतीय सेनालाई जतिसक्दो चाँडो फर्कन पनि भनेका छन्।

    http://setopati.com/samaj/27825/?fb_action_ids=10200487560828196&fb_action_types=og.comments


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    Press Statement



    The Polit Bureau of the Communist Party of India (Marxist) has issued the
    following statement:



    Magnificent Victory in Tripura



    The Polit Bureau of the Communist Party of India (Marxist) congratulates the
    people of Tripura for the magnificent victory that they bestowed on the
    Tripura Left Front in the elections to the Tripura Tribal Areas Autonomous
    District Council (TTAADC).



    In a landslide victory, the Left Front has bagged all the 28 seats of the
    TTAADC defeating all its opponents resoundingly. Except for five seats, in
    all the other 23 seats, the Left Front got more than 50 per cent of the
    votes polled.



    The Polit Bureau appreciates the fact that the people of Tripura have
    thwarted all attempts at creating ethnic tensions. Elections to the TTAADC
    were held peacefully.



    The Polit Bureau also congratulates the leaders, members, workers and
    sympathizers of the Party and the Left Front for the hard work they put in
    to make this victory so outstanding.

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    आलोचनाआत्मालोचना और सबक

    प्रिय मित्रो,

    'दमन विरोधी संघर्ष समिति'की ओर से कल 5 मई 2015 को ग्राम वीरपुर लच्छी(रामनगर) के निवासियों पर खनन माफिया द्वारा किए जा रहे जुल्म के विरोध में जंतर मंतर पर हम सारे लोग इकट्ठा हुए थे। इस सभा में वीरपुर लच्छी गांव के और उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों से लगभग डेढ़ हजार लोग आए थे और सभा बहुत शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी। मैं अपने साथियों को लेकर एक फैक्ट फाइंडिंग टीम के साथ वीरपुर लच्छी गया था और जब मैं मंच पर पहुंचा तो इसी रूप में मेरा परिचय भी कराया गया और लोगों ने तालियों के साथ स्वागत किया। कुछ ही देर बाद मुझसे'उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी(उपपा) के अध्यक्ष पी.सी.तिवारी नेजो मेरे बगल में बैठे थे मुझसे धीरे से कहा कि 'हमलोगों के आंदोलन को सतपाल महाराज ने अपना समर्थन दिया है'। जवाब में मैंने कहा कि 'यह अच्छी बात है'। लेकिन कुछ ही देर बाद एक व्यक्ति आया और उसने मंच पर मेरे सामने कपड़ों का एक ऊँचा सा आसन बनाया और फिर सतपाल महाराज आकर उस आसन पर बैठ गए। मैंने पी.सी.तिवारी की ओर देखा और कहा कि यह व्यक्ति मंच पर कैसे आ गया लेकिन पी.सी.तिवारी काफी प्रफुल्लित नजर आ रहे थे। मंच के नीचे से भूपेन लगातार पी.सी.तिवारी और कुछ साथियों से कह रहे थे कि ऐसा नहीं होना चाहिए। सतपाल महाराज के बैठते ही विरोधस्वरूप मैंने मंच का बहिष्कार कर दिया और मेरे साथ बहुत सारे लोग नीचे आ गए। कुछ देर बाद सतपाल महाराज नीचे उतरे और उन्होंने विभिन्न चैनलों की कैमरा टीम को अपना इंटरव्यू आदि दिया और फिर मंच पर वापस जाकर बैठ गए। नीचे पी.सी.तिवारी आकर हमलोगों से अपनी सफाई देते रहे लेकिन मैं वहां से बाहर आ गया और घर चला गया।

    इस पूरे प्रकरण में आलोचना के जो विन्दु हैं उन पर मैं आप सबका ध्यान दिलाना चाहता हूँ:

    आलोचना

    1.            सतपाल महाराज उसी राजनीतिक जमात के व्यक्ति हैं जिनकी वजह से पिछले 15 वर्षों के दौरानउत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से हीयह राज्य विभिन्न तरह के माफिया गिरोहों का क्रीड़ा स्थल बन गया है।

    2.            जब से उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ राज्य की जनता कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा के शासन का स्वाद चखती रही है और सतपाल महाराज जैसे लोग अपनी अवसरवादिता के चलते कभी इस पार्टी में तो कभी उस पार्टी में घूमते-फिरते रहे हैं। ऐसे लोगों को हमें अपने मंच से दूर रखना चाहिए। अगर किसी मुद्दे पर वह समर्थन देते हैं तो अच्छी बात है लेकिन उन्हें अपने साथ नहीं लेना चाहिए।

    3.            सतपाल महाराज सभा में आतेएक सामान्य समर्थक की तरह व्यवहार करते और भाषण देते तो एतराज करने का कोई कारण नहीं है। लेकिन जिस तरह से उनको सम्मान देकर मंच पर आसीन कराया गया वह आपत्तिजनक है।

    4.            सबसे बड़ी बात यह है कि 3 मई को प्रेस क्लब में संयोजन समिति के सदस्यों की बैठक में ऐसा कुछ भी तय नहीं हुआ था कि किसी राजनीतिक दल के व्यक्ति को मंच पर आने दिया जाय। ऐसी स्थिति में सतपाल महाराज का मंच पर आना किसकी रजामंदी से हुआ इस पर बाकायदा छानबीन की जानी चाहिए।

    5.    सतपाल महराज के मंच पर आने के प्रसंग में पी सी तिवारी का यह कहना कि'आंदोलन किताबी तरीके से नहीं चलते'घोर आपत्तिजनक है

    आत्मालोचना

    1.            यद्यपि सतपाल महाराज के आने से मैं बहुत रोष में था और मुझे मंच से उतर कर अपना विरोध व्यक्त भी करना चाहिए था लेकिन कुछ देर बाद मुझे सभा में शामिल हो जाना चाहिए था।

    2.            मुझे लगता है कि सभा का पूरी तरह बहिष्कार करके मैंने उन ढेर सारे लोगों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा जो इतना कष्ट उठाकर रामनगर से दिल्ली तक आए थे।

    3.            मुझे बहिष्कार के बाद सभा को संबोधित करना चाहिए था और जो बात सोचकर मैं गया था कि जनता के अंदर एक राजनीतिक विकल्प की सोच पैदा करने का प्रयास करूंवह मुझे करना चाहिए था।

    4.            उत्तेजना में मैंने वह अवसर खो दिया जिससे वहां आए लोगों के साथ मेरा एक सीधा संवाद हो सकता था।

    5.            इस तरह की घटना न तो पहली बार हुई है और न आखिरी बार होने जा रही है। जाहिर है कि सार्वजनिक जीवन और राजनीति में आए दिन इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी और ऐसे में पूरी ताकत के साथ विरोध व्यक्त करने के साथ ही अपनी बात कहने का कौशल हमारे अंदर होना चाहिए जिसकी कमी मैंने खुद में महसूस की।

    सबक

    1.            इस घटना का सबसे बड़ा सबक वही है जो अनेक दशकों से हम झेलते रहे हैं लेकिन कुछ सीख नहीं सके। सारी मेहनत हमारे साथियों ने की और इस आंदोलन का श्रेय टीवी चैनलों के माध्यम से सतपाल महाराज ले गया। यह ठीक वैसे ही हुआ जैसे उत्तराखंड राज्य बनाने के लिए सारा संघर्ष हमारे साथियों ने किया और जो लोग इसका विरोध करते थे अर्थात कांग्रेस और भाजपा वे ही राज्य बनने के बाद इसके भाग्य विधाता बन गए।

    2.            हमारे संघर्षशील नेताओं के अंदर आत्महीनता की जो ग्रंथि है उससे अगर वे छुटकारा नहीं पा सके तो कभी सतपाल महाराज तो कभी हरीश रावत के पीठ थपथपाने भर से गदगद हो जाएंगे। 

    3.            हमें हर हाल में मंच संचालन आदि के बारे में उन फैसलों का पालन करना चाहिए जो सभा से पूर्व संचालन समिति ने तय किए हों।

    4.            किसी एक घटना मात्र से व्यापक उद्देश्य से विमुख नहीं होना चाहिए। यह प्रवृत्ति अगर बनी रही तो कभी भी दुश्मन खेमे की तरफ से कोई व्यक्ति आकर उत्तेजना का ऐसा माहौल पैदा कर सकता है जिसमें अपने ही साथी मूल उद्देश्य के प्रति उदासीन हो जायं।

    5.            हमें हर हाल में न केवल वीरपुर लच्छी की जनता पर जुल्म ढा रहे सोहन सिंह ढिल्लों जैसे खनन माफिया के खिलाफ बल्कि समूचे उत्तराखंड में फैले सोहन सिंहों के खिलाफ लड़ाई को जारी रखनी है। इसके साथ ही उत्तराखंड की जनता को कांग्रेस और भाजपा से अलग किसी संघर्षशील राजनीतिक विकल्प की दिशा में आगे ले जाना है। जहां तक मेरा सवाल हैइस घटना के या भविष्य में होने वाली इस तरह की घटनाओं के बावजूद मैं उत्तराखंड की जनता के हित में किसी विकल्प की दिशा में कार्य करने के लिए प्रयासरत रहूंगा। यह मेरा संकल्प है।

    आनंद स्वरूप वर्मा

    मई, 2015


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    GENTLEMAN, NEPAL IS A SOVEREIGN COUNTRY !
    महोदय! नेपाल एक सार्वभौम राष्ट्र है ! 
     
    ______________________
    "भारतीय सेना द्वारा काठमांडू के अंतर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट को कब्जे में लेने के बाद उस पर मुहर लगाने के लिए नेपाल सरकार के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करायी जाती है। इस बात पर नेपाली राष्ट्रपति ने नेपाली मीडिया में सरेआम नाराजगी जाहिर की और कम्युनिस्ट गृह मंत्री बाम देव गौतम को भी तलब किया, जिस पर मंत्री महोदय राहत कार्य में फँसे होने का बहाना बना कर बात को टाल गए। फलतः इस नाफ़रमानी पर राष्ट्रपति स्वयं सिंह दरबार स्थित गृह मंत्रालय गए; लेकिन उसी शाम प्रधानमंत्री कोइराला के विदेश भ्रमण से वापस आने के बाद मामला रफा-दफा कर दिया गया। लेकिन भारतीय मीडिया में से किसी भी चैनल और अखबार ने इसको बताना जरूरी नहीं समझा।"
     

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    खबरदार!! श्री पशुपतिनाथ फाउन्डेसनको दान एनआरएन एनसीसी अफ युएसएलाई पोस्न पाइदैन, यदि पोस्ने हो भने फाउन्डेसनको बोर्डको बैठकले गरेको निर्णय देखाउन सिधाकुरा फाउन्डेसनका अध्यक्ष भक्त थापा र उपाध्यक्ष ऋषि ढकाललाई अनुरोध गर्दछ, अहिलेसम्म फाउन्डेसनको नाउमा कति दान उठेको छ? को को दाताहरु हुन त्यो रकम दिने उनीहरुको नाम समेत फाउन्डेसनको वेब साइटमा देखाउन अध्यक्ष थापा र उपाध्यक्ष ढकाललाई सिधाकुरा चुनौती दिन्छ । अध्यक्ष थापा र उपाध्यक्ष ढकालले यदि त्यो कुराहरुको पारदर्शिता नदेखाई, सदस्यहरुलाई जानकारी नदिई र बोर्डको बैठकबाट निर्णय नगरी एक पेनी पनि एनआरएन एनसीसी अफ युएसएको खातामा ट्रान्सफर गर्न लागिएको हो भने अध्यक्ष थापा र उपाध्यक्ष ढकालले तत्काल राजिनामा देउ । फाउन्डेसनको स्पिरिट र सदस्यहरुको सहमति बेगर एक पेनी ट्रान्सफर भयो भने अध्यक्ष थापा र उपाध्यक्ष ढकाल बिरुद्द फाउन्डेसनमा अबिस्वाश प्रस्ताब तत्काल दर्ता गर्ता गर्न सम्पूर्ण सदस्यहरुलाई सीधाकुरा सुझाउँछ । फाउन्डेसन थापा र ढकालको मनमोजि गर्ने ठाउँ होइन । फाउन्डेसनको बोर्डमा जानकारी नदिई कुन हैसिएतले फाउन्डेसनले उठाएको दान एनआरएनमा ट्रान्सफर गर्ने निर्णय अध्यक्ष थापा र उपाध्यक्ष ढकालले देहायको बुँदा नम्बर तीन अन्तर्गत निर्णय गर्न सफल भए? फाउन्डेसनका मनकारी दाता श्री बेद भक्त जोशीको नाउ दुरुपयोग गरेर त यत्रो आँट गरिएको होइन? प्रश्न यहाँनेर छ । 

    श्री पशुपतिनाथ फाउन्डेसनको महिमा र गरिमा झुत्रो टालो जस्तो भएको एनआरएन एनसीसी अफ युएसएको भविष्यसंग गाँस्न पाइदैन, फाउन्डेसन आफै ५०१ सी अन्तर्गतको नाफा रहित सामाजिक संस्था मात्र होइन सबै नेपालीहरुको आश्थाको केन्द्र पनि हो, फाउन्डेसनका भक्तालु, आस्थाबान, मनकारी दाताहरु एनआरएन एनसीसी युएसए जस्तो राजनीतिक र गुटबन्दीको शिकार संस्थाका सदस्यहरु जस्ता हैनन, यस्तो बास्तबिकता स्पस्ट भए पछि कीन फाउन्डेसनका एका दुई व्यक्तिहरु अहिले बोर्डको बैठकको निर्णय बिना त्यो फोहोरी खेलका संरक्षक एनआरएन अमेरिकाका दुई चार जनासंग हातेमालो गरेर भुकम्प पीडितको नाउमा २० औं हजार डलर एनआरएनको खातामा ट्रान्सफर गर्न उद्दत भएका हुन? सबैभन्दा पहिले यसको जबाफ अध्यक्ष भक्त थापा, उपाध्यक्ष ऋषि ढकाल, एनआरएन आइसीसीका सदस्य राजेन्द्र सिवाकोटी, आइसीसी प्रतिनिधि पदका अयोग्य उम्मेदवार पुरुषोत्तम ढकाल आदिले जबाफ देउ, यदि जबाफ आउन सक्दैन भने फाउन्डेसनबाट फन्ड ट्रान्सफर तत्काल रोक, बास्तबिक भुकम्प पीडितहरुको लागि फाउन्डेसन स्वयमले आर्थिक तथा भौतिक सहयोगको संयोजन गर्नु पर्छ, त्यसका लागि सीधाकुरा काठमान्डू पुगेर सघाउन तयार छ, एनआरएन एनसीसी अफ युएसएको भूमिका अहिले कुनै आबश्यकता छैन, त्यो आबस्यकता आइसीसी अध्यक्ष शेष घले स्वयमको उपस्थितिमा भैरहेको सहयोगले पुरा गरिरहेको छ ।

    फाउन्डेसनको फन्ड ट्रान्सफर गर्ने बारे अध्यक्ष थापा र उपाध्यक्ष ढकालहरुले मनोमानी ढंगले काम अगाडी बढाउने जुन सड्यन्त्र गरेका छन त्यसको पर्दाफास उनीहरुले अबैधानिक ढंगले गरेको देहायको निर्णयहरुले बताईरहेको छ: 

    Dear Team members,
    Please note the following minutes of meeting held on May 04, 2015.
    Presence:
    1. Veda B Joshi
    2. Rishi Dhakal
    3. Sharada Shrestha
    4. Balaram Thapa
    5. Purushottam Dhakal
    6. Gokul Poudyal (on phone)
    7. Ram Pandey
    8. Mukunda Dhungana
    9. Gyanendra Gurung
    10. Dil Shrestha
    11. Bishes Katuwal
    12. Uma Karki Thapa
    13. Sudip Panta
    14. Tika Angdembey
    15. Bhakta Thapa (Called during meeting)
    16. Rajendra Siwakoti
    Observer:
    1. Chakrapani Mishra
    2. Rekh Upreti
    3. Hem Raj Bhatta
    4. Sita Uprety Prasai
    5. Samarpan Prasai

    Decision on Agenda:
    1. Updates: Out of first lot of 500 tents ordered from India, 300 tents have been distributed through Biso Subedi, Jaswant Shrestha and their team. Rest of 200 tents are with Mr. Gokul Poudyal for distribution. Out of 77 boxes (1523 tents) ordered from China, 11 boxes arrived in Kathmandu and distributed to victims by Ministry of Foreign Affairs. Rest of the rents are processing for shipping by supplier.
    2. Organization name to use: We will use Shree Pashupatinath Foundation, USA name to expedite all the paperwork and its banner where it is a compulsion. In general we will use Shree Pashupatinath Foundation, USA and Southern California Community in t-shirts or in banner while helping victims and in all other situation.
    3. Channel of funds disbursement: We will take help of NRN NCC USA, where possible, to send our fund to Nepal.
    4. Core Committee: The following 7 members Core Committee has been created to make minor decisions in the cases where it's not possible to call entire committee meeting for immediate minor decisions.  
    i. Veda B Joshi
    ii. Rajendra Siwakoti
    iii. Rishi Dhakal
    iv. Uma K Thapa
    v. Ram B Pandey
    vi. Sharada Shrestha
    vii. Gyanendra Gurung

    5. Other: i) Decided to distribute around 1000 food packets (that costs NPR 2,000.00 per packet) to the victims and their families to those areas where nobody has supplied yet. Therefore, Committee has approved $20,000.00 +- $2,000.00 for food packet distribution and transportation.
    ii) Committee also decided to provide JASTA PATA (Zinc plates) to victims and their families to build Goth/Tahara (shade). We will select a small village/Tole, to develop a sample Tole/village so that other donors will be encouraged to build the same kind in other areas.  
    Meeting adjourned.

    Rajendra Siwakoti
    Member Secretary



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    भारतीय सेना पर नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करने के आरोप

    नई दिल्ली। नेपाल की संप्रभुता में भारत का दखल कम होने का नाम नहीं हो रहा है। भारतीय सेना नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करते हुए नेपाल में अपने पैर जमाए हुए हैं, जिसकी वहां तीखी प्रतिक्रिया हो रही है।

    नेपाल के विदेश मंत्री महेन्द्र बहादुर पाण्डे ने सोमवार को काठमांडू में विदेश मंत्रालय में अपने कूटनीतिक अधिकारियों को बुलाकर राहत व बचाव कार्य करने आई सभी विदेशी टीमों को अपने स्वदेश लौटने का आग्रह किया था, जिसे भारतीय सेना ने सिरे से खारिज कर दिया।

    नेपाली मीडिया के अनुसार भारतीय सेना ने नेपाल के विदेश मन्त्री के आदेश को अनसुना करते हुए उनके आदेश को ना मानने और त्रिभुवन हवाई अड्डे को ना छोड़ने के संकेत दिए हैं। भारतीय सेना केमेजर जनरल जे.एस. सन्धु इस समय त्रिभुवन विमानस्थल में कैंप बनाकर बैठे हुए हैं।

    विदेश मन्त्री पाण्डे ने नेपाल में राहत व बचाव का काम का पहला महत्वपूर्ण चरण खत्म होने का ऐलान करते हुए था कि बाकी काम खुद नेपाली सेना करने में सक्षम है। उसी दिन भारतीय सेना के मेजर जनरल सन्धु विमानस्थल में ही नेपाली मिडिया को इन्टरव्यू दे रहे थे। सन्धु ने अब भारतीय हेलिकप्टरों द्धारा राहत वितरण के कामों को अन्जाम दिया जाना है, बताते हुए विदेश मन्त्री के आदेश को चुनौती दी है।

    परराष्ट्रमन्त्री पाण्डेको निर्देशन भारतीय सेनाले मानेन

    त्रिभुवन विमानस्थलको क्याम्प नछाड्ने संकेत

    २०७२ वैशाख २२ गते १९:०० मा प्रकाशित
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    २२ वैशाख, काठमाडौं । परराष्ट्रमन्त्री महेन्द्रबहादुर पाण्डेले सोमबार परराष्ट्र मन्त्रालयमा कूटनीतिक नियोगका अधिकारीहरुलाई बोलाएर उद्दार टोलीहरुलाई स्वदेश फर्कन आग्रह गरे । तर, भारतीय सेनाको टोलीले भने परराष्ट्रमन्त्रीको आदेशलाई अटेर गर्दै त्रिभुवन विमानस्थल नछाड्ने संकेत दिएको छ ।

    nepal-earthquake भारतीय सेना पर नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करने के आरोप

    त्रिभुवन विमानस्थलमा भारतीय उद्दार टोली । तस्वीर स्रोतः एपी

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    भारतीय सेनाका मेजर जनरल जे.एस. सन्धु यतिबेला त्रिभुवन विमानस्थलमा क्याम्प बनाएर बसेका छन् । परराष्ट्रमन्त्री पाण्डेले उद्दारको काम सकिएको र बाँकी काम नेपाली सेनाले गर्छ भनेकै दिन सोमबार मेजर जनरल सन्धु विमानस्थलबाटै नेपाली मिडियालाई अन्तरवार्ता दिँदै थिए । सन्धुले अब भारतीय हेलिकोप्टरहरु राहत वितरण कार्यमा खटिन थालेको बताएर मन्त्री पाण्डेको आदेशलाई चुनौती दिएका छन् ।

    सन्धुले सार्वजनिक गरेको जानकारीअनुसार भारतले यतिबेला नेपालमा १३ वटा हेलिकोप्टर, २८ वटा मेडिकल टीम र १४१५ जना उद्धारकर्मी (सेना) खटाएको छ । ६ वटा हेलिकोप्टर काठमाडौंमा र ७ वटा पोखरा विमानस्थलमा रहेको उनले बताएका छन् ।

    भारतीय सेनाको टोलीले नेपाली सेनाको अनुमतिमा काम गरिरहेको सन्धुको भनाइ छ । सरकारले जतिञ्जेल बस भन्छ, त्यतिबेलासम्म बस्छौं भने पनि परराष्ट्रमन्त्रीले निर्देशन दिइसक्दासमेत भारतीय सेनाका अधिकारीले विमानस्थल नछाड्ने स्पष्ट संकेत दिएका छन् ।यसका लागि भारतीय सेनाले नेपाली सेनाका अधिकारीसँग समन्यव गर्ने र राहत वितरणमा खटिने तर्क अघि सारेका छन् ।

    नेपाल छिरेपछि फर्कनै मुस्किल

    दैवी विपत्ति परेका बेला नेपालमा प्रवेश गरेका भारतीयहरु नफर्कने र नेपालमै अड्डा जमाएर बस्ने गरेको दृष्टान्त विगतमा पनि छ । सप्तकोशी नदीमा बाढी आएका बेला यस्तै घटना भइसकेको छ ।

    Indin-army1 भारतीय सेना पर नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करने के आरोप

    बाढीले कोशीनदीको पुल अवरुद्ध भएपछि भारतीय भूमि भएर काठामाडौं आउने-जाने यात्रीको चेकजाँचका लागि सुनसरीमा भारतीय टोली आएको थियो । तर, बाढीको प्रकोप सकिएपछि उक्त भारतीय टोलीले बिराटनगरमा अड्डा जमायो ।

    पराराष्ट्र मन्त्रालयले हट्न निर्देशन दिँदा पनि अहिले त्यो टोलीले बिराटनगर छाडेको छैन । त्यसमा अझ ठूलो जनशक्ति थपेर नेपाल सरकारको अनुमतिविनै बिराटनगरमा बसिरहेको छ ।

    तत्कालीन परराष्ट्रमन्त्री नारायणकाजी श्रेष्ठले तत्कालै हट्न आदेश दिँदा पनि बिराटनगरमा अबैधानिकरुपमा बसेको भारतीय क्याम्प अफिस अहिलेसम्म हटेको छैन । अझ यसलाई तारबेरा गरेर बलियो फोर्टिफिकेसन बनाइएको छ ।

    हेर्नुहोस् तस्वीर

    Indain-Camp-at-Biratnagar- भारतीय सेना पर नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करने के आरोप

    प्राकृतिक विपतमा सघाउने बाहनामा नेपाल पसेको भारतीय कर्मचारीतन्त्रले बिराटनगरमै बसेर अहिले पूर्वी नेपालमा ताप्लेजुङको ओलाङचुङ गोलासम्म चिनियाँ गतिविधिको जासुसी गर्दै आएको पूर्वी नेपालका स्थानीय अधिकारीहरु बताउँछन् । आफूहरु भारतीय दबदबाबाट दिक्क भएको तर, केही गर्न नसकिएको गुनासो जिल्लाका सरकारी अधिकारीहरुको छ ।

    विमानस्थलको दाऊ

    नेपालको एकमात्र अन्तरराष्ट्रिय विमानस्थलमा सुरक्षा फोर्स राख्न पाउनुपर्ने भारतीयहरुको माग धेरै पुरानो हो । नेपालबाट इण्डियन विमान अपरहण भएदेखि नै भारतीयहरुले यस्तो माग गर्दै आएका थिए ।

    साथै विमानस्थलको स्तरवृद्धिको परियोजनामा पनि भारतीयहरुले जोड गर्दै आएका थिए ।

    पोखरा विमानस्थलको परियोजना पनि चिनियाँलाई दिन नहुने र आफूले पाउनुपर्ने भारतीयले बताउँदै आएका थिए ।

    Indin-army2 भारतीय सेना पर नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करने के आरोप

    यस्तो अवस्थामा भूकम्पको बाहनामा अन्तरराष्ट्रिय विमानस्थलमा क्याम्प बनाएर बसेको भारतीय सेनाको फोर्स परराष्ट्रमन्त्रीको आदेशका भरमा सरक्क फिर्ता हुनेमा केही सरकारी अधिकारीहरुले नै सहजै पत्याएका छैनन् ।

    नेपाल सरकारले जा भनेको अवस्थामा उनीहरु नेपाली सेनालाई देखाउँदै नेपाल नछाड्ने मानसिकतामा रहेको स्रोतहरुको दाबी छ । नेपाली सेना र सरकारवीच समन्वयको अभाव देखिएको छ, जसको फाइदा भारतीयले उठाउन सक्ने सुनौलो अवसर उनीहरुले प्राप्त गरिरहेका छन् ।

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    Tag Archives: With Nepal

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    नेपाल में मोदी के पुतले फूँके गए

    2015/05/06 नेपाल भूकंप 0 Comments

    Modi

    नई दिल्ली। भारतीय मीडिया कितना ही मोदियापा कर ले लेकिन नेपाल के दूरदराज क्षेत्रों से अब असली खबरें आना शुरू हो गई हैं। नेपाल में #GoHomeIndianMediaकैंपेन चलने के बाद अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले फूँके जाने का क्रम प्रारंभ हो गया है। नेपाली मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल में पूर्व-पश्चिम महेंद्र राजमार्ग भारतीय सहायता से ... Read More »

    भारतीय सेना पर नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करने के आरोप

    2015/05/06 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    नई दिल्ली। नेपाल की संप्रभुता में भारत का दखल कम होने का नाम नहीं हो रहा है। भारतीय सेना नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करते हुए नेपाल में अपने पैर जमाए हुए हैं, जिसकी वहां तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। नेपाल के विदेश मंत्री महेन्द्र बहादुर पाण्डे ने सोमवार को काठमांडू में विदेश मंत्रालय में अपने कूटनीतिक अधिकारियों ... Read More »

    नेपाल में भारतीय सेना की उपस्थिति का राजनैतिक समाजशास्त्र

    2015/05/06 दुनिया 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    एक विशेष देशकाल में आस्तित्व में आये राष्ट्र-समाज के बिबिध आयामों की जांच पड़ताल करते समय वर्चस्व की एक मुकम्मल समझ बहुत जरुरी है. व्यक्ति एक राष्ट्र में बसे समाज की सबसे बुनियादी इकाई होता है. बौद्धिक मठों में बैठे मठाधीशों की उलझाऊ जुगलबंदी से परे जाकर हिंदी जनकवि शमसेर के शब्दों में कहें तो "बात बोलेगी, हम नहीं/ भेद ... Read More »

    भारतीय बजरंगी ब्रिगेड को खदेड़ने के बाद नेपाल ने राहत कार्य अपने हाथ में लिये

    2015/05/06 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल - पूरा कस्बा हो गया जमींदोज़

    भारतीय बजरंगी ब्रिगेड को खदेड़ने के बाद नेपाल ने राहत कार्य अपने हाथ में लिये,  मृतक संख्या 7611 हुई नेपाल ने विनाशकारी भूकंप की त्रासदी झेलने वाले लोगों के पुनर्वास के व्यापक अभियान को विदेशी बचाव दलों से अपने हाथ में लेते हुए इस सिलसिले में आज हजारों पुलिसकर्मी तथा सेना के जवानों को तैनात किया।  भूकंप से मृतक संख्या ... Read More »

    भूकंप नेपालियों के लिए मौत का नाम होगा, भारतीय मीडिया के लिए तो यह पैसों की बरसात है #‎GoHomeIndianMedia

    2015/05/05 आजकल 0 Comments

    Sandhya

    भूकंप नेपालियों के लिए मौत का नाम होगा, भारतीय मीडिया के लिए तो यह पैसों की बरसात है #‎GoHomeIndianMedia जब आप किसी की मदद करें तो उसे इतना गायें बजाएं नहीं, न ही उसे आत्मप्रचार और आत्मप्रशंसा का माध्यम बनाएं. मदद करना अच्छी बात है, पर मदद करते हुए पडोसी को हीनता का एहसास कराना, हम न होते तो तुम ... Read More »

    माफी मांगाे अाैर वापस ले जाअाे भारतीय सेना !

    2015/05/05 नेपाल भूकंप 0 Comments

    Hastakshep With Nepal

    माफी माग अनि फिर्ता लैजाऊ भारतीय सेना ! सम्पादकीय विचार डबली २० बैशाख २०७२ 31.2K 72 0 १२ वैशाख २०७२ को दिन नेपाली जनताको घरआँगनमा भयानक संकट बनेर आइलाग्यो । तर, यही दिनलाई कसैले भने 'दसैं'ठान्ने प्रयास गरेको पनि देखियो । विनाशकारी महाभूकम्पबाट नेपाल राष्ट्र, नेपाली समाज र यहाँको जनजीवनमा सिर्जित त्रासदी, कहर र शोक–पीडा अझै मत्थर हुन सकेको ... Read More »

    भारत विरोध नहीं वरन् नेपाली राष्ट्रवाद की प्रगतिशील चेतना की अभिव्यक्ति है‪ #‎GoHomeIndianMedia

    2015/05/05 मुद्दा 0 Comments

    ट्विटर पर जबरदस्त चर्चित गो बैक इंडियन मीडिया सन्देश का एक पोस्टर

    भारत विरोध नहीं वरन् नेपाली राष्ट्रवाद की प्रगतिशील चेतना की अभिव्यक्ति है‪ #‎GoHomeIndianMedia‬ नेपाल भले ही एक गरीब देश हो, पर स्वतंत्र रहने और स्वाभिमान कायम रखने के सवाल पर कोई समझौता नहीं।  राष्ट्रवादी चेतना एक मायावी, बेहद मानवीय और प्यारी चीज़ है। जिस राष्ट्र और राष्ट्रीय समूहों में यह चेतना प्रगतिशील रूप में विकसित नहीं होती, वहां पर सत्ताधारी ...Read More »

    भूकंप से जख्मी हिमालयी इंसानियत खून से लहूलुहान चीख-चीखकर कह रहा हैः #GoHomeIndianMedia

    2015/05/04 आजकल 0 Comments

    BREAKING NEWS

    हम लगातार नेपाल त्रासदी पर फोकस बनाये हुए हैं, क्योंकि यह हमारे लिए नेपाल की त्रासदी है नहीं, इंसानियत के खिलाफ मुक्तबाजारी फासिस्ट हमलों की वजह सा आन पड़ी कयामत है यह। हिमालय हमारे लिए कोई भारतवर्ष या नेपाल तक सीमाबद्ध राजनीतिक भूगोल नहीं, यह मनुष्यता और सभ्यता के लिए अनिवार्य प्राकृतिक रक्षा कवच है जो तहस-नहस है प्रकृति के ... Read More »

    Nepal defends its sovereignty and Nepal asks all nations to end rescue operations! #GoHomeIndianMedia

    2015/05/04 World 0 Comments

    Breaking News-2

    Nepal defends its sovereignty and Nepal asks all nations to end rescue operations! #GoHomeIndianMedia : Indian Media Faces Flak for Insensitive Coverage of Nepal Earthquake Nepal defends its sovereignty and Nepal asks all nations to end rescue operations! Mind you ,Nepal has been reduced to a diplomatic battleground and sovereign Nepalese people refuses to include itself in Hindutva empire once ... Read More »

    Letter To Indian Media by Nepali People #GoHomeIndianMedia

    2015/05/04 World 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    Letter To Indian Media To Indian media, I would like to thank from the bottom of my heart for the help your country has provided at this time of crisis in my country, Nepal. All the Nepalese in and outside of the country are thankful to your country. However, me being a Nepali outside from my motherland, when saw your ... Read More »

    नेपाल संप्रभु राष्ट्र है और उसका आत्मसम्मान है- नेपाली जनता की प्रतिक्रियाएं

    2015/05/04 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    नेपाल संप्रभु राष्ट्र है और उसका आत्मसम्मान है- नेपाली जनता की प्रतिक्रियाएं नई दिल्ली। भारतीय मीडिया ने नेपाल के विनाशकारी भूकंप के विषय में गलत प्रचार किया। अब नेपाल में भारत सरकार द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप करने की बातें नेपाली मीडिया में उठ रही हैं। इसी समय भारतीय सेना के एक पूर्व अधिकारी ने भी नेपाल में भारतीय मीडिया के असफल ... Read More »

    मोदी सरकार, ये समय उद्दार का है, जासूसी का नहीं- नेपाली मीडिया

    2015/05/04 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    नेपाली मीडिया के निशाने पर भारत और नेपाल सरकार नई दिल्ली। भूकंप की तबाही से उजड़े नेपाल को संवारने में जुटी वहां की सत्ताधारी कुलीन वर्ग की जो रीढ़विहीन औकात है, उस पर हिन्दुस्तानी सुगम संगीत की एक महानतम शख्सियत में से एक बेग़म अख्तर की गाई एक ग़ज़ल बिलकुल सटीक बैठती है। कोई उम्मीद गर नजर नहीं आती/ कोई ... Read More »

    भूकंप, राहत और राजनीति

    2015/05/04 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    25 अप्रैल को दोपहर लगभग 12 बजे आये भूकंप ने नेपाल को बुरी तरह तबाह कर दिया है। राजधानी काठमांडो के अलावा घाटी के दो अन्य प्रमुख शहर भक्तपुर और ललितपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। घाटी से बाहर लामजुंग, गोरखा, सिंधुपालचोक आदि जिलों में तबाही का आलम यह है कि वहां 70 प्रतिशत से अधिक मकान ध्वस्त हो चुके ... Read More »

    भारतीय सेना को 200 लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहरा रहा नेपाली मीडिया

    2015/05/03 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    भारतीय सेना को 200 लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहरा रहा नेपाली मीडिया  धोती की कठपुतली सरकार नई दिल्ली। ताजा मामला इस 'बहादुर'देश की सार्वभौमिकता से नहीं जुड़ता बल्कि उससे कहीं ज्यादा संगीन व अपराधिक है। नेपाल से छपने वाले तमाम छोटे-छोटे वेब न्यूज़ साईट और सोशल साईट इस घटना की गंभीरता से द्रवित हैं। सिन्धुपालचौक, राजधानी काठमांडू से ...Read More »

    भारतीय मीडिया की दादागीरी के विरुद्ध नेपाल उबला #GoHomeIndianMedia

    2015/05/03 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    भारतीय मीडिया से घर लौटने की नेपाली जनता की मांग भारतीय मिडियाको दादागिरीविरुद्ध ट्वीटरमा आक्रोश काठमाण्डौ :  नेपाललाई महाविपत्ती परेका बेला छिमेकी मुलुक भारतका सञ्चार माध्यमको अस्वभाविक गतिविधिको सामाजिक सञ्जालमा तीब्र विरोध हुन थालेको छ । भूकम्पको समाचार लेख्न नेपाल आएका भारतीय सञ्चारमाध्यमका प्रतिनिधिको अराजक गतिविधि र भारतीय सञ्चार माध्यमको हेपाहा प्रवृत्तिको ट्वीटरमा तीब्र विरोध हुन थालेको छ । An ... Read More »

    दुनिया भर की मेहनतकश इंसानियत के कत्लेआम की तैयारी है

    2015/05/03 मुद्दा 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    यह मानवीय त्रासदी जितनी नेपाल की है, उससे कहीं ज्यादा भारत और समूचे महादेश की है हिमालय में जो उथल पुथल हो रहा है। उसका खामियाजा बदलते मौसम चक्र, जलवायु और आपदाओं के सिलसिले में हमें आगे और भुगतना है। इसलिए नेपाल के महाभूकंप को हम किसी एक देश की त्रासदी नहीं मान रहे हैं। यह मानवीय त्रासदी जितनी नेपाल ... Read More »

    नेपालः भूकंप पर डरावनी राजनीति

    2015/05/03 नेपाल भूकंप 0 Comments

    Hastakshep With Nepal

    नई दिल्ली। नेपाली मीडिया में लगातार भूकंप और उसके बाद भूकंप राहत के नाम पर लड़े जा रहे छद्म कूटनीतिक युद्ध पर लेख और समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। हम अपने पाठकों के लिए यह लेख और समाचार उपलब्ध करा रहे हैं। नेपाली भाषा के ये लेख पढ़ने में आपको थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन थोड़ा धैर्य से पढ़ने ... Read More »

    महोदय! नेपाल कम से कम अभी तक सार्वभौमिक राष्ट्र है

    2015/05/02 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    नई दिल्ली। एक विशेष बात का जिक्र करना बहुत जरूरी है, कि भूकंप के दो दिन बाद नेपाल सरकार द्वारा गुपचुप तरीके से देश में 'राष्ट्रीय आपातकाल'लगा दिए जाने और काठमांडू में विदेशी भारतीय सेना बुला लिए जाने की जानकारी देश के राष्ट्रपति डॉ. राम बरन यादव तक को नहीं दी गयी, जबकि अंतरिम संविधान 2006 के अनुसार, वे ... Read More »

    कहीं, दुश्मनी में न बदल जाए ये ऑपरेशन मैत्री !!!

    2015/05/02 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    ऑपरेशन मैत्री की जमीनी सच्चाई कुछ और ही है  यह एक तथ्य है कि भारत और नेपाल के रिश्ते सामाजिक व सांस्कृतिक धरातल पर एक भारत व नेपाल के 'दोस्ताना सामाजिक-सांस्कृतिक'संबंधों के बीच चीन एक ऐसा पेंच है, जिसको लेकर नेपाली कुलीन वर्ग और आम जनता में कोई असमान ग्रंथि नहीं है, जबकि नेपाली शासक वर्ग विगत के 65 ... Read More »

    भूकंप और भगवान

    2015/05/02 कुछ इधर उधर की 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    धन्य हैं ऐसे भगवान और इनके एजेंट- भूकंप और भगवान ईरान के किसी अयातुल्लाह काज़िम सेदिघी ने कुछ साल पहले कहा था कि प्राकृतिक आपदाएं लोगों के कृत्यों का परिणाम है। अयातुल्लाह साहब पर्यावरण को किए जा रहे नुकसान की बात नहीं कर रहे हैं। उनका बयान किसी और ही 'नुकसान'के बारे में है। इनका कहना है कि भूकंप ... Read More »

    राष्ट्रीय झंडे के साथ कोलकाता से शुरु हो चुकी है आजादी की लड़ाई!

    2015/05/01 आजकल 0 Comments

    KOLKATA: Celebration of LABOR DAY

    मेहनतकशों को इस कारपोरेट केसरिया फासिस्ट मनुस्मृति सत्ता के खिलाफ गोलबंद करके हम यकीनन देश जोड़ेंगे, गुलामी की जंजीरें तोड़ेंगे! उनके एटमी सैन्यतंत्र, सलवाजुड़ुम और आफसा के खिलाफ हमारा हथियार भारत का राष्ट्रीय झंडा, झंडा ऊंचा रहे हमारा, मां तुझे सलाम! राष्ट्रीय झंडे के साथ कोलकाता से शुरु हो चुकी है आजादी की लड़ाई। मेहनतकशों को इस कारपोरेट केसरियाफासिस्ट मनुस्मृति ... Read More »

    नेपाल की भूकंप त्रासदी – प्राकृतिक आपदा में भी घृणा अभियान !!!

    2015/05/01 नेपाल भूकंप 0 Comments

    Hastakshep With Nepal

    नई दिल्ली। नेपाल की भूकंप त्रासदी के बीच जहां नेपाल में राहत व बचाव कार्य चालू हैं, वहीं नेपाली मीडिया में लगातार भारत के राहत कार्यों को लेकर सवालिया निशान लगाती खबरें प्रकाशित हो रही हैं। प्रमुख नेपाली अखबार कांतिपुर के रेडियो कांतिपुर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की और कई सवाल खड़े किए। इधर भारतीय मीडिया नेपाकिस्तान द्वारा भेजी गई ... Read More »


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    INVITE FOR PRESS CONFERENCE

     

     

    Shrinking Democratic Space: Civil Society presenting their Collective Stand on the Recent Actions taken by Government



     What:           Civil Society Organizations from across the country will Release the Open Letter Addressed to the Prime Minister on the Issue

     

    When:             Friday 8th May 2015, 12.00 - 13.00 hrs    

     

    Where:           Press Club of India, Raisina Hills Road

     

    Speakers:       Ms. Anjali Bhardwaj, Director, SNS

    Ms. Enakshi Ganguly, Director, HAQ

    Mr. Paul Diwakar, Director, NCDHR

    Ms. Priya Pillai, Campaigner, Greenpeace India

     

    We request your presence at the Press Conference

     

    For Further Information please contact –

     

    Farah, 9560511667



    -- 

    In solidarity, 
    Sanjeev Kumar

    Coordinator
    Delhi Forum
    Address: F- 10/12, (Basement), Malviya Nagar,
    New Delhi INDIA - 110017
    Phones: 011-26680883 / 26680914 / +91-9958797409 (Mobile)

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    May 6, 2015

    NEPAL QUAKE SURVIVORS FACE THREAT FROM HUMAN TRAFFICKERS SUPPLYING SEX TRADE

    Posted by The Himalayan Voice:
    Criminal networks using cover of rescue effort to target poor rural communities in country from which an estimated 15,000 girls are trafficked a year, warn NGOs

    By Jason Burke

    Armed Nepalese police help people in Sindhupalchok district board a helicopter to Kathmandu
    after last month's earthquake. Photograph: Navesh Chitrakar/Reuters
    Tens of thousands of young women from regions devastated by the earthquake inNepal are being targeted by human traffickers supplying a network of brothels across south Asia, campaigners in Kathmandu and affected areas say.

    The 7.8-magnitude quake, which killed more than 7,000 people, has devastated poor rural communities, with hundreds of thousands losing their homes andpossessions. Girls and young women in these communities have long been targeted by traffickers, who abduct them and force them into sex work.

    The UN and local NGOs estimate 12,000 to 15,000 girls a year are trafficked from Nepal. Some are taken overseas, to South Korea and as far as South Africa. But the majority end up in Indian brothels where tens of thousands are working in appalling conditions.

    "This is the time when the brokers go in the name of relief to kidnap or lure women. We are distributing assistance to make people aware that someone might come to lure them," said Sunita Danuwar, director of Shakti Samuha, an NGO in Kathmandu. "We are getting reports of [individuals] pretending to go for rescuing and looking at people."

    Senior western aid officials in the Nepalese capital are also concerned. "There is nothing like an emergency when there is chaos for opportunities to … traffic more women. There is a great chance that everything that is bad happening in Nepal could scale up," said one.

    Sita, 20, told the Guardian how she had been taken from her village in Sindhupalchok, the hill area north of Kathmandu, to the Indian border town of Siliguri where she was sold to a brothel owner, repeatedly beaten, systematically raped by hundreds of men and infected with HIV. "I do not have nightmares about my time there. I have erased it from my memory," she said.

    Last month's quake killed more than 3,000 people in Sindhupalchok, and left hundreds of thousands homeless.
    "The earthquake will definitely increase the risk of abuse," said Rashmita Shashtra, a local healthworker. "People here are now desperate and will take any chance. There are spotters in the villages who convince family members and local brokers who do the deal. We know who they are."

    Sita, who was rescued last year, was taken by an uncle "for a job" in India. Her parents, who are subsistence farmers and illiterate, believed assurances she would have a good job and be able to send back her wages.

    In the brothel in Siliguri, Sita was forced to have unprotected sex with up to 20 or 30 men a day, seven days a week for a year. When the premises was raided by police, she told officials she wanted to return home and was handed over to an NGO.

    "I am worried now for the other girls who might be taken away. They will need the money and be tempted if someone talks to them about a job. Then the same thing will happen to them as happened to me," Sita said.

    Nepal, one of the poorest countries in Asia, is the focal point of well organised smuggling networks dealing in everything from tiger skins to precious woods, from narcotics to people.

    The Guardian's Pete Pattisson reports from Barkobot, a Nepalese village hard hit by the earthquake

    Danuwar said most of these criminal networks were based in India, which made identification of traffickers difficult. The gangs have representatives and agents looking for suitable women across Nepal, but particularly in deprived rural areas such as Sindhupalchowk.

    Many local agents do not know the eventual destination of the women, with some genuinely believing they will find well-paid work in Kathmandu or India. Others are well aware of the real nature of their "jobs". One ruse is to promise marriage to wealthy foreigners.

    Kathmandu also has hundreds of bars and massage parlours where women work in poor conditions, with many compelled to have sex with clients. These women are recruited locally, again often in zones hit hard by the quake. "Now [after the earthquake] it is going to be easy for brokers," said Danuwar.

    The US State Department has said the Nepalese government does not comply "with the minimum standards for the elimination of trafficking" but " is making significant efforts to do so".

    The uncle who abducted Sita was murdered by a contract killer. Her parents remain unaware of exactly what happened to her, though her brothers have found out. They have now disowned her. Victims of sexual violence are frequently ostracised in south Asia, where they are seen as having brought shame on their community.


    Sita lives in a secret shelter run by Shakti Samuha. She does not know what has happened to her parents in the earthquake. For many days, communications to her remote village were cut. When she managed to get a line through to a brother, he refused to acknowledge her. "He said he had no sister and I had called a wrong number," Sita said.


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    Bihari Krishna Shrestha <biharishrestha@gmail.com> wrote:
    It was a nice opportunity for me to give vent to my anger as well as
    to tell whoever in the government cared to listen that the disaster
    after all is also an opportunity for Nepal to earn some dignity too
    around the world by accomplishing accelerated reconstruction and
    rehabilitation of the earthquake victims. Basically, in the 25 minute
    interview programme in the Sagarmatha TV at 5:30 PM (and 9:30 PM--this
    turned out to be a little abridged version) I told the following:
    •       The fact that most people who were killed and maimed came from rural
    hinterlands. After 26 years of representative democracy, they should
    not have been there in the first place. It basically meant failure of
    Nepalese democracy that keeps the country one of the poorest and least
    developed in the world.
    •       While one of the major factors in China's dramatic development has
    been her youthful population , the "demographic dividend" in social
    science parlance,  India is even poised to overtake China for the same
    reason. While Nepal's too is a youthful population,  her demographic
    dividend is being appropriated by the Gulf countries and others like
    Malaysia, S Korea and so on. Nepal is destined to bear with ageing
    population without ever benefiting from her demographic dividend. The
    country has been reduced to being a "residential area" with people
    living on remittances.
    •       The failure of democracy in Nepal results from the incompatibilities
    that inhere in the fact that the Westminster style democratic polity
    was taken from a very rational context of the west and transplanted in
    the stubbornly persistent feudal context of Nepal. While just about
    every single leader in Nepal at all levels is a feudal elite, and
    extraction of resources without accountability is the mode of their
    sustenance, a successful politician in Nepal is necessarily a corrupt
    man.
    •       Given such a situation patronizing the voters is the mode of vote
    getting and bhagbanda approach to resource allocation is the logical
    outcome. What has been reported by Kantipur daily recently about the
    inter-party squabbles due to their failure to sort out the new rules
    of bhagbanda is only the tip of the iceberg of the potential for gross
    misappropriation of EQ rehabilitation resources nationwide. Therefore,
    the earthquake relief, reconstruction and rehabilitation must steer
    clear of the politicians at all levels.
    •       Despite her overall failures, Nepal has distinguished in two areas
    in which she remains highly respected around the world. The first is
    the restoration of our forest wealth. While the unbridled run on our
    forest after its nationalization in 1957 brought Nepal to the brink of
    desertification by mid-80s, the introduction of Forest User Groups in
    1988 changed the scenario entirely. As things stood, it took Nepal
    three decades to wreck its forest and only one to rebuild it. Same
    thing with the health sector. With the introduction of Mothers' groups
    in 1988, Nepal came up from the bottom of the pile to  take its seat
    at the top of the table in world ranking in meeting the MDGs in child
    survival and maternal mortality reduction. While China is the country
    that developed fastest in the world, in these two areas, Nepal even
    surpassed China. That is the power of participation of the users
    themselves at the grassroots.
    •       While the long-term solution to Nepal's problem lies in redefining
    its democracy that assures transparency and accountability at all
    levels of governance, it would be inappropriate to try to make it the
    central at the time of this national crisis. However, given the
    impending monsoon after about a month and the need for quick
    reconstruction and rehabilitation, there is no alternative to
    involving the victims themselves in that task.
    •       My end suggestions were: De-politicise the whole process of relief,
    reconstruction and rehabilitation.  In order to do that, the President
    of the Republic should step in, like he has done in the case of Churia
    Forests, and take over the task in the affected district. The
    President should set up an independent expert committee to guide him.
    Secondly, use the Nepal Army that has been doing a fantastic job so
    far to carry on the relief, reconstruction and rehabilitation
    programme in the communities. Thirdly, and most importantly, form user
    groups of the victims themselves in the communities to carry out their
    own relief, reconstruction and rehabilitation. There are sufficient
    number of engineers in the country and with the goodwill of the
    international community, arranging and transporting the materials
    should not pose a problem. This would be surest and quickest way to
    help EQ victims recover from the disaster. At the very end, I further
    added that there has been some important foreign nudging for some
    important decisions by the President. In order to ensure effectiveness
    and pace to the EQ recovery programme, external powers should make it
    be known that the Presidential takeover may be a good idea too.

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    Tag Archives: With Nepal

    Nepal- Failure of democracy that keeps the country one of the poorest and least developed in the world

    2015/05/08 OPINION 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    It was a nice opportunity for me to give vent to my anger as well as to tell whoever in the government cared to listen that the disaster after all is also an opportunity for Nepal to earn some dignity too around the world by accomplishing accelerated reconstruction and rehabilitation of the earthquake victims. Basically, in the 25 minute interview programme in the Sagarmatha TV ... Read More »

    नेपाल को महाशक्तियों की जंग का अखाड़े में तब्दील कर रहा है भारत ?

    2015/05/07 नेपाल भूकंप 0 Comments

    Modi-5

    नेपाल को महाशक्तियों की जंग का अखाड़े में तब्दील कर रहा है भारत ? क्या भारत अपनी विस्तारवादी नीति के चलते नेपाल में राहत व बचाव कार्य के बहाने एक नया कश्मीर तैयार कर रहा है ? भले ही ऐसा न हो, पर नेपाल के राजनीतिक हलकों में ऐसा महसूस किया जा रहा है कि भारत अनावश्यक रूप से नेपाल ...Read More »

    भारत की मनमानी के खिलाफ नेपाल के तीन बड़े दलों की अपील

    2015/05/07 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    भारत की मनमानी के खिलाफ नेपाल के तीन बड़े दलों की अपील नेपाल भूकंप के बाद भारत की कथित राहत व बचाव कार्य नेपाल के लिए बवाल-ए-जान बन गई है। भारत की कथित विस्तारवादी नीति के खौफ और भारतीय सेना के मनमानी रवैये के कारण नेपाल को अन्य देशों से भी अपने राहत बचाव दल को वापिस बुलाने का अनुरोध ... Read More »

    नेपाल में मोदी के पुतले फूँके गए

    2015/05/06 नेपाल भूकंप 2 Comments

    Modi

    नई दिल्ली। भारतीय मीडिया कितना ही मोदियापा कर ले लेकिन नेपाल के दूरदराज क्षेत्रों से अब असली खबरें आना शुरू हो गई हैं। नेपाल में #GoHomeIndianMediaकैंपेन चलने के बाद अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले फूँके जाने का क्रम प्रारंभ हो गया है। नेपाली मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक नेपाल में पूर्व-पश्चिम महेंद्र राजमार्ग भारतीय सहायता से ... Read More »

    भारतीय सेना पर नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करने के आरोप

    2015/05/06 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    नई दिल्ली। नेपाल की संप्रभुता में भारत का दखल कम होने का नाम नहीं हो रहा है। भारतीय सेना नेपाल सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन करते हुए नेपाल में अपने पैर जमाए हुए हैं, जिसकी वहां तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। नेपाल के विदेश मंत्री महेन्द्र बहादुर पाण्डे ने सोमवार को काठमांडू में विदेश मंत्रालय में अपने कूटनीतिक अधिकारियों ... Read More »

    नेपाल में भारतीय सेना की उपस्थिति का राजनैतिक समाजशास्त्र

    2015/05/06 दुनिया 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    एक विशेष देशकाल में आस्तित्व में आये राष्ट्र-समाज के बिबिध आयामों की जांच पड़ताल करते समय वर्चस्व की एक मुकम्मल समझ बहुत जरुरी है. व्यक्ति एक राष्ट्र में बसे समाज की सबसे बुनियादी इकाई होता है. बौद्धिक मठों में बैठे मठाधीशों की उलझाऊ जुगलबंदी से परे जाकर हिंदी जनकवि शमसेर के शब्दों में कहें तो "बात बोलेगी, हम नहीं/ भेद ... Read More »

    भारतीय बजरंगी ब्रिगेड को खदेड़ने के बाद नेपाल ने राहत कार्य अपने हाथ में लिये

    2015/05/06 नेपाल भूकंप 1 Comments

    नेपाल - पूरा कस्बा हो गया जमींदोज़

    भारतीय बजरंगी ब्रिगेड को खदेड़ने के बाद नेपाल ने राहत कार्य अपने हाथ में लिये,  मृतक संख्या 7611 हुई नेपाल ने विनाशकारी भूकंप की त्रासदी झेलने वाले लोगों के पुनर्वास के व्यापक अभियान को विदेशी बचाव दलों से अपने हाथ में लेते हुए इस सिलसिले में आज हजारों पुलिसकर्मी तथा सेना के जवानों को तैनात किया।  भूकंप से मृतक संख्या ... Read More »

    भूकंप नेपालियों के लिए मौत का नाम होगा, भारतीय मीडिया के लिए तो यह पैसों की बरसात है #‎GoHomeIndianMedia

    2015/05/05 आजकल 0 Comments

    Sandhya

    भूकंप नेपालियों के लिए मौत का नाम होगा, भारतीय मीडिया के लिए तो यह पैसों की बरसात है #‎GoHomeIndianMedia जब आप किसी की मदद करें तो उसे इतना गायें बजाएं नहीं, न ही उसे आत्मप्रचार और आत्मप्रशंसा का माध्यम बनाएं. मदद करना अच्छी बात है, पर मदद करते हुए पडोसी को हीनता का एहसास कराना, हम न होते तो तुम ... Read More »

    माफी मांगाे अाैर वापस ले जाअाे भारतीय सेना !

    2015/05/05 नेपाल भूकंप 0 Comments

    Hastakshep With Nepal

    माफी माग अनि फिर्ता लैजाऊ भारतीय सेना ! सम्पादकीय विचार डबली २० बैशाख २०७२ 31.2K 72 0 १२ वैशाख २०७२ को दिन नेपाली जनताको घरआँगनमा भयानक संकट बनेर आइलाग्यो । तर, यही दिनलाई कसैले भने 'दसैं'ठान्ने प्रयास गरेको पनि देखियो । विनाशकारी महाभूकम्पबाट नेपाल राष्ट्र, नेपाली समाज र यहाँको जनजीवनमा सिर्जित त्रासदी, कहर र शोक–पीडा अझै मत्थर हुन सकेको ...Read More »

    भारत विरोध नहीं वरन् नेपाली राष्ट्रवाद की प्रगतिशील चेतना की अभिव्यक्ति है‪ #‎GoHomeIndianMedia

    2015/05/05 मुद्दा 9 Comments

    ट्विटर पर जबरदस्त चर्चित गो बैक इंडियन मीडिया सन्देश का एक पोस्टर

    भारत विरोध नहीं वरन् नेपाली राष्ट्रवाद की प्रगतिशील चेतना की अभिव्यक्ति है‪ #‎GoHomeIndianMedia‬ नेपाल भले ही एक गरीब देश हो, पर स्वतंत्र रहने और स्वाभिमान कायम रखने के सवाल पर कोई समझौता नहीं।  राष्ट्रवादी चेतना एक मायावी, बेहद मानवीय और प्यारी चीज़ है। जिस राष्ट्र और राष्ट्रीय समूहों में यह चेतना प्रगतिशील रूप में विकसित नहीं होती, वहां पर सत्ताधारी ... Read More »

    भूकंप से जख्मी हिमालयी इंसानियत खून से लहूलुहान चीख-चीखकर कह रहा हैः #GoHomeIndianMedia

    2015/05/04 आजकल 0 Comments

    BREAKING NEWS

    हम लगातार नेपाल त्रासदी पर फोकस बनाये हुए हैं, क्योंकि यह हमारे लिए नेपाल की त्रासदी है नहीं, इंसानियत के खिलाफ मुक्तबाजारी फासिस्ट हमलों की वजह सा आन पड़ी कयामत है यह। हिमालय हमारे लिए कोई भारतवर्ष या नेपाल तक सीमाबद्ध राजनीतिक भूगोल नहीं, यह मनुष्यता और सभ्यता के लिए अनिवार्य प्राकृतिक रक्षा कवच है जो तहस-नहस है प्रकृति के ... Read More »

    Nepal defends its sovereignty and Nepal asks all nations to end rescue operations! #GoHomeIndianMedia

    2015/05/04 World 0 Comments

    Breaking News-2

    Nepal defends its sovereignty and Nepal asks all nations to end rescue operations! #GoHomeIndianMedia : Indian Media Faces Flak for Insensitive Coverage of Nepal Earthquake Nepal defends its sovereignty and Nepal asks all nations to end rescue operations! Mind you ,Nepal has been reduced to a diplomatic battleground and sovereign Nepalese people refuses to include itself in Hindutva empire once ... Read More »

    Letter To Indian Media by Nepali People #GoHomeIndianMedia

    2015/05/04 World 1 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    Letter To Indian Media To Indian media, I would like to thank from the bottom of my heart for the help your country has provided at this time of crisis in my country, Nepal. All the Nepalese in and outside of the country are thankful to your country. However, me being a Nepali outside from my motherland, when saw your ... Read More »

    नेपाल संप्रभु राष्ट्र है और उसका आत्मसम्मान है- नेपाली जनता की प्रतिक्रियाएं

    2015/05/04 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    नेपाल संप्रभु राष्ट्र है और उसका आत्मसम्मान है- नेपाली जनता की प्रतिक्रियाएं नई दिल्ली। भारतीय मीडिया ने नेपाल के विनाशकारी भूकंप के विषय में गलत प्रचार किया। अब नेपाल में भारत सरकार द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप करने की बातें नेपाली मीडिया में उठ रही हैं। इसी समय भारतीय सेना के एक पूर्व अधिकारी ने भी नेपाल में भारतीय मीडिया के असफल ... Read More »

    मोदी सरकार, ये समय उद्दार का है, जासूसी का नहीं- नेपाली मीडिया

    2015/05/04 नेपाल भूकंप 1 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    नेपाली मीडिया के निशाने पर भारत और नेपाल सरकार नई दिल्ली। भूकंप की तबाही से उजड़े नेपाल को संवारने में जुटी वहां की सत्ताधारी कुलीन वर्ग की जो रीढ़विहीन औकात है, उस पर हिन्दुस्तानी सुगम संगीत की एक महानतम शख्सियत में से एक बेग़म अख्तर की गाई एक ग़ज़ल बिलकुल सटीक बैठती है। कोई उम्मीद गर नजर नहीं आती/ कोई ... Read More »

    भूकंप, राहत और राजनीति

    2015/05/04 नेपाल भूकंप 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    25 अप्रैल को दोपहर लगभग 12 बजे आये भूकंप ने नेपाल को बुरी तरह तबाह कर दिया है। राजधानी काठमांडो के अलावा घाटी के दो अन्य प्रमुख शहर भक्तपुर और ललितपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। घाटी से बाहर लामजुंग, गोरखा, सिंधुपालचोक आदि जिलों में तबाही का आलम यह है कि वहां 70 प्रतिशत से अधिक मकान ध्वस्त हो चुके ... Read More »

    भारतीय सेना को 200 लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहरा रहा नेपाली मीडिया

    2015/05/03 नेपाल भूकंप 2 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    भारतीय सेना को 200 लोगों की मौत का जिम्मेदार ठहरा रहा नेपाली मीडिया  धोती की कठपुतली सरकार नई दिल्ली। ताजा मामला इस 'बहादुर'देश की सार्वभौमिकता से नहीं जुड़ता बल्कि उससे कहीं ज्यादा संगीन व अपराधिक है। नेपाल से छपने वाले तमाम छोटे-छोटे वेब न्यूज़ साईट और सोशल साईट इस घटना की गंभीरता से द्रवित हैं। सिन्धुपालचौक, राजधानी काठमांडू से ... Read More »

    भारतीय मीडिया की दादागीरी के विरुद्ध नेपाल उबला #GoHomeIndianMedia

    2015/05/03 नेपाल भूकंप 5 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    भारतीय मीडिया से घर लौटने की नेपाली जनता की मांग भारतीय मिडियाको दादागिरीविरुद्ध ट्वीटरमा आक्रोश काठमाण्डौ :  नेपाललाई महाविपत्ती परेका बेला छिमेकी मुलुक भारतका सञ्चार माध्यमको अस्वभाविक गतिविधिको सामाजिक सञ्जालमा तीब्र विरोध हुन थालेको छ । भूकम्पको समाचार लेख्न नेपाल आएका भारतीय सञ्चारमाध्यमका प्रतिनिधिको अराजक गतिविधि र भारतीय सञ्चार माध्यमको हेपाहा प्रवृत्तिको ट्वीटरमा तीब्र विरोध हुन थालेको छ । An ... Read More »

    दुनिया भर की मेहनतकश इंसानियत के कत्लेआम की तैयारी है

    2015/05/03 मुद्दा 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    यह मानवीय त्रासदी जितनी नेपाल की है, उससे कहीं ज्यादा भारत और समूचे महादेश की है हिमालय में जो उथल पुथल हो रहा है। उसका खामियाजा बदलते मौसम चक्र, जलवायु और आपदाओं के सिलसिले में हमें आगे और भुगतना है। इसलिए नेपाल के महाभूकंप को हम किसी एक देश की त्रासदी नहीं मान रहे हैं। यह मानवीय त्रासदी जितनी नेपाल ... Read More »

    नेपालः भूकंप पर डरावनी राजनीति

    2015/05/03 नेपाल भूकंप 1 Comments

    Hastakshep With Nepal

    नई दिल्ली। नेपाली मीडिया में लगातार भूकंप और उसके बाद भूकंप राहत के नाम पर लड़े जा रहे छद्म कूटनीतिक युद्ध पर लेख और समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। हम अपने पाठकों के लिए यह लेख और समाचार उपलब्ध करा रहे हैं। नेपाली भाषा के ये लेख पढ़ने में आपको थोड़ी असुविधा हो सकती है, लेकिन थोड़ा धैर्य से पढ़ने ...Read More »

    महोदय! नेपाल कम से कम अभी तक सार्वभौमिक राष्ट्र है

    2015/05/02 नेपाल भूकंप 2 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    नई दिल्ली। एक विशेष बात का जिक्र करना बहुत जरूरी है, कि भूकंप के दो दिन बाद नेपाल सरकार द्वारा गुपचुप तरीके से देश में 'राष्ट्रीय आपातकाल'लगा दिए जाने और काठमांडू में विदेशी भारतीय सेना बुला लिए जाने की जानकारी देश के राष्ट्रपति डॉ. राम बरन यादव तक को नहीं दी गयी, जबकि अंतरिम संविधान 2006 के अनुसार, वे ... Read More »

    कहीं, दुश्मनी में न बदल जाए ये ऑपरेशन मैत्री !!!

    2015/05/02 नेपाल भूकंप 1 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    ऑपरेशन मैत्री की जमीनी सच्चाई कुछ और ही है  यह एक तथ्य है कि भारत और नेपाल के रिश्ते सामाजिक व सांस्कृतिक धरातल पर एक भारत व नेपाल के 'दोस्ताना सामाजिक-सांस्कृतिक'संबंधों के बीच चीन एक ऐसा पेंच है, जिसको लेकर नेपाली कुलीन वर्ग और आम जनता में कोई असमान ग्रंथि नहीं है, जबकि नेपाली शासक वर्ग विगत के 65 ... Read More »


    -- 

    भूकंप और भगवान

    2015/05/02 कुछ इधर उधर की 0 Comments

    नेपाल भूकंप पर विशेष रिपोर्टिंग

    धन्य हैं ऐसे भगवान और इनके एजेंट- भूकंप और भगवान ईरान के किसी अयातुल्लाह काज़िम सेदिघी ने कुछ साल पहले कहा था कि प्राकृतिक आपदाएं लोगों के कृत्यों का परिणाम है। अयातुल्लाह साहब पर्यावरण को किए जा रहे नुकसान की बात नहीं कर रहे हैं। उनका बयान किसी और ही 'नुकसान'के बारे में है। इनका कहना है कि भूकंप ... Read More »

    राष्ट्रीय झंडे के साथ कोलकाता से शुरु हो चुकी है आजादी की लड़ाई!

    2015/05/01 आजकल 0 Comments

    KOLKATA: Celebration of LABOR DAY

    मेहनतकशों को इस कारपोरेट केसरिया फासिस्ट मनुस्मृति सत्ता के खिलाफ गोलबंद करके हम यकीनन देश जोड़ेंगे, गुलामी की जंजीरें तोड़ेंगे! उनके एटमी सैन्यतंत्र, सलवाजुड़ुम और आफसा के खिलाफ हमारा हथियार भारत का राष्ट्रीय झंडा, झंडा ऊंचा रहे हमारा, मां तुझे सलाम! राष्ट्रीय झंडे के साथ कोलकाता से शुरु हो चुकी है आजादी की लड़ाई। मेहनतकशों को इस कारपोरेट केसरियाफासिस्ट मनुस्मृति ... Read More »

    नेपाल की भूकंप त्रासदी – प्राकृतिक आपदा में भी घृणा अभियान !!!

    2015/05/01 नेपाल भूकंप 2 Comments

    Hastakshep With Nepal

    नई दिल्ली। नेपाल की भूकंप त्रासदी के बीच जहां नेपाल में राहत व बचाव कार्य चालू हैं, वहीं नेपाली मीडिया में लगातार भारत के राहत कार्यों को लेकर सवालिया निशान लगाती खबरें प्रकाशित हो रही हैं। प्रमुख नेपाली अखबार कांतिपुर के रेडियो कांतिपुर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की और कई सवाल खड़े किए। इधर भारतीय मीडिया नेपाकिस्तान द्वारा भेजी गई ... Read More »

    जब भूकम्प आता है तो कोई पहचान पत्र लेकर नहीं भागेगा

    2015/05/01 खोज खबर 0 Comments

    गोरखा जिले के बरपाक क्षेत्र की एक दुर्गम सड़क पर जीप में लदी राहत सामग्री के साथ दिनेश परसाई

    29 अप्रैल को जब हम लोग बस अड्डे पर पहुंचे तो एक और दृश्य देखने को मिला। यद्यपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी की त्वरित कार्यवाही की वजह से प्रदेश के ज्यादातर लोग निकल चुके थे, फिर भी यूपी परिवहन की बसों का आना बदस्तूर जारी था। वहीं बिहार और आन्ध्र प्रदेश जैसे प्रदेशों के लोग तो बड़ी ...Read More »

    नेपाल- लाशों की सड़ने की बदबू वहां के लोगों को तोड़ रही है

    2015/05/01 खोज खबर 0 Comments

    नेपाल - पूरा कस्बा हो गया जमींदोज़

    नेपाल से इमरान इदरीस का आंखों देखा हाल नेपाल से ग्राउंड जीरो रिपोर्ट यहाँ पर नेटवर्क की समस्या के कारण लगातार लिख पाना और चित्र भेजना संभव नहीं हो पा रहा है। मैं लगातार कोशिश कर रहा हूँ। आज की मेरी ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट नेपाल में आई इस त्रासदी की सच्चाई को दिखाने के ऊपर है। काठमांडू से तक़रीबन 135 ... Read More »

    कृपया भूकम्प को कमीशनखोरी का जरिया न बनायें!

    2015/04/30 विश्व 0 Comments

    गोरखा जिले के बरपाक क्षेत्र की एक दुर्गम सड़क पर जीप में लदी राहत सामग्री के साथ दिनेश परसाई

    कृपया भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदा को कमीशनखोरी का जरिया न बनायें! नेपाल में 25 अप्रैल को दिन की दुपहरी में 11.56 मिनट पर गोरखा जिले के बरपाक को केंद्र बनाकर आये 7.9 रिक्टर स्केल के भूकम्प ने हमारे पडोसी देश में व्यापक जन धन की क्षति पहुंचाई है. नेपाल सरकार के अनुसार मृतकों की संख्या 10,000 के आस पास हो ... Read More »

    फासिस्ट संघ परिवार और सरकार को सुखीलाला के मुनाफे के अलावा न मनुष्यता की परवाह है और न प्रकृति या पर्यावरण की

    2015/04/26 मुद्दा 0 Comments

    पलाश विश्वास का रोजनामचा

    पहली मई से पहले क्या करें हम? पूरे देश को जोड़ने का यह मौका है। बेकार न जाने दें। फासिस्ट संघ परिवार को और उसकी कारपोरेट केसरिया सरकार को सुखी लाला के मुनाफे के अलावा न मनुष्यता की परवाह है और न प्रकृति या पर्यावरण की। आपको जनजागरण अभियान के वास्ते मुक्तबाजारी फासिस्ट जायनी नरमेध संस्कृति और जनसंहारी राजकाज के ... Read More »


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    Pl open any of my blogs as

    PS refuses to act on IPS Nazrul Islams`complaint!

    The story is widely published.
    Pl share the link and write the update in unicode irrespective of language.Publishing PDF always creates problem as people often might not see anything as it happens in this case.
    Our Bangla Page is not updated because our people are not habitual to write other than word or PDF format which is near impoosible to carry on.I have just one year in Kolkata and would have to leaveelsewhere as soon as I retire on 16th May,2016.Thus,I may not write in Bengali skipping English and Hindi readership.
    Unless we have some other people to change the baton,we may not continue the fight.
    I am most worreied for that.

    On Fri, May 8, 2015 at 6:24 AM, Pijush Gayen <pijush.gayen@rediffmail.com> wrote:

    কিছু দেখতে বা খুলতে পারলাম না ৷ আবার পাঠান ৷৷



    From: Palash Biswas <palashbiswaskl@gmail.com>
    Sent: Sun, 03 May 2015 11:44:03
    To: Amalendu Upadhyaya <amalendu.upadhyay@gmail.com>, Pijush Gayen <pijush.gayen@rediffmail.com>, barve siddarth <barves@bharatpetroleum.in>, "barves@bharatpetroleum.com" <barves@bharatpetroleum.com>
    Subject: PS refuses to act on IPS Nazrul Islams`complaint!

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    "जातिभेद नष्ट करने वाले पार्टी को वोट मत दो" ब्रिटन में हिंदुत्ववादीयों की पर्चों के द्वारा गुहार:- 
    A pro-Conservative leaflet has been branded "deeply divisive" for telling Hindu voters to back the party over legislation to ban caste discrimination.
    A controversial amendment to the Equality Act would ensure that caste discrimination was outlawed. 
    http://www.facebook.com/adityasir/posts/1609831745927102

    Dhananjay Aditya's photo.
    Dhananjay Aditya's photo.


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  • 05/07/15--22:53: इस देश में बहुत से लोगों को भले और सामाजिक कामों के चलते गंभीर दंड दिए गए हैं। साई बाबा जेल में मर रहे हैं। वे शिक्षक हैं और आदिवासियों के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं। बिनायक सेन जेल से निकल चुके हैं। सीमा आज़ाद जेल में रह चुकी हैं। तिहाड़ जेल में 120बी के तहत हज़ारों कैदी विचाराधीन सड़ रहे हैं। अरुण फरेरा से लेकर जीतन मरांडी तक तमाम मामले हैं जिनमें उन्‍होंने कोई अपराध नहीं किया, लेकिन जेल की सज़ा काट आए। इनके लिए तो आज तक कोई खुला पत्र क्‍या, रवीश कुमार ने इनके समर्थन में भी कभी पत्र नहीं लिखा। लिखा भी तो एक हत्‍यारे की आत्‍मा को जगाने के लिए? क्‍या रवीश बुद्ध बनने का मुग़ालता पाले बैठे हैं?

  • कोई व्‍यक्ति कब, क्‍या और क्‍यों करता है, एक पत्रकार के लिए यह बहुत मायने रखता है। पत्रकारिता के धंधे में सबसे पुराना परखा नुस्‍खा किसी घटना की टाइमिंग और वैधता का है। इसीलिए सलमान खान के नाम रवीश कुमार के लिखे इस खुले पत्र को पढ़कर मैं बिलकुल हैरत में नहीं हूं, बल्कि रवीश के बारे में मेरी बनी-बनायी धारणा और पुष्‍ट हुई है। इस देश में बहुत से लोगों को भले और सामाजिक कामों के चलते गंभीर दंड दिए गए हैं। साई बाबा जेल में मर रहे हैं। वे शिक्षक हैं और आदिवासियों के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं। बिनायक सेन जेल से निकल चुके हैं। सीमा आज़ाद जेल में रह चुकी हैं। तिहाड़ जेल में 120बी के तहत हज़ारों कैदी विचाराधीन सड़ रहे हैं। अरुण फरेरा से लेकर जीतन मरांडी तक तमाम मामले हैं जिनमें उन्‍होंने कोई अपराध नहीं किया, लेकिन जेल की सज़ा काट आए। इनके लिए तो आज तक कोई खुला पत्र क्‍या, रवीश कुमार ने इनके समर्थन में भी कभी पत्र नहीं लिखा। लिखा भी तो एक हत्‍यारे की आत्‍मा को जगाने के लिए? क्‍या रवीश बुद्ध बनने का मुग़ालता पाले बैठे हैं?

    सलमान खान तो बाकायदे एक अपराधी साबित हो चुके हैं, फिर भी रवीश कुमार उनकी अंतरात्‍मा की आवाज़ को जगाने के लिए उनसे गुहार कर रहे हैं। ऐसा क्‍या याराना है भाई? चलिए, अगर किसी की आत्‍मा को जगाना ही है, तो एक पत्र नरेंद्र मोदी के नाम ज़रूर बनता था। वो भी रवीश ने कभी नहीं लिखा। लालू यादव चारा घोटाले में जब जेल गए, तो रवीश कुमार को उन्‍हें कम से कम एक पत्र लिखना चाहिए था। लोकप्रियता और सामाजिक न्‍याय के तकाज़े से लालू के मुकाबले सलमान कुछ नहीं हैं। क्षेत्रीयता के नाते ही सही, एक पत्र बनता था। रवीश ने तब भी नहीं लिखा। इतने बेगुनाह मुसलमान लड़के पिछले दस साल में पकड़े गए, शाहिद आज़मी से लेकर मौलाना खालिद तक हत्‍या के सिलसिले मौजूद हैं, रवीश ने इनके बारे में कोई खुला पत्र नहीं लिखा। आखिर सलमान ही क्‍यों?

    कहीं यह शो-बिज़नेस की मजबूरियों का तकाज़ा तो नहीं? क्‍या इसे वर्ग-एकता माना जाए? लघु प्रेम कथा की टुच्‍ची संवेदना क्‍या दबंगों के लिए पोसी गई थी? यह भी तो हो सकता था कि सड़क पर जो आदमी सलमान के पहिये के नीचे दबकर मर गया, रवीश उसके नाम एक पत्र लिखते। यह कहीं ज्‍यादा इनोवेटिव और पत्रकारीय होता। कहीं इस उम्‍मीद में तो यह पत्र नहीं लिखा गया कि सलमान जब इस केस से बाहर आवें तो अपने स्‍टारडम की थोड़ी सी धूल अपने से सहानुभूति रखने वालों पर भी छींट दें? ... कि जब कभी रवीश उनसे मिलें, वे बोल सकें कि भाई, मैंने उस समय आपके बचाव में एक चिट्ठी लिखी थी, याद है? ...कि बॉलीवुड के इतिहास की एक बड़ी घटना के बारे में कभी कहीं कोई किताब लिखी जाए, तो अपना भी जि़क्र आदि-इत्‍यादि में हो सके?

    You have the option to appeal in a higher court, and you must make use of it, but do it only if you think you are innocent. Arguments in court don't mitigate your mistake....
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    marxistindia
    news from the cpi(m)
    May 8, 2015

    Press Release



    Following is the text of the letter addressed to the Parliamentary Affairs
    Minister, Shri Venkaiah Naidu by CPI(M) General Secretary Sitaram Yechury
    demanding a special session of Parliament on the occasion of the 125th birth
    anniversary of Dr. B.R. Ambedkar. The letter is being released for
    publication.





    (Hari Singh Kang)

    For CPI(M) Central Committee Office



    *********



    Text of Lettter



    May 6, 2015







    Dear Shri Venkaiah Naidu Garu,



    The 21st Congress of the Communist Party of India (Marxist) held from April
    14-19, 2015 at Visakhapatnam had adopted a resolution calling for the
    convening of a special session of Parliament on the occasion of the 125th
    birth anniversary of Dr. B. R. Ambedkar to discuss issues connected with the
    status of Scheduled Caste communities in India.



    You will agree that the condition of dalits has worsened during the course
    of the last two decades. Even while the practice of untouchability and
    different forms of violence against Scheduled Caste communities takes place,
    the conviction rate of people accused in such cases continues to be low.
    Laws such as The Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of
    Atrocities) Act need to be strengthened and fully implemented. The Manual
    Scavengers Act is also yet to be implemented. Large sections of Dalits in
    rural India are landless workers without assets. There is a huge backlog in
    filling up reserved posts. Development schemes lie unimplemented. Dalit
    Christians and Muslims have been denied recognition as Scheduled Castes, and
    are consequently excluded from benefits to which Scheduled Castes are
    entitled, in addition to existing quotas.



    The CPI(M) feels that these and other issues need separate discussion and
    resolution by Parliament. A special session would ensure that the attention
    of the entire country is focused on this shameful scourge of Indian society
    -- inequality on the basis of birth and descent -- and on the urgent need to
    take comprehensive and strong measures to eliminate it.



    I hope you will consider this seriously and take measures to convene a
    special of parliament on the occasion of the 125th birth anniversary of Dr.
    B.R. Ambedkar, who is universally recognized as one of the main architects
    of our Constitution.



    As the Chairman of the drafting committee he commended the Draft
    Constitution for adoption in the Constituent Assembly, whose adoption
    completed the transition of independent India to a secular democratic
    Republic.







    With regards





    Yours sincerely



    Sd/-



    (Sitaram Yechury)

    General Secretary







    Shri Venkaiah Naidu

    Minister for Parliamentary Affairs

    Government of India



    -------------- next part --------------
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  • 05/08/15--01:21: ‘তারা যখন কমিউনিস্টদের ধরে নিয়ে যেতে এলো আমি নীরব ছিলাম, কারণ আমি কমিউনিস্ট নই। তারা যখন শ্রমিক ইউনিয়নের লোকগুলোকে ধরে নিয়ে গেল আমি কথা বলিনি কারণ আমি শ্রমিক নই। তারপর তারা ফিরে এলো ইহুদিদের ধরে নিয়ে যেতে আমি চুপ করে ছিলাম, কারণ আমি ইহুদি নই। এবার তারা ফিরে এলো ক্যাথলিকদের ধরে নিয়ে যেতে, আমি কোনো কথা বলিনি, কারণ আমি ক্যাথলিক নই। শেষবার তারা ফিরে এলো আমাকে ধরে নিয়ে যেতে। কেউ আমার পক্ষে কথা বলল না, কারণ তখন আর কেউ বেঁচে ছিল না।’
  • নাৎসি শাসন আমলে জার্মান কবি মার্টিন নিমোলা কনসেনট্রেশন ক্যাম্পে একটা কবিতা লিখে বিখ্যাত হয়েছিলেন। কবিতাটির মূল অংশ এ রকম :

    'তারা যখন কমিউনিস্টদের ধরে নিয়ে যেতে এলো 
    আমি নীরব ছিলাম, 
    কারণ আমি কমিউনিস্ট নই। 
    তারা যখন শ্রমিক ইউনিয়নের লোকগুলোকে ধরে নিয়ে গেল
    আমি কথা বলিনি 
    কারণ আমি শ্রমিক নই। 
    তারপর তারা ফিরে এলো ইহুদিদের ধরে নিয়ে যেতে 
    আমি চুপ করে ছিলাম,
    কারণ আমি ইহুদি নই। 
    এবার তারা ফিরে এলো ক্যাথলিকদের ধরে নিয়ে যেতে, 
    আমি কোনো কথা বলিনি, 
    কারণ আমি ক্যাথলিক নই। 
    শেষবার তারা ফিরে এলো 
    আমাকে ধরে নিয়ে যেতে। 
    কেউ আমার পক্ষে কথা বলল না, 
    কারণ তখন আর কেউ বেঁচে ছিল না।' 


    একাত্তর থেকে দু'হাজার পনেরো

    শিমুল বিশ্বাস

    ০৩ এপ্রিল ২০১৫,শুক্রবার, ১৯:০১
     
     
    image
     
     
     
     
     
    একাত্তর থেকে দু'হাজার পনেরো | daily nayadiganta
    বাংলাদেশ জাতীয়তাবাদী দল বিএনপির জন্ম হয়েছে মুক্তিযুদ্ধের ঘোষক ও '৭১-এর রণাঙ্গনের দুঃসাহসী এক অধিনায়ক বীর উত্তমের হাত ধরে। যুদ্ধ শুরুর আগে নিরস্ত্র বাঙালির ওপর যখন.....
    Preview by Yahoo
     

    __._,_.___

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    How to Have Peace in the Holy Land: Implications for Interfaith Dialogue
     
    By Dr. Belinda F. Espiritu, New Age Islam
    06 May, 2015
              The Holy Land is valued, revered, and loved by Jews, Christians, and Muslims alike because it is the place where their most treasured spiritual and historical sites and shrines are honoured and kept. The fact that the Holy Land, which is located in what is now the state of Israel and the Palestinian lands, is commonly treasured and revered by Jews, Christians, and Muslims alike points out to the common heritage and spiritual unity of these three religions. It is imperative to have peace in the Holy Land for two important reasons: 1) to allow constructive living to flourish between the Israelis and the Arabs; and 2) to make the Holy Land a zone of peace owing to the fact that it is considered sacred by followers of Judaism, Christianity, and Islam and is a site of annual pilgrimages by peoples from different parts of the world.
    With the news of bitter conflict between the Israelis and the Palestinian Arabs, what are the prospects for peace in the Holy Land? Is peace achievable after more than 60 years of Arab-Israeli conflict, particularly between the Palestinian Arabs and the Israelis? This paper argues that the violent conflict between Arabs and Israelis can be avoided and stopped through their mutual remembrance and practice of shared ethical and spiritual values towards one another and by considering the common heritage of the three religions (Judaism, Islam, and Christianity), based as they all are in the Abrahamic faith tradition and the books of the Old Testament with the lives of the Hebrew patriarchs and other figures. This is similar to the argument of Dr. Omer Salem of the Ibn Rushd Institute for Dialogue that the Islamic moral values can establish peace and justice for the Arabs and Jews in the Arab-Israeli conflict.1
              MaulanaWahiduddin Khan (2008), a well-known Islamic teacher and Sufi spiritual master in India who wrote books about the ideology of peace and Islam, wrote on how to establish peace in the Holy Land by arguing that war is costlier than any other course of action and unequivocally said that the Arabs must accept Israel as a legitimate state by totally abandoning violence against the latter, and that Israel must make territorial adjustment as is acceptable to the Arabs.2  He further said that the violent course of action adopted by the Arab leaders against Israel is a violation of Islamic principle, which is for reconciliation as the best option by having peaceful negotiations with the other party. This was shown in the life of Muhammad when he signed the treaty of Hudaybiyyah with his opponents to avoid war and by verses from the Qur'an which speaks of doing a good deed in return for a bad deed to make one's enemy a potential friend.
    Since Arabs, Jews, and Christians are really of one source in terms of patrilineal ancestry and share a common heritage in their faith traditions (Abrahamic faith and lineage), it is wrong for brothers to kill their fellow brothers. Muslims, the same with Christians, trace their spiritual roots to the Hebrew writings of the Old Testament, to Hebrew patriarchs, personalities and stories. The Jews who have been persecuted by their host countries in their diaspora and who opted to return to their ancient homeland need to be accepted by their Arab neighbours by virtue of their being the keepers of the source of the faith traditions of Christianity and Islam. However, in asserting their right for a homeland of their own where they will not be driven out, discriminated, persecuted and killed, they should not evict, harass, nor mistreat the Palestinian Arabs who have made their homes in the Holy Land lest they do what they don't want done to them, or what the German Nazis did to their ancestors during World War II.
    The Arab-Israeli conflict began with the disagreement over the British partition of the Holy land between the Arabs and the Jews in the Belfour Plan and Chamberlain Plan in 1917 and 1939, respectively. Zionist desire to take over the Holy Land area conflicted with militant groups like the Hamas of Palestine and Hezbollah of Lebanon, which were formed due to their belief that the Israelis have no right to form a state in the lands they have occupied during the long centuries of Jewish diaspora. Bitter wars were fought between the Israelis and the Arabs (1948 war for independence, 1967 6-day war, intervening wars, and recent exchange of bombings between Hamas and the Israeli Defence Forces). Both the Arabs and the Israelis need to realize that violent attacks and retaliations against each other are totally against the spiritual values taught by their own religion or by the three major religions such as love, magnanimity, compassion, forgiveness, respect for each other's dignity, and peace.
    Implications for Interfaith Dialogue
    The awareness of the common spiritual heritage of Jews, Christians, and Muslims can be the subject of interfaith dialogues, since tapping on this common heritage can be a source of spiritual unity among these three religions though differences exist among them on important beliefs and doctrines. Jews and Christians are descended from Abraham's son Isaac while Arabs who are mostly Muslims are descended from Abraham's son Ishmael. The Holy Qur'an and the Holy Bible have common roots and sources in the Tanakh, the Holy Book of the Jews, with Abraham as the common patriarch of Jews, Christians, and Muslims alike. Adam is commonly referred to as the first man created by God.
    Moreover, the awareness and application of shared ethical and spiritual values of love, mercy, compassion, tolerance, and magnanimity allows people having different religious expressions to live harmoniously with one another. The application of humane and spiritual values of understanding, love, compassion, tolerance, and sharing of land and resources is the better course of action rather than a colonialist stance, firing rockets, suicide bombings, and murderous hatred. Dr. Omer Salem of the Ibn Rushd Institute for Dialogue wrote that the Islamic value of Rahma, which is usually translated as "mercy, grace, or compassion", is advocated in the Qur'an in no less than 400 places, and it is the attribute God chose to describe Himself similar to the God of never failing compassion in the books of the Old Testament. In the New Testament of the Christian Bible, love of God and love of neighbour are the two greatest commandments. The command to love God with one's whole heart, mind, soul, and strength and to love one's neighbours as one's self sum up the teachings of Jesus Christ. Jews, Muslims, and Christians living in the Holy Land should be able to show love, mercy and compassion towards one another, following the spiritual and ethical values taught by their religions. A sharing of the Holy Land among Jews, Arabs, and Christians follows the law of nature since they have a common spiritual heritage and a common patrilineal ancestry.
    Thus, the win/win solution is to let the humane and spiritual values of love, acceptance, understanding, respect, and generosity to rule between and among Jews and Arabs in and around the Holy Land. In this conflict, Israel should not apply a colonialist, aggressive stance but remember to exercise humaneness and justice to the Palestinians. It is definitely wrong and unjust for them to disregard the basic rights of the Palestinians to life and basic necessities, particularly those in the Gaza Strip. Israelis should respect the rights of the Palestinians to a place in the Holy Land by either giving them equal civil rights under the Israeli government or a full enjoyment of Palestinian statehood. On the side of the Palestinians and all other Arabs in the Middle East, they need to recognize the statehood of Israel and show magnanimity and compassion to a persecuted people by allowing them the right to the Holy Land which was their ancient homeland.
    More Important Points to Solve the Arab-Israeli Conflict
              Various peace initiatives had been undertaken since 1967 to the present to resolve the Arab-Israeli conflict but these were unsuccessful in bringing about a definitive peace in the Holy Land. The root causes for the failure of these peace initiatives are the failure to agree on the terms and conditions of peace and the existence of militant groups such as the Hamas of Palestine and the Hezbollah of Lebanon which resort to violence and trains suicide bombers to show their disapproval of the state of Israel and their hatred for them. A mutually agreeable pact on land territories or partition is imperative, which will entail making some concessions on both sides for the sake of peace. The Arabs should not make unreasonable demands and be sincere in making peace with the Israelis, and the Israelis should be able to make the necessary concessions while respecting the rights of the Palestinians in the Holy Land.
              MaulanaWahiduddin Khan (2008) spoke and wrote that the Qur'an advocates seeking a common ground between the Arabs and Jews, and that this can be found in both the secular and religious fields. The common religious ground has been well-explained in the previous paragraphs. In the secular field, Arabs and Jews can work together in the fields of agriculture, horticulture, trade relations, education, etc. There is so much that can be achieved through good will and cooperation whereas hatred and war only leads to destruction, enmity, and death. Arabs and Jews can also adopt a system of power-sharing in this age of democracy by becoming political partners, rather than antagonists.
              Dr. Omer Salem (2012) of the Ibn Rushd Institute for Dialogue laid down important points to solve the conflict which harmonize with the ideas in this paper. Jews, Muslims, and Christians must acknowledge their common heritage and unity; confirm that that the conflict is part nationalistic and part religious; resolve the religious dispute through the exercise of shared moral values and sense of respect for each other; and affect a new partition plan for Palestine – one for Arabs and one for the Jews – neither of whom will be called Palestine but Holy Land. The partition will be the Northern State of Holy Land with Jewish majority population and a minority of Arabs, while the Southern State of Holy Land will have Arab majority population with a Jewish minority. He advocated for the granting of citizenship to Palestinian refugees in the countries where they were born or currently reside to defuse the tension caused by the Palestinian refugee problem. For the small minority of Palestinians who refuse to be naturalized in their country of birth or residency, they would be offered citizenship in the Northern State of Holy Land or the Southern State of Holy Land. 
    Conclusion
              For the prevailing animosity and hatred between Israelis and the Palestinians to be dispelled, Israelis and Palestinians must get rid of state and ideological violence through amicable mutual agreement and the practice of the shared ethical and spiritual values of love, magnanimity, mercy, compassion, tolerance, respect, forgiveness, and peace. Political policies and communal relations among Jews and Arabs ought to be governed by these shared values, which would require transformation of mindsets and attitudes towards one another.  Such transformation of mindsets and attitudes is crucial to dispel hatred and animosity, to dismantle state and ideological violence toward one another, and to acknowledge the common heritage and spiritual unity of Jews, Muslims, and Christians. Cooperation from the neighbouring Arab countries is important to establish peace by offering their lands and citizenship to displaced Palestinians and by not evicting and persecuting the Jews who have lived for a long time in the Arab lands. The collective and mutual practice of shared ethical and spiritual values will usher in peace and enable constructive living to flourish among the Arabs and the Jews, realizing what was beautifully expressed in the words of MaulanaWahiduddin Khan, "to live, and let live".
    End Notes:
    1.       Paper entitled "The Struggle of Palestine between the Holy Bible and the Holy Qur'an" (2012), Ibn Rushd Institute for Dialogue.
    2.       Paper presented in a peace conference at the Peres Centre for Peace, Tel Aviv, on October 28, 2008. The title of the paper was "How to Establish Peace in the Holy Land: Ten Point Program".
    Dr. Belinda F. Espiritu is an associate professor of communication and is currently the Coordinator of the Mass Communication Program of the University of the Philippines Cebu. She has done research on Christian-Muslim relations in Manila, Philippines and is interested in the study of communication, religion, spirituality, development studies, peace studies, and democratic participation using new media.

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    Posted by: Abu Taha <abutaharahman@yahoo.com>

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