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This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

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    मां काली को दंगाई बना दिया बंगाल में तो बंट गया भारत!


    उसी दंगा फसाद से बनायेंगे हिंदू राष्ट्र?


    #Embroidered Quilt#समयांतर का असहिष्णुता पर फोकस #Jasimuddin#Nakshi Kanthar maath#Sojan Badia #Nandikar #Ujantoli#Gautam Haldar

    পুরানো সেই দিনের কথা: Memoirs of a Hindu Daughter of a Muslim Family which gave up BEEF!

    उनका मिशन: the strategy and strategic marketing of blind nationalism based in religious identity!

    उनका मिशन:The institution of the religious partition and the Politics of religion

    उनका मिशन: The Economics of Making in!


    Palash Biswas

    इतिहास और वर्तमान का संबंध

    साक्षात्कार प्रसिद्ध इतिहासकार और चिंतक रोमिला थापर से रणबीर चक्रवर्ती की इतिहास, समाज और संस्कृति पर बातचीत (प्रस्तुत साक्षात्कार, अंग्रेजी पाक्षिक फ्रंटलाइन में प्रकाशित, रोमिला थापर के लंबे साक्षात्कार 'लिंकिंग द पास्ट एंड द प्रेजेंटÓ का कुछ संपादित रूप है। इसकी अगली किस्त आगामी अंक में प्रकाशित होगी। ) भारत के सर्वाधिक प्रतिष्ठित इतिहासकारों में [Read the Rest…]

    मित्रों को पढ़ायें :

    मेरे सामने समयांतर का नवंबर अंक है जो कल ही डाक से मिला है।पच्चीस साल हो गये हैं इस इलाके में।बाजार में हर शख्स मुझे और सविता बाबू को जानता है।फल वाले सब्जी वाले मछली वाले मौका मिलते ही सविता बाबू को कुछ न कुछ थमा देते हैं और मोल भाव भी नहीं करते।और तो और,कोलकाता में मिलन मेले में वे खाली हाथ चली गयीं तो पूरे पांच हजार के कपड़े लत्ते बांध दिये और गट्ठर उटाकर वे घर लौटीं तो मैंने पूछा कि बिन पैसे तुम यह सब क्या उठा लायी हो तो वे बोलीं कि उनने कहा कि हम सभी आपको जानते हैं ,घर पहुंचकर पैसे वसूल लेंगे।


    मगर डाकिया नया है और वह हमें नहीं जानता।समयांतर और तीसरी दुनिया के अलावा डाक से कुछ आता भी नहीं है।हमारा कुछ भी निवेश नहीं है,तो वे कागजात भी नहीं आते जो इन दिनों का डाक है।डाकिया को पूछताछ में कई दिन लग गये।उनका धन्यवाद कि अब भी डाक खोज खाजकर पते तक पहुंच जाती है।


    वरना कूरियर वाले तो न मालूम हुआ पता तो काहे को झख मारे,सीधे वापस।बैंकवाले खाता खोलने पर चेकबुकवा पते पर भेजते हैं।कूरियर से और अमूमन वह कूरियर पते तक नहीं पहुंचता।


    खैर मनाइये कि बाकी तमाम महकमों की तरह निजीकरण मुहिम के बावजूद डाकसेवा फिलहाल जारी है।


    समयांतर के ताजा अंक में पंकजदा का लिखा संपादकीय,आनंद तेलतुंबड़े,राम प्रकाश अनंत और महेंद्र मिश्र के लेख हैं।जरुर पढ़ें।


    इस अंक में सबसे खास है,इतिहास और वर्तमानका संबंध,सुप्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर से रणवीर चक्रवर्ती की बातचीत।


    आज के प्रवचन का मकसद है,अखंड और विभाजित भारत की लोक जमीन पर खड़े होकर देहात भारतकी धड़कनों को सुनना।


    बंगाल में एक कवि हुआ करते थे,जसीमुद्दीन।

    पल्ली कवि जसीमुद्दीन।

    कविता के अलावा लोकसंगीत से भी उनका गहरा ताल्लुकात है,उतना ही जितना अब्बासुद्दीन या सचिन देव बर्मन का।


    दंगा फसाद पर उनकी दो बेहद खास कृतियां हैं।

    नक्शी कांथार माठ और सोजन बादियार घाट।


    ईस्ट इंडिया कंपनी की अवैध संतानों ने कैसे इस भारत तीर्थ को बंटवारे का शिकार बना दिया और कैसे आज भी बंटवारे का सिलसिला जारी है,यह त्रासदी बंगाल के गांवों की समूची खुशबू और तमाम झांकियों के साथ इस देहाती कवि,पल्ली कवि ने अपनी इन कृतियों में अपने कलेजे के खून के साथ पेश की है।


    दोनों कृतियां क्लासिक हैं और दुनियाभर में मशहूर हैं और हम फिलहाल नहीं जानते कि क्या जसीमुद्दीन की आत्मा से खंडित भारत की जनता का कोई परिचय है या नहीं।


    क्योंकि बंगाल में स्वतंत्रता सेनानियों को जैसे भूल गये लोग,इस मुसलमान कवि को भी लोग भूल जाते अगर नांदीकार जैसे थिएटर ग्रुप और कल्याणी जैसे कस्बों के रंगकर्मी सोजन बादियार घाट और नक्शी कांथार माठ का मंचन नहीं करते।


    जोगेंद्र बाबू के गृहक्षेत्र नोहाटा से माकपा के पूर्व विधायक कामरेड रवि सरकार के बेटे,हमारे अफसर मित्र गौतम सरकार जसीमुद्दीन अकादमी चलाते रहे हैं।


    जसीमुद्दीन पर अकादमी की पत्रिका उजानतली में विशेष सामग्री है,जिन्हं आज के प्रवचन में संदर्भ पंरसंग के मुताबिक साझा करना है।


    इस विशेषांक में हमारे मित्र बंगाल के प्रमुख दलित साहित्यकार कपिल कृष्ण ठाकुर का एक आलेख सोजन बेदियार घाट पर केंद्रित है।तो हिंदू मुसलमान एकता पर जसीमुद्दीन के लिखे दस्तावेज भी हैं।


    अखंड बंगाल के सबसे मशहूर लोककवि विजय सरकार और हमारे फुफेर भाई निताई सरकारी की पत्नी सुरमा भाभी की वे दादाजी हैं,जिन्हें जसीमुद्दीन ने कोलकाता में इनट्रोड्युस किया कोलकाता विश्वविद्यालय में विद्वतजनों की एक सभा में।


    उन लोककवि  विजय सरकार का मशहूर गीत नक्शी कांथार माठ भी इस अंक में हैं।बांग्लादेशी आलोचक हेना का जसीमुद्दीन पर आलेख है बहुआयामी।यह सब शेयर कराना है।


    नक्शी कांथार माठ और सोजन बादियार घाट दोनों मूलतः लोक में रची बसी ग्राम बांग्ला की प्रम कथा है लेकिन उसमें समामाजिक यथार्थ का दिल दहलाने वाले सच का तानाबाना बेमिसाल है।


    वैसा ही जैसे प्यारे अफजल प्रेम कथा है और सीधे राष्ट्र के चरित्र का पर्दाफाश करती है।इसपर हम बोले हैं।लिखा भी है।


    सोजन बादिया का सबसे धांशू सीन वह है जहां मुसलमान सोजन और नमोशूद्र दुली के प्रेम और विवाह के अपराध में जमींदार की कचहरी से नमोशूद्र के लड़ाकों को मां काली की पूजा के फूल बांटकर मुसलमानों के सफाये के लिए ललकारा जाता है।हुक्मउदूली पर बेदखली का फरमान जारी होता है।


    हमने बुजुर्गों से जो किस्से पूर्वी बंगाल के दंगोें से सुने हैं,उनमें भी कहा जाता रहा है कि खुद मां काली अपने कड़ग से मुसलामानो का सफाया कर रही थीं।चूंकि पद्मबिल के दंगे से बंगाल में दंगों का सिलसिला तब शुरु हुआ जब जमींदारी के हिदुत्व ने मां काली को ही दंगाई बना दिया और दलितों के दिमाग में मां काली के ऐसी खौफनाक तस्वीरें चस्पां कर दी हैं जो पीढ़ियों के बावजूद नहीं मिटी है।सविता का ननिहाल उसी पद्मबिल में था और वे लोग उस दंगे को चश्मदीद गवाह रहे हैं।वैसे ही हरिचांद गुरुचांद परिवार की पीआर ठाकुर की बहन हमारी नानी,जेठिमां की मां को पद्मबिल का वह वाकया याद रहा है।


    हमने मां काली की वे खौफनाक रोंगेटे खड़े करने वाले दंगाई दृश्यबंध बचपन में खूब देखे हैं।हमारे लोग उन तस्वीरों से अभीतक उबरे नहीं हैं और हिंदुत्व की पैदल सेना में तब्दील हैं।


    बहरहाल सोजन दुली की दुनिया जैसे उजड़ती है,वैसे ही उजडते है नमोशूद्र और मुसलमान प्रजाजनों के गांव और वहां जमींदारी का हाट बाजार में तब्दील।


    यह कथा आज भी भयानक प्रासंगिक है।यूपी के दंगों में देसी कामधंधों पर दंगों का असली हमला होता रहा है।लोग मारे गये सो को मारे गये लेकिन देसी उत्पादन प्रणाली खत्म। यही किस्सा उनका मिशन भी है।


    नक्शी कांथार माठ भी प्रेमकहानी है।रुपाई और साजू की प्रलयंकर प्रेमकथा है।लव एट फर्स्ट साइट।


    धान पर दखल की लड़ाई के दंगे में तब्दील हो जाने पर दंगाई बन गया रुपाई गिरफ्तारी और सजा के डर से भाग जाता है। लापता हो जाता है रुपाई।


    और उसकी यादें  कथरी के नक्शे के ताने बाने में नये सिरे से रचती जीती है साजू।


    और उन्हीं यादों में दम तोड़ देती हैं।रुपाई आकेर लौटता है तो उसे साजू की कब्र पर नक्शी कांथा मिलता है,जो दंगों के खून से लहूलुहान है।


    हमने मेरठ दंगों पर अपने लघु उपन्यास उनका मिशन का अधूरा पाठ तीन वीडियो में जारी पहले ही किया है।पाठकों की दिलचस्पी नहीं हैं,जानकर आगे पाठ स्थगित है।


    यह लघु उपन्यास बांग्ला में लिखकर 2002 -2003 में बांग्ला अकादमी को तब सौंपा जब इसके अध्यक्ष अन्नदाशंकर राय हुआ करते थे।उसका क्या हुआ हमें नहीं मालूम लेकिन हिंदी में भी पुस्तकाकार इसका प्रकाशन हुआ नहीं है।


    हमें इसकी परवाह भी नहीं है।


    अमेरिका सावधान छपवाने में हमारी गरज नहीं है प्रकाशकों की दिलचस्पी के बावजूद तो बाकी जो रचा लिखा बोला,वे सीधे जनता के हवाले हैं।


    फिरभी आखिरी पुस्तक मेले में,शायद 2003 में जब हम कोलकाता पुस्तक मेले गये तो  जसीमुद्दीन अकादमी में जसीमुद्दीन के बेटे खुरशीद अनवर से वैसे ही मुलाकात हो गयी जैसे भाटियाली संगीत की किंवदंती अब्बासुद्दीन के बेटे बेटी से हमारी मुलाकात होती रही है।


    खुरशीद को टांगकर मैं सीधे वाणी प्रकाशन के स्टाल ले गया और उन्हें खुरशीद के हाथों नक्शी कांथार माठ का अंग्रेजी अनुवाद,वह किताब सौंप दी।हमने आग्रह किया कि जसीमुद्दीन के रचनासग्र से हिंदी जगत को परिचित कराने का काम वे करें।


    अब हम कोई महान विभूति बाबा वगैरह न हुए,तो कुछ हुआ कि नहीं ,हमें मालूम नहीं,लेकिन हम इस शर्म में कि हम हिंदी में जसीमुद्दीन का परिचय किसी से नहीं करवा सकें,फिर खुरशीद भाई से दुआ सलाम भी कर नहीं सकें।यह वीडियो प्राश्चित्त भी है।


    वैसे अब्बासउद्दीन और जसीमुद्दीन का कृतज्ञ भारतीय सिनेमा और संगीत को भी होना चाहिए।इन दोनों ने मिलकर ही आल इंडिया रेडियो के लिए मैमन सिंह गीतिमाला,वहीं मैमन सिंह,जहां से तसलिमा नसरीन हैं,भाटियाली और ग्राम बांग्ला का संगीत गीत तमामो खोज निकाले।


    मेरे पिता पुलिन बाबू महाप्राण जोगेंद्र नाथ मंडल के साथ थे तो महाप्राण के साथी थे बहुत खास ज्ञानेंद्र नाथ मंडल।


    महाप्राण के बेटे जगदीश चंद्र मंडल ने उनपर सिलिसिलेवार किताबें लिखी हैं तो ज्ञानेंद्र बाबू का बेटा गौतम हालदार बंगाल में ग्रुप थिएटर का रुद्रप्रसाद सेनगुप्त के बाद सबसे बड़े आइकन हैं।हम तीनों की दोस्ती 2000 के आसपास घनी हो गयी।


    रुद्र प्रसाद की पत्नी मशहूर रंगकर्मी,सत्यजीत रे की फिल्म घरे बाइरे की नायिका स्वातिलेखा इलाहाबाद से हैं और वे डा.मानस मुकुल दास की छात्रा हैं,जो हमारे भी गुरु हैं।कमसकम इंगलिश पोयट्री में।


    उन्हीं रुद्रप्रसाद औरस्वाति लेखा की बेटी बंगाल की मशहूर अदाकारा सोहिनी का पहला विवाह गौतम हालदार से हुआ तो इस परिवार से हमारी अंतरंगता भी गहराती गयी।उऩका अलगाव हो गया और सोहिनी ने दूसरी शादी कर ली है और दोनों से बरसों से हमारी मुलाकात नहीं है।दोनों बेहतरीन कलाकार हैं।


    हमारी शामें बंधुआ हैं लेकिन रुद्रप्रसाद जी का आभार कि वे हमें नांदीकार के हर नाटक के मंचन के मौके पर न्यौता भेजते रहे और हम एकोबार जा नहीं सकें।


    हादसा यह हुआ कि सोजन बादियार घाट के रिहर्सल में तो हम हाजिर रहे हैं,नाटक के मंचन पर नहीं।सोजन बादिया के गीत गाकर हजारों लोगों के दिलोदिमाग को मथते हुए गौतम को देखा है,लेकिन नाटक देखना नहीं हुआ।


    Recently our respected scholar friend Shasul Islam wrote a book to decode the Partition puzzle.To understand what Shamsul wrote,you have to know Jasimuddin and Abbasuddin both and only than you might know how the chemistry and physics of riots constituted by Hindutva Grand alliance to grab power!Muslim League was activated and Fazlul Haq was politically killed as Congress betrayed despite Netaji`s opposition and Muslim League was formally launched by Congress to help Hindu Mahasabha and Hindutva take over first Bengal and then India.The agenda of Hinduva roots in Bengal,not in Nagpur,mind you.

    I am grateful to Shamsul Islam who justified what I have been writing and speaking since 2000.




    Jacket of the book.


    A timely book by Shamsul Islam demolishes stereotypes associated with the role of Muslim masses during Partition

    The standard narrative about the Partition, actively propagated by the Hindu communalists and innocently believed by most Hindus, puts the onus on the Muslim masses that supported the Muslim League's demand for a separate country. It is not uncommon to hear people referring to an area where Muslims live in substantial numbers as "Pakistan". However, as a recently published book tells us, the reality is very different.

    "Muslims Against Partition", written by Shamsul Islam, the multi-talented theatre activist, anti-communal propagandist and political scientist, and published by Pharos Media and Publishing Pvt. Ltd., offers an eye-opening account of the way a large number of Muslim political leaders, thinkers and organisations opposed the idea of Pakistan and actively worked against it. Renowned historian Harbans Mukhia has penned a thought-provoking foreword wherein he praises the writer for drawing our attention to the ambivalent attitude of the Congress to the question of communalism as it had many leaders who were sympathetic to the "exclusivist Hindu cause".

    All of us know about prominent Muslim leaders like Khan Abdul Ghaffar Khan, M. A. Ansari, Asaf Ali and Maulana Abul Kalam Azad who fiercely opposed the communal politics of the Muslim League. However, since they were in the Congress, their opposition to the creation of a separate homeland for the subcontinent's Muslims is generally ignored. What is remembered is the fact that the Muslim League led by Muhammad Ali Jinnah was successful in mobilising the Muslim elite as well as Muslim masses in support of its Pakistan demand and had won most of the Muslim seats in the 1946 election to provincial assemblies.

    However, most people remain unaware that this fact conceals a vital aspect of reality. The Sixth Schedule of the 1935 Act had restricted the franchise on the basis of tax, property and educational qualifications, thus excluding the mass of peasants, the majority of shopkeepers and traders, and many others. Thus, as Shamsul Islam informs us quoting from Austin Granville's book on the Indian Constitution, only 28.5 per cent of the adult populations of the provinces could cast their votes in the 1946 provincial assembly elections. This makes it amply clear that the Pakistan demand was not supported by the majority of Muslims because only a small percentage of the Muslim population was eligible to vote.

    Nationalist Muslims had started expressing themselves as early as 1883 when the Congress was not even born and nationalism was in the early stages of its inception. Shamsul Islam's book contains a very informative chapter on Muslim patriotic individuals and organisations. It tells us the inspiring story of Shibli Nomani who established a National School in Azamgarh in 1883 and actively opposed the Muslim League agenda of cooperation with the British and opposition to the Hindus. Nomani, who died a year after Jinnah's entry into the League in 1913, castigated the organisation because "everyday the belief which is propagated, the emotion which is instigated is (that) Hindus are suppressing us and we must organise ourselves." In a chapter titled "Two-Nation Theory: Origin and Hindu-Muslim Variants", Shamsul Islam underlines the fact that much before the Muslim League came up with the two-nation theory, leaders such as Madan Mohan Malaviya, B. S. Moonje and Lajpat Rai were championing the cause of a Hindu nation. Much before them, Raj Narain Basu (1826-1899), maternal grandfather of Aurobindo Ghosh, and his close associate Naba Gopal Mitra (1840-1894) had emerged as the co-fathers of Hindu nationalism. Eminent historian R. C. Majumdar has remarked that "Naba Gopal forestalled Jinnah's theory of two nations by more than half a century". So, the onus for spreading the belief that Hindus and Muslims constituted two separate nations that could not peacefully co-exist with each other should first be placed at the door of Hindu leaders.

    Of all the Muslim leaders who were opposed to the idea of Partition, the case of Allah Bakhsh seems to be most interesting.


    When British Prime Minister Winston Churchill made a derogatory reference to the Indian freedom struggle and Quit India Movement, Allah Bakhsh, who as head of the Ittehad Party was the Premier (chief minister) of Sind, decide to return his titles of Khan Bahadur and Order of the British Empire (OBE). Consequently, he was dismissed by the Viceroy. Later, he was assassinated by supporters of the Muslim League and his murder paved the way for the entry of the separatist organisation into Sind. The rest, as they say, is history.

    Meghnad Badh 

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    असहिष्णुता से असहमति

    छ घटनाएं सारी सीमाओं के बावजूद ऐसी चिंगारी का काम कर डालती हैं जो लपटों में बदल अंतत: सारे संदर्भ को नया ही आयाम दे देती हैं। केंद्रीय साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ लेखक एम.एम. कलबुर्गी की हत्या पर अकादेमी द्वारा चुप्पी लगा देने की प्रतिक्रिया स्वरूप शुरू हुए सामान्य से विरोध ने जिस तरह से साहित्य अकादेमी पुरस्कारों को लौटाने के सिलसिले में बदला, वह सामान्य घटना नहीं है। समयांतर के पिछले अंक में इसकी शुरुआत करने वाले पर गंभीर आशंका जताई गई थी। अपनी जगह वह यथावत है। वैसे उस टिप्पणी ('सार्वजनिक विरोध का निजी चेहरा', दिल्ली मेल) में यह भी कहा गया था कि "हम जिस माहौल में रह रहे हैं वह ऐसे संकट का दौर है जिसका विरोध निश्चित तौर पर और समय रहते किया जाना चाहिए क्योंकि यह हमारे समाज के मूल आधार सहिष्णुता और विविधता को ही खत्म करने पर उतारू नहीं है बल्कि यह हमें हर तरह की तार्किकता और वैज्ञानिक समझ से वंचित कर देने का प्रयास भी है। इसलिए यह चिंता किसी 'अकेले लेखक'या कलाकार की न तो हो सकती है और न ही होनी चाहिए। पर यह विरोध समझ-बूझकर किया जाना चाहिए। बेहतर तो यह है कि यह सामूहिक हो क्योंकि आज व्यवस्था जिस तरह की है और वह जिस हद तक असंवेदनशील नजर आ रही है, उसमें इक्की-दुक्की आवाजों की परवाह करने वाला कोई नहीं है।"

    प्रसन्नता की बात है कि पुरस्कार लौटाने का यह कदम मात्र किसी एक व्यक्ति, भाषा या क्षेत्र तक सीमित न रह कर राष्ट्रव्यापी रूप ले चुका है। अब तो चित्रकार, फिल्मकार, वैज्ञानिक और इतिहासकार भी इस विरोध का हिस्सा हो चुके हैं। आशा करनी चाहिए, अगर सरकार ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए तो, अन्य बौद्धिक वर्ग भी देश की प्रगति, वैज्ञानिक विकास, तार्किक चिंतन, सांस्कृतिक समरसता, सहिष्णुता और विविधता को बचाने की इस मुहिम में शामिल होने में देर नहीं लगाएंगे।

    हर लेखक या उस तरह से कोई भी बुद्धिजीवी अंतत: एक समाज की ही देन होता है। वह उसी के दायरे में विकसित होता है और स्वयं को अभिव्यक्त करता है। दूसरे शब्दों में उसका विकास समाज के विकास से गहरे जुड़ा होता है। ऐसे दौर में जब देश के शासक वर्ग का एक हिस्सा निहित स्वार्थों के लिए आंखमूंद कर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तरीके से सांप्रदायिकता को और अतार्किक स्तर पर हमारे विगत को महिमा मंडित करने पर तुला हो, वैज्ञानिकता और वस्तुनिष्ठता की मजाक उड़ाता नजर आ रहा हो, ऐसे में समाज के भविष्य को लेकर देश के रचनाकारों, चिंतकों और बुद्धिजीवी वर्ग में अगर चिंता न हो तो यह जीवंत समाज का लक्षण नहीं माना जा सकता।

    प्रतिक्रियावादी विचारों का बढ़ता खतरा

    देखा जाए तो ये चिंताएं, जो अंतत: दुनिया को देखने-समझने और उसे बदलने की आधारभूत मानवीय प्रवृत्ति से जुड़ी हैं, किस व्यापक खतरे का सामने कर रही हैं इसका उदाहरण पिछले सिर्फ डेढ़ साल के वक्फे में पनपे प्रतिक्रियावादी विचारों और अभिव्यक्तियों में देखा जा सकता है। आश्चर्य की बात यह है कि यह सब सत्ता के संरक्षण में हो रहा है। देश को दुनिया के सबसे विकासशील देश में बदलने का सपना दिखलाने वाला प्रधानमंत्री एक आधुनिक चिकित्सालय का उद्घाटन करते हुए, यह कहते नहीं झिझकता कि हमारे यहां प्राचीन काल में चिकित्सा का स्तर यह था कि जानवर के सर को आदमी के सर पर ट्रांसप्लांट किया जाता था। बिना सहवास के, जैसा कि कर्ण के संदर्भ में हुआ था, संतान उत्पन्न की जा सकती थी। उनके अनुसार हमारे यहां जेनेटिक साइंस व प्लास्टिक सर्जरी अनादिकाल से विकसित थे। गुजरात में स्कूली पाठ्यक्रमों में एक ऐसे व्यक्ति की किताब को पढ़ाया जा रहा है जो कहता है कि महाभारत काल में आईवीएफ की तकनीक उपलब्ध थी।

    एक और महाशय विज्ञान कांग्रेस में देश के चुनींदा वैज्ञानिकों के सामने दावा करने से जरा नहीं झिझकते कि हमारे पुष्पक विमान ग्रहों के बीच उड़ान भरते थे।

    ऐसा प्रतीत होने लगा था मानो नया निजाम और उसके समर्थक अब तक के इतिहास और विज्ञान के अध्ययनों और उनकी उपलब्धियों को जड़-मूल से उखाडऩे पर उतारू हैं। बहुमत के नशे में चूर सत्ताधारी दल ने ज्ञान-विज्ञान की विश्वस्तरीय संस्थाओं को तहस-नहस करने का जैसे बीड़ा ही उठा लिया है। इस विवेकहीनता का सबसे बड़ा उदाहरण आईआईटी, दिल्ली जैसी संस्था पर एक स्वामी का थोपा जाना है। शिक्षण और शोध संस्थानों पर जिस तरह से और जिस तरह के अयोग्य और कुंद व्यक्तियों को सरकार लादने पर लगी हुई है वह आतंककारी है। सरकार का अहंकार किस स्तर का है इसका उदाहरण पुणे का फिल्म व टेलीविजन संस्थान है जिस पर एक दोयम दर्जे के अभिनेता को थोप दिया गया है। सरकार ने लगभग पांच महीने चले छात्रों के आंदोलन की अनसुनी करके जिस तरह की निर्ममता का परिचय दिया है वह बतलाता है कि इस सरकार का किसी भी तरह के लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास नहीं है। वह लोकतंत्र का इस्तेमाल कर इस देश को एक बर्बर मध्यकालीन धार्मिक राज्य में को बदल देना चाहती है।

    एफटीआईआई का संदेश

    पर देखने की बात यह है कि एफटीआईआई के छात्रों को मजबूर करने का जो संदेश देश के बुद्धिजीवियों और विचारवान तबके तक गया है उसने सरकार की अडिय़ल और दमनकारी छवि को मजबूत करने और दूसरी ओर उसका विरोध करने की लहर के जन्म में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिन फिल्मकारों ने अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने की बात की है उनका तो सीधा संबंध ही एफटीआईआई के घटनाचक्र से है।

    इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं रही है कि आज की तारीख तक सात सौ से ज्यादा देश के शीर्ष से लेकर युवातर वैज्ञानिकों ने इस अवैज्ञानिक, अतार्किक और सांप्रदायिक माहौल के विरोध में जारी बयान पर हस्ताक्षर किए हैं। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 87 वर्षीय पीएम भार्गव जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति के वैज्ञानिक का तो स्पष्ट ही कहना है कि "तार्किकता और रेशनलिज्म, जो कि विज्ञान की आधारशिला होते हैं, खतरे में हैं। इस सरकार के मन में विज्ञान के प्रति कोई सम्मान नहीं है।ÓÓ और इसमें दो राय नहीं हो सकती। पर संभवत: इसीलिए आश्चर्य यह है कि ये वैज्ञानिक तब क्यों नहीं बोले जब इस आक्रमण की शुरुआत हो रही थी। विज्ञान कांग्रेस को प्रमादियों द्वारा कब्जा लिए जाने पर भारतीय वैज्ञानिकों की तब की चुप्पी पर दुनिया भर में सवाल उठाए जा रहे थे और उनकी खिल्ली उड़ाई जा रही थी।

    यह स्थिति इसलिए आई कि भारत को तीसरी दुनिया में प्रगतिशील, उदार, ज्ञान-विज्ञान के लिए समर्पित और एक महत्त्वपूर्ण लोकतांत्रिक देश के रूप में जाना जाता था। एक ऐसा देश और समाज जहां समानता और सर्वधर्म समभाव का आदर्श प्राप्त करने का प्रयत्न अपनी सारी सीमाओं के बावजूद सतत जारी था। इसमें कई खामियां थीं पर ऐसा कभी नहीं था कि विगत सात दशकों में सत्ता पर आई किसी सरकार ने कट्टरपंथी, सांप्रदायिक और अलोकतांत्रिक तत्वों को इस तरह से खुलेआम बढ़ावा दिया हो। सांप्रदायिकता और हत्याओं के आरोपियों को केंद्र में जगह दी हो।

    वैज्ञानिकों की वह प्रारंभिक चुप्पी के दो संभावित कारण समझ में आते हैं। पहला, पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई सरकार और उसके नेतृत्व की दमनकारी छवि का आतंक। और दूसरा, यह कि वैज्ञानिक समुदाय नई सरकार और इसके नेतृत्व को कुछ समय देना चाहता हो।

    व्यक्ति नहीं समाज के अस्तित्व का सवाल

    असल में लेखकों के विरोध ने देश के शेष चेतना संपन्न और विवेकवान बौद्धिक तबके को झिंझोड़ कर रख दिया है। समाज का यह प्रभावशाली और चेतना संपन्न वर्ग, जो पिछले डेढ़ वर्ष से लगभग स्तब्ध था, अपनी तंद्रा से जाग गया है। उसे समझते देर नहीं लगी है कि पानी सर से गुजर गया है। यह संकट मात्र उसी के अस्तित्व से नहीं जुड़ा है बल्कि उस समाज के अस्तित्व का सवाल भी इसी में निहित है जिसका वह अविभाज्य अंग है। वह तभी बच सकता है जब यह समाज बचेगा। उसके सामने बहुत दूर के नहीं आसपास के ही उदाहरण हैं कि किस तरह से एक नहीं अनेकों समाज और देश सत्ताधारियों और सत्ताकामियों की महत्त्वाकांक्षाओं और तिकड़मों के चलते तबाही और अराजकता के शिकार हुए हैं। यहां भी जिस तरह से पुराणपंथ को स्थापित किया जा रहा है वह मूलत: एक वर्ग विशेष की सत्ता को स्थायी बनाए रखने से ही जुड़ा है। बहुसंख्यकवाद मूलत: लोकतंत्र के माध्यम से सत्ता पर काबिज होने का सबसे आजमाया हुआ पर विनाशकारी तरीका है। यह तरीका नए समाज के निर्माण के किसी भी स्वप्न से रहित एक परंपरावादी सत्ताधारी वर्ग के हितों का ही पोषण करता है। इसके उदाहरण एशिया और अफ्रीका के कई क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं। प्रश्न है क्या हम भी उन्हीं देशों की तरह धार्मिक और रूढि़वादी होने की राह पर नहीं हैं? अब और तटस्थ रहने का समय नहीं है। यह विरोध सत्ता प्राप्त करने का नहीं है बल्कि ज्ञान को अपनी स्वाभाविक दशा में बढऩे देने का रास्ता सुनिश्चित करने का है। यह विरोध एक लोकतांत्रिक व्यवस्था व धर्मनिरेपक्ष समाज को बचाने का है। क्योंकि इस असहिष्णुता सफल होना भारतीय गणतंत्र की आधारभूत अवधारणा का ही अंत होना नहीं है बल्कि इस पूरे महादेश को असंतोष और अराजकता में धकेल देना है। यह निश्चय है कि देश की जनता इतनी आसानी से यह सब होने नहीं देगी। इससेआगेकेपेजोंकोदेखने  लिये क्लिक करें NotNul.com


    'जो हमसे असहमत होते हैं, हम उनसे बहस नहीं करते, उन्हें खत्म कर देते हैं।'बेनितो मुसोलिनी [द लासियो स्पीचेज (1936), अंतोनियो सांती द्वारा द बुक ऑफ इतालियन विज्डम में उद्धृत, सितादेल प्रेस, 2003, पृ.88। ]

    देश में एक सचमुच की क्रांति शुरू हुई है। देश को फासीवादी गिरफ्त में जाने के इस पूरे वक्फे में जो बुद्धिजीवी तबका रीढ़विहीन दिखने की हद तक चुप रहता आया है, वह अचानक जाग उठा और उसने साहित्यिक पुरस्कारों को लौटाना शुरू कर दिया। जो बात 4 सितंबर को उदय प्रकाश द्वारा कुछ दिन पहले ही एक दूसरे साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्राप्त साथी लेखक एम.एम. कलबुर्गी की हत्या के खिलाफ पुरस्कार लौटाया जाना जमीर की एक हल्की झलक के रूप में दिखी, वह अब एक तूफान बन गई है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बहा ले गई और उन्हें अपने कुशासन के खिलाफ लोगों की गुहार पर अपनी रणनीतिक चुप्पी तोडऩी पड़ी। जब उदय प्रकाश ने अपना पुरस्कार लौटाया, उसके करीब एक महीने बाद दो साहित्यिक दिग्गजों नयनतारा सहगल और अशोक वाजपेयी ने अपने पुरस्कार लौटा दिए, जिसने विरोध की बाढ़ को और तेज कर दिया। जब मैं यह लिख रहा हूं, 35 से अधिक उल्लेखनीय लेखक अपने पुरस्कार लौटा चुके हैं और यह गिनती अभी बढ़ती जा रही है। दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा चौतरफा हमलों के माहौल में यह सचमुच उल्लेखनीय है।

    मोदी ने अब तक जो कहा है, उससे ऐसा लगता है कि उन्हें यह अंदाजा है कि यह उत्तर प्रदेश में महज इस अफवाह की बिना पर कि उन्होंने गोमांस खाया था और अपने घर में रख रखा था, एक बेकसूर 52 वर्षीय मुसलमान मो. अखलाक की भीड़ द्वारा पीट-पीट कर की गई हत्या और उसके 22 साल के बेटे को गंभीर रूप से जख्मी कर देने पर बुद्धिजीवियों के गुस्से की अभिव्यक्ति भर है। डॉ. दाभोलकर या कॉमरेड पानसरे की तो बात ही रहने दें, मोदी ने कलबुर्गी की हत्या के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा, जिसने बजाहिर तौर पर लेखकों के विरोध को जन्म दिया है। दादरी की हत्या पर बोलते हुए भी, उन्होंने महज इतना कहा कि यह 'दुखद और दुर्भाग्यपूर्णÓ था और उन्होंने अपनी पार्टी के संगीत सोम—जो इत्तेफाक से गोमांस के निर्यात के धंधे से जुड़े थे—जैसे साथियों और साधु, साध्वियों और अपने परिवार (संघ) के द्वारा हत्या को मुखर रूप से जायज ठहराने पर कुछ भी नहीं कहा। एक तरफ तो उन्होंने बात को यह कह कर घुमाया कि उनकी सरकार का इससे कुछ लेना-देना नहीं है, वे विपक्षियों पर निशाना साधने की अपनी आदत को नहीं भूले और कहा कि वे सांप्रदायिकता फैला रहे हैं। राष्ट्र के जमीर की रहनुमाई करने वाले लेखकों के इस जारी विद्रोह पर मोदी में या सरकार में उनके साथियों में रत्ती भर पछतावा या शर्म का जरा सा भी अहसास नहीं था।

    गोमांस पर पाबंदी

    गोमांस पर पाबंदी इन सबसे गंदे दिमागों की सीधी सियासत है, क्योंकि यह मुसलमानों को निशाना बनाकर देश में बिखराव लाने के लिए इस्तेमाल की जाती है, मानो बुनियादी तौर पर वे ही गोमांस खाते हैं। जब लालू प्रसाद यादव ने कहा कि हिंदू भी गोमांस खाते हैं, तो यह तथ्य पर आधारित एक बयान था, लेकिन उसे मीडिया के बेवकूफों ने भड़का कर एक बड़ा विवाद बना दिया। अगर कोई नाम ही लेना चाहे तो दलित, आदिवासी, गैर-खेतिहर अन्य पिछड़ी जातियां, मुसलमान, ईसाई और पूरा का पूरा पूर्वोत्तर गोमांस खाता है और अगर इस पूरी आबादी को जोड़ लिया जाए तो यह देश की कुल आबादी के आधे से भी ज्यादा होगा। जिन तबकों के नाम लिए गए हैं, न तो उनमें से आने वाला हरेक इंसान गोमांस खाता है और न ही बाकी के सभी तथाकथित हिंदू गोमांस से परहेज करते हैं। इसलिए गोमांस पर पाबंदी लगाना लोगों की जिंदगी के बुनियादी अधिकार पर हमला है। हिंदुत्व ब्रिगेड संविधान (राज्य के नीति-निर्देशक उसूलों) के तहत अनुच्छेद 48से अपनी बेशर्मी ढंक रही है, जिसमें लिखा है, "राज्य खेती और पशुपालन को आधुनिकी और वैज्ञानिक पद्धतियों पर संगठित करने की कोशिश करेगा और खासतौर से नस्लों के संरक्षण और बेहतरी के लिए कदम उठाएगा और गायों और दूसरे दुधारू तथा वाहक पशुओं की हत्या पर पाबंदी लगाएगा।ÓÓ यह शासक वर्गों के जनविरोधी चरित्र का एक सबूत है, जिन्होंने व्यवस्थित रूप से सभी नीति-निर्देशक उसूलों की अनदेखी की है, जिसमें से एक 10 साल के भीतर 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त और सार्वभौम शिक्षा देने की बात कही गई है और सिर्फ गाय के मुद्दे पर ही इतनी पाबंदी दिखाता है। गाय, इस मुल्क के भविष्य से ज्यादा अहम हो गई है। असल में, इस अनुच्छेद का मतलब आंख मूंद कर हर तरह की गाय की हत्या पर पाबंदी नहीं है, लेकिन इसको ऐसे तोड़ा-मरोड़ा गया है कि इसका यही मतलब निकले और यहां तक कि अदालतों ने भी बिना कोई सवाल उठाए इसे कबूल कर लिया है। इसके बावजूद, संविधान गाय की हत्या पर पाबंदी की बात करता है, गोमांस खाने पर पाबंदी की नहीं और गैर दुधारू मवेशियों का मांस खाने पर पाबंदी की तो और भी नहीं।

    इस अनुच्छेद के जन्म के बारे में, गोमांस पर पाबंदी के पैरवीकारों को यह बात जरूर पता होनी चाहिए कि संविधान सभा के मुसलमान प्रतिनिधियों (संयुक्त प्रांत के एम/एस जेड.ए. लारी और असम के सैयद मुहम्मद सादुल्ला) ने हिंदुओं की धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए खुद अपनी मर्जी से इसको मंजूरी दी थी। हालांकि रूढि़वादी हिंदुओं की अतार्किकता इसे बुनियादी अधिकारों का हिस्सा बना देने की हद तक बढ़ गई थी। इसका श्रेय डॉ. आंबेडकर को जाता है कि एक जानवर के अधिकार को बुनियादी अधिकारों में शामिल करने से दुनिया में मुल्क का जो मखौल उड़ता, उससे उन्होंने मुल्क को बचा लिया। उन्होंने इस अनुच्छेद को इस तरह लिखा कि आने वाली पीढिय़ों के लिए इसकी एक वैज्ञानिक समीक्षा की गुंजाइश रहे। रूढि़वादी हिंदू सदस्यों नेअपनी दलीलों को भागवत गीता के आध्यात्मिक अर्थशास्त्र के रंग में रंग कर पेश किया था। वे नहीं जानते थे कि प्राचीन दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में गो हत्या पर पाबंदी का चलन था, जहां खेती में बोझ ढोने वाली ताकत के रूप में बैलों को इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन तकनीक और खानपान के तौर-तरीके में बदलाव के साथ (मांस के थोड़े में ज्यादा पौष्टिक भोजन होने के कारण)गाय की हत्या के असली अर्थशास्त्र ने गाय की रक्षा के 'आध्यात्मिक'अर्थशास्त्र की जगह ले ली। जहां तक तथ्यों की बात है, ब्राह्मण पुरोहित सबसे बड़े गो हत्यारे थे, जिसने मवेशियों की रक्षा करने के लिए बुद्ध को विद्रोह करने के लिए उकसाया। हिंदुत्व ताकतों की दलील एक गलत वक्त में दी जा रही, बेईमान और विकास विरोधी दलील है जो मुल्क को गीता के दौर में धकेल रही है।

    गाय बनाम इंसान

    इसे साफ-साफ कहा जाए कि दक्षिणपंथियों की गाय की सियासत, इंसानों के कत्लेमाम की सियासत है। यह महज झज्झर में पांच दलितों या दादरी में एक मुसलमान या उधमपुर में एक कश्मीरी ट्रक चालक के कत्लेआम की बात नहीं है, बल्कि यह मवेशी पालने वाले उन दसियों लाख किसानों के कत्लेआम की बात है, जो खेती में चल रही पहले से ही नुकसानदेह रुझानों और सामाजिक डार्विनवादी नवउदारवाद की वजह से तंगी में हैं। वे गायों को पालने के नकारात्मक आर्थिक इंतजाम के इस बढ़े हुए बोझ से पूरी तरह दब जाएंगे। मौजूदा माली इंतजाम इस पर निर्भर करता है कि अपनी उत्पादक उम्र पूरी कर लेने के बाद गायों को कत्लखाने को बेच दिया जाता है। आमतौर पर एक गाय को 3-4 बार बच्चे देने के बाद बेच दिया जाता है, क्योंकि इसके बाद उसकी दूध की पैदावार और उसकी गुणवत्ता दोनों में गिरावट आती है। भारत में, इसे 8-10 बार बच्चे देने तक खींचा जा सकता है, जिसके बाद वह कम से कम 3-4 साल जिंदा रहेगी। अगर इसके बाद उसे बेचा नहीं गया, तो पूरा माली इंतजाम उलट-पुलट हो जाएगा। और सिर्फ इतना ही नहीं किसानों के अलावा, ऐसे दसियों लाख लोग और हैं जो गाय के कत्लऔर खाल केकारोबार से अपना गुजर-बसर चलाते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा दलित लोग हैं। वे लोग बेरोजगार हो जाएंगे। इसके साथ-साथ यह भी होगा कि दूसरे मांस की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी उनके भोजन के संकट को बढ़ा देगी। पहले से ही भारतीयों में प्रोटीन की गंभीर कमी पाई जाती है, जो उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमताओं को नुकसान पहुंचाती है। इंडियन मार्केट रिसर्च ब्यूरो (आईएमआरबी) द्वारा किए गए एक उपभोक्ता सर्वेक्षण के मुताबिक 91 फीसदी शाकाहारियों और 85 फीसदी मांसाहारियों में प्रोटीन की कमी थी, जिसको प्रतिदिन शरीर के कुल वजन में, प्रति किलो वजन पर 1 ग्राम से कम प्रोटीन होने के आधार पर मापा जाता है। गरीब लोगों के लिए गोमांस प्रोटीन का एक अहम स्रोत है और इस पर पाबंदी का मतलब उनकी जान ले लेना होगा। इस खतरनाक भूत के बारे में हिंदुत्व की दलील एक जालसाजी है और सिर्फ भावनात्मक उत्पीडऩ ही है जब वे यह पलटकर पूछते हैं कि क्या आपकी मां की बूढ़ी उम्र हो जाने के बाद आप उसे छोड़ देते हैं।

    गोरक्षा के आर्थिक पहलू पर पिछले दशक में अकादमिक क्षेत्र में शोध किए गए हैं। सबसे हालिया रिपोर्ट एस्थर गेहर्के और माइकल ग्रिम द्वारा प्रकाशित की गई है, जो हमारे अपने एम.वी. दांडेकर और के.एन. राज की खोजों की तस्दीक करती दिखाई पड़ती है। दांडेकर और राज दोनों ही हिंदू और शायद ब्राह्मण थे और जिन्होंने अपना शोध 1969 में प्रकाशित कराया था। दोनों की यह पक्की राय थी कि गाय की पूजा का चलन असल में भारत के मवेशी संसाधन के अधिक तर्कसंगत उपयोग के आड़े आता है। राज ने यहां तक सुझाव दिया था कि धर्म सिर्फ यही अकेली भूमिका निभाता था कि उसने अवांछित मवेशियों से छुटकारा पाने के तरीके तय किए। उन्होंने राय जाहिर की कि गायों को कत्लखाने भेजने के बजाए उत्तर भारतीय किसान जानबूझ कर भूखा रख कर या उसे खुला छोड़ कर, जिससे वे बांग्लादेश के कत्लखानों में चली जाती थीं, धीरे धीरे मौत देने के तरीके को तरजीह देते थे। जाहिर है कि पवित्र गाय के बारे में हिंदुत्ववादी उन्माद में इन तथ्यों पर कोई गौर नहीं किया गया है।

    अबाध अतार्किकता

    हिंदुत्व गिरोह की मक्कारी और बेईमानी इसके हजार सिरों में बसती है, जो एक ही साथ अनेक आवाजों में बात करता है। एक तरफ जबकि मोदी-शाह बिहार चुनावों की वजह से दादरी में पीट-पीट कर की गई हत्या पर नापंसदगी के लहजे में बोलने को मजबूर हुए तो दूसरी तरफ हिंदू दक्षिणपंथ की मूर्खता केमहास्रोत आरएसएस ने अपने मुखपत्र पांचजन्य के जरिए इसे जायज ठहराया। आवरण कथा के रूप में छापे गए एक लेख में कहा गया, 'वेदों ने उस पापी की हत्या का आदेश दिया है, जो गाय की हत्या करता है। दादरी पीडि़त ने शायद अपने पापों के प्रभाव में गाय की हत्या की थी।'इसमें उन लेखकों को फटकारा गया, जिन्होंने दादरी हत्या पर विरोध जताते हुए साहित्य अकादेमी पुरस्कार लौटाए। उन्हें हिंदू भावनाओं के प्रति असंवेदनशील कहा गया। जैसी की आशंका थी, आरएसएस ने इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए कह दिया कि यह लेख संपादकीय नहीं था। उसने तो ऐसा कह दिया, लेकिन उसके बंदरों के गिरोह ने उनकी अतार्किकता के साथ असहमति जताने का साहस करने वाले लोगों को धमकाने में अपनी बहादुरी दिखानी जारी रखी।साक्षी महाराज, साध्वी प्राची और दूसरे अनेक लोग जहर फैलाते रहे और घिरने पर भाजपा इसकी रट लगाए रहती कि 'वे हमारे लोग नहीं हैं।'

    भाजपा एक तरकीब यह भी अपनाती है कि कांग्रेस के शासनकाल में हुई ऐसी ही घटनाओं को चुनती है, ऐसा करते हुए वह इस तथ्य को भूल जाती है कि लोगों ने उसे कांग्रेस की गलतियों को दोहराने या उससे भी आगे निकल जाने के लिए वोट नहीं दिया था। जहां तक लेखकों के विरोध का सवाल है, एक ओर यह जरूर दादरी में पीट-पीट कर की गई हत्या से तेज हुआ, लेकिन यह उसी तक सीमित नहीं है। यह संस्थानों को व्यवस्थित रूप से खत्म करने और राजनीति को बेशर्मी से जहरीला बना देने के खिलाफ है, जिस पर वे हिंदू राष्ट्र के सपने को साकार करने के लिए अमल कर रहे हैं। लेखकों द्वारा उठाया गया यह कदम बेहद अहम है, लेकिन शायद इसे उठाने में बड़ी देर कर दी गई। पूरी दुनिया ने उनके विद्रोह पर गौर किया, लेकिन बेशर्म हिंदुत्व परिवार को रत्तीभर भी शर्म दिलाने में नाकाम रहा। अहम बात यह समझना है कि बुनियादी तौर पर वे ऐसी किसी भी बात की समझदारी से परे हैं। मुसोलिनी की राह पर चलनेवाले सिर्फ असहमत लोगों की हत्या करने की भाषा ही जानते हैं। इसलिए सिर्फ एक ही जवाब है जो इन कायरों के गिरोह को उनकी मांद में धकेल सकता है और वह है अवाम की मजबूत ताकत, उस अवाम की ताकत जो ब्राह्मणवाद की सताई हुई है और जिसमें जटिल अक्लमंदी की कमी है। लेखकों को यह समझना ही होगा कि हिंदू राष्ट्र बुनियादी तौर पर ब्राह्मणों के एक गिरोह की पुनरुत्थानवादी परियोजना है, जो अपनी श्रेष्ठता को स्थापित करने के बेवकूफी भरे सपने देख रहे हैं। इसे बस मिनटों में हराया जा सकता है, अगर इन लेखकों में सिर्फ कुछेक दलीलों की बजाए अपनी मु_ी तान कर खड़े हो जाएं!

    अनु.: रेयाज उल हक इससेआगेकेपेजोंकोदेखने  लिये क्लिक करें NotNul.com

    गलतबयानी का नमूना

    साहित्य अकादेमी साहित्य अकादेमी के कार्यकारी मंडल ने लेखकों-कलाकारों के जबरदस्त विरोध के दवाब में 23 अक्टूबर को जो प्रस्ताव पारित किया है, वह न सिर्फ चिंताजनक रूप से अपर्याप्त, बल्कि गलतबयानी का एक निर्लज्ज नमूना भी है। पांच लेखक संगठनों—जलेस, जसम, प्रलेस, दलेस और साहित्य-संवाद—के आह्वान पर लेखकों, पाठकों और संस्कृतिकर्मियों का जो बड़ा [Read the Rest…]

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    बस्तर में वकीलों, पत्रकारों पर हमले

    बस्तर बार एसोसिएशन द्वारा पुलिस के साथ सांठगांठ से जिस तरीके से जगदलपुर लीगल ऐड ग्रुप (जगलग) को स्थानीय आदिवासियों की कानूनी मदद करने से रोका जा रहा है, उस पर पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स गहरी चिंता व्यक्त करता है। तकनीकी अड़चन को आधार बनाकर 3 अक्टूबर को बार एसोसिएशन ने जगलग के खिलाफ [Read the Rest…]

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    हत्या की पैरोकारी का चातुर्य

    यदि किसी को इस बात का सबूत खोजना हो कि हमारे देश के कई सांसद कैसे किसी हत्या को जायज ठहराते हैं तो उन्हें 2 अक्टूबर, 2015 के इंडियन एक्सप्रेस में तरुण विजय के लेख को पढऩा चाहिए। हालांकि उनके लेख को पढ़कर तो नहीं लगता कि वह सम्मान के योग्य हैं, लेकिन क्योंकि वह [Read the Rest…]

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    लोकतंत्र का गुजरात मॉडल समरथ को नहीं दोस गुसांई!

    लेखकः सागर रबारी गुजरात राज्य के अधिकांश भाग में किसी-न-किसी बहाने लगातार दफा 144 लागू रहती है। पिछले 15 सालों से सामाजिक कार्यकर्ता के लिए सार्वजनिक सभाएं करना, रैली निकालना, प्रदर्शन करना यहां तक कि अधिकारियों को सामान्य ज्ञापन देने के लिए इक_ा होना तक कठिन से कठिनतर होता जा रहा है। इस लेख के [Read the Rest…]

    बर्बरता की राह

    विरोध के स्वर

    लोक सभा चुनाव की शुरुआत मुजफ्फरनगर दंगों से हुई। अगस्त- सितंबर 2013 में हुए इन दंगों में 62 लोग मारे गए, 93 घायल हुए और हजारों लोग प्रभावित हुए। उसके बाद चुनाव हुए। मई 2014 में सांप्रदायिक पार्टी भाजपा अपने मनुवादी संगठन आरएसएस के माध्यम से सत्ता में आ गई। भाजपा के सत्ता में आने के बाद धार्मिक असहिष्णुता काफी बढ़ गई है। आम आदमी महंगाई से बुरी तरह त्रस्त है। किसान आत्महत्या कर रहे है। ऐसे समय में भाजपा सरकार बनने के बाद से ही लव जेहाद, घर वापसी, बीफ जैसे मुद्दे देश में छाए हुए हैं।

    नरेंद्र दाभोलकर जो अंधविश्वास के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे थे और हिंदूवादी संगठन उनसे बहुत नाराज थे, उनकी हत्या हुई। फरवरी 2015 में लेखक गोविंद पानसरे की हत्या हुई। अगस्त 2015 में साहित्य अकादेमी से सम्मानित लेखक एमएम कलबुर्गी की हत्या हुई। सितंबर में दादरी के एक गांव में लाउड स्पीकर के जरिए यह अफवाह उड़ाई गई कि एक मुस्लिम के घर में गाय का मांस है। एक मंदिर पर भीड़ इक_ी हुई जिसने उस व्यक्ति के घर में घुस कर उसकी निर्ममता से हत्या कर दी। उसके बेटे को गंभीर रूप से घायल कर दिया। आठ अक्टूबर को मैनपुरी के करहल कस्बे में एक मरी हुई गाय की खाल उतारते हुए लोगों पर भीड़ ने धावा बोल कर दो लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया। कई पुलिस वाले जख्मी हो गए। कई दुकानों में आग लगा दी। महाराष्ट्र में शिवसेना ने पहले पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली का कार्यक्रम रद्द करा दिया, फिर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री कसूरी की पुस्तक पर कार्यक्रम कराने वाले भाजपा नेता सुधींद्र कुलकर्णी का मुंह काला कर दिया। 16 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के शिमला में गाय व बैल ले जाते ट्रक ड्राइवर को पीट- पीट कर मार डाला। पुलिस ने बजरंग दल पर संदेह व्यक्त किया है। ऐसी घटनाएं आए दिन घट रही हैं।

    आजादी से पहले से आरएसएस देश का सांप्रदायीकरण करने में लगा है। फिर भी लंबे समय तक उसे सफलता नहीं मिली। नवासी के चुनाव के बाद राजनीति में सांप्रदायिक ताकतें मजबूत हुई हैं। आज भाजपा पूर्ण बहुमत में है। उसके सांप्रदायिक संगठन आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। वे कहीं भी दो सौ चार सौ लोगों को इक_ा कर किसी की भी हत्या करने में सफल हो पा रहे हैं। आज के हालात देख कर तो लगता है वे कुछ साल और सत्ता में रहे और समाज के अंदर से प्रतिरोधक क्षमता नहीं उभरी तो वे समाज का सांप्रदायीकरण करने में सफल हो जाएंगे। यह इसलिए भी चिंताजनक है कि दुनिया के तमाम देशों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है और ऐसे में इसकी संभावना और बढ़ जाती है। इससेआगेकेपेजोंकोदेखने  लिये क्लिक करें NotNul.com

    वैज्ञानिक भार्गव और संघी तर्क

    वैज्ञानिक पुष्पमित्र भार्गव ने पदम भूषण सम्मान वापस किया तो बीजेपी ने वक्तव्य दिया वे हेट मोदी ब्रिगेड के सदस्य हैं। सोनिया गांधी के चाटुकार हैं। उन्हें कांग्रेस ने सम्मानित किया था। फासीवाद, संघ और बीजेपी की विचारधारा का आधार है। आज वेंकटरमण जिंदा होते और वे फासीवाद के विरद्ध बोलते तो बीजेपी की भाषा[Read the Rest…]

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    'हम चंद्रमा-मंगल की सीमाओं पर थपकी दे रहे हैं लेकिन उतने ही अंधविश्वासी भी होते जा रहे हैं'

    विश्व विख्यात वैज्ञानिक  जयंत विष्णु नार्लीकर से  रामशरण जोशी की विशेष बातचीत भारत के विश्वविख्यात वैज्ञानिक प्रो. जयंत विष्णु नार्लीकर का स्पष्ट मत है कि देश के वर्तमान वातावरण में वैज्ञानिकों और साहित्यकारों को हस्तक्षेप करते हुए फासीवादी-नाजीवादी शक्तियों का प्रतिरोध करना चाहिए और उन्हें देश की बहुलतावादी, उदारवादी और सहिष्णुतावादी परंपराओं की रक्षा करनी [Read the Rest…]

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    लेखकों के विरोध को कलाकारों का समर्थन

    देश में खतरनाक तरीके से बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने पुरस्कार और पद लौटाने और अपनी आवाज बुलंद करने वाले लेखकों के साथ भारत का कलाकार समुदाय एकजुटता के साथ खड़ा है। हम एम.एम. कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे जैसे तर्कवादी और स्वतंत्र चिंतकों की हत्या की निंदा करते हैं और अपना शोक [Read the Rest…]

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    तुम बिल्कुल हम जैसे निकले

    लेखकः फहमीदा रियाज तुम बिल्कुल हम जैसे निकले अब तक कहां छुपे थे भाई? वह मूरखता, वह घामड़पन जिसमें हमने सदी गंवाई आखिर पहुंची द्वार तुम्हारे अरे बधाई, बहुत बधाई भूत धरम का नाच रहा है कायम हिंदू राज करोगे? सारे उल्टे काज करोगे? अपना चमन नाराज करोगे? तुम भी बैठे करोगे सोचा, पूरी है [Read the Rest…]

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    What I have been saying!'Everything the West has done was to create ISIS'– John Pilger https://www.youtube.com/watch?v=Zb_IZVwxw0M


    What I have been saying!'Everything the West has done was to create ISIS'– John Pilger
    https://www.youtube.com/watch?v=Zb_IZVwxw0M

    Published on 26 Nov 2015

    Afshin Rattansi goes underground with John Pilger. Award winning journalist and author, John Pilger talks to us about how Washington, London and Paris gave birth to ISIS-Daesh. Plus we examine the media's role in spreading disinformation ahead of a vote in Parliament for UK bombing of Syria. Afshin looks at the Autumn Statement and why in a time of high alert we are cutting the police force and buying drones. Also we look at which companies are benefitting from the budget. Plus Afshin is joined once again by former MP and broadcaster, Lembit Opik, to look at the weeks news from a cyber sinking feeling over Trident to budget boosts for the BBC.


    प्यारे अफजल! Chemistry of Love!Physics of 


    Crime!Phenomenon of Mafia Raj across the borders! 





    मुहब्बत की जंग ही असल जंग है जो जीते मुहब्बत की जंग वे ही सिकंदर और नफरत के कारोबार में मालामाल हर सौदागर का आखेर बेड़ा गर्क।

    Official promo:The power of words is a wonderful thing. It can melt a frozen heart, unite lovers, and mend pain. Pyarey Afzal is a heart touching story of a young man's struggle, to win the woman of his dreams. using words to paint canvases of love and affection. He expresses his desires in letters, but keeps them a secret. but when a conflict arises between families, the young man is forced to leave his home, a situation that exposes his hidden letters to everyone, including the woman of his affections.


    बालीवूड ने पाकिस्तान जीता है।हर मुहब्बत भरे दिल को जीता है।


    प्यारे अफजल का सबसे बड़ा सबक यही है।


    मेज पर कराची का नक्शा है और पुराना डान नये डान बने प्यारे अफजल को उसका इलाका समझा रहा है।पुराने डान ने अपना और अफजाल का इलाका दिखाया तो नये डान ने बाकी इलाकों के बारे में पूछा तो जवाब मिला कि सारे इलाके बंटे हुए हैं,जहां किसी न किसी दादा,गुंडा और डान का राज है।


    पूरा कराची शहर और पूरा पाकिस्तान माफियाऔर गुंजडा राज के हवाले हैं।

    मतलब समझ लीजिये।

    पाकिस्तानी ड्रामा प्यारे अफजल ने पाकिस्तान में कोहराम मचाया हुआ है और हाल में भारत में उसका प्रदर्शन भी काफी लोकप्रिय है।

    वर्गीय दृष्टि से एकदम अलहदा प्रेमी प्रेमिका की प्रेम कहानी है जहां प्रेमी मरते दम तक कह नहीं पाता कि जो खत मुहब्बत के उसने खुद खुदको लिखे हैं बचपन से जवानी तक,वे उसी प्रेमिका को संबोधित है और बेपनाह मुहब्बत के बावजूद रईस प्रेमिका मौलवी के बेरोजगार गरीब बेटे से बुरा सलूक करती रहती है।जिस कारण वह कराची का सबसे बड़ा गुंडा बन जाता है।


    यह ड्रामा इस बेपनाह मुहब्बत की बेचैनी और कारनामों का जखीरा है और इसे पेश भी किया गया है बिल्कुल उसीतरह।मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से कहानी को निपटाया गया है और इसके साथ साथ पाकिस्तान में अपराध तंत्र माफिया तंत्र को बेरहमी से एक्सपोज कर दिया गया है।


    पाकिस्तान की इस बच्ची ने जो कहा है उसे जरूर सुनें!# Oil 


    War#IMF#World Bank #Mandal VS #Kamandal 





    Published on 1 Dec 2015

    हम उनसे अलग कहां हैं हिंदू राष्ट्र बनकर भी हम क्यों बन गये पाकिस्तान,अमेरिका का उपनिवेश?
    वेदमंत्र में हर मुश्किल आसान,हिंदुत्व एजंडा फिर क्यों मुक्त बाजार और सुधार पर खामोशी क्यों समता और समामाजिक न्याय और हमारे नुमाइंदे क्यों खामोश?
    बंगाल में 35 साल के राजकाज गवाँने के बाद कामरेडों को यद आया कि रिजर्वेशन कोटा लागू नहीं और धर्मोन्मादी ध्रूवीकरण के मुकाबला फिर बहुजन समाज की याद बंगाल में भी मंडल बनाम कमंडल?
    উগ্র হিন্দুত্ববাদের বিরুদ্ধে লড়াই করার শপথ নিতে ।
    জাতপাত নিয়ে লড়াই করা দাঙ্গাবাজ বিজেপিকে পরাস্ত করা এবং তৃণমুল নামক জঙ্গি সংগঠন কে স্বমুলে নির্মুল করার শপথ নিতে আগামি ২৭শে ডিসেম্বর২০১৫ ।
    বামফ্রন্টের ডাকে ব্রিগেড সমাবেশে দলে দলে যোগ দিন ।
    आज का मनुष्यता और मेहनतकशों की दुनिया को मेरा यह संबोधन कोई एक्टिविज्म या सहिष्णुता असहिष्णुता बहस नहीं है।
    हम अस्सी के दशक और नब्वे के दशक से शुरु आर्थिक सुधार,राजनीतिक अस्थिरता, हत्याओं, कत्लेआम, त्रासदियों, निजीकरण,उदारीकरण ग्लोबीकरण,इस्लामोफोबिया,तेल युद्ध,संसदीयआम सहमति और सियासत के तमाशे की हरिकथा अनंत बांच रहे हैं आज अकादमिक और आफिसियल वर्सन के साथोसाथ नई पीढ़ियों के लिए खासकर।पढ़ते रहें हस्तक्षेप।छात्रों के लिए बहुत काम की चीज है।सुनते रहे हमारे प्रवचन मुक्ति और मोक्ष के लिए।


    My Name is James Bond!Smell ROT Within!Ensure the 


    safety of the Prime Minister first !Bond censored! 





    #रोजावा की क्रांति #ISIS # America created ISIS # Israel 


    joins#G 20 funding #Oil War! 



    Published on 18 Nov 2015

    आज समकालीन तीसरी दुनिया के सितंबर अंक की कवर स्टोरी रोजावा की क्रांति इस वीडियो के फोकस में होगा।Real War Live against ISIS.

    फोकस पेरिस का अपडेट,युद्ध लाइव और फोकस ISIS के खिलाफ क्रांतिकारी संघर्ष पर होगा।वीडियो क्लीपिंग यूट्यूब के सौजन्य से।कृपया डाउनलोड करके लिंक व्हाटअप,फेसबुक वगैरह में शेयर तो करें ही,जो जमीन पर लड़ाई कर रहे हैं,वे इसका प्रचार प्रसार भी करें।


    हमने कल ISIS की जन्मकुंडली वीडियो सबूत के साथ बांच दी है।अमेरिका ने पैदा किया ISIS को।इजराइल ने इसे पाला पोसा।तो विकसित देश अवैध तेल कारोबार के लिए तल कुंओं पर अपने अपने वर्चस्व के लिए यह तेलयुद्ध लड़ रहे हैं।

    एफडीआई बाबा ने भले ही अपने टायटैनिक हाथ दसों दिशाओं में लहराकर हिंदुत्व के वैश्विक मनुस्मृति आर्डर के आवाहन के साथ ISIS को खत्म करने के लिए भारत की युद्धघोषणा करके मध्यपूर्व की युद्धभूमि हिंदुस्तान की सरजमीं को बना दिया है,ISIS को अमेरिका और इजराइल मदद देता रहेगा तेल युद्ध की खातिर।

    Real threat triggered by Political leadership most arrogant!We are into the war as media reports that the ISIS might not have a direct presence in India but intelligence agencies fear that terror groups operating in the country can be used by Daesh for carrying out strikes in India similar to the Paris massacre.


    Due for implementation from January 1, 2016.All the central government employees will get reason to smile soon! However, the government employees and pensioners are in for disappointment as the report is expected to propose a 15 percent hike only with retrenchment ensured!


    तालिबान,अलकायदा की तरह हिंदू तालिबान भी अमेरिकी उत्पादन है और इस्लाम के साथ साथ गरीब दुनिया के सफाये के लिए ISIS अमेरिका और इजराइल का ब्रह्मास्त्र है।


    पुतिन के खुलासे के बाद भी अगर हम यह नहीं समझ रहे हैं तो बोका हरम और पेरिस और बेरुत, लेबनान, इराक, अफगानिस्तान, मिस्र, लीबिया,जार्डन,सीरिया,तुर्की और यूनान में जो हुआ,वह ग्रीक त्रासदी का मजा हम भी लेंगे।आतंकी हमलो में जितने मरे गये,मारे जा रहे हैं,बोकोहरम में उससे ज्यादा लोग मारे जा रहे हैं तो भारत में भी राष्ट्र की हिंसा के शिकार लोग रंगबिरंगी हिंसा ,हमलों,दंगा फसाद में मारे जाने वालों से कहीं बहुत ज्यादा है।

    Poem REcited by POET JASIM UDDIN: Krisanir Kutir ...

    ▶ 8:04

    https://www.youtube.com/watch?v=-E99XHasVbk

    Oct 18, 2009 - Uploaded by basuuddin

    KRISANIR KUTIR: House of the Farmer From Sujon Badiar Ghat Jasim Uddin is proud of belonging to the folk ...

    Beder Bahar - Gypsy Fleet Poem Recited by Jasim Uddin ...

    ▶ 3:15

    https://www.youtube.com/watch?v=9lMeI_05RDY

    Dec 10, 2009 - Uploaded by basuuddin

    Beder Bahar Gipsy Fleet- From Sujon Badiar Ghat Jasim UddinDown Madumati river floats the gipsy fleet, All ...

    DHROOPAD: jari gaan--a scene from Shojon Badiar Ghat ...

    ▶ 3:54

    https://www.youtube.com/watch?v=TVvptvtFsuc

    Apr 7, 2010 - Uploaded by Shawkat Khan

    DHROOPAD Presentation: glimpse from Shojon Badiar Ghat. Based on Jasim Uddin's Poetic Novel Shojon ...

    DHROOPAD: happy_couple: a scene from Shojon Badiar ...

    ▶ 0:39

    https://www.youtube.com/watch?v=9ZYQlBg6qUU

    Apr 9, 2010 - Uploaded by Shawkat Khan

    DHROOPAD Presentation: glimpse from Shojon Badiar Ghat. Based on Jasim Uddin's Poetic Novel Shojon ...

    Shojon Badiar Ghat - Chashir Prem - YouTube

    ▶ 4:31

    https://www.youtube.com/watch?v=uRyuBbiELrU

    May 29, 2011 - Uploaded by moshahaque

    Shojon Badiar Ghat - Chashir Prem ... MUSIC & LYRIC JASIM UDDIN, SINGER: NEENA HAMID - Duration: 3:50. by basuuddin 235,464 views ... Sob Sokhire Par Korite - সব সখীরে পাড় করিতে - film: Sujan Sokhi - Duration: 4:21.

    Shujon Badiar Ghat - Chashir Prem 1 - YouTube

    ▶ 2:02

    https://www.youtube.com/watch?v=Ur3DM7QB6Fs

    May 29, 2011 - Uploaded by moshahaque

    Shujon Badiar Ghat - Chashir Prem 1 ... Kobi Jasim Uddin, Bangla Film Song হীরামতি, Bangladesh যোগী ভিক্ষা লয় না - Duration: 3:25. by  ...

    DHROOPAD-Sojon Badiar Ghat.MPG - YouTube

    ▶ 2:51

    https://www.youtube.com/watch?v=5CK6SjC-10E

    May 31, 2010 - Uploaded by amirul208

    ... Fleet Poem Recited by Jasim Uddin from Sujon Badir Ghat - Duration: 3:15. by basuuddin 597 views. 3:15. DHROOPAD-SojonBadiar Ghat1  ...

    DHROOPAD: duli and friend- a scene from Shojon Badiar ...

    ▶ 1:34

    https://www.youtube.com/watch?v=Puy59IeVkbM

    Apr 7, 2010 - Uploaded by Shawkat Khan

    DHROOPAD Presentation: glimpse from Shojon Badiar Ghat. Based on Jasim Uddin's Poetic Novel Shojon ...

    Ad Run for Channel I Sojon Badiar Ghat - YouTube

    ▶ 0:30

    https://www.youtube.com/watch?v=E8NW8iuTUdc

    Nov 3, 2007 - Uploaded by santu65

    Ad Run for Channel I Sojon Badiar Ghat. ... Jasim UddinFaridpur Region Bangla Folk Song Bangladesh আমার এ ঘর ভাঙ্গিয়াছে যেবা - Duration:  ...

    Ad Run 2 Sojon Badiyar Ghat - YouTube

    ▶ 0:30

    https://www.youtube.com/watch?v=lZlM2VGP5x8

    Nov 1, 2007 - Uploaded by santu65

    Advertisement clip 2 Sojon Badiar Ghat. ... Ad Run 2 Sojon Badiyar Ghat .... Gypsy Fleet Poem Recited by Jasim Uddinfrom Sujon Badir Ghat  ...


    Jasimuddin - Wikipedia, the free encyclopedia

    Jump to Poetry - Poetry[edit]. Jasimuddin started writing poems at an early age. As a college student, he wrote the celebrated poem Kabar (The Grave),  ...

    Jasimuddin Poems - Poems of Jasimuddin - Poem Hunter

    www.poemhunter.com› Jasimuddin

    Poem Hunter all poems of by Jasimuddin poems. 109 poems of Jasimuddin. Phenomenal Woman, Still I Rise, The Road Not Taken, If You Forget Me, Dreams.

    Jasimuddin - Jasimuddin Poems - Poem Hunter

    Jasimuddin (Bengali: জসীমউদ্দীন; full name Jasimuddin Mollah) was a Bengali poet, songwriter, prose writer, folklore collector and radio personality.

    Jasimuddin - Jasimuddin Biography - Poem Hunter

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    Jasimuddin's biography and life story.Jasimuddin (Bengali: জসীমউদ্দীন; full nameJasimuddin Mollah) was a Bengali poet, songwriter, prose writer, folklore ...

    KABOR BY JASIM UDDIN POET OF BENGAL ... - YouTube

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    RECITED BY JASIM UDDIN'Kabar', first published in 1929 in Rakhali (Pastoral Poems),was as a ...

    A Tribute to Poet Jasimuddin Bangla Song - YouTube

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    A Tribute to Poet Jasimuddin Bangla Song ... Kobi Jasim Uddin, Bangla Film Song হীরামতি, Bangladesh যোগী ভিক্ষা লয় না ...

    Jasim Uddin (Author of বাঙ্গালীর হাসির গল্প) - Goodreads

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    Jasimuddin.org - Arsenic Poisoning in Bangladesh/India

    Jasim Uddin (1904-1976) Poet and Litterateur; Poems of Jasim Uddin; Jasim Uddin's Birth Day; Poems of Independence; Visit Jasim Uddin House, Ambikapur,  ...

    Jasimuddin - Banglapedia

    Dec 4, 2014 - Jasimuddin (1903-1976) poet and litterateur, was born on 1 January 1903 in his maternal uncle's home at Tambulkhana in Faridpur. His father  ...

    জসীমউদ্দীন-এর কবিতা 'কবর' - Bangla Kobita - বাংলা কবিতা

    www.bangla-kobita.com/jasimuddin/kobor/

    One of best poem of Jasim Uddin. উত্তর দিন. tasnim ayesha .... this is the poem that touches my heart from the very first line n makes me cry. উত্তর দিন. remo ২৭/০৭/  ...


    Jasimuddin

    From Wikipedia, the free encyclopedia

    Jasim Uddin

    Jasimuddin.jpg

    Native name

    জসীমউদ্দীন

    Born

    30 October 1903

    Tambulkhana, Faridpur,Bengal, British India (now inBangladesh)

    Died

    14 March 1976 (aged 72)

    Dhaka, Bangladesh

    Occupation

    Poet, songwriter, writer, radio personality, teacher

    Nationality

    Bangladeshi

    Education

    BA and MA (Bengali)

    Alma mater

    University of Calcutta

    Notable awards


    Jasimuddin (30 October 1903 – 14 March 1976; born Jasim Uddin)[1] was aBengali poet, songwriter, prose writer, folklore collector and radio personality. He is commonly known in Bangladesh as Polli Kobi (The Rural Poet), for his faithful rendition of Bengali folklore in his works.

    Contents

     [hide]

    Early life and career[edit]

    Jasim Uddin (certificate in hand) at the reception by Rajenra College, Faridpur after the selection of "Kabar" poem by the University of Calcutta in 1928.

    Jasimuddin in London, England (1951)

    Jasimuddin was born in the village of Tambulkhana in Faridpur District on 30 October 1903 in the house of his maternal uncle. His father, Ansaruddin Mollah, was a school-teacher.[2] Mother Amina Khatun (Rangachhut) received early education at Faridpur Welfare School. He matriculated from Faridpur Zilla School in 1921. Jasimuddin completed IA from Rajendra College in 1924.He obtained his BA degree in Bengali from the University of Calcuttain 1929 and his MA in 1931.[2] From 1931 to 1937, Jasimuddin worked withDinesh Chandra Sen as a collector of folk literature. Jasimuddin is one of the compilers of Purbo-Bongo Gitika(Ballads of East Bengal). He collected more than 10,000 folk songs, some of which has been included in his song compilations Jari Gaan and Murshida Gaan. He also wrote voluminously on the interpretation and philosophy of Bengali folklore.[3]

    Jasimuddin joined the University of Dhaka in 1938 as a Lecturer. He left the university in 1944 and joined the Department of Information and Broadcasting. He worked there until his retirement in 1962 as Deputy Director. He was an admirer of Guru Mrityun Jay Sil[2]

    Tomb of Jasimuddin

    Poetry[edit]

    Jasimuddin started writing poems at an early age. As a college student, he wrote the celebrated poem Kabar (The Grave), a very simple tone to obtain family-religion and tragedy. The poem was placed in the entrance Bengali textbook while he was still a student of Calcutta University.

    Jasimuddin is noted for his depiction of rural life and nature from the viewpoint of rural people. This had earned him fame as Polli Kobi (the rural poet). The structure and content of his poetry bears a strong flavor of Bengal folklore. His Nokshi Kanthar Maath (Field of the Embroidered Quilt) is considered a masterpiece and has been translated into many different languages.

    Jasimuddin also composed numerous songs in the tradition of rural Bengal. His collaboration[4] with Abbas Uddin, the most popular folk singer of Bengal, produced some of the gems of Bengali folk music, especially of Bhatiali genre. Jasimuddin also wrote some modern songs for the radio. He was influenced by his neighbor, poet Golam Mostofa, to write Islamic songs too. Later, during the Liberation War of Bangladesh, he wrote some patriotic songs.

    This section requires expansion.(January 2007)

    Pratidan

    build a home for she

    Who has broken mine.

    I cry to make my own, she who forsaken me.


    She has made me stranger.

    While I wander the world over for her,

    Endless night has stolen my sleep.

    She has broken my home, I build hers.


    She has broken my shore, I build hers.

    She left my heart broken yet I cry for her

    She struck me with poisoned arrow,

    Yet my breast is full of song.

    A flower in return thron.

    I cry all around to make her my own.


    She has carved a grave in my heart,

    I fill her heart with flowers of love.

    The face that speaks harsh language,

    I hold that face, and adore it.

    I cry to make her my own.

    নিমন্ত্রণ

    – জসীমউদ্দীন

    তুমি যাবে ভাই – যাবে মোর সাথে, আমাদের ছোট গাঁয়,

    গাছের ছায়ায় লতায় পাতায় উদাসী বনের বায়;

                 মায়া মমতায় জড়াজড়ি করি

                 মোর গেহখানি রহিয়াছে ভরি,

    মায়ের বুকেতে, বোনের আদরে, ভাইয়ের স্নেহের ছায়,

    তুমি যাবে ভাই – যাবে মোর সাথে, আমাদের ছোট গাঁয়,

    Music[edit]

    One of the most famous lyric and Music by Jasim Uddin:

    Snake Charmer / Babu Selam

    O babu, many salams to you

    my name is Goya the Snakecharmer, My home is the Padma river.

    We catch birds

    we live on birds

    There is no end to our happiness,

    For we trade,

    With the jewel on the Cobra's head.

    "We cook on one bank,

    We eat at another

    We have no homes,

    The whole world is our home,

    All men are our brothers

    We look for them

    In every door….." (Jasim Uddin)

    Major honors and awards[edit]

    Death and legacy[edit]

    Jasimuddin died on 13 March 1976 and was buried near his ancestral home at Gobindapur, Faridpur. A fortnightly festival known as Jasim Mela is observed at Gobindapur each year in January commemorating the birthday of Jasimuddin.[5] A residential hall of the University of Dhaka bears his name.

    Major works[edit]

    Poetry[edit]

    • Rakhali (1927)Gobinda Das

    • Nakshi Kanthar Maath(1928)

    • Baluchor (1930)

    • Dhankhet(1933)

    • Sojan Badiyar Ghat(1934)

    • Rangila Nayer Majhi(1935)

    • Hashu (1938)

    • Rupobati (1946)

    • Matir Kanna (1951)

    • Sakina (1959)

    • Suchayani (1961)

    • Bhayabaha Sei Dingulite(1972)

    • Ma je Jononi Kande(1963)

    • Holud Boroni (1966)

    • Jole Lekhon (1969)

    • Padma Nadir Deshe(1969)

    • Beder Meye (1951)

    • Kafoner Michil (1978)

    • Maharom"

    • Dumokho Chand Pahari(1987)

    Drama[edit]

    • Padmapar (1950)

    • Beder Meye (1951)

    • Modhubala (1951)

    • Pallibodhu (1956)

    • Gramer Maya (1959)

    • Ogo Pushpodhonu(1968)

    • Asman Shingho (1968)

    Novel[edit]

    Boba Kahini (1964)

    Memoirs[edit]

    • Jader Dekhachi (1951)

    • Thakur Barir Anginay(1961)

    • Jibonkotha (1964)

    • Smritipot (1964)

    • Smaraner Sarani Bahi(1978)

    Travelogues[edit]

    • Chole Musafir (1952)

    • Holde Porir Deshe (1967)

    • Je Deshe Manush Boro(1968)

    • Germanir Shahare Bandare (1975)

    Music books[edit]

    • Rangila Nayer Majhi

    • Padmapar (1950)

    • Gangerpar

    • Jari Gan

    • Murshida Gan

    • Rakhali Gan

    • Baul

    Others[edit]

    • Dalim Kumar (1986)

    • Bangalir Hasir Galpa(Part 1 and 2)

    Song titles[edit]

    • Amar sonar moyna pakhi

    • Amar golar har khule ne

    • Amar har kala korlam re

    • Amay bhashaili re

    • Amay eto raate

    • Kemon tomar mata pita

    • Nishithe jaio fulobone

    • Nodir kul nai kinar nai

    • O bondhu rongila

    • Prano shokhire

    • Rangila nayer majhi

    Gallery[edit]

    • House of Poet Jasimuddin

    • Kumar nod (cannel) in front of the poet's house

    • Wide open field where poet spent most of his childhood

    • Shojon Badiyar ghat

    See also[edit]

    References[edit]

    External links[edit]

    Wikimedia Commons has media related to Jasimuddin.


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    Forget Roasted Cauliflower and Caraway Salad​!Cauliflower might kill the drone!

    Palash Biswas

    It might sound quite funny!But it might push the red alarm button for the aggressive security surveillance phenomenon activated in this part of the global order.


    Simply it was reduced into an election campaign device to showcase development under Didi Parivartan Raj to romp home with a clean sweep against non existing opposition in Bengal Assembly Elections!


    The officials attacked a local hat in North 24 parganas adjoining metro Kolkata which inflicted that part of Sundarbans environment and water bodies to focus on TMC Paribartan Governance equipped with Drone and computers.


    The Hat named Polerhat situated at the bank of a contributing water body of Vidyadhari river connecting Sundarbans and it flooded with cabbage and cauli with other winter vegetables.The officials wanted to capture the green to express the green tsunami against the shafron tsunami relaunched in Bengal with an RSS injected device to head state BJP.As DIDI no more considers Cong or Bong Left worthy to fight.She is rather interested to have th Namo Guns  to lick dust.


    Thus Drone loaded with a camera was roaming overhead all over the hat.

    Annoyed with the slump in the market as Winter skipped due to climate change,the peasantry around was not amused at all.


    Suddenly some annoyed young angry man used the Cauliflower as  a rocket launcher to bring down the honey bee like drone and he hit the Bull`s Eye.


    The Drone downed and the Green Project undermined!As it lost its most valuable eye,the camera.

    The most part of the story is that nobody claims the ownership of the Drone but the local as well as Kokata Police launched an intensive combing operation,search the camera as the offial terror dismantled the Hat!

    Forget Roasted Cauliflower and Caraway Salad​!Cauliflower might kill the drone!

    It might not turn so funny at all!


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    ফুলকপির ঘায়ে ড্রোন কুপোকাত,ক্যামেরা লোপাট!

    জোর চলিছে কমবিং আপারেশন,জনতা হায়রান!

    s


    এত রক্তপাতের নেপথ্যে সেই পদ্মবিলের জমিদার কালী!

    এত সন্ত্রাসের নেপথ্যে হেই পদ্মবিলের জমিদার কালী!


    পড়িও বাছা সোজন বাদিয়ার ঘাট,নক্সী কাঁথার মাঠ!

    ভিডিওতে সংক্ষেপে করিনু নিবেদন,নক্সী কাঁথার মাঠ!


    #Embroidered Quilt#समयांतर का असहिष्णुता पर फोकस #Jasimuddin#Nakshi Kanthar maath#Sojan Badia #Nandikar #Ujantoli#Gautam Haldar


    পলাশ বিশ্বাস

    kill the drone!



    আহা যুদ্ধ বটে,চাষির পো আছিলো এ্যাকখান,কান্ড তার ! সবুজের বাহার,বিজ্ঞাপন গেইলো চুলোয়,ড্রোন খান খান!


    এ্যাক যে ছ্যেলো মিয়াঁ একখান,নাম তাঁর জসিম,রুপাইয়ের তীরে সেও হালা এ্যাক চাষির পোলা!লেখছে পল্লীকথা!


    ধর্মান্ধতার চক্রব্যুহ ভাইঙগা হালায় বুনছে নক্সীকাঁথা!

    সোজন বাদিয়ার ঘাটে পদ্মবিলের জমিদার কালীর বখান!


    সেই যারা করিছিল দেশটাই খানখান,তাহাদেরই কেস্সা! করেছিলো সেই ব্যাটা ফাঁস কি ক্যামনে হইল পার্টিশান!


    নেতাজি ব্যতিরেক সব বিপ্লবী মরা  ম্যাদামারা আজকাল!

    রবীন্দ্র নাথ ঠাকুর ব্যাতিরেক সবই লোম্বা এক এক খান!


    নজরুলও ব্যাটা মিয়াঁ,মিয়াঁ আব্বাস আর জসিমও মিয়াঁজান!

    হিন্দীর ভাষা সাহিত্য কজনা জানে,পুরস্কার ঘরে ঘরে  আনে!

    হিন্দীর গোল্ডেন এরা রোজ রাতে ক্যালাইলে,কজন জানে?

    সেই সব রামধনু সুরের কারিগর ঔ জসিম আব্বাস মিয়াঁ!


    যত ভূষণ বিভুষণ বিভীষণ গাহিছে মাথা নত করে দাও!

    যত পারো যেখানে পারো ঘরে ঘরে মারো,আগুন জ্বালাও!


    গ্রাম বাংলার গানে প্রাণে আজও জসিম আব্বাস দুই মিয়াঁ!


    গাজন নেগেছে বনে বনে সবুজের কাঁটা বাঁ বাচো বিজ্ঞাপন!

    পাবলিক বোচো কোনোদিন বুঝিল না,কতচালে কত ধান!


    ধ্বংস সুন্দরবন,ধ্বংস সবুজও.গ্রাম বাংলা ধ্বংস নিজিকরণ

    গৌরিকীকরণ,মেরুকরণ আর মা কালির মুদিখানা!শ্রীচরণ!


    ভূতের রাজা দিল তিন বর জব্বর গুন্ডামি,মাফিয়া আর ধর্ষণ

    রাজ্যব্যাপী সন্ত্রাস,ইঁদুরের কের্তন,খয়রাত হরির লুঠ

    রুজি নাই,রুটি নাই মাই চুষ হালায়,কর পুজো কর ধর্ষণ!


    মা কালির বরে দিল্লীতে মুদিখানা রম রম,বুলেট কপালে!

    ড্রোনও যেখানে সেখানে,পাকিস্তান কোথা লাগে কপালে!


    শুধু উন্নয়ন,শুধু বিজ্ঞাপন,ঘরে জ্বালাতন,পথে নারী নির্যাতন!

    পদ্মবিলের কালীর কল্যানে শুধু গেরুয়া সুনামি আয়োজন!


    ডিজিটাল বাঁ কাবাঁ পাতাভরা জাপানী তেল,দাঁড়ায় না!

    আহা কি আনন্দ!আহা জাপানী তেলেতে কি আনন্দ!


    সব ব্যাটা ধ্বজভঙ্গ,ভিতরে কিচ্ছু নাই,পোঁ খানি আছে!

    তবু সাত দিনে তিন তিন দিন খাট ভাঙা চাই,বিজ্ঞাপন!


    সানির আলোয়,পোল ডান্স পোল ডান্স,লুঙ্গি ডান্স,খোল পোঁ!

    লুঙ্গি খোল পোঁ,আব্বাস জসিমে পুছবে কোন্ হালার পো!


    বুড়ো যত ভাম,অন্তর্জলি যাত্রায় দাঁত ক্যালায়,দাঁড়ায়না!


    তবুও ঘুইরা দাঁড়াইবে,কি ক্যালানি ,খাইছে রোজ রোজ!

    জমিদারি মা কালীর কের্তন খালী ,হরি হরি বোল!হরি বোল!


    মিয়াঁরা খালি দ্যাকে হিজাব আর সালাম দুয়া খোদা হাফিজ!


    যা ব্যাটা বেডি,যেই হোস্ কালীমার ভোগে বুড়িমা চকোলেট!

    প্লেটে  পিত্জা খা কাদেরের সাথে ছিল কোনজনা কাটলেট!


    ছ্যানেলে প্যানেলে যত পারস চ্যাঁচা ব্যাটা বেডী বেড খালি!


    যাবি দিঘা নিয়া যা,যা শালা মন্দার মণি ,যা মু্ম্বাই দিল্লী খালি!

    হরির লুঠ ক্লাব কর,মা কালির পুজো কর খালি,বাঁচবি তালি !


    গাঁ ফাটতাচে,পোঁ ফাটতাছে,মুখে মুখে সে কী হাসি,কী হাসি!


    জানেই না,যেখানে পাইবে মুন্ডু কাডবে ঘর জ্বালাবে ফরমান!

    পোঁ খুল্যা খুল্যা ফর্রুখাবাদী সংস্কার পিপিপি গ্রীক ট্রেজেডি!


    কামদুনি কাকদ্বীপ ধর্ষণ সুনামি রাজনৈতিক প্রয়োজন!


    তাই প্রাণ করে আনচান,নক্সী কাঁথা পাতিয়া করিনু আবাহন!

    পদ্মবিলে সেই যে গেরুয়াকরণ,সেই যে রক্তখাকী মা কালী!

    সেই বিটি আজও নাচে খড়গ হাতে জয় মা জয় মা কালী!


    সম্মুখ সমরে গেরুআ রুখিবে,কাঁপিল আকাশ বাতাস!

    বাংলায় আজ গেরুয়া রাজকার্য রাজনীতি,জয় মা কালী!


    কালী মন্দিরে বসি নজরুল মিয়াঁ ল্যাখছিল যে সঙ্গীত!

    সেই প্রেম সঙ্গীতেই রইয়াছে আব্বাস জসিমের সঙ্গীত !


    এত রক্তপাতের নেপথ্যে সেই পদ্মবিলের জমিদার কালী!

    এত সন্ত্রাসের নেপথ্যে হেই পদ্মবিলের জমিদার কালী!


    পড়িও বাছা সোজন বাদিয়ার ঘাট,নক্সী কাঁথার মাঠ!

    ভিডিওতে সংক্ষেপে করিনু নিবেদন,নক্সী কাঁথার মাঠ!


    मां काली को दंगाई बना दिया बंगाल में तो बंट गया भारत!


    उसी दंगा फसाद से बनायेंगे हिंदू राष्ट्र?


    #Embroidered Quilt#समयांतर का असहिष्णुता पर फोकस #Jasimuddin#Nakshi Kanthar maath#Sojan Badia #Nandikar #Ujantoli#Gautam Haldar

    পুরানো সেই দিনের কথা: Memoirs of a Hindu Daughter of a Muslim Family which gave up BEEF!

    उनका मिशन: the strategy and strategic marketing of blind nationalism based in religious identity!

    उनका मिशन:The institution of the religious partition and the Politics of religion

    उनका मिशन: The Economics of Making in!


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    TaraChandra Tripathi


    हिन्दी ने न उत्तराखंड के सैकड़ों स्थान-­नामों की बोलती बन्द कर दी है। जब तक उन्हें यह न बताओ कि उनका असली नाम क्या था, वे अपने बारे में कुछ बोल ही नहीं पाते। उदाहरण के लिए कुछ स्थान-नामों को लेते हैं :
    डीडीहाट। वास्तविक नाम डिणिहाट। डिन या पहाड़ की धार या हल्के से ढलान पर स्थित हाट। हाट या आसपास के गाँवों का केन्द्र। पुराने जमाने में किसी सामन्त की राजधानी भी। प्रशासनिक केन्द्र होगा तो बाजार तो होगी ही। 'डिन'शब्द से किसी कुमाऊनी लोक कवि की प्रेयसी याद आ गयी।
    नाक में की फुली।
    पारा डिना देखा भै छे, दिशा जसी खुली। 
    तू पार की धार पर क्या दिखाई दी, लगा जैसे दिशाएँ खुल गयी हों । 
    जब भी यह पंक्ति याद आती है, लोक कवि की उर्वर कल्पना के सामने नतमस्तक हो जाता हँू। लगता है कि कालिदास भी पहले लोक कवि ही रहे होंगे। बाद में संस्कृत का अध्ययन कर महाकवि बन गये। नहीं तो इतनी मीठी उपमाएँ कहाँ से लाते। किसी विद्वान के बस की बात तो यह है नहीं। तो क्या कालिदास भी पहले अनपढ़ 'शेरदा'थे ? 
    अल्मोड़ा के पास दीनापानी को ही ले लीजिये। यह दीना क्या हुआ? असली तो डिन था डिन में पानी था। चाहे नैणकालिक से जाओ या पाटिया से। गाँव से आगे बढ़ोगे तो पानी डिन में ही मिलेगा। पनार की एक सहायक नदी है सिंद्या। उसके किनारे एक खेत था, उसमें एक गाँव बस गया। नाम हो गया सिंद्याखेत। हिन्दी ने उसे क्या चखाया, कहने लगा मैं सिंधिया जी का खेत हूँ- सिंधियाखेत। अरे भइया! सिंधिया जी यहाँ कहा से आ गये। यदि उन्हें खेत खरीदना ही होता तो रामगढ़ से लेकर लोहाघाट के मनमोहक क्षेत्र में खरीदते। इस गधेरे में क्यों खरीदते?
    चंपावत जनपद में ओखलढुंग की हिन्दी ने टाँग क्या खींची वह यह भूल गया कि उसमें प्रागैतिहासिक काल में मानव ने पूजा के लिए घट्टियाँ (कप मार्क) बनायी थीं। मोरनौला में लगभग समतल पहाड़ी ढाल पर घने जंगल के कारण, उसके समीप ही बसे गाँव का असली नाम था शौड़फटक(घने जंगलों से आच्छादित चौरस स्थान), बना दिया शहरफाटक। कहाँ रह गया शहर अल्मोड़ा और कहाँ फाटक। इसी तरह पहाड़ के छोटे-छोटे खेतों के बीच एक लंबा खेत था, नाम पड़ गया लमगा्ड़ (गा्ड़ या खेत, लंबा खेत) हिन्दी ने अर्थ का चीर हरण कर बना दिया लमगड़ा। नीबू के पेड़ों की भरमार से जो चूक (नींबू) था, बन गया चूका (?) सबसे गजब तो यह हुआ कि पश्चिमी रामगंगा के किनारे बसे बिनोली सटेड़ की ताजपोशी कर हिन्दी ने उसे बिनौली स्टेट कर दिया। वहाँ के हाईस्कूल में नियुक्त इलाहाबाद के एक अध्यापक कई दिन तक 'स्टेट'को खोजते रह गये। हिन्दी है कि जहरखुरानी गिरोह ? जिस स्थान के नाम को कुछ सुँघा दिया, वही बेहोश। और तो और पूरे कुमाऊँ को क्या खिला दिया कि विश्वविद्यालय में आकर कहने लगा मैं कुमायूँ हूँ, हुमायूँ और बदायूँ का सौतेला भाई। बड़ाऊँ, पुंगराऊँ को मैं नहीं पहचानता। छोडि़ये कभी शिकायत विस्तार से करूंगा। अभी तो डीडी (?) हाट में ही हूँ।

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    Fukushima Ahead!Bullet prdestined!

    We opt for Nuclear Disaster and Private Bullets with Ganga AArti Ritual performed in Kwento Kashi!


    Indo-US N-deal could be implemented in \


    2016: Richard Verma


    Verma also told a Washington audience that "there will be 


    a lot of progress on the civil nuclear deal in the first half 


    of 2016".


    Fukushima Daiichi Nuclear Disaster - YouTube

    Oct 8, 2013 - Uploaded by Steven Proctor

    Video shows the spread of radiation from the Fukushima/Daiichi Nuclear Power Plant, the worst disaster in ...

    Fukushima Four Years Later: In the disaster zone - YouTube

    Mar 3, 2015 - Uploaded by UCLA

    Two UCLA researchers document the disaster recovery efforts four years after the March 11, 2011 earthquake ...

    Seconds From Disaster - Fukushima [Documentary ...

    Feb 15, 2013 - Uploaded by NuclearAdvisor

    The Fukushima Daiichi nuclear disaster (Fukushima Dai-ichi ( pronunciation) genshiryoku hatsudensho jiko ...

    Understanding the accident of Fukushima Daiichi NPS ...

    Feb 2, 2013 - Uploaded by Fukushima Future

    Understanding the accident of Fukushima Daiichi NPS - Source IRSN.

    Three years on, Japan struggles to recover from Fukushima ...

    Mar 11, 2014

    While the fate of over one-quarter million people who were displaced by the nuclear disaster remains in the ...

    The Fukushima Nuclear Accident (documentary) - YouTube

    Jan 1, 2014 - Uploaded by randOmZ TV

    Examines the incident, aftermath and implications for the adoption of Nuclear energy in other countries. From ...

    Fukushima Nuclear Reactor Problem Explained (CNN ...

    Mar 14, 2011 - Uploaded by nickelson666

    ... have caused nuclear reactor problems in Fukushima Nuclear Power Plant in ... Mega Disaters 2014 ...

    Fukushima The Coming Global Disaster - YouTube

    Aug 26, 2013 - Uploaded by Qronos16

    Japan's Nuclear Regulation Authority said last week it feared thedisaster was "in some respects" beyond ...

    The ghost towns of Fukushima: Three years after Japan's ...

    Jan 10, 2014

    Nearly three years on from the disaster in Fukushima, a 12-mile exclusion zone is still in place around the ...

    How Did the Disaster at Fukushima Daiichi Happen ...

    A slideshow demonstrating how the March 2011 disaster at theFukushima Daiichi nuclear power plant unfolded.


    Palash Biswas

    Mind you,Modi and Abe performed Ganga Aarati in Kwento Kashi!They signed Indo Japan nuclear deal and Japan has to gift India Bullet Trains!Smart Cities beside cars and electronics! Moreover,Japan has got the great Indian weapon market and the purchasing list is always ready subjected to pay off@commission!


    Varanasi hosted an audio-visual treat non pareil for PM Narendra Modi and his Japanese counterpart Shinzo Abe on the banks of the holy Ganga on Saturday, marking a historic occasion in this oldest city of the world.

    The 'Ganga aarti' held for the two PMs was far more wondrous and awe-inspiring than what Varanasi citizens had seen every day for the past two decades. The magnitude and grandeur of this event was nothing short of magical.


    For your kind information!Here you are!Fukushima nuclear power plant is still experiencing major contamination issues nearly five years after the earthquake, tsunami, and subsequent meltdown.

    A new declassified report from the US Nuclear Regulatory Commission, written on March 18, 2011 just days after the disaster, sheds light on just how bad it was.

    We now know that "100% of the total spent fuel was released to the atmosphere from unit 4."

    According to nuclear expert and whistleblower Arnie Gundersen in an interview with WBAI in New York, unit four contained more cesium "than in all 800 nuclear bombs exploded above ground".

    Cesium has been linked to thyroid cancer, which is on the increase in the Fukushima area since the tsunami, according to the US National Library of Medicine.

    The chemical is highly soluble in water and can find its way into foodstuffs that have been prepared in contaminated areas.

    Another report this week revealed there are more than nine million bags of nuclear material piling up in Japan, according to the Fukushima Prefecture and the Environment Ministry.


    Have you lost the memory?Just remember the Non Confidence motion and the voting,the drama in the Parliament in which the speaker did not oblige his party and he had been expelled as the motion failed?Who moved the motion?Who supported? Please go through the minutes yet again!


    For your,kind information that government could not continue as it lost credit and mandate both!

    But the Indo US Nuclear deal has to be implemented very soon with Fukushima bonus!


    Fukushima Ahead!We opt for Nuclear Disaster and Private Bullets with Ganga AArti Ritual performed in Kwento Kashi!

    Mind you,following a major earthquake, a 15-metre tsunami disabled the power supply and cooling of three Fukushima Daiichi reactors, causing a nuclear accident on 11 March 2011.


    Right into the heart of the national Capital of the People`s republic displacement drive intensified under alternative politics as Six-month-old dies as Railway Police raze 500 shanties in Delhi; and the Messiha Kejriwal just suspends officials!Here you are!Just imagine the vocal scenario and overwhelming sound design,musicality of unbound screams of the suffering masses unheard countrywide!



    This Indian lifeline still having one hundred and thirty million manpower, this Railway is streamlined with global tenders and the modernization process vests in Tata Empire.Reliance has the lion`s share in infrastructure,energy,construction,communication,oil and gas and so on.Adani has to get all the ports and it is the development saga of growth!


    It would be easy to understand the Fukoshima if we do understand the Bhopal Gas Tragedy and the plight of the victims at all!



    Bhopal Gas Tragedy in 165 Seconds - YouTube

    ▶ 2:46

    https://www.youtube.com/watch?v=e0c0w8aw8Yk

    Dec 5, 2013 - Uploaded by AmazingFunFact

    Bhopal Gas Tragedy in 165 Seconds. AmazingFunFact ... December 3, 1984: Union Carbide disaster in ...

    Bhopal Disaster - YouTube

    ▶ 9:50

    https://www.youtube.com/watch?v=UH5LPwdVnqI

    May 12, 2015 - Uploaded by Engineering Channel

    The Bhopal disaster, also referred to as the Bhopal gas tragedy, was a gas leak incident in India, considered ...

    Bhopal Gas Tragedy 1984 - Who killed Bhopal? - YouTube

    ▶ 2:33

    https://www.youtube.com/watch?v=UvhPqmFkhes

    May 25, 2013 - Uploaded by Johnny Boy

    The Bhopal disaster, also referred to as the Bhopal gas tragedy, was a gas leak incident in India, considered ...

    Bhopal gas tragedy 1984 - YouTube

    ▶ 2:27

    https://www.youtube.com/watch?v=HXDOzMRrKlo

    Nov 30, 2011 - Uploaded by DJR

    Join the billion march: http://www.facebook.com/billionbeats This is a short video depicting the Bhopal gas ...

    Bhopal Gas Leak Tragedy - YouTube

    ▶ 23:42

    https://www.youtube.com/watch?v=GfMTAPfoC6w

    Jul 10, 2011 - Uploaded by princess carla basco

    Bhopal Gas Leak Tragedy .... Myself was the worst victim of MICGAS ACCIDENT IN DEC.1984 @ BHOPAL that ...

    Bhopal disaster 30th anniversary: Facts about the world's ...

    ▶ 2:12

    www.ibtimes.co.uk› Science › Health

    Dec 1, 2014

    The Bhopal gas tragedy on 2 December 1984 led to the deaths of 25000 people.

    Bhopal Gas Tragedy - Documentry [Part - III] - YouTube

    ▶ 6:01

    https://www.youtube.com/watch?v=Dkt6rUypnE4

    Dec 18, 2009 - Uploaded by Sameer Hiware

    The Bhopal disaster or Bhopal gas tragedy was an industrial disaster that took place at a Union Carbide ...

    Bhopal Gas Tragedy Documentry Part I www keepvid com ...

    ▶ 6:01

    https://www.youtube.com/watch?v=Up5rbkS4CGI

    May 15, 2011 - Uploaded by spywyatt

    Bhopal Gas Tragedy Documentry Part I www keepvid com. spywyatt. SubscribeSubscribedUnsubscribe 4646 ...

    Bhopal Gas Tragedy (3 December 1984): World's deadliest ...

    ▶ 1:53

    https://www.youtube.com/watch?v=7CGzFkhSKuA

    Dec 2, 2014 - Uploaded by Indianeers

    The Bhopal Disaster:Today is the 30th Anniversary of Bhopal Gas Tragedy. On the night of December 2 ...

    BBC One Night In Bhopal 2004 TVRip d0x - YouTube

    ▶ 53:30

    https://www.youtube.com/watch?v=rJg19W8x_Ls

    Dec 31, 2012 - Uploaded by Patrick McClelland

    That's why in 2015, 31 years after Bhopal's disaster, there are many ... compensate victims of Bhopal Gas ...

    Modi Abe Live!

    Watch: PM Narendra Modi, Shinzo Abe attend Ganga Aarti ...

    1 day ago - Uploaded by Zee News

    Check out the Modi-Shinzo Ganga Aarti happening on the banks of Ganga in Kashi.

    PM Modi and Japanese Prime Minister Shinzo Abe attend ...

    1 day ago - Uploaded by Narendra Modi

    Prime Minsiter Narendra Modi and Japanese Prime Minister Shinzo Abe attend Ganga Aarti in Varanasi.

    Modi, Abe attend Ganga arti at Dashashwamedh Ghat

    indiatoday.intoday.in› Videos › India

    1 day ago

    Abe, who is on a three-day day visit to India from today, along withModi attended the Ganga arti on Saturday ...

    PM Modi and Shinzo Abe attends Ganga Aarti at ... - YouTube

    23 hours ago - Uploaded by IndiaTV

    PM Modi and Shinzo Abe attends Ganga Aarti at Dasaswamedh Ghat in Varanasi SUBSCRIBE to India TV ...

    Highlights of agreements between India and Japan

    Narendra Modi and his Japanese counterpart Shinzo Abe sign a broad spectrum of agreements

    News agency ANI reports:

    New Delhi, Dec. 12:  Prime Minister Narendra Modi and his Japanese counterpart Shinzo Abe sign a broad spectrum of agreements, some of which are as follow: (Also Read: Narendra Modi lauds Japanese ODA loans for assisting projects in India)

    1. Transfer of Defence Equipment and technology Cooperation


    7. Young researchers' exchange programme between the Department of Science and Technology of India and the Japan's Society for Promotion for Science.

    8. MoC between Central Drugs Standard Control Organisation and Ministry of Health, Labour and Welfare of Japan on Medical Products Regulation

    9. MoC between MHRD, India and Ministry of Education, Culture, Sports, Science and Technology of Japan

    10. Statement of Intent between NITI Aayog and Institute of Energy Economics, Japan

    11. MoU on cooperation between state governments of Andhra Pradesh and Toyama Prefecture

    12. MoU between State Government, Kerala and Lake Nakaumi, Lake Shinji and Mount Daisen area Mayors Associations

    13. MoU between IIM, Ahmedabad, and National Graduate Institute for Policy Studies (GRIPS)

    14. MoC between Ministry of Environment, Forest and Climate Change, India, and Ministry of Agriculture, Forestry and Fisheries, Japan.

    We have reached substantive agreement on Indo-Japan ...

    1 day ago - Uploaded by ANI Multimedia

    New Delhi, Dec12 (ANI): Foreign Secretary S Jaishankar on Saturday said that they have reached substantive ...

    India, Japan sign agreements for bullet trains, civil nuclear ...

    www.ibtimes.co.in› Society › Politics

    1 day ago

    India and Japan signed multiple Memorandums of Understanding (MoUs) on Saturday for cooperation in the ...

    Indo- Japan Nuclear agreement draws mixed reaction ...

    1 day ago - Uploaded by ANI News

    New Delhi,Dec12 (ANI): Mixed reactions turned up in light of the significant Indo- Japan nuclear deal between ...

    Japan Tops China in Race to Build India's First High-Speed ...

    1 day ago

    The deal comes after Japan lost out to China on a $5 billion rail deal in Indonesia in October. Along with the ...

    We have reached substantive agreement on Indo-Japan ...

    1 day ago

    Foreign Secretary S Jaishankar on Saturday said that they have reached substantive agreement on Indo ...

    Japan and India agree bullet train, nuclear deals

    www.deccanherald.com› Videos › National

    1 day ago

    Japan and India agree several high-profile deals including on high-speed rail, defence technology and civil ...

    India, Japan sign agreement to further trade, investment ...

    Apr 30, 2015 - Uploaded by ANI News

    New Delhi, April 30 (ANI): In line with Prime Minister Narendra Modi's ambitious 'Make in India' campaign ...

    Indo-Japan Agreement reached on strengthening strategic ...

    Sep 1, 2014 - Uploaded by DD News

    Japan and India agreed on Monday to strengthen strategic ties as Asia's second and third biggest economies ...

    We Have Reached Substantive Agreement On Indo-Japan ...

    New Delhi, Dec12 (ANI): Foreign Secretary S Jaishankar on Saturday said that they have reached substantive ...

    Indo- Japan Nuclear agreement draws mixed reaction ...

    Indo- Japan Nuclear agreement draws mixed reaction - New Delhi,Dec12 (ANI): Mixed reactions turned up ...



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    ভয় নাই ভয় নাই ভীতুর ডিম,বড় দুগ্গো হইল ত শিবঠাকুরও একান্ন ফুটের হইলেন!


    জয় বজরং বলি কি জয়!


    সনাতন হিন্দু ধর্ম আবার জাগান দিতেছে বাংলায়!


    সাধে কি ধর্মনিরপেক্ষ ভারতের রাষ্ট্রপতি রাজকীয় যাত্রায় রাজ্যপাল কেশরীনাথ ত্রিপাঠিকে নিয়ে বাবা শিব ঠাকুরের ঔ মুর্তি উদ্বোধন করিলেন!


    জয় মা কালির জয়!


    পড়িও বাছা সোজন বাদিয়ার ঘাট,নক্সী কাঁথার মাঠ!

    ভিডিওতে সংক্ষেপে করিনু নিবেদন,নক্সী কাঁথার মাঠ!


    https://www.youtube.com/watch?v=QaAmgnmCKAc


    পলাশ বিশ্বাস

    সোনার বাংলায় বাঙালির পরম আরাধ্যা মা কালী।

    সেই মা কালী,আবার কালীঘাটের মা কালীর মহিমা অনন্ত।ধ


    র্মপ্রাণ বাঙালির আহ্লাদে আটখানা হইতেই হয় যেহেতু কালিঘাটে মা কালির সব গযনাই এখন সোনার।


    রক্তবীজ নাশিতে মায়ের অশ্বমেধ অভিযানের কথা মনে করিয়াই বোধ হয় তাহার হাতের  খড়্গখানি আবার উনচল্লিশ লাখ টাকার।


    ম্লেচ্ছ বাঙালির ধর্মে কর্মে ফেরার দিন আগত অবশ্যই।


    মেহনতী বিশ্বকর্মার প্রয়োজন আর নাই,যেহেতু বাংলায় এখন কল কারখানা নাই বললেই চলে।


    নানাবিধ শিল্পায়নের পিপিপি মডেলে কল কারখানার চাইতে নানারকম হাব ও কম্পেক্স।অত্যাধুনিক।


    তাই সেখানে মেহনতী মানুষের তেমন প্রয়োজন নেই।


    কেরানী বলিয়া বাঙালির দেশে বিদেশে বড়ই বদনাম।সে বদনামও ঘুচিতেছে।


    সব্বাই এখন এজেন্ট চিটফান্ড,রাজনীতি অথবা আহা কি আনন্দ। বাজারের।


    বড় সাধ কইরা মুম্বাই থিকা গণেশ উত্সব আমদানি হইল বেশি দিন হয় নাই।


    যারা ধর্মেও আছেন আবার জিরাফেও আছেন তাঁদের ধর্মনিরপেক্ষতা ও প্রগতি তত্সহ মতাদর্শের নিদর্শন এখন ধর্মে কর্মে অতি সেকুলার।


    যেমন এই পুজোতেই বিশ্বের সবথিকা বড় দুগ্গো অবতীর্ণ।


    সেই মা দুগ্গো আবার শিব ঠাকুকের বউও বটেন।


    শিব ঠাকুর মানুষটা আবার তেমন সুবিধার নন।


    পয়লা দফার গিন্নি  সতী পিতৃগৃহে গিয়ে যজ্ঞে পতির ভাগ আদায় না করিতে পারিয়া যজ্ঞস্থলে প্রাণত্যাগ করিলেন।


    বাবা ভোলেনাথ শশুরমশাইয়ের যজ্ঞের দফা রফা যা করিলেন ,তা করিলেন,সতীর দেহ লইয়া দেই ধেই প্রলয় ন্রেত্য শুরু করিলেন।


    সেই ন্রেত্য দেইখা দেব দেবীদের প্রাণ সংশয়,অতএব ভগবান বিষ্ণু সুদর্শন চক্র ছাইড়া দিয়া সতীর দেহ খানখান করিলেন।


    সেই খন্ড খন্ড দেহের যাবতীয় অংশ যেখানে পড়েছে,সেই স্থান হইল  সতীপীঠ।সেখানে দেবি বিরাজমান।


    সঙ্গে আবার ভৈরবরুপে বাবা শিব ঠাকুর।


    মুশকিল হইল গিয়া যে শিব ঠাকুর বাংলাতেই সব চাইতে বেশি নাচানাচি করিলেন।


    সেকেলে ভারতবর্ষ বলিতে বাংলাদেশ আদৌ কতটা আছিল না আছিল,প্রশ্ন বাহুল্য।


    তাহার চাইতে বড় কথা স্বর্গ মর্ত্য পাতালে অবাধ যাতায়াত যাহার সেকেলে তিনি পাসপোর্ট ভিসা না থাকিলেও আমাদের নেতে নেতীদের মত,সিনেমার লোকজনের কায়দায় এক আধটু পাগলু ডান্স কি লন্ডন, রোম, পেরিস, ওয়াশিংগটন,আফ্রিকা,ল্যাটিন আমেরিকা কিংবা ঔ টোকিও,বেইজিং,ইন্দোনেশিয়া,সুমাত্রা বালি রেঙুন,সিঙাপুরেও কি দ্যাখাইতে পারিতেন না?


    বেরসিক বাঙালি এতদিন বোঝে নাই যে শিবঠাকুরের খাস মুলুক হইল গিয়া এই বাংলা।এই বাংলাতেই তাঁর দ্বিতীয় পক্ষের বাপের বাড়ি আসা যদিও তিনি হিমালয় কন্যা,তবু বাঙালিরা তাহার ধর্মের বাপ,সন্দেহ আছে কি?


    বউয়ের অমন দ্যাখনসই মূরতি হইল আর এই নতুন শ্বশুর গৃহে তিনি ফালতু থাকিবেন,অথচ কতই না তাঁর অবতার?


    প্রেলয়ে তিনি দেব জিত সহ মাফিয়া গুন্ডা সবাইকে এক্কেবারে দক্ষিনী কায়দায় একাই দুরমুশ করিতে পারেন মেজাজ বিগড়াইলে!প্রমাণ ভরি ভুরি আছেই।


    ভয় নাই ভয় নাই ভীতুর ডিম,বড় দুগ্গো হইল ত শিবঠাকুরও একান্ন ফুটের হইলেন!


    জয় বজরং বলি কি জয়!


    সনাতন হিন্দু ধর্ম আবার জাগান দিতেছে বাংলায়!


    সাধে কি ধর্মনিরপেক্ষ ভারতের রাষ্ট্রপতি রাজকীয় যাত্রায় রাজ্যপাল কেশরীনাথ ত্রিপাঠিকে নিয়ে বাবা শিব ঠাকুরের ঔ মুর্তি উদ্বোধন করিলেন!


    জয় মা কালির জয়!


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    ভয় নাই ভয় নাই ভীতুর ডিম,বড় দুগ্গো হইল ত শিবঠাকুরও একান্ন ফুটের হইলেন!


    জয় বজরং বলি কি জয়!


    সনাতন হিন্দু ধর্ম আবার জাগান দিতেছে বাংলায়!


    সাধে কি ধর্মনিরপেক্ষ ভারতের রাষ্ট্রপতি রাজকীয় যাত্রায় রাজ্যপাল কেশরীনাথ ত্রিপাঠিকে নিয়ে বাবা শিব ঠাকুরের ঔ মুর্তি উদ্বোধন করিলেন!


    জয় মা কালির জয়!


    পড়িও বাছা সোজন বাদিয়ার ঘাট,নক্সী কাঁথার মাঠ!

    ভিডিওতে সংক্ষেপে করিনু নিবেদন,নক্সী কাঁথার মাঠ!



    পলাশ বিশ্বাস


    সোনার বাংলায় বাঙালির পরম আরাধ্যা মা কালী।

    সেই মা কালী,আবার কালীঘাটের মা কালীর মহিমা অনন্ত।ধ


    র্মপ্রাণ বাঙালির আহ্লাদে আটখানা হইতেই হয় যেহেতু কালিঘাটে মা কালির সব গযনাই এখন সোনার।


    রক্তবীজ নাশিতে মায়ের অশ্বমেধ অভিযানের কথা মনে করিয়াই বোধ হয় তাহার হাতের  খড়্গখানি আবার উনচল্লিশ লাখ টাকার।


    ম্লেচ্ছ বাঙালির ধর্মে কর্মে ফেরার দিন আগত অবশ্যই।


    মেহনতী বিশ্বকর্মার প্রয়োজন আর নাই,যেহেতু বাংলায় এখন কল কারখানা নাই বললেই চলে।


    নানাবিধ শিল্পায়নের পিপিপি মডেলে কল কারখানার চাইতে নানারকম হাব ও কম্পেক্স।অত্যাধুনিক।


    তাই সেখানে মেহনতী মানুষের তেমন প্রয়োজন নেই।


    কেরানী বলিয়া বাঙালির দেশে বিদেশে বড়ই বদনাম।সে বদনামও ঘুচিতেছে।


    সব্বাই এখন এজেন্ট চিটফান্ড,রাজনীতি অথবা আহা কি আনন্দ। বাজারের।


    বড় সাধ কইরা মুম্বাই থিকা গণেশ উত্সব আমদানি হইল বেশি দিন হয় নাই।


    যারা ধর্মেও আছেন আবার জিরাফেও আছেন তাঁদের ধর্মনিরপেক্ষতা ও প্রগতি তত্সহ মতাদর্শের নিদর্শন এখন ধর্মে কর্মে অতি সেকুলার।


    যেমন এই পুজোতেই বিশ্বের সবথিকা বড় দুগ্গো অবতীর্ণ।


    সেই মা দুগ্গো আবার শিব ঠাকুকের বউও বটেন।


    শিব ঠাকুর মানুষটা আবার তেমন সুবিধার নন।


    পয়লা দফার গিন্নি  সতী পিতৃগৃহে গিয়ে যজ্ঞে পতির ভাগ আদায় না করিতে পারিয়া যজ্ঞস্থলে প্রাণত্যাগ করিলেন।


    বাবা ভোলেনাথ শশুরমশাইয়ের যজ্ঞের দফা রফা যা করিলেন ,তা করিলেন,সতীর দেহ লইয়া দেই ধেই প্রলয় ন্রেত্য শুরু করিলেন।


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    তাহার চাইতে বড় কথা স্বর্গ মর্ত্য পাতালে অবাধ যাতায়াত যাহার সেকেলে তিনি পাসপোর্ট ভিসা না থাকিলেও আমাদের নেতে নেতীদের মত,সিনেমার লোকজনের কায়দায় এক আধটু পাগলু ডান্স কি লন্ডন, রোম, পেরিস, ওয়াশিংগটন,আফ্রিকা,ল্যাটিন আমেরিকা কিংবা ঔ টোকিও,বেইজিং,ইন্দোনেশিয়া,সুমাত্রা বালি রেঙুন,সিঙাপুরেও কি দ্যাখাইতে পারিতেন না?


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    জয় বজরং বলি কি জয়!


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    • बिगड़ गया है भाजपा सरकार का मानसिक संतुलन – माकपा

      Posted:Sun, 13 Dec 2015 15:43:41 +0000
      भाजपा सरकारों की किसानविरोधी-आदिवासीविरोधी नीतियों का नतीजा है किसानों की आत्महत्या रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि 12 सालों तक लगातार राज करने के कारण भाजपा सरकार का मानसिक संतुलन...

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    • एक लड़की होने के नाते कश्मीर लौटने के बाद डर सता रहा है 'दंगल'की जायरा वसीम को

      Posted:Sun, 13 Dec 2015 14:31:02 +0000
      'दंगल'ने जायरा वसीम की बदल दी ज़िंदगी नई दिल्ली, 13 दिसंबर। जायरा वसीम जो कुछ समय पहले तक एक अनजान चेहरा थीं, वह बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की आगामी फिल्म 'दंगल'में मिले एक...

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    • 'OROP'मुद्दे पर दिल्ली में पूर्व सैनिकों ने निकाली 'आक्रोश रैली'

      Posted:Sun, 13 Dec 2015 13:49:52 +0000
      पूर्व सैनिकों ने पूछा - सरकार में शामिल लोग कब तक झूठ बोलकर भ्रम फैलाते रहेंगे नई दिल्ली, 13 दिसंबर। देशभर के पूर्व सैनिकों ने रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में जुटकर 'वन रैंक वन पेंशन' (...

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    • दिलीप कुमार को मिला पद्म विभूषण

      Posted:Sun, 13 Dec 2015 11:51:02 +0000
      मुंबई, 13 दिसम्बर। हिन्दी सिने जगत के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार को रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके आवास पर देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया।...

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    • Odd-even car scheme, banning diesel engine vehicles will all remain on paper and will not work

      Posted:Sun, 13 Dec 2015 04:53:06 +0000
      Delhi Air Pollution and Malthus By Justice Markandey Katju Much hue and cry has been raised in the media and elsewhere about air pollution in Delhi, and a host of solutions have been proposed, e.g....

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    • किसने मारा हेराल्ड ( ‪#‎NationalHerald ) को?

      Posted:Sun, 13 Dec 2015 04:39:58 +0000
      हेराल्ड हाउस बन्द हो गया, पर हेरल्ड के नाम पर लूट चालू है देश की जंगे आज़ादी को भूगोल का आकार देने वाला हेरल्ड खुद भूगोल से इतिहास में चला गया अंग्रेज नेशनल हेराल्ड को बंद करने में जुटे रहे, विफल...

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    • संघी बीफ खाएगा स्वर्ग जाएगा ! अल्पसंख्यक खाएगा नरक जाएगा !

      Posted:Sun, 13 Dec 2015 01:53:28 +0000
      बीफ के सवाल पर जहाँ देश के अन्दर पीट-पीटकर लोगों को मार डाला जा रहा है या पशुधन के व्यापारियों की पिटाई करके जान ले ली जा रही हो, वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख...

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    • मुजफ्फरनगर के हत्यारों को बचाने के लिए सपा सरकार टाल रही है शीतकालीन सत्र- शाहनवाज आलम

      Posted:Sat, 12 Dec 2015 16:38:07 +0000
      सपा-भाजपा के साम्प्रदायिक गठजोड़ के खिलाफ रिहाई मंच ने शुरू किया जनअभियान 12 से 16 दिसम्बर से तक चलेगा जनजागरुकता अभियान लखनऊ 12 दिसम्बर 2015। सूबे की सपा सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार के बीच...

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    • इस मंडल कमंडल महाभारत में आदिवासी किस खेत की मूली हैं?

      Posted:Sat, 12 Dec 2015 15:44:01 +0000
      इस मंडल कमंडल महाभारत में आदिवासी किस खेत की मूली हैं? इंसानियत के हक हकूक क्या गाजर मूली हैं? लो, रस्म अदायगी हो गयी, रंगीन वेषभूषा में नाचा गाना फोटो सेशन सेल्फी! अब क्या चाहिए जल जंगल जमीन?...

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    • सलमानों की साजिश में उलझा न्याय

      Posted:Sat, 12 Dec 2015 15:38:20 +0000
      डॉ. मनीष पाण्डेय सलमान खान बाम्बे हाइकोर्ट द्वारा हिट एंड रन केस में बरी कर दिये गए। आरोप था कि सलमान ने 28 सितम्बर 2002 को मुंबई में नशे की हालत में ड्राइविंग करते हुए पाँच लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी थी।...

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    • हिन्दुत्व के हमले को कभी बीजेपी 'लीड'करती है तो कभी कांग्रेस- चमड़िया

      Posted:Fri, 11 Dec 2015 15:44:59 +0000
      आरएसएस के खूनी अभियान को राज्यसत्ता का संरक्षण हासिल है और देश की पुलिस आरएसएस के सुरक्षा बल के बतौर काम कर रही है… लालू-नीतीश का सेकुलरिज़्म अत्यंत ही खोखले किस्म का है जो अल्पसंख्यकों का वोट...

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    • Aljazeera TV and RSS

      Posted:Thu, 10 Dec 2015 05:25:49 +0000
      The Aljazeera TV runs a show Head to Head conducted by renowned journalist Mehdi Hasan in which personalities are grilled on their world-view. On December 7, Ram Madhav, an ideologue of RSS/BJP...

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    • Degradation of Criminal Justice System

      Posted:Wed, 09 Dec 2015 18:41:29 +0000
      People's Alliance for Democracy and Secularism Invites You to a Convention on              Degradation of Criminal Justice System  Dec 12-13, 2015 Gandhi Peace Foundation, D. D. U. Marg, New...

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    • असहिष्णुता हिन्दुत्व का हथियार है – अमलेन्दु उपाध्याय

      Posted:Wed, 09 Dec 2015 16:59:09 +0000
      नफ़रत फैलाने वालों के खिलाफ सोशल मीडिया पर खुले मोर्चा बीडीशर्मा, रमाशंकर विद्रोही और मोहम्मद नसीम को श्रद्धांजलि दी गई मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या व हस्तक्षेप.कॉम के पांच साल पूरा होने पर...

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    • रमाशंकर यादव 'विद्रोही'मर गए, हारे नहीं

      Posted:Tue, 08 Dec 2015 19:17:08 +0000
      शेष नारायण सिंह रमा शंकर यादव विद्रोही नहीं रहे। बड़े कवि थे रमाशंकर। मुझसे उनकी मुलाक़ात 1974 में हुयी थी। कादीपुर के संत तुलसीदास डिग्री ( अब पोस्ट ग्रेजुएट ) कालेज में वे बी ए के छात्र थे। मैं वहीं...

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    • Sunny Leone to defend Governance of Tolerance! The MANFORCE Baby cries that it is tolerance all the way!

      Posted:Tue, 08 Dec 2015 17:32:27 +0000
      Sunny Leone Slams 'Intolerant India' Viewpoint, Says She's Still Here Because India's Tolerant! Just see Sunny branded work to justify intolerance! Palash Biswas Sorry to post Sunny works as she...

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  • 12/13/15--22:04: কি বিচিত্র বীর্য হুলো! নেই চাল কিংবা চুলো! খায় শুধু মুলো,হাগু মুতু বিভুঁই! বাঙাল মালসাট! ফুকুশিমা চাই!ফুকুশিমা চাই! ভুপাল ঠিকঠাক লাগে নাই! অপরাধে সেরা তা হইলডা কি! ধর্ষণ দিল্লীতেও হয়! ইরাকে কি লোক মরে নাই! বাংলায়বাবরি ধ্বংস ত হয় নাই! শুধু শুধু বাংলার বদনাম! কাকদ্বীপ থেকে কামদুনি! মা কালি হে,মা মাগো! সব পদ্মবিল করে দাও! উড়িতেছে ডাঁস, উড়িতেছে বোলতা, উড়িতেছে ভীমরুল, নিতম্বদেশ আঢাকা দেখিলে ফুটাইবে তারা হুল। মহাকাশ হতে গু-খেকো শকুন হাগিতেছে তব গায় বাঙালি শুধুই খচ্চর নয়, তদুপরি অসহায়। (পুরন্দর ভাট)
  • কি বিচিত্র বীর্য হুলো!

    নেই চাল কিংবা চুলো!

    খায় শুধু মুলো,হাগু মুতু বিভুঁই!

    বাঙাল মালসাট!


    ফুকুশিমা চাই!ফুকুশিমা চাই!

    ভুপাল ঠিকঠাক লাগে নাই!

    অপরাধে সেরা তা হইলডা কি!

    ধর্ষণ দিল্লীতেও হয়!

    ইরাকে কি লোক মরে নাই!

    বাংলায়বাবরি ধ্বংস ত হয় নাই!


    শুধু শুধু বাংলার বদনাম!

    কাকদ্বীপ থেকে কামদুনি!

    মা কালি হে,মা  মাগো!

    সব পদ্মবিল করে দাও!


    উড়িতেছে ডাঁস, উড়িতেছে বোলতা, উড়িতেছে ভীমরুল,

    নিতম্বদেশ আঢাকা দেখিলে ফুটাইবে তারা হুল।

    মহাকাশ হতে গু-খেকো শকুন হাগিতেছে তব গায়

    বাঙালি শুধুই খচ্চর নয়, তদুপরি অসহায়।

    (পুরন্দর ভাট)

    পলাশ বিশ্বাস

    গঙ্গার ভাগ্য সুপ্রসন্ন আজি তীর্থ ভারতে

    মহাভারত কথা অমৃত সমান!


    কি বিচিত্র বীর্য হুলো!

    নেই তার চাল কিংবা চুলো!

    সেল্ফিতে সাংবাদিক ঝুলো!


    প্রসদোষ কাঁচাতে ছবি তুলো!

    ছবিও জাম্পেশ ডিজিটাল!


    লাইনিং নিঁখোজ! রং সবুজ!

    কিংবা সহিষ্ণুতা গেরুয়া!

    কোটি কোটি লাইক শেয়ার!



    গঙ্গা কিনারে ইন্দো জাপান ?

    গঙ্গা আরতি দ্যাখো নাই?

    দ্যাখো নাই,বুলেটের ছবি?


    বোঝোনি ফ্রী মার্কেট ক্যালানি ?

    ফ্রী ফ্লো পুঁজি আমদানি  ?

    ইহলোক পরলোক ?

    শয়নে স্বপনে রমনে

    স্বর্গবাস শশরীর ?


    স্মার্টফোন কি কেনো নাই

    ঔ ঝিনচাকই চাই!


    উড়িতেছে ডাঁস, উড়িতেছে বোলতা, উড়িতেছে ভীমরুল,

    নিতম্বদেশ আঢাকা দেখিলে ফুটাইবে তারা হুল।

    মহাকাশ হতে গু-খেকো শকুন হাগিতেছে তব গায়

    বাঙালি শুধুই খচ্চর নয়, তদুপরি অসহায়।

    (পুরন্দর ভাট)


    ফুকোশিমা চাই!

    ফুকোশিমা চাই!


    ভুপাল ঠিকঠাক লাগে নাই!



    ধর্ষণ দিল্লীতেও হয়!


    ইরাকে কি লোক মরে নাই!



    মরে নাই ভিযেতনামে!


    লাতিন আমেরিকায় মরে নাই!


    তবে বাংলা বাংলা কেন চেল্লাও?


    জিহাদ চলতাছে বোঝনি?


    সারা ভারতে যাহা হইতাছে!

    পশ্চিম বঙ্গেও সেই গেরো খুলতাছে!


    বড়দুগ্গো দ্যাখছনি?

    কি ফার্ট রে কি ফার্ট?


    ধর্মেও আছি জিরাফেও আছি!

    চ্যানেলে আছি,প্যানেলেও আছি!

    বড়দুগ্গো দ্যাখছনি?

    কি ফার্ট রে কি ফার্ট?


    একান্ন হাত শিব স্মৃতি মন্দিরে

    হাসি হাসি রাষ্ট্রপতি দ্যাখোনি?


    চন্ডীপাঠ শোননি?



    রায়সিনাে চন্ডীমনিদির?


    বজরং বলি সারা দ্যাশে?


    কি ভীম কি ভীম,দ্যাখো নি?



    পেখম মেলেনি কি মেলেনি!

    ধর্ষণ ঠিকঠাক হলো কি হলো নি!


    মুম্বাই ব্লাস্ট হয়নি এখনো!

    হয়নি এখনো বাবরি ধ্বংস!

    হয়নি শিখ নিধন যজ্ঞ!


    সবে জাগতাছে মা কালি

    পদ্মবিল আবোরো হইব!


    রোসো বোসো,সব হইতাছে!

    গোরো খুলাতাছে হি হি!

    হিসি করো!করো হাগু!

    বাংলার বদনাম করো না!


    বাঙালির নাক বড় উঁচু!

    আইফাল টাওয়ার ফেল!

    আরো পাতাভর্তি জাপানি তেল!


    আরও খাট ভাঙ্গা আছে!

    হপ্তায় তিন দিন,কি দুষ্টু!


    সংবাদ শিরোনামে আগু পিছু!

    খাট ভাঙ্গা আছে!কি দুষ্টু!


    আরো পাতাভর্তি জাপানি তেল!

    আহা কি আনন্দ!কি দুষ্টু!


    তবু কেন কামদুনি থেকে কাকদ্বীপ?

    বা কাকদ্বীপ থেকে কামদুনি?


    শালিমার নাই বা খুলিল!

    মারিনা হইতাছে!ঝুলি নিয়া

    ডিজিটাল শিল্পিরা দলে দলে!

    লুঙি উঁচাইয়া,খুলি নিয়া খেলে!


    তলার পাইতাছে!গাছের ও চাই!

    লে গেরুয়া!লে হালুয়া!

    সহিষ্ণুতার সিনেমা লে ছক্কা!


    নাচতাছে ধেই ধেই!

    ছুঁছোর কের্তন সহ জাপানী তেল!

    সব শিল্প ফেল!সব শিল্প ফেল!


    তবু কেন ফুলকপি মরে!

    ড্রোন করে কুপোকাত!


    সন্ত্রাস! সন্ত্রাস!মাউবাদী

    হালারা হুলোর মিয়াঁউ!

    শুধু শুধু হাউঁ মাউঁ খাউঁ!


    বুঝেও বোঝে না!

    নাক উংচু ইংরেজ!

    উচিংড়ি বংশজ ঘরে ঘরে!


    অপরাধ তালিকাতে সবার উপরে!

    তবু উন্নয়ন হয় নাই?


    ষড়যন্ত্র! উফ কি ষড়যন্ত্র!


    মন্ত্রী সান্ত্রী যে যেখানে আসিছ!

    লাইকমারাদের ধর!


    ক্যালানি উত্সব চলতাছে!

    তবু কাকদ্বীপ থেকে কামদুনি!


    জঙ্গল মহল  হাসি হাসি!

    ভোটারার সব দামড়া খাসি!

    জেসপ যদিবা বেচিল!

    বিটি রোডের ধারে

    কোটি টাকার শিল্প ফ্ল্যাট!


    কোটি টাকার শিল্প মল!

    কোটি টাকার শিল্প হাগু হাব!

    নাকুদের নথে মৌমাছি মৌচাক!


    কাদরের নথ নায়িকা!

    কাদের মিলিল না কিছুতেই!


    যাকে পাবি তাকে ধর!

    যার গলায় আটকাবে ফান্দা!


    ধর তাঁকে ধর!প্রমাণ থাক না থাক!

    ফাঁসি হোক,দোষী হোক না হোক!


    কি বিচিত্র বীর্য হুলো!

    নেই তার চাল কিংবা চুলো!

    সেল্ফিতে সাংবাদিক ঝুলো!


    প্রসদোষ কাঁচাতে ছবি তুলো!

    ছবিও জাম্পেশ ডিজিটাল!


    লাইনিং নিঁখোজ! রং সবুজ!

    কিংবা সহিষ্ণুতা গেরুয়া!

    কোটি কোটি লাইক শেয়ার!



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