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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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    ****SAKSHI & PRACHI BLAME RAHUL for EARTHQUAKE!!*****
    Ashok T Jaisinghani <ashokjaipune@gmail.com>

       SAKSHI MAHARAJ and SADHVI PRACHI have been absolutely CRAZY in BLAMING Rahul Gandhi for causing the MASSIVE EARTHQUAKE in Nepal, which has killed many thousand people. The 2 IDIOTS believe that Rahul Gandhi had committed the GREAT SIN of PRAYING in the Kedarnath Temple, which got POLLUTED by the PRESENCE of Rahul Gandhi who had been committing the worst CRIME of eating the BEEF of the HOLY COW!! So God must have PUNISHED the PEOPLE of Nepal for the GREAT SIN of Rahul Gandhi!! 

       Why should Rahul Gandhi's visit to Kedarnath Temple in Uttarakhand, INDIA, cause a MASSIVE EARTHQUAKE in NEPAL and KILL THOUSANDS of Nepali people, who have nothing to do with the DIRTY POLITICS of the BJP and the Congress Party? 

       Even if Sakshi Maharaj and Sadhvi Prachi BLINDLY BELIEVE in SUPERSTITIONS, how can they JUSTIFY the decision of God to PUNISH and KILL THOUSANDS of INNOCENT Nepalis in NEPAL for any SIN committed by any INDIAN like Rahul Gandhi in the Kedarnath Temple, which is in INDIA? If the SIN was committed by an Indian, then God could have produced a MASSIVE EARTHQUAKE in India and caused the DEATHS of THOUSANDS of INDIANS in DELHI, Uttarakhand, UP, Bihar, etc!! 

       Do Sakshi Maharaj and Sadhvi Prachi think that God is so SILLY that he can PUNISH and KILL THOUSANDS of INNOCENT Nepalis for the SIN of just ONE Indian, Rahul Gandhi? 

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    36garh मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने उत्तरप्रदेश के मुख्य सचिव को लिखा पत्र - kanhar issue


    छत्तीसगढ़ की सरहद पर उत्तरप्रदेश में कन्हर बांध निर्माण का मामला : छत्तीसगढ़ के किसानों-ग्रामीणों के हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी: डॉ. रमन सिंह

     Posted on 30/04/2015

     

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने उत्तरप्रदेश के मुख्य सचिव को लिखा पत्र

    डूब क्षेत्र के विस्तृत सर्वेक्षण और मुआवजा आदि प्रकरणों का निराकरण नहीं होने तक बांध निर्माण स्थगित रखने का आग्रह

    छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय सोच अपनाकर किया सहयोग, लेकिन उत्तरप्रदेश का रूख असहयोगात्मक

    शर्ताें का पालन किए बिना और छत्तीसगढ़ के हितों की अनदेखी कर उत्तरप्रदेश ने बांध निर्माण शुरू किया 

     

    रायपुर, 30 अप्रैल 2015

    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश के ग्राम अमवार में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कन्हर नदी में निर्माणाधीन सिंचाई बांध के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार किसी भी हालत में अपने राज्य के किसानों और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी नहीं होने देगी। छत्तीसगढ़ के प्रभावित होने वाले परिवारों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने इस मामले में छत्तीसगढ़ शासन की ओर से उत्तरप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्री आलोक रंजन को चिट्ठी लिखी है। श्री ढांड ने अपने पत्र में उनसे आग्रह किया है कि इस परियोजना में जब तक सहमति की शर्तों के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के डूब क्षेत्र के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद मुआवजा इत्यादि के मामलों का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक कन्हर बांध का निर्माण स्थगित रखा जाए। 
    छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव के पत्र में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार के सर्वेक्षण के अनुसार इस परियोजना में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के चार गांवों की भूमि प्रभावित हो रही है। उत्तरप्रदेश सरकार ने द्वारा 4/89 में डूूूबान क्षेत्र के मुआवजा निर्धारण के लिए कलेक्टर सरगुजा को प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव के अनुसार बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के चार गांव - झारा, कुशफर, सेमरूवा और त्रिशूली की 106.203 हेक्टेयर राजस्व भूमि, 9.368 हेक्टेयर निजी भूमि, 142.834 हेक्टेयर वन भूमि इस प्रकार कुल 258.405 हेक्टेयर भूमि सहित ग्रामीणों की अन्य परिसम्पतियां एफ.टी.एल. 265.552 मीटर तक आंशिक रूप से प्रभावित हो रही है। परियोजना से प्रभावित 142.834 हेक्टेयर वन भूमि में ग्राम झारा की 54.44 हेक्टेयर, ग्राम कुशफर की 28.34 हेक्टेयर, सेमरूवा की 25.40 हेक्टेयर, त्रिशूली की 4.104 हेक्टेयर वन भूमि सहित 30.55 आरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं। सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वेक्षण के अनुसार डूब क्षेत्र 263.40 हेक्टेयर अनुमानित है, जिसके वर्गीकरण के अनुसार 86 हेक्टेयर राजस्व भूमि, 56.40 हेक्टेयर निजी भूमि और 121 वन भूमि शामिल हैं। 
    श्री ढांड ने पत्र में लिखा है कि सर्वेक्षण के आधार पर उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा पुनरीक्षित प्रस्ताव कलेक्टर सरगुजा (छत्तीसगढ़) को अब तक नहीं भेजा गया है। इस निर्माणाधीन बांध के संबंध में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ की 263.4 हेक्टेयर भूमि के डुबान हेतु 27 मार्च 1999 के पत्र में सशर्त सहमति दी गई थी। शर्तों का पालन करने के लिए उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा सात अप्रैल 1999 को दोनों राज्यों की सचिव स्तरीय बैठक में सहमति व्यक्त की गई थी। इसके बाद केन्द्रीय जल आयोग के परामर्श पर बांध के एफ.आर.एल. और एफ.टी.एल. के मध्य डुबान में आने वाली छत्तीसगढ़ राज्य की 41.60 हेक्टेयर जमीन को डूब से बचाने के लिए सुरक्षात्मक रिंग बांध बनाने के उत्तरप्रदेश सरकार के सुझाव को मान्य कर छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा नौ जुलाई 2010 को सशर्स्त सहमति दी गई थी। इसमें निर्धारित शर्तों का पालन नहीं होने पर अनापत्ति प्रमाण पत्र स्वमेव निरस्त होने का उल्लेख है। 
    श्री ढांड ने अपने पत्र में यह भी जानकारी दी है कि उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा 28 जनवरी 2015 को सर्वेक्षण के लिए 40 लाख रूपए दिए गए हैं। इस राशि से सर्वेक्षण प्रारंभ कर दिया गया है और एफ.आर.एल. तथा एफ.टी.एल. लाइनों पर सर्वेक्षण पूर्ण कर डूब क्षेत्र, सम्पत्ति आदि के मूल्यांकन के लिए कार्य प्रगति पर है। सर्वेक्षण के बाद प्राप्त होने वाले विवरण के आधार पर भू-अर्जन प्रकरण, विस्थापन प्रकरण और केन्द्रीय वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत वन भूमि प्रकरण निराकरण के लिए प्रस्तुत किए जाएंगे। इसी तारतम्य में प्रकरण से संबंधित जन-सुनवाई भी आयोजित की जा सकेगी। 
    छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव ने 29 अप्रैल को उत्तरप्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में लिखा है  कि इन तथ्यों से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ राज्य ने राष्ट्रीय सोच अपनाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य के साथ लगातार सहयोग किया है, लेकिन उत्तरप्रदेश राज्य द्वारा असहयोगात्मक रूख अपनाकर पूर्व निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है और छत्तीसगढ़ राज्य के हितों की अनदेखी कर बांध का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इससे छत्तीसगढ़ के संबंधित गांवों में अनिश्चितता की स्थिति और भारी असंतोष तथा आक्रोश व्याप्त है। पत्र में श्री ढांड ने उत्तरप्रदेश के मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि इस मामले में जब तक सहमति की शर्तों के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के डूब क्षेत्र के विस्तृत सर्वेक्षण के बाद मुआवजा इत्यादि के मामलों का निराकरण नहीं हो जाता है, तब तक कन्हर बांध का निर्माण स्थगित रखा जाए। 
     

    क्रमांक-566/स्वराज्य

     







    -- 
    Ms. Roma ( Adv)
    Dy. Gen Sec, All India Union of Forest Working People(AIUFWP) /
    Secretary, New Trade Union Initiative (NTUI)
    Coordinator, Human Rights Law Center
    c/o Sh. Vinod Kesari, Near Sarita Printing Press,
    Tagore Nagar
    Robertsganj, 
    District Sonbhadra 231216
    Uttar Pradesh
    Tel : 91-9415233583, 
    Email : romasnb@gmail.com
    http://jansangarsh.blogspot.com

    Delhi off - C/o NTUI, B-137, Dayanand Colony, Lajpat Nr. Phase 4, NewDelhi - 110024, Ph - 011-26214538

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  • 05/01/15--12:57: In Solidarity with Nepal
  • In Solidarity with Nepal
    omnath Mukherji <somnath@aidindia.org>

    On the afternoon of April 25th, 2015, an earthquake of magnitude 7.9 scale struck Nepal. The disaster has been catastrophic with thousands dead and hundreds of thousands left homeless. Kathmandu, the capital, has lost many heritage monuments and many rural areas are still completely cut off from the rest of the country. The scale of the disaster is such that according to some estimates, financial and infrastructural recovery is likely to take at least a decade or more.


    In this hour of tragedy, Association for India's Development (AID) stands in solidarity with the survivors of the earthquake in Nepal and in India. We hope that relief efforts are able to reach all the affected families and that they are able to begin the process of rebuilding their lives.


    We are grateful to many of you who have asked us about supporting relief work in Nepal. Over the last few days, our volunteers have been attempting to reach out to various groups and communities to determine ways to support ongoing relief and rehabilitation efforts.  Our organization's charter limits our ability to raise funds for supporting activities only within India butwe urge you to consider supporting our partners involved in relief efforts and other international relief organizations


    Our partner organizations who are involved in relief efforts:


    Goonj: AID has partnered with Goonj before on flood relief efforts in Uttarakhand and Kashmir in 2014. Please watch their website for update on donations.

    ESG: AID has worked with the Environment Support Group on a number of past and current environment projects.


    International relief organizations working in Nepal:

    Oxfam

    Doctors Without Borders

    Facebook and International Medical Corps

    A complete list can be found here



    -- 

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    RIHAI MANCH
    For Resistance Against Repression
    ---------------------------------------------------------------------------------
    बिचैलिए मुस्लिम नेताओं के जरिए हाशिमपुरा के इंसाफ का कत्ल करने की
    फिराक में सपा सरकार- रिहाई मंच

    लखनऊ, 30 अपै्रल 2015। रिहाई मंच ने सपा सरकार पर हाशिमपुरा जनसंहार के
    इंसाफ के मुद्दे को भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में सरकार
    अपने कुछ बिचैलिए मुस्लिम नेताओं के जरिए लोगों को गुमराह करने की कोशिश
    कर रही है। मंच हाशिमपुरा, मलियाना के सवाल पर प्रदेश व्यापी मुहिम चलाकर
    सपा सरकार के गुमराह करने की कोशिश को असफल करेगा।

    रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि हाशिमपुरा को इंसाफ सुप्रीम
    कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच से मिल सकता है, जिसके लिए प्रदेश
    सरकार ने अब तक कोई पहल नहीं की है। वह बार-बार अपील करने की बात करती
    है, जबकि जिस तरीके से हाशिमपुरा मामले में विवेचना अधिकारी ने दोषी
    पुलिस वालों को बचाने के लिए न सिर्फ झूठी विवेचना की बल्कि सबूतों को भी
    मिटाया ऐसे में यह मामला जब ऊपरी अदालत में जाएगा तो वह दोषियों को ही
    बचाएगा, जैसा की सरकार भी चाह रही है। उन्होंने कहा कि हाशिमपुरा ही नहीं
    मलियाना, मुरादाबाद, कानपुर सांप्रदायिक हिंसा पर गठित जांच आयोगों की
    रिपोर्टें सरकार के तहखानों में कैद हैं। इन रिपोर्टों को सरकार इसलिए
    सार्वजनिक नहीं कर रही है क्योंकि इन रिपोर्टों में बेगुनाहों के हत्यारे
    पुलिस वालों के खिलाफ सबूत है, जैसा कि निमेष आयोग में था। अगर अखिलेश
    इंसाफ करना चाहते हैं तो वह इन आयोगों की रिपोर्टों को जारी कर दें। न कि
    कुछ बिचैलिए नेताओं जिन्होंने मेरठ के होने के बावजूद कभी भी हाशिमपुरा
    के सवाल को नहीं उठाया और फैसला आने के बाद जब हाशिमपुरा की गलियों में
    काले झंडे बांधकर विरोध हो रहे थे, तब सरकारी पदों की रेवडि़ंया पाकर
    मेरठ में मिठाई बांट रहे थे, को आगे कर ऊपरी अदालत में अपील करने का नाटक
    करें। उन्होंने कहा कि हाशिमपुरा जनसंहार के आरोपी पुलिसकमिर्यों को
    मुलायम सिंह यादव की पिछली सरकारों ने किस तरह बचाया और उन्हें प्रमोशन
    तक दिया यह पूरा प्रदेश जानता है। लिहाजा सपा सरकार द्वारा इस मसले पर
    गुमराह करने की कोशिशें सफल नहीं होने जा रही हैं। रिहाई मंच इस सवाल पर
    पूरे प्रदेश में अभियान चला कर इस तरह की कोशिशों और उसके पीछे सपा के
    मुस्लिम नेताओं की भूमिका को उजागर करेगा।

    द्वारा जारी
    शाहनवाज आलम
    प्रवक्ता, रिहाई मंच
    09415254919
    ------------------------------------------------------------------------------
    Office - 110/46, Harinath Banerjee Street, Naya Gaaon Poorv, Laatoosh
    Road, Lucknow
    E-mail: rihaimanch@india.com
    https://www.facebook.com/rihaimanch

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    *****BSNL & MTNL CANNOT FOOL SUBSCRIBERS NOW***** 
    Ashok T Jaisinghani <ashokjaipune@gmail.com>

       BSNL's GIMMICKS of offering FREE NIGHT CALLS between 9 PM and 7 AMcan NEVER again succeed in FOOLING their LOST subscribers and LURE them back! 

       BSNL and MTNL have LOST MILLIONS of subscribers who had FELT CHEATED, as they were FORCED to PAY BIG AMOUNTS as monthly FIXED CHARGES, for which NO TALKTIME was given. 

     *****The CHEATING by the BSNL and MTNL has MASSIVELY INCREASED during the 11 months of rule by the ANTI-PEOPLE BJP Government led by Narendra Modi. Not even all the MODI MAGIC of the Prime Minister can now help the BSNL and MTNL to get their LOST subscribers back!!***** 

       The MASSIVE DEFEATS of the BJP in the Delhi Assembly and West Bengal Municipal elections have PROVED that the BOGUS MODI MAGIC cannot FOOL the COMMON PEOPLE of India any more, as Narendra Modi has FORGOTTEN all the FALSE PROMISES he had made   to the POOR PEOPLE of India just for WINNING the 2014 Lok Sabha elections! 

       BSNL and MTNL THUGS can NEVER get their former subscribers back. Why should anybody have been made to PAY BIG AMOUNTS as FIXED CHARGES and given NOTHING in return in the form of TALKTIME? 

     *****The monthly bills of the majority of MOBILE phone users are about ONE-THIRD of the amounts paid by the BSNL and MTNL LANDLINE phone users for the SAME amount of TALKTIME!!***** 

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    Dear Friends,

     

     

    The Nepal Earthquake Relief being facilitated by Concerned Citizens of South Asia needs lots of volunteers to collect and sort aid, procure relief items, ship them etc. 

     

     

    If you are willing to give some time to this effort please contact the Volunteers Team Leader, Vishnu Sharma at <simplyvishnu2004@yahoo.co.in> or call him at 99 53 00 64

    99.

     

     

    Qualified medical practitioners willing to volunteer please contact Medical Team Leader, Dr Radhika Sehgal at <sehgalr@gmail.com> or call her at 85 86 00 29 87.

     

    We look forward to many many volunteers getting in touch with these team leaders.

     

     

    Please circulate the mail widely!


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    Bangladesh has to face more Terrorism!

    বাংলাদেশে জঙ্গিবাদের বিস্তার ঘটবে- মার্কিন কংগ্রেস

    রাজনৈতিক অস্থিরতার সুযোগে বাংলাদেশে জঙ্গিবাদের বিস্তার ঘটবে বলে মন্তব্য করা হয়েছে মার্কিন কংগ্রেসের এশিয়া ও প্রশান্ত মহাসাগরীয় সাব-কমিটির এক শুনানিতে। বৃহস্পতিবারের এ বৈঠকে বক্তারা বলেন, 'রাজনৈতিক অস্থিরতা অব্যাহত থাকলে আঞ্চলিক ও আন্তর্জাতিক সন্ত্রাসবাদের উত্থান ত্বরান্বিত হবে। ধর্মকে যারা ঢাল হিসাবে ব্যবহার করছে, তারা আরও জঙ্গি রূপ ধারণ করতে পারে।

    তারা আরও বলেন, 'শেখ হাসিনা যে কর্তৃত্ববাদী দৃষ্টিভঙ্গি নিয়ে দেশ শাসন করছেন তাতে যদি আন্তর্জাতিক সম্প্রদায় বাধা না দেয়, তাহলে বাংলাদেশের রাজনীতি আরও সহিংস রূপ পাবে এবং উগ্র ইসলামী দলগুলো আরও সহজে দলভারি করতে পারবে।'

    স্থানীয় সময় বৃহস্পতিবার দুপুরে যুক্তরাষ্ট্রের রাজধানী ওয়াশিংটন ডিসির ক্যাপিটল হিলে 'বাংলাদেশ'স ফ্র্যাকচার: পলিটিক্যাল অ্যান্ড রিলিজিয়াস এক্সট্রিমিজম' শীর্ষক এই শুনানি অনুষ্ঠিত হয়। এতে বাংলাদেশের চলমান পরিস্থিতি নিয়ে পাঁচজন বক্তব্য দেন।

    সাব কমিটির চেয়ারম্যান রিপাবলিকান দলীয় কংগ্রেস সদস্য ম্যাট স্যালমন বলেন, 'এ অবস্থায় গণতান্ত্রিক ব্যবস্থা বাধাগ্রস্ত হওয়ার আশঙ্কা প্রবল হবে। এর প্রধান শিকার হবে আওয়ামী লীগ ও বিএনপি। তাই পরিস্থিতি উপলব্ধি করে গণতন্ত্রের স্বার্থে বাংলাদেশের প্রধান দুই দলের সংলাপে বসা উচিৎ।' শুনানির দ্বিতীয় পর্বে কয়েকজন আলোচক বাংলাদেশের সমস্যা, উন্নয়ন ও সাফল্যের বিষয়ে বক্তব্য দেন।

    মার্কিন কংগ্রেসের এশিয়া ও প্রশান্ত মহাসাগরীয় সাব-কমিটির চেয়ারম্যান কংগ্রেসম্যান ম্যাট সালমন বলেন, 'এই শুনানি কোনও দেশের বিরুদ্ধে নয়। কোনও দেশের সরকারকে হেয় করার জন্য নয়। বরং একটি দেশ কীভাবে অগ্রগতি অর্জন করতে পারে সে বিষয় মার্কিন প্রশাসনের নজরে আনা।'

    দুপুরে ২টা থেকে বিকাল ৫টা পর্যন্ত তিন ঘণ্টার এই শুনানিতে প্যানেল আলোচক হিসেবে অংশ নেন হেরিটেজ ফাউন্ডেশনের এশিয়ান স্টাডিজ সেন্টারের সিনিয়র রিসার্চ ফেলো লিসা কার্টিস; ইলিনয় স্টেট বিশ্ববিদ্যালয়ের সরকার ও রাজনীতি বিভাগের প্রধান অধ্যাপক আলী রিয়াজ; হিন্দু আমেরিকান ফাউন্ডেশনের সরকার সম্পর্ক বিভাগের পরিচালক জে কানসারা; ইউএস-বাংলাদেশ ট্রেড অ্যান্ড রিলেশন্স অ্যাসোসিয়েশনের প্রেসিডেন্ট স্টিভেন ডি ফ্লিশলি এবং ইন্ডিয়া, পাকিস্তান অ্যান্ড সাউথ এশিয়া কাউন্সিল অন ফরেইন রিলেশনসের সিনিয়র ফেলো অ্যালিসা আইরেস।

    হেরিটেজ ফাউন্ডেশনের এশিয়ান স্টাডিজ সেন্টারের সিনিয়র রিসার্চ ফেলো লিসা কার্টিস বলেন, রাজনৈতিক অস্থিরতার সুযোগ নিয়ে ইসলামী জঙ্গিরা বাংলাদেশের গণতান্ত্রিক ব্যবস্থাকে উল্টে দিতে পারে। তাছাড়া রাজনৈতিক সহিংসতা ও দীর্ঘমেয়াদী রাজনৈতিক অচলাবস্থা ২০০৭ সালের মতো আবারও বাংলাদেশকে সামরিক হস্তক্ষেপের পথে নিয়ে যেতে পারে।

    বিরোধী দলের যে 'হাজার হাজার' রাজনৈতিক কর্মী কারাগারে আছে, তাদের ছেড়ে দিতে অথবা সুষ্ঠু আইনি প্রক্রিয়ায় তাদের বিচার শুরু করতে বাংলাদেশ সরকারকে যুক্তরাষ্ট্রের চাপ দেওয়া 'উচিৎ' বলেও মত প্রকাশ করেন কার্টিস।

    ইলিনয় স্টেট বিশ্ববিদ্যালয়ের সরকার ও রাজনীতি বিভাগের প্রধান অধ্যাপক আলী রিয়াজ বলেন, বাংলাদেশের রাজনৈতিক দলগুলোর মধ্যে সমঝোতার জন্য বেশ কিছু বিষয় জরুরি।

    জঙ্গিবাদের বিস্তার ঠেকানোর স্বার্থে জামায়াতে ইসলামী ও ইসলামী ছাত্রশিবিরকে নিষিদ্ধ ঘোষণার জন্য বাংলাদেশের ওপর যুক্তরাষ্ট্রের চাপ দেওয়া উচিৎ বলে মত প্রকাশ করেন হিন্দু আমেরিকান ফাউন্ডেশনের জে কানসারা।

    শুনানিতে যুক্তরাষ্ট্র আওয়ামী লীগ ও যুক্তরাষ্ট্র বিএনপি'র কয়েকজন নেতা ছাড়াও ওয়াশিংটনে বাংলাদেশ দূতাবাসের কর্মকর্তারা উপস্থিত ছিলেন।

    http://www.banglatribune.com/%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%82%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B6%E0%A7%87-%E0%A6%9C%E0%A6%99%E0%A7%8D%E0%A6%97%E0%A6%BF%E0%A6%AC%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%B8

    __._,_.___

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    রবীন্দ্র বিশ্ববিদ্যালয়'স্থাপন গ্রহণযোগ্য হতে পারে?
    মোজাম্মেল খান <mojammel1382@gmail.com>
    শরাব ও পতিতালয়ের পয়সায় লালিত-পালিত রবীন্দ্র ঠগ তার মেজদা ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী সত্যেন্দ্রর কাছে আসার আগে বড়দা, সেজদা, পিতা তথা পরিবারের প্রত্যক্ষ সহযোগিতায় পরিচালিত 'হিন্দুমেলা'র দীক্ষা নিয়েছিল। হিন্দুমেলার আদর্শ লক্ষ্য ধারণ করে শরাব ও পতিতালয়ের পয়সায় লালিত-পালিত রবীন্দ্র ঠগ কবিতা-গান লিখেছিল। 
    হিন্দুমেলা প্রকাশ্যই ছিল হিন্দুত্ব এবং হিন্দু জাতীয়তাবাদী জাগরণের মেলা। হিন্দুমেলায় স্বদেশ মুক্তি ও স্বদেশের নামে সব কথা থাকলেও সে স্বদেশ শুধু হিন্দুদের। 'হিন্দুমেলার ইতিবৃত্ত'গ্রন্থের লেখক ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী যোগেশচন্দ্র বাগল লিখেছেÑ মেলার সম্পাদক (ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী) গণেন্দ্রনাথ ঠাকুর মেলার দ্বিতীয় অধিবেশনে বলে যে, 'এই মেলার প্রথম উদ্দেশ্য, বৎসরের শেষে হিন্দু জাতিকে একত্রিত করা। যত লোকের জনতা হয় ততই ইহা হিন্দুমেলা ও ইহা হিন্দুদিগের জনতা- এই মনে হইয়া হৃদয় আনন্দিত ও স্বদেশানুরাগ বর্ধিত হইয়া থাকে।' 
    হিন্দুমেলার অন্যতম সংগঠক ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী মনোমোহন বসু বলে যে, 'ধর্ম সংক্রান্ত মতভেদ তিরোহিত হইয়া সকলেই সৌভ্রাত্র ও সৌহৃদ্য শৃঙ্খলে আবদ্ধ হইবে- যেখানে বৈষ্ণব, শাক্ত, শৈব, গাণপত্য, বৌদ্ধ, জৈন, নাস্তিক, আস্তিক সকলেই আপনাপন মেলা ভাবিয়া নিঃসন্দিগ্ধ চিত্তে উৎসবের সমভাগী হইতে পারে।'
    হিন্দুমেলার সাফল্যে অনুপ্রাণিত হয়ে ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী নারায়ণ বসু ১৮৬৯ সালে মেদিনীপুরে 'জাতীয় গৌরব সম্পাদনী সভা'করে। এই সভার অন্যতম সদস্য ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী মনোমোহন বসু। নামে জাতীয় হলেও এই সভা একান্তভাবে ছিল হিন্দুদের। এই প্রসঙ্গে ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী নবগোপাল মিত্র সম্পাদিত ঘধঃরড়হধষ চধঢ়বৎ-এ ঝ. ই. ছদ্মনামে একজন লেখে যে, 'খ্রিস্টান ও মুসলমানদের অন্তর্ভুক্ত না করলে কেবলমাত্র হিন্দুদের নিয়ে গঠিত সভাকে জাতীয় সভা বলা যায় না।' 
    ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী মনোমোহন বসু এই যুক্তি উড়িয়ে দেয়, 'খ্রিস্টান ও মুসলমানের অন্তর্ভুক্তির প্রশ্ন একেবারে অবান্তর এবং তাদের বাদ দিলেও জাতীয় সভার মর্যাদা ক্ষুণœ হয় না।'
    মুসলমান ও খ্রিস্টানদের উপেক্ষা করে 'হিন্দুমেলা এবং জাতীয় সভা যে ধরনের স্বাদেশিকতা ও সব্বজাত্যভিমানের লালন করেছিল, তা পরিণতিতে একটি সাম্প্রদায়িক জাতীয়তাবোধ উদ্বোধনে সহায়তা করে। বরং পরবর্তীকালের হিন্দু-মুসলিম বিভেদের বীজ এই মেলা ও জাতীয় সভায়ই বপিত হয়েছিল। 
    এ মন্তব্যের সবচেয়ে বড় প্রমাণ এই যে, ১৮৬০ দশকের শেষে এবং ১৮৭০ দশকে বহু খ্যাত-অখ্যাত বাঙালি সাহিত্যিক হিন্দুমেলার কিংবা জাতীয় সভার আদর্শে উদ্বুদ্ধ হয়ে যে বিপুল সাহিত্য রচনা করে, তা হিন্দু-মুসলিম সম্পর্কে কেবল অবনত নয়, রীতিমতো স্থায়ীভাবে বিনষ্ট করেছিল। '... (রবি ঠাকুর) পরিবারেও হিন্দুমেলার বিষফল ধরেছিল।'
    বিশিষ্ট গবেষক অধ্যাপক গোলাম মুরশিদের এই মন্তব্যের পক্ষে বড় উদাহরণ জ্যোতিরিন্দ্রনাথ। সে জীবনস্মৃতিতে লিখেছে, 'হিন্দুমেলার পর হইতে কেবলই আমার মনে হইতো কি উপায়ে দেশের প্রতি লোকের অনুরাগ ও স্বদেশপ্রীতি উদ্বোধিত হইতে পারে। শেষে স্থির করিলাম নাটকে ঐতিহাসিক বীরগাথা ও ভারতের গৌরব কাহিনী কীর্তন করিলে, হয়তো কতকটা উদ্দেশ্য সিদ্ধ হইলেও হইতে পারে। এইভাবে অনুপ্রাণিত হইয়া কটকে থাকিতে থাকিতেই আমি 'পুরু-বিক্রম'নাটকখানি রচনা করিয়া ফেলিলাম।'রচনাকাল ফেব্রুয়ারি ১৮৭৪। 
    কলকাতায় ফিরে স্বদেশী সাহিত্য সম্মিলনী 'বিদ্বজ্জন সমাগম'-এ ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী জ্যোতিরিন্দ্র 'পুরু-বিক্রম'নাটকের তৃতীয় অঙ্কের প্রথম গর্ভাঙ্ক পড়ে শোনায়। 
    'ভারত সংস্কারক'-এর এক প্রতিবেদনে (২৪ এপ্রিল ১৮৭৪) এই গর্ভাঙ্ক সম্পর্কে মন্তব্য করে, '... জ্যোতিরিন্দ্র এক অঙ্ক নাটক পাঠ করিলো, তাহাতে পুরু রাজা সে যবন শত্রু (মুসলমান) নিপাত করিবার জন্য সৈন্যদলকে উত্তেজিত করিতেছে এবং সৈন্যদল তাহার বাক্যের প্রতিধ্বনি করিয়া বীরমদে মাতিতেছে।'
    হিন্দুমেলার প্রেরণায় কথিত স্বদেশবোধে অনুপ্রাণিত নাটক 'পুরু-বিক্রম'-এ হিন্দু বীরের বিক্রম হলো 'যবন নিধনে'। অতি বীরত্বে বঙ্কিম ও ভ্রƒ বঙ্কিম করে বঙ্গদর্শনে (ভাদ্র ১২৮১) লেখে, 'গ্রন্থখানি বীররস প্রধান এবং বীরোচিত বাক্যবিন্যাস বিস্তর আছে বটে, কিন্তু সকল স্থানেই যেন বীররসের খতিয়ান বলিয়া বোধ হয়।' 
    এই বীররসের নমুনা হলো। তৃতীয় অঙ্ক, প্রথম গর্ভাঙ্কে পুরু সৈন্যদের উদ্দেশ্যে বলছেÑ
    'ওঠ! জাগ! বীরগণ! 
    দুর্দান্ত- যবনগণ 
    গৃহে দেখ করেছে প্রবেশ।
    হও সবে একপ্রাণ,
    মাতৃভূমি কর ত্রাণ, 
    শত্রুদলে করহ নিঃশেষ 
    ... যবনের রক্তে ধরা হোক প্লাবমান
    যবনের রক্তে নদী হোক বহমান
    যবন-শোণিতবৃষ্টি করুক বিমান
    ভারতের ক্ষেত্র তাহে হোক ফলবান।'

    সৈন্যগণ উৎসাহের সহিত প্রতিধ্বনি করে, 
    'যবনের রক্তে ধরা হোক প্লাবমান ...।'
    সৈন্যগণ পুরুর প্রতিধ্বনি করে যায়,
    'ক্ষত্রিয়-বিক্রমে আজ কাঁপুক মেদিনী
    জ্বলুক ক্ষত্রিয় তেজদীপ্ত দিনমণি
    ক্ষত্রিয়ের অসি হোক জ্বলন- অশনি।
    সৈন্যগণ আবারও পুরুর প্রতিধ্বনি করে,
    'মরণশরণ কিম্বা যবননিধন
    যবননিধন কিম্বা মরণশরণ
    শরীরপতন কিম্বা বিজয়সাধন।'
    হিন্দুমেলার প্রেরণায় মুসলমানবিদ্বেষী 'পুরু বিক্রম'নাটকের পর ম্লেচ্ছ অস্পৃশ্য উগ্রতাবাদী জ্যোতিরিন্দ্র লেখে 'সরোজিনী'বা 'চিতোর আক্রমণ'নাটক। মুসলিমবিদ্বেষের সঙ্গে হিন্দু কুসংস্কার ও ঐতিহ্যের জয়ঢাক পিটানো 'সরোজিনী'নাটককে শরাব ও পতিতালয়ের পয়সায় লালিত-পালিত রবীন্দ্র ঠগও বাহবা দিয়েছিল। 
    এখানে মুসলমানদেরকে উপস্থাপন করা হয় চারিত্রিক দোষে কলূষিত হিসেবে।


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    उद्धार, राहत कार्य एवम् पुनर्वासको मौजुदा स्थिति र किंकर्तव्यविमुढ नेपाल सरकार

    Posted by The Himalayan Voice:
    [यसका अतिरिक्त राष्ट्रिय र व्यक्तिगत सम्पति र जाय-जेथाको के कति हानी-नोक्सानी भएको छत्यसको लेखा-जोखा सरकारी वा गैह्र-सरकारी कुनै पनि श्रोतवाट प्राप्त भएको छैन। अहिले सम्ममा राष्ट्रिय र अन्तरराष्ट्रिय स्तरवाट के कति र कस्तो प्रकारको सहयोग नेपाललाई प्राप्त भएको छ त्यसको जानकारी जनतालाई छैन। उद्धार कार्यराहत कार्य र पुनर्वासको मौजुदा स्थिति के रहेको छ सरकारको तर्फवाट आधिकारिक र पारदर्शी रूपमा रूपमा सार्वजनिक गरिएको छैन। यसवाट सरकार किंकर्तव्यविमुढ भएको र विपक्षले यसैलाई अचानो वनाएर सत्ता परिवर्तनको दाउमा वसेको आभा हुन्छ। ]
     प्रा. मदन दाहाल 
    यां वर्ष २०७२ को प्रारम्भ संगै नेपालमा वैसाक १२ गते शनिवार दिउंसो ११:५६ वजे ७.९ रिक्टर स्केलको अत्यन्त शक्तिशाली एवं प्रचण्ड-विनाशकारी महा-भूकम्प आयो। तत्पश्चात अर्को दिन ६.९ रिक्टर स्केल लगाएत हिजो सम्म ठूला र साना गरी भूकम्पका सैकडौं झटकाहरू लगातार आई रहे। यो वि. स. १९९० पश्चातको नेपाल र नेपाली जनतामाथि परेको सवै भन्दा निर्मम,  ठूलो दुखद र भयङ्कर त्रासदी हो। त्यसवाट अहिले यो स्ट्याटस् लेख्दा सम्ममा सम्पूर्ण नेपाल भरिमा करीव ७,००० मानिसको मृत्यू भैसकेको र १४,००० भन्दा बढी घाईते भएको खवर प्राप्त भएको छ। 
    यसका अतिरिक्त राष्ट्रिय र व्यक्तिगत सम्पति र जाय-जेथाको के कति हानी-नोक्सानी भएको छत्यसको लेखा-जोखा सरकारी वा गैह्र-सरकारी कुनै पनि श्रोतवाट प्राप्त भएको छैन। अहिले सम्ममा राष्ट्रिय र अन्तरराष्ट्रिय स्तरवाट के कति र कस्तो प्रकारको सहयोग नेपाललाई प्राप्त भएको छ त्यसको जानकारी जनतालाई छैन। उद्धार कार्यराहत कार्य र पुनर्वासको मौजुदा स्थिति के रहेको छ सरकारको तर्फवाट आधिकारिक र पारदर्शी रूपमा रूपमा सार्वजनिक गरिएको छैन। यसवाट सरकार किंकर्तव्यविमुढ भएको र विपक्षले यसैलाई अचानो वनाएर सत्ता परिवर्तनको दाउमा वसेको आभा हुन्छ। 
    यस्तो राष्ट्रिय विपत्ति र महा-त्रासदीको घडीमा सत्ता र विपक्षी राजनैतिक दलका नेता र कार्यकर्ताहरू तथा तिनका समस्त भातृ-संगठनहरूतथाकथित नागरिक समाजका अगुवाहरू र स्वनामधन्य मानव अधिकारवादी कर्मीहरूका साथै निजी क्षेत्रका मूर्धन्य उद्धमी र व्यवसायीहरू कहां छन दिउंसै रांको वालेर खोज्ने वेला भएको छ। यता भूकम्प पिडित निरीह नेपाली जनता दलदलमा पुरिएका आफन्तहरू अझै जिवितै फर्केर आउंछन् कि भनेर गह भरि आशुंमा डुवेर वसेका छन्। यस्तो अवस्था देख्दा लाग्छ हामी सवै जिम्मेवारी लिएर वसेका मानिसहरू उदासिनसंवेदनशीलताहीन फगत एउटा अत्यन्त कुरूप स्वार्थी यन्त्र हौं।
    अहिले सम्मको जानकारीमा नेपाली सेनासशस्त्र र जनपथ प्रहरी तथा राष्ट्रसेवक कर्मचारीहरूले सह्रानीय कार्य गरेका छन्यसको प्रशंसा गर्नै पर्दछ। छिमेकी राष्ट्रहरू लगाएत अन्य विभिन्न मुलुक र संघ-संस्थाहरूवाट प्राप्त वैदेशिक सहयोगको खुलेर सह्राना गर्नै पर्दछ र स्वदेशी र वैदेशिक सहयोग भूकम्प पिडित जनतामा पुग्नु पर्दछ र यसको सदुपयोग हुनु पर्दछ। 

    म धेरै ठूलो आदर्शको कुरा गर्दिन - तसर्थ आ-आफ्नो स्थानहैसियत र ईच्छा अनुसार आंफुले चाहेको ठाउमा गएर ती भूकम्प पिडित जनतालाई के कस्तो सहयोग गर्न सकिन्छ गरौं। आफ्नो ईज्जत र आवरू वचाउं ! हामी सवैलाई चेतना भया !!


    *
    NEPAL BRISTLES AT MISSING LEADERSHIP
    ["Where is the government that said it wants Nepal to be a democracy, a republic of the people? Where are those people? Surveying our tragedy from helicopters?"]


    By Sankarshan Thakur

    Durbar High School in ruins
    Kathmandu, April 30: At the Tudikhel tent shelter mid-town last evening, Prime Minister Sushil Koirala had to retreat from hostile jeering by the quake-hit.

    A day before, deputy Prime Minister Bamdev Gautam nearly pulled out of the completion rites of a major rescue mission near the Shobha Bhagwati Bridge on the capital's outskirts for fear of being heckled; he had to be assured by senior Indian officials in charge of the operation no harm would come to him before Gautam agreed to go.

    On the boundary rails of the Singha Durbar, seat of Nepal's government, Kathmandu residents have put up a missing-person notice as taunt to their representative in the Constituent Assembly: "Dhyan Govind, where are you? And where is the aid?"

    The quake has opened a chasm between Nepal's political class and the people that's brimming over with ire and indignation.

    "Our leadership has collectively retreated from responsibility in a time of grave crisis," says Kumar Regmi, one of Nepal's better-known constitutional lawyers.

    "Much less come forward and come to grips with the situation, they have not even moved to empathise with the people they rule, or even been on call in their hour of need. It makes things worse that the government and Opposition are united in their dereliction; the people have no option to forsake one formation and embrace another."

    In the days since Nepal's worst quake in living memory struck, the national leadership has made its truancy palpably felt. It has not presented itself on the crisis barricades, it has absented itself from the public discourse.

    The government has omitted to engage with a stricken nation, issuing neither appeal nor assurance from the helm it occupies. It has shut its door to media interaction or questioning. It has left coordination and execution of rescue and relief efforts to the army. It has offered little sense to the people it is an institution whose central purpose is to serve them.

    "Where are the people we worked and voted for?" asks Akhilesh Shreshtha, a farmer from Sindhupalchok district, who has lost his home and three near ones.

    "Where is the government that said it wants Nepal to be a democracy, a republic of the people? Where are those people? Surveying our tragedy from helicopters?"

    That sentiment is widespread, bubbling across Nepal as victims await succour.

    It's the kind of anger that former Kathmandu mayor and Nepali environment minister P.L. Singh finds just as well as alarming.

    "I am least surprised the politicians are running scared, they have lost credibility overtime and with this quake they stand exposed; they have proved themselves a set that can only serve themselves, not the people. That can't be good for the health of a democracy; this democracy is failing the people," Singh says.

    A long-serving leader of the Nepali Congress and a man with access to inside workings of the government, Singh said: "The government and administration are in total disarray, such that they are sitting on piles of aid and relief and cannot get it distributed; they don't know what to tell international rescue and relief workers; even senior minister don't know, they are just busy trying to hide from the people."

    A senior Nepali government official who attended a government-international aid agency interface revealed on condition of anonymity that department heads had not been able to furnish clear directions to aid workers; their most offered response: "We shall let you know."

    Caroline Anning, a "Save the Children" volunteer from theUK, told The Telegraph she and her team had been working "pretty much on our own".

    Her great advantage was she had had a previous stint inNepal. "It's because I know people here and have some sense of what might be needed where that we are able to make some headway. There isn't a central place or nodal agency that is overseeing deployment."

    For a volunteer fresh in Nepal - and there are many - the lack of local guidance can be a handicap - to them and, more critically, to the aid effort.

    On the road to Gorkha in the west Nepal hills, we ran into a stranded medical team from Bihar. The doctors were taking a nap in a local lodge, the ambulance and a bus loaded with medicines and first aid were being washed.

    "For three days we have only been running from one place to another," said driver Ram Kumar.

    "Wherever somebody sends us we are told we are not required; now we are headed to Gorkha, if there is nothing to be done there we may just head back."

    Back at the Tudikhel camp in Kathmandu, where Prime Minister Koirala was jeered, Bikram Bhele, a displaced tour operator, made a cutting summation of why public rage was beginning to sporadically erupt: "This lot (the politicians) have not been able to give this country a Constitution for seven years now; do you think they can be up to any good other than holding on to power?"

    The quake-hit remains of the Gorkha Boys School at Rani Pokhari in central Kathmandu. Picture by Sankarshan Thakur


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    Nagraj Chandal
    May 1 at 7:10pm
     
    মে দিবসে লাল পতাকা কোথায়? 
    বামপন্থী দলেরা কি মে দিবস ছেড়ে দিল না কি? 
    কোথায় হারিয়ে গেল সেই গান, 
    বাইরে এখন হাজার হাজার লাল পতাকা, 
    বাইরে এখন শিকল ভাঙ্গার ভীষণ পণ ????? 
    সংগ্রামী অভিনন্দন জানাই আম্বেদকরবাদী কর্মী বৃন্দদের যারা কোলকাতায় এক নতুন ইতিহাস স্থাপন করলেন। অভিনন্দন জানাই সেই সব শ্রমিক, কৃষক, ব্যবহারজীবি, কর্মচারী সাধারণ মানুষকে যারা দেশ বিক্রি করার চক্রান্তের বিরুদ্ধে জাতীয় পতাকা নিয়ে এক সার্বিক ভাগিদারী আন্দোলনের সূচনা করলেন। 
    জয় ভীম, জয় ভারত।
    Timeline Photos

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    फेसबुकले दुई दिनमा जुटायो १ अर्ब रुपैयाँ

    • आफ्नोतर्फबाट २० करोड सहयोग
    • काठमाडौ, वैशाख १८ - 
      सामाजिक सञ्जाल फेसबुकले दुई दिनभित्र नेपालका लागि १ अर्ब रुपैयाँ सहयोग जुटाएको छ। कम्पनी आफैंले पनि २० करोड रुपैयाँ थप सहयोग गर्ने भएको छ। फेसबुकले 'नेपाल अर्थक्वेक सर्पोट'नामक पेज बनाएर प्रयोगकर्तालाई सहयोगको अपिल गरेको छ। जसबाट दुई दिनभित्रै १ करोड अमेरिकी डलर जुटेको हो। सामाजिक सञ्जालमार्फत पहिलो पटक ठूलो रकम नेपालमा सहयोग हुन लागेको छ। 

      'हामीले सबैलाई फेसबुकमार्फत स्थानीय राहत कार्यमा सहयोग गर्ने अवसर दियौं', फेसबुकका संस्थापक मार्क जुकरबर्गले आफ्नो पेजमा भनेका छन्, 'दुई दिनभित्रै ५ लाखभन्दा बढी व्यक्तिले १ करोड डलर सहयोग गरेका छन्।'सहयोग रकम इन्टरनेसनल मेडिकल कर्पमार्फत गैरनाफामूलक संस्थालाई उपलब्ध गराउने उनले उल्लेख गरेका छन्। 'स्थानीय पुन:स्थापना कार्यमा फेसबुकले थप २० लाख डलर सहयोग गर्नेछ', उनले लेखेका छन्।

      जुकरबर्ग फेसबुकमा जुटिरहेको सहयोगबाट उत्साही देखिएका छन्। 'नेपालमा भुकम्प गएपछि हामीले हाम्रो समुदाय (फेसबुक) ज्यादै अद्भुत तरिकाबाट सँगै आएको देखेका छौं', उनले आफ्नो पोस्टमा लेखेका छन्। कम्पनीले नेपाललाई लक्षित गरेर 'सेफ्टी चेक'नामक अप्सन फेसबुकमा राखेको थियो। जहाँ प्रयोगकर्ताले आफू सुरक्षित रहेको सूचना एक क्लिकमार्फत आफ्ना सबै फेसबुक 'फ्रेन्ड'लाई दिनसक्ने व्यवस्था थियो। 'हामीले सेफ्टी चेक सुरु गरेपछि ७० लाखभन्दा बढी व्यक्ति उक्त क्षेत्रमा सुरक्षित रहेको देखिन्छ', उनले लेखेका छन, '१५ करोडभन्दा बढी फ्रेन्ड्सलाई सूचना पाउन र त्यो अपडेटले व्यक्तिहरूलाई सहज बस्न सँगै राहत योजनालाई सहयोग पुग्यो।'संकटका समयमा सम्पर्क र जानकारी आदनप्रदान हुने कार्यको ठूलो महत्त्व रहने जुकरबर्गले लेखेका छन्। वाट्स एप र म्यासेन्जर नेपाल सहितको क्षेत्रमा सहयोग माग्न प्रयोग भइरहेको उनले बताएका छन्। 'सहयोगकर्ता ग्रुपमार्फत सहकार्य गर्दै क्षतिग्रस्त क्षेत्र खोजिरहेका छन्'उनले पोस्टमा उल्लेख गरेका छन्। पत्रकार र संञ्चार संस्था इन्स्टाग्रामलाई फोटो 'सेयर'गर्ने प्राथमिक माध्यमका रूपमा लिइरहेको उनले बताएका छन्। 

      जुकरबर्गले फेसबुक प्रयोगकर्तालाई सहयोग उपलब्ध गराएकामा धन्यवाद पनि दिएका छन्। 'आवश्यक पर्दाको समय हाम्रो समुदायसँगै आएर सहयोग गरेको देख्नु ज्यादै प्रेरणादायी छ', उनले लेखेका छन्, 'हामी तपाईंहरूलाई सेवा दिन र नेपालमा प्रभावितलाई सहयोग पुर्‍याउने काममा आभारी छौं।'फेसबुकले नेपालको भूकम्पबारे सहयोग माग्दै बनाएको पेजमा राजधानी नजिकै ७ दशमलव ८ रेक्टरस्केलको भूकम्प गएको र हजारौ व्यक्तिको नेपाल, भारत सहित बंगलादेशमा मृत्यु भएको उल्लेख गरेको छ। 



      सहयोग रकम इन्टरनेसनल मेडिकल कर्पलाई उपलब्ध गराउने जानकारी छ। यो संस्था क्षतिग्रस्त क्षेत्रमा आफंै गएको र भूकम्पबाट बाँचेकालाई सहयोग आवश्यक रहेको लेखिएको छ। 

      क्षतिग्रस्त स्थानमा सेवा दिने संस्था इमर्जेन्सी रेस्पोन्स टिममार्फत मोबाइल मेडिकल युनिट सञ्चालन भइरहेको जानकारी दिइएको छ। सहयोगमा उक्त संस्थाले हाइजिन किट, पानी शुद्ध बनाउने औषधि र स्वास्थ्यसँग सम्बन्धित अन्य सामग्री उपलब्ध गराइरहेको लेखिएको छ। 'अघि हेर्दा, तपाईंको उपहारले उद्धारकर्ता समूहलाई बाँचेका व्यक्तिलाई सहयोग गर्न, स्वास्थ्य सेवा सुचारु गर्न र नेपाललाई पुनर्निर्माण गर्न सहयोग गर्नेछ'फेसबुक पेजमा लेखिएको छ। फेसबुकले दुई दिनमै नेपालका लागि ठूलो रकम संकलन गरेपछि टाइम म्यागजिनले पनि प्रमुखताका साथ समाचारलाई अनलाइन संस्करणमा राखेका छन्। 

      अप्रिल २७ मा मार्क जुकरबर्गले आफ्नो पेजमा राहत संकलन गर्ने जानकारी दिंदै एउटा पोष्ट राखेका थिए। त्यसको दुई दिन अघि उनले नेपालमा 'सेफ्टी चेक'नामक सेवा फेसबुकमा राखेका थिए। 

      फेसबुकसँगै एप्पलले पनि आफ्नो उत्पादन आइट्युन्समार्फत नेपालका लागि सहयोग जुटाइरहेको छ। यो संस्थामार्फत संकलन भइरहेको रकमको विवरण सार्वजनिक भइसकेको छैन। एप्पलले उठेको रकम अमेरिक रेडक्रसमार्फत उपलब्ध गराउने जानकारी भने दिइसकेको छ।

      आइट्युन्सले ५ देखि २ सय अमेरिकी डलर सहयोग आफ्ना प्रयोगकर्तामार्फत उठाइरहेको छ। 
    • http://www.ekantipur.com/kantipur/2072/1/18/full-story/345715.html

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    भक्कानिँदै निकालें'

    • इन्सपेक्टर, सशस्त्र प्रहरी बल विपत व्यवस्थापन तालिम केन्द्र कुरिनटार
    • इन्सपेक्टर, सशस्त्र प्रहरी बल विपत व्यवस्थापन तालिम केन्द्र कुरिनटार
      इन्सपेक्टर, सशस्त्र प्रहरी बल विपत व्यवस्थापन तालिम केन्द्र कुरिनटार
      वैशाख १८ - 
      भूकम्प आएको दिन बिदामा काठमाडौ आएका थिएँ। भुइचालो जान साथ काममै बोलावट भयो। त्यसैदिन कुरिनटारबाट टोली झिकाएर आइतबार बिहानदेखि खटिए। हामीलाई जीवित निकाल्न सकिने ठाउँमा खटिन भनिएको थियो। नयाँ बसपार्क क्षेत्रमा हाम्रो टिम खटियो। मंगलबार सयपत्री गेष्ट हाउसमा खोजी सुरु गर्‍यांै। हामी अर्घाखाँचीका ऋषि खनाललाई जीवितै उद्धार गर्न सफल भयौं। नौ तले भवनको तल्लो भागबाट उनलाई निकालेको हो। तेस्रो तल्लासम्म भित्र दबेको थियो। छिर्नै समस्या थियो। पाँचौं तल्लाबाट ढलान काट्दै काट्दै अन्तिम तल्ला पुग्यौ। रातभरि ढलान काट्यौं। मंगलबार बिहान १० बजेदेखि ढलान काट्न सुरु गरेका थियौं। राति ११ बजे ऋषि भएको ठाउँमा पुग्यौं। कराउँदै गएका थियौं। कोही हुनुहुन्छ भन्यौं, ढकढक गरेको आवाज सुनियो। हामी आउँदै छौं, नआत्तिनुस् भन्यौं। नजिकै छौं, केही मिनेटमा उद्धार गर्छौं भन्यौं। भित्र जाँदा शव गन्हाइरहेको थियो। ऋषिको कम्मर पर्खालले च्यापिएको थियो, खुट्टा बिमले। हलचल गर्न सक्दैनथ्यो। एउटा हात र खुटटा मात्रै चल्थ्यो। कोल्टो परेका रहेछन्। हामीलाई देख्नेबित्तिकै पानी खान मागे। उनलाई भित्ताले च्यापेको कारण गाह्रो भएको थियो। मेसिन लगाएर काट्दा कम्मरमा चोट लाग्ने सम्भावना थियो। भित्ता फोर्न तीन घण्टा लाग्यो। जोगाएर फुटाउनुपर्ने, सुतेर हान्नु पर्ने थियो। त्यतिन्जेलसम्म कम्मर माथिको संरचना हटाइए। कम्मर निकालेपछि उठ्लान् भन्ने सोचेका थियौं। तर, खुट्टा पनि च्यापिएको रहेछ। तिमी औंला चलाउन सक्छौ भनेर सोधें। उनले पनि कम्मर मात्रै थिचिएको बताए। मैले तान्न खोज्दा कहाँ दुखेको छ भन्दा कम्मर मात्रै भने। तर, खुट्टा त बिमले थिचेको रहेछ। एक छिनमा निकाल्छु, नआत्तिनु भने। क्षतिबिनै बिम काट्यौं, सफलता मिल्यो। 
    • बिहीबार फेरिसँगैको हिल्टन होटलमा उद्धारका लागि गयौं। त्यहाँ पनि ६ घण्टाको प्रयासपछि १५ वर्षीय पेम्बा तामाङलाई जीवितै उद्धार गर्न सफल भयौं। 

      हिल्टनका २५ कोठामध्ये १६ वटा बुक भएको, त्यसमा चार कोठाबाट ग्राहक बाहिरिएको र १२ कोठामा ग्राहक बसेको होटल कर्मचारीले जानकारी गराए। सोमबारदेखि उद्धार भइरहेको थियो। हामी टर्किस टोलीलाई जिम्मा लगाएर अन्यत्र गयांै। बिहीबार डोजरले खन्न लागिरहेको थियो। जीवित हुनसक्छ भनेर हामी सर्च गर्छौं भन्यौं। 

      सात बजेबाट काम सुरु गर्‍यौं। सात तला माथिबाट खोज्दै बेसमेन्टमा पुग्यौं। ढकढक गर्‍यौं। कोही छ भने चिच्याउन भन्यौं। बचाऊ बचाऊ भन्दै आवाज आयो। कसैले 'दाइ, मलाई झिक्नुहोस्'भन्यो। दबेको आवाज थियो। भित्र हेर्दा सटर चिरा भएको थियो। भित्र छिरेपछि एक्कासि निसासिएको अनुभव भयो। अँध्यारो कोठामा दुर्गन्ध फैलियो। सटर र फुटेको ढलानमा घिस्रेर जाँदा हेल्मेट अड्कियो। भित्र छिर्न कठिन भयो। गर्मी पनि भयो। उकुसमुकुस भयो। अगाडि बढ्न 

      लाइट मगाएँ। अगाडि 

      बढ्दा मोटरसाइकल पनि थियो। कलिलो अनुहारका बच्चा देखें। झिक्दिनुस् भन्दै थिएँ। पाँच मिनेटमा झिक्छु भनेर ढाडस दिए। आफ्नो नाम भन्यो। धैर्य गर भन्दै पानी दिए। अक्सिजन दियौं। छेउमा सटर र मोटरसाइकलको पछिल्लो टायरको छेउमा पासाङ थियो। म जाँदा मोटरसाइकल काटेर जानुपर्ने थियो। बाइक काट्दा सटर झर्ने अवस्था थियो। 

      बाइक र सटरको ग्याप फट्याएँ। भुईंमा सुतेर मोटरसाइकलको पछिल्लो भाग काटें। हात बाउँडेर निकै गाह्रो भयो। मेरा पछाडि बत्ती बाल्ने टोली थियो। मेसिनको ब्लेड भाँचियो। पानी खुवाएपछि बच्चा बोलेन। डर लाग्यो। आईजी कोषराज पन्त साप 

      पनि भित्रै छिर्नु भएको थियो। सक्छौ भन्नुभयो, मैले सक्छु भनें। उहाँले तिमीसँग 

      हामी छौं अगाडि बढ्नु भन्नुभयो। 

      यसले झन् हौसला भयो। पासाङलाई पानी खुवाएपछि बेहोस भएछ। म आफैं बोल्न नसक्ने जस्तै भएँ। उत्तानो परेर पानी खाएछ। सकस भयो विचरालाई। अगाडि बढें। फेरि पानी खुवाएँ। होसमा आयो। आँखा बन्द गर्दा बेहोस हुन्थ्यो। मोटरसाइकल काटेपछि सानो अनुहार देखियो, घिस्रिएर आउन सक्छौ भनेर सोध्दा सामान्य चोट लागेको छ आउनसक्छु भन्यो। तर, आउन सकेन। म तीन फिट जति टाढा थिएँ। म आफैं घिस्रिँदै अगाडि गएँ। घोप्टो परेर अगाडि बढे। कुमको भागको सर्ट समाएर तान्दै घिसारें। घिस्रँदै नजिकै आएपछि मोटरसाइकल काटेको भागमा उसको काँध अड्कियो। फेरि पहिलाको अवस्थामा धकेलें। म आफैं पनि बोल्न पनि नसक्ने भएको थिएँ। बाहिरबाट एआईजी साप सक्छौ भनेर सोध्दै हुनुहुन्थ्यो। म सक्छु भन्थें। फेरि घिस्रिएर बाइकको पछिल्लो भाग काटें। उसलाई उत्तानो पारेर फेरि तानें। उसले मुखबाट फिँज फ्याँकेको देखें। मेरो खुट्टा अरुले ताने र मैले उसलाई तानें। बाहिर निस्कँदा ऊ रुन थालेपछि मलाई नराम्रो लाग्यो। संगठनका सबै सिनियर सरहरूले अँगालो हाल्नुभयो। मेरो जीउ भिजेको थियो। आइजी साप अँगालो हाल्न आउनुभयो। सबै दु:ख बिर्सें। स्याबास भन्दै उचालेर 'हिरो'भन्दा मलाई गौरव अनुभव भयो। 

      मेरो टिमले ऋषिभन्दा पहिले अर्का एकलाई पनि जीवित निकालेको थियो। 

       


      (मकर श्रेष्ठसँग कुराकानीमा आधारित)
    • http://www.ekantipur.com/kantipur/2072/1/18/full-story/345717.html

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    महाभूकम्प-२०७२»

    क्षतिको प्राविधिक पक्ष

    वैशाख १८ - 
    नेपाल भूकम्पीय जोखिमको हिसाबले अति संवेदनशील छ भन्ने कुरामा भूगर्भविदहरूले वर्षौँदेखि सजग गराउँदै आएका थिए र यसका प्रमाणहरू पनि प्रशस्तै थिए। तर यसलाई सरकारी, गैरसरकारी र जनस्तरबाट पनि पर्याप्त ध्यान दिन सकिएन। यसमा जब समस्या पर्छ, अनिमात्र सोच्ने हाम्रो परिपाटी जिम्मेवार छ। यसले हाम्रा कमजोरीहरूलाई प्रस्ट्याइदिएको छ र भविष्यका लागि पाठ पनि दिएको छ। 

    जे होस्, अहिले नेपालमा महाभूकम्पले राष्ट्रिय विपत्ति ल्याएको र त्यसपछिका पराकम्पहरूले पनि त्रासदी फैलाइरहेको अवस्था छ। ठूलठूला महाभूकम्पपछि ससाना धक्काहरू आउनु सामान्य प्रक्रिया नै भएकाले यसलाई सामान्य रूपमा नै लिई विचलित हुन नहुने कुरामा विश्वास गर्नु जरुरी छ। तर हामीले सर्वसाधारणलाई यसबारे विश्वास दिलाउनसकेका छैनौँ। यसलाई बुझ्न भूकम्प जाने कारण बुझ्नु जरुरी हुन्छ। 
    यो साधारणतया पृथ्वीको चलायमान बाहिरी आवरण (लिथोस्फेयर) को अवस्था, शक्ति सञ्चय, लिथोस्फेयरको चल्ने दिशा र जमिनको अवस्थितिले निर्धारण गर्छ। दक्षिणतिरको इन्डियन प्लेट उत्तरतिरको टिबेटन प्लेटसँग जुध्ने क्रम जारी रहेको तर इन्डियन प्लेट सानो भएकाले टिबेटन प्लेटलाई घचेट्न नसक्ने भएकाले यो मुनितिर धसिन खोज्छ। यो प्रक्रियालाई पनि ठूलो आकारको टिबेटन प्लेटले रोकिदिन्छ। 

    तर इन्डियन प्लेटलाई उत्तरतिर घचेट्ने बल निरन्तर लागिरहेको हुनाले इन्डियन प्लेटको भूभाग चेपुवामा पर्छ। तर दक्षिणतिरबाट इन्डियन प्लेटलाई निरन्तर रूपमा घचेट्ने शक्ति सञ्चित हुनथाल्छ र यस्तो सञ्चित शक्ति धेरै भएछि ठूलो आकारको टिबेटन प्लेटलाई धक्का दिई थोरै भए पनि धस्सिन जान्छ, त्यही बेला सञ्चित शक्ति विस्फोट भएर तरङ्गको रूपमा बाहिर निस्किन्छ र भूकम्प जान्छ।

    यस्तो सञ्चित शक्ति जति धेरै भयो, त्यति नै ठूलो भूकम्प जान सक्छ। पहिलो कम्पनमै ठूलो भूकम्प गएमा सञ्चित शक्तिको धेरै भाग सोही भूकम्प ल्याउनमा खर्च हुने भएकाले त्यसपछि निस्कने कम्पनहरू, जसलाई पराकम्प (आफ्टर सक) भनिन्छ, निश्चित रूपमा सानो हुने गर्छन्। अहिलेको महाभूकम्पमा पनि सुरुकै कम्पन ७ दसमलब ६ रेक्टर स्केलको भएकाले त्यसपछि आउने कम्पनहरू त्योभन्दा सानो नै हुने निश्चित छ, जुन ठूलो भूकम्पको पराकम्पनको रूपमा आउने हो। 

    यसलाई सजिलोसँग बुझ्दा जमिनको ठूलो भागमा उथलपुथल हुँदा जमिन सन्तुलित भई बस्न लाग्ने समय र मिलेर बस्ने क्रममा बाँची बसेका बारिएको शक्ति निस्किने क्रमको रूपमा लिनुपर्छ। जस्तो, पानी भरिएको बेलुनमा सियोले घोचेर सानो प्वाल बनाइयो भने त्यो प्वालबाट धेरै फोर्सले पानी निस्किन्छ, तर त्यही बेलुनमा अर्को पनि प्वाल बनाइयो भने उक्त प्वालबाट निस्किने पानीको फोर्स कम हुन्छ, त्यसरी नै एउटा ठूलो भुइँचालो गैसकेपछि आउने अन्य भुइँचालो अथवा पराकम्पहरू निश्चित रूपमा त्योभन्दा साना नै हुन्छन्। त्यसैले नेपालमा अहिले नै अर्को ठूलो भूकम्प जाने आधार देखिँदैन।

    अहिलेको महाभूकम्पले अहिलेसम्म हामिले गरेका भूकम्प जोखिम न्यूनीकरणका काम र हाम्रो बुझाइलाई पनि चुनौती दिएको छ। जस्तो कि काठमाडौंलाई भूकम्पीय जोखिमको हिसाबले संसारकै १ नम्बरको सहरमा राख्ने क्रममा र अन्य बेला पनि असनका घरहरूको उदाहरण दिएर यति घर भत्किने, यति मान्छे मर्नेजस्ता आँकडाहरू प्रस्तुत गर्ने चलन थियो, जसको यो महाभूकम्पले खण्डन गरिदिएको छ। यसले नीति निर्माता र सरोकारवालाहरूलाई घरको बाहिरी संरचनामात्र हेरेर नपुग्ने रहेछ, जमिनमुनि कस्तो चट्टान वा माटो छ (भूगर्भ), त्यसलाई अझै बढी ध्यान दिनुपर्छ भन्ने कुरालाई जनाएको छ। असनका पुराना घरहरूमा खासै क्षति नहुनु, कति घरहरू जमिनमुनि गाडिनु अनि कति घरहरू ढल्केर बस्नु यसका उदाहरण हुन्। हाम्रा अहिलेसम्मका काम जमिनमुनिको अवस्था बुझ्ने कुरामा कत्ति पनि ध्यान नदिई सतही कुरामा मात्र सीमित हुनु विडम्बना हो। भूकम्प प्रतिरोधात्मक घर बनाउने, भूकम्प आउँदा टेबुलमुनि लुक्ने जस्ता कार्यक्रमहरू नराम्रा होइनन्, तर जति भूकम्प प्रतिरोधात्मक घर बनाए पनि घर बस्ने आधार नै कमजोर धरातलमा भए के त्यो घर बँच्ला र अनि घर नै जमिनमा गडेपछि टेबुलमुनि बस्दैमा हामी बाँचिएला र भन्ने प्रश्न अहम् छ, अहिले। त्यसैले जमिन मुनिको ढुंगामाटोको संरचनाको यकिन गरी मापदण्ड किटान गरी बस्ती विकास गर्न जरुरी छ। 

    अहिले धेरैको मनमा आएको अर्को प्रश्न किन घरहरू एकै प्रकारले भत्केका छैनन्, अनि किन एकै ठाउँका घरहरू पनि छानीछानी भत्किएका छन्, देख्दा बलिया लाग्ने घरहरू भत्किएका छन् भने कमजोर लाग्ने घरहरू पनि बचेका छन् भन्ने छ। 

    यसको एउटा प्रमुख कारण के हुनसक्छ भने काठमाडौंको भूगर्भ नै अति फरक—फरक किसिमको (हेटेरोजिनस) छ। नजिक नजिकमा नै फरक—फरक किसिमका माटो छन्, एउटै भूकम्पले पनि यी फरक—फरक माटोमा फरक रेस्पोन्स देखाउन सक्छ। जस्तो कि जमिनमुनि बालुवा—माटो छ र त्योभन्दा पनि मुनि कालिमाटीजस्तो माटो छ भने भूकम्पले हल्लाउँदा बालुवाभित्र रहेको पानीले बालुवालाई घुलित बनाइदिन सक्छ र त्यस अवस्थामा बालुवाले आफ्नो गुण छाडी पानीको गुण देखाउन थाल्छ। 

    यसले गर्दा घर अथवा अन्य संरचनाको भार थाम्न सक्दैन र घरहरू ढल्किने र ढल्ने हुनसक्छन्। त्यस्तै एउटै घरको जग रहेको जमिनमुनि फरक—फरक किसिमको माटो भएमा फरक—फरक मात्रामा जमिन दबी (डिफरेन्सियल सेटल्मेन्ट) घर ढल्किन सक्छ। 

    जमिन नदबी घर पुरै भत्किएको छ भने त्यसमा घरको आफ्नै संरचना खराब इन्जिनियरिङ डिजाइनको हुनु वा खराब किसिमको निर्माण सामग्रीले गर्दा भएको हुनसक्छ। यदि घरहरू गडेका छन् भने त्यहाँको जमिन नै दबेको वा जमिनमुनिको पानीको बहाव वा प्रवाहमा भूकम्पले फरक पारिदिएको कारणले हुनसक्छ। 

    सत्य कुरा के हो भने हाम्रा घरहरू बनाउँदा भूगर्भको राम्रो ज्ञान हुनु र उपयुक्त ठाउँमा मात्र घरहरू बनाई बस्ती बसाउनु जरुरी छ। गाउँघरका हाम्रा घरहरू भत्किनुमा चाहिँ धेरैजसो बाहिरी संरचना नै कमजोर भएर अथवा पहाडको भिरालो भागमा घरहरू रहेको कारण प्रमुख हुनसक्छ। काठमाडौंमा नै पनि भूगर्भ उस्तै भएको तर कुनै थुम्कोको टुप्पामा रहेको घरसँग थुम्कोको फेदमा रहेको घरको तुलना गर्ने हो भने थुम्कोको टुप्पामा रहेको घरमा बढी क्षति पुग्नु स्वाभाविक हुन्छ। 

    किनकि साधारणतया पहाडको टुप्पोमा भूकम्पका छालहरू अतिरञ्जित हुन्छन् र भूकम्पको शक्ति बढ्न जान्छ। जस्तो कि १ मिटर प्रतिसेकेन्ड वर्गको छाल प्रतिकूल पहाडको टुप्पोमा पुग्दा १७ मिटर प्रतिसेकन्ड वर्गसम्म पुगेको पाइयो। त्यस्तै भूकम्पबाट बढी क्षति भएको अर्को कारण भनेको हाम्रा संरचनाहरूको बढी हल्लिन सक्ने गति (नेचुरल फ्रिक्वेन्सी) र भूकम्पको छालको गति मिल्न जानु पनि हो। 

    यसलाई सजिलोसँग बुझ्दा प्रत्येक वस्तुलाई हल्लाउने त्यस्तो गति जुन गतिमा हल्लाउँदा त्यो वस्तु थोरै बल लगाए पनि बेस्सरी हल्लिन सक्छ। अग्ला घरहरूको नेचुरल फ्रिक्वेन्सी कम र होचा घरहरूको नेचुरल फ्रिक्वेन्सी बढी हुने गर्छ। यी यस्ता थाहा भएका कुरालाई पनि व्यवहारमा लागु गर्न नसक्नु हाम्रो कमजोरी हो। हुन त दु:खको यो घडीमा अहिलेको अहम् मुद्दा भनेको भग्नावशेषमा परेका जीवितै भएकाहरूलाई उद्दार गर्नु, पुरिएकाहरूको खोजी गरी तथ्य निकाल्नु, घाइतेहरूको औषधी—उपचार गर्नु, विस्थापितहरूको पुनर्बास गर्नु, राहत दिनु र त्यसपछि पुनर्निर्माण गर्नु अहिलेको प्रमुख आवश्यकता हो। तर भविष्यमा यस्तो क्षति हुन नदिन गर्नुपर्ने कामका बारेमा जानी त्यसलाई सुधार गर्नु पनि उत्तिकै अपरिहार्य कुरा हो।


    ढकाल भूगर्भविद् हुन्।

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    महाभूकम्प-२०७२»

    घरहरूलाई 'रेड', 'ग्रिन'र 'एल्लो'वर्गीकरण गरिने

    • कस्ता घरमा बस्ने ?
    • काठमाडौ, वैशाख १८ - 
      भूकम्पले असर गरेका कस्ता घरमा बस्ने? कुन घरको अवस्था कस्तो छ? यसको यकिन नहुँदा सर्वसाधारण अझै घर फर्किन सकेका छैनन्। प्राविधिकहरूको सल्लाहबिना घर छिर्दा जोखिम हुन सक्छ। त्यसैले घरको जोखिमको मूल्यांकन नेपाल इन्जिनियर्स पेसाकर्मी संघले गरिदिने भएको छ। 

      भूकम्पले क्षति पुर्‍याएका घरहरूलाई 'रेड', 'एल्लो'र 'ग्रिन'गरी तीन श्रेणीमा वर्गीकरण गरिने संघका अध्यक्ष इन्जिनियर माधव कोइरालाले जानकारी दिए।

      उनका अनुसार बस्न नमिल्ने घरमा 'रेड', मर्मतपछि बस्न मिल्नेलाई 'एल्लो'र बिनामर्मत बस्न सकिनेलाई 'ग्रिन'चिह्न लगाइनेछ। 'पहिलो चरणमा सबैभन्दा बढी क्षतिग्रस्त स्थानमा टोली परिचालित हुनेछ,'कोइरालाले कान्तिपुरसँग भने।

      प्राविधिक परामर्शको तयारीका लागि संघले शनिबार इन्जिनियरहरूको भेला बेलाएको छ। उक्त भेलामा कसरी काम सञ्चालन गर्ने भन्नेबारे इन्जिनियरहरूलाई निर्देशन दिने र टोली निर्धारण गर्ने कोइरालाले जानकारी दिए।

      महानगरपालिका र भवन विभागका अधिकारीहरू समेतलाई जानकारी दिएर इन्जिनियरहरूले प्राविधिक सहयोग गर्न लागेका हो। प्रारम्भिक चरणमा तीन दिनसम्म परीक्षण गर्ने र त्यस क्रममा भएको कामका आधारमा सरकारी निकायहरूलाई जानकारी गराई थप परीक्षणमा खटिने उनले उल्लेख गरे। 'पहिलो चरणको कामपछि कस्ता समस्या देखिन्छन्, त्यसका आधारमा सरकारलाई सुझाव दिन्छांै,'अध्यक्ष कोइरालाले भने, 'सरकारी निकायहरूबाट थप सहयोग भए मुलुकभर सबैतिर हामी टोली पठाउन सक्छांै।'संघले झन्डै पाँच सयजनालाई परिचालन गर्ने तयारी गरेको छ।

      सरकारी निकायमा प्राविधिकहरू अन्य काममा बढी व्यस्त भएकाले उनीहरूले तत्काल वर्गीकरण गरिदिने अवस्था नभएकाले इन्जिनियहरूले आफंै पहल गर्न लागेका हुन्। इन्जिनियहरूहरू आधिकारिक हुन कि होइनन् भन्ने पहिचान सर्वसाधारणले इन्जिनियरिड काउन्सिलले दिएको नम्बरबाट गर्न सक्छन्। 

      हरेक इन्जिनियरको इन्जिनियर काउन्सिलले दिएको नम्बर हुन्छन्। त्यो नम्बर नै उनीहरूको आधिकारिक हुन् भन्ने पहिचान दिलाउँछ। त्यसैले सर्वसाधारणले प्राविधिक सहयोग लिन उक्त नम्बरलाई आधार मान्न कोइरालाले आग्रह गरेका छन्।


      अब भवन निर्माणको नयाँ नीति

      उद्धार र राहतको काम सकिएपछि सरकारले भवन निर्माणको नयाँ नीति ल्याउने भएको छ। सहरी क्षेत्रमा पक्का र ठुल्ठूला भवनसमेत क्षति भएपछि पुरानो नीतिमा परिमार्जन गर्न लागिएको हो। 'घर निर्माणको नीतिमा पुनर्विचार गर्नुपर्नेछ, यसका लागि राहत र उद्धारका काम सकिएपछि सरकारले काम अघि बढाउँछ,'सहरी विकासमन्त्री नारायण खड्काले कान्तिपुरसँग भने। भूकम्पीय जोखिमको मूल्यांकन नगरी घर बनाउने प्रवृत्तिले पनि अहिले धेरै क्षति भएको छ। भूगोलको बनोट अनुसार कहाँ, कति तलासम्म बनाउन पाइने भन्ने स्पष्ट नीति नहँुदा नयाँ बनेका धेरै घरमा क्षति पुगेको छ।
    • http://www.ekantipur.com/kantipur/2072/1/18/full-story/345721.html

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    महाभूकम्प-२०७२»

    थोत्रा भए दरबारहरू

    • सिंहदरबार, बहादुर भवन, केशरमहल, लाल दरबार, नारायणहिटी, शीतल निवाससहित राणाकालमा बनेका अधिकांश 
    • 'दरबार'मा क्षति भएको छ। कुनै बेलाका सान झल्काउने दरबार अब काल बनेर बसेका छन्।


    यी दुई उदाहरण मात्र हुन्, मुलुकको प्रमुख केन्द्र र त्यहाँ बसेका व्यक्ति समेत भूकम्प आउँदा ज्यान जोगाउन भाग्नुपर्ने अवस्थाको। सिंहदरबार र सरकारका अन्य प्रशासनिक केन्द्रसँगै सार्वजनिक स्थान बनेका सबै राणाकालीन दरबार भूकम्पपछि क्षतिग्रस्त भएका छन्। 

    प्रधानमन्त्रीदेखि राष्ट्रिय योजना आयोगका पदाधिकारी र मुख्य सचिव बस्ने सिंहदरबारको मुख्य भवन ठाउँ–ठाउँमा चर्केको छ। सन् १९०३ मा चन्द्रशमशेर राणाले बनाएको यो घरमा १९७३ मा आगोले ठूलो क्षति पुगेको थियो। पछिल्लो भूकम्पले सिंहदरबार भित्रका अन्य घर सँंगै सबैतर्फको बाहिरी पर्खाल ठाउँ–ठाउँमा क्षतिग्रस्त भएको छ।

    चारैतर्फ भवन र बीचमा खाली स्थान रहेको सिंहदरबारको मुख्य भवन जोडिएका ठाउँमा टुप्पाबाट इँटा झरेका छन्। ंशुक्रबार दिउँसो मुख्य भवन छिर्दा प्रवेशमा कसैको रोकटोक वा सोधखोज थिएन। भुइँ तलाका केही कोठामा मात्र कर्मचारी देखिए। पहिलो तलादेखि नै भित्ता चर्केको थियो। सिँढीबाट माथितर्फ जाँदा हरेक तलाको अवस्था 

    उस्तै देखिए। सबैभन्दा 

    माथि रहेका हलदेखि योजना आयोगका पदाधिकारी बस्ने कोठासम्म पुग्दा क्षति सबैतिर भएको देखिन्छ। मुख्य भवनको दाहिने तर्फको दुईतले सानो भवनमा समेत क्षति पुगेको छ। 

    नजिकै रहेको अर्थ मन्त्रालयको हालत उस्तै छ। मन्त्रालयको देब्रे तर्फ रहेको सिँढी पुरै उप्किएको छ। भवनको डिपिसिसँग गारो छुट्टिन लागेको जस्तो देखिन्छ। भवनभित्र पहिलो तलामा भित्ता चर्केको छ। अर्कोतर्फ रहेको तीन वर्ष मात्रै पुरानो परराष्ट्र मन्त्रालयको भवन पनि बीचबाट चर्किएको छ। 

    'शान्ति मन्त्रालयमा पनि क्षति पुगेको रैछ,'पुरानो प्रतिनिधिसभा भवन नजिकै भेटिएका एक प्रहरीले भने। पुरानो संसद् भवनको दाहिने र देब्रे तर्फको भित्ता पुरै चर्किएको छ। देब्रे तर्फको भाग खस्नै लागेजस्तो देखिन्छ। 'दुवैतर्फ चर्केको छ तर भित्र खासै क्षति भएको जस्तो देखिँदैन'भवन अगाडि रहेकी सहायक मर्यादापालक महिलाले भनिन्। छेवैमा रहेको व्यवस्थापिका संसद् सचिवालयको नयाँ भवनमा पनि केही क्षति पुगेको छ। भवनको बीचमा तलदेखि माथिसम्म चर्केको छ। देब्रेतर्फको सिँढी रहेको ठाउँ पनि भवनबाट छुट्टिन लागेको छ। 

    निर्वाचन आयोग र उपराष्ट्रपति कार्यालय रहेको जमल कान्तिपथ स्थित बहादुर भवनमा पनि क्षति पुगेको छ। सन १८८९ मा मुलुककै पहिलो होटलका रूपमा यसलाई निर्माण गरिएको थियो। 'आज इन्जिनियरहरू आएर हेर्नुभएको छ,'निर्वाचन आयोगका कार्यालय सहायक भायानाथ घिमिरेले भने, 'केही कोठामा नपस्नु भनेका छन्।'उनले भित्र छिराएर क्षतिग्रस्त भएका केही कोठा देखाए। 'एक जना सहसचिवले कार्यालयमा आवश्यक कागजात माग्न पठाउनुभएको थियो,'उनले भने, 'भूकम्प आउँदा म त्यही लिन भित्र छिरेको थिएँ।'पहिलो तलामै रहेका उनी भाग्न खोज्दा भित्ताबाट इँटा खस्न थालेपछि रोकिएका थिए। 'अहिले भित्रै बसिरहेको छु'उनले भने। भवनको बरन्डा भत्किएको र विभिन्न कोठामा भित्ता चर्केको उनले बताए। 

    पहिला लाल दरबार भनेर चिनिने याक एन्ड यती होटलको पुरानो भवनमा समेत क्षति पुगेको छ। भवन बाहिरकै बाटोको सतह एक ठाउँमा दबेको छ। क्यासिनो र कार्यक्रम गर्ने हलहरूको रहेको 

    भवन बीचबाट चर्केको छ। 'भित्र पनि सतह तलमाथि भएको छ'बाहिरबाट भवन नियालिरहेका 

    एक क्यासिनो कर्मचारीले सुनाए, 'दुईपटक गरेर बनाएको र जोडिएकाले भवनको बीचमा चिरा परेको हो।'वीरमशेरले सन् १८९० मा यसलाई बनाएका थिए। 

    सम्पत्ति शुद्धीकरण अनुसन्धान विभाग र केशर पुस्तकालय रहेको केशरमहल पनि क्षतिग्रस्त भएको छ। १८९५ मा बनेको यो भवनको पहिलो तलमा भित्ता चर्किएर उप्किएका पाप्रा भुइँभर झरेका छन्। सिंहदरबारको मुख्य भवन जस्तै गरी चौरैतर्फ जोडिएका भवन र बीचमा केही स्थान केशरमहलमा खाली छ। 

    खाली स्थानबाटै चारैतर्फ भवन हेर्दा सबैमा क्षति देखिन्छ। कार्यालयका कम्प्युटर बाहिर टेन्टभित्र राखेर काम भइरहेको छ। संग्रहालय बनेको नारायणहिटी दरबारको पनि ठाउँ–ठाउँमा पर्खाल भत्किएका छन्। मुख्य गेटको दाहिनेतर्फ रहेको पुरानो गेट माथिबाट खसेको छ। दरबारभित्र कार्यरत एक सैनिक अधिकृतका अनुसार विभिन्न भवन भत्किएका छन्। 'मुख्य संरचना पनि चर्केको 

    छ,'ती अधिकृतले भने। नारायणहिटीभित्रै भूकम्प जाँदा केही सैनिकको मृत्यु समेत भएको बताइन्छ। तर यसको पुष्टि भएको छैन। नारायणहिटी दरबार १८४७ मा जंगबहादुरका भाइ बद्रीले बनाएका हुन्। पछि शाहवंशले विभिन्न संरचना थपेको थियो। 

    जुद्धशमशेरले १९६४ मा बनाएको भवनमा बसेको शंकर होटलमा पनि क्षति पुगेको छ। होटलले आफ्ना सबै ग्राहक सुरक्षित रहेको र अन्यत्र सार्ने काम भइरहेको जानकारी वेबसाइटमा राखेको छ। पछिका बुकिङ पनि रद्द गरेर ग्राहकलाई रकम फिर्ता गर्ने सूचना जारी गरेको छ। सेनाको मुख्यालयको संरचना पनि क्षतिग्रस्त भएर पाल टाँगेर काम भइरहेको छ। भद्रकालीस्थित मुख्यालयमा रहेको सेनापतिको कार्यालयदेखि अन्य विभाग तथा इकाई बाहिर राखिएको छ। सेनाकै भैरवनाथ गणमा पनि भूकम्पले क्षति पुगेको छ। 

    Fascist RSS may not hijack our Baba Saheb

    Make Money Guillotines Hungry for every drop of Indian blood,every piece of Indian bones!

    Just remember the last days of the first Reforms god as Arun Shourie rips into the trio running the government: Narendra Modi, Arun Jaitley and Amit Shah

    Kolkata made History as We marched with Indian National Flag on the nose of TMC muscle Power and pledged to launch freedom struggle once again uniting all patriotic Indian Citizens,making everyone of them the movement of the bonded labour turned ninety nine percent Indian Population imprisoned in the gas chambers of this US plus Israel periphery of emerging market governed by the fascism aligned with zionism.



    Palash Biswas

    Kolkata made a history on May day as Ambedkarite activists were the only representatives of working class who marched on Red Road neglecting the captured geography of absolute ruler Mamata Banerjee who succeeded to wipe out RED even on May Day.Now the REd should stand with the majority deprived HAVE Nots if it intends to come back to the lost ground.


    We marched with Indian National Flag on the nose of TMC muscle Power and pledged to launch freedom struggle once again uniting all patriotic Indian Citizens,making everyone of them the movement of the bonded labour turned ninety nine percent Indian Population imprisoned in the gas chambers of this US plus Israel periphery of emerging market governed by the fascism aligned with zionism.


    Now,the majority seems to be prepared to end the identity politics and the politics of corporate funding and corporate lobbying.


    Since we have been reduced to the status of biometric cloned digital robotic faceless bonded subject under a super militarised atomic hegemonial class rule with Hindu Imperialist agenda,we opted for the National flag as the weapon to stand united rock solid against this hegemony of sedition,the SELL OFF GOLDEN BIRD Ethnic Cleansing horses and Bulls brigade of hungry money making guillotines which happen to be thirsty of every Indian drop of blood,every Indian piece of bones.


    We have no other weapon to stand united against this regime of mass destruction,regime of Salwa Judum Regime of AFSA,Regime of making India free of tribal people, non Hindus,Non Aryans ,entire working class including all agrarian classes,retailers and even Indian Business and Industry ,not to mention the employees!


    Baba Saheb Dr BR Ambedkar may not be hijacked,RSS should note this point as Kolkata procession is going to trade the entire geography of this geopolitics irrespective of identity and political borders and HAVE NOTS Have decided to reject the religious nationalism playing havoc all over the globe destroying Man,Environment and Nature,Civilization and humanity.


    We are inspired by the leader of Humanity DR.BR Ambedkar!


    Just remember the Policy Paralysis days of DR.Manmohan Singh.Just remember the intense international campaign to install him as the supreme God to make in an America plus Israel enveloped with Gujarat.


    Just remember!Manmohan phenomenon continued for full twenty three years since 1991 and ended with Global Zionist DISORDER of racial ethnic cleansing making a quite turnaround to opt for RSS Imperialist Hindutva governance of fascism to kill the Golden Bird that India still remains!


    Just one year and the agencies of mass destruction with an agenda of complete privatization,complete disinvestment, complete decontrol,complete deregulation,complete Tax Holiday for foreign capital,complete FDI Raj of thousands of thousands East India Companies, complete depopulation of indigenous demography and complete ethnic cleansing of working class enlarged with retailers,employees,farmers,small and medium Indian business communities and the whole lot of non Hindus,non Aryan,SC,ST,OBC and minorities are quite disillusioned with the Gujarati PPP genocide culture of governance!


    Thus,Former Union Minister of DISINVESTMENT Arun Shourie on Friday criticised the Narendra Modi-led government at the Centre over its economic policies, calling them directionless. "Government is more concerned about managing headlines than putting policies in place," Shourie said.


    Amusing it should sound as Arun Shourie  accused Modi, Union Finance Minister Arun Jaitley and Bharatiya Janata Party President Amit Shah of monopolising decision-making processes.


    Shourie said that government decisions were now centralised to the Prime Minister's Office, adding that they lacked "expertise and talent quotient".


    Shourie further stated that the government was alienating its allies through its plans for political expansion. However, he praised Modi for his handling of the India's foreign policy, saying that the Prime Minister had recognised the challenge posed to the country by China.


    RSS may not hijack our Baba Saheb but it loses no opportunity to accomplish its agenda of cent percent Hindutva not only in India but all over Indian subcontinent and RSS governance has been extended upto Nepal.


    RSS has launched an unprecedented monopolistic corporate kesaria mass destruction campaign of Hidnutva.As Arun Shourie confirms beyond doubt,we the people of South Asia should united as a singular unit of Humanity which had been led by DR.BR Ambedkar.


    The Ambedkar movement for annihilation of caste to make human society ,the society of peace,equality, justice and fraternity must be extended as an umbrella for human kind all over the globe for the sustenance of Man and Nature under monopolistic aggression of the Hindu Imperialism Zionist alliance of fascism and disorder.


    Mind you, a US panel tracking international religious freedom has, in its latest report on India, noted that religious minorities in the country were exposed to "derogatory" comments by leaders of the ruling BJP as well as "violent attacks and forced conversions by the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) and Vishwa Hindu Parishad (VHP)" since the Narendra Modigovernment took over last year.


    It has also slammed the "ghar wapsi" campaign and accused the "Hindu nationalist groups" of offering monetary inducements not only to Muslims and Christians to convert to Hinduism but also to Hindus who carry out such "forced" conversions.Times of India reported.

    The findings of the United States Commission on International Religious Freedom (USCIRF), largely based on the accounts of religious leaders of the minorities and non-government organisations in India, have led it to place India on its Tier 2 list of countries for the seventh year in a row.


    However, even as it reported on the alleged violation of rights of Christians and Muslims in India in 2014, the panel squeezed in a reference to Prime Minister Narendra Modi's February 17 statement (made after the period covered by the report) condemning attacks on churches and assuring protection to the minorities, describing it as a "positive development".

    Yet, what is certain to rile India, the panel juxtaposed Modi's February 17 assurance to Christians with the 2002 Gujarat riots, stating that the statement was notable given the "long-standing allegations that, as chief minister of Gujarat in 2002, Modi was complicit in anti-Muslim riots in that state" .

    The report recalls that the State department had, in the light of these allegations, revoked in 2005 a tourist visa granted to Modi, "under a provision in the Immigration and Nationality Act that makes any foreign government official who was responsible for or directly carried out, at any time, particularly severe violations of religious freedom" ineligible for a US visa. "Prime Minister Modi remains the only person known to have been denied a visa based on this provision," it emphasized.


    Noting that incidents of "religiously-motivated and communal violence reportedly have increased for three consecutive years," the USCIRF report stated that Andhra Pradesh, Uttar Pradesh, Bihar, Chattisgarh, Gujarat, Odisha, Karnataka, Madhya Pradesh, Maharashtra, and Rajasthan "tend to have the greatest number of religiously-motivated attacks and communal violence incidents".

    "NGOs and religious leaders, including from the Muslim, Christian, and Sikh communities, attributed the initial increase to religiously-divisive campaigning in advance of the country's 2014 general election. Since the election, religious minority communities have been subject to derogatory comments by politicians linked to the ruling BJP and numerous violent attacks and forced conversions by Hindu nationalist groups, such as RSS and VHP," according to the findings of USCIRF on the status of religious freedom in India during the past year.


    "Based on these concerns, USCIRF again places India on its Tier 2 list of countries, where it has been since 2009," said the panel. Slamming the ghar wapsi campaign, the USCIRF report noted that Hindu nationalist groups were not only paying off Christians and Muslims to convert to Hinduism but also reportedly offering monetary incentives to Hindus to convert Christians and Muslims to Hinduism.


    "In December 2014, Hindu nationalist groups announced plans to forcibly reconvert at least 4,000 Christian families and 1,000 Muslim families to Hinduism in UP on Christmas Day as part of the so-called Ghar Wapsi program".


    "In advance of the program, the Hindu groups sought to raise money for their campaign, noting that it cost nearly Rs 2 lakh (nearly $3200) per Christian and Rs 5 lakh ($8,000) per Muslim". However, it added, domestic and international criticism led "Mohan Bhagwat, a RSS leader" to postpone the programme. The report also referred to the alleged mass ceremony held in Agra in December last year to forcibly reconvert hundreds of Muslims to Hinduism.

    Thus,Sharadindu Uddipan writes:

    Celebration of LABOR DAY

    1st May, KOLKATA:

    The activists of Ambedharite Movement made the LABOR DAY as historical day and offered their hearty respect to Dr. B.R. Ambedkar the 1st Indian Labor minister of British Rule (1942-1946) and the main architect of Indian Constitution. Hundreds of workers from different sectors jointly made a rally from Rani Rashmoni Road to the statue of Dr. B.R. Ambedkar at near Fort William. The workers from Bank of Baroda, UCO bank, Lawyers' Association, Amala Farm Campus and Conscious Bengal started a rally from Metro Channel. They have raised their voice against the brutal corporate attack launched by the Government of India. With the remembrance of International Labor Day originated by the workers of USA the activist focused on Dr. B.R.Ambedkar and his mega inclusive contribution for the people. Truly he is the FATHER OF MODERN INDIA.

    Here I am including some reforms done by Dr. BR. Ambedkar as Labor Minister of India during his time :

    He sworn as the Labor Member of the Viceroy's Executive Council in July 7, 1942.

    Reduction in Factory Working Hours (8 hours duty) :

    He settled 8 hours working time in place of 14 to 16 hours for workers in India. It was announced on the 7th session of Indian Labor Conference in New Delhi, November 27, 1942.

    Right to Trade Union.

    Mines Maternity Benefit Act,

    Women Labor welfare fund,

    Women and Child, Labor Protection Act,

    Maternity Benefit for women Labor, 5. Restoration of Ban on Employment of Women on Underground Work in Coal Mines,

    Indian Factory Act.

    National Employment Agency (Employment Exchange):

    Employees State Insurance (ESI):

    Dearness Allowance (DA) to Workers.

    Leave Benefit to Piece Workers.

    Revision of Scale of Pay for Employees.

    Coal and Mica Mines Provident Fund

    Labor Welfare Funds:

    Health Insurance Scheme.

    Provident Fund Act.

    Factory Amendment Act.

    Labor Disputes Act.

    Minimum wage.

    Really it is a great Day for the people of India to show their respect to the Greatest Indian Dr. B.R.Ambedkar.

    Jai Bhim Jai Bharat.

    'Celebration of LABOR DAY  1st May, KOLKATA:  The activists of Ambedharite Movement made the LABOR DAY as historical day and offered their hearty respect to Dr. B.R. Ambedkar the 1st Indian Labor minister of British Rule (1942-1946) and the main architect of Indian Constitution. Hundreds of workers from different sectors jointly made a rally from Rani Rashmoni Road to the statue of Dr. B.R. Ambedkar at near Fort William. The workers from Bank of Baroda, UCO bank, Lawyers' Association, Amala Farm Campus and Conscious Bengal started a rally from Metro Channel. They have raised their voice against the brutal corporate attack launched by the Government of India.'

    'Celebration of LABOR DAY  1st May, KOLKATA:  The activists of Ambedharite Movement made the LABOR DAY as historical day and offered their hearty respect to Dr. B.R. Ambedkar the 1st Indian Labor minister of British Rule (1942-1946) and the main architect of Indian Constitution. Hundreds of workers from different sectors jointly made a rally from Rani Rashmoni Road to the statue of Dr. B.R. Ambedkar at near Fort William. The workers from Bank of Baroda, UCO bank, Lawyers' Association, Amala Farm Campus and Conscious Bengal started a rally from Metro Channel. They have raised their voice against the brutal corporate attack launched by the Government of India.'

    Saradindu Uddipan's photo.

    Saradindu Uddipan's photo.



    नेपाल भूकम्पीय जोखिमको हिसाबले अति संवेदनशील छ भन्ने कुरामा भूगर्भविदहरूले वर्षौँदेखि सजग गराउँदै आएका थिए र यसका प्रमाणहरू पनि प्रशस्तै थिए। तर यसलाई सरकारी, गैरसरकारी र जनस्तरबाट पनि पर्याप्त ध्यान दिन सकिएन। यसमा जब समस्या पर्छ, अनिमात्र सोच्ने हाम्रो परिपाटी जिम्मेवार छ। यसले हाम्रा कमजोरीहरूलाई प्रस्ट्याइदिएको छ र भविष्यका लागि पाठ पनि दिएको छ।


    नेपालमा वैसाक १२ गते शनिवार दिउंसो ११:५६ वजे ७.९ रिक्टर स्केलको अत्यन्त शक्तिशाली एवं प्रचण्ड-विनाशकारी महा-भूकम्प आयो। तत्पश्चात अर्को दिन ६.९ रिक्टर स्केल लगाएत हिजो सम्म ठूला र साना गरी भूकम्पका सैकडौं झटकाहरू लगातार आई रहे। यो वि. स. १९९० पश्चातको नेपाल र नेपाली जनतामाथि परेको सवै भन्दा निर्मम,  ठूलो दुखद र भयङ्कर त्रासदी हो। त्यसवाट अहिले यो स्ट्याटस् लेख्दा सम्ममा सम्पूर्ण नेपाल भरिमा करीव ७,००० मानिसको मृत्यू भैसकेको र १४,००० भन्दा बढी घाईते भएको खवर प्राप्त भएको छ।


    Meanwhile,the death toll due to the earthquake which struck Nepal on April 25 reached 6,250, the country's government said on Friday. Over 14,350 people had been injured due to the quake, the government said. Local officials stated that many of the dead could be migrant workers from India. Up to 1000 European citizens were also unaccounted for around popular trekking routes in the country, a delegation of the European Union claimed.


    However, the EU's Ambassador to Nepal stated that it did not mean that they were all dead.


    "They could have left the country without telling anyone before the earthquake struck," said Rensje Teerink.


    Meanwhile, rescuers are still struggling to clear debris and search for survivors in various parts of the country. The country's government said that it would give $1,000 each to the families of those killed and an additional $400 for funeral costs.




    মে দিবসে লাল পতাকা কোথায়? বামপন্থী দলেরা কি মে দিবস ছেড়ে দিল না কি? কোথায় হারিয়ে গেল সেই গান, বাইরে এখন হাজার হাজার লাল পতাকা, বাইরে এখন শিকল ভাঙ্গার ভীষণ পণ ?????



    মে দিবসে লাল পতাকা কোথায়?

    বামপন্থী দলেরা কি মে দিবস ছেড়ে দিল না কি?

    কোথায় হারিয়ে গেল সেই গান,

    বাইরে এখন হাজার হাজার লাল পতাকা,

    বাইরে এখন শিকল ভাঙ্গার ভীষণ পণ ?????

    সংগ্রামী অভিনন্দন জানাই আম্বেদকরবাদী কর্মী বৃন্দদের যারা কোলকাতায় এক নতুন ইতিহাস স্থাপন করলেন। অভিনন্দন জানাই সেই সব শ্রমিক, কৃষক, ব্যবহারজীবি, কর্মচারী সাধারণ মানুষকে যারা দেশ বিক্রি করার চক্রান্তের বিরুদ্ধে জাতীয় পতাকা নিয়ে এক সার্বিক ভাগিদারী আন্দোলনের সূচনা করলেন।

    জয় ভীম, জয় ভারত।














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    BHUMI ADHIKAR ANDOLAN

    Movement for Land Rights

    PRESS RELEASE


    Rally Against Land Ordinance on 5th of May at Sansad Marg

    by Bhumi Adhikar Andolan

     

    Friends,

     

    The collective of people's movements and organizations who organized the mass rally on 24th February at Parliament Street against the Land Acquisition Ordinance of the NDA government have emerged as the national platform in the name of "Bhumi Adhikar Andolan" working all over the country to advance the struggle of the farmers, workers and the larger public against the draconian Land Acquisition Ordinance 2015.

     

    Bhumi Adhikar Andolan demands the withdrawal the anti-farmer and anti-people ordinance and demands a change in the government policy of loot of land and natural resources through unconstitutional ways.  Bhumi Adhikar Adnolan demands the recognition of the rights of people over natural resources and vowes to intensify campaign for land rights of farmers, landless groups and adivasi all over the country. The campaign also demands recognition of the rights of the workers of the country, when the NDA Government promoted 'Make In India campaign' attempts to promote cheap labour without respecting the dignity and value of labour.

     

    Thousands of representatives from various farmer organizations, trade unions, women organizations, youth organizations, including urban poor, fish workers and tribals will be a part of the rally to be held on 5th of May, 10 am at Sansad Marg, Delhi. The Modi Sarkar, which is favoring the interests of the corporates at the cost of livelihood of thousands and impacting the most marginalized section severely, is leaving no stone unturned to bring the land ordinance. Land acquisition is being carried out at full speed in various parts of the country and in many places the disagreement expressed by people is being brutally suppressed. The tax exemptions offered to corporates in the 2015-16 budget, the land ordinance and a series of amendments which are expected in other crucial acts like those relating to forests and coasts are bound to strike the lives and livelihoods of lakhs of people in this country and leave them with no choice but to become migrants laborers and lead a life of extreme poverty, vulnerability and uncertainty.   The most glaring example is the firing and lathi charge that took place in Kanhar dam protest against illegal land acquisition on 14th and 18th April in District Sonbhadra, UP. 

     

    In a press conference held on 2nd of May at IWPC, Delhi the activists associated with the movement for land rights appealed to all the pro-people, progressive and secular forces to join hands for "Bhumi Adhikar Sangharsh Rally" on 5th May at Parliament street to protest against the anti-people move of the NDA Government of bringing ordinances on the sensitive issue of land without any consultation or regard to farmers-workers, agriculture and nature of this country. The press conference was addressed by Hannan Mollah from the All India Kisan Sabha (36 Canning Lane), Atul Anjan from the All India Kisan Sabha (Ajoy Bhawan),Satyavan from the All India Krishak Khet Mazdoor Union, Roma from the All India Union for Forest Working People, and Bhupinder Singh Rawat from NAPM.

     

     

    National Alliance for People's Movements (NAPM), All India Union of Forest Working People (AIUFWP), All India Kisan Sabha (Ajay Bhawan), All India Kisan Sabha (Cunning Lane), Akhil Bhartiya Krishak Khet Mazdoor Sangathan, Lok Sangharsh Morcha, Yuva Kranti, Jan Sangharsh Samanvaya Samiti, Chhatisgarh Bachao Aandolan, Kisan Sangharsh Samiti, Sanyukt Kisan Sangharsh Samilti, INSAF, Delhi Solidarity Group, Kisan Manch, Bhartiya Kisan Union

    Contact: 9958797409, 9810423296, 9818905316, 9911955109



    भूमि अधिकार आंदोलन

    ज़मीन अधिकार संघर्ष आंदोलन

     

    मई 2015 को संसद मार्ग पर भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ हो रही महारैली

     

    प्रेस विज्ञप्ति

     

     

    साथियों

     

    भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ 24 फरवरी 2015 को संसद मार्ग  पे महा-धरना और विरोध प्रदर्शन ने सरकार को 30  दिसंबर 2015 को लाये प्रथम भूमि अधिग्रहण अध्यादेश में परिवर्तन करने पर मजबूर कर दिया था।  इसमें जुड़े देश के अनेक जन - संगठनजन - आंदोलनकिसान-मज़दूर संगठन और देश के अनेक बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों ने एक साथ आकर भूमि अधिकार आंदोलन के बैनर से लगातार केंद्र के NDA सरकार द्वारा पारित भूमि अधिग्रहण अध्यादेश की तीखी आलोचना की है।  इस अध्यादेश को बिल की तरह लाकरफिर से अध्यादेश के रूप में पारित करने के बाद देश के तमाम विपक्षी पार्टियों ने भी इस बिल पर सरकार का साथ नहीं दिया है और इस भूमि अधिग्रहण बिल 2015 को वापस लेने की मांग की है। 

     

    भूमि अधिकार आंदोलन इस जनता विरोधी और किसान विरोधी बिल को तुरंत वापस लेने की मांग करता है।  साथ ही किसान-मज़दूरों के ज़मीन को लगातार गैर-संवैधानिक ढंग से देश भर में लूटने की नीति को बदलने की माँग करता है।  भूमि अधिकार आंदोलन लोगों के अधिकारों को छीननाउनके रहने-खाने के स्रोत को जबरन लेकर कॉर्पोरेट हितो के लिए कानून का गलत इस्तेमाल करने की सरकारी नीति का भी विरोध करती है और देश के गरीब और मज़दूर वर्ग के लोगों को हितो में भूमि-सुधार और जल-जंगल और ज़मीन पर लोगों के अधिकारों को पहचानने की मांग करती है।  'मेक - इन - इंडिया ' के नाम पर देश के लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करने के केंद्र के NDA सरकार के प्रयास की समीक्षा करने की मांग भी ये मंच करता है।  

     

    देश के किसान संगठन,  ट्रेड यूनियन महिला अधिकार आंदोलन युवा आंदोलन जिसमे शहरी गरीब मच्छी - मज़दूर और आदिवासी आंदोलनों के हज़ारों प्रतिनिधि मई 2015को सुबह 10 बजे संसद मार्ग पहुंचे रहे हैं। मोदी सरकार देश में लाखों लोगों के जीवन यापन को खतरे में डालकर कॉर्पोरेट हितो का ध्यान रखने के लिए अध्यादेश को लाने में कोई कसर  नहीं छोड़ रही।  देश के कई हिस्सों में जनता के विरोध को हिंसा से दबाने की कोशिश लगातार चल रही है। मार्च में पेश किये बजट और भूमि अधिग्रहण अध्यादेश और तमाम अन्य अध्यादेश के ज़रिये जंगल और समुद्री क्षेत्र में रह रहे लाखों लोगों की ज़िन्दगी पर  निश्चित ही बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगाजिससे उन्हें अपने घरों को छोड़ कर प्रवासी बनना पड़ेगा और सस्ते श्रम पर मज़दूरी करके बेहद गरीबीअसुरक्षित और अनिश्चितता का जीवन बिताना पड़ेगा। इसका सबसे बड़ा उदहारण है उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में कन्हार बांध निर्माण के लिए गैर कानूनी रूप से भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आन्दोलनकारी ग्रामीणो पर १४ व् १८ अप्रैल को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गोलीकांड एवं लाठी चार्ज करना जिस ने यह साबित कर दिया है की कॉर्पोरेट जगत हर क्षेत्र में भूमि हथियाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है. 

     

    मई को IWPC में हुए प्रेस वार्ता में दिल्ली में मौजूद सामाजिक आंदोलनकिसान-मज़दूर और ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों ने प्रेस के साथियों से बातचीत में सारे जन-समर्थी,बुद्धिजीवीप्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष समूहों और लोगों से अपील की की वह भूमि अधिकार संघर्ष रैली में मई 2015 को संसद मार्ग  पहुंचे और देश के हर कोने से आये हज़ारों लोगों के विरोध प्रदर्शन में उनका साथ दें।  ज़मीन जैसे इतने पेचीदे  और देश के तमाम  लोगोंख़ास कर मज़दूर- किसान के जीवन और खेती के विकास के मुद्दे पर उनसे बिना किसी बातचीतठोस समाधान के बिना अध्यादेश के रास्ते देश भर और संसद के भीतर हो रहे विरोध के बावजूद सरकार ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश दूसरी बार अप्रैल2015 को मनमाने ढंग से जारी दिया। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐतराज़ जताया है।  

     

    प्रेस वार्ता को  हन्नान मौलाह (All India Kisan Sabha, 36 Canning Lane), अतुल अंजान (All India Kisan Sabha) , सत्यवान (All India Krishak Khet Mazdoor Union) , रोमा (All India Union of Forest Working People),  और भूपिंदर सिंह रावत (NAPM) ने प्रेस वार्ता को सम्बोधित किया।  

     

     

     

    जन आदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम),अखिल भारतीय वन श्रम जीवी मंच,अखिल भारतीय किसान सभा (अजय भवन)अखिल भारतीय किसान सभा (केनिंग लेन),अखिल भारतीय कृषक खेत मजदूर संगठन,लोक संघर्ष मोर्चायुवा क्रान्ति,जन संघर्ष समन्वय समिति,छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन,किसान संघर्ष समितिसंयुक्त किसान संघर्ष समितिइन्साफ,दिल्ली समर्थक समूह,किसान मंच,भारतीय किसान यूनियन

    Contact: 9958797409, 9810423296, 9818905316, 9911955109

    -- 
    In Solidarity, 
    Shefali

    Delhi Forum 
    F 10/12 (Basement),
    Malviya Nagar,New Delhi-110017 

    Phone: 011 - 26680883 (O), 9582671784 (M)



    -- 
    Ms. Roma ( Adv)
    Dy. Gen Sec, All India Union of Forest Working People(AIUFWP) /
    Secretary, New Trade Union Initiative (NTUI)
    Coordinator, Human Rights Law Center
    c/o Sh. Vinod Kesari, Near Sarita Printing Press,
    Tagore Nagar
    Robertsganj, 
    District Sonbhadra 231216
    Uttar Pradesh
    Tel : 91-9415233583, 
    Email : romasnb@gmail.com
    http://jansangarsh.blogspot.com

    Delhi off - C/o NTUI, B-137, Dayanand Colony, Lajpat Nr. Phase 4, NewDelhi - 110024, Ph - 011-26214538




    -- 

    Delhi Contact : c/o NTUI, B - 137, Dayanand Colony, Lajpat Nr. Ph IV, NewDelhi - 110024, Ph -9868217276, 9868857723,011-26214538
    Lucknow contact : 222, Vidhayak Awas, Aish Bagh Road, Rajinder Nagar, Lucknow, UP
    Dehradun Contact : c/o Mahila Manch, E block,Saraswati Vihar, Near Homeguard off, Kargi, Dehrdun, Uttarakhand. ph- 09412348071

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       जौब अप्वाइंटमेंट लेटर : इ नि कौर , वु नि कौर , सि बि नि कौर 


                        जु मैनेजमेंट कॉलेजुं मा नि सिखाये जांद -5

                         
                      चबोड़ इ चबोड़ मा  मैनेजमेंट स्टाइल की पोल :::   भीष्म कुकरेती



                             जब बि क्वी अभ्यार्थी कै बि संस्थान मा नौकरी पांद तो वैक कुछ सुपिन हूंदन , कुछ करणै आकांक्षा हूंदन , सुखद भविष्य की सोच हूंद।  संस्थान कु अप्वॉन्टमेंट लेटर ही सबसे पैल वा /वु संस्थान से जुड़द।  किन्तु जब बि क्वी अभ्यार्थी अपण अप्वाइंटमेंट लेटर बंचद तो वु समज जांद कि  परतंत्रता से दुसर परतंत्रता मा पौंछि गे। 

    अप्वॉन्टमेंट लेटर वास्तव मा सकारात्मक हुण चयेंद किन्तु हमर टैम पर अप्वाइंटमेंट लेटर वास्तव मा नकारात्मक ही हूंद छा।  शायद अब सकारात्मक नियुक्ति पत्र मिलदा होला मि नि जाणदु। पर नियुक्ति पत्र मा आस जगाये जाण चयेंद वा आस नियुक्ति पत्रु मा नि हूंद। 

    सबसे पैल हूंद आफ्टर आप्व्इंटमेंट यू विल नौट ---------

                        'यू विल नौट डू' शब्द 'यू विल डू' का मुकाबला हजारों प्रतिशत अधिक हूंदन।

    नियुक्ति पत्र मा इन नि लिखे जांद कि तू कम्पनी नाम  सब जगा बढैल किन्तु इन अवश्य लिखे जांद -साले /साली! यदि तीन कम्पनी तै बदनाम कार तो तेरी खैर नी च। 

    अप्वाइंटमेंट पत्र मा अभ्यार्थी से उम्मीद नि करे जांद कि कर्मिक विश्वासपात्र हो किन्तु हिदायत अवश्य दिए जांद कि उतका  का गस्सा यदि तीन विश्वासघात कार तो इंडियन पैनल कोड हमारा साथ च अर तेरी मौण तोड़े सक्यांद। 

                  हरेक कम्पनी रुणि रौंदि कि हमर क्रमिक इन्नोवेटिव नि छन , नवप्रवर्तक नि छन , मौलिक सोच का समर्थक नि छन।  अब जब नियुक्ति पत्र मा लिखे इ नि जाव कि हम तुम से इन्नोवेसन की आस करदां तो संस्थान मा नई सोच कखन आलि ? उल्टां नियुक्ति पत्र मा लिख्युं रौंद - देख बै कार्मिक ! हम त्वै तै गधा समजदा तो गधा जन अपर संचालक /सुपरवाइजर की आज्ञा पाल करता जा।  यदि तीन गधापंथी छोड़िक अपण बॉस की अवज्ञा कार तो तेरी नौकरी खतम करे जाली।

                          नियुक्ति पत्रु मा इन नि लिख्युं रौंद कि तुम तै अनुशासन मा रौण चयेंद बल्कि लिख्युं रौंद कि यदि तू अनुशासन मा नि रैली तो त्वे पर अनुशासनत्मक कार्यवाही होली। नियुक्ति पत्र वास्तव मा अभ्यार्थी तै सिखांद कि तू यदि भेड़ /ढिबर जन व्यवहार करिल त कम्पनी मा खै कमै सकदी अर यदि तीन इना उना  द्याख तो त्यार हतुं मा टर्मिनसन लेटर पकड़ाए जालु। नियुक्ति पत्र का मजमून हूंद कि -हे ! कर्मिक यदि तू अनवश्यक निलंबन नि चांदी तो बण्यां बुण्या बाटु पर ही हिट। 

            नियुक्ति पत्र का हरेक क्लाउज मा सकारात्मक वाक्यों का बनिस्पत नेगेटिव /नकारात्मक वाक्यों की अधिकता हूंदी याने कार्मिक तै नकारात्मक बणाणै प्रक्रिया नियुक्ति पत्र से शुरू ह्वे जांद। 

      उन त मालिक बुल्दु बल कर्मिक म्यार परिवार च पर नियुक्ति पत्र की इबारत बथांदि कि कर्मिक एक अविश्सनीय अर दुसर ब्रह्माण्ड कु जीव च अर वै तै बांधिक बंधक बणान आवश्यक च। 

    असल मा नियुक्ति पत्र मा कम्पनी का लीगल बेनिफिट्स का ही ख़याल रखे जांद कि यदि कम्पनी लीगली कखि फंस जावो तो नियुक्ति पत्र का बल पर कंपनी पर आंच नि आवो। 

                           व्यापारिक नियुक्ति पत्र याने चोरी रुकणो नियुक्ति पत्र 


    एक दै हमन टेक्नीकल सर्विस बेहतर बणाणो बान सर्विस फ्रेंचाइजी नियुक्त करणो निर्णय ले।  तो हमन सर्विस मैनेजर से सर्विस फ्रंचाईजी  नियुक्ति पत्र का प्रारूप बणाणो ब्वाल। 

    सर्विस मैनेजर कु भेज्युं  प्रारूप की नकल मीम विचार विमर्श का वास्ता आइ।  मि बेहोश ह्वे ग्यों।  कखिम बि बेहतर सेवा , संतुष्ट ग्राहकुं बात नि छे अपितु सौ टर्म्स  मादे अस्सी टर्म्स/ क्लाउज /परिच्छेद इन छा  जखमा वाक्य की शुरवात ही इन छे - यू विल नौट - 

    जब शरतुं  का अस्सी प्रतिशत वाक्य 'यू विल नौट -' से शुरू ह्वाला तो अवश्य ही सेवा मा नकारात्मक सोच आली ही। 

    मीन अपण बौस मा 'यू विल नौट -'शब्द बदलणो सुझाव दे तो सर्विस मैनेजर अर बॉस का वाक्य छौ - साले सब सर्विस फ्रैंचाइजी चोर होते हैं उनको -यू विल नौट - से ही सुधारा जा सकता है। अर सर्विस मैनुअल मा 'यू विल डू ' की जगा 'यू विल नौट ' कु ही बोलबाला राइ। 


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    Dear friends, 

    Whole hills swept down over the beautiful and delicate rural villages of Nepal. Thousands were crushed, more are missing and the country is crying out for water, food, and shelter. It's devastating and in the middle of it all this one brave local organisation, Abari, is using everything they have to put up tents in the hardest hit remote areas. 

    Aid experts say before the disaster they were doing some of the most impactful work in the country, and that they're one of the best ways to get crucial aid to rural communities fast. That's because this is their home.    

    We can make all the difference for this incredible group,and many others across Nepal, literally multiplying their relief budgets by 10, empowering them to build for the long term and keeping their emergency work funded in hard-to-reach places. 

    And by donating to local leaders ready for the hard years of rebuilding to come, we'll plant the seeds of hope for a sustainable and safe future in Nepal's poorest villages. 

    Click below to pledge now and Avaaz will only process our donations if we raise enough to change the game for local heroes: 


    Nepal has a bad reputation for inefficiency and corruption, and its government is divided. That's why Nepal's vibrant civil society is likely to bring the most effective, life-saving support for many citizens.

    
Abari, and many organisations like them in Nepal, have been at work in some of the worst hit regions building water tanks and housing, and making the connections aid workers need to navigate the remote areas and bypass corruption. The best part is that they are set up to take international donations directly right now.

    Big international aid organisations have used established systems to mobilise money and expertise fast to meet this emergency, while local groups are improvising to respond to the vast needs. Supporting such groups can be riskier, but with that risk comes the possibility of a huge reward. When a cyclone hit Burma in 2008, our community raised two million dollars that was smuggled in through a network of monks working outside of the corrupt government system. For some, this bold tactic led to the only life-saving aid they ever saw. 


    
 We have the chance to do that again in Nepal. Click below to join in and Avaaz will collect and distribute our donations as soon as we raise enough to make a big difference for these inspiring local heroes: 


    Our movement was designed to break through bureaucracies and deliver hope directly. When disaster struck Burma and then again when it struck Haiti, the Avaaz Community opened our hearts and pledged millions to help people on the ground to get money to those most in need. Our common humanity united us to stand together in those times of greatest need. Now we can come together again to provide the Nepalese people with the urgent support to survive this horror. 

    With hope and determination, 

    Emma, Alex, Allison, Laila, Oli, Alaphia, Rowena, Mais and the rest of the team. 

    Sources

    Nepal's relief effort must reach the rural poor (Globe and Mail)
    http://www.theglobeandmail.com/globe-debate/nepals-relief-effort-must-reach-the-rural-poor/article24135973

    
Nepal earthquake: authorities struggle to cope despite international aid efforts (The Guardian)
    http://www.theguardian.com/world/2015/apr/27/nepal-earthquake-authorities-struggle-to-cope-despite-international-aid-efforts

    Villages Near Nepal Earthquake's Epicenter Are Desperate (NY Times)
    http://www.nytimes.com/2015/04/28/world/asia/nepal-earthquake.html

    Nepal earthquake: Relief starts reaching remote villages (BBC)
    http://www.bbc.co.uk/news/world-asia-32507783

    
Abari Adobe and Bamboo Research Institute
    https://www.facebook.com/abari.nepal 


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