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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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    वकीलों के हंगामें पर सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार लिया ऐसा निर्णय


    Reporter ArunKumarRTI NEWS




    सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों का जो दल जायजा लेने भेजा उसमें कपिल सिब्‍बल, राजीव धवन, हरेंद्र रावल, दुष्‍यंत दवे, एडीन राव और अजीत सिन्‍हा शामिल हैं। इस दौरान वकील कपिल सिब्‍बल ने कहा कि वह दूसरी राजनीति पार्टी से जुड़े हैं। ऐसे में गलत संदेश जा सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को दरकिनार करते हुए उन्‍हें हालात का जायजा लेने के लिए भेज दिया। इस बीच इस पैनल के खिलाफ भी गुस्साए वकीलों ने नारेबाजी की। सुप्रीम कोर्ट में वरिष्‍ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी थी कि पटियाला हाउस कोर्ट में कन्‍हैया की पेशी के लिए माहौल ठीक नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 6 वकीलों का पैनल वहां भेजा।

    उच्‍चतम न्‍यायालय ने जवाहर लाल नेहरू विश्‍वविद्यालय मामले में सोमवार को पटियाला हाउस अदालत में सुनवाई के दौरान पत्रकारों पर हमले की आलोचना की। न्‍यायालय ने कहा है कि जो कुछ भी हुआ वह निन्‍दनीय है और अदालत परिसर  में सुरक्षा के मुद्दे पर ध्‍यान दिया जाना चाहिए। उच्‍चतम न्‍यायालय ने दिल्‍ली पुलिस आयुक्‍त को निर्देश दिया है कि वे विश्‍वविद्यालय छात्रसंघ अध्‍यक्ष कन्‍हैया कुमार के लिए पर्याप्‍त सुरक्षा सुनिश्चित करे। कन्‍हैया कुमार को आज दिल्‍ली की पटियाला हाउस अदालत में पेश किया जाना है।

    उच्‍चतम न्‍यायालय ने जे एन यू विवाद से संबंधित एक याचिका पर अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि कन्‍हैया कुमार की हिरासत के बारे में सुनवाई के दौरान अदालत में कुछ लोगों को ही उपस्थित रहने की अनुमति होगी। कन्‍हैया कुमार की पुलिस हिरासत की अवधि आज समाप्‍त हो रही है। न्‍यायालय ने कहा है कि सुनवाई के दौरान एक जांच अधिकारी तथा कन्‍हैया के परिवार के दो सदस्‍यों के अलावा, केवल पांच पत्रकारों, इतने ही वकीलों और विश्‍वविद्यालय के दो विद्यार्थियों तथा दो शिक्षकों को ही उपस्थित रहने की इजाजत होगी।

    न्‍यायालय ने दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के महापंजीयक को निर्देश दिया है कि वे पटियाला हाउस अदालत में उपस्थित रहें ताकि उन लोगों की  पहचान की जा सके जिन्‍हें अदालत कक्ष और परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई है। विश्‍वविद्यालय के पूर्व छात्र जयप्रकाश  ने कल एक जनहित याचिका दायर कर कन्‍हैया कुमार और पत्रकारों की सुरक्षा की मांग की थी। उसने सोमवार को अदालत में कन्‍हैया कुमार की पेशी के दौरान हमले में शामिल लोगों पर आवश्‍यक कार्यवाही करने की भी मांग की। मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी।

    नाराज सुप्रीम कोर्ट ने पटियाला हाउस कोर्ट में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की पेशी की कार्रवाई को रोकने का आदेश दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को पटियाला हाउस कोर्ट परिसर को पूरी तरह खाली कराने का आदेश दिया है। 

    कोर्ट ने आज पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया की पेशी के लिए अंतरिम निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट परिसर में 25 पत्रकार मौजूद रह सकते हैं। कोर्ट ने कहा, कोर्टरूम में जांच अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कोर्टरूम में कन्हैया के वकील, जेएनयू के दो फैकल्टी, दो दोस्त या परिवार के लोग, 5 पुलिसवाले और पांच पत्रकार मौजूद रहेंगे।

    दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा था कि हमने पटियाला कोर्ट में सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस ने कहा कि कोर्ट में हुई घटना की जांच हो रही है। दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से कहा गया कि वह भी मामले की जांच कर रहा है। दो बजे जिला जज अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। याचिकाकर्ता के अलावा मामले में केटीएस तुलसी, प्रशांत भूषण भी बहस कर रहे हैं।

    जेएनयू के पूर्व स्टूडेंट एनडी जयप्रकाश की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि कन्हैया के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के दौरान कोई व्यवधान न हो यह सुनिश्चित किया जाए।

    याचिका में ये भी मांग की गई थी कि कोर्ट परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित किया जाना जरूरी है ताकि कोई भी शख्स हिंसा का शिकार न हो। याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता भी फिजिकल वॉयलेंस का शिकार हुआ है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में जेएनयू स्टूडेंट, टीचर और जर्नलिस्ट कोर्ट में सुनवाई के लिए मौजूद थे लेकिन तभी उनके साथ कुछ लोगों ने हिंसा की।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि
    - पत्रकारों को कोर्टरूम में जाने का अधिकार
    - पत्रकारों की सुरक्षा बेहद अहम
    - कोर्टरूम में आम लोगों की बजाए पत्रकारों की उपस्थिति जरूरी
    - पत्रकार कोर्ट की सुनवाई को लोगों को तक पहुंचाते है
    - कई बार हमने देखा कि लोग आरोपी के लिए कोर्ट तक मार्च करते हैं
    - आरोपी के समर्थक कोर्ट रूम में नारेबाजी भी कर देते हैं, क्या इसे अनुमति दी जानी चाहिए
    - मद्रास का उदाहरण देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर बार पुलिस पर आरोप लगते हैं
    - वो एक्शन ले तो दोनों पक्ष आरोप लगाते हैं और ना ले तो भी आरोप लगते हैं
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    पटियाला हाउस की घटना पर मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब, भेजा नोटिस



    नई दिल्लीः राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पटियाला हाउस अदालत घटना पर केन्‍द्रीय गृहसचिव, मुख्‍य सचिव और दिल्‍ली पुलिस आयुक्‍त को नोटिस जारी किए हैं। आयोग ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्‍लंघन बताते हुए एक सप्‍ताह के अंदर जवाब मांगा है। 

    आयोग ने कहा कि मानवाधिकारों का यह उल्‍लंघन बड़ी संख्‍या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुआ जो कथित रूप से मूकदर्शक बने रहे। आयोग का कहना था कि इसे ड्यूटी में कोताही माना जाना चाहिए।

    गौतरलब है कि पटियाला हाउस के समीप सोमवार को और बुधवार को जेएनयू के छात्रों, अध्यापकों व पत्रकारों के साथ मारपीट किए जाने के बाद मामला गरमा गया था। आरोप है कि भारत माता की जय  के नारे लगाते हुए आरोपी हमलावर वहां पहुंचे और उन्होंने छात्रों के साथ पत्रकारों पर हमला कर दिया। मारपीट के दौरान कुछ पत्रकारों के मोबाइल फोन भी तोड़ दिए गए थे।उन्होंने महिला पत्रकारों को धमकी भी दी. पुलिस मारपीट के आरोपी बीजेपी विधायक को मेडिकल टेस्ट के लिए ले गई है. उन पर केस भी दर्ज किया जा सकता है.

    बीजेपी विधायक ओपी शर्मा और उनके समर्थकों पर छात्रों और महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप लगा है. पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर विधायक के समर्थक नारेबाजी कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों ने 'आज तक' की रिपोर्टर अनुषा सोना और पूनम शर्मा के भी फोन छीन लिए और उन्हें कोर्ट से बाहर कर दिया.
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  • 02/17/16--15:16: #RSSattacked Jadavpuruniversity রাতারাতি আমাদের ছেলে মেয়েগুলান দেশদ্রোহী,তাইলে আমরা কোন্ রামছাগল? দিল্লীর সুপারি কিলাররা কোলকাতাতেও কম নেই! বামেদের হাঁড়ি ভাঙল হাটে! প্রতিবাদে স্বপ্নভঙ্গ,ছাপ্পা দেশদ্রোহিতার! এই বঙ্গে এখন বর্গীদেরই রাজত্ব,ধর্মান্ধ মেরুকরণ রুখিবে কোন মাই কা লাল? আজ যাদবপুরের ইতিহাসে প্রথমবার উগ্র জাতীয়তাবাদী শক্তি ক্যাম্পাস গণতন্ত্রে সরাসরি আঘাত হেনেছে। হিন্দু মৌলবাদীদের সঙ্গে অনেকাংশে সহমত সেই উন্মত্ত জনতা তুমুল ভাঙচুর করে এবং শাসিয়ে যায় যে এই ঘটনার পুনরাবৃত্তি হবেই। গতকাল JNU'তে রাষ্ট্রীয় সন্ত্রাসের ঘটনাকে ধিক্কার জানিয়ে সবরকম মৌলবাদকে বিরোধিতা করে যাদবপুরের ছাত্রীছাত্ররা মিছিল করে,এবং আজ তাদের নিজেদের ক্যাম্পাস গণতন্ত্র প্রশ্নের মুখে। আজ বিজেপি সাংসদ রাহুল সিনহা খোলাখুলি ঘোষণা করেছে,'আগে মার,তারপর বিচার'এবং আজ দুপুরে ABVP ডাক দিয়েছে 'যাদবপুর চল!'আজ পোস্টার ছিঁড়ে নিজেদের ক্ষমতার আস্ফালন কারীরা কাল যাদবপুরের এতদিনের স্বাতন্ত্র‍্যের ইতিহাস,তার ঐতিহ্যের গায়ে হাত তুলতে চায়। এদের পিছনে ফালতু সময় নষ্ট করিস না। যারা কংগ্রেসের সাথে জোট করার পর বড় বড় কথা বলে, স্বাধীনদের মিছ

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    রাতারাতি আমাদের ছেলে মেয়েগুলান দেশদ্রোহী,তাইলে আমরা কোন্ রামছাগল?

    দিল্লীর সুপারি কিলাররা কোলকাতাতেও কম নেই!

    বামেদের হাঁড়ি ভাঙল হাটে!

    প্রতিবাদে স্বপ্নভঙ্গ,ছাপ্পা দেশদ্রোহিতার!

    এই বঙ্গে এখন বর্গীদেরই রাজত্ব,ধর্মান্ধ মেরুকরণ রুখিবে কোন মাই কা লাল?


    আজ যাদবপুরের ইতিহাসে প্রথমবার উগ্র জাতীয়তাবাদী শক্তি ক্যাম্পাস গণতন্ত্রে সরাসরি আঘাত হেনেছে। হিন্দু মৌলবাদীদের সঙ্গে অনেকাংশে সহমত সেই উন্মত্ত জনতা তুমুল ভাঙচুর করে এবং শাসিয়ে যায় যে এই ঘটনার পুনরাবৃত্তি হবেই। গতকাল JNU'তে রাষ্ট্রীয় সন্ত্রাসের ঘটনাকে ধিক্কার জানিয়ে সবরকম মৌলবাদকে বিরোধিতা করে যাদবপুরের ছাত্রীছাত্ররা মিছিল করে,এবং আজ তাদের নিজেদের ক্যাম্পাস গণতন্ত্র প্রশ্নের মুখে।


    আজ বিজেপি সাংসদ রাহুল সিনহা খোলাখুলি ঘোষণা করেছে,'আগে মার,তারপর বিচার' এবং আজ দুপুরে ABVP ডাক দিয়েছে 'যাদবপুর চল!' আজ পোস্টার ছিঁড়ে নিজেদের ক্ষমতার আস্ফালন কারীরা কাল যাদবপুরের এতদিনের স্বাতন্ত্র‍্যের ইতিহাস,তার ঐতিহ্যের গায়ে হাত তুলতে চায়।


    এদের পিছনে ফালতু সময় নষ্ট করিস না। যারা কংগ্রেসের সাথে জোট করার পর বড় বড় কথা বলে, স্বাধীনদের মিছিলেও হাঁটে, আবার মিডিয়া খিস্তি করলে নিজেরা পিঠ বাঁচায় তারা বিজেপি কে রুখবে? কাটা না।

    পলাশ বিশ্বাস


    Titir Chakraborty

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    এরপরও চুপ থাকবে? তোমার যাদবপুরের স্বাভিমান বিপন্ন,কিছু হিংসাত্মক মৌলবাদীর হাতে।


    জমায়েতে এসো,হাতে হাত,কাঁধে কাঁধ মিলিয়ে লড়াই হোক যাদবপুরের স্বার্থে। কাল সকাল ১০টা,৪ নং গেট। চাই সব্বাইকে।

    'যাদবপুর পথ দেখায়,শিক্ষা দেয়,আঘাত যদি নেমেই আসে,পালটা আঘাত ফিরিয়ে দাও!'

    মীডিয়ার খবরে যাদের মগজধোলাই রারাজত্বের জয়ধ্বনি,যাহারা বুঝিল না কোনো কাল কার জয়ে কার হার অথবা কার হারে কার জয়,তাহারাই রাজনৈতিক সন্ত্রাসে দিন প্রতিদিন স্বজনের রক্তনদীতে স্নান করে বিশুদ্ধ।


    আমি কোনোকাল বিশুদ্ধ পন্জিকা দেখে দিন ক্ষণ কাল মেপে মেপে ব্যাকরণ অনুযায়ী শাসকের এস্থেটিক্স মেপে লিখি নাই।


    ভাষা আমার কাছে মনুষত্বের চিত্কার,জীবন যন্ত্রণা,আজীবিকার লড়াই এবং এই পৃথিবী কে মানুষের বসবাসযোগ্য করে রাখার প্রচেষ্টা।আত্মরতি বা রতিক্রম নহে।



    আমি বিভিন্ন ভাষায় লিখতে দ্বিধা বোধ করিনা।

    আমি ধর্মেও নেই ,রাজনীতিতেও নেই।


    যারা ধর্মেও আছেন,আবার জিরাফেও আছেন,তদুপরি গাছেরও কুড়োন,তলারও খান তাঁদের সশিল্প নৈপুণ্যবলা বাহুল্যআমি দাবি করিনা েমন,তেমন পরোয়াও খূব একটা করিনা।


    ওমা কি বানান ভূল,লেখার কি ছিরি,কথা বলতে শেখে নি,লিখতে জানেনা,এই খাপ পন্চায়েতী রওইয়া রুদ্ধ সঙগীত যে জনগণের,আমি তুচ্ছাতিতুচ্ছ তাঁদেরই একজন।


    যারা কষ্ট কইরা বা ভূল কইরা আমার লেখা মাড়িযে অশুদ্ধতার দায়ে গঙ্গাস্নান করতে বাধ্য হয়,তাঁদের কুলীণত্বের শ্রীচরণে আমরা হাজারো বছর ধইরা জ্ঞানের অধিকার হইতে বন্চিত ভাষাহারা,জাতিহারা,ব্রাত্য,মন্ত্রহীন,বধ্য প্রজাজন।


    পিঁপড়ের মত বেঁচে আছি মেরুদন্ডহীন


    সংস্কার মারাইতে যাহারা ধর্মনিরপেক্ষ,তাহাদের ধর্ম সহীসলামত হ্যায়


    সে ধর্ম শাসকের ধর্ম

    না হিন্দু আর না মুসলিম


    হাজারো জাতিতে,নানাবিধ ধর্মে অধর্মে স্বজন রক্তপিপাসু আম জনতাই বোবোধের কলা,জাতের নামে বজ্জাতি  হক্কল মূক বধির ও অন্ধ জনগণের জন্য


    কিন্তু যাহারা এতকাল বিপ্লব ক্যালাইয়া রীতিমত শুয়োঁরের খোয়াড়ে খোয়াবনামার পাত্রপাত্রী,তাহাদের জনগণের ভাষায় সম্বোধিত করতে আমাদেরও বাধে


    কন্ডোম ও জাপানীতেলের বিপ্লবে কোনো জোকিম নেই

    লগ্নি সময়ে ্সমযে কামে লাগে


    বাংলা ছাড়া সারা ভারতবর্ষের কথা বলতে গেলেই রীতিমত দেশদ্রোহিতার বিপদ


    যেহেতু সত্যি কথা বলতে হলে,শাসকের রক্তচক্ষুর কবিতা লিখে বিরোধিতার বিপ্লবের তুলনায শেষ পর্যন্ত রাস্তায় অশ্বমেধ সৈন্যবাহিনী ও বাজারের মুখোমুখি দাঁড়াতে হয়


    সারা পৃথীবীতে দেশদ্রোহিতা আইনের খতিয়ান ইউকিপীডিয়ায় কানহাইযা প্রকরণ অব্দি আপডেট আছে,শেয়ার কইরাছি আমার ব্লগেও,সেখানেও দেখতে পারেন


    দেশদ্রোহিতার ঔপনিবেশিক আইন দেশদ্রোহীদের রাজসূয় হিন্দুত্বের পরিধান,সেখানে দেশ ও নাগরিকের কোনো প্রসঙ্গ মাইক্রোস্কোপেও দেখা যাইবে না


    উপরন্তু ভারতের ইতিহাসে যাহারা প্রাতঃস্মরণীয় ইংরেজ শাসকেরা এই আইন তাহাদের বিরুদ্ধে যাদের সাক্ষ্য অনুযায়ী ব্যবহার করিয়াছেন,আজ মানুষের জীবন জীবিকা নিয়ে কথা বলতে গেলেই সেই জমিদার সম্পরদায়ের ইংরেজদের গোলামস্য গোলামেরা যাকে তাঁকে যেখানে সেখানে দেশদ্রোহী খেতাব খাপ পন্চায়েতের মত দিতাছেন।


    যাহারা সেদিনও ইয়ে আজাদী ঝূঠা হ্যায় বলিয়া ভারতবর্ষের স্বাধীনতা নাকচ করিয়া বিপ্লবে স্বাধীনতা আমদানি করার রাজনীতি করছিলেন খোয়াঁড়ে জাঁকিয়ে বলসার আগেই, সত্যঅসত্য যাচাই না কইরাই মীডিয়ার সুপারি কিলারদের সাজানো গপ্পো দেইখাই জেএনইউরম মতই গেরুয়া সৈন্যবাহিনীর মত হেি হেই কইরা রাতারাতি আমাদের ছেলে মেযেদের দেসদ্রোহী সাজাইলেন।


    তাইলে ত তাহাদের পুরোনো রাজনীতির কেস্সা আদালতে তুলতেই হয়।


    আম্বেডকরের নামে লাখোলাখ দোকানি দলিতদের আজাদির

    স্বপ্ন ফেরি করে কোটি কোটি টাকা কামিয়ে নিচ্ছেন ও জাতের নামে বজ্জাতিতে ভোটব্যান্ক গোছানোর তালে যাহারা দাঙা হাঙামায় নৈরাজ্যে মগের মলুক বানাইছেন বাংলা এবং ভারতবর্ষকে,তাঁদের সবাইযের বিরুদ্ধেই দেশদ্রোহিতা মোকদ্দমা হওয়া সবার আগে জরুরী


    মনে রাখা দরকার মৌখিক উচ্চারণে দেশদ্রোহিতা হয় না,সুপ্রিম কোর্ট আগেই বইলা দিয়াছেন


    মাওবাদীদের বিরুদ্ধে অপারেশনের আগে মাও ম্যাও যোগাযোগ মনে আছে


    আজাদীর নাারা যারা কাশ্মীরেই দিয়াই থাকেন,সেখানে আবার যাহাদের রাজনীতিতে পাকিস্তান কিম্বা আইসিসের ঝান্ডা ও পতপত ওড়ে,যাদবপুরের ছাত্র ছাত্রীরা তাহাদের ক্ষমতার দোসর নয়,মনে রাখা দরকার


    বাংলা সহ অসমে,পান্জাবে,তামিলনাডু,সমস্ত পূর্বোত্তর ভারতে কেন্দ্র ও রাজ্য সরকারের উগ্র ভারতবিরোধীদের সহিত যে হানীমুন কা কেস্সা,সে তুলনায় রাতারাতি আমাদের গর্ব একটি বিশ্ববিদ্যালয়ের ছা্ত্র ছাত্রীরা দেশদ্রোহী হইলেন এবং তাহারা ধোয়া তুলসীপাতা


    জেএনউ শাটডাউন আন্দোলন চলছে


    রাজস্থানে সব কলেজে ইউনিভার্সিচিতে নজরদারি চলছে


    ইউনিভার্সিটি তুলে দিয়ে বাপের জমিদারিতে পদ্ম ফসলের চাষ যে বর্গী সৈন্যবাহিনী করতাছে,তাহার সঙ্গে কে আছে ,কে নাই,বলা মুশকিল


    এই মন্তব্যগুলান দেখুনঃ

    Subhadeep Deyনিজেদের ওয়ালগুলো ভাল করে দেখো, সবগুলো পোস্টই ডিনায়াল মোডে চলে গেছে । "আমরা স্লোগান দিইনি" "আমরা জানিই না কি হয়েছে" ইত্যাদি ইত্যাদি । নিজেরা মিছিল ডেকে তারপর সেই মিছিলের শ্লোগান দিয়ে নিজেরাই গুটিয়ে গেলে, আর এখনও বুঝতে পারছো না কোথায় ছড়িয়েছো ??

    Subhadeep Dey২২ জনে মিছিল করো, ৪২ জনে মিছিল করো বা ৪২০ জনের মিছিল করো, যাই করো, এরকম করে আজকের মতো ছড়িয়ো না ।

    Dattatreya Ghoshআমি তোকে আগে বলেছিলাম সুভম, মনে আছে? এদের পিছনে ফালতু সময় নষ্ট করিস না। যারা কংগ্রেসের সাথে জোট করার পর বড় বড় কথা বলে, স্বাধীনদের মিছিলেও হাঁটে, আবার মিডিয়া খিস্তি করলে নিজেরা পিঠ বাঁচায় তারা বিজেপি কে রুখবে? কাটা না।


    Soujanya Amar Namপ্রথমত , যাদবপুরে সাধারনত বড় মিছিলগুলো রেজিমেন্টেড ভাবে হয় না । ফলে কে কি বলবে তা নিজেদের ব্যাপার । দ্বিতীয়ত , মিছিলের স্পিরিটের সাথে গ্রহণযোগ্য হীন বক্তব্য মিডিয়া বেশি করে দেখাবে তা নতুন নয়। এবং স্পিরিট কি ছিল তা নিয়ে কেওরামি লাগলে যারা মিছিলের ডাক দিএছিলেন তাদের কথা টা গ্রহন করা যেতে পারে বলে ব্যাক্তিগত ভাবে মনে করি । আর আপনার মত জানার অপেক্ষায় রইলাম । কি করা উচিত ??



    Priyasmita Hokkolorob shared a link.

    2 hrs·

    'Hooliganism not nationalism': Three ABVP leaders resign citing JNU and Rohith Vermula incidents

    'We can't be mouthpiece of such a government,' the student leaders said, 'which has unleashed oppression on student community'.

    SCROLL.IN|BY SCROLL STAFF


    ABVP leaders resign over #JNUCrackdown and #RohithVemula: read letter

    We can't be mouthpiece of such a govt. which has unleashed oppression on…

    INDIARESISTS.COM|BY INDIA RESISTS


    Mononendu Das with Priyasmita Hokkolorob and 12 others.

    7 hrs·

    প্রথমত, আজকের ঘটনার পর নিজেকে ইঞ্জিনিয়ারিং এর স্টুডেন্ট বলে পরিচয় দিতে লজ্জা করে এবং এটাও আজকে প্রমাণিত যে ক্যাম্পাসে সম্মান দেওয়া, একজন সিনিয়রকে ভদ্রভাবে কথা বলা, জিনিসটা আর exist করে না। জানি না, তবে Foridআজ যেটা বলল যে, আজকে যাদবপুরের সত্যি কারের evolution টা দেখলাম, সত্যি কথা। ভাবতে পারিনি, আজকে আমি, নিজে, আমার ক্লাসের একটা ছেলের বিরুদ্ধে স্লোগান দেব। ভাবতে পারিনি, আজকে আমাকে anti-national তকমা দেওয়া হবে। কল্পনাতেও আসেনা এটা যে আমরা, faculty of engineering, আমাদের নিজেদের ছেলেরা, জিবি তে দাঁড়িয়ে আজ ইউনিয়ন কে গালি দেবে।

    বুঝিনি, আজকে ডিপার্টমেন্ট এর সিনিয়র দাদারা, আমাদের কে মহামান্য সুপ্রীম কোর্ট এর দোহাই দেবে, আর নিজেরাই, elected authority, ইউনিয়ন কে "FETSU হায় হায়! " বলে স্লোগান দেবে। একদিনের কীভাবে লোকজনের তথাকথিত দেশপ্রেম উথলে ওঠে, জাস্ট বুঝিনা, মাইরি বলছি। যে কখনো ক্যাম্পাসের মধ্যে নিজের ডিপার্টমেন্ট আর প্লেসমেন্ট বিল্ডিং ছাড়া কিছু বোঝে না, সে আজকে এই প্রশ্ন তোলে যে তাকে জিবিতে কেন ডাকা হয়নি। জিবি ডাকা হলে যারা ক্লাস হবে কি হবে না, এটা জেনে নিয়ে বাড়ি চলে যায়, তারা আজকে ক্যাম্পাসে দাঁড়িয়ে তাদেরই নির্বাচিত জি এস, এজিএস, আর সিপি কে গালাগাল দেয়, anti national বলে, তাদেরকে নিতে পারিনা।

    হ্যা তুমিও ফেটসু, তুমি অবশ্যই কথা বলবে তোমার নিজের ইউনিয়নের জন্য, তোমার নিজের আত্মমর্যাদার জন্য, তোমার অধিকারে তুমি আজ রাস্তায় নামবে। কিন্তু তাই বলে তুমি তোমার নিজের মতামত, সেটা অবশ্যই, এবং অতি অবশ্যই তোমার নিজের, ভুল বললাম, মিডিয়ার দ্বারা প্রভাবিত, সেই মতামত কে authorised করার জন্য দাবি জানাতে পার না। তুমি কখনই, সমস্ত সত্যি না জেনে, তোমার নিজের তৈরী করা সেই ইউনিয়নকে বলতে পারো না " ইউনিয়ন কুত্তে কা মত মরেগা.."।

    দেখ ভাই, সোজা কথা, ভুল করেছি বলে মনে হয়, তাহলে ভুল শোধরানোর সুযোগ দেওয়া হোক। হ্যা আমি দোষ করেছি, সেটা মেনে নিয়ে সেটা শুধরে নিতে চাই। সেই সুযোগ দেবে না তুমি, আর তার পরেও এটা বলবে যে আমি তোমার কথা শুনছি না, প্লিজ এটা মেনে নেব না। এটা ক্যাম্পাস, তোমার বাড়ি না। এখানে আমার ভুল টা আমি সবার সামনে মেনে নেব, কিন্তু তুমি আমায় সেটার জন্য দোষী বলে দিলে আর শুধু তোমার কথার ওপর আমি শুধু মাত্র তোমায়, তোমায় খুশি করার জন্য, তোমার পায়ে পড়ব না।

    হ্যা গত মিছিলে anti nationalist স্লোগান উঠেছে, সেটা কে দিয়েছে জানিনা, কেন দিয়েছে তাও জানি না, কিন্তু আমাদের কেউ না। তবু অথরিটি হিসেবে আমরা আমাদের ব্যর্থতা স্বীকার করে নিচ্ছি। কিন্তু আজকের ঘটনা আমাদের চূড়ান্ত ব্যর্থ বলে প্রমাণিত করেছে। আমাদের ছেলেরা, যেভাবে ভাঙচুর করেছে, তা আমাদের গৌরবের পরিপন্থী। যাদবপুরের ইতিহাসে প্রথমবার এই ঘটনা ঘটেছে। আর হ্যা, সত্যি আজকে বুঝেছি, ক্যাম্পাস আজকে আর ক্যাম্পাস নেই। কিছু "পোষা বাঁদর" আজ ক্যাম্পাসের দখল নিয়েছে। আমরা লজ্জিত, কারণ তারা ইঞ্জিনিয়ারিং ফ্যাকাল্টি।

    দেখ ভাই, সত্যি বলতে কি, ক্যাম্পাসে দাঁড়িয়ে ওই অ্যান্টি ন্যাশনালিজম নিয়ে কথা বলে কি করে বুঝিনা। এটা ক্যাম্পাস, এখানে দেশের পতাকা তুলে কাশ্মীর ছিনিয়ে নেব, বলাটা মানায় না। কে ভাই, তুই এসি ক্লাসে বলে ক্লাস করে, এসি গাড়িতে যাতায়াত করে, বিশাল কেত মেরে নিজের কয়েকটা জাতীয়তা বাদী পোস্ট দিয়েই খুব বড় হনু হয়ে গেলি? আর যে লোকটা নিজের খাওয়ার টাকাটা জমিয়ে প্রত্যেক জায়গায় সাহায্য পাঠায়, যে তোর জন্য মার খায় রাস্তায়, তোর প্লেসমেন্ট এর জন্য অনশন করে, ক্যাম্পাসের পরিবেশ ঠিক রাখার জন্য নিজের কেরিয়ার টা নষ্ট করে বসে থাকে অরবিন্দ ভবনে, তার নাম নিয়ে করা একটা মিছিলে, কে কোথাকার এক organized গ্রুপ intentionally একটা দেশবিরোধী স্লোগান তুলল, তাকে না বলে, সেই লোক টা সে তোর জন্য আজকে হাসপাতালে যেতেও রাজি, তাকে দেশদ্রোহী বলিস! কে ভাই তুই! আজকে তোর থেকে ৪-৫ বছরের সিনিয়র একজনের হাত ধরে তাকে দোষারোপ করিস? কোন সাহসে, তুই তোর ভোট দেওয়া লোকটাকে আজকে বাবা মা তুলে গালাগাল দিয়ে বলিস, "দেশকে লিয়ে সব কুছ!"

    এরা দেশদ্রোহী তো? আমিও দেশদ্রোহী। একে তুই মারবি বলেছিস। আমাকেও মার। তুই আজকে একটা মিডিয়ার প্ররোচনায় "গেল!গেল! " বলে ওই লোকটাকে দায়ী করছিস, হ্যা আমাকে দায়ী কর। আমিও লোকটার সাথে ছিলাম। আমি

    সেদিনের জিবিতে হ্যা বলেছিলাম, যেদিন তোরা সেই জিবি এড়িয়ে গিয়েছিলি সেখানে যাই হোকনা কেন তাতে তোর কিছু ছেঁড়া যায় বলে। প্লিজ ভাই,

    ‪#‎আমি_রাষ্ট্রদ্রোহী_দেশপ্রেমিক‬

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    Comments

    Gairik Dey

    Gairik Deyসুবিধাবাদী মানুষেরা আত্মত্যাগ এর মর্ম বোঝেনা, বর্ণবিপ'র্জ'য় এর মতো চক্ষুশূল মনে করা ছেলেগুলোর অবদান বোঝার ন্যূনতম প্রয়াস দেখাতেও তারা উৎসাহিত বোধ করেনা.......

    Like· Reply· 2· 7 hrs

    Mononendu Das

    Mononendu Das smile emoticon

    Like· Reply· 7 hrs

    Ritabrata Bhattacharyya

    Ritabrata Bhattacharyya Jara kaj korena, tader vul o hoyna. Bt jara kaj o korena, abar keu kaj korle take niye PNPC kore, tader k neoa jayna. Boro boro ki6u kotha bollei keu boro hote pare na, special kauke impress korte pare sudhu!

    Like· Reply· 6 hrs

    Suparno Pal

    Suparno Pal vitorer khobor vitore thak...baire berole opposition er hatiyar hobe....

    Like· Reply· 1· 6 hrs

    Suparno Pal replied · 3 Replies· 6 hrs

    Shaikh Ashek Forid

    Shaikh Ashek Forid Sotti vai lojja hochhe engineering students hisebe porichoy dite!!

    Like· Reply· 1· 6 hrs

    Abhijit Bhattacharya

    Abhijit Bhattacharya lojja houai uchit.why you organised michil against our will without our permission while calling yourselves our representative.We believed you and after 3-4 hours of GB you declined decision ,betrayed us

    Like· Reply· 1· 5 hrs

    Mononendu Das

    Mononendu Das Excuse me please, what kinda betray!? We just arranged a rally against that vandalism. Nothing else.

    Like· Reply· 5 hrs

    Mononendu Das

    Mononendu Das And when students from engineering faculty do so, then who will take responsibility?

    Like· Reply· 5 hrs

    Mononendu Das

    Mononendu Das And I'm a student and I can attend a rally with those motives I support , just like you

    Like· Reply· 5 hrs

    Mononendu Das

    Mononendu Das Okay, that was organized by individuals, although we are taking responsibility for that. We accept out failure

    Like· Reply· 5 hrs

    Avishek Banerjee replied · 5 Replies· 4 hrs

    Abhijit Bhattacharya

    Abhijit Bhattacharya Its better we stop blame game.but you guys should have condemned about the slogans to media

    Like· Reply· 5 hrs

    Mononendu Das replied · 1 Reply

    Soumava Banerjee

    Soumava Banerjee Bhai nijer department er senior der sathe jodi atoi birodhita hoy nijer department jdi atoi oponchondo hoy submit in a letter that you no longer want to be a part of this elite stream(obosso toder moto illogical cheleder jonnoi ajke ju etce ke anek kothai shunte hoy) ....

    Like· Reply· 3· 5 hrs

    Mononendu Das

    Mononendu DasSoumava da, Ami shudhu amar dept. er kotha bolchi na. Bakirao chilo. Tumi shudhu Ami Mononendu ei ta dhore kothata kno bolcho..

    Like· Reply· 5 hrs

    Mononendu Das

    Mononendu Das Eta to tumi deny korte parbe na je bola hoyni?

    Like· Reply· 5 hrs

    Soumava Banerjee

    Soumava Banerjee Your way of representing things and expressing views is illogical and i clearly support ppls discontent with fetsu !! They should have made a press release!! It was proved today that what has to prevail will prevail!! Nd no denying that!! Extremely disheartened!

    Like· Reply· 3· 5 hrs

    Abhijit Bhattacharya

    Abhijit Bhattacharya yes a press release today condemning anti national slogans must have been raised

    Like· Reply· 4 hrs

    Abhijit Bhattacharya

    Abhijit Bhattacharya now due to you guys fault RSS Abvp etc being claimed to come who surely wasnt there today

    Like· Reply· 1· 4 hrs

    Abhijit Bhattacharya

    Abhijit Bhattacharya now they are actually comming tomorrow.Amit shah coming tomorrow.

    Like· Reply· 4 hrs· Edited

    Abhijit Bhattacharya

    Abhijit Bhattacharya This was due to you guys fault to tackle the situation by today

    Like· Reply· 4 hrs

    Mononendu Das replied · 35 Replies· 4 hrs

    Abhijit Bhattacharya

    Abhijit Bhattacharya we were all there to support but you guys betrayed us

    Like· Reply· 4 hrs

    Anubhab Das

    Anubhab Das muskil ta ki boloto je tomra emon senior jader kono din dekhi o na jani o na othocho tomader i classmate onekjon k chini hothath kore ato vabnawala lok elo kottheke setai bujhte parchi na

    Like· Reply· 4 hrs

    Mononendu Das replied · 3 Replies· 4 hrs

    Anubhab Das

    Anubhab DasShibam GhoshSomrup DasSubhabrata Hokkolorob

    Like· Reply· 4 hrs

    Abhijit Bhattacharya

    Abhijit Bhattacharya amra tomader opor puro vorsa rekhechilam tai kono din dekha diyi ni ei vebe tomra thik thak kaj korbe amader interfere er kono dorkar nei

    Like· Reply· 4 hrs

    Sanmitra Bhowmik

    Sanmitra Bhowmik Very logical post. Agreed.


    We can't blame the Union for everything that happens.

    Like· Reply· 38 mins


    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

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     # $ SHTTER DOWN RIGHT TO KNOWLEDGE FOR MANUSMIRTI

    RSS indulged in Direct Action in Kolkata yet again,Jadavpur University attacked!

    In Dhaka,the Pak Army destroyed the Dhaka University and killed students and professors, writers,jurnos,intellectuals one by one but they lost East Pakistan!Please read History once again!

    Palash Biswas

    আজ বেলা বারোটায় ঢাকুরিয়া থেকে এইট বি পর্যন্ত মিছিল ABVPর

    আজ বেলা বারোটায় ঢাকুরিয়া থেকে এইট বি পর্যন্ত মিছিল ABVPর

    JNUয়ের পর তোলপাড় JU। দেশবিরোধী পোস্টার ঘিরে কাল ধুন্ধুমার  বিশ্ববিদ্যালয়ে ।পোস্টার ছেঁড়ার নামে ক্যাম্পাসে তাণ্ডব একদল ছাত্রের। নজিরবিহীন ঘটনায় স্তম্ভিত পড়ুয়া থেকে অধ্যাপক। আজও থমথমে ক্যাম্পাস। আজ একগুচ্ছ কর্মসুচি  যুযুধান দুই পক্ষেরই। দেশদ্রোহী স্লোগানিংয়ের প্রতিবাদে আজ বেলা বারোটায় ঢাকুরিয়া থেকে এইট বি পর্যন্ত মিছিল ABVPর। তবে কাল তাণ্ডবে যোগ আছে ABVPর । এমনটাই দাবি ছাত্রছাত্রীদের একাংশের।  সেক্ষেত্রে ফের কোনওরকম অপ্রীতিকর পরিস্থিতি এড়াতে তত্পর পড়ুয়ারা।  ABVPর মিছিল যাতে কোনওভাবেই ক্যাম্পাসে ঢুকতে না পারে তার জন্যে সকাল থেকেই শুরু তোড়জোড়। দশটা থেকে বিশ্ববিদ্যালয়ের সবকটি গেটে অবস্থান পড়ুয়াদের। এগারোটায় ক্যাম্পাসের ভেতরেই মিছিল মানববন্ধনের ডাক।


    Universities have been reduced to foreign territories to be destroyed.


    The generation XYZ screaming dissent have been branded as Pakistani Army who have to be killed to sustain Fascist Hindutva regime!


    Vande Mataram!

    Those who want to know the history of Partition,may keep their eyes wide open as the HOLOCAUST being enacted again!


    Every University seems to ave become the snowy peak of KARGIL to be captured by the Bajrangi Brigade and the Governance of Fascism makes in KHAP PANCHAYAT sacrifices on the alter of Hindutva,the nationalism reduced.


    Every other one is branded Anti National!What Nation do we have?


    Please study the history of sedition Act and then react!


    JNU inflicts every other University and still Rohits Mohits denied justice!


    CIVIL War Kurukshetra scenarion in Kolkata, Delhi, Hyderabad, Mumbai,Bangaluru,Chennai, everywhere.DIRECT Action start up launched by RSS MANUSMRITI rule to divide India yet again!



    The national flag has been reduced in Hindutva Atom Bomb to explode the entire democrat set up,social fabrics,justice,law and order and muscle power money power to kill humanity!


    Do we suffer from some biological disorder beside personality disorder?


    Have we lost our spines?


    Do our legs fail to erect ourselves?


    Is it a nation of the citizens deaf,dumb and blind?


    Who dares to lodge any dissent has to be killed all on the name of patriotism.


    The Nation saw the attacks on Kanhaia in the court room LIVE,journos were not spared by rowdy lawyers and so called legislators and Supreme court had to intervene,but Delhi Police registered FIR against unknown individuals whose faces are live round the clock!


    Those who violet the constitution of India,those who indulge to kill the sovereignty and freedom of free Indian Citizens,those who subjected the Supreme Court to be ruled by mob violence and Khap Panchayat Fatwas,rules the streets,rule the Parliament,rule the court rooms!


    Is it the Nation?


    We knew.We posted timely warning on Hastakshep that RSS planned to kill Kanhaia day before the assault,but Delhi Police does not know anything.


    Is the police reduced to robot controlled by Khap Panchayat!


    Would justice be subjected to mob violence?


    ABVP leaders and workers have revolted and they cry,Save JNU!

    BUT we allow # $ SHTTERDOWN RIGHT TO KNOWLEDGE FOR MANUSMIRTI


    JNU Row: Jadavpur University VC says university has nothing to do with anti-national slogans

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    alt DNA WEB TEAM | Wed, 17 Feb 2016-02:46pm , dna webdesk

    'Jadavpur University will not support any anti-national activity. I spoke to the student representatives and they have categorically stated that they had no role in the protest. Students have said that they do not endorse anti-national slogans. That rally was not officially convened by the students' union,' he said.


    Jadavpur University Vice-Chancellor Suranjan Das on Wednesday clarified that the students of the university had no role in the protest which raised anti-national slogans, adding that it was certain fringe elements that were behind the incident. 'Jadavpur University will not support any anti-national activity. I spoke to the student representatives and they have categorically stated that they had no role in the protest. Students have said that they do not endorse anti-national slogans. That rally was not officially convened by the students' union,' he said.

    'Certain fringe elements raised the slogans, we condemn it. Entire university can't be defamed. I will never govern the university with the police's help, it is an autonomous body. I have not yet received any letter. If we receive any letter we will pursue internal university mechanism to probe. The rally started from Jadavpur and then roamed around other streets. The students' union has categorically stated they have disassociated from particular fringe elements who raised slogans,' he added.

    Das further stated that the Jadavpur University has a very historic background, adding that it freedom of speech and right to dissent is there.


    Law Enforcement has become the greatest FARCE!


    The Delhi Police accelerated their search to arrest former students' union leader Umar Khalid, allegedly the main organiser of the February 9 event on JNU campus where students reportedly raised "anti-India slogans".

    Police also tried to identify and trace some "outsiders", part of the group that shouted the allegedly seditious slogans.

    Former Democratic Students' Union (DSU) leader Khalid became the police's target, soon after a city court sent JNUSU president Kanhaiya Kumar to Tihar Jail. Kumar was arrested on charges of sedition.

    Neither the FIR nor the situation report prepared by the special branch of Delhi Police mentioned anybody's name for shouting anti-India slogans during the event.

    © Provided by Hindustan Times

    The FIR and police report only referred to Kumar and Khalid as those who led the students' protest march. 

    Khalid, originally from Bihar, allegedly absconded after a sedition case was registered in the incident and Kumar was arrested. His mobile number too was switched off the same day. Scrutiny of Khalid's mobile number showed that it was used frequently between February 6 and February 9 and the calls were made and received outside Delhi. 

    A senior police officer said they were questioning Khalid's family members, relatives, friends and colleagues living in Delhi to find out his whereabouts. We are raiding areas in Delhi-NCR, Bihar and other states where Khalid could be hiding, the officer said. 

    Similar raids are being conducted in West Bengal, Kerala, Maharashtra, Uttar Pradesh and Jammu and Kashmir, in search for ten more students who were allegedly involved in shouting anti-India slogans.

    The Delhi Police sought help from their counterparts in these states to trace the absconding students.

    "Teams have raided several places in as many as five states in the past two days. The ten absconding students include at least five from the JNU while others are members of Left-supported organisations," a police official said. Police put their mobile phones under surveillance and airports across India were alerted about absconding students.

    Earlier in the day, Delhi Police chief BS Bassi said, "People in huge numbers participated in it (the event), and we have already identified the ring leader. Now we are looking for all those who have been identified. Very soon, we will get hold of them."

    #JNURow boils over: The resignation of 3 ABVP students must force the BJP to rethink its idea of India

    Firstpost

    Firstpost

    © Provided by Firstpost

    The resignation of three Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) students coupled with their refusal to be the mouthpiece of the government must have hurt the BJP. When your children show you the mirror, reflect on questions about morality, ethics and nationalism, it is bound to prick the ego and hubris of the elders.

    So calling them traitors, deriding them as anti-nationals, sympathisers of JNU jihadis and agents of Pakistan is a tempting and natural reaction.

    But, the BJP and its nationalist bhakts would benefit immensely if they listen carefully to the three ABVP leaders who quit on Wednesday, citing difference of opinion with their organisation.

    They are reminding the saffron parivar of the core values of India, the real meaning of nationalism. On Wednesday night, joint secretary of the JNU wing of the students' organisation, put up an open letter on his Facebook page announcing that he is quitting ABVP with two other leaders.

    It would have been much better if a senior leader of the party or one of its spokespersons had reflected on recent events, given precedence to morality over politics, conscience over opportunistic jingoism and stated the obvious.

    But, now that these conscientious students have spoken out, the BJP should reflect.

    The party should ask itself whether thugs with the Tricolour in hand denigrate the nation or add to its pride with their street violence and cowardly attacks on unarmed students, journalists and the very foundation of democracy.

    At the peak of the Ram Mandir agitation, the BJP was mocked by its critics for having 'Moonh mein Ram, bagal mein chhuri' (Ram on the lips, dagger in hand). It is now in danger of becoming a party of hooligans with 'Haath mein Tiranga,dimaag mein danga' (Tricolour in hand, riot on the mind).

    It should reflect on how a party that once took pride in the Indian culture where a guru is considered bigger than Govind (that's Kabir), turned into a party that is busy denigrating teachers, labelling them 'anti-nationals' and threats to the nation. 

    How, while promising to fight against enemies of the nation, it started attacking the country's premiere institutions, its own people, students and Dalits; dispensing certificates of patriotism and nationalism and street justice.

    As the ABVP leaders say in their resignation letter: "Anti-national slogans on 9 February in university campus were very unfortunate and heart breaking. Whosoever responsible for that act must be punished as per the law but the way NDA government is tackling the whole issue, the oppression of Professors, repeated lawyer attacks on Media and Kanhaiya Kumar in court premises is unjustifiable and we think there is a difference between interrogation and crushing ideology and branding entire left as Anti-national."

    Meanwhile on Wednesday, Kailash Chaudhry, BJP legislator from Bayatu said, "The Congress thinks Rahul Gandhi is a prince, but he is a traitor. He should be shot."

    The BJP must reflect, how, with its meticulous ambiguity on the culture of Nathuram Godse, it has turned a country that took pride in its legacy ofahimsa, into a nation of rampaging lynch mobs, where its leaders are raring to kill another Gandhi.

    Finally, the ABVP leaders are telling the truth about the 9 February incident in the JNU campus. "Veiled persons in the event organised by former DSU persons shouted slogans 'Bharat tere tukade honge', of which there is concrete evidence in the videos, so we demand any person responsible for the slogans should be punished as per the law."

    They are telling us that the event was not organised by Kanhaiya Kumar, that anti-slogans were not raised by him but people wearing masks.

    BJP, this is the conscience of your young leaders talking.

    Stop. Listen. Act. And, let Kanhaiya go.

    VIDEO: JNU row: ABVP leaders explain why they quit over Kanhaiya Kumar


    VIDEO: Lawyers thrash Kanhaiya in court as police watched in silence

    Lawyers thrash Kanhaiya in court as police watched in silence

    VIDEO: Three members of JNU's ABVP unit resign

    VIDEO: Delhi police releases an appeal by Kanhaiya to the public


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    Press Communiqué



    The Central Committee of the Communist Party of India (Marxist) met in New Delhi on February 17 & 18, 2016. It has issued the following statement:



    Resist Onslaught on Left Forces



    The Central Committee noted with serious concern the attack launched by the RSS-BJP against the Left forces. It is clear that under the false allegation of the Left forces being "anti-national" the RSS-BJP have mounted an all India attack against the Left. The six Left parties are meeting on February 19 in order to chalk out an all India programme to counter this challenge from the communal forces.



    In this context, the Central Committee while strongly condemning the attack mounted by the RSS under the patronage of this BJP-led NDA government against the Jawaharlal Nehru University sees it as part of a larger design by the communal forces to carry forward their agenda in institutions of higher learning. This systemic pattern is clearly visible in the incidents in Film & Television Institute of India, Hyderabad Central University leading to the tragic suicide of Rohit Vemula, the incidents in IIT Chennai and now in Jadavpur University.



    It is clear that the RSS-BJP are mounting such efforts to sharpen communal polarisation in the country to also divert the attention of the people from the growing burdens being imposed upon them by the total failure of this NDA-led Modi government on all fronts.



    Electoral Tactics



    The Central Committee worked out, in accordance with the political-tactical line adopted at the 21st Congress, the electoral tactics for the forthcoming elections to the assemblies of West Bengal, Kerala, Tamilnadu, Puducherry & Assam.



    West Bengal: In West Bengal, the main task is to restore democracy and foil the aggressive efforts by the communal forces to polarize the people in the state by ousting the present Trinamul Congress government. The CPI(M) will seek the cooperation of all democratic forces in the state to strengthen people's unity in West Bengal to defeat the Trinamul Congress, isolate the BJP and their machinations.



    Kerala: The LDF in Kerala is in the midst of finalizing the preparations for defeating the UDF in the state. The large scale corruption and misgovernance has discredited the Congress-led UDF government. The Central Committee has appealed to the people of Kerala to uphold their progressive and democratic traditions and elect the LDF in the state with a decisive majority.



    Tamilnadu & Puducherry: In Tamilnadu, the Party along with CPI, MDMK and the VCK had formed the People's Welfare Front and had taken up burning issues of the people. The PWF has now decided to contest the elections as an alliance and has adopted a common minimum programme. In Puducherry also the PWF will contest elections as an electoral alliance.



    Assam: In Assam, the CPI(M), CPI, CPI(ML), RSP, SUCI(C) and the RCPI have decided to contest the election unitedly under the slogan of "Oust the Congress from power, defeat the BJP and strengthen Left and democratic forces in the interest of the unity-integrity, peace and all round development of Assam".
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    Emanul Haque
    February 18 at 8:49pm
     
    দেশকে-দেশের প্রাকৃতিক সম্পদ যারা বিদেশিদের কাছে বেচে দিচ্ছে---সেই বিজেপি আর এস এসের মুখে দেশপ্রেমের বুলি মানায় না। ঘৃণ্য দেশদ্রোহী ওরা। জিনিসের দাম আকাশ ছোঁইয়া, চাকরি নেই, বেতনবৃদ্ধি নেই, শিল্প নেই, শুধু বিজ্ঞাপনের ফাঁকা আওয়াজ। সা মনে বাজেট। কী কী বেচবে তার তালিকা বানাচ্ছে--সে সব ঢাকতেই দেশপ্রেমের নাটক।
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    Satya Narayan
    February 18 at 9:19am
     
    पूरे देश में इस समय कुछ लोग देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति के ठेकेदार बने हुए हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में कोई हिस्सा नहीं लिया था! ये वे लोग हैं जिन्होंने अमर शहीद भगतसिंह और उन जैसे तमाम युवा आज़ादी के मतवालों के ख़िलाफ़ अंग्रेज़ों के लिए मुखबिरी की थी! ये वे लोग हैं जो हिटलर और मुसोलिनी को अपना आदर्श मानते थे और आज़ादी के पहले ब्रिटिश रानी को सलामी दिया करते थे! ये कब से देशभक्ति के ठेकेदार बन बैठे? सत्ताधारी पार्टी और संघ परिवार के ये लोग आज देश को धर्म और जाति के नाम पर तोड़ रहे हैं और साम्प्रदायिकता की लहर पर सवार होकर सत्ता में पहुँच गये हैं। इन्होंने देशभक्ति को सरकार-भक्ति से जोड़ दिया है। जो भी सरकार से अलग सोचता है, उसकी नीति की आलोचना करता है, जो भी अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाता है उन्हें तुरन्त ही देशद्रोही और राष्ट्रद्रोही घोषित कर दिया जाता है। अम्बानियों और अदानियों के टुकड़ों पर पलने वाला कारपोरेट मीडिया भी इन तथाकथित "देशभक्तों"के सुर में सुर मिलाता है और अपने स्टूडियो में ही मुकदमा चला डालता है! 

    यह पूरा मामला जेएनयू में भारत-विरोधी नारे लगने के बाद गरमाया हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को धार्मिक कट्टरपंथी फासीवादी गुण्डे अदालत के भीतर तोड़ रहे हैं और दिल्ली पुलिस तमाशबीन बन कर देख रही है। कोर्ट के भीतर पत्रकारों और नागरिकों पर हमला किया गया, पत्थर फेंके गये! ऐसा तो हिटलर के जर्मनी और मुसोलिनी के इटली में हुआ था जब कानून का शासन ख़त्म हो गया था और इसी प्रकार के देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति के ठेकेदार सड़कों पर अपनी गुण्डागर्दी चला रहे थे। ऐसे समय में हम आपसे कुछ बातों पर सोचने का आग्रह करते हैं। 

    अब यह साफ़ हो चुका है कि जेएनयू में भारत-विरोधी नारे लगाने वाले लोग कुछ अराजकतावादी तत्व थे जिनमें से अधिकांश जेएनयू के छात्र भी नहीं थे। वास्तविक आरोपियों को तो पुलिस अभी तक गिरफ्तार भी नहीं कर पायी है लेकिन एक बेगुनाह छात्र कन्हैया कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा, कुछ अन्य छात्रों पर भी फ़र्जी मुकदमे डाल दिये हैं। क्या आप जानते हैं कि इन्हें क्यों निशाना बनाया गया है? ये छात्र वे ही हैं जिन्होंने अतीत में मज़दूरों के शोषण, महँगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठायी थी; ये वे ही छात्र हैं जिन्होंने मोदी सरकार की छात्र-विरोधी, मज़दूर विरोधी और ग़रीब-विरोधी नीतियों का विरोध किया था! ऐसे में, मोदी सरकार कुछ अराजकतावादी तत्वों की हरक़त का बहाना बनाकर इन बेगुनाह छात्रों और पूरे जेएनयू को निशाना बना रही है। तो भाइयो और बहनो! ज़रा सोचिये कि क्या हो रहा है! मायापुरी में एक मज़दूर की काम के दौरान मौत के बाद जब मज़दूरों ने इंसाफ़ और मुआवज़े की माँग की तो उनपर भी पुलिस ने लाठियाँ बरसायीं और उनके नेताओं पर भी देश-विरोधी होने का आरोप लगा दिया। ऐसा ही एफटीआईआई के छात्रों के साथ भी किया गया था। और ऐसा ही दिल्ली के हरेक मेहनतकश और मज़दूर के साथ किया जाता है जब वह अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाता है। 

    दूसरी बात जो ग़ौर करने योग्य है दोस्तो वह यह है कि देशद्रोह या राष्ट्रद्रोह की परिभाषा हमारे संविधान में दी गयी है और सरकार से लेकर सभी पार्टियाँ उस पर अमल करने को बाध्य है। यह परिभाषा है कि कोई भी व्यक्ति सरकार की नीति की आलोचना कर सकता है, उसका शान्तिपूर्ण विरोध कर सकता है, किसी कौम के हक़ की बात कर सकता है, मगर वह सरकार के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह या हिंसा करने में लिप्त या हिंसा के लिए भड़काने में लिप्त होता है तो उस पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जा सकता है। ऐसे में, धार्मिक कट्टरपंथियों और फासीवादियों को ये हक़ किसने दिया कि वे किसी को भी देशद्रोही या राष्ट्रद्रोही करार दे दें? और ख़ासकर तब जब कि ये देशभक्ति का सर्टिफिकेट लेकर घूमने वाले वे हैं जो कि आज़ादी के आन्दोलन के ग़द्दार थे और इन्होंने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ एक ढेला उठाना तो दूर, उनके सामने मुखबिरी करने, माफ़ीनामे लिखने और सलामी देने का काम किया था?क्या आरएसएस का कोई भी व्यक्ति बता सकता है कि 1925 में उसकी स्थापना से लेकर 1947 में आज़ादी तक आरएसएस क्या कर रही थी? खुद सोचिये दोस्तो। ज़रा "राष्‍ट्रभक्त"और "राष्‍ट्रद्रोही"के प्रमाणपत्र बाँटने वालों द्वारा फैलाये जा रहे उन्माद से ऊपर उठ कर सोचिये। अगर आज बेगुनाह पत्रकार, नागरिक, मज़दूर, छात्र, शिक्षक कोर्ट के कमरे से लेकर बस्तियों तक इन कट्टरपंथियों का निशाना बन रहे हैं, तो कल अपनी आवाज़ उठाने पर ये आपको निशाना नहीं बनायेंगे? 

    तीसरी बात जो ग़ौर करने योग्य है भाइयो और बहनो वह यह है कि देश कोई कागज़ पर बना नक्शा नहीं होता। देश उसमें रहने वाले आम मेहनतकश अवाम से बनता है। जो मोदी सरकार और संघ परिवार आज महँगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, शोषण और उत्पीड़न देश के करोड़ों-करोड़ मेहनतकशों, आम लोगों, छात्रों, युवाओं, दलितों, स्त्रियों और बुजुर्गों तक पर थोप रहा है, क्या वह देशभक्त है? और जो इस शोषण, उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाये वह देशद्रोही है? हाँ दोस्तो! हालत तो आज ऐसी ही हो गयी है! जो भी सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाये वह देशद्रोही और जो भी सरकार की हर बात में सिर हिलाये वह देशभक्त। यही कारण है कि सरकार में बैठी पार्टी भाजपा ने तरह-तरह के गुण्डावाहिनियों को सड़क पर खुला छोड़ दिया है कि वह ऐसे सभी"देशद्रोहियों"को सबक सिखाये जो कि मोदी और संघ परिवार की हाँ में हाँ न मिलाये! और इसके बाद आपकी हर बात को "भारत माता की जय", "वन्दे मातरम"आदि के शोर में और लातों-घूँसों की बारिश में दबा दिया जाता है। और ये वे लोग हैं जो अपने संगठन के एक व्यक्ति का नाम नहीं बता सकता है जो कि देश की आज़ादी के लिए लड़ा और शहीद हुआ हो! क्या आप ऐसे लोगों को अपनी देशभक्ति का प्रमाण देंगे? क्या आप ऐसे लोगों को"राष्‍ट्रभक्ति"का ठेकेदार बनने देंगे? इन गुण्डों की भीड़ में कौन लोग शामिल हैं? 

    साथियो! अगर हम आज ही हिटलर के अनुयायियों की असलियत नहीं पहचानते और इनके ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाते तो कल बहुत देर हो जायेगी। हर जुबान पर ताला लग जायेगा। देश में महँगाई, बेरोज़गारी और ग़रीबी का जो आलम है, ज़ाहिर है हममें से हर उस इंसान को कल अपने हक़ की आवाज़ उठानी पड़ेगी जो चाँदी का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुआ है। ऐसे में हर किसी को ये सरकार और उसके संरक्षण में काम करने वाली गुण्डावाहिनियाँ"देशद्रोही"घोषित कर देंगी! सोचिये दोस्तो और आवाज़ उठाइये, इससे पहले कि बहुत देर हो जाये। 
    http://www.mazdoorbigul.net/archives/9171
    कौन देशभक्त है और कौन देशद्रोही? - मज़दूर बिगुल
    www.mazdoorbigul.net
    अगर हम आज ही हिटलर के अनुयायियों की असलियत नहीं पहचानते और इनके ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाते तो कल बहुत द...
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  • 02/18/16--15:25: भेड़िये से निपटा कइसे जाई! मुक्त बाजार को कोई राष्ट्र नहीं होता। न कोई राष्ट्र मुक्त बाजार होता है। नागरिक कोई रोबोट नहीं होता नियंत्रित। स्वतंत्र नागरिक एटम बम होता है। जो गांधी थे।अंबेडकर थे और नेताजी भी थे। गंगा उलटी भी बहती है और पलटकर मार करती है जैसे राम है तो राम नाम सत्य भी है। राम के नाम जो हो सो हो राम नाम सत्य है सत्य बोलो गत्य है,यही नियति है। कोई भेड़िया बच्चा उठा ले जाये तो शहरी जनता की तरह गांव देहात के लोग एफआईआर दर्ज कराने थाने नहीं दौड़ते और अच्छी तरह वे जानते हैं कि भेडियेय से निपटा कइसे जाई।भेड़ और भेड़िये का फर्क भी वे जाणै हैं।शहर के लोग बिल्ली को शेर समझत हैं। आस्था से खेलो मत,धार्मिक लोग सो रहे हैं और उनका धर्म जाग गया तो सशरीर स्वार्गारोहण से वंचित होगे झूठो के जुधिष्ठिर,जिनने देश और द्रोपदी दुनों जुए में बेच दियो। सत्तर के दशक में ही आपातकाल के दमन के शिकार हुए लोग अब इतने सत्ता अंध हो गये हैं कि लोकतंत्र को दमनतंत्र में तब्दील करने लगे हैं क्योंकि उन्हें राष्ट्र नहीं चाहिए,मुक्त बाजार चाहिए। जनता नहीं चाहिए।विदेशी पूंजी चाहिए। इससे जियादा बेशर्म रष्ट्रद्रोह

  • भेड़िये से निपटा कइसे जाई!

    मुक्त बाजार को कोई राष्ट्र नहीं होता।

    न कोई राष्ट्र मुक्त बाजार होता है।

    नागरिक कोई रोबोट नहीं होता नियंत्रित।

    स्वतंत्र नागरिक एटम बम होता है।


    जो गांधी थे।अंबेडकर थे और नेताजी भी थे।


    गंगा उलटी भी बहती है और पलटकर मार करती है जैसे राम है तो राम नाम सत्य भी है।

    राम के नाम जो हो सो हो राम नाम सत्य है सत्य बोलो गत्य है,यही नियति है।


    कोई भेड़िया बच्चा उठा ले जाये तो शहरी जनता की तरह गांव देहात के लोग एफआईआर दर्ज कराने थाने नहीं दौड़ते और अच्छी तरह वे जानते हैं कि भेडियेय से निपटा कइसे जाई।भेड़ और भेड़िये का फर्क भी वे जाणै हैं।शहर के लोग बिल्ली को शेर समझत हैं।


    आस्था से खेलो मत,धार्मिक लोग सो रहे हैं और उनका धर्म जाग गया तो सशरीर स्वार्गारोहण से वंचित होगे झूठो के जुधिष्ठिर,जिनने देश और द्रोपदी दुनों जुए में बेच दियो।


    सत्तर के दशक में ही आपातकाल के दमन के शिकार हुए लोग अब इतने सत्ता अंध हो गये हैं कि लोकतंत्र को दमनतंत्र में तब्दील करने लगे हैं क्योंकि उन्हें राष्ट्र नहीं चाहिए,मुक्त बाजार चाहिए।


    जनता नहीं चाहिए।विदेशी पूंजी चाहिए।


    इससे जियादा बेशर्म रष्ट्रद्रोह कोई दूसरा नहीं है।


    पलाश विश्वास

    मुक्त बाजार को कोई राष्ट्र नहीं होता।

    न कोई राष्ट्र मुक्त बाजार होता है।

    नागरिक कोई रोबोट नहीं होता नियंत्रित।

    स्वतंत्र नागरिक एटम बम होता है।


    जो गांधी थे।अंबेडकर थे और नेताजी भी थे।

    शहीदे आजम भगत सिंह थे।

    हमारे तमाम  पुरखे थे।

    उस पुरखौती से हमें कोई बेदखल कर नहीं सकता क्योंकि हम बीरसा मुंडा,सिधो कान्हो औरर न जाने किन किन बागियों के वंशज हैं।सर कटाने वाले कहीं ज्यादा है सर काटने वालों से।


    बाजू भी बहुत हैं सर भी बहुत हैं।

    न रोहित कोई अकेला है और न अकेला कन्हैया है।


    माफ कीजियेगा ,हम उलटी गंगा बहती देख रहे हैं।जो अंधे नहीं हैं,उन्हें भी उल्टी गंगा बहती दीखनी चाहिए वरना मंझधार में डूब अनिवार्य है।


    नौटंकी की तमीज है कि नगाड़े के बोल समझने चाहिए।


    बजरंगियों को भी आज कोलकाता में उल्टी गंगी बहती हुई नजर आनी चाहिए।प्रतिवादी छात्रा को जिंदा जला डालने की धमकी और न्याय से पहले धुलाई अभियान के खिलाफ कोलकाता में जो प्रतिरोद का मानवबंधन दिखा,वक्त पर संघ सहयोगी दीदी की पुलिस हस्तक्षेप नहीं करती,तो कुरुक्षेत्र के सिपाहसालारों को पता चलता।


    भला हो इस राष्ट्रद्रोह के महाभियोग का।जिसे अदालत में साबित किया ही नहीं जा सका है।महारानी एलिजाबेथ से लेकर दुनियाभर के राजकाज में जनता की आवाज कुचलने के लिए इसका इस्तेमाल होता रहा है लेकिन चीखें फिर चीखें हैं।


    चीखें संक्रामक भी हैं।

    सक्रामक चीखें जियादा खतरनाक हैं।कश्मीर और मणिपुर की निषिद्ध चीखें अब सार्वजनिक हैं और मृत्युदंड पर फिर बहस है।

    सावधान कि बहस देश प्रेम ौर राष्ट्रद्रोह पर भी है।


    सपनों के सौदागर का फ्रीडम घोटाला यही है कि अच्छे दिन कभी नहीं आयेंगे और उजाले के बदले हमें कटकटेला अंधियारा हासिल हुआ है कि यथार्थ का निर्म सच दसों दिशाओं में अमावस्या है और इस तमस में धर्मोन्माद के सिवाय कोई कैफियत नहीं है बिजनेस बंधु नरसंहारी राजकाज की।नरबलि से संकट टलेगा नहीं।


    रोहित वेमुला से कन्हैया तक का सपर यूपी,बंगाल और उत्तराखंड से पहले कहां कहा खत्म होकर किरचों में बिखर जायेगा ,उन्हें हरगिज नहीं मालूम हो सकता जो काशी को क्वेटो बनाते हैं और भारत का मेकिंग इन हिंदुस्तान एफोडीआई कर देते हैं कि गंगा उलटी बहती है और पलट मार सकती है।दांव उलटा पड़ा है।


    जिस टीवी के परदे के सहारे गंगा की धार को तलवार बनाने चले थे और बच्चों की गरदन उतारने चले थे,उसी टीवी के परदे पर देख लें कि देश भर में कहां कहां चिनगारियां दहकने लगी हैं।


    अंजाम समझें।तो देश के लिए बेहतर और उनके लिए भी बेहतर जो आगजनी को सेहत के लिए बेहद जरुरी योगाभ्यास मानते हैं।


    विश्वविद्यालय बेहद खतरनाक होते हैं।

    पाकिस्तान ने सन सत्तर में आजमा कर देख लिया।

    पाकिस्तानी सैनिकों ने अपनी सत्ता की धर्मांध सियासत के मुताबिक पूर्वी बंगाल का फन कुचलने के लिए सबसे पहले ढाका विश्वविद्यालय को तबाह किया था।


    जेएनयू और जादवपुर में तो कुछ भी नहीं हुआ।


    जिनने आपरेशन ब्लू स्टार लाइव देखा हो या लाइव इराक का विध्वंस देखा हो,वे जानते हैं कि कैसे टैंकों से गोले दागकर एक विश्वविद्यालय की हत्या करके आजादी की आवाज को खामोशी में तब्दील करने की कोशिश हुई थी।


    तब छात्रों और प्रोफेसरों को तोप के गोलों से उड़ाया गया था।

    बांग्लादेश के तमाम साहित्यकारों ,पत्रकारों,बुद्धिजीवियों की चुन चुनकर हत्या कर दी गयी थी कि वे उनके ख्वाबों के बेदखल करने चले थे।हर औरत का तब बलात्कार हुआ था और संगीन की नोंक में बिंध गये थे तमाम निष्पाप शिशुओं के शरीर।


    बाकी इतिहास है।

    ढाका विश्वविद्यालय का वजूद मिटा नहीं है।

    पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तान का वजूद मिट गया है और अब पूर्वी पाकिस्तान आजाद बांग्लादेश है।



    शेक्सपीअर के टुवेल्फ्थ नाइट में शुद्धतावादियों की कड़ी आलोचना के बाद लंदन के सारे थियेटर बंद कर दिये गय थे।

    रंगकर्म जारी है।जारी रहेगा।

    शेक्सपीअर भी अभी मरे नहीं हैं।


    तुम हमें मार दो तो हम इतिहास बन जायेंगे और फिर फिर लौट आयेंगे। निःशस्त्र वह बुड्ढा फिर फिर आ रहा है।जिसके सीने में तीन तीन गोलियां दागी गयी थी और मरते वक्त जिसने हे राम कहा था।हत्यारे को ईश्वर भी बना दिया तो वह बुड्ढा मरेगा नहीं।


    अगली हत्या से पहले हत्यारे को यही चेतावनी है।


    कन्हैया को आपने मारा नहीं है ,उसे राष्ट्र का नेता बना दिया है राष्ट्रद्रोह का अबियोग लगाकर।आपने भारतीय जनता को प्रतिरोध का एक नेता दे दिया है।आपका आभार।वह जेल से छूटने ही वाला है।फिर वह आपको चैन की नींद सोने नहीं देगा।जिंदा या मुर्दा।


    हर तानाशाह की गलती यही होती है कि वह कभी नहीं समझता कि गंगा उलटी भी बहती है।


    सत्तर के दशक में ही आपातकाल के दमन के शिकार हुए लोग अब इतने सत्ता अंध हो गये हैं कि लोकतंत्र को दमनतंत्र में तब्दील करने लगे हैं क्योंकि उन्हें राष्ट्र नहीं चाहिए,मुक्त बाजार चाहिए।


    जनता नहीं चाहिए।विदेशी पूंजी चाहिए।


    इससे जियादा बेशर्म रष्ट्रद्रोह कोई दूसरा नहीं है।


    सबसे ज्यादा खतरनाक विश्वविद्यालय बंद कराने की कोशिश होती है।समझ लो कि सारे विश्वविद्यालयों के छात्र और उनके अभिभावक,उनके शिक्षक सड़क पर आ जायें तो कायमत के राजकाज का  अंजाम क्या होगा।


    चार्वाक हमारे पुरखे रहे होंगे।लोक परलोक में हमारी आस्था इसलिए बनी नही है।मगर हम आस्था के खिलाफ नहीं हैं और उपासना पद्धति चाहे जो हो ,हम मानते हैं कि धर्म ही सत्य,अहिंसा और प्रेम है।धर्म ही मनुष्य को विवेक से समृद्ध करता है ।धर्म अज्ञान और मित्या,हिंसा और घृणा और नरसंहार के विरुद्ध है।


    आस्था मनुष्य मात्र की पूंजी है।


    कमसकम आस्था को बख्श दीजिये और शेयर बाजार में राम के नाम आस्था की मुनाफावसूली से बाज आइये,महाराज।


    हम गुरुदेव की तरह भारत का चप्पा चप्पा भारततीर्थ मानते हैं और उस भारत के जन जन को अपना सगा स्वजन मानते हैं,चाहे जिसकी जो भी ,जैसी भी हो आस्था।


    हम बाबासाहेब के जाति उन्मूलन के एजंडे  को अपना मिशन मानते हैं और किसी मजहब के खिलाफ नहीं हैं क्योंकि हम मनुष्यता और प्रकृति के पक्ष में हैं।किसी सत्ता या राजनीत के पधधर नहीं।


    हमारे लिए देश के किसी हिस्से के जनगण की चीखें दर्ज कराने की कोई भी कोशिश राष्ट्रद्रोह नहीं है हालांकि वह सत्ता और सत्ता वर्ग के हितों से द्रोह हो सकता है।


    क्योंकि राष्ट्र तो जनगण से हैं ,जब हर दूसरा नागरिक संदिग्ध है या देशद्रोही है,तो राष्ट्र एक पाखंड के सिवाय क्या है?


    न आस्था अनास्था है।

    न धर्म अधर्म है।

    न असत्य सत्य है।


    न ही राष्ट्र के खिलाफ कोई द्रोह है क्योंकि गणतंत्र में नागरिक संप्रभू हैं और देश के किसी भी हिस्से के बारे में,किसी भी नागरिक के जीवन, आजीविका, जीवनयंत्रणा,जनतंत्र के हाल हकीकत पर उसके मतामत हो सकते हैं।उनकी आवाज कुचलना राष्ट्रद्रोह है।


    क्योंकि सहमति का विवेक और असहमति का साहस ही लोकतंत्र है और सर्वसम्मति खाप पंचायत है।नरसंहार की सहमति राष्ट्रद्रोह है।


    हमारे हिसाब से राष्ट्र खाप पंचायत नहीं है।

    अगर खाप पंचायत है तो भी उसकी अपनी पंचायती परंपरा है और वहां भी फैसले के आधार निराधार,मूल्य और पैमाने हैं,जो आस्था और धर्म के भी होते हैं।


    खाप पंचायतें भी इतनी अराजक भीड़तंत्र होती नहीं हैं जहां न्याय और कानून दोनों सत्ता विमर्श है।


    हम पश्चिम उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत की खाप पंचायतों को जानते हैं और उनकी ताकत और कमजोरी भी जानते हैं।


    अंध फतवे वहां से भी जारी होते हैं लेकिन उसके पंच भी उतने फासिस्ट नहीं होते,जितने  जो मुक्तबाजारी राजकाज चला रहे हैं।


    मुसोलिनी और हिटलर को हम बेकार बदनाम कर रहे हैं।


    जर्मनी और इटली का भी उनके राजकाज में इतना हाल बेहाल न था जितनी कि विदेशी हुकूमत के दौरान भी इतनी भारत दुर्दशा नहीं थी,जिसकी चेतावनी देकर भारतेंदु सिधार गये।


    उनके राजकाज में भी सत्ता इतनी निरंकुश नहीं थी जो हालत इस देश में अभूतपूर्व है कि कोई नागरिक अधिकार नहीं है और सिर्फ राष्ट्र है या राष्ट्रद्रोह है और देशप्रेमियों की असंख्य खाप पंचायतें हैं और दौड़ा दौड़ाकर मारने वाली पगलायी भीड़ है।


    आस्था है लेकिन धर्म नहीं है।

    परमात्मा है लेकिन आत्मा नहीं है।

    परलोक है लेकिन इहलोक नहीं है।


    इंद्रियां है लेकिन हमारी इंद्रियां नहीं हैं, लंपट,भोगी ,सत्ता पिपासु,भ्रष्ट कारपोरेट इंद्र की इंद्रिया हैं।


    कहां है हमारा धर्म?

    क्या यह अंध राष्ट्रवाद धर्म है?

    क्या धर्म देशप्रेम का तमगा बांटते हुए देशद्रोहियों को मृत्युदंड का फतवा जारी करता है?

    महाभारत के यक्ष का यह प्रश्न नहीं था लेकिन इस महाभारत का यह प्रश्न अनिवार्य समझें।

    जानते हुए भी आप मौन रहें तो आपका सर धड़ से अलग होकर रहेगा।

    बहरेहाल काशी विश्व की प्राचीनतन नगरी है जो अब सर्वशक्तिमान बिरंचीबाबा पतंजलिमार्का शुध कल्कि महाराज के एफोडीआई अखंड प्रताप से क्वेटो हुई गवा।


    पहले विद्वता का सर्वश्रेष्ठ प्रतिमान यह रहा है कि किसी को ज्ञानी बनना था तो काशी के विद्वानों को शास्त्रार्थ में पराजित करना अनिवार्य था,ऐसा पुराणों का इतिवृत्त है तो इतिहास भी है।


    अब काशी में आदरणीय काशीनाथ सिंह के अस्सी घाट या फिर मित्र ज्ञानेंद्रपति के गंगातट में उन विद्वानों की सूची दर्ज नहीं है,जिन्हें पराजित करके बिरंची बाबा का ज्ञान विज्ञान उन्हें चक्रवर्ती राजाधिराज बनाये हुए हैं।


    बहरहाल किस्सा यूं बाबाजी की पोटली से निकली कि गंगा मइया की आरती उतारने वाले भी कभी कभार धोखा खाय़े जात हैं।मीडिया एइसन लाइटे फोकस मारे हैं कि सत असत बुझात नइखै।


    रवीश कुमार साधु हैं कि कह दियो कि मरा हुआ मीडिया मरा हुआ नागरिक पैदा करता है।इहां तो उलट ही केस है कि लाइव मीडिया लाइव देश को डेड बनाये जात है।


    गंगाभक्तों को मालूम ही नहीं है कि रामजी सरयू तट पर राजपाट चलाया करते थे और गंगा मइया पार करने में केवट जी की महिमा अपंरपार है और यह भी कि उनके चरणस्पर्श से पाषाणशिला बनी रही अहिल्या का शापमोचन हुये रहा।


    इतिहास भूगोल,ज्ञान विज्ञान,गणित इत्यादि इस हिंदू राष्ट्र में वैदिकी हो गइलन,सिर्फ यह स्वदेशी खजाना विकास या विकासदर के काम नहीं आता और उसके लिए अबाध पूंजी चाहिए।


    जय हो बिरंची बाबा।जय जय जय हो।

    लगता तो यही है कि यह जयजयकार सुनामी स्खलित हो गयी है।



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    Dev Pratap Singh
    February 19 at 4:44pm
     
    प्रधान मंत्री महोदय 
    भारत सरकार 

    विषय – चुनाव में आपके द्वारा घोषित किये गये 56 इंच हौसला के सम्बन्ध में 
    महोदय, 
    आपको में अवगत कराना चाहता हूँ कि चुनाव के दौरान 56 इंच सीने वालों में हौसला होता है , कुछ करने की ताकत होती है मुझे जानकर अच्छा लगा कि आप कुछ करना चाहते हैं लेकिन अभी तक आप के द्वारा किये गये कार्य केवल पूंजीपतियों को लाभ देने वाले हैं गरीबों के लिए आप द्वारा कोई सुधारात्मक कदम नही लिया गया है हो सकता है इस के लिए आपके कम पढ़े लिखे मंत्री जिम्मेदार हों और आपकी मजबूरी भी हो सकती कि अच्छी योग्यता वालों की जगह हारे हुए लोग प्रमुख पदों पर बैठा दिए जाने से ऐसा हुआ हो | मगर आपका सफ़र चाय की दूकान से उठा है तो आम आदमी के लिए आपसे ये निम्न आशाएं रखना जरूरी हैं 
    (1) आप की शिक्षा मंत्री शिक्षा सुधार , तिरंगा सभी विश्वविद्यालय में लगाने की घोषणा करती हैं अच्छी वात है मगर एकसमान शिक्षा व्यवस्था लागू करने का निर्णय कब लिया जाएगा | 
    (2) सम्पूर्ण देश में मजदूरी एकसमान होनी चाहिए और जब कर्मचारी को जिस कारण महगाई भत्ता दिया जाता है उसी कारण से मजदूरों की मजदूरी में महंगाई भत्ता शामिल आपका 56 इंच का सीना कब करेगा 
    (3) जाति निरपेक्षता के कठोर क़ानून कब लागू होंगे 
    (4) देश में आरक्षित सीटों के खाली पद कब तक 56 इंच का सीना भरेगा 
    (5) दलित हित की वात करना अच्छी रणनीति है मगर प्रोमोशन में आरक्षण का विल कब पारित होगा ? 
    (6) रेलवे में आपने किराया बढ़ाया मगर सामान्य श्रेणी के कोच की संख्या अभी तक नही बढी आपका 56 इंच का सीना कब निर्णय लेगा 
    (7) स्वास्थ्य बजट को पिछले सरकार में कम कर दिया गया उसमें वृद्धि कब होगी 
    (8) चीन हर क्षेत्र में वृद्धि कर रहा है ..उसके यहाँ शोध तेजी से हो रहे हैं इंजीनिरिंग के नए शोध वहा हो रहे हैं ..अपने देश भारत में ये शोध के लिए सरकार कब जागेगी 
    (9) क्यों नोबेल पुरस्कार विजेता ने हमारी विज्ञान कांग्रेस पर नकारात्मक टिप्पड़ी की 
    (10) शंकर्विघा , बाथेपुर , बाथानीतोला आदि ऐसे नरसंहार काण्ड के हत्यारे कौन है ऐसे दलितों के हत्याकांड के दोषियों को खोजने के लिए राष्ट्रीय आयोग कब गठित होगा 
    (11) सरकारी बैंक से जो कारपोरेट ने पैसा लूट रखा है वो कर्जा वसूलने की प्रक्रिया कब शुरू होगी 
    महोदय प्रथम पत्र में आपसे ये कुछ वातों को समझने और उनपर परिणाम आधारित व्यवस्था की उम्मीद रखता हूँ ..इस देश में नेताओं को फेंकने वाला , फेंकू , इतिहास भूगोल का ज्ञान न रखने वाला , इत्यादि नकारात्मक जुमलों से नवाजा जाता है क्योंकि पिछले नेताओं की ये आदत रही है ..आशा है नेता शब्द को आप सार्थक परिभाषा अपने कार्यों से देंगे 
    जय भीम 

    डी.पी.सिंह 
    अध्यक्ष 
    THE RISE UP FOUNDATION 
    dpsctc@gmail.com

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    Memorandum to President of India



    February 19, 2016





    Press Release





    Leaders of Left parties met President of India today and handed over the following memorandum.



    -----------------------------------------------------------------------------------------



    Respected Rashtrapatiji,



    We, the undersigned, strongly condemn the attack launched by the RSS-BJP against the Left and all other democratic and secular forces in the country. It is clear that by spreading the canard of being "anti-national" the RSS-BJP have mounted an all India attack against the Indian people.



    While strongly condemning the attack mounted by the RSS under the patronage of this BJP-led NDA government against the Jawaharlal Nehru University, we, the undersigned, see this as part of a larger design by the communal forces to carry forward their agenda in institutions of higher learning. This systemic pattern is clearly visible in the incidents in Film & Television Institute of India, Hyderabad Central University leading to the tragic suicide of Rohit Vemula, the incidents in IIT Chennai and now in Jadavpur University.



    It is clear that the RSS-BJP are mounting an open attack on the democratic and constitutional rights of the people. Further, such attacks are part of the efforts to sharpen communal polarisation in the country.



    We, the undersigned, demand that the JNU Students Union President, Kanhaiya Kumar must be released and all cases of sedition filed against students must be withdrawn forthwith. No harassment and witch hunting must be allowed. The truth has now come out that most of the evidence produced by the government was fabricated. Those who have fabricated the evidence and propagated it, must be punished under the law.



    We, the undersigned, request the Hon'ble President of India to immediately intervene to defuse the situation and prevail upon the Indian government to withdraw from this dangerous course that it has adopted.



    We are appealing to you, as the custodian of the Indian Constitution, to urgently intervene  to defend the people's Constitutional rights that are being trampled upon today.





    With regards,





    S. Sudhakar Reddy                                    Sitaram Yechury, MP

    General Secretary, CPI                                 General Secretary, CPI(M)





    Pawan Verma, MP                                     Premchand Gupta, MP

    Janata Dal (United)                             Rashtriya Janata Dal







    D. P. Tripathi, MP                                     D. Raja, MP

    Nationalist Congress Party                            CPI







    Mohd Salim, MP

    CPI(M)



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     Defend People's Constitutional Rights -- Left Parties

    Communist Party of India (Marxist)

    Communist Party of India

    Revolutionary Socialist Party

    All India Forward Bloc

    Communist Party of India (Marxist-Leninist)-Liberation

    Socialist Unity Centre of India (Communist)





    February 19, 2016



    Press Release



    Leaders of the six Left parties - the CPI(M), CPI, RSP, AIFB, CPI(ML) &
    SUCI(C) met in New Delhi today. They have issued the following statement:





    Defend People's Constitutional Rights



    The Left parties strongly condemn the attack launched by the RSS-BJP against
    the Left and all other progressive forces. It is clear that under the false
    allegation of being "anti-national" the RSS-BJP have mounted an all India
    attack against the Indian people.



    The Left parties while strongly condemning the attack mounted by the RSS
    under the patronage of this BJP-led NDA government against the Jawaharlal
    Nehru University see this as part of a larger design by the communal forces
    to carry forward their agenda in institutions of higher learning. This
    systemic pattern is clearly visible in the incidents in Film & Television
    Institute of India, Hyderabad Central University leading to the tragic
    suicide of Rohit Vemula, the incidents in IIT Chennai and now in Jadavpur
    University.



    It is clear that the RSS-BJP are mounting an open attack on the democratic
    and constitutional rights of the people. Further, such attacks are part of
    the efforts to sharpen communal polarisation in the country to also divert
    the attention of the people from the growing burdens being imposed upon them
    by the total failure of this NDA-led Modi government on all fronts.



    The Left parties demand that the JNU Students Union President, Kanhaiya
    Kumar must be released and all cases of sedition filed against students must
    be withdrawn forthwith. No harassment and witch hunting must be allowed. The
    truth has now come out that most of the evidence produced by the government
    was fabricated. Those who have fabricated the evidence and propagated it,
    must be punished under the law.



    The Left parties have decided to call for an all India protest from February
    23 to 25, against the machinations of the Central government under RSS
    guidance. This countrywide campaigns amongst the people to expose such
    attacks on the people including the violence in the courts will be under the
    banner "Defend People's Constitutional Rights".



    The Left parties appeal to all progressive, democratic and secular forces to
    join this protest.



    Those who attended today meeting are:



    Sitaram Yechury, Prakash Karat & S Ramachandran Pillai - CPI(M), Sudhakar
    Reddy, Gurudas Dasgupta & D Raja - CPI, Swapan Mukherjee -
    CPI(ML)-Liberation, Abani Roy - RSP,  Pran Sharma - SUCI(C) and Debabrata
    Biswas (AIFB).













    Released from the CPI(M) Office

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  • 02/19/16--06:18: ढूँढ़ो अब इस रेत में जो भी सोचेगा अलग हम लेंगे संज्ञान जेएनयू का तोड़ दो मेधामय अभिमान रात हुई इस राष्ट्र की जैसे किया मसान आसपास हैं घूमते नव नाज़ी बलवान अधिनायक की आँख में हत्या का वीरान इस विदर्भ में झूलते लुटते हुए किसान हर कोने से गूँजता फासिस्टी जयगान उस कोने बजरंग है, पतंग लिये सलमान इस ताक़त के सामने काँप गया ईमान दावत में दिखते रहे पीके नर्वस खान किस हक़ से हो जाँचते बार बार ईमान हर भाषा में पूछते कितने पाकिस्तान साँस भरी पानी पिया खुसरो लुटा मकान ढूँढ़ रहे इस रेत में अपना नखलिस्तान (देवी प्रसाद मिश्र)

  • ashish k Singh

    A poem by Devi Prasad Mishra, senior Hindi poet 
    carrying shades of Khusro, Nagarjun and Raghuvir Sahay

    * * *

    ढूँढ़ो अब इस रेत में

    जो भी सोचेगा अलग हम लेंगे संज्ञान 
    जेएनयू का तोड़ दो मेधामय अभिमान

    रात हुई इस राष्ट्र की जैसे किया मसान 
    आसपास हैं घूमते नव नाज़ी बलवान

    अधिनायक की आँख में हत्या का वीरान 
    इस विदर्भ में झूलते लुटते हुए किसान

    हर कोने से गूँजता फासिस्टी जयगान 
    उस कोने बजरंग हैपतंग लिये सलमान

    इस ताक़त के सामने काँप गया ईमान 
    दावत में दिखते रहे पीके नर्वस खान

    किस हक़ से हो जाँचते बार बार ईमान 
    हर भाषा में पूछते कितने पाकिस्तान

    साँस भरी पानी पिया खुसरो लुटा मकान 
    ढूँढ़ रहे इस रेत में अपना नखलिस्तान

    (देवी प्रसाद मिश्र)

    d.pm@hotmail.com

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  • 02/19/16--09:53: মিছিলের সেই আমাদের কইন্যা,যাহার হাতে মশাল তাহারে জ্যান্ত পোড়ানোর হুমকি দিয়ে যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয় আক্রমণ,দ্যাশে কি সরকার নাই?মুনুষ্যি নেই? বিশ্ববিদ্যালয় বাবরি মসজিদ নয়। বিশ্ববিদ্যালয় স্বর্ণমন্দিরও নয়। সারা দ্যাশে ছাত্র যুব সমাজ জানান দিতাছে। বিষহীন সাপ তেড়ে মেরে ডান্ডা ঠান্ডা করার কাব্য কইরাছেন সুকুমার রায়! দংশিছে যে বিষধর সর্পকূল তাহার কি ব্যবস্থা,তিনি লেখেন নাই! তাইলে কি বাঙালী মেয়েদের জ্যান্ত পোড়ানোর হুমকি মুখ বুজে সহ্যি কইরাই মাতৃভাষা দিবস উদ্যাপন? দল মত নির্বিশেষ ধোলাইয়ের পুণ্যকর্মের বিরুদ্ধে 21 শে ফেব্রুয়ারি পথে নামবেন কারা? আফজলকে শহীদ বানাইছে যাহারা ,তাহাদের সহিত নিযমিত খাট ভাঙ্গা আর ছেলে মেয়েগুলান কাশ্মীর উচ্চারণ করলেই দেশদ্রোহী,এই মত্স ন্যায়ের মগের মল্লুকে মানুষ আছেন কয়জনা? ভারতজুড়ে ছড়িয়ে পড়েছে নেহেরু বিশ্ববিদ্যালয়ের উত্তাপ! 21 শে ফেব্রুয়ারি আবার মাতৃভাষা দিবস,ঢাকার সেই রক্তাক্ত দিনগুলি যাহারা ভোলেন নাই,তাহারে পথে নামিবেন। ধোলাই বিশেষজ্ঞরা আটকাইতে পারিলে আটকান,রাস্তায় নামতে পারলে নামুল এবং ঔ ছাপান্ন ইন্চির সীনা ফুলাইয়া একবার দেখিয়া লউন,বাঙালি সত্যিই কি মরিযাছে,আপন মাইয়াক

  • মিছিলের সেই আমাদের কইন্যা,যাহার হাতে মশাল তাহারে জ্যান্ত পোড়ানোর হুমকি দিয়ে যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয় আক্রমণ,দ্যাশে কি সরকার নাই?মুনুষ্যি নেই?


    বিশ্ববিদ্যালয় বাবরি মসজিদ নয়।

    বিশ্ববিদ্যালয় স্বর্ণমন্দিরও নয়।

    সারা দ্যাশে ছাত্র যুব সমাজ জানান দিতাছে।


    বিষহীন সাপ তেড়ে মেরে ডান্ডা ঠান্ডা করার কাব্য কইরাছেন সুকুমার রায়!


    দংশিছে যে বিষধর সর্পকূল তাহার কি ব্যবস্থা,তিনি লেখেন নাই!


    তাইলে কি বাঙালী মেয়েদের জ্যান্ত পোড়ানোর হুমকি মুখ বুজে সহ্যি কইরাই মাতৃভাষা দিবস উদ্যাপন?


    দল মত নির্বিশেষ ধোলাইয়ের পুণ্যকর্মের বিরুদ্ধে 21 শে ফেব্রুয়ারি পথে নামবেন কারা?


    আফজলকে শহীদ বানাইছে যাহারা ,তাহাদের সহিত নিযমিত খাট ভাঙ্গা আর ছেলে মেয়েগুলান কাশ্মীর উচ্চারণ করলেই দেশদ্রোহী,এই মত্স ন্যায়ের মগের মল্লুকে মানুষ আছেন কয়জনা?


    ভারতজুড়ে ছড়িয়ে পড়েছে নেহেরু বিশ্ববিদ্যালয়ের উত্তাপ!

    21 শে ফেব্রুয়ারি আবার মাতৃভাষা দিবস,ঢাকার সেই রক্তাক্ত দিনগুলি যাহারা ভোলেন নাই,তাহারে পথে নামিবেন।


    ধোলাই বিশেষজ্ঞরা আটকাইতে পারিলে আটকান,রাস্তায় নামতে পারলে নামুল এবং ঔ ছাপান্ন ইন্চির সীনা ফুলাইয়া একবার দেখিয়া লউন,বাঙালি সত্যিই কি মরিযাছে,আপন মাইয়াকে জ্যান্ত পোড়ানোর হুমকি,বিশ্ববিদ্যালয বন্ধের যাবতীয় উপক্রম সত্বেও সে কি রবীন্দ্র সঙীত গাহিতে গাহিতে বেবাক ভূল মাইরা যাইবে সেই অমোঘ গান-আমার সোনার বাংলা আমি তোমায় ভালোবাসি অথবা আ মরি মোর বাংলা ভাষা?


    পলাশ বিশ্বাস

    মিছিলের সেই আমাদের কইন্যা,তৃণা ডে সরকার যার নাম,যাহার হাতে মশাল তাহারে জ্যান্ত পোড়ানোর হুমকি দিয়ে যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয় আক্রমণ,দ্যাশে কি সরকার নাই?মুনুষ্যি নেই?


    বিশ্ববিদ্যালয় কি জিনিষ,সত্তরের দশকে মাতৃভাষার জন্য বাঙালির সেই ঐতিহাসিক মহাসংগ্রাম বুঝিয়ে দিয়াছে।সারা বিশ্ব বুঝিয়াছে কিন্তু রামরাজত্বের ধ্বজা ধারিরা ব্যাদের নামে রামায়ণ মহাভারত এবং নানাবিধ পুরাণের প্রামাণিকতায় এতটাই উদ্বুদ্ধ যে তাহারা নূতন ইতিহাস ব্যাদের আলোয় রচতাছেন,তারই পরিণাম ভারত আজ মহাভারত,দশ দিগন্ত কুরুক্ষেত্র,তাহারা বুঝেলেন না।


    তবু দেশদ্রোহিতার অভিযোগ প্রমামিত হইবার আগে,বিচার হইবারও পূর্বে বাংলার ছাত্র ছাত্রীদের ধোলাই দেওয়ার পুণ্যকর্মের অনুষ্ঠান আয়োজিত করার কথা ভাবিলে এই বসন্তে এমত পদ্ম বিপর্যয় ঘটেনা।


    ভাগ্যি ভালো,এখনো দমদম দাওয়ায়ের যুগ ফেরে নাই।


    একতাবদ্ধ কলকাতা যেভাবে আপন সন্তানদের পাশে দাঁড়িয়ে ক্ষমতাদলের অনুপস্থিতিতেও যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ে আদগের দিনের হনু উত্পাত প্রতিহত করিয়াছে,তাহাতে বোঝা যাইতেছে গোপন সমঝৌতায় মুসলমানদের টুপি পরাইয়া,খযরাত দিয়া,কথায় কথায চাকরি,অনুদান ইত্যাদি,পিপিপি উন্নয়নের ফানুস উড়াইয়া শাসকের ক্ষমতা জনগণের জোট সত্বেও বাঁচিলেও বাঁচিতে পারে কিন্তু যৌবন সুনামিতে পদ্ম ফসলের সমুহ সর্বনাশ।


    কোলকাতায় আবার পার্টিশানের জন্য ডাইরেক্ট একশানের যাহারা উদ্যোক্তা তাহারা রিএকশান নিয়া ভাবিলে বর্গী বাহিনীর সুবিধাই হইত।


    এহন আসন ত একটাও হইল না,ধর্মোন্মাদী মেরুকরণের সাধ ও পুরিবে না।


    সাদা টুপি সম্পরদায়  যদি হিজাব, আম্মা, দোয়া, সালাম,নামাজের ধর্মনিরপেক্ষার অন্ধকার হইতে ফিরিয়া ঘুইরা দাঁড়ায় এই বাংলার মাডিতেই দেশভাগের যুদ্ধঅপরাধীদের বিচার শুরু হবে।ফাঁসিতে কাহারা ঝলিবেন,কাহারা বাঁচিবেল কহনা মুশকিল হ্যায়।


    বিশ্ববিদ্যালয় বাবরি মসজিদ নয়।স্বর্ণমন্দিরও নয়।

    সারা দ্যাশে ছাত্র যুব সমাজ জানান দিতাছে।


    জেএনউ বন্ধ করার,যাদবপুরে মিছিলে শামিল ছাত্রীকে জ্যানত পুড়িয়ে মারার হুমকি যাহারা দিয়াছেন,সীমান্তের ওপার রাসি রাশি দড়িতে ঝূলতে থাকা যুদ্ধঅপরাধীদের বিচারতাহারা দ্যাখতাছেন না এবং এতদদ্বারা তাহারা সিধা বাংলাদেশ হইতে পরিবারের প্রধানদের জইন্যে রাসি রাশি দড়ি আমদানি করিলেন।


    একদা ঢাকা বিশ্ববিদ্যালয়কে বাবরি বিধ্বংস ও আপারেশন ব্লু স্টারের কারসাজির বহু আগে ধ্বংস করার প্রচেষ্টার নির্মম পরিণাম পাকিস্তানের ফৌজি হুকূমত হাড়ে হাড়ে পূর্ব পাকিস্তান ক্যালাইয়া যাওনে বুঝচে।


    পাকিস্তানি সৈন্য বাহিনী ট্যান্কের গোলায় ঢাকা বিশ্ববিদ্যালয়ের দেশদ্রোহীদের উত্খাত করতে চেয়েছিল শুধু নয়,ছাত্র ছাত্রীদের,শিক্ষক,কবি,লেখক সাংবাদিক,শিল্পী মাত্রকেই জ্যান্ত কবর দিয়াছিলেন।


    শুধু জ্যান্ত জ্বালানিই হয়নি  বাংলার মাইয়াগুলান সেদিন,ধর্ষণ সুনামিতে প্রজন্মের পর প্রজন্ম পাকিস্তান অক্ষত রাখার উপক্রমের বলিও তাহারা হইছেন।রায়ফলের বেয়নেটে নিস্পাপ শিশুদের বিঁধে হাওয়ায় ফৌজী সন্ত্রাসের সেই ইতিহাস বাঙালি ভোলে নাই।


    ভারতবর্ষে ফ্যাসিস্ট হিন্দু রাষ্ট্র এখন সেই পাকিস্তানী উন্মাদ ফৌজি শাসনের ইতিহাসের পুনরাবৃত্তি কইরতে চাইছেন হায়দ্রাবাদ বিশ্ববিদ্যালয়ের দলিতের জন্য ন্যায়ের দাবিতে ঐক্যবদ্ধ জনগণের আন্দোলনের বিভ্রান্তি ছড়িয়ে দলিত পদ্মবাহিনী ছত্রভঙ্গের মহাসঙকট এড়াতে

    গতকাল দিল্লীর রাজপথে হাজার পঁচিশেক ছাত্র যুবদের প্রতিবাদে যাহাদের টনক নড়ে নাই।


    চেন্নাই থেকে মহারাষ্ট্র গুজরাত রাজস্থানের গোবলয়ে চানা আন্দোলনে যাহাদের হুঁশ হইল না,রেল অবরোধও শুরু হইছে,সেই বেবোধদের ভয়ে যারা উটপাখি,ভবিষ্যতের ইচিহাস তাহাদের মাফ করিবে না।


    21 শে ফেব্রুয়ারি আবার মাতৃভাষা দিবস,ঢাকার সেই রক্তাক্ত দিনগুলি যাহারা ভোলেন নাই,তাহারে পথে নামিবেন।


    ধোলাই বিশেষজ্ঞরা আটকাইতে পারিলে আটকান,রাস্তায় নামতে পারলে নামুল এবং ঔ ছাপান্ন ইন্চির সীনা ফুলাইয়া একবার দেখিয়া লউন,বাঙালি সত্যিই কি মরিযাছে,আপন মাইয়াকে জ্যান্ত পোড়ানোর হুমকি,বিশ্ববিদ্যালয বন্ধের যাবতীয় উপক্রম সত্বেও সে কি রবীন্দ্র সঙীত গাহিতে গাহিতে বেবাক ভূল মাইরা যাইবে সেই অমোঘ গান-আমার সোনার বাংলা আমি তোমায় ভালোবাসি অথবা আ মরি মোর বাংলা ভাষা?


    মন্দাক্রান্তা যেদিন অসহিষ্ণুতার বিরুদ্ধে প্রথম বাঙালির শিরদাঁড়া সোজা করার সাহস দেখিয়েছিল,আমার ঔ প্রিয় কবিকে আমি ভালোবাসার মুখ বলেছিলাম।


    আজ লিখতে হচ্ছে বসন্ত হোক না হোক্,বসন্ত সমাগত দ্বারে।


    আজ লিখতে হচ্ছে সুড়ুঙের মুখে নন্দিনী মশাল হাতে প্রতীক্ষা করেনি কারো,সে মিছিলের মুখ হয়ে গেল।


    গর্তে লুকিয়েছিল যে বিষধর পোকা মাকড়,প্দম ফুলে তাহাদের বসবাস,মনুষত্বকে দংশিছে সেই সর্পকূল।


    গানের সুরে হোক কলরব আবার ফিরল আনন্দ নগরীতে।

    আমাদের আছে গান,গানেই আমাদের প্রাণ।

    গান আমদের অক্ষত যৌবন।

    সেই গান আজ হোক কলরব।

    মিছিলের শহরে মিছিল আসিছে ফিরে।

    পদাতিকরা আবার হইতাছে সাবধান।


    জওহরলাল নেহেরু বিশ্ববিদ্যালয় (জেএনইউ) ছাত্র সংসদের সভাপতি কানহাইয়া কুমারের মুক্তির দাবিতে বৃহস্পতিবার ভারতের বিভিন্ন স্থানে বিক্ষোভ, সমাবেশ ও মানববন্ধন অনুষ্ঠিত হয়েছে। উত্তাল ছাত্রবিক্ষোভে প্রকম্পিত হয়েছে ক্যাম্পাস থেকে  রাজপথ। উত্তাল যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের ভিসি হুমকি দিয়েছেন, শিক্ষার্থীদের মত প্রকাশের স্বাধীনতা ক্ষুণ্ন করা হলে তিনি পদত্যাগ করবেন। এদিকে আন্দোলনরত শিক্ষার্থীদের প্রতি কংগ্রেসের সমর্থন থাকলেও বিজেপি এবং তাদের ছাত্র সংগঠনের তরফে আন্দোলন দমনের প্রচেষ্টা অব্যাহত রয়েছে।

    ছাত্রদের পাশাপাশি বিভিন্ন বিশ্ববিদ্যালয়ে চলমান এ আন্দোলনে অংশ নিয়েছেন শিক্ষকরাও। বৃহস্পতিবার ভারতের অন্তত ১০টি শহরের রাজপথে বিক্ষোভে অংশ নেন ছাত্ররা। বেঙ্গালুরু, জয়পুর ও চেন্নাইয়ের বিক্ষোভ থেকে গ্রেফতারকৃত ছাত্রনেতা কানহাইয়া কুমারের দ্রুত মুক্তির দাবি জানানো হয়। বিক্ষোভের এই বাস্তবতায় ভারতীয় সংবাদমাধ্যমগুলো বলছে, দিল্লির এক বিশ্ববিদ্যালয় ছাড়িয়ে এ আন্দোলন এখন পুরো ভারতজুড়ে ছড়িয়ে পড়েছে।

    রাজধানী দিল্লিসহ ভারতের বিভিন্ন স্থানে সাধারণ শিক্ষার্থীদের সঙ্গে নিয়ে বাম ছাত্রদের সংগঠনগুলোর বিক্ষোভে বাধা দেয় ক্ষমতাসীন হিন্দুত্ববাদী বিজেপি'র ছাত্র সংগঠন এবিভিপি। 'দেশবিরোধী'আখ্যা দিয়ে তাদের ওপর হামলে পড়ে বিজেপি সমর্থকরা।

    জওহরলাল নেহেরু বিশ্ববিদ্যালয়ে হামলার প্রতিবাদে এমন প্রতিক্রিয়া দেখায় কলকাতার যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের শিক্ষার্থীরা।

    বৃহস্পতিবার কানহাইয়া কুমারের সমর্থনে বড় রকমের বিক্ষোভ অনুষ্ঠিত হয় কলকাতার যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ে (জেইউ)। এসএফআই, ডিএসও-সহ বাম ছাত্র সংগঠনগুলোর ডাকে এ বিক্ষোভে শামিল হন শিক্ষার্থীরা। এর বিপরীতে উত্তাল ছাত্রবিক্ষোভে কথিত 'দেশবিরোধী স্লোগানের'প্রতিবাদে পাল্টা বিক্ষোভ করে বিজেপি'র ছাত্র সংগঠন এবিভিপি। তারা জেএনইউ ইস্যুতে বামদের লাগানো পোস্টার, ব্যানার ভাঙচুর করে।

    জেএনইউ ইস্যুতে বামদের পাশে দাঁড়িয়েছে ভারতীয় কংগ্রেস। যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ে বামদের সঙ্গে মিলে বিজেপিকে প্রতিরোধ করে কংগ্রেস সমর্থকরা। এই ইস্যুতে রাষ্ট্রপতি প্রণব মুখার্জির কাছে স্মারকলিপি দিয়েছেন কংগ্রেসের সহসভাপতি রাহুল গান্ধী।

    যাদবপুর বিশ্ববিদ্যালয়ের ছাত্র-ছাত্রীরা দেশবিরোধী স্লোগান দিয়েছে বলে অভিযোগ ওঠায় এ সংক্রান্ত প্রতিবেদন চেয়েছে ভারতের কেন্দ্রীয় সরকার। পশ্চিমবঙ্গ সরকারকে এ বিষয়ে বিস্তারিত রিপোর্ট পাঠাতে হবে কেন্দ্রীয় স্বরাষ্ট্র মন্ত্রণালয়ের কাছে। রাজ্যের গভর্নর কেশরীনাথ ত্রিপাঠিও এ ব্যাপারে রিপোর্ট চেয়েছেন।

    জেইউ'তে কথিত দেশবিরোধী তৎপরতার অভিযোগ উঠলেও যাদবপুরের ভিসি সুরঞ্জন দাস সাফ জানিয়ে দিয়েছেন, তিনি কারও বিরুদ্ধে অভিযোগ করবেন না এবং পুলিশ ডেকে তিনি ক্যাম্পাস শাসন করবেন না। সে রকম কিছু হলে পদত্যাগেরও হুমকি দিয়েছেন তিনি।

    ভিসি সুরঞ্জন দাস বলেন, 'দরজা বন্ধ করে, ফোর্স দিয়ে বিশ্ববিদ্যালয় পরিচালনা করা যায় না। কারণ বিশ্ববিদ্যালয় প্রাঙ্গন হলো মুক্ত চিন্তার জায়গা।'বিচ্ছিন্নতাবাদী বা দেশবিরোধী স্লোগানের নিন্দা করলেও গণতন্ত্রে সবার মত প্রকাশের স্বাধীনতা রয়েছে বলে মন্তব্য করেন সুরঞ্জন দাস।

    জেএনইউতে আফজাল গুরুর পক্ষে স্লোগান উঠার একদিন পর বুধবার এ বিশ্ববিদ্যালয়ের ক্যাম্পাসে কাশ্মির, মনিপুর ও নাগাল্যান্ডের স্বাধীনতার দাবিতে পোস্টার পাওয়া গেছে। টাইমস অব ইন্ডিয়ার এক খবরে এ কথা জানানো হয়। হিন্দিতে লেখা এক পোস্টারে বলা হয়েছে, 'আমরা স্বাধীনতা চাই। কাশ্মিরের স্বাধীনতা, মনিপুরের স্বাধীনতা, নাগাল্যান্ডের স্বাধীনতা।'তবে ক্যাম্পাসের ছাত্রসংগঠনগুলো এসব পোস্টার তাদের নয় বলে দাবি করেছে।

    পশ্চিমবঙ্গে বিজেপির ছাত্র সংগঠন এবিভিপি'র রাজ্য সম্পাদক সুবীর হালদারের দাবি, 'আমাদের কাছে প্রমাণ আছে যাদবপুরের নির্ঝর, প্রিয়স্মিতা এবং অরুমিতা রাষ্ট্রদ্রোহী এবং পাকিস্তানের দালাল। এরা লাহোরে গিয়ে ভারতের বিরোধিতা করতে পারে। আমরা অবিলম্বে এদের দেশদ্রোহী আখ্যা দিয়ে গ্রেফতারের দাবি জানাচ্ছি।'সুবীর হালদারের দাবি, 'রাস্তায় দাঁড়িয়ে ঋতব্রত (সিপিআই-এম-এর এমপি) এই দেশদ্রোহীদের সুরে সুর মিলিয়ে মিছিল করেছে। আমরা ওর উপরে নজর রাখছি। যদি এর পরেও তাকে এ ধরনের মিছিলে দেখা যায় তাহলে এফআইআর করে গ্রেফতারের দাবি তুলব।'

    রাজ্য বিজেপি'র সাবেক প্রেসিডেন্ট এবং দলের সর্বভারতীয় সাধারণ সম্পাদক রাহুল সিনহার দাবি, দেশের শত্রুদের সাহায্য করার জন্যই কমিউনিস্টদের জন্ম। তিনি বলেন, 'চরবৃত্তি করাই ওদের কাজ। রাষ্ট্র ভাগের যে কোনও ষড়যন্ত্রের মোকাবিলা করতে বিজেপি তৈরি আছে। রাস্তায় নেমেই সাধারণ মানুষ ধোলাই দিয়ে রাষ্ট্রবিরোধিতার জবাব দেবে।'

    বুধবার দিল্লির পাতিয়ালা হাউস কোর্টে জেএনইউ ছাত্র নেতা কানহাইয়া কুমারকে কিছু আইনজীবী মারধর করায় তাকে সমর্থন করে একে 'পুণ্যের কাজ'বলে মন্তব্য করেছেন বিজেপি নেতা রাহুল সিনহা।

    এদিকে, জওহরলাল নেহেরু বিশ্ববিদ্যালয়েও বিষয়টি নিয়ে তদন্ত কমিটি হয়েছে। তবে বৃহস্পতিবার প্রতিষ্ঠানটির শিক্ষক ও শিক্ষার্থীরা জানিয়ে দিয়েছেন, তারা বিশ্ববিদ্যালয়ের তদন্ত কমিটির সামনে হাজির হবেন না। উচ্চ পর্যায়ের ওই প্যানেলে মাত্র তিনজনের পরিবর্তে আরও ছাত্র ও শিক্ষকদের প্রতিনিধি হিসেবে নিয়োগ দেওয়ার দাবি জানিয়েছেন তারা।

    জেএনইউ'র ভাইস চ্যান্সেলর নিরাপত্তার কারণে ছাত্রদের মিছিল না করার আহ্বান জানিয়েছেন। তবে এ দাবি প্রত্যাখ্যান করেছেন ছাত্ররা।


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