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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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  • 04/02/15--07:56: Nandita Das Misquoted!
  • Nandita Das Misquoted!
    Palash Biswas
    Image result for nandita das
    Nandita das is not only the iconic beautiful actor for her sustained performance,she is known as the vocal protagonist of the fight against fairness multinational gender bias and patriarchal hegemony.She is not though as famous as Arundhuti Ray for her activism and social concern,but we all recognize her concerns for the suffering toiling masses in India.

    We all know about the specific allergy whenever Arundhati writes about social realism and the burning questions that we face day today.

    Arundhuti is attacked again and again.

    Nandita is spared,we used to think.But here you are Nandita is not spared at all.She is being misquoted for character assassination,which must be condemned.

    Web reports say that actor and social activist Nandita Das had a tough time today clarifying a quote which claims she never made. The ever active twitteratti went hammer and tongs slamming the actor for allegedly saying "All men are potential rapists."

    This alleged quote went viral within no time and the hashtag '#NanditaDasQuotes' started trending on micro-blogging site Twitter. An array of sarcastic tweets made quite a furore under this hashtag.

    The dusky actress then took to Twitter to clarify her stand and said that she was being misquoted. She tweeted:I'm being falsely quoted Never said all men are rapists. What kind of a stupid generalisation is that? sad that 1 have to even explain this.


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    हम 'जनकृति' के नाम से एक अंतराष्ट्रीय पत्रिका निकाल रहे हैं जो विमर्श पर केन्द्रित है. आज सम्पूर्ण विश्व में विमर्श की चर्चा है ऐसे में सृजन के प्रत्येक क्षेत्र में विमर्श को स्थापित करने के उद्देश्य से इसे निकाला जा रहा है ..आशा है अपने ब्लॉग के माध्यम से इसे प्रचारित करने में हमें सहायता करेंगे ..मैं पत्रिका का सम्पूर्ण परिचय मेल के साथ भेज रहा हूँ..आप इसे हिंदी और इंग्लिश दोनों में लगा सकते हैं....यह पत्रिका दोनों भाषाओं में निकल रही है 

    कुमार गौरव मिश्रा 
    संपादक 

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    ঠাকুর্দার ঝুলি.....
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    # "... রবীন্দ্রনাথের ঠাকুরদা, দ্বারকানাথ ঠাকুরের তেতাল্লিশটা বেশ্যালয় ছিল কলকাতাতেই। এত উপার্জন করেও দ্বারকানাথ ঠাকুরের আশা মেটেনি। মদের ব্যবসা শুরু করলেন। প্রচুর অর্থ কামিয়েছিলেন তাতে। আবার নতুন ব্যবসা শুরু করলেন আফিমের্। আফিমে নেশাগ্রস্ত হয়ে দেশের লোকের সর্বনাশ হলেও তাতে কিছু এসে যেতনা তার। আর একটি রোজগারের বড় উৎস ছিল বিপদগ্রস্ত লোকদের হিতাকাঙ্খী সেজে মামলা মোকদ্দমার তদবির করা। চব্বিশ পর্গণার সল্ট এজেন্টও ছিলেন তিনি। তাতেও ভালো আয় হয় তার। তারপর হয়েছিলেন সেরেস্তাদার এবং পদোন্নতির ফলে হন দেওয়ান। এসবই ছিল তার সংসারে আর্থিক মধুবর্ষণ॥"     ( আনন্দবাজার - ২৮ শে কার্তিক, ১৪০৬)

    # "... ধর্মমন্দিরে ধর্মালোচনা আর আর বাহিরে আসিয়া মনুষ্য শরীরে পাদুকা প্রহার - একথা আর গোপন করিতে পারিনা। ইত্যাদি নানা প্রকার অত্যাচার দেখিয়া বোধ হইল পুষ্করিনী প্রভৃতি জলাশয়স্থ মৎস্যের যেমন মা বাপ নাই, পশুপক্ষী ও মানুষ যে জন্তু যে প্রকারে পারে মৎস্য ধরিয়া ভক্ষণ করে, তদ্রুপ প্রজার স্বত্ত্ব হরণ করিতে সাধারণ মনুষ্য দূরে থাকুক যাহারা যোগী ঋষি ও মহা বৈষ্ঞ্চব বলিয়া সংবাদপত্র ও সভাসমিতিতে প্রসিদ্ধ, তাহারাও ক্ষুৎক্ষামোদর॥" 

    (কাঙাল হরিনাথের "অপ্রকাশিত ডায়েরী")

    # "... মহর্ষি দেবেন্দ্রনাথের এতগুলো ছেলেমেয়ের মধ্যে জমিদার হিসেবে তিনি নির্বাচন করলেন চোদ্দ নম্বর সন্তান রবীন্দ্রনাথ ঠাকুরকে। এও এক বিস্ময়। অত্যাচার, শোষণ, শাসন, চাবুক, চাতুরী প্রতারণা কলাকৌশলে কি রবীন্দ্রনাথই কি যোগ্যতম ছিলেন তার পিতার বিবেচনায়? অনেকের মতে তার পিতৃদেব ভুল করেননি। প্রচন্ড বুদ্ধিমান ও প্রতিভাবান রবীন্দ্রনাথের সৃজনশীলতা বহু বিষয়েই অনস্বীকার্য॥" (শ্রী স্বপন বসু / গণঅসন্তোষ ও উনিশ শতকের বাঙালি সমাজ)

    # "... কালীপ্রসন্ন কাব্যবিশারদ তার 'মিঠেকড়া'তে পরিষ্কার বলেই দিয়েছিলেন যে, "রবীন্দ্রনাথ মোটেই লিখতে জানতেন না, স্রেফ টাকার জোরে ওর লেখার আদর হয়। কিন্তু বরাবর এতো নির্বোধের মতো লিখলে চলে কখনো? 'গীতাঞ্জলি' নোবেল প্রাইজ পাওয়ার পর জনরবের কি ধূম - রবীন্দ্রনাথ কোন বাউলের খাতা চুরি করে ছেপে দিয়েছেন। শেষে অবশ্যি নামও জানা গেল - স্বয়ং লালন ফকির মহাশয়ের বাউল গানের খাতা চুরি করেই রবীন্দ্রনাথ নোবেল প্রাইজ পেয়েছেন। আজ অবিশ্বাস্য্য শোনালেও একথা কিন্তু সত্যি, সেদিন বহু ব্যক্তি শান্তিনিকেতনের বিভিন্ন কর্তাকে বলেছেন এবং লিখেছেন - রবিবাবু বড় কবি স্বীকার করি। যাকগে, তা গীতাঞ্জলির খাতাটা এবার উনি ফিরিয়ে দিন। প্রাইজ তো পেয়েই গেছেন, অনেক টাকাও হাতে এসে গেছে, ওতো আর কেউ নিতে যাচ্ছে না, তা গান লেখা খাতাটা উনি দিয়ে দিন।"

    পাঁচকড়ি বাবু সত্যিই বিশ্বাস করতেন যে, রবীন্দ্রনাথের ক্রমবর্ধমান জনপ্রিয়তা একটা হুজুগ মাত্র। কারণ রবীন্দ্র সাহিত্য অনুরাগ বিশুদ্ধ ন্যাকামি ছাড়া আর কিছুই নয়। পাঁচকড়ির বাবু একথাও বহুবার স্পষ্টভাবে বলে দিয়েছেন - রবীন্দ্রনাথের প্রায় যাবতীয় সৃষ্টিই নকল। বিদেশ থেকে ঋণ স্বীকার না করে অপহরণ॥" ( সুজিত কুমার সেনগুপ্ত / জ্যোতির্ময় রবি ও কালো মেঘের দল)

    # "... রবীন্দ্রনাথের অখ্যাত দাদাদের মধ্যে সবচেয়ে গুণী সোমেন্দ্রনাথ। তিনি ছোটবেলায় ছোটভাইয়ের কবিতার সমঝদার বের করার জন্য আমলাদের মাঝখানে ঘুরে বেড়াতেন। রবীন্দ্রনাথ নিজেই লিখেছেন - 'আমার দাদা এই সকল রচনায় গর্ব অনুভব করিয়া শ্রোতা সংগ্রহের উৎসাহে সংসারকে একেবারে অতিষ্ঠ করিয়া তুলিলেন।'

    রবীন্দ্রনাথ যেবার নোবেল প্রাইজ পেলেন সোমেন্দ্রনাথের কী আনন্দ। সারা বাড়িতে দৌড়ে বেড়ান আর চিৎকার করেন - 'রবি প্রাইজ পেয়েছে, রবি প্রাইজ পেয়েছে।' আবার নাতিরা যখন তার কাছে যায় তিনি ঘরের ভেতর ডেকে এনে ফিসফিস করে বলেন, 'জানিস তো গীতাঞ্জলির সবকটি কবিতা কিন্তু আমার লেখা। রবি আমার কাছ থেকেই তো নিয়েছে।' এই কথা শুনে নাতিরা যখন বলেন, 'তাহলে তুমি এত আনন্দ করছ কেন', সোমেন্দ্রনাথ তখন খেপে যান, চেঁচিয়ে বাড়ি মাৎ করে বলেন, 'তোদের এত হিংসে কেন রে, আমার ছোটভাই নোবেল প্রাইজ পেয়েছে, আমি আনন্দ করব না তো কে করবে? কার লেখা তাতে কী?'

    অন্যদিকে নোবেল প্রাইজ পাওয়ার পর মনে হয় রবীন্দ্রনাথের উপর তিনি ক্ষুব্ধও হয়েছিলেন। সোমেন্দ্রনাথ পিছনে তাকে কেরাণী বলে তিরস্কার করতেন। তার অর্থ এও হতে পারে যে তার লেখাগুলোই কেরাণীর মত লিখে দিয়ে পেয়ে গেলেন নোবেল প্রাইজ। কিছুদিন এমন হযেছিল যে বাড়িতে কোন অতিথি এলেই তাকে নিয়ে গিয়ে বলতেন, 'চল আমার সঙ্গে। আমার বাড়ীতে একজন কেরাণী আছে। তাকে দেখবে চল।' তারপর আঙূল বাড়িয়ে দেখিয়ে বলতেন, 'ঐ দেখ কেরাণী, কলম পিষছে তো পিষছেই।' তার ধারনা ছিল তিনি যদি ঠিকমত লিখতেন, তাহলে ছোটভাইয়ের চেয়ে অনেক বড় লেখক হতে পারতেন॥"                                  (অমিতাভ চৌধুরী / ইসলাম ও রবীন্দ্রনাথ)

    # "... রবীন্দ্রনাথের বই অনেক সময় বিক্রী করতে হযেছে অর্ধেক দামেও। তা নিয়ে সেকালে কম ঠাট্টা বিদ্রুপ হয়নি। ১৯০০ সালে কবির বন্ধু প্রিয়নাথ সেনকে তিনি লিখেছিলেন - 'ভাই, একটা কাজের ভার দেব? আমার গ্রন্থাবলী ও ক্ষণিকা পর্যন্ত সমস্ত কাব্যের কপিরাইট কোন ব্যক্তিকে ৬০০০ টাকায় কেনাতে পারো? শেষের বইগুলি বাজারে আছে, সে আমি সিকিমূল্যে তার কাছে বিক্রি করব - গ্রন্থাবলী যা আছে, সে এক তৃতীয়াংশ দামে দিতে পারব (কারণ এটাতে সত্যের অধিকার আছে, আমি স্বাধীন নই)। আমার নিজের দৃঢ় বিশ্বাস, যে লোক কিনবে সে ঠকবে না। আমার প্রস্তাবতা কি তোমার কাছে দু:সাধ্য ঠেকছে? যদি মনে কর ছোটগল্প এবং বউঠাকুরাণীর হাট ও রাজর্ষি কাব্য গ্রন্থাবলীর চেয়ে খরিদ্দারের কাছে বেশি সুবিধাজনক বলে প্রতিভাত হয় তাহলে তাতেও প্রস্তুত আছি। কিন্তু আমার বিশ্বাস কাব্য গ্রন্থগুলোই লাভজনক।'

    এইভাবে নানারকম ঝামেলার মধ্যে কবির বই প্রকাশ করতে হযেছে। পরে প্রকাশনার ভার নিল এলাহাবাদের ইন্ডিয়ান পাবলিশিং হাউস। পরে প্রকাশনার দায়িত্ব এসে পড়ে বিশ্ব ভারতীর ওপর ১৯২৩ সালে॥"                                              (অমিতাভ চৌধুরী / ইসলাম ও রবীন্দ্রনাথ)

    তথ্যসূত্র : গোলাম আহমাদ মোর্তজা / এ এক অন্য ইতিহাস ॥ [ বিশ্ববঙ্গীয় প্রকাশন, কলকাতা - ডিসেম্বর, ২০০০ । পৃ: ১৪২ - ১৮১ ]

    https://www.facebook.com/kay.kavus/posts/294247800757111


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       भुंदरा बौ अब गाळयूं तड़क्वणि ना फूलूं बरखा बरखांदि 

        

                             चबोड़्या , चखन्यौर्या , हंसोड्या - भीष्म कुकरेती   


                         इतिहास मा बि रिकॉर्ड हुयुं च बल भुंदरा बौ पैल सीम मुखीम किकी जात्रा करिक गां मा पैथर आंदि छे अर पैल अपण कूड़ौ मुंडळम चढ़िक गाळयूँ औडळ -बीडळ करदि छे कि जैनि मेरि घासक बिठकि सरकाई वींकि गौड़ी तड़म लग जैन।  जैन म्यार खड्डाउंदक  मूळा खत्याइ वैक लौड़ खत्ता उन्द जोग ह्वे जैन।  कवि हरीश जुयालन भुंदरा बौ की गाळयूँ पर इतिहास मा डाक्टरेट हासिल कार।  

                     अब दुसर युवा कवि गीतेश नेगी भुंदरा बौ पर पीएचडी करणा छन अर लिखणा छन बल अब भुंदरा बौ झाड़ा   बैठिक बि आंदि तो बी गाळी नि दीन्दी अपितु हाथ साफ़ करद करद बुलणी रौंदी बल हे भगवान ये गाँव मा खाद -पाणी की कमी नि हो अर फसल दुगण ह्वे जैन। 

    ग्रामीण महिलाऊँ मनोविज्ञान का विचारक डा गौनियालन पंदरा साल पैल  कविता छपै छे बल  यदि भुंदरा बौ एक घंटा मा कैकि बांठक नि धरदि छे तो भुंदरा बौ पर भूत बाण लग जांद छा। 

    पर अबि कच्चा बौड़ याने सुनील कुमार थपलियालन अपण एमए की थीसिस मा सिद्ध कार कि अजकाल भुंदरा बौ हरेक गाँ वळ इ ना गौंका कुत्ता बिरळु-चखलुं   तै आशीर्वाद दीणी रौंदी अर चखुल आशीर्वाद सूणिक बेहोस ह्वे जांद किलैकि वैन त सरा जिंदगी भर भुंदरा बौक मुखन तेजाबी बरखा ही झड़द देखि छौ। 

    गढवळि साहित्यौ नामवर सिंह याने वीरेंद्र पंवार अर गढवळि साहित्यौ अशोक वाजपेई याने संदीप रावत दुयुंन अपण अपण कटुआलोचना की किताब की भूमिका मा ल्याख बि च कि ऊंन जू बि नकारात्मक आलोचना का प्रतीक प्रयोग करिन यि सब ऊंन भुंदरा बौमन सिखेन। 

    अर गढवळि का भोला नाथ तिवारी डा अचला नन्द की ताज़ी किताब मा डा जखमोला लिखणा छन कि भुंदरा बौ अब सुंदर सुंदर उत्साहजनक शब्दों से लोगुंक  उत्साह बढ़ादि , माहौल मा सकारत्मक हवा फैलांदी , माहौल मा गरिमा फैलांदी। 

    गाळयूँ पुड़िया ,   बदजुवान्यूं थैली , जीव मा अम्ल /तेज़ाब धरण वळि भुंदरा बौमा इन अंतर किलै आई पर रिसर्च करणो मि खुद ग्यों अर भुंदरा बौ से मुखाभेंट कार। 

    मि -ये भुंदरा बौ ! यी मि क्या सुणनु छौं ? अब बल तू कमीनी नि रै गे बल अब तू शालीन ह्वे गे ?

    भुंदरा बौ -हाँ मीन सदा का वास्ता कमीनी पंथी छोड़  याल अर मि सर्वथा शालीन ह्वे ग्यों। 

    मि -अब तो तू अपण जनम जाती दुश्मनो से बि बड़ी तमीज तहजीब से बात करदि ?

    भुंदरा बौ -  हाँ अब मि जम्मेबार पद पर छौं तो मि तै हर शब्द मीठा अर सहृदयी शब्द बुलण इ चयेंदन कि ना ?

    मि -क्या मतलब ?

    भुंदरा बौ -अरे अब मि ग्राम प्रधान ह्वे ग्यों तो पद कि गरिमा , पोजीसन की शान , पद की प्रतिष्ठा का हिसाब से हर समय बुलण चयेंद कि ना ? मीन समज याल कि अब मि तै एक एक शब्द ध्यान से बुलण चयेंद। ग्राम प्रधान तै पद गरिमा , प्रतिष्ठा कु ख्याल पैल रखण पोड़ल कि ना ? उच्चपदेन लोगुं जुम्मेवारी च कि वाणी संयम का पाबंद  रावन। 

    मि   - अरे कास ! हैदराबादी ओएसी , उमा भारती , शरद यादव , सलमान खुर्शीद , गिरिराज सिंह , शाही  इमाम , संजय निरुपम , साक्षी महाराज जन उच्चपदेन नेता बि यीं बात तै समझदा कि उच्च पद पर बैठिक जीबि  मा तेज़ाब ना मिठास धरण चयेंद।                    


    3 /4/15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 

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    Dear friends,



    Filthy toilets, no running water, unhygienic food and no ramps!That's how pathetic living conditions were for us at a recent national paralympic meet. But in 24 hours, the main organisers are meeting in Bangalore to discuss this fiasco and if we act now to demand tough action, we can ensure our athletes never have to suffer such conditions again. Act now:


    SIGN HERE
    I'm a blind gold-medallist runner for India. I competed at the recent paralympics meet in Ghaziabad and personally experienced the shocking living conditions -- filthy toilets, unhygienic food and no ramps!!Paralympians like me have fought this for years but the only thing that will ensure change, is if you stand with us to demand dignity.

    The media attention has given me a ray of hope and in 24 hours, we can push for action -- because the main organisers, the Paralympics Committee of India are meeting in Bangalore to discuss their recent debacle. 

    If no one pays attention to their meeting, nothing will happen and we'll lose another chance to improve our Paralympics. So let's get thousands of us demanding a fair, time-bound probe with a public report right now.

    Please help me get over 30,000 signatures by tomorrow and show the Paralympics sports organisers that athletes have the backing of ordinary people. They can't get away with such shoddy games anymore. Act now:

    https://secure.avaaz.org/en/paralympics_fiasco_saheb_hossain_do/?bWUthib&v=56388

    When I started going blind, I decided to become a runner because I wanted to achieve something in my life. My friends and even my dad used to say that no good would come out of running. But I disagreed -- it's given my life meaning andI feel so proud when I win medals for my state and my country. What upsets me though is the attitude of the government and the people managing paralympic sports in India. They show no sensitivity and offer very little support to paralympians, many of whom come from very poor families.

    Despite being in no position to host the 15th National Para-Athletics, the Paralympic Committee of India still went ahead with the games in Ghaziabad in Uttar Pradesh. Now they are blaming the government for lack of funds and five members of the Executive Committee have been sacked. I've watched this drama for years -- but what finally gives me hope is the massive public outcry after the media exposed the squalid conditions.

    There is still no official report or even a deadline to produce one, on this whole fiasco. That's why our pressure is needed. If we push the Paralympic Committee to conduct a time-bound probe and submit a public report, we can ensure that our athletes never have to put up with this terrible treatment again.

    Let's get to 30,000 signatures by Saturday before the Paralympic Committee meeting. Act now:

    https://secure.avaaz.org/en/paralympics_fiasco_saheb_hossain_do/?bWUthib&v=56388

    The Avaaz community has come together to champion the rights of the weak against the strong. Let's do it again in India for the rights of athletes who have made such a huge contribution to the country and yet who are not getting the respect we deserve.
      
    With hope and determination,
    Saheb Hossain with the Avaaz team

    More information:

    Paralympic Committee of India constitutes enquiry committee (Times of India):
    http://timesofindia.indiatimes.com/sports/more-sports/athletics/Paralympic-Committee-of-India-consti...

    Five members suspended from Paralympic Committee of India (Firstpost):
    http://www.firstpost.com/sports/national-para-athletics-controversy-five-members-suspended-paralympi...

    No ramps, dirty toilets: Paralympic meet nightmare for differently-abled athletes (NDTV):
    http://www.ndtv.com/india-news/no-ramps-dirty-toilets-paralympic-meet-nightmare-for-differently-able...

    Discriminated and ignored: The sad story of India's paralympians (Firstpost):
    http://www.firstpost.com/sports/discriminated-and-ignored-the-sad-story-of-indias-paralympians-20534...


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    Do we opt to become yet another Pakistan or Bangladesh or Srilanka?

    No end of bloodshed in Bangladesh.The face or religious nationalism on the other side of the border
    Palash Biswas

    Police in Bangladesh have charged four men with the murder of a blogger accused of mocking Islam, the second such attack in recent weeks. Washiqur Rahman was hacked to death near his home in Dhaka on Monday, less than two months after Abhijit Roy had been killed.
    In India ,we may not understand or we don`t want to understand what should be the resultant disaster as we either promote or chose to become quite detached with the agenda of fascist agenda of making India free of Islam and Christianity.
    It is better to look beyond the political border.Arab Nations have launched an army to wipe out Shia Muslims in Middle East with the support of America and Israel.In India ,the fascist corporate Kesaria fascist regime is backed by America and Israel.
    Are we going to opt for Arabian Spring in Indian fascist color as Kamala Harris is going to become the Democratic Face in America after Bobby Jindal being the Republican Icon.Global Hinduta is the face of Prabeen Togaria and Mohan Bhagwat and the Bajrangi Brigade in India as a whole,not Narendra Bhai Modi,mind you.Modi is being used to hinduise the majority Bahujan samaj and specifically the halfof Indian population,OBC.He is all about the Complete Privatization agenda of Foreign capital.He has to endorse the ethnic cleansing of his own kith and kin.He has already swam across the rivers of blood and has got the clean chit.
    Do we opt to become yet another Pakistan or Bangladesh or Srilanka?
    To get the answer we have to take seriously the development going in Bangladesh where relgious Nationalism kills the Bangla Nationalism.
    It is not all about killing of one or two or more bloggers only neither it is only an attempt of coup.
    The whole lot of Democratic and Secular forces havebeen listed on the killing list to make Bangladesh Islamic.
    Pl try to understand the Indian reference while we have virtually no resistance against Hindu Imperialism which wants a cent percent Hindu Rashtra while we have the third largest population of Muslims.
    Just understand hat amount of blood to be shed until RSS deadline of making Indian free of Islam and Christianity within 2021.

    I ma hereby posting the details published by a mainstream Bangaldeshi Daily Newspaper.


    জঙ্গি আনসারুল্লাহ'র কিলিং টার্গেটে শতাধিক ব্যক্তি
    যে ক'জন খুন হয়েছেন ওই তালিকা থেকেই
    আবুল খায়ের ও সমীর কুমার দে০২ এপ্রিল, ২০১৫ ইং ০০:৪৯ মিঃ
    জঙ্গি আনসারুল্লাহ'র কিলিং টার্গেটে শতাধিক ব্যক্তি
    ফাইল ছবি

    ব্লগার ওয়াশিকুর রহমান বাবুকে হত্যা করেছে উগ্র জঙ্গি সংগঠন আনসারুল্লাহ বাংলা টিম। ১৫ দিনের পরিকল্পনার অংশ হিসেবে একটি স্লিপার সেল দিয়ে এই হত্যাকাণ্ড ঘটায় সংগঠনটি। এর আগে স্লিপার সেলের সদস্যদের বিশেষভাবে প্রশিক্ষণ দেয়া হয়। রাজধানীর যাত্রাবাড়ীর একটি এলাকায় তারা প্রশিক্ষণ নেয়। ওয়াশিকুর রহমান বাবুর মতো আনসারুল্লাহ বাংলা টিম শতাধিক প্রগতিশীল মানুষকে হত্যার টার্গেট করেছে। এ পর্যন্ত যে কজন খুন হয়েছেন তারা ওই তালিকায় ছিলেন। শুধু ব্লগার নয়, ধর্মীয় মতাদর্শগত বিরোধের কারণেও খুন করে ওরা। আনসারুল্লাহর স্লিপার সেল সক্রিয় থাকায় কাউকে টার্গেট করলে দ্রুতই সিদ্ধান্ত বাস্তবায়ন করতে পারে তারা। গোয়েন্দাদের জিজ্ঞাসাবাদে এসব তথ্য জানিয়েছে ব্লগার বাবু হত্যাকাণ্ডে গ্রেফতার জিকরুল্লাহ ও আরিফুল। তারা দুই জনই চট্টগ্রামের হাটহাজারী মাদ্রাসার ছাত্র।

    একজন গোয়েন্দা কর্মকর্তা ইত্তেফাককে জানান, আনসারুল্লাহর তালিকায় শুধু ব্লগার নয়, প্রগতিশীল রাজনীতিবিদ, নামকরা লেখক, ঘাতক দালাল নির্মূল কমিটির নেতা, জঙ্গিবাদের বিরুদ্ধে সোচ্চার বামপন্থি নেতারাও আছেন। এদের একটি তালিকা গোয়েন্দাদের হাতে এসেছে। ইতিমধ্যে তালিকায় থাকা রাজনীতিবিদ, লেখকসহ সংশ্লিষ্টদের নিরাপত্তা বাড়ানো হয়েছে। পাশাপাশি আনসারুল্লাহর সদস্যদের গ্রেফতারের তত্পরতা চলছে।
     
    জিকরুল্লাহ ও আরিফুলকে জিজ্ঞাসাবাদকারী ঢাকা মহানগর গোয়েন্দা পুলিশের একজন ঊর্ধ্বতন কর্মকর্তা ইত্তেফাককে বলেন, এই সংগঠনটির স্লিপার সেল কাজ করায় খুনিদের দুই জন ধরা পড়লেও অন্যদের সম্পর্কে তেমন কোন তথ্য দিতে পারে না। বা তাদের কার্যক্রমও বন্ধ থাকে না। এই সংগঠনের প্রধান মুফতি জসিম উদ্দিন রাহমানী গ্রেফতার হওয়ার পর বর্তমানে নেতৃত্বে আছেন তামিম আল আদনানী। তাকেও গোয়েন্দারা খুঁজছেন। বাংলাদেশে বিভিন্ন জঙ্গি সংগঠন থাকলেও এরাই একমাত্র আল কায়েদার আদলে কাজ করে। গোয়েন্দারা অন্যদের দিকে বেশি নজর দেয়ায় এরা দিন দিন নিজেদের সংগঠিত করেছে। ঢাকা ছাড়াও চট্টগ্রাম, সিলেট, রাজশাহী ও বরিশালে এদের শক্তিশালী নেটওয়ার্ক রয়েছে। দেশের অন্য জায়গায়ও নেটওয়ার্ক তৈরির কাজ চলছে। জিকরুল্লাহ ও আরিফুল গোয়েন্দাদের জানিয়েছে, 'প্রশিক্ষণে তারা শিখেছে- মুরতাদ, নাস্তিক ও ইসলাম অবমাননাকারীদের হত্যা করতে হবে। গুলি করে হত্যা করলে সওয়াব কম। তাই তরবারি বা চাইনিজ কুড়াল দিয়েই কুপিয়ে হত্যা করতে হবে। সামনের চেয়ে পেছন দিক দিয়ে হত্যা করলে সওয়াব আরো বেশি। আর যদি এক কোপে ঘাড় থেকে মাথা আলাদা করা যায় তাহলে সওয়াব সবচেয়ে বেশি। তাই তারা ঘাড় টার্গেট করে সব সময় কোপ দেয়।'
     
    এ পর্যন্ত প্রগতিশীল ১০/১২ জনকে হত্যা করেছে আনসারুল্লাহ। এর মধ্যে রাজশাহী বিশ্ববিদ্যালয়ের শিক্ষক আবু তাহের, ড. মোহাম্মদ ইউনুস ও ড. এ.কে.এম শফিউল ইসলাম লিলন রয়েছেন। সর্বশেষ ব্লগার ওয়াশিকুর রহমান বাবুকে হত্যা করে তারা। এর আগে ড. অভিজিত্, আহমেদ রাজীব হায়দার, শান্তা মারিয়া বিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্র ব্লগার নেয়াজ মোর্শেদ বাবু ও ডেফোডিল বিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্র আশরাফুল ইসলাম, বুয়েটের ছাত্র আরিফ রায়হান দ্বীপকে হত্যা করে তারা। এর বাইরে আসিফ মহিউদ্দিন ও রাকিবকে হত্যার চেষ্টা করে ব্যর্থ হয় তারা।
     
    ধর্মীয় মতাদর্শগত বিরোধের কারণেও খুন করে ওরা। গোয়েন্দা কর্মকর্তারা জানান, ধর্মীয় বিষয়ে টিভি উপস্থাপক নূরুল ইসলাম ফারুকী এবং গোপীবাগে ইমাম মাহাদীর প্রধান সেনাপতি দাবিবার লুত্ফর রহমানসহ ৬ জনকে জবাই করে হত্যা করে তারা। ফারুকী ও লুত্ফরকে তারা ইসলাম বিরোধী বলে মনে করতো। ফলে তাদের এই আনসারুল্লাহরই একটি স্লিপার সেল হত্যা করে। এক একটি ঘটনায় নেতৃত্ব দেন একেক জন।

    ঢাকা মেট্রোপলিটন পুলিশের যুগ্ম-কমিশনার মনিরুল ইসলাম বলেন, বাবু হত্যাকাণ্ডের মামলাটি তেজগাঁও শিল্পাঞ্চল থানা থেকে ডিবিতে স্থানান্তর করা হয়েছে। গ্রেফতারকৃত আরিফুল ইসলাম ও জিকরুল্লাহ বর্তমানে ৮ দিনের রিমান্ডে আছে। গতকাল ছিল রিমান্ডের প্রথম দিন। তিনি বলেন, গ্রেফতারকৃত আরিফুল নরসিংদী জেলার রায়পুরা উপজেলায় ২০১২ সালের সেপ্টেম্বরে জেএমবির ক্যাম্পে প্রশিক্ষণ নেয়ার সময় গ্রেফতার হন। ওই সময় তার সঙ্গে আরো ২৩ জন গ্রেফতার হন। ওই সময় সন্ত্রাসবিরোধী আইনে দায়ের করা মামলার তিনি চার্জশিটভুক্ত আসামি ছিলেন। তিনি আনসারুল্লাহ বাংলা টিমের প্রধান জসিম উদ্দীন রাহমানীর আদর্শে অনুপ্রাণিত ও তার অনুসারী হন।



    ১৯৭১ সালে পাকিস্তানি সৈন্যরা বাংলাদেশের বুদ্ধিজীবীদের হত্যা করেছিল। ওরা দেশটাকে মূর্খের দেশ 
    বানাতে চেয়েছিল। পাকিস্তানিরা খুব বেশিদিন ওই হত্যাযজ্ঞ চালাতে পারেনি। যুদ্ধে হেরে ওদের বিদেয়
    নিতে হয়েছিল। বাংলাদেশে এখন বাংলাদেশিরাই বাংলাদেশের বুদ্ধিজীবীদের হত্যা করছে। এরা দেশটাকে 
    মূর্খের দেশ বানাতে চাইছে। এই সন্ত্রাসীরা হত্যাযজ্ঞ শুরু করেছে কয়েক বছর আগে, আজও চালিয়ে 
    যাচ্ছে। এটি শেষ হওয়ার নয়। এরা যুদ্ধেও হারবে না, পাকিদের মতো বিদেয়ও নেবে না। এরা মনের
    আনন্দে আরও আরও বুদ্ধিজীবী হত্যা করবে। যতদিন না দেশ সত্যিকার মূর্খের দেশে পরিণত হয়, 
    ততদিন করবে।

    পাকিস্তানি মুসলমানদের পক্ষে সম্ভব হয়নি বাংলাদেশকে মূর্খের দেশ বানানো। কিন্তু বাংলাদেশি 
    মুসলমানদের পক্ষে সম্ভব হচ্ছে দেশটাকে মূর্খের দেশ বানানো। ৮৪ জন বুদ্ধিজীবীকে হত্যা 
    করার একটা প্ল্যান বানিয়ে ফেলেছে এরা। বুদ্ধিজীবীর লিস্টটা দু'বছর আগের। নতুন লিস্টে আরও নতুন নাম ঢুকেছে। পাকিস্তান যেটা পারেনি, বাংলাদেশ সেটা করে দেখিয়ে দেবে। লোকে দেখুক। দেশপ্রেম কাকে বলে শিখুক।


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    ......रंगोत्सव २०१५.....

    संयुक्त कलाकार समिति का रंगोत्सव २०१५ ...शानदार ढंग से सफल रहा ....नगर निगम उद्यान के छोटे से मुक्ताकाशी मंच पर कार्यक्रमों की श्रंखलाबद्ध प्रस्तुति ने सैकड़ों की तादात में उपस्थित रंगप्रेमी दर्शकों का मनोरंजन
    किया ....

    संयुक्त कलाकार समिति का यह दूसरा वर्ष है....इप्टा.. नाचा थियेटर ..अग्रगामी.. कौतुक..महानदी कला समिति.. शास्त्रीय संगीत श्रोता समिति ..संकेत सांस्कृतिक समिति..आडिटोरियम निर्माण समिति.. लेखक संगठन आदि लगभग २५ संस्था ओं का यह आयोजन बिखराव की परिस्थितियों के बीच एका का अद्भुत उदाहरण पेश करता है....
    विश्व रंगमंच दिवस की यही मूल भावना भी है ....

    इस अवसर पर रायपुर में मुकम्मल आडिटोरियम न होने और निर्माण में हो रही सरकारी उदासीनता पर एकजुट आक्रोश भी ज़ाहिर किया ....
    वरिष्ठ रंगकर्मी जलील रिज़वी..राजकमल नायक ..वाहिद शरीफ़..संतोष जैन ..मिनहाज असद ..नीलू मेघ..निसार अली ..संजय शाम ...सलाम ईरानी ..संजय मैथिल ..सुदामा शर्मा..सुभाष मिश्रा ..करण ताहिर ख़ान..संजय महानंद..श्रीधर वराडे संजय चटर्जीऔर नौजवान सक्रिय रंगकर्मी काशी नायक ..शेखर नाग ..हेमंत वैष्णव ..नीरज गुप्ता ..रंजन मोडक..नितीश लहरी विनीता पराते ..ममता आहार..किरन शर्मा..कविता केंगरानी ...आशा विग.... आदि की उपस्थिति ने आयोजन को एतिहासिक रूप से सफल बनाया ...

    '......रंगोत्सव  २०१५.....     संयुक्त कलाकार समिति का रंगोत्सव २०१५ ...शानदार ढंग से सफल रहा ....नगर निगम उद्यान के छोटे से मुक्ताकाशी मंच पर कार्यक्रमों की श्रंखलाबद्ध प्रस्तुति ने सैकड़ों की तादात में उपस्थित रंगप्रेमी दर्शकों का मनोरंजन  किया ....    संयुक्त कलाकार समिति का यह दूसरा वर्ष है....इप्टा.. नाचा थियेटर ..अग्रगामी.. कौतुक..महानदी कला समिति.. शास्त्रीय संगीत श्रोता समिति ..संकेत सांस्कृतिक समिति..आडिटोरियम निर्माण समिति.. लेखक संगठन आदि लगभग २५ संस्था ओं का यह आयोजन बिखराव की परिस्थितियों के बीच एका का अद्भुत उदाहरण पेश करता है....  विश्व रंगमंच दिवस की यही मूल भावना भी है ....    इस अवसर पर रायपुर में मुकम्मल आडिटोरियम न होने और निर्माण में हो रही सरकारी उदासीनता पर एकजुट आक्रोश भी ज़ाहिर किया ....  वरिष्ठ रंगकर्मी जलील रिज़वी..राजकमल नायक ..वाहिद शरीफ़..संतोष जैन ..मिनहाज असद ..नीलू मेघ..निसार अली ..संजय शाम ...सलाम ईरानी ..संजय मैथिल ..सुदामा शर्मा..सुभाष मिश्रा ..करण ताहिर ख़ान..संजय महानंद..श्रीधर वराडे संजय चटर्जीऔर नौजवान सक्रिय रंगकर्मी काशी नायक ..शेखर नाग ..हेमंत वैष्णव ..नीरज गुप्ता ..रंजन मोडक..नितीश लहरी विनीता पराते ..ममता आहार..किरन शर्मा..कविता केंगरानी ...आशा विग.... आदि की उपस्थिति ने आयोजन को एतिहासिक रूप से सफल बनाया ...'


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    भूमि अधिकार संघर्ष आंदोलन के तहत आंदोलन का खाका तैयार


    कांस्टिट्यूशन क्‍लब, 2 अप्रैल 2015 को ज़मीन अधिग्रहण के मसले पर हुई बैठक 

    Bhoomi Adhikar Sangharsh Andolan
    Movement for Land Rights
    Land Bill 2015 Unacceptable with Amendments, Implement 2013 Land Act in Entirety
    Bhoomi Adhikaar Sangharsh Rally on Sansad Marg, Delhi, May 5

    New Delhi, April 2: In continuation of the joint movement against the draconian Land Acquisition Bill-2015, the core groups involved with the organisation of the massive protest demonstration at Parliament Street on 24th February, 2015 met in Delhi on 2nd April, 2015 to discuss the way forward.

    The Strategy Meeting decided to launch united protests with massive participation in all States.  Various protest actions have been planned by different unions and people's organisations in their respective areas and at the State-level to amplify protest against the Bill/Ordinance. All people's organisations and unions protesting against the ordinance will undertake a signature campaign against the ordinance aiming to collect 5 crore signatures. A Massive Bhoo Adhikar Sangharsh Rally will be held on 5th May, 2015 at Delhi.

    A Meeting with political parties was also held in which Jairam Ramesh (Indian National Congress), Sitaram Yechury (Communist Party of India (Marxist), D.Raja (Communist Party of India), K.C.Tyagi (Janata Dal-United),  Debabrata Biswas (All India Forward Bloc), Abani Roy (Revolutionary Socialist Party), Danish Ali (Janata Dal-Secular), Manoj Jha (Rashtriya Janata Dal), Kavita Krishnan (Communist Party of India (ML) Liberation) and  Satyavan (SUCI(C)) expressed solidarity with the struggle against the Land Acquisition Amendment Bill/Ordinance. They said we will not allow this Bill to be passed in the Rajya Sabha, we will struggle inside the Parliament and join hands with movements struggle outside on the street, together we can defeat this design of NDA government.

    A comprehensive strategy with the immediate aim of mounting a robust opposition against the new Land Acquisition Bill as well as to move towards the long term objective of achieving land rights for all was arrived at. Farmers' unions, people's movements and political parties from across the country have come together to form a strong opposition force against this historic challenge, and pressure is mounting on the current government from both inside and outside the Parliament.

    Medha Patkar (NAPM), Hannan Mollah (AIKS, 36 Canning Lane), Ragib Asim (AIKS, Ajay Bhavan), Dr.Sunilam (Kisan Sangharsh Samiti), Suneet Chopra (AIAWU), Ashok Choudhary and Roma (AIUFWP), Dayamani Barla, Virendra Vidrohi (INSAF), Rakesh Rafiq (Yuva Kranti), Ulka Mahajan (Sarvahara Jan Andolan), Smita Gupta (Adivasi Adhikar Rashtriya Manch) and others representing various mass organisations and people's movements spoke on the occasion and stressed the need for united struggles until victory.

    A Resolution was passed demanding that the widespread crop loss due to unseasonal rains and the floods in Jammu and Kashmir be declared as a National calamity and made specific demands (Resolution attached). Another Resolution expressing solidarity with the indigenous People in Australia who have risen in protest against the move of Adani to take-over their land for coal mining.

    Decisions:
    1. The collective Movement will be known as Bhoomi Adhikar Sangharsh Andolan/ Movement for Land Rights.
    2. Land Acquisition Ordinance once promulgated, as decided by NDA government, will be burnt across the country on 6th April.
    3. Bhoomi Adhikaar Sangharsh Rally in Delhi on Parliament Street on 5th May, 2015.
    4. State-Level Conventions, Mass Mobilisation, Padayatras, Rail Roko, Rasta Roko and Human Chains in all States and Districts.
    5. 5 crore signatures will be collected across the country.
    6. Zameen Wapsi campaign to be undertaken across the country by movements.
    7. State Level mobilisation against the Land Ordinance : April 9 : Vijaywada, Bhubaneshwar – April 10th, Patna 11th April


     All India Kisan Sabha (36 Canning Lane),
    All India Kisan Sabha (Ajay Bhavan)
    National Alliance of People's Movement
    All India Union for Forest Working People
    Kisan Sangharsh Samiti
    INSAF
    All India Agricultural Workers' Union (36, Canning Lane)
    Bharatiya Khet Mazdoor Union (Ajay Bhavan)
    All India Krishak Khet Mazdoor Sanghatan
    Bharatiya Kisan Union (Harpal Singh)
    Delhi Solidarity Group
    Yuva Kranti
    Sarvahara Jan Andolan And many other Organisations

     Contact : 9818905316, 9958797409, 9911528696, 9818864006




    RESOLUTION


    Farmers Suffer Unprecedented Crop Loss; Declare It A National Calamity

    Unseasonal rains and hailstorm across the country has led to unprecedented losses and rural India is in acute distress. The peasantry across the country are in acute distress and a spurt in farm suicides in many States is being reported even as the Government continues to be in a denial mode. The Agriculture Ministry's conservative estimates initially reported that crops were destroyed in about 1.81 crore hectares of land across 13 States. The trail of destruction is unprecedented when one considers the fact that the total area under rabi cultivation is around 6 crore hectares. In effect around one-third of the total area under rabi cultivation has been affected. Two days after the Agriculture Minister reported that crops were damaged in 1.81 crore hectares, the Central Government has reduced 75 lakh hectares and presented a "revised" data charging the States with over-estimation and deliberate over-reporting. What greater insensitivity can be displayed in times of such a national calamity? The magnitude of the crisis is far beyond whatever the Government is claiming as it does not take into account many States.

    The reality is that the Government figures do not include crop losses in States like Bihar, Karnataka, Tamilnadu, Kerala, Odisha, Delhi, Chhattisgarh, Gujarat, Assam and other North-Eastern States due to the unseasonal rains which are continuing and expected to continue till early April.  Jammu and Kashmir has been hit by another round of floods with widespread destruction and loss of lives. The BJP Government is clearly downplaying the magnitude of the destruction.

    This Meeting of Peasants, Agricultural Workers, Mass Organisations, Trade Unions and People's Movements demands:
    ·         The Central Government must immediately declare the unprecedented crop loss across the country and floods in Jammu and Kashmir a National Calamity and announce a Relief Package taking full responsibility.
    ·         A Special Session of Parliament, State Chief Ministers Meet, Meeting of Peasant and Agricultural Workers' Organisations must be convened to discuss the Emergency situation.
    ·         Joint Monitoring Group must be formed to monitor the Relief and Rehabilitation.
    ·         Waive All Loans of the Peasantry and ensure Crop Insurance Payment taking account of losses in each field.
    ·         Provide time-bound Compensation for Peasants and Share-Croppers covering Cost of Production, Yield and Income Loss (Not less than Twice the Cost of Production).
    ·         Provide Compensation for Agricultural Workers equivalent to the prevalent Minimum Wages for 3 Months.
    ·         Ensure employment under MGNREGA and supply free food grains to all affected families for the next 3 months.
    ·         Provide Inputs for the next season Free of Cost making Input providers and Insurance Companies contribute to a Special Corpus Fund.
    ·         Waive Electricity Bills of Farmers, Share-croppers and Agricultural Workers



     All India Kisan Sabha (36 Canning Lane),
    All India Kisan Sabha (Ajay Bhavan)
    National Alliance of People's Movement
    All India Union for Forest Working People
    Kisan Sangharsh Samiti
    INSAF
    All India Agricultural Workers' Union (36, Canning Lane)
    Bharatiya Khet Mazdoor Union (Ajay Bhavan)
    All India Krishak Khet Mazdoor Sanghatan
    Bharatiya Kisan Union (Harpal Singh)
    Delhi Solidarity Group
    Yuva Kranti
    Sarvahara Jan Andolan And many other Organisations

     Contact : 9818905316, 9958797409, 9911528696, 9818864006



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    मेरे प्यारे कवि विरेन दा (Virendra Dangwal Dangwal) की एक कविता प्यारे चित्रकार -कथाकार Bhowmick दा के लिए..

    __________________________________________________________________
    61, अशोक भौमिक, इलाहाबाद 
    ________________________

    तो हजरत!
    इस जवान जोश के बावजूद 
    आप भी हो चुके 61 के 
    और कल ही तो नीलाभ प्रकाशन की उस दुछ्ती पर 
    आपके साथ हम भी रचते थे कभी-कभी 
    अपनी वो विचित्र नृत्य नाटिकाएँ 
    जैसे एक विलक्षण नशे में डूबे हुए,
    या आपका वो

    एक जुनून में डूबकर कविता पोस्टर बनाना 
    सस्ते रंगों और कागज से 
    खाते हुए बगल के कॉफ़ी हाउस से मँगाए 
    बड़ा-सांभर, नींबू कि चाय के साथ 
    अभी तक बसी हुई है नाक और आत्मा में 
    वे सुगंधें प्रेम और परिवर्तन की चाहत से 
    लबालब और गर्मजोश |
    हिन्दी प्रांतर में तो वह एक नई सांस्कृतिक शुरूआत हो रही थी तब 
    क्या उम्दा इतेफाक हैं 
    कि इकतीस जुलाई प्रेमचंद का 
    भी जन्मदिन है, आपसे बार-बार 
    कहा भी गया होगा

    आप भी तो रचते हैं 
    आपने चित्रों और लेखों में 
    भारतीय जीवन की वे दारुण कथाएँ 
    जो पिछले कुछ दशकों में 
    गोया और भी अभीशापग्रस्त हो गई हैं
    बीते इन तीसेक बरसों में 
    बहुत कुछ बदला है 
    देश-दुनिया में 
    हमारे इर्द-गिर्द और आप-हम में भी |

    वे तिलिस्मी? जिन्नात- यातुधान-जादूगर 
    और खतरनाक बौने आपके चित्रों के 
    स्याह ज्यामितीय रेखाओं
    और कस्बो की तंग गलियों से निकलकर 
    महानगरों-राजधानियों तक निर्बाध आवाजाही कर रहे हैं
    अपने मनहूस रंगों को फड़फड़ाते हुए |
    अब ख़ुद बाल बच्चेदार हो रहे हैं 
    हमारे बेटे-बेटियाँ जो तब बस 
    खड़े होना सीखे ही थे,
    और आप भी तो अपने टाई-सूट और 
    बैग को छोड़कर 
    पूरी तरह कुर्ता-पजामा की 
    कलाकार पोशाक पर आ गए हैं|

    हाँ कुछ अब भी नहीं बदला है 
    मसलन शब्दों और भाषा के लिए 
    आपका पैशन, लोहे के कवच पहना आपका नाजुक भाव जगत 
    गुस्सा, जो किसी मक्खी की तरह 
    आपकी नाक पर कभी भी आ बैठता है 
    और थोडा सा खब्तीपन भी जनाब, 
    आपकी अन्यथा मोहब्बत से चमकती 
    आँखों और हँसी में |
    मगर वह सब काफ़ी उम्दा है, कभी-कभी जरूरी भी 
    और इन दिनों 
    हथौड़ा-छैनी लेकर कैनवास पर आप 
    गढ़ रहे हैं एक पथराई दुनिया की तस्वीरें 
    जिन्हें देखकर मन एक साथ 
    शोक-क्रोध-आशा और प्रतीक्षा से 
    भर उठता है|
    ये कैसी अजीब दुनिया है 
    पत्थर के बच्चे, पत्थर की पतली डोर से 
    पत्थर की पतंगे उड़ा रहे हैं 
    गली-मोहल्लों की अपनी छतों पर 
    जो जाहिर है सबकी सब 
    या वे परिन्दे 
    जो पथराई हुई आँखों से देखते हैं 
    पथरीले बादलों से भरे आकाश जैसा कुछ 
    अपने पत्थर के डैनों को बमुश्किल फड़फड़ाते 
    मगर आमादा फिर भी 
    परवाज़ के लिए |

    हमें आपकी छेनी के लिए ख़ुशी है अशोक,
    हमें ख़ुशी है कि आप 
    महान चित्रकार नहीं हैं 
    हालाँकि बाज़ार आपकी अवहेलना भी नहीं कर सकता 
    अपने भरपूर अनोखे और सुविचारित कृतित्व से 
    ख़ुद के लिए वह जगह बनाई है आपने,

    और अपनी मेहनत से, 
    हमें ख़ुशी है कि हमारे समय में आप हैं 
    हमारे साथ और सम्मुख 
    जन्मदिन मुबारक हो !
    (जून 2014)


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    I have received a mail from Vineet Tewari which is very disturbing:

    ''Alirajpur in Madhya Pradesh is targetted afresh by RSS and Bajrang Dal. Playing high volume music on DJs in front of the mosque and trying to provoke Muslim community has been continued since Ramnavmi. But yesterday, one shop of a Muslim was put to fire. A Muslim boy was beaten. I talked to some people in Alirajpur. I talked to some people in Alirajpur and Jhabua and they told that the atmosphere is very tense. Police and administration are either supporting the hooligans or they have chosen the role of becoming silent spectators. The officers are reassuring their senior authorities sitting in Bhopal and Indore that everything is under control. I request all concerned to keep an eye on Alirajpur. It is a Adivasi dominated area of Western Madhya Pradesh which is also known for heroic battles fought by Adivasis against forced displacement. 
    Please phone or email or fax to Collector and S. P. of Alirajpur showing concern about these communal incidents there. Please also inform about these things to friends in media. Please make administration and Police feel that there are people who are keeping a close watch on the incidents to make sure that communal harmony remains intact. Recently, it was reported in 2nd March's Hindustan Times Indore edition newspaper that some Christian's farm was attacked by some so called Hindu right wingers alleging him to be involved in conversion using the same old excuse.
    Please do something soon. I talked to my contacts in that area and they sounded quite afraid. If a delegation could meet DGP at Bhopal, that may serve as preventive measure.''
    Vineet Tiwari
    09893192740.


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    अब अकेले वाम क्षत्रप माणिक सरकार निशाने पर हैं

    एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास

    हिंदू साम्राज्यवाद का शत प्रतिशत हिंदुत्व का एजंडा और ईसाई इस्लाम सिख बौद्ध समेत विधर्मी मुक्त संपूर्ण निजीकरण और संपूर्ण विनिवेश का पीपीपी गुजरात माडल का हिंदू राष्ट्र बहुजनों के हिंदू कायाकल्प और विधर्मियों को घेर घारकर घर वापस लाने के आखेट कार्यक्रम के बावजूद तबतक पूरा नहीं हो सकता जबतक भारत में लाल झंडे की चुनौती कायम है।विधर्मियों कोारक्षण से वंचित करके ताजा फारमूला संपूर्ण हिंदुत्वकरण का आजमाया जा रहा है तो बहुजनों का हिंदुत्व कायाकल्प  हो गया है।


    देश भर में हाशिये पर हो जाने के बावजूद,बंगाल और केरल में सत्ता से बेदखल हो जाने के बावजूद, जनांदोलनों और जनाधारों से अलगाव के बावजूद वाम विचारधारा की आग अभी बुझी नहीं है,यह कुलमिलाकर संघ परिवार के लिए एकमेव सबसे बड़ी चुनौती हैै।


    देश की बहुसंख्य जनगण और सामाजिक और उत्पादक शक्तियों की गोलबंदी की इच्छाशक्ति न होने के बावजूद देश में प्रतिबद्ध वाम कार्यकर्ताओं का अभी टोटा नहीं पड़ा है।नेतृ्त्व की पहल पर ये कार्यकर्ता संघपरिवार के विजयअभियान में कभी भी रोड़ा बन सकते हैं,संघ परिवार और बजरंगी ब्रिगेट के साथ साथ बिलियनरमिलियनर सत्ता वर्ग के सरदर्द का सबब यही है।


    बंगाल में प्रलयंकार धर्मोन्मादी दीदीमोदी रणनीति के तहत वसंत बहार है और फिलहाल वोटबैंक समीकरण के ध्रूवीकरण के हिंदुत्व उन्माद और अल्पसंख्यकों में कयामत बन रही असुरक्षा के चलते वाम वापसी सत्ता में होने नहीं जा रही है।


    इसके बावजूद नेतृत्व परिवर्तन के साथ साथ बंगाल में एसयूसी और लिबरेशन समेत वाम शक्तियों के ध्रूवीकरण से सत्ता तबके में खलबली मच गयी है।


    छात्र फिर सड़कों पर उतरने लगे हैं पूरे बंगाल भर में।


    माकपा महासचिव येेचुरी बनेंगे या कामरेड महासचिव की पत्नी वृंदा कारत,संघ परिवार का सरदर्द जाहिर है यह नहीं है।


    विभिन्न सेक्टरों में ट्रेड यूनियनों की बढ़ती हलचल और बंगाल में जूट ट्रेड यूनियनों की अभूतपूर्व एकता की वजह से हुई वेतन वृद्धि बंग विजय के अश्वमेधी घोड़ों की टापों में कांटों की फसल उगाने लगी हैं।


    कल तक जो लोग चिटफंड फर्जीवाड़ा में ममता बनर्जी,उनके परिजनों,उनके मंत्रियों और उनके सांसदों को घेर रहे थे,वे शारदा फर्जीवाड़ा में मुकुल राय को क्लीन चिट देकर उन्हें सरकारी गवाह बनाये जाने पर खामोश हैं औरक मोदी से दीदी के मुलाकात के बाद तृणमूल प्रसंग में दीदी के खिलाफ बाबुलंद आवाजों में सन्नाटा ही सन्नाटा है।


    आईवाश के बतौर तृणमूल के चार साल के आय व्यय के सिलसिले में मौजूदा तृणमूल महासचिव सुब्रत बख्शी को नोटिस सीबीआई जरुर भेज रही है लेकिन एक के बाद एक अभियुक्त की जमानत पर रिहाई रोकने की कोई कोशिश सीबीआई कर नहीं रही है।


    न कल तक तृणमूल के महासचिव रहे मुकुल राय से कोई पूछताछ हो रही है।


    इस पर तुर्रा कि भाजपा ने मुकुल राय को पार्टी में शामिल करने से सिरे से मना कर दिया है तो दीदी ने उनसे कहा है कि वे संयम बरतें तो उनकी पुरानी हैसियत बहाल हो जायेगी।


    गौरतलब है कि शारदा मीडिया समूह की मिल्कियत के लिए बहुचर्चित मुकुल पुत्र विधायक को उनके जिले में पालिका चुनाव की कमान भी सौंपी गयी है।


    अब इंतजार सिर्फ जंल से मंत्रित्व कर रहे मदनमित्र की रिहाई का है और कबीर सुमन बतर्ज गिरफ्तार सांसद कुणाल घोष के आत्मसमर्पण का।



    इसी बीच रोजवैली के खिलाफ ईडी की कार्रवाई तेज है जबकि चिटफंड घोटालों से निपटने के लिए पुलिसिया हकहकूक मिलने के बावजूद देशभर में हजारोंहजार चिटपंड कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय संघपरिवार के केसरिया कारपोरेट बिजनेस फ्रेंडली राजकाज में रिजर्व बैक की जगह ले रहे सेबी पूरी भारतीय अर्थ व्यवस्था को ही समग्र चिटफंड कंपनी में तब्दील करने लगी है।


    बंगाल में एमपीएस के सभी कार्यालय भी सील किये जा रहे हैं।लेकिन एमपीएस में किसी खास राजनेता के खिलाफ कोई आरोप नहीं है।


    कलिंपोंग के डेलो बंगला में मुकुल राय और ममता बनर्जी के साथ सुदीप्तो की मौजूदगी में बंगाल में वाम बेदखली के विधानसभा चुनावों में नोटों से भरी सूटकेसों की बंदोबस्त बैठक में हाजिर रहने वाले रोजवैली के गौतम कुंडु गिरफ्तार कर लिये गये हैं और इस सिलसिले में न ममता से और न मुकुल से कोई पूछताछ हो रही है।रोजवैली बंगाल में तमाम खेलोंं,फिल्मों और दुर्गोत्सव तक के प्रायोजक होने के बावजूद शारदा फर्जीवाड़े को लेकर कल तक जमीन आसमान एक करने वाली ताकतें गौतम कुंडु की गिरफ्तारी के बाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार को मदन मित्र बनाने लगे हैं।


    आगरतला में विपक्ष का आरोप है कि माणिक सरकार चूंकि रोजवैली के दो कार्यक्रमों में गौतम कुंडु के साथ मंच पर थे और उनने रोजवैली को त्रिपुरा में निवेश का न्यौता भी दिया था तो निवेशक इससे भ्रमित हो गये।


    आगरतला और कोलकाता में अब चिटफंड प्रकरण में एकमात्र माणिक सरकार निसाने पर हैं जो संजोग से देश के सबसे गरीब और ईमानदार मुख्यमंत्री माने जाते हैं।जो अखबार और मीडिया कल तक शारदा फर्जीवाड़े की सुर्खियों का महोत्सव मना रहे थे,वहां अब माणिक सरकार को जेल में बंद मंत्री मदन मित्र के बराबर खड़ा करके उन्हें भी जेल भेजने की मांग कर रहे हैं।



    अस्मिता आधारित राजनीति अब हिंदू साम्राज्यवादी एजंडा में समाहित है।वैसे भी क्षत्रपों की राजनीति की कोई स्वतंत्र धारा नहीं है।


    भले ही वैचारिक स्तर पर वे रंग बिरंगे झंडों के साथ राजनीति करते हों लेकिन उनकी सारी राजनीति राज्यों में अपनी सत्ता बहाल करने की राजनीति है और इसीलिए नवउदारवाद की संतानों की निरंकुश सत्ता नई दिल्ली से देशभर में बेदखली अभियान के नरमेध राजसूय में निरंकुश है।


    राजनीति अब एक ध्रूवीय मुक्तबाजारी हिंदुत्व की है और इसके कुलमिलाकर दो दल हैं कांग्रेस और संघपरिवार,जिनका एजंडा मुक्तबाजारी हिंदुत्व है और उन्हें क्षत्रपों की अस्मिता राजनीति का बार बार समर्थन मिलता रहता है।इसलिए आर्थिक सुधारों की हरित क्रांति बेरोकटोक बिना प्रतिरोध की जारी है।


    बजटसत्र में इसी संसदीय राजनीति की पुनरावृत्ति हुई है।


    अबाध विदेशी पूंजी और कालाधन वर्चस्व के लिए जरुरी दूसरे चरण के आर्थिक सुधारों और दूसरी हरित क्रांति की जैविकी फसल इस कायनात को तबाह करने के लिए कयामत का शत प्रतिशत हिंदुत्व के स्वर्णि बुलेट राजमार्ग का रसायन बनाने लगी है।


    सारे अमेरिकी इजरायली हितों के पोषक उन्ही के निर्देनासार कायदे कानून वैश्विक इशारों के तहत केसरिया कारपोरेट राजकाज में बेलगाम सांढ़ों और घोड़ों की अंधी दौड़ के तहत क्षत्रपों के बिना शर्त समर्थन से पास हैं।



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    (17-23 जून 1984 शान-ए-सहारालखनऊ)

    हिंदी पत्रकारिता या हिंदू पत्रकारिता?

    आनंद स्वरूप वर्मा

    स्वर्ण मंदिर में सेना के प्रवेश पर हिन्दी के समाचार पत्रों का रुख अजीबो-गरीब रहा है। कल तक जो अखबार पंजाब समस्या के समाधान के लिए द्विपक्षीयत्रिपक्षीय या सर्वदलीय बैठकों की बातें करते थेउन्होंने भी सैनिक समाधान पर अचानक सारी उम्मीदें टिका दीं। इंका की कोशिशों,अकाली दल की गलतियों और उग्रवादियों की साजिशों से पंजाब में उन दिनों सांप्रदायिक आधार पर जो ध्रुवीकरण हो रहा था उसका प्रतिबिंब बहुत स्पष्ट रूप में हिन्दी के अखबारों में देखने को मिला। यह पहला मौका था जब किसी राष्ट्रीय समस्या पर हिन्दी के अखबारों ने इतने जोश के साथ संपादकीय लिखे। नयी दिल्ली से प्रकाशित दो प्रमुख राष्ट्रीय दैनिक पत्रों 'नवभारत टाइम्स'और 'जनसत्ताके संपादकों में तो मानों होड़ लग गई थी कि कौन कितनी मुश्तैदी से श्रीमती गांधी के लिए नये-नये विशेषणों की खोज कर सकता है। इन संपादकीय अग्रलेखों को देखने से लगता है कि दोनों डर रहे थे कि कहीं सेना स्वर्ण मंदिर में घुसे बगैर वापस न आ जाए इसलिए दोनों शाबाशी देने की मुद्रा में होश हवास खोकर 'बक अपकरने में लगे थे।

    'नवभारत टाइम्सके संपादक राजेन्द्र माथुर तो इतने उत्तेजित थे कि भाषा पर ही नियंत्रण खो बैठे और अश्लील हो गए। उन्होंने लिखा -'हत्यारों, सिरफिरों और बैंक लूटने वालों के अलावा देश में शायद ही ऐसा कोई वर्ग होगाजो इस कार्रवाई (अर्थात सेना भेजने का) का विरोध करेगा।'माथुर साहब की इस कसौटी पर रख कर देखा जाए तो चन्द्रशेखरसुब्रमण्यम स्वामीजार्ज फर्नाण्डीजखुशवंत सिंह या इन पंक्तियों का लेखक 'सिरफिरा''हत्याराया 'बैंक लूटने वालाहोना चाहिए। दूसरी तरफ 'जनसत्ताके संपादक प्रभाष जोशी ने श्रीमती गांधी के गुणगान में लिखा-'गनीमत है कि इतनी देर तक पार्टी के पीलिया से पीली पड़ी प्रधानमंत्री की आंखों और डण्डा उठाने से पहले कांपते हाथों ने कुछ देखा और किया।'

    मजे की बात है कि इन महान संपादकों के हस्ताक्षर से एक दिन पहले प्रकाशित अपील में कहीं यह मांग नहीं की गयी थी कि पंजाब में सेना भेजी जाए फिर अचानक रातों रात इनके अंदर यह शौर्य कहां से आ गयाक्या नम्बर 1,सफरदजंग से कोई ऐसा टॉनिक मिल गया था जिसने किसी को अश्लीलता की सीमा तक जाने और किसी को अनुप्रास से युक्त भाषा की छटा बिखेरने के लिए बाध्य कर लिया? 'देश के शरीर में पके आतंकवाद के फोड़े पर चीरा लगाकर पस निकालना जरूरी हैलिखने वाले जोशी महोदय ने अतीत में अगर इतनी ही शिद्दत के साथ वार्ता के जरिये पंजाब समस्या को हल करने पर जोर दिया होता तो आज उनकी ऊर्जा सेना और प्रधानमंत्री के गुणगान की जगह कहीं और लग सकती थी।

    इन संपादकों ने प्रेस सेंसरशिप को भी इस तरह स्वीकार किया गोया वह सरकार का पुनीत कर्तव्य है। राजेन्द्र माथुर लिखते हैं, 'अगर आपने मरीज को क्लोरोफॉर्म देकर ऑपरेशन टेबल पर बेहोश लिटा दिया है और सारे रिश्तेदारों को कमरे के बाहर कर दिया है और चीर फाड़ खत्म होने तक खबरों पर पाबन्दी लगा दी है तो आप चाकू लेकर घण्टों चुपचाप खड़े नहीं रह सकते और उसे चम्मच की तरह चूस नहीं सकते।'

    सेना की जैसे जैसे कार्रवाई तेज होती गई इनका जोश उबाल खाने लगा। माथुर ने 6 जून को एक 'भारतावतारका दर्शन किया और 'आसमान पर बिजली के अक्षरों से  लिखे'संदेश देखे तो प्रभाष जोशी ने भारतीय सेना द्वारा 'इस्पात के अक्षरों से भारत की धरती पर  लिखे'शब्द पढ़े और महसूस किया कि 'फोड़े को चीरा लगा कर आतंकवाद का पस निकालना जरूरी था।'

    इन संपादकों के दायित्वबोध से संबंधित कुछ सवाल पैदा होते हैं। क्या ये दोनों सज्जन हिंदू सांप्रदायिकता की चपेट में आ गये थेआखिर क्या वजह है कि 'ट्रिब्यून' (अंग्रेजी) का संपादक प्रेस सेंसरशिप का विरोध करने का साहस दिखा सकता है पर हिंदी के ये संपादक उसकी वकालत करते रहेआखिर क्या वजह है कि 4 जून का ही 'टाइम्स आफ इंडियाअपने संपादकीय में उस दिन कोजिस दिन सेना ने पंजाब में प्रवेश किया भारतीय इतिहास का 'सबसे दुखददिन कहता है जबकि राजेंद्र माथुर इसे एक गौरवशाली दिन मानते हैंआखिर क्या वजह है कि राजेंद्र माथुर को पंजाब पर सेना की जीत 'समूचे देश की जीत' (7 जून) लगती हैक्या वजह है कि अंग्रेजी के किसी अखबार ने ऐसा नहीं लिखा जिससे यह आभास हो कि भारतीय सेना ने किसी शत्रु देश के खिलाफ कार्रवाई की होक्या भिंडरावाले के धार्मिक उन्माद का यह दूसरा रूप नहीं है जो शब्दों के माध्यम से सामने आ रहा हैआखिर कब तक हिंदी के सम्पादक  मुंह से लार टपकाते हुए सत्ता की तरफ ललचायी नजरों से निहारते रहेंगे?

    1975 में जब इमरजेंसी लगी थी उस समय की स्थिति से यदि आज की स्थिति की तुलना करें तो श्रीमती गांधी को काफी संतोष मिलेगा। पंजाब में जो कुछ हुआ वह कल जम्मू कश्मीर में होने जा रहा है। पंजाब ऑपरेशन की सफलता से ज्यादा खुशी उन्हें यह देखकर हो रही होगी कि आज पत्रकारों में माथुरों और जोशियों की एक कतार खड़ी हो गयी है जो 1975 में नहीं थी।

     

     

     


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  • 04/04/15--02:35: # पंचामृत # # बेचो सोने की चिड़िया # के मुक्तबाजारी केसरिया शत प्रतिशत हिंदू राष्ट्र एजंडा के मुताबिक बौद्धमय भारत की विरासत को तिलांजलि मुसलमानों,ईसाइयों,सिखों और बौद्धों,दलितों,आदिवासियों और शरणार्थियों के साथ कृषि, कारोबार, उद्योग,पर्यावरण और प्रकृति के खिलाफ अश्वमेध जारी,नरसंहार संस्कृति से बचेगा नहीं कोई,जो मलाईदार हैं,नवधनाढ्य हैं और बहजन ,गैरआर्य हैं,वे भी विधर्मियों को आरक्षण नहीं,बाबासाहेब की वजह से बने रिजर्व बैंक का निजीकरण, योजना आयोग से लेकर यूजीसी तक का सफाया,इतिहास विकृति, संपूर्ण निजीकरण, संपूर्ण विनिवेश,धर्मनिरपेक्ष डिलीट,अमेरिकी इजरायली हितों के मुताबिक अर्थव्यवस्था और विदेश नीति के बाद अब तिरंगे में अशोक चक्र की जगह कमल खिलाने की बारी कब तक सोये रहेंगे हिंदुत्व के शिकंजे में मुक्तबाजारी चकाचौंध में मारे जा रहे बहुसंख्य बहुजन,उनके जागे बिना यह कयामत अब थमेेगी नहीं पलाश विश्वास
  • # पंचामृत  #

    # बेचो सोने की चिड़िया # के मुक्तबाजारी केसरिया शत प्रतिशत हिंदू राष्ट्र एजंडा के मुताबिक  बौद्धमय भारत की  विरासत को तिलांजलि


    मुसलमानों,ईसाइयों,सिखों और बौद्धों,दलितों,आदिवासियों और शरणार्थियों के साथ कृषि, कारोबार, उद्योग,पर्यावरण और प्रकृति के खिलाफ अश्वमेध जारी,नरसंहार संस्कृति से बचेगा नहीं कोई,जो मलाईदार हैं,नवधनाढ्य हैं और बहजन ,गैरआर्य हैं,वे भी


    विधर्मियों को आरक्षण नहीं,बाबासाहेब की वजह से बने रिजर्व बैंक का निजीकरण, योजना आयोग से लेकर यूजीसी तक का सफाया,इतिहास विकृति, संपूर्ण निजीकरण, संपूर्ण विनिवेश,धर्मनिरपेक्ष डिलीट,अमेरिकी इजरायली हितों के मुताबिक अर्थव्यवस्था और विदेश नीति के बाद अब तिरंगे में अशोक चक्र की जगह कमल खिलाने की बारी

    कब तक सोये रहेंगे हिंदुत्व के शिकंजे में मुक्तबाजारी चकाचौंध में मारे जा रहे बहुसंख्य बहुजन,उनके जागे बिना यह कयामत अब थमेेगी नहीं


    पलाश विश्वास

    कृपया गौर करें कि यह आलेख लिखते हुए पंक्ति दरपंक्ति इसे फेसबुक पर तत्काल पोस्ट कर रहा हूं इस उम्मीद से कि आपकी शिराओं और धमनियों में मनुष्यता की कोई धड़कन बची है,तो आप इस संवाद में शामिल हों।


    हम गलत हैं तो फौरन टोंके।अपने विचार बेखटके लिखे।गालियां देना हो,जात कुजात,राष्ट्रद्रोही,पाकिस्तानी मुसलमान ईसाई जो भी मन में आयें,तुरंत उसे बोल देने लिख देने की हिम्मत भी करें।

    # पंचामृत  #

    # बेचो सोने की चिड़िया #  के मुक्तबाजारी केसरिया शत प्रतिशत हिंदू राष्ट्र एजंडा के मुताबिक  बौद्धमय भारत की  विरासत को तिलांजलि।


    मुसलमानों,ईसाइयों,सिखों और बौद्धों, दलितों, आदिवासियों और शरणार्थियों के साथ कृषि, कारोबार, उद्योग,पर्यावरण और प्रकृति के खिलाफ अश्वमेध जारी,नरसंहार संस्कृति से बचेगा नहीं कोई,जो मलाईदार हैं,नवधनाढ्य हैं और बहजन ,गैरआर्य हैं,वे भी


    विधर्मियों को आरक्षण नहीं,बाबासाहेब की वजह से बने रिजर्व बैंक का निजीकरण, योजना आयोग से लेकर यूजीसी तक का सफाया,इतिहास विकृति, संपूर्ण निजीकरण, संपूर्ण विनिवेश,धर्मनिरपेक्ष डिलीट,अमेरिकी इजरायली हितों के मुताबिक अर्थव्यवस्था और विदेश नीति के बाद अब तिरंगे में अशोक चक्र की जगह कमल खिलाने की बारी

    कब तक सोये रहेंगे हिंदुत्व के शिकंजे में मुक्तबाजारी चकाचौंध में मारे जा रहे बहुसंख्य बहुजन,उनके जागे बिना यह कयामत अब थमेेगी नहीं?


    मीडिया की खबरों की तह में जाने की कोशिश करें नमो बुद्धाय,नमो जयमूलनिवासी और जयभीम का नारा लगाने वाले,14 अप्रैल को ईश्वर बना दिये गये भूले हुए बाबासाहब,रोज मारे जा रहे बाबासाहेब के अंध भक्तों,क्रांति और प्रतिक्रांति का इतिहास याद करके गौतम बुद्ध के मार्ग से भटके धर्मांतरित और भारत को फिर बौद्धमय बनाने के मिथ्या अभियान के तहत बुनियादी मुद्दे भूलकर मलाई चाटने कोअब्यस्त नवब्राह्मण पढ़े लिखो,जड़ों से कट, सामाजिक यथार्थ से अंधे,हिंदुत्व के धर्मोन्माद में मनुस्मृति शासन के सैन्य राष्ट्र की धर्मोन्मादी पैदल सेनाओं, जिनकी दिनचर्या पुरखों के नाम आंसू बहाने से शुरु होती है और अंत होती है,अब नहीं जागे ,तो कब जागोगे?


    जानकारी और विचार शेयर करने के बजाय चुटकुलों ,मौजमस्ती और तस्वीरें सोशल मीडिया में डालकर क्रांति करने वाले मक्कारों अब भी जागो कि मौत खड़ी है सर पर और वार कभी भी किसी पर कभी भी हो सकती है।


    हम पहले भी कह चुके हैं,लिख चुके हैं,जो तवलीन सिंह जैसी समर्थ पत्रकार और हमारे अकाली सिख स्वजन भी समझ नहीं सकें और न धर्मातरित बहुजन समझ रहे हैं कि हिंदुत्व की यह सुनामी जो उनने अपने हिंदू कायाकल्प से हनुमान यंत्र पहनकर बजरंगी बनकर फेंके हुए टुकड़ों और जूठन बटोरने की पहचान की राजनीति और सत्ता की अस्मिता चाबी के लिए तमाम हक हकूकों से बेदखल होने के बावजूद मनुस्मृति अनुशासन के राजकाज से आंखें मूंदे उसे ही बहाल रखने के लिए रच दी है।


    अब उसी  हिंदुत्व एजंडा के मुताबिक शत प्रतिशत हिंदुत्व का मतलब आनंद तेलतुंबड़े के कहे मुताबिक जाति व्यवस्था,रंगभेदी नस्ली और भौगोलिक भेदभाव,सर्वव्यापी अस्पृश्यता, अन्याय, असमता,उत्पीड़न,जनसंहार की समरसता के नाम पर हिंदुत्व की नर्क चुनने की बाध्यता है।


    हिंदू जो नहीं हैं,वे आरक्षण के लाभ उठा नहीं पायेंगे।इसका मतलब सिर्फ मुसलमानों और ईसाइयों के 2021 तक सफाये का घोषित एजंडा नहीं है।बाकी तमाम लोगों का और खासतौर पर बहुजनों का सफाया है और इस सफाये में बहुजन सिपाहसालार अगुवा सिपाहसालार हैं तमाम।


    हिंदू साम्राज्यवादके विश्वविजयी विजयरथ के पहियों में समाहित है बहुजनों का जीवन मरण,इसीलिए हिंदुत्व की जयजयकार है।


    इसका सीधा मतलब है कि सिखों का ब्लू स्टार फिर दोहराया जाने वाला है।


    बारंबार दोहराया जायेगा बाबरी विध्वंस,भोपाल गैस त्रासदी,केदार जलप्रलय और गुजारात नरसंहार।

    और बौद्धकाल के बाद बौद्धों का जो सफाया हुआ,बाकी बचे खुचे और हिंदुत्व के नर्क से भागे धर्मांतरित बौद्धों,मुक्तबाजारी अर्थव्यवस्था के मुताबिक अबाध इजराइली और अमेरिकी पूंजी के नस्ली वर्ण वर्चस्व के हितों मुताबिक तमाम किसानों,तमाम बहुजनों,तमाम आदिवासियों,तमाम बस्तीवालों,तमाम बंजारों,तमाम कारोबारियों,तमाम हिमालयी जनता और तमाम देशज उद्यमियों का सफाया है।सफाया है।सफाया है।


    सलवा जुड़ुम और आफसा सर्वव्यापी है इसका मतलब।


    इसका मतलब सर्वव्यापी नस्ली रंगभेद और वर्ण वर्चस्व की संघ परिवारी समावेशी विकास पीपीपी और समरसता हरितक्रांति डाउ कैमिकैल्स मनसैंटो है।

    इसका मतलब मतलब घर घर  फर्जी मुठभेड़ है।


    इसका मतलब है गांव,देहात,कस्बों और नगरों,उपनगरों,महानगरों,अरण्यों,घाटियों ,समुंदरों, मरुस्थलों और हिमालय के उत्तुंग शिखरों तक में निरंकुश बेदखली का भूमि अध्ग्रहण अध्यादेश गैरसंसदीय है और उसे बारंबार महामहिम की मंजूरी लंबित बिलियन डालरों की परियोजनाओं के तहत #सोने की चिड़िया# को #बेचो# लूटो# अश्वमेध अभियान #और #निरंकुश सांढ़ों और घोड़ों# की #अंधी दौड़# है।


    इसका मतलब है देश विदेश दंगों का अबाध निरंतर प्रवाहमान दावानल है,जो सात समुंदर के पानियों से बुझेगा नहीं क्योंकि यह केसरिया कारपोरेट राज का सबसे बड़ा एजंडा हिंदुत्व की नर्क में घर वापसी और इंकार करने वालों का सामूहिक वध का है।


    मतलब भारत के डिजिटल बायोमेट्रिक रोबोटिक क्लोन नागरिकों के लिए आसमान में ड्रोन है तो जमीन पर इंसानियत और कायनात को रौंदती देशी विदेशी पूंजी की बुलेट ट्रेनें हैं।


    इसका मतलब है जमीन आसमान और अंतरिक्ष में भौगलिक सीमाओं के आर पार पीपीपी माडल गुजरात है क्योंकि पंचशील सिर्फ भारत का नहीं,बौद्धमय विश्व है, जिसके खिलाफ इस खुली युद्ध घोषणा का मतलब है कि बहुजनों का संहार।


    पौराणिक जमाने की तरह राक्षस, असुर, दैत्य, दानव,गंधर्व,वानर आदियों की तरह बहुजनों की अलग अलग अस्मिताओं में बंटी पूरी जनसंख्या का सफाया जो उत्तरआधुनिक अर्थशास्त्र भी है कि बाजार से बाहर के लोगों को जीने का कोई हक हकूक नहीं है और यह दरअसल #मनुस्मृति का स्थाईभाव# है।


    बहुजनों और खासकर नमोबुध्धाय संप्रदाय के अंबेडकर अनुयायियों इसे समझने की कोशिश करें कि हिंदू एफडीआई मीडिया,जिसके ज्यादातर सवर्ण नामदार खासदार पदधारी नामी गिरामी हिंदुत्व से लड़ने का मिथ्या श्रेय फर्जी मसीहा वृंद को देकर विदेशी पूंजी और विदेशी इशारों के मुताबिक जनमत बनाते हैं।


    और हम जैसे स्वयंभू विद्वान उऩकी पैदल सेना बने उनकी ओर से स्पेस से भी वंचित,पहचान,वजूद और हैसियत से रंगभेदी भेदभाव के तहत बेदखल हैं,हम तमाम लोग सिर्फ केसरिया कारपोरेट एफडीआई राज के गुलाम हैं और सच बोलने लिखने के लिए कतई आजाद नहीं है।


    हमारे पर काट दिये हैं।


    हमारे सरकलम हैं और हम कबंधों की जमात हैं,जिनके अपने न विचार हैं और न दिलोदिमाग और न भारत की सरजमीं में कोई जड़ें हैं।


    हम नरसंहार संस्कृति की पृष्ठभूमि रचने में ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देख रहे हैं और मुक्तबाजार के लोकतंत्र में हम अपने स्वजनों की खून की नदियों को सिर्फ बहुत जरुरी हुआ तो सुर्खियों में तब्दील करनेवाले औऱ फिर उन सुर्खियों को मनोरंजन और विज्ञापन की चाशनी में एफडीआई हितों के मुताबिक मिटाने के विशेषज्ञ हैं।


    हम युद्ध अपराधियों और मनुष्यता के दुश्मनों को सत्ता में बहाल रखने वाले बिलियनर मिलियनर जमात के गुलाम हैं जिनमें भी नब्वे फीसद की हालत बंधुआ मजदूरों से बदतर कूकूरदशा है,चाहे वे सवर्ण हों या बहुजन।


    जो समान रुप से पादते रहने के बाद इतने विकलांग हैं,इतने मूक हैं कि अपने हक हकूक की लडा़ई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर छोड़े हुए हैं।


    इसी मीडिया के लोग पंचशील को नेहरु की बपौती बता रहे हैं और कह रहे हैं कि दशकों से भारत की विदेश नीति नेहरू के जिस शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पंचशील सिद्धांत की बात करती है, उसे अब पंचामृत का रूप दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि पंचामृत अब भारतीय विदेश नीति के नए आधार स्तंभ होंगे।


    हमारी बिरादरी के लोग कभी यह सच नहीं बता सकते कि इससे भारत की बौद्धमय विरासत,गौतम बुद्ध और गांधी अंबेडकर तक की विरासत को तिलांजलि देकर अब अशोक चक्र की जगह तिरंगे पर कमल ही कमल खिलाने का स्थाई बंदोबस्त हो रहा है।


    यह पंचामृत भारत के बहुजनों के नरसंहार के लिए इजरायली और अमेरिकी हितों के ग्लोबल हिंदुत्व का हिंदू साम्राज्यवादी एजंडा है और इसका ताल्लुकात संघ परिवार के 2021 तक भारत को विधर्मी मुक्त शत प्रतिशत हिंदुत्व की नर्क में तब्दील करने के एजंडे से है,जो सबसे भयानक आर्थिक सुधार है।


    क्योंकि एडम स्मिथ का अर्थशास्त्र भी मुकम्मल मनुस्मृति अर्थशास्त्र के एकाधिकारवादी नस्ली वर्णवर्चस्वी मुनाफा वसूली के आगे कुछ भी नहीं है।


    इस सच को मुक्तबाजारी कार्निवाल में तब्दील करनेवाले वाम दक्षिण सभी किस्म के पत्रकार और अर्थशास्त्री,तमाम जनविरोधी बिलियनर मिलियनर रंग बिरंगे राजनेता जितने सक्रिय हैं,उनसे लाख गुणा सक्रिय हैं वे सफेद झां चकाचक मसीहा वृंद के उजले चेहरे जो अपनी चकाचौधं से,भाषाई दक्षता से ,विद्वता से,जनता के बीचअपनी लोकप्रियता और साख से,मौकापरस्त कलाबाजियों और करतबों से,सत्ता की मलाई से रोजाना करोड़ों के भाव बिककर हमारी गला रेंत रहे हैं पल छिन पल छिन।


    और हम उनके लिए तमाम धर्मश्थल सजाये अरदास करने वाले अंध भक्त बहुसंख्य बुरबक भेड़िया धंसान भारतीय जनगण हैं,जिनके लिए न कोई राष्ट्र है और न लोकतंत्र और न कोई न्यायप्रणाली।


    हम खूंखार भेड़ियों को भी ईश्वर बनाने वाले लोग हैं।सबसे जहरीले सर्पों के उपासक हैं हम।



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    (Nepali version given below)

    "FOR IMMEDIATE RELEASE"

    PRESS RELEASE

    "Dr. CK Raut was attacked by Nepal 

    ​Police during peaceful mass assembly"

     

    Jhapa, Nepal 4th April, 2015, Saturday, Nepal police intervened in a peaceful mass assembly of Madheshi activists around 14:00 at the aboriginal place of Madheshis in Rajgadh Market of Jhapa district, used excessive force on Dr. CK Raut along his supporters. Police arrested him along five dozen of activists working for freedom of Madhesh.

    Later, Dr. Raut was admitted in hospital due to injury. Police have disrupted the peaceful assembly by unlawfully arresting Dr. Permeshwor Murmu, Dr. Sanjay Sah, Ram Bilash Mehta, Soren Sharma, Bishweshwor Mandal, Tabrej Alam, Tapeshwor Lal Karn, Asha Jha, Ashok Mehta, Jiban Gupta, Shyamanand Sharma, Shotelal Shoren and a dozens of other civilians. Nepal police blocked members to attend the assembly who were coming from villages based on black skin color. 

    Thousands of supporters who came from villages to participate in the peaceful assembly were harassed by the police on their way. Anyone of dark complexion who looked like Madheshi, an ethnic minority group of Nepal, going for the general assembly were harassed and physically manhandled by the Nepal police. This is a racially motivated aggression of the police towards the minority ethnic group and it exposes the color discriminating mentality of Nepal Police. The Government of Democratic Republic of Nepal is using excessive force to disturb the peaceful assembly of aboriginal ethnic minority civilians.

     

    The Government of Nepal (GoN) shows no concern or support for the legitimate case of the peaceful participants like Dashrath Mukhiya, an aboriginal of Jhapa who has become landless in his own native place. We need to be aware and proactive on these issues, otherwise people like him, and many more ethnic minorities of Madhesh will become landless refugees very soon in their own native land.

     

    In the peaceful assembly, Dr. Raut asserted that the five districts of Madhesh (plain), naming, Jhapa, Morang, Sunsari, Kailali, Kanchanpur should not be merged with the Pahad (hill) districts because it defies the geographic logic and the desire of the majority of civilians living in those regions. Further, he challenged for a referendum on independence of Madhesh in the 22 districts of Madhesh.

     

    Huge number armed forces are operating to disrupt the peaceful assembly since yesterday. The GoN has been using excessive force to disturb, harass, arrest and fire at civilians in the peaceful meetings since long time. GoN has been arresting the supporters and participants without any arrest warrants or on false accusation.

     

    They have already falsely convicted Dr. Permeshwor Murmu, Hareram Mandal, Ram Bilash Mehta, Abdul Khan, Irfan Sheikh, Binod Sharraf and Pradip Thakur on false accusation of creating public unrest. Similarly, Santosh Patel (Journalist) of Birgunj, Rajesh Yadav, Rameshwor Sah and Saroj Karn etc are being threatened for their life or harsh consequences by the state security mechanism.

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    Alliance for Independent Madhesh (AIM) is an alliance of Madheshi people, activists, parties and various organizations working for the independence of Madhesh, through non-violent and peaceful means following the principles of Buddha, Gandhi and Mandela. The alliance advocates an end to Nepali colonization, racism, slavery and discrimination imposed on Madheshis. It stands for three pillars: (a) Independent Madhesh (b) Democratic System, and (c) Peaceful and Non-violent Means.

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    Acknowledging that the rights to freedom of speech, movement, peaceful assembly and association are the fundamental rights of all human beings everywhere, as also mandated by the United Nations Universal Declaration of Human Rights, of which Nepal is a signatory, we expect acknowledgement and assurance of our rights from the state and its agencies. We also appeal to all the state and non-state agencies, human-rights organisations, journalists, political parties, diplomats and international communities to oppose any violation of human rights by the state and its agencies.

     

    Contact

    Ass. Prof. Kailash Mahato

    Sub-Coordinator Alliance for Independent Madhesh

    Phone: +977-9847038322

    email: save.madhesh@gmail.com

     

    (तुरन्त वितरणका लागि)

    प्रेस विज्ञप्ति

    नेपाल प्रहरीको  लाठी प्रहार बाट डा. सी. के. राउत घाइते र अस्पतालमा भर्ना

    २०७१ चैत्र २१ शनिवार झापा, नेपाल- मधेशी आदिबासीका जन्मभुमि राजगढ़ बजारझापामा अपराह्न २  बजे  आयोजित शान्तिपूर्ण डा. सि. के. राउतको आमसभामा  नेपाल प्रहरीले   डा. सि. के. राउत लगायत  दर्जनो कार्यकर्ता माथि अन्धाधुन लाठी प्रहार गरि गिरफ्तार गरेर लागेका छन्/ डा. सि. के. राउत अस्पताल मा भर्ना गरिए को जानकारी प्राप्त भए को छ

    सभा बिथोल्न नेपाल प्रहरीले हिजो मन्च निर्माण गर्न अवरोध गरी  जनताहरुलाई हिरासतमा राखी अनेकौ बहानामा यतना दिने काम गरेकाछन्। आज बिहान देखि आम सभामा सहभागी हुन गाउँ गाउँ बाट आउन लागेको हजारों कार्यकर्ता लाई प्रहरीले बाटोमा रोकी राखेको थियो। हरेक नाका बाट सभास्थल तिर जाने कालो रंगको मान्छे हेर्ने बित्तिके प्रहरीले  समाएर रँगभेदी मानसिकता देखाए।

    डा. परमेश्वर मुरमूडा. संजय साहराम बिलाश मेहतासरोज शर्माविशेश्वर मण्डल, तबरेज आलम, तपेश्बर लाल कर्ण, आशा झा, आशोक मेहता, जिबन गुप्ता, श्यामानन्द शर्मा, छोटेलाल सोरेन लगायत दर्जनौ आमजनताहरु लाई प्रहरी प्रशासनले नियन्त्रणमा लिई आमसभा बिथोल्न खोजे।

    लोकतान्त्रिक नेपाल सरकारको नाङ्गो  हस्तछेपले शान्तिपूर्ण आमसभा बिथोले पनि जनसमुदायका बिचमा कार्यक्रमको संयोजक दशरथ मुखियाले झापा जिल्लामा मधेशी आदिबासी आफ़्नै  जन्मभूमिमा सुकम्बासी भएका छन् अहिले नै हामी सजग भएनो भने शरनार्थी  हुनु पर्ने अवस्था आउने छ।

    उक्त आम सभा सम्बोधन गर्दे डा. सी. के. राउतले मधेशका पाँच जिल्लाहरु (झापा,मोरंग, सुनसरी, कैलाली, कन्चनपुर ) कुनै पनि हालतमा पहाडी जिल्ला संग गाभिनु हुदैन र गाभिन जनमत संग्रह गर्ने भए मधेश का २२ जिल्लामा स्वन्त्र मधेशको लागि जनमत संग्रह गर्न चुनौती दिनु भयो।

    स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन बुद्धगांधी र मण्डेलाको अहिंषात्मक सिद्धान्तलाई अनुशरण गर्दै शान्तिपूर्ण मार्गद्वारा मधेशको स्वतन्त्रताको लागि कार्यरत रहेको कुरा सर्वविदित नै छ। गठबन्धनका तीन आधार स्तम्भहरू (क) स्वतन्त्र मधेश (ख) लोकतान्त्रिक व्यवस्थार (ग) शान्तिपूर्ण एवम् अहिंषात्मक मार्ग अनुसार नै आफ्नो नीति निर्धारण र कार्यक्रमहरू गर्दै नेपाल सरकारको कुनै काममा तथा वर्तमान राजनैतिक प्रक्रियाहरूमा वाधा-अडचन नपुर्‍याई शान्तिपूर्ण एवम् संरचनात्मक रूपमा मधेशको विकास तथा सामाजिक उत्थानका लागि गठबन्धन हाल क्रियाशील रहेको छ। तर नेपाल सरकारले मधेशको राजनैतिक मुद्दालाई दबाउने र विमतिका सबै आवाजलाई निर्मूल पार्ने नीति अनुसार गठबन्धनका कार्यकर्ताहरूलाई फँसाउने षड्यन्त्र गर्दै आएको छ।

    यसै क्रममा नेपाल सरकारबाट भएको उपरोक्त घटनाको स्वतन्त्र मधेश गठबन्धन घोर भर्त्सना गर्नुका साथै यस बारेमा देश-विदेशका पत्रकारकुटनितिज्ञराजनैतिक पार्टीवुद्धिजीविमानवअधिकारकर्मी लगायत सबैलाई जानकारी गराउन चाहन्छ। यस किसिमका दमनकारी क्रियाकलापले हाम्रो वाक्‌-स्वतन्त्रताआवत-जावत गर्ने स्वतन्त्रता र भेला हुने स्वतन्त्रतामाथि हस्तक्षेप हुनुका साथै नेपाल सरकारद्वारा मानवाधिकारको हनन भइराखेको कुरा पनि जानकारी गराउन चाहन्छौं। सम्बन्धित व्यक्ति तथा संस्थाहरूले आ-आफ्नो ठाउँबाट नेपाल सरकारका यस्ता क्रियाकलापलाई निरूत्साहित गर्न तथा मानवअधिकारको रक्षा गर्न पहल गरिदिनुहुन पनि हामी हार्दिक अनुरोध गर्दछौं।

    सम्पर्क
    कैलाश महतोउप-संयोजकस्वतन्त्र मधेश गठबन्धन
    फोन: +‌977-9847038322
    इमेल: save.madhesh@gmail.com

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    भूमि अधिग्रहण नहीं ! भू अधिकार चाहिए !!

    भूमि अधिकार आंदोलन

    आमंत्रण

    किसान मज़दूर विरोधी भूमि अध्यादेश २०१५ का विरोध

    अप्रैल ६, 4 बजे, सोमवारजंतर मंतरदिल्ली

    मोदी सरकार ने दुबारा तमाम विरोधों के बावजूद एक बार फिर से किसान - मज़दूर विरोधी भूमि अधिग्रहण अध्यादेश दुबारा ३ अप्रैल को लाया है।  मालूम हो की 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अंतर्गत जबरनअनुचित और अन्यायपूर्ण तरीके से जमीन अधिग्रहण के अनुभवों के आधार पर,  विविध जन आंदोलनों के लम्बे संघर्ष के बाद भूमि अधिग्रहणपुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 में  समुचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार संसद द्वारा अधिनियमित किया गया था । एक दशक तक चले अभूतपूर्व देशव्यापी परामर्शसंसद में और बीजेपी के नेतृत्व वाली दो स्थायी समितियों में बड़े पैमाने पर बहस के बाद ही 2013 का यह भूमि अधिग्रहण अधिनियम बना,  उस वक्त वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष और स्थायी समिति की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ बीजेपी तहेदिल से अधिनियम के समर्थन में थी,और खुलकर इस कानून के प्रावधानों का समर्थन कर रही थी.  और अब एक झटके में लोकतान्त्रिक ढांचे को अनदेखा करके, 2013 के अधिनियम के सभी लाभों को खत्म करते हुए, 1894 के कानून पर वापस आने वाला एक अध्यादेश मोदी सरकार ले आई है. इससेमोदी सरकार लोगों के हितों की पूरी अनदेखी करते हुएकिसी भी कीमत पर कॉर्पोरेट के हितों का विस्तार करने के अपने संकल्प की पुष्टि ही की हैऔर साथ ही इसमें इस बात का संकेत भी मिलता है कि मौजूदा कॉर्पोरेट-सरकार संबंधों में किसी भी तरह के पारम्परिक लोकतान्त्रिक और भारतीय संविधान के ढांचे के मूल्यों से परेशान नहीं किया जायेगा.


    2015 का भूमि अध्यादेश पूरी तरह सेसमुचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार भूमि अधिग्रहणपुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013, का और अन्यायपूर्ण भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सालों के संघर्ष का मजाक बना रहा है ।

    देश के कई किसान - मज़दूर संगठनोंजन आंदोलनों ने मिलकर देशव्यापी "भूमि अधिकार आंदोलन" शुरू किया है और इसके तहत पूरे देश में अध्यादेश के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे । इसी कड़ी में सोमवारअप्रैल ६ को ४ बजे जंतर मंतर,दिल्ली पर किसान और मज़दूर विरोध प्रदर्शन करेंगे और अध्यादेश की प्रतियां जलाएंगे । आपसे आग्रह है आप सभी जुड़े और संघर्ष में साथ दें ।

     

    सम्पर्क : 9958797409, 9818905316, 9911528696, 9818864006





    No Land Acquisition! We Demand Land Rights!!

    Bhumi Adhikaar Andolan

     

    INVITATION

     

    Protest Anti Farmer – Worker Land Ordinance 2015

     

    6th April, 4 pm, Jantar Mantar

     

    The Modi Government has once again proven that it is indeed anti-farmer-labourer and pro-corporates by promulgating the land ordinance 2015 on the eve of 3rd April. Turning a complete blind eye to the nation-wide fierce opposition to the ordinance, neither did the government hold any dialogue with people's movements and affected farmers / labourers groups nor did it pay any attention to the political parties that have opposed this draconian ordinance. With the single-minded agenda of kneeling before the corporates while crores of our citizens are exploited, displaced, disposed and deprived, this government has shown that it simply does not care for the poor and toiling people, for our land, agriculture and nature.

     

    However, we the people's movements, workers unions, farmer organizations and concerned citizens of this country will not allow this government to take this undemocratic and anti-people move and will intensify our opposition in every nook and corner of the country.

     

    Several people's movements and farmers union who have come together under the banner ofBhoomi Adhikar Andolanwill burn copies of this ordinance in every village, block, district and state.

     

    In Delhi, we appeal to one and all to gather at Jantar Mantar, New Delhi at 4 pm to burn the copies of the Land Ordinance to mark our protest against this anti-farmer-workers legislation.

     

    Stop corporate loot of natural resources!!

     

      Contact : 9958797409, 9818905316, 9911528696, 9818864006



    -- 

    In solidarity, 
    Sanjeev Kumar

    Coordinator
    Delhi Forum
    Address: F- 10/12, (Basement), Malviya Nagar,
    New Delhi INDIA - 110017
    Phones: 011-26680883 / 26680914 / +91-9958797409 (Mobile)

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    Open Letter to Arvind Kejriwal by Prashant Bhushan

    http://www.ndtv.com/opinion/open-letter-to-arvind-kejriwal-by-prashant-bhushan-752053

     

    (Prashant Bhushan is a famous lawyer-activist whose public interest litigations have helped expose major scams. He is a founding member of the Aam Aadmi Party.)

     

    Dear Arvind,


    In the National Council meeting held on the March 28, in your Convenor's address, instead of giving a review of the party's situation and the path ahead, you chose to launch an attack on Yogendra Ji, my father and me, making all sorts of false and inflammatory allegations against us. Your speech incited several Delhi MLAs- (who were invited despite not being members of the NC) to scream that we were "gaddars" who should be thrown out, and behave in the manner of hooligans. Such was the ferocity of the mob of these MLAs and others as they rushed towards my father, that he felt that he may not get out of this alive.


    You did not even allow us to respond to your allegations. Immediately after your speech, in the middle of shouting and screaming by MLAs and others, Manish read out a resolution for our removal (without any chair, and without anyone allowing him to do so). He then proceeded to call for vote by show of hands without allowing any discussion, forcing us to walk out of what had clearly become a farce.

     

    It was farcical for many reasons: Many members of the NC had not been invited or allowed to attend; more than half the people inside the meeting hall were non-members, which included MLAs, district and State convenors of four states, volunteers and bouncers; there was no orderly conduct of the proceedings for many reasons, including the hooliganism displayed by many people there; no independent videography was allowed, the party's Lokpal was not allowed, etc.

     


    What has happened subsequent to the 28th, however, has taken the farce to a level where it seems as if a Stalinist purge is taking place in the party. The party's internal Lokpal, a person of immense stature and independence, has been removed unconstitutionally, merely because he expressed his wish to attend the National Council meeting and was seen to be fair; other members of the National Executive are being suspended, again unconstitutionally, only because they had attended a press conference held by us after the hooliganism in the National Council meeting.


    Thereafter, you have ordered the release of a carefully-edited version of your speech at the National Council meeting, containing various false charges against us, and carefully editing out the portions showing the hooliganism of the mob. It is in such circumstances that I am having to write this open letter to you.


    In order to respond to your charges, I would need to go back a bit to see where my serious differences started with you.  If you will remember, my differences started after the Lok Sabha elections, when a series of things happened which began to show two serious defects in your character and personality. Firstly, you wanted  to push through your decisions at any cost in the party, despite the majority of the PAC or the National Executive disagreeing with you. This included  decisions that would have undoubtedly been very harmful for the party and against public interest. And secondly, you were  willing to use some very highly unethical and even criminal means to achieve your ends.

     
    After the Lok Sabha elections, you felt that the party was  finished, and could only be revived if it were  able to form the government again in Delhi. So immediately after the elections, you started talking to the Congress party for taking its support again to  form the government in Delhi. When news of this came out, a large number of important  people in the party including Prithvi Reddy, Mayank Gandhi and Anjali Damania called me up saying this would be disastrous, and if this happens, they would have to quit the party. I was in Shimla at that time, I called you up, and I said that you should not go ahead with this unless there is a proper discussion in the Political Action Committee (PAC).

     
    I immediately came back and we had a meeting of the PAC at  your residence. And at that meeting, a majority of the members - 5:4 - felt that we should not go ahead with forming the government with Congress' support. I had pointed out that this would seem extremely opportunistic, since there was no logical reason for us to change our publicly stated position. I also added that such a government would not last, as the Congress will withdraw support soon, and thereafter, for us to revive the party would become even more difficult.


    Instead of abiding by the majority decision, you said that while that may be the majority view, as the Convenor of the party, you have the right to take the final decision, and that you would go ahead with seeking Congress' support. At that point, I had a verbal argument with you. I said the party can't be run in this manner, and it has to be run by some democratic means. So it was decided to refer this issue to the National Executive which had many more people. This reference was made by email, and people were expected to vote by next morning. By next morning, again a majority of people opposed this decision in the National Executive and yet, a letter was secretly sent by you to the Lieutenant Governor of Delhi saying that he should not dissolve the Assembly for another week because AAP wants to seek the opinion of the people on whether to form the government again.

     
    Immediately after the letter came out, Congress said they were not ready to support AAP and that left us with egg on our face with the result that you had to backtrack the next day and apologize. But despite that, the attempt to form the government with Congress' support or with the support of breakaway MLAs from the Congress continued, as is clear from the sting tape of Rajesh Garg which shows you were wanting to form the government with the support of those MLAs whom you had yourself accused of having being bought over by the BJP for Rs. 4 crore each. How could you even think of forming a government with the support of such people! And this went on till as late as November, just before the dissolution of the Assembly. In November, you called Nikhil Dey and asked him to speak to Rahul Gandhi to convince him to get the Congress party to support. But Nikhil told you that he can't talk to Rahul Gandhi on this issue.


    Can you deny any of these facts? All this, showed your willingness to go against majority opinion, break all democratic rules of the party, and seek unethical support of MLAs whom you yourself had accused of being corrupt, all in the pursuit of power at any cost.

     

    Then came the issue of AVAM or Aam Aadmi Volunteer Action Manch, which was a group of volunteers who wanted their voices heard in the party. Because this was threatening to brew into a rebellion amongst volunteers who felt that they were being used only like slave labour, and because you felt that it was necessary to crush this, it appears that the party got an SMS sent in the name of AVAM, saying that volunteers should join the BJP - the idea was to  suggest  that AVAM had become an agent of the BJP, though the SMS was  fabricated by the party itself in the name of AVAM. And using this, you announced in a Google Hangout that these people had become traitors because of that SMS. And on that basis, Karan Singh, who was the leader of AVAM, was suspended and removed from the party. He appealed to the national disciplinary committee, which I was heading, and he said 'I had been saying that this is not sent by me, please have this investigated'. So I asked you and Dilip Pandey and others to get this investigated, but you steadfastly refused.

     

    Eventually, Karan Singh had to lodge an FIR, and the police investigated the matter and it was found that a volunteer of the party, not of AVAM, called Deepak Chaudhary, created this identity in the name of AAVAAM and used that to send that SMS. You should know Arvind, that impersonating an organisation or persons in order to defame them, is a serious criminal offence. Unfortunately young volunteers in the party under your tutelage are being taught that use of such means is OK in politics, since any means used to defeat a "Bigger evil" is OK.
     
    Then came the issue of whether the party should contest Assembly elections in Haryana and Maharashtra. Again the matter was put to the National Executive by email, and the majority - 15 is to 4 - said that that should be left to state units to decide in accordance with our principle of Swaraj. But you did not allow that decision to be implemented. And eventually, it was rendered infructuous, because elections came too close and finally in that National Executive meet in Sangrur it was decided that there's no point, and one should forget about contesting those elections.

     

    When the Delhi elections were announced and campaigning started, you instructed volunteers to start a campaign 'Modi for PM, Kejriwal for CM'. I said this is totally unprincipled. It means that our party has gone down on its knees before Modi at a time when it was positioning itself as the main opposition to Modi.

    When the process of candidate selection for the Delhi Assembly election of 2015 started, I found there was no transparency. Contrary to earlier practice, we were not posting candidates' names on the website. Even the PAC, which was meant to approve the candidate, was not being sent the bio-data or names of the candidates in advance to enable us to check the records of the candidates. In the second meeting of the PAC to discuss candidate selection, because I had received complaints about two of the candidates who were being proposed in that meeting, I pointed this out. You got very angry saying, "Why do you think we will be selecting crooked people?" I said that is not the point - we need to have some transparency and due diligence. That led to an argument between you and me, and I walked out of that meeting and wrote an email on November 27, that I cannot be a rubber stamp for non-transparent and questionable selection of candidates. That email is now in the public domain.

     

    After that, in the next list, again there were at least four questionable candidates among the 10 names proposed. Yogendra Yadav and I wrote a letter to the PAC on 10th December, detailing the objections against these four and pointing out that this time, the process of candidate selection was very different from the last time. This time, we were giving tickets to a large number of political entrepreneurs who had joined the party only for opportunism, who had jumped  ship from Congress, BJP or BSP at the last moment,  who had no ideological commitment to our party, had no record of public service, and whose sources of wealth weren't explained.

     

    Some of them were people against whom our party had itself complained that they were distributing money or liquor or had beaten up our volunteers. One of them (our initial choice from Wazirpur), went back to the BJP within 4 hours of us announcing his candidature. Your initial choice for the Mehrauli seat, Gandas, had to be dropped at the last moment only because his photographs were circulated with him showing off, with a glass of liquor in one hand and a revolver in the other. Yet, while he was dropped, his brother was given the ticket. Eventually, even he had to be changed because our Lokpal, Admiral Ramdas gave a strong report against him.


    Thereafter, AAP stopped having meetings of the PAC or sending names for the approval of the PAC, and started announcing names on their own. When all this happened, I said "Now enough is enough. If this does not stop, and if there is no credible scrutiny of these candidates, I will have to resign from the party and make public the reasons for my resignation." On that, an emergency meeting was called at my residence on January 4, by Yogendra Yadav, Prithvi Reddy etc which had 16-17 people from all over the country, important functionaries of the party. All of them felt that the party's campaign would be ruined if I resigned at that stage.

     
    In that meeting I said, "Look, all these kinds of compromises are being made, various ethical corners are being cut and now you are selecting these kind of candidates without proper transparency or scrutiny. If you go with these kinds of candidates, then even if you win, the further compromises that you will have to make, will be such that they will completely destroy the USP of the party, which is of being a clean, transparent party, wedded to alternative politics. And instead of winning by using these kinds of candidates, it would be better to lose the elections by going with clean and honourable candidates". That statement is being twisted around to claim that I said that I wanted the party to lose.

     

    I had said that rather than winning by these kinds of candidates and means, it's better to go with honourable candidates and run the risk of a possible loss. Because winning with these kinds of candidates and means destroys the founding principles of the party in the short run, and will destroy the party itself in the long run.

    If I had wanted the party to lose the elections, I would have resigned and gone public with my reasons at that very time. If Yogendra Yadav wanted the party to lose, he would not have convened that meeting and stopped me from going public. Instead, he worked his heart out for this campaign, defended the party on innumerable occasions on TV. And yet you have the temerity to accuse even him, along with me, of working for the defeat of the party!

     

    At the end of that meeting, an arrangement was worked out with your express consent, that: We would immediately refer all the complaints against candidates who had been selected to the Lokpal of the party and his decision would be final. And the rest of the issues of institutional reforms about transparency in the party, accountability, swaraj, inner party democracy - those issues will be taken up immediately after the elections. So those complaints against 12 candidates were referred to the Lokpal. In the 4 days that he had to do this exercise, he recommended the  removal of two against whom there was clear evidence, recommended the issuance of warnings against six against whom there was some evidence, and allowed four to continue. Two were thus removed.
     
    But the other issue of institutional reforms, which was agreed to be taken up within two days of the election results, were not discussed. Instead, the National Executive meeting of February 26, which you chose not to attend, started with Vishwas announcing your resignation and a no holds barred attack on Yogendra Yadav and myself by members of your coterie. The message conveyed by them on your behalf was clear: That the price for your continuing as Convenor was our removal from the PAC and NE. I then responded and pointed out the things I have mentioned above, and the issues of institutional reforms, but those were not discussed. The only issue that was discussed that day was whether you should continue as Convenor.

     

    We all agreed that you should continue, but thereafter, some people went to your residence to meet you, and you made it clear that it's either you or us, and that we have to be removed. And therefore, that is what happened in the next meeting which was held on March 4.

     

    A charge that is made against me is that I did not campaign for the party during this election. I had said that I can't campaign for many of these candidates, and given the manner in which these candidates had been selected, I was willing to campaign only for those candidates about whom I was fairly certain that they were the kind of people who would take the ideology of clean politics forward and work in public interest if they win. I had in fact given a list of five people that I thought were decent. But the party did not send me any programme for addressing public meetings. I therefore went for Pankaj Pushkar's public meetings who had personally invited me.

     

    The other charge made against me is that I stopped people from donating to AAP. When other people asked me whether they should donate etc, I'd said, "Look, you should donate to those candidates who appear to be decent and honest to you". You and your coterie have made the same charge against my sister Shalini Gupta. She also said the same thing that I had said to a closed circle of friends. In fact she strenuously encouraged the Global group to donate to deserving candidates, which is why several candidates got so much funds from NRIs.

     

    Your coterie have also accused my father, my sister and myself of trying to capture the party. Arvind, you know very well that none of us have even wanted any executive positions or tickets for ourselves or any friends or family members. We have only tried to contribute and help in every way that we could to see the party grow into a powerful and credible vehicle for alternative politics in the country. My father, apart from donating more than 2 crores as seed money to the party, has spent an enormous amount of time in giving selfless advice, legal and otherwise to the party. He played a major role in the draft of the Jan Lokpal bill. He worked for the well being of the party with his "tan, man and dhan". Yes, when he felt that you, for various reasons were not the right person to lead the party organisation, he frankly told you so. Apart from the reasons of ethical compromises mentioned above, he also saw that you were violating the constitution and rules of the party repeatedly, not allowing any working structure of the party organisation to be created (other than a coterie), and were not interested in formulating the policies of the party.


    For two years, the elaborate reports of the 34 policy committees that we had set up, have been gathering dust because you havent found the time or have the inclination to look at those reports and apply your mind to them. You accuse my father of having stated that you were his third choice for CM after Kiran Bedi and Ajay Maken. That was his honest view after seeing all the shorcomings in your character that he had been observing. I had immediately publicly disagreed with his opinion, but in the light of what has transpired subsequently, particularly the stage managed lumpenism that you got unleashed in the NC meeting, I regretfully wonder if he was right.


    My sister Shalini Gupta, as well as many other highly qualified persons, left their lucrative jobs abroad to help you build credible and efficient systems which would have proper cells and expertise so that it could function as a world class organisation. On repeated occasions you had yourself asked Shalini to give up her job for the sake of the country and said that her role as Organization Development Advisor was only an advisory role and not a formal position with any power in the party as discussed in the PAC before she was appointed.  However it became clear over time that you did not want any professional advice in this matter. Instead you asked Ashutosh who has no such professional expertise to come up with an alternative plan to make each cell of the party organisation an appendage to your coterie and accountable only to you.


    It is true Arvind that I have not contributed as much as you for the party. I have not fasted, nor gone to jail. I have been mostly involved in my various PILs against various scams, 2G, Coalgate, the CBI director, 4G, the Reliance Gas robbery, against GM foods, Nuclear Power Plants, destructive Hydel projects, Section 66A, Tobacco and Gutka, etc. I have spent the rest of my time giving legal and other advice to the party and fighting its cases in court. I have never been interested in any executive posts and I have seen my role in the party mainly as a person who will try and ensure that it remains true to its founding principles. And it is for this reason that I have raised my voice whenever I have found it to be slipping from its path.


    Arvind, this party was founded with a lot of idealism by thousands of people, especially young people, who came out and spent a lot of their time, effort, energy, money, sweat and blood in order to create a vehicle for alternative politics, in order to create a party that would practice clean and transparent politics. But unfortunately, all those principles are being betrayed by you and your coterie, who are currently in control of the party. And it has become a supremo-oriented, high-command culture kind of party.


    You feel that you can rectify everything by running the Delhi government well in the 5 years that you have. You think that if you deliver on governance, people will forget what you have done to the party. I wish you well in that endeavour. Even traditional political parties like Congress, BJP have done some governance.  But the dream that we started with for clean and principled politics and corruption free governance was much much bigger.  The fear that I have, is that after how you have behaved and the character traits that you have showed, this dream of clean and principled politics that the Aam Aadmi party was founded on may well turn into a nightmare. But still, I wish you well.


    Goodbye and good luck,


    Prashant

     


    ARUN KHOTE
    PMARC

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    एनआरएन एनसीसी अफ युएसएको आशन्न निर्बाचन हुने नहुने टुंगो छैन, कोहि कोहि उम्मेदवारहरुलाई आफ्नो फोटो फेसबुकमा घुमाएर आत्मरति मिलिरहेको छ, कम्तिमा अप्रिल ६ तारिख बेलुका ५ बजे(अमेरिकाको पूर्बी समय) सम्म पनि पर्खने नसक्नेहरुका लागि निर्बाचन २ हप्ता लम्बिए के होला? कति फ्रस्टेसन होला? त्यहि फ्रस्टेसनले काम काज छोडेर घर बस्दै मानसिक रोगको औषधि खाने बनाउन बेर छैन । समाजसेवा गर्न तत्पर यस्ता लालायितहरुले समाजको भलो कदापि चिताउन सक्दैनन, यिनीहरु हरुवा (लूजर) हुन । लूजरहरुलाई जहिले पनि हारको डर हुन्छ, त्यसैले उनीहरु फोटो घुमाएर बिजयको मिठो सपना बुनिरहन्छन । यी बिचराहरुलाई के थाहा? जित्ने ट्रिक जान्नेहरु चुपचाप बसिरहेका छन भन्ने कुरा । हारको डरले फोटो फेसबुकमा घुमाउनेहरुले बुझुन -चुनाव मतले होइन, साम, दाम, दण्ड र भेदले जितिन्छ, यो नेपाली धनी परम्परा र अभ्यास भैसकेको छ ।

    यहि एनआरएन एनसीसी अफ युएसएको पोहोर सालको चुनाव नै पनि भोटले होइन नोटले निकै प्रभावित पारेको थियो र एक थरि धेरै नोटहुनेहरुको जगजगी कायम भएको नजिर अहिले पनि सल्बलाई रहेको छ । अप्रिल १६-२० सम्म कहीं नभएको ५ दिन भोट हाल्ने प्रक्रिया कति भ्रमपूर्ण छ, कसैलाई थाहा छ? कीन यसो गरिदैछ? यसको पछाडी न्युयोर्क र क्यालिफोर्नियामा १०-१० वटा कम्युटर भाडामा लिएर बुथ थाप्न अहिलेदेखि अग्रसर व्यक्तिहरुलाई फाइदा पुर्याउन त्यसो गरिएको होइन, कसले भन्न सक्छ? चुनावमा पोहोरसाल जो लफडा गर्न उद्दत थिए, उनीहरुनै अहिले सक्रिय भएका छन । सदस्यता प्रमाणीकरण समिति किनिएका भोटहरुको प्रमाणीकरण गर्न असफल भएको प्रमाण हिजो बेलुका फेसबुकमा निस्की हालेको थियो भने निर्बाचन आयोग त्यहि प्रमाणित सदस्यहरुलाई लिएर निर्बाचनमा होमिएको हुँदा निर्बाचन निस्पक्ष र पारदर्शी छैन भन्ने कुरा बताईरहन परेन । यतिखेर उताबाट रास्ट्रिय निर्बाचन आयोगलाई आइसीसीले लोप्पा ख्वाई रहेकै छ भने यता निर्बाचनका केहि उम्मेदवारहरुले कानूनी चुनौती थोपरेका छन । हेरौं कसरी आयोग चट्पटाउँदो रहेछ? 

    यकातिर यस्तो अबस्थामा फोटो घुमाउनेहरुले अर्को कुरो बुझेका छैनन -त्यो हो रास्ट्रिय निर्बाचन आयोग के गरिरहेको छ? मतदाताहरु र उम्मेदवारहरुलाई बेलामा दिनु पर्ने सुचना आयोगले ४८ घण्टा ढिलो गरि दिन्छ । कछुवाको तालमा हिंडिरहेको आयोगको यो दुर्दशा देख्दा उ मतदाताहरु र उम्मेदवारहरुप्रति गैरजिम्मेवार बनिरहेको छ । 
    #sidhakurausa

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    গত তিন মাসে বিএসএফের হাতে ১০ বাংলাদেশি নিহত 

    Perhaps the most recognisable image of BSF atrocities is 15-year-old Felani Khatuns's body hanging motionlessly on a barbwire fence after the guards shot her on Jan 7, 2011. Photo: Shib Shankar Chatterjee

    বছরের প্রথম তিন মাসে দেশের দক্ষিণ-পশ্চিম সীমান্তে ভারতীয় সীমান্তরক্ষী বাহিনী বিএসএফের গুলিতে ১০ বাংলাদেশি নিহত হয়েছেন। এসময়ের মধ্যে অপহরণ ও নির্যাতনের শিকার হয়েছেন অারও ২০ জন।রবিবার সকালে মানবাধিকার সংগঠন 'রাইটস যশোর' খুলনা বিভাগের আইনশৃঙ্খলা ও মানবাধিকার পরিস্থিতি তুলে ধরে সংবাদ সম্মেলনে এ তথ্য উপস্থাপন করে।

    http://www.banglatribune.com/%E0%A6%97%E0%A6%A4-%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%A8-%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%87-%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%8F%E0%A6%B8%E0%A6%8F%E0%A6%AB%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%B9%E0%A6%BE%E0%A6%A4%E0%A7%87


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    'कुछ बि ना' का वास्ता 'कुछ बि नारणनीति 

                            चबोड़्या स्किट संकलन :::   भीष्म कुकरेती 


    यू  -   यु हफ्ता !                         स्यू -  केवल यु हफ्ता !             

    यू  -आज पैसा भरणै जरूरत नी च !  स्यू - वसंत तक पैसा भरणो जरूरत नी च !

    यू  - वसंत मा बि पैसा नि भरो !     स्यू -  गर्म्युं मा बि पैसा नि भरो !             

    यू  - कबि बि नि भरण !               स्यू -कब ?

    यू  -   यु हफ्ता !                        स्यू -  केवल यु हफ्ता !    

    यू  -हम सेल्सटैक्स भरला !          स्यू - हम सेन्ट्रल टैक्स भरला !              

    यू  - हम फ्री होम डेलिवरी करला !  स्यू -सब कुछ हम भरला !

    यू  -अब कन करै जावो ?            स्यू -अब इथगा स्कीम कनकै दिए जावो ?


                   द्वी -  अधिक से अधिक विक्री !    

              

    यू  - सबसे अधिक हमम च !        स्यू - सबसे अच्छु !

    यू  - सबसे बुरु !                       स्यू -  हमम सब कुछ च !             

    यू  - हमम सब कुछ च !              स्यू -एक चीज छोड़िक 

    यू  -  क्या  च वो ?                    स्यू -  क्या च वो ?             

    यू  - हमम दूकान नी च !             स्यू -हमम चीज बस्तर बि नी च !

    यू  - तो आओ !                        स्यू -  यही हफ्ता !             

    यू  -  केवल एइ हफ्ता !               स्यू -पार्किंग समस्या नी च !

    यू  - पार्किंग चार्ज कुछ नी च !       स्यू -  पार्किंग की जगा नी च !             

    यू  - पार्क करणै जरूरत बि नी च ! स्यू -आणै जरूरत इ नी च !

    यू  -तो नि आवो  !                     स्यू - दूर इ रावो !              

    यू  -घरम इ रावो !                     स्यू -ये हफ्ता !

    यू  - हरेक हफ्ता !                     स्यू - हर साल !              

    यू  - आज पैसा नि भरण !            स्यू -कबि बि नि भरण !

    यु -कुछ नही के लिये कुछ भी नही ! स्यू -कुछ बि ना कुण कुछ बि ना !

            


    5/4/15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 

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