Are you the publisher? Claim or contact us about this channel


Embed this content in your HTML

Search

Report adult content:

click to rate:

Account: (login)

More Channels


Channel Catalog


Channel Description:

This is my Real Life Story: Troubled Galaxy Destroyed Dreams. It is hightime that I should share my life with you all. So that something may be done to save this Galaxy. Please write to: bangasanskriti.sahityasammilani@gmail.comThis Blog is all about Black Untouchables,Indigenous, Aboriginal People worldwide, Refugees, Persecuted nationalities, Minorities and golbal RESISTANCE.

older | 1 | .... | 223 | 224 | (Page 225) | 226 | 227 | .... | 303 | newer

    0 0


    24, OCT, 2015, SATURDAY 10:06:30 PM

    नई दिल्ली ! रक्षा मंत्रालय ने लड़ाकू विमानों में पायलट के तौर पर महिलाओं की नियुक्ति के वायुसेना के प्रस्ताव को ..

    विदेश

    भारत से झूठी कॉल पर पाकिस्तान में बम की दहशत

    24, OCT, 2015, SATURDAY 09:32:12 PM

    इस्लामाबाद ! भारत से की गई एक झूठी कॉल में दावा किया गया था कि पाकिस्तान में सिंध गर्वनर हाउस के परिसर में एक बम रखा गया है। कॉल कथित तौर पर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई से किया गया

    खेल

    नए नियमों ने की बल्लेबाजों की राह कठिन : कोहली

    24, OCT, 2015, SATURDAY 09:42:01 PM

    मुंबई | दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई एकदिवसीय में शतक लगा फॉर्म में लौट चुके भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान विराट कोहली का मानना है कि एकदिवसीय क्रिकेट नियमों में हाल ही में किए गए बदलाव के कारण बल्लेबाजों को रन बनाने में मुश्किल

    प्रादेशिकी

    मुसलमानों को पिछलग्गू बनाकर रखा,ठगने का काम किया,जिससे वे बदहाल हुए

    24, OCT, 2015, SATURDAY 10:03:12 PM

    किशनगंज ! आल इंडिया इत्तेहादुल मजलिसे मुसलिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आज कहा कि बिहार में किसी मुसलमान को बड़ा नेता नहीं बनने दिया गया जिसके कारण ही यहां मुसलमानों की दुर्गति है ..

    अर्थजगत

    पूर्वाचल में बिजली सब्सिडी का दुरुपयोग, नकेल कसेगी सरकार

    24, OCT, 2015, SATURDAY 09:49:47 PM

    | उत्तर प्रदेश के पूर्वाचल इलाके में बुनकरों की सेहत सुधारने के लिए राज्य सरकार ने बुनकरों को सब्सिडी पर बिजली देने का ऐलान किया था, लेकिन उनको मिलने वाली बिजली सब्सिडी का दुरुपयोग किए जाने की शिकायतें मिल रही हैं।

    

    सम्पादकीय

    अस्पताल में गरबा

    23, OCT, 2015, FRIDAY 09:06:04 AM
    Author Image

    गुजरात पर्यटन के एक विज्ञापन में अमिताभ बच्चन थिरकते हुए कहते हैं- बहुत नाच लिए बारात में, कुछ दिन तो नाचो गुजरात में। शारदीय नवरात्र के प्रारंभ होते ही गुजरात में गरबा की 

    और अब सुनपेड़

    22, OCT, 2015, THURSDAY 11:24:40 PM
    Author Image

    दो साल का वैभव और 10 महीने की दिव्या, इन्हें नहींपता कि मोबाइल फोन क्या होता है, दलित और सवर्ण क्या होता है, इन्हें तो अभी दुनिया कैसी है, यह जानना भी बाकी था, लेकिन वे इस दुनिया 

    नशा तस्करों पर लगाम जरुरी

    22, OCT, 2015, THURSDAY 04:09:10 AM
    Author Image

    छत्तीसगढ़ में नशा एक बड़ी सामाजिक बुराई के रुप में सामने आ रहा है। आबकारी विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में हर साल शराब की खपत में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही 

    भारत में सहिष्णुता

    21, OCT, 2015, WEDNESDAY 11:13:52 PM

    15 दिन में दूसरी बार राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को देश को याद दिलाना पड़ा कि पांच हजार साल पुरानी भारत की संस्कृति में विविधता और सहिष्णुता का क्या स्थान है, क्या महत्व है। 

    रोजगार के साथ सुरक्षा भी

    21, OCT, 2015, WEDNESDAY 03:38:20 AM
    Author Image

    प्रशासन में कुछ नया करने की सोच ही एक प्रशासनिक अधिकारी को सफल बनाती है। सरगुजा जिले की कलेक्टर ऋतु सेन प्रशासन में अपने नए प्रयोगों से लोगों खासकर महिलाओं को आत्मनिर्भर 

    Clicking moves right

    आलेख

    फासीवाद के सौ, और संघ के नब्बे साल

    24, OCT, 2015, SATURDAY 10:06:11 PM
    Posted by:पुष्परंजन

    पुष्परंजन : पूरी दुनिया में फैशन वीक के लिए मिलान प्रसिद्ध है। न्यूयार्क$, लंदन और पेरिस से कहीं ज़्यादा जलवा फरोश मिलान के फैशन वीक में जुटते हैं, जिसे

    शीतयुद्ध की ओर सरक सकती है दुनिया

    24, OCT, 2015, SATURDAY 10:01:34 PM
    Posted by:रहीस सिंह

    डॉ. रहीस सिंह : पिछले सात दशकों पर शांतिप्रियता का आचरण कर रहा एशिया-प्रशांत का एक देश (जापान) अब नई रक्षा नीति के जरिए'आत्मरक्षा के सिद्धांतÓ को नया आयाम

    दिल्ली के शिखर सम्मेलन से होगी नये युग की शुरुआत

    24, OCT, 2015, SATURDAY 09:56:18 PM
    Posted by:अन्य

    अशोक बी शर्मा : भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत कर रहा है। इसकी शुरुआत दिल्ली में होने वाले 5 दिवसीय शिखर सम्मेलन से होगी, जिसमें अफ्रीक�

    सेने से नफरत, सनातन पर इनायत?

    23, OCT, 2015, FRIDAY 09:17:15 AM
    Posted by:सुभाष गाताड़े

    पिछले दिनों देश के सुप्रीम कोर्ट ने भी गोवा सरकार के उपरोक्त फैसले पर अपनी मुहर लगाई थी और 'नैतिक पहरेदारी और उसके नाम पर महिलाओं पर हमले करने' की भर्त्स

    मोदी की कठिनाइयां आखिर दूर कैसे हों?

    23, OCT, 2015, FRIDAY 09:09:54 AM
    Posted by:शीतला सिंह

    प्रश्न उठता है कि आज की राजनीतिक आवश्यकताओं के विभाजन की निस्सारता और स्वीकार्यता को जनता तो उस समय भी अपनाने को तैयार नहीं हुई जब यह रक्तपात, हिंसा और �

    Clicking moves right

    ई-पेपर

    हमारे कॉलमिस्ट

    फोटोगैलरी

    ...

    [Message clipped]  View entire message
    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

    0 0
  • 10/26/15--23:49: Thanks Google! You remain user friendly and I use Google since day first.Aesthetics of social realism yet again! নীলকন্ঠ পাখি হারিয়ে গেছে বহুকাল!খোঁজ নেই নীলকন্ঠ পাখির!ছাকুর থাকবে কতক্ষন!মহিষাসুরের তবু পুজো হয়,কিনতু মুলনিবাসী বহজন বহুসংখ্য মানুষ প্রতি মুহুর্ত বধ্য বেদিকী হিংসায়!বাংলা তবু মাতৃতান্ত্রিক!অন্ততঃ মাতৃপক্ষে!দেবি বিসর্জনে যায়,কিন্তু সুন্দরবনের সধবা বিধবাদের রোজই বিসর্জন হচ্ছে!উত্সব শেষপর্যন্ত ধর্ষণ উত্সব এবং বাংলা এখন ধর্ষণ বাংলা!রবীন্দ্র বলেছিলেন সেই আলোকস্তম্ভের কথা,যার নীচে শুধুই অন্ধকার,সেই অন্ধকারে হারিয়ে যাচ্ছে অস্পৃশ্য,ব্রাত্য মেহনতী মানুষ!তাঁরাই অসুররুপেণ বধ্য এই হিন্দুত্বের পুনরুত্থানে মুক্ত বাজারের স্বার্থে,বিদেশী পুংজির স্বার্থে!সুন্দরবন ধ্বংসে আত্মধ্বংস,আফগানিস্তানের ভূমিকম্পে দিল্লীর কাঁপুনি প্রমাণ!

  • https://youtu.be/5O2_LNuW6VE


    Thanks Google! You remain user friendly and I use Google since day first.Aesthetics of social realism yet again!

    It is about the hostory of Indigenous uprisings, insurrections and movements by UNITED INdian Peasantry!Please don`t Miss!

    নীলকন্ঠ পাখি হারিয়ে গেছে বহুকাল!খোঁজ নেই নীলকন্ঠ পাখির!ছাকুর থাকবে কতক্ষন!মহিষাসুরের তবু পুজো হয়,কিনতু মুলনিবাসী বহজন বহুসংখ্য মানুষ প্রতি মুহুর্ত বধ্য বেদিকী হিংসায়!বাংলা তবু মাতৃতান্ত্রিক!অন্ততঃ মাতৃপক্ষে!দেবি বিসর্জনে যায়,কিন্তু সুন্দরবনের সধবা বিধবাদের রোজই বিসর্জন হচ্ছে!উত্সব শেষপর্যন্ত ধর্ষণ উত্সব এবং বাংলা এখন ধর্ষণ বাংলা!রবীন্দ্র বলেছিলেন সেই আলোকস্তম্ভের কথা,যার নীচে শুধুই অন্ধকার,সেই অন্ধকারে হারিয়ে যাচ্ছে অস্পৃশ্য,ব্রাত্য মেহনতী মানুষ!তাঁরাই অসুররুপেণ বধ্য এই হিন্দুত্বের পুনরুত্থানে মুক্ত বাজারের স্বার্থে,বিদেশী পুংজির স্বার্থে!সুন্দরবন ধ্বংসে আত্মধ্বংস,আফগানিস্তানের ভূমিকম্পে দিল্লীর কাঁপুনি প্রমাণ!

    हिंदुत्व के पुनरुत्थान के साथ भारत अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील, हिटलर जैसे हारा, वैसे हमारा लाड़ला झूठा तानाशाह भी हारेगा

    हिंदुत्व के पुनरुत्थान के साथ भारत अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील, हिटलर जैसे हारा, वैसे हमारा लाड़ला झूठा तानाशाह भी हारेगा

    কাঁপিতেছে থর থর বারম্বার!কেয়ামত!

    কাঁপিতেছে থর থর বারম্বার!কেয়ামত!


    Palash Biswas

    Please download each video that I share subjected to unknown problems.Better to see it offline.Please share it as much as possible.I have discussed social realism in reference to Balzac, Mozart, Bach, Shakespeare, Sophocles,Kalidasa,Tagore and Indian Bhakti movement!



    নীলকন্ঠ পাখি হারিয়ে গেছে বহুকাল!খোঁজ নেই নীলকন্ঠ পাখির!ছাকুর থাকবে কতক্ষন!মহিষাসুরের তবু পুজো হয়,কিনতু মুলনিবাসী বহজন বহুসংখ্য মানুষ প্রতি মুহুর্ত বধ্য বেদিকী হিংসায়!


    বাংলা তবু মাতৃতান্ত্রিক!

    অন্ততঃ মাতৃপক্ষে!

    দেবি বিসর্জনে যায়,কিন্তু সুন্দরবনের সধবা বিধবাদের রোজই বিসর্জন হচ্ছে!উত্সব শেষপর্যন্ত ধর্ষণ উত্সব এবং বাংলা এখন ধর্ষণ বাংলা!


    রবীন্দ্র বলেছিলেন সেই আলোকস্তম্ভের কথা,যার নীচে শুধুই অন্ধকার,সেই অন্ধকারে হারিয়ে যাচ্ছে অস্পৃশ্য,ব্রাত্য মেহনতী মানুষ!তাঁরাই অসুররুপেণ বধ্য এই হিন্দুত্বের পুনরুত্থানে মুক্ত বাজারের স্বার্থে,বিদেশী পুংজির স্বার্থে!


    সুন্দরবন ধ্বংসে আত্মধ্বংস,আফগানিস্তানের ভূমিকম্পে দিল্লীর কাঁপুনি প্রমাণ!


    নীলকন্ঠ পাখির খোঁজ নেই,তবু বিসর্জন!সুন্দরবনের সধবা বিধবা মেয়েদের প্রতি মুহুর্তে চলছে বিসর্জন নীলকন্ঠ পাখিদের ছাড়া!সেই সুন্দরবনকে ধ্বংস করে আমরা গড়ছি সভ্যতার উপনিবেশ!এই শাব হিউম্যান পৃথীবীতে গেদখল হারিয়ে যাওয়া মানুষদের কোনো ছিকানা নেই!ঝড় চলছে,ভুমিক্মপ হচ্ছে,সুনামী অব্যাহত!আমারা খবর রাখিনা!আত্মঘাতী বাঙালিধ ধ্বংস করছে সেই সুন্দরবন,সেই মহাঅরণ্য,যে জলপ্রলয় থেকে রক্ষা করছে আমাদের হাজারো বছর ধরে!

    মনুষত্য ও সভ্যতার জন্য এই ধ্ংস লীলা বন্ধ হোক!


    Kejriwal,Please resolve the problems of Safai employees as Indian Democracy has no ears !

    • 3 days ago
    • 29 views
    Please resolve the problems of Safai employees in Delhi as Indian Democracy has no ears for Untouchables, Bahujans!


    It was recorded on last 25th Oct but I could not upload because of unexpected technical unwanted error.Thanks You Tube to fix it.


    You have to see the video if interested.


    I had been camping in Sidar Bans Zone for three days.Newspapers were out of Print for four days and TV channels were engaged in Puja Carinival.But it made no difference as neither newspapers nor the electronic media address the basic issues.Media has nothing to do with public hearing.


    Media has to go beyond Print and newspapers must go beyond news.Indian Express group has been doing exactly this and it does not restrict creative activism.


    I have to discuss the aesthetics of social realism yet again.The brute Capital of Indian caste Class hegemony in Delhi had shown the racist apartheid and apathy against outcaste outclass sanitary workers and the so much so hyped Arvind Kejriwal has been exposed enough.You may understand the phenomenon of development,growth and well ness understanding the phenomenon of imperialst feudal hegemony of racist aparthed patriarchal if you understand economics, history, politics and religion.


    1. The Bhakti movement refers to the theistic devotional trend that emerged in medieval Hinduism. It originated in the seventh-century Tamil south India (now parts of Tamil Nadu and Kerala), and spread northwards.

    2. Bhakti movement - Wikipedia, the free encyclopedia

    3. https://en.wikipedia.org/wiki/Bhakti_movement


    Rabindranath Tagore - Wikipedia, the free encyclopedia

    https://en.wikipedia.org/wiki/Rabindranath_Tagore

    Tagore modernised Bengali art by spurning rigid classical forms and resisting linguistic strictures. His novels, stories, songs, dance-dramas, and essays spoke to ..


    अछूत रवींद्रनाथ का दलित विमर्श!Out caste Tagore Poetry is all about Universal Brotherhood !


    कृपया हस्तक्षेप की मदद करें जनपक्षधर विमर्श और जनसुनवाई जारी 


    रखने के लिए। हस्तक्षेप का अलैक्सा पर अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग 1,09,573 


    और भारत में 11,280 है।



    পুরানো সেই দিনের কথা: Memoirs of a Hindu Daughter of a Muslim Family which gave up BEEF!

    Sabita Babu speaks from the Heart of the India,where Dilon kaa Bantwara naa huaa hai naa Hoga.Please share as much as you can to save India!The Real India,the greatest pilgrimage of humanity merging so many streams of humanity!

    মন্ত্রহীণ,ব্রাত্য,জাতিহারা রবীন্দ্র,রবীন্দ্র সঙ্গীত! Tagore liberated Woman in Music!


    Hence,every woman in either part of Bengal sings rabindra sangeet.If pakistani women learn this music of love,our relations would be better.I hope! Sabita sang for me all the way.



    Sophocles - Wikipedia, the free encyclopedia

    https://en.wikipedia.org/wiki/Sophocles

    Sophocles (/ˈsɒfəkliːz/; Greek: Σοφοκλῆς, Sophoklēs, Ancient Greek: [so.pʰo.klɛ̂ːs]; c. 497/6 – winter 406/5 BC) is one of three ancient Greek tragedians whose plays have survived. His first plays were written later than those of Aeschylus, and earlier than or contemporary with those of Euripides.

    Kālidāsa - Wikipedia, the free encyclopedia

    https://en.wikipedia.org/wiki/Kālidāsa

    Kālidāsa (Sanskrit: कालिदास) was a Classical Sanskrit writer, widely regarded as the greatest poet and dramatist in the Sanskrit language. Much about his life is unknown, only what can be inferred from his poetry and plays. His floruit cannot be dated with precision, but most likely falls within the 5th century AD.



    Honoré de Balzac


    Honoré de Balzac (/ˈbɔːlzæk, ˈbæl-/;]French: [ɔ.nɔ.ʁe d(ə) bal.zak]; 20 May 1799 – 18 August 1850) was a French novelist and playwright. His magnum opus was a sequence of short stories and novels collectively entitled La Comédie Humaine, which presents a panorama of French life in the years after the 1815 Fall of Napoleon Bonaparte.

    https://en.wikipedia.org/wiki/


    Johann Sebastian Bach

    Johann Sebastian Bach[a] (31 March [O.S. 21 March] 1685 – 28 July 1750) was a German composer and musician of the Baroque period. He enriched established German styles through his skill in counterpoint,harmonic and motivic organisation, and the adaptation of rhythms, forms, and textures from abroad, particularly from Italy and France.Bach's compositions include the Brandenburg Concertos, the Goldberg Variations, the Mass in B minor, two Passions, and over three hundredcantatas of which around two hundred survive.His music is revered for its technical command, artistic beauty, and intellectual depth.

    https://en.wikipedia.org/wiki/

    Wolfgang Amadeus Mozart

    Wolfgang Amadeus Mozart (German: [ˈvɔlfɡaŋ amaˈdeːʊs ˈmoːtsaʁt], English see fn.; 27 January 1756 – 5 December 1791), baptised as Johannes Chrysostomus Wolfgangus Theophilus Mozart,[2] was a prolific and influential composer of the Classical era. Born in Salzburg, Mozart showed prodigious ability from his earliest childhood. Already competent on keyboardand violin, he composed from the age of five and performed before European royalty.

    https://en.wikipedia.org/wiki/

    William Shakespeare


    William Shakespeare (/ˈʃeɪkspɪər/;[1] 26 April 1564 (baptised) – 23 April 1616)[nb 1] was an English poet, playwright, and actor, widely regarded as the greatest writer in the English language and the world's pre-eminent dramatist.[2] He is often called England's national poet, and the "Bard of Avon".[3][nb 2] His extant works, including collaborations, consist of approximately 38 plays,[nb 3]154 sonnets, two long narrative poems, and a few other verses, some of uncertain authorship. His plays have been translated into every major living language and are performed more often than those of any other playwright.[4]

    https://en.wikipedia.org/wiki/


    ब्लेअर बाबू ने मान लिया युद्ध अपराध माफी भी मांग ली,हम किस किसको माफ करेंगे?

    गधोंं को चरने की आजादी है और पालतू कुत्तों को खुशहाल जिंदगी जीने की इजाजत है!

    तय करें कि गधा बनेेंगे कि कुत्ता या इंसान!

    लाल नील एका के बिना कयामत का यह मंजर नहीं बदलेगा और अधर्म अपकर्म के अपराधी राष्ट्र और धर्म का नाश ही करेंगे इंसानियत और कायनात की तबाही के साथ साथ!

    जागो जागरण का वक्त है और देखो,सिर्फ गधे रेंक रहे हैं और गाय कहीं रंभा नहीं रही है।

    बेरहम दिल्ली भी थरथर कांपे हैं और तानाशाह भी कांप रहा है !

    पलाश विश्वास


    ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने आज मान लिया कि दुनियाभर में अभूतपूर्व हिंसा औक दसों दिशाओं में दहशतगर्दी खाड़ी युद्ध का नतीजा है और इसके लिए उनने माफी मांग ली।


    हम ऐसा 1989 में सोवियत संघ के पतन से पहले कहते रहे हैं यह सच,आपने सुनने की तकलीफ नहीं की तो हम सोये भी नहीं हैं तब से आजतक।रतजगा हमारा रोजनामचा महायुद्ध का वृतांत है।


    अमेरिका से सावधान खाड़ी युद्ध के दौरान अमर उजाला में खाड़ी डेस्क पर सीएनएन के आंखों देखा हाल के मुकाबले दुनियाभर से और खासतौर पर मध्यपूर्व और यूरोप के साथ साथ लगातार बगदाद और तेहरान और निकोसिया से जुड़े रहने का नतीजा है।


    हम बाहैसियत पत्रकार तेल युद्ध में मरुआंधी के बीच कहीं नहीं थे और न हमने सोवियत संघ के साथ सद्दाम हुसैन के पतन का नजारा देखा।


    फिर भी हम तेलकुंओं की आगसे उसी तरह झुलसते रहे जैसे अछूत कवि नोबेलिया रवींद्र का दलित विमर्श नजरअंदाज है।


    जनसंहार के हथियारों के इराक में होने के दावे के साथ जो युद्ध दुनियाभर के मीडिया पर कब्जे के साथ आधिकारिक सूचना की अनिवार्यता के कानून के मुताबिक अमेरिका,ब्रिटेन और इजराइल ने शुरु किया,उसका सामना हमने खाड़ी युद्ध एक और दो के दौरान वैसे ही किया जैसे कमंडल मंडल में भारत को लगातार मुक्त बाजार में हमने तब्दील होते देखा।


    इसलिए इराक के युद्धस्थल में बंकर से उस युद्ध का आंखों देखा हाल हमने लिखने की जुर्रत की इस समझ के साथ कि भारत हिंदुत्व के पुनरुत्थान के साथ अमेरिकी उपनिवेश में तब्दील है।


    तमाम माध्यमों,विधाओं और भाषाओं में हम 1989 से यही सच कहने लिखने की कोशिश कर रहे हैं।आप न पढ़ते हैं,न सुनते हैं।


    बहरहाल पहलीबार हमारा भी नोटिस लिया जा रहा है।


    जो दोस्त कह रहे थे कि लिखने बोलने से कुछ नहीं होता वे इसपर गौर जरुर करें कि इस देश की फासिस्ट सत्ता एक अदना नाकाम नागरिक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रतता का उल्लंघन करते हुए बार बार उसे कहने लिखने से रोक क्यों रही है।


    सेंसर शिप का नतीजा यह कत्लेआम है जो खाड़ी युद्ध के तेलकुंओं से शुरु हुआ और अब भी जारी है और यह कोई केसरिया सुनामी नहीं है,गौर से परख लें यह तेलकुँओं की आग है जो इस महादेश में सरहदों के आर पार मनुष्यता,सभ्यता और प्रकृति को जला रही है।

    सेंसरशिप अब अभूतपूर्व है।


    लबों को कैद करने में नाकाम गुलामों की हुकूमत अबहिंदुत्व की नंगी तलवार से सर काटने का राजसूय यज्ञ चला रही है।


    फिर वही अभूतपूर्व सेंसर है।हिटलर मार्का।

    हिटलरजैसे हारे ,वैसे हमारा लाड़ला झूठा तानाशाह भी हारेगा।


    हमने अकेले जार्ज बुश को बोलते हुए सुना है और हमने इन्हीं टोनी ब्लेयर महाशय को झूठ पर झूठ बोलते हुए देखा है।


    ब्लेयर बोले हैं तो कभी न कभी जिंदा रहे तो बोलेंगे बुश भी और वे माफी भी मांग लेंगे।


    मनुष्यता,सभ्यता और प्रकृति के कत्लेआम के अपराधी झूठ के सहारे राजकाज चलाते हैं फासिज्म का और इसीलिए सच बोलना मना है।


    हिटलर ने भी वही किया था।


    सच की आंच किसी एक मनुष्य के लगातारमंकी बातों के बहाने झूठ पर झूठ बोलते जाने से खत्म होेती नहीं है।वह सुलगती है जमीन के अंदर ही अंदर।फिर ज्वालामुखी बनकर फटती है हुक्मरान के खिलाफ।वह स्थगित विस्फोट कभी भी संभव है।

    धरती की गहराई में उथल पुथल है तो हिंदकुश में जमीन केअंदर दो सौ मील नीचे शेषनाग ने अंगड़ाईली तो बेरहम दिल्ली भी थरथरा गयी।सबसे सुरक्षित लोग,सत्तावर्ग के लोग,अंधियारे के तमाम सौदागर और नफरता का जहर उगलनेवाले तमाम जहरीले नाग अपने दड़बे से जान बचाने के लिए निकले।


    यह भी नहीं समझते कि चंद पलों की भी मोहलत नहीं मिलती भूकंप में औरसचमुच भूकंप आया तो तबाह होना ही होना है सीमेंट के सारे के सारे तिलिस्म महातिलिस्म किले और राजधानी, मुख्यालय वगैरह वगैरह। हम तो खुले आसमान के नीचे खड़े लोग हैं और उनकी जन्नत तक पहुंचने की हमारी कोई सीढ़ी वगैरह वगैरह नहीं हैं।हम निःशस्त्र हैं।फिरभी निश्चित हार मुंङ बाँए देख मूर्खों के सिपाहसालार गदहों की तरह इंसानियत के जज्बे को कत्ल कर देने का छल कपट प्रपंच सबकुछ आजमा रहे हैं।


    हमारी निगरानी हो रही है पल पल।हम जडो़ं से जुढ़ें हैं अगर और हमारे पांव जमीन पर चिके हों अगर,अगर हम आम जनता के बीच है और उन्हीं की आवाज और चीखों की गूंज कोकला मानते हैं,तो कोई कौशल, कोई दक्षता और कोई तकनीक,कोई निगरानी पकती हुई जमीन की भूमिगत आग को रोक नहीं सकती।


    गधों को खुल्ला छोड़ दीजिये मैदान में तो उन्हें क्या तमीज है कि क्या घास है और क्या लहलहती फसल है।क्या अनाज है,क्या दालें हैं,क्या सब्जियां हैं और क्या फल फूल हैं।वे चरने के लिए आजाद हैं।आम जनता के हाथ में लाठियां भी होनी चाहिए कि गधों को हांककर सही रास्ते पर,सही दिशा में ले जायें।वरना यह लोकतंत्र एक खुल्ला चारागाह है जहां किसिम किसिम के रंग बिरंगे गदहे गंगा यमुना गोदावरी कावेरी ब्रह्मपुत्र और पंजाब से  निकलती पांच नदियों के उपजाऊ मैदान को मरुस्थल में तब्दील कर देंगे और हम कपालभाती,योगाभ्यास ही करते रहेंगे दाने दाने को मोहताज।


    दस दिगंत हिंसा और घृणा के धर्मोन्मादी माहौल को कृपया हिंदुत्व का पुनरुत्थान कहकर आस्थावान आस्थावती नागरिकों और नागरिकाओं की धर्म और आस्था की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का हमन न करें।


    यह अधर्म,यह अपकर्म जो सिरे से अपराधकर्म है,उसका नतीजा ग्रीक ट्रेजेडी है या पिर तेलकुंओं की आग में तेल में फंसे पंख फड़फड़ाता बेगुनाह पंछी है या निष्पाप आईलान का पार्थिव शरीर है समुद्रतट पर चीखता हुआ कि सावधान।


    हालात ताजा कुलमिलाकरयह है कि हमीं लाल तो हमीं नील हैं और हम आपस में बेमतलब हिंदुत्व के इस नर्क में मारामारी करके न सिर्फ लहूलुहान है बल्कि हमारा पसंदीदा जायका इंसानियत और कायनात की बरकतों,नियामतों और रहमतों का खून है।यह कयामती मजर न बदला तो यकीनन न खाने को कुछ होगा।न पहनने को कुछ होगा।न रोटी मिलेगी और न रोजगार।


    हमने चकलाघरों के दल्लाओं के हवाले कर दिया है यह महान देश हमारा।देश दम तोड़ रहा है।देश जल रहा है।दावानल से गिरे हम शिक कबाब बन रहे हैं।फिरभी मुक्तबाजारी महोत्सव में विकास मंत्र जापते हुए हम अपनों के स्वजनों के कत्लेआम के लिए अश्वमेधी फौजों में पैदल कुत्तों की पालतू जिंदगी गुजर बसर कर रहे हैं।जनरल साहेब ने सच ही कह रहे हैं। झूठी पहचान और झूठी शान के तहतहम खुदै को मलाईदार समझते हैं और जूठन चाटते हैं और हमारीमुलायम खाल का कारोबार चलाते हैं किसिम किसिम के दल्ला।दल्लों की बेइंतहा अरब अरब डालर की मुनापावसूली के बीच जाहिर है कि न शिक्षा होगी और न चिकित्सा होगी।


    चारों तरफ गधे रेंक रहे हैं।मनुष्यता सन्नाट बुन रही है और राष्ट्र के विवेक को सुकरात की जहर कीप्याली थमायी जा रही है।


    हम अब कोई वीडियो अपवलोड करने को आजाद नहीं है।न हमारा मेल कहीं जा रहा है और न कोई मेल आ रहा है।आईपीओ घर और दफतर का ब्लाक है।


    आखिरी वीडियो जो हमने रिकार्ड किया है,वह बालजाक के ्ंतिम स्तय की खोज के बारे में है।वाल्तेयर के जला दिये गये रचनासमग्र के बारे में है तोवाख औरमोजार्ट के बारे में है।शेक्सपीअर और कालिदास के सौंदर्यबोध के बारे में भी है।


    सुकरातआज भी जिंदा हैं।उसके हत्यारे नाथुराम गोडसे भी नहीं है।इस दुनिया में कोई उस हत्यारे कोयाद नहीं करता लेकिन हम गोडसे क मंदिर बना रहे हैं।


    गोडसे का भव्य राममंदिर बना रहे हैं।

    वहीं बाबासाहेब को विष्मु का अवतार बनाकर उनके हिंदुत्वकी प्राण प्रतिष्ठा करते हुए संपूर्ण निजीकरण और अबाध विदेशी  पूंजी के हिंदुत्व के नर्क में हम मिथ्या आरक्षण के लिए जाति के नाम पर लड़ रहे हैं।


    और बाबासाहेब,महात्मा ज्योतिबा फूले,नारायण गुरु,लोखंडे,गाडगे बाबा,बसश्वर बाबा,संत तुकाराम,लालन फकीर,हरिचांद गुरुचांद ठाकुर ,चैतन्य महप्रभु,संत तुकाराम,सुर तुलसी कबीर रसखानमीरा गालिब,सिखों के चौदह गुरर.तमाम तीर्तांकरों से लेकर अछूत रवींद्र के भारत तीर्थ के विसर्जन की तैयारी में हैं।


    कृषि खत्म है और किसान आत्महत्या कर रहे हैं तो एकाधिकारववादी बहुराष्ट्रीय वर्चस्व की मनसेंटो चमत्कार और तकनीक,आईटी,प्रोमोटरबिल्डर माफिया राज के अंध घृणासर्वस्व हिंसक नरमेधी सैन्यराष्ट्रवाद से व्यवासाय,उद्योग धंधे हरगिज नहीं बचेंगे।


    संपूर्ण निजीकरण,संपूर्ण विनिवेश और हजारों विदेशी कंपनियों के हितों के मुताबिक बिजनेस फ्रेंडली नस्ली विशुद्धता और अस्पृश्यता और बहिस्कार का राजकाज चलेगा तो राष्ट्रका अवसान होने में देर नहीं।


    हमारी समझ से बाहर है कि संस्थागत संघ परिवार काहिंदुत्व क्या है,रष्ट्र क्या है,राष्ट्रवाद क्या है,धर्म क्या है,आस्था क्या है,कर्म क्या है,स्वदेस क्या है।


    गुरु गोलवलकर हिंदुत्व के महागठबंधन के रचयिता हैं तो बालासाहेब देवरस इंदिरा को देवी दुर्गा का अवतार बता रहे थे,जिसदेवी ने सिखों को असुर और महिषासुर बनाकर रावण दहन की तरह जिंदा जला दिया और संघ परिवार ने विबाजन का सारा पाप गांधी के मत्थे मढ़ दिया।


    हड़प्पा और मोहंजोदोड़ो के विनाश के बाद न हमने भूगोल समझा है और न इतिहास।तो अर्थशास्त्र क्या खाक समझेंगे।


    हम न अपने पुरखों को जानते हैं और न उनकी लड़ाइयों और जीतों के अनंत सिलसिले को जानने समझने की कोशिस करते हैं।


    हम अपनी अपनी हैसियत औरपहचान के दायरे में कैद लोगदरअसल जनरल साहेब के कहे पालतू कुत्ते ही हैं,जिनके जीने मरने का किसी को फर्क नहीं पड़ता।


    हमें भी नहीं।


    गौर से सुन लीजिये कि कहीं गायें रंभा नहीं रही है और गोरक्षा आंदोलन चरम पर है।


    भारत के गांवों में खेत खलिहानबेदखल सीमेंट के जंगल में तब्दील हैं और कहीं गोबर मिलता नहीं है और पानी की तरह मिट्टी भी खरीदने कीनौबत है।


    यह अभूतपूर्व हिसां की सुनामी है।

    यह अभूतपूर्व दहशतगर्दी है।

    यह बलात्कार सुनामी है पितृसत्ता की।

    यह हमारे बंधुआ बच्चों को जिबह करने का गिलोटिन है।


    कत्लेाम के लिए माफी मांगते रहने और नैतिकता और ईमानदारी का पाठ पढञनेवालों को किसी कत्ल या नरसंहार के मामले में सजा नहीं हो सकती।


    वियतनाम के कसाई हेनरी किसिंजर को नोबेल शांति पुरस्कार मिल गया तो क्या इतिहास बदल जायेगा।


    गुजरात के नरसंहार या भोपाल गैस त्रासदी,या सिखों के कत्लेआम या देश भर में दंगा फसाद के कारीगरों को नोबेल मिल गया जैसे सत्ता के लिए हुकूमत के लिए उन्हें जनादेश मिल गया और फिर फिर जनादेश की रचना प्रकिया में वे अपने सौंदर्यबोध के मुताबिक देश में आपदाएं रच रहे हैं तो क्या वे शांति दूत मान लिये जायेंगे,यह समझनेवाली बात है।


    महान तानाशाह इतिहास के कचरे में त्बील हो जाते हैं जैसे हाल में हिटलर और मुसोलिनी,जार्ज बुश और टोनी ब्लेयर हो गये।


    जिस शासक को इतिहास भूगोल राजनीति राजनय और अर्थव्यवस्था की तमीज नहीं है और जो खुलती खिड़कियों के खड़कने से खड़खड़ाता है और असुरक्षाबोध में दमन और सैन्यतंत्र,हथियारों की होड़,युद्ध और गृहयुद्ध रचकर सिर्फ बेइंतहा झूठ,नफरतऔर तबाही के राष्ट्रद्रोही राजकाज के जरिये गामा पहलवान है,कोई न कोई छुपा रुस्तम कहीं से आकर,आसमान या जमीन फोड़कर उसे चारों खाने चित्त कर देगा,इस उम्मीद में कुत्ते बनकर हम गुजर बसर को जिंदगी मान लेगें तो कयामत का यहमंजर हरगिज बदलनेवाला नहीं है।


    अलीबाबा और चालीस चोर की कथा आखिर लोकतंत्र नहीं है।

    हम मनुष्य नहीं हैं तो नागरिक भी नहीं।न कोई हमारा देश है।


    भेड़ धंसान और धनपशुओं का बाहुबल माफियातंत्र का वोटतंत्र

    कोई लोकतंत्र नहीं है।न होता है।



    ये राष्ट्रद्रोही जलवायु की हत्या कर रहे हैं।

    मौसम को बदल रहे हैं।

    तापमान बदल रहे हैं।

    खेत खलिहान कारखाने कारोबार उद्योगधंधे महाश्मशान में तब्दील कर रहे है।


    देश को मृत्यु उपत्यका और गैस चैंबर में तब्दील करनेवाले कालेधन के सेनसेक्सी ये भालू और साँढ़ ही ग्लेशियरों को मरुस्थल में तब्दील कर रहे हैं और समुंदर में ज्वालामुखी पैदा करने के साथ साथ सारे के सारे समुद्रतट को रेडियोएक्टिव बनाकर पूरे देश को डूब में तब्दील कर रहे हैं और वे ही किसानों,मेहनतकशों और लाल नील आम जनता का कत्लेआम कर रहे हैं पल छिन पल छिन।


    वे लोग ही जल जंगल जमीन नागरिकाता नागरिक मानव मौलिक अधिकारों और संविदान के साथ साथ राष्ट्र की एकता ,अखंडता और संप्रभुता के कातिल हैं।


    बेरहम दिल्ली के भूकंप में थरथराये लोगों की तरह नंगी तलवारों की चमक दमक से पसीना पसीना होकर हमारी यह शुतुरमुर्ग प्रजाति मनुष्यता और प्रकृति के पक्ष में खड़े हो ही नहीं सकते।


    खड़े होने के लिए रीढ़ चाहिए।


    कीड़ों मकोड़ों की रीढ़ होती नहीं है वे इसीतर दबकर कुचलकर जीते हैं औरबेमौत मारे जाते हैं।

    किसी ने कुत्ता कहा तो गुनाह नहीं है।


    आज सुबह आठ बजे और अभी अभी आदरणीय आनंद तेलतुंबड़े से लंबी चौड़ी बातें हुईं और हम सहमत हुए कि यह सही वक्त है लाल नील रंगों के विलय का,जिसके बिना हम फासिज्म का मुकाबला हरगिज नहीं कर सकते।


    केसरिया वर्चस्व मनुस्मृति शासन है और बहुजन समाज फिर वही सर्वहारा है।जो आबादी का निनानब्वे फीसद है।


    जो फिजां बिगड़ी है इस भारत तीर्थ की,जो कयामत का मंजर है, उसे बदलने के लिए जाति को खत्म करना सबसे जरुरी काम है।


    यह जितनी जल्दी हो उतनी जल्दी अंधियारे का यह कारोबार,हिंदू धर्म और इस देश की आम जनता की भावनाओं और आस्था से खिलवाड़ करने का यह खुल्ला खेल फर्रूखाबादी खत्म होगा।


    हमारा मानना है कि इस देश की निनानब्वे फीसद आम जनता की मोर्चाबंदी के बिना यह मुक्तबाजारी अधर्म धर्म का नाश तो करेगा सबसे पहले,उससे ज्यादा हजारों साल का इतिहास और हमारी अमन चैन भाईचारा और सभ्यता का सत्यानाश तय है।


    अर्थव्यवस्था तो बची नहीं है।

    उत्पादन प्रणाली खत्म हैं तो उत्पादकों के आपसी भाईचारे से फिजां फिर अमनचैन की होने की दूर दूर तक कोई संभावना नहीं है।आप भले ही कुत्तों की तरह पालतू बनकर खुशहाल जिंदगी जी लें।


    लंदन. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इस्लामिक स्टेट के बढ़ते असर के लिए इराक वॉर को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने पहली बार इराक वॉर को लेकर माफी भी मांगी है। ब्लेयर ने कहा कि सद्दाम को सत्ता से उखाड़ फेंकने वालों में शामिल देशों को इराक के मौजूद हालात के लिए कुछ जिम्मेदारी तो लेनी होगी, क्योंकि इसी संघर्ष के चलते आईएसआईएस वजूद में आया। बता दें, केमिकल वीपन के शक में 2003 में अमेरिका और ब्रिटेन समेत गठबंधन सेनाओं ने इराक पर हमला किया था।

    'सीरिया जैसे होते हालात'

    हालांकि, ब्लेयर ने इराक पर हमले का बचाव करते हुए ये भी कहा कि सद्दाम को अगर सत्ता से बेदखल नहीं किया गया होता तो वहां सीरिया जैसे हालात होते। टोनी ब्लेयर का ये बयान सर जॉन चिलकोट के उस एलान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने युद्ध को लेकर अपनी जांच के पूरी होने के टाइमटेबल का जिक्र किया है।

    क्या कहा इंटरव्यू में?

    अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन को दिए गए एक इंटरव्यू में टोनी ने कहा कि वे जंग से जुड़े कई मसलों के लिए माफी मांगते हैं। इंटरव्यू के दौरान रिपोर्टर फरीद जकारिया ने सवाल किया था कि क्या इराक वॉर एक गलती थी। इस पर ब्लेयर ने कहा, ''मैं उस बात के लिए माफी मांगता हूं कि इंटेलिजेंस के जरिए गलत जानकारी मिली थी। साथ ही, प्लानिंग को लेकर भी गलतियां हुई थीं।'' उन्होंने कहा,'' निश्चित तौर पर हमसे वहां के हालात को समझने में गलती हुई कि इस शासन को उखाड़ फेंकने के बाद कैसे हालात बनेंगे।''

    इराक वॉर में हुआ नुकसान

    इराक वॉर में अमेरिकी सेना के साथ 45,000 ब्रिटिश जवान शामिल थे। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष में 10 हजार इराकी नागरकि, 4000 से ज्यादा अमेरिकी जवान और 179 ब्रिटिश सर्विस के सदस्य मारे गए थे।

    2002 में पड़ी ISIS की नींव

    तौहिद वा अल-जिहाद के तौर पर जॉर्डन के अबु मुसाद अल-जरकावी ने 2002 में ही आईएसआईएस की नींव रख दी थी। एक साल बाद 2003 में इराक में अमेरिकी गठबंधन सेना के हमले के बाद जरकावी ने ओसामा बिन लादेन के प्रति वफादारी की शपथ ली और अलकायदा से जुड़ गया। 2006 में जरकावी की मौत के बाद अलकायदा ने इसे सहयोगी संगठन के तौर पर इस्लामिक स्टेट इन इराक (आईएसआई) का नाम दिया। 2013 में आईएसआईएस के मौजूदा चीफ अबु बक्र अल बगदादी ने इस आतंकी संगठन में इराक के साथ सीरिया को भी शामिल कर लिया और इसका नाम आईएसआईएस हो गया।

    बुश ने भी मानी थी गलती

    अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने भी अपना कार्यकाल खत्म होने के दौरान इस बात को माना था कि इराक वॉर उनके कार्यकाल की बड़ी गलतियों में से एक है। बुश ने अपनी किताब में भी इस बात जिक्र किया है। किताब में दिए अंश के मुताबिक, जब उन्हें इस बात का पता चला कि इराक में कोई केमिकल वीपन नहीं है तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वो एक डूबते जहाज के कैप्टन हैं।

    হনুর লন্কায় লক্ষ্মীরে পুজিবে ক্যামনে,কি আগুন কি আগুন!দ্যাকো,হাটে বাজারে আগুন নেগেচে!

    সুন্দরবন ধ্বংস ,ভাবিও কি পরিণাম!হাতে গরম প্রমাণ অশণিসংকেতের! জাগো!হিমালয় রক্তাক্ত,নেপাল কি উত্তরকাশী কতদুরে! দিল্লী কাঁপিতেছে থর থর বারম্বার!কেয়ামত!

    ঠাকুর গ্যাচে জলে,দ্যাশে আগুন নেগেচে!

    ব্যবসা বাণিজ্য লাটে,ব্যাটা বিশ্বকর্মাকে চ্যাঙায়ে বিদায দিনু!জীবন জীবিকা শ্যাষ,উন্নযন আছে,চাষবাস শ্যাষ ,শিল্প লবডন্কা!


    ওঠ ছ্যামড়ি ওঠ,ভিন দ্যাশে যাইবার লগে ট্রেইন ধরার লাগে!

    জেনারেল সাহেভ গলত সলত কিচু কহিবেন,তাহা কি হইতে পারে- নির্লজ্জ যাহারা কুকুরেরও অধম,উচ্ছিষ্টে যাহাদের জীবন যাপন তাহারা কোন কালে ডাক ছাড়িয়া বাঘ ভাল্লুকের মত প্রতিবাদ করিবে,ইহা স্বপ্নেও ভাবিও না!বক্তব্যের সত্যতা নিয়া সন্দেহ নাই!


    মদ কি কম পড়িয়াচে পাড়ায় পাড়ায় দেশি মদের দোকান সহ বার রেস্তরাঁ ঠেক সত্বেও,ভ্যাভ্যা কিরা কাঁদিযা কাটিয়া আত্মজীবনী তে মগ্ন হইবার আগে আত্মঘাতী জাতি ভাবিও!


    পলাশ বিশ্বাস

    সুন্দরবন ধ্বংস ,ভাবিও কি পরিণাম!হাতে গরম প্রমাণ অশণিসংকেতের!জাগো!

    হিমালয় রক্তাক্ত,নেপাল কি উত্তরকাশী কতদুরে!দিল্লী কাঁপিতেছে থর থর বারম্বার!

    কেঁপে উঠল দেশের রাজধানী দিল্লি। জম্মু -কাশ্মীর সহ উত্তর ভারতের নানা অংশে জোরালো ভূমিকম্প। রিখটার স্কেলে কম্পনের মাত্রা ৭.৫। মুম্বইতেও কম্পন অনুভূত হয়। উত্‍পত্তিস্থল হিন্দুকুশ পর্বতমালা। কম্পনের সঙ্গে সঙ্গে আতঙ্কের সৃষ্টি হয়। প্রাথমিকভাবে ক্ষয়ক্ষতি ও হতাহতের খবর পাওয়া যায়নি। কম্পনের খবর পাওয়া গিয়েছে হরিয়ানা, পাঞ্জাবেও।


    সত্যি বড় দুর্গার দর্শন হইল বটেেকখান!

    শ্যাষ বেলায় ধুনুচি নাচে কোমর হেলিয়ে দুলিয়ে ঠাকুর যকন জলে যাইব কি যাইব না,যকন মা জননীরা,ধর্ষণ আতন্কিত বুনরা সিন্দুর ক্যালার জোগাড় করত্যাছে কি রকেট ক্যাপসুল নিবেদিত শারদোত্সবে অবশেষে বহু বিজ্ঞাপিতসত্যি বড় দুর্গার দর্শন লাগিয়া ছাড়পত্র মিলিল এবং পুজা শ্যাষে ভিন দ্যাশে রুজি রুটির খৌঁজে শ্যালদা কিংবা কোলকাতা কিংবা হাওড়া অথবা শালিমার হইতে ট্রেইন ধরিবার হাগুতাড়া সত্বেও কি হুজুগ কি হুজুগ!দুগ্গা ঠকরুন মারিতেই জানেন,বাঁচাইব না কোনো হালায়!


    মহিষাসুর মর্দিনী বাপের বাড়ি ছাইড়্যা কৈলাসে চলিলেন বা থাকিলেন সত্যি বড় দুর্গার মত ছোড দুর্গাদের বিসর্জনের পরও,কিন্তু মহিষাসুর বধ চলত্যাছে রম রমারম!মর মর মর!জাতের নামে বজ্জাতি কর আর মর঍


    রমণ ও ধর্ষণে মম করতাছে জাপানী তেল সর্বত্র!

    দ্যাকতে লাগে কি কোন ব্যাটা বেটি কতখান কাট ভাইঙ্গা শ্যাষ করচে!


    মহুষাসুরের পুজো হয় দুর্গার সাথে সাথে,কিন্তু যে গুচ্ছের অসুর নিধন হইতাছে বাজারে ঘাটে,জীবন জীবিকায়,সে ব্যাটাদের পোঁদে লাথি ছাড়া কিচ্ছুই জোটে বিল্যা মনে ধরতেছি না কিচুই বটেক!


    কোন একখান জেনারেল সাহেব কহিলেন কুকুর মরিল কি মারিল,কি বা আসে যায়!কুকুরেরও অধম যাহারা,গোলাম প্রভুদের,তাহাদের কাহিনী কহতব্য নয়!


    জেনারেল সাহেভ গলত সলত কিচু কহিবেন,তাহা কি হইতে পারে- নির্লজ্জ যাহারা কুকুরেরও অধম,উচ্ছিষ্টে যাহাদের জীবন যাপন তাহারা কোন কালে ডাক ছাড়িয়া বাঘ ভাল্লুকের মত প্রতিবাদ করিবে,ইহা স্বপ্নেও ভাবিও না!বক্তব্যের সত্যতা নিয়া সন্দেহ নাই!


    মদ কি কম পড়িয়াচে পাড়ায় পাড়ায় দেশি মদের দোকান সহ বার রেস্তরাঁ ঠেক সত্বেও,ভ্যাভ্যা কিরা কাঁদিযা কাটিয়া আত্মজীবনী তে মগ্ন হইবার আগে আত্মঘাতী জাতি ভাবিও!


    এমনডা হইলে,অসুর বধের ল্যাঠা ববে ই চুকে বুকে যাইত!


    হনুর লন্কায় লক্ষ্মীরে পুজিবে ক্যামনে,কি আগুন কি আগুন!

    দ্যাকো,হাটে বাজারে আগুন নেগেচে!

    ঠাকুর গ্যাচে জলে,দ্যাশে আগুন নেগেচে!


    ব্যবসা বাণিজ্য লাটে,ব্যাটা বিশ্বকর্মাকে চ্যাঙায়ে বিদায দিনু!

    জীবন জীবিকা শ্যাষ,উন্নযন আছে,চাষবাস শ্যাষ ,শিল্প লবডন্কা!

    ওঠ ছ্যামড়ি ওঠ,ভিন দ্যাশে যাইবাল লগে ট্রেইন ধরার লাগে!

    সংবাদে প্রকাশঃ

    ধনদেবীর পুজোয় আকাশছোঁয়া বাজার দর,চব্বিশ ঘন্টা উবাচঃ


    ধনদেবীর পুজোয় আকাশছোঁয়া বাজার দর


    আজ কোজাগরী লক্ষ্মী পুজো। ধনদেবীর আরাধনায় মেতেছেন রাজ্যবাসী। বারোয়ারি প্যান্ডেলের পাশাপাশি বাড়িতে বাড়িতেও চলছে লক্ষ্মী  আরাধনার প্রস্তুতি। তবে ফুল, ফল থেকে শুরু করে সবজি। সবকিছুরই দাম চড়া হওয়ায় বাজারে গিয়ে হাত পুড়ছে মধ্যবিত্ত বাঙালির।

    সবে দুর্গাপুজো গিয়েছে। খরচও হয়েছে বেশ। এই পরিস্থিতিতে মাসের শেষে লক্ষ্মীপুজো, মাথা ব্যথা বাড়িয়েছে মধ্যবিত্তদের। অগ্নিমূল্য বাজারদর৷

    এবার এক নজরে দেখে নিন বাজার দরগুলি............

    আপেল ১০০-১২০টাকা কিলো, মুসাম্বি ১০-১২ টাকা জোড়া, কলা ৮৫ টাকা প্রতি ডজন, পানিফল ৫০টাকা কিলো, পেয়ারা ৬০-৮০ টাকা কিলো এবং ৩০-৪০ টাকা দরে বিক্রি হচ্ছে নারকেল।

    ফলের বাজার দরের পাশাপাশি আকাশছোঁয়া দাম ডালের। মুগ ডাল ১৩০-১৫০ টাকা, মুসুর ডাল ১২০টাকা, বিউলির ডাল ১৫০টাকা এবং ১৮০ টাকা কেজি দরে বিকোচ্ছে অরহর ডাল।

    বাজার আগুন হওয়ার ফলে রীতিমত নাজেহাল বাঙালি। কিন্তু ধনদেবীকে তুষ্ট করার জন্য আপাতত দরের দিকে মাথা না ঘামিয়ে অবাধে চলছে কেনা বেচা।

    চব্বিশ ঘন্টা উবাচঃ

    পাগলা মায়ের আবার হিন্দু মুসলিম কি?পাগলা মায়ের আবার হিন্দু মুসলিম কি?

    "আমি চাই হিন্দু নেতার সালমা খাতুন পুত্রবধু, আমি চাই ধর্ম বলতে মানুষ বুঝবে মানুষ শুধু..."। কুমারী রূপে মহাঅষ্টমীতে পুজিত হবেন মুসলিম ঘরের কন্যা বর্ষা।   

    আক্রান্ত ধুলিয়ান পুরসভার প্রাক্তন চেয়ারম্যান সফর আলি

    মুর্শিদাবাদে ফের দুষ্কৃতী দৌরাত্ম্য। গত রাতে আক্রান্ত ধুলিয়ান পুরসভার প্রাক্তন চেয়ারম্যান সফর আলি। রাতের অন্ধকারে কংগ্রেস নেতার বাড়ি ঘিরে ধরে আক্রমন চালায় দুষ্কৃতী দল। বাধা দিতে গেলে মারধর করা হয় সফর আলিকে। ছুরি দিয়ে আঘাত করা হয় তাঁকে। গুরুতর জখম সফর ভর্তি রয়েছেন মুর্শিদাবাদ মেডিক্যাল কলেজে।

    গ্রামের বাড়ির পুজোয় মিরিটিতে রাষ্ট্রপতি প্রণব মুখোপাধ্যায়গ্রামের বাড়ির পুজোয় মিরিটিতে রাষ্ট্রপতি প্রণব মুখোপাধ্যায়

    গ্রামের বাড়ির পুজোয় মিরিটিতে রাষ্ট্রপতি প্রণব মুখোপাধ্যায়। গতকাল সন্ধেয় পৌছন মিরিটির বাড়িতে। হাজারো প্রটোকলের মাঝেও বাড়ির পুজোয় চেনা ভূমিকায় রাষ্ট্রপতি। সপ্তমীর সকাল থেকে ব্যস্ত পুজোর কাজে।   

    বোধনের দিনেই বিসর্জনের বাজনা বাজল নদীয়ায় বোধনের দিনেই বিসর্জনের বাজনা বাজল নদীয়ায়

    বোধনের দিনেই বিসর্জনের বাজনা। মহিলার অস্বাভাবিক মৃত্যুকে ঘিরে উত্তেজনা ছড়াল নদিয়ার চাকদহের যাত্রাপুরে। খুন করে ঝুলিয়ে দেওয়ার অভিযোগে শ্বশুরবাড়িতে আগুন লাগিয়ে দিল উত্তেজিত জনতা।

    ষষ্ঠীতেই বিসর্জন হয়ে গেল দেবী দুর্গার ষষ্ঠীতেই বিসর্জন হয়ে গেল দেবী দুর্গার

    মহাপঞ্চমীতে দর্শনার্থীদের ঢল নেমেছিল। আর মহাষষ্ঠীর ভোরেই আমূল বদলে গেল ছবিটা। পুড়ে ছাই হয়ে গেল বার্নপুরের রামবাঁধের পুজো মণ্ডপ। ষষ্ঠীতেই দেবীর বিসর্জন।

    মালদার শুধু আমই খাবেন? সেরা পুজোগুলো দেখবেন না?মালদার শুধু আমই খাবেন? সেরা পুজোগুলো দেখবেন না?

    শুধু মালদার আমই খাবেন? আর মালদার ঠাকুর দেখবেন না! হয় নাকি? হয়তো আপনি মালদা থেকে অনেকদূরে। বাড়ি ছেড়ে রয়েছেন অনেকদূরে। কিন্তু আপনার মন পড়ে আছে, আপনার জেলার পুজোতে। তাই আপনার মন ভাল করব আমরা। মালদার পুজোকেই এনে দিয়েছি আপনার হাতের মুঠোয়।

    স্নান করতে গিয়ে সমুদ্রে তলিয়ে গেল খড়গপুর আইআইটির দুই ছাত্রস্নান করতে গিয়ে সমুদ্রে তলিয়ে গেল খড়গপুর আইআইটির দুই ছাত্র

    পঞ্চমীর দিনে একটি মর্মান্তিক দুর্ঘটনা ঘটল দীঘায়। পুলিস সুত্রে জানা গেছে, ক্ষণিতা ঘাটে স্নানে নেমে তলিয়ে গেলেন খড়গপুর আইআইটির-র চতুর্থ বর্ষের দুই ছাত্র। নিহতদের মধ্যে রোহিত ত্রিপাঠি মধ্যপ্রদেশের ভোপালের বাসিন্দা। অনিরুদ্ধ কুমার রাজুর বাড়ি উত্তরাখণ্ডে। স্থানীয় সুত্র থেকে জানা গেছে, পুজোর ছুটি উপভোগ করতে দীঘায় আসেন খড়গপুর আইআইটির-র চতুর্থ বর্ষের ৮ জন ছাত্র। ছুটিতে এসে দীঘার সমুদ্রে স্নান করতে যান তাঁরা। ক্ষণিতা ঘাটে স্নানে নেমে হঠাৎই তলিয়ে যান অনিরুদ্ধ কুমার রাজু এবং রোহিত ত্রিপাঠি। ঘটনার তদন্তে নেমেছে পুলিস। বিস্তারিত খবর কিছু পরে......  

    চিকিৎসায় গাফিলতির অভিযোগে ফের আক্রান্ত চিকিৎসকচিকিৎসায় গাফিলতির অভিযোগে ফের আক্রান্ত চিকিৎসক

    চিকিত্‍সায় গাফিলতির অভিযোগে ফের ডাক্তারকে মারধরের ঘটনা। ঘটনাটি ঘটেছে দক্ষিণ দিনাজপুরের গঙ্গারামপুরে। ওই এলকার কালদিঘি হাসপাতালে আক্রান্ত চিকিত্‍সক। গতকাল সন্ধেবেলা বাড়ি ফেরার পথে দুই সাইকেল আরোহীকে লরি ধাক্কা মারে।

    আসানসোলে নতুন মেয়রের শপথে গড়হাজির প্রাক্তন মেয়র  আসানসোলে নতুন মেয়রের শপথে গড়হাজির প্রাক্তন মেয়র

    আসানসোল পুরসভার মেয়র পদে আজ শপথ নিলেন তৃণমূল কাউন্সিলর জিতেন্দ্র কুমার তেওয়ারি। আজ সকালে রবীন্দ্রভবনে শপথ নেন আসানসোল পুর নিগমের সদ্যানির্বাচিত ১০০জন কাউন্সিলর।

    দমদমে পেট্রোল পাম্পের কাছে ট্রান্সফর্মার ফেটে ভয়াবহ আগুন, দমকলের স্পেশাল ফায়ার টেন্ডারের প্রচেষ্টায় আগুন নিভল দমদমে পেট্রোল পাম্পের কাছে ট্রান্সফর্মার ফেটে ভয়াবহ আগুন, দমকলের স্পেশাল ফায়ার টেন্ডারের প্রচেষ্টায় আগুন নিভল

    দমকলের ৭টি ইঞ্জিন ও স্পেশাল ফায়ার টেন্ডারের সাহায্যে নিয়ন্ত্রণে আগুন। বহুতল ও পেট্রোল পাম্পে আগুন ছড়িয়ে পরার আর কোনও আশঙ্কা নেই বলে দাবি দমকলের। দমদমের সেন্ট্রাল জেল মোড়ের  কাছে পেট্রোল পাম্প লাগোয়া ট্রান্সফর্মারে আগুন। সেই আগুন ছড়িয়ে পরেছে ওই অঞ্চলের একটি বহুতলে। স্থানীয় বাসিন্দারা মনে করছেন ওই বহুতলে আটকে থাকতে পারেন অনেক মানুষ। আতঙ্কে জীবন বাঁচাতে বহুতল থেকে রাস্তায় নেমে এসেছেন বাসিন্দারা।

    ডাইনি অপবাদে হাত-পা বেঁধে আদিবাসী মহিলাকে পিটিয়ে মারার ঘটনায় শিহরিত গোটা বাংলাডাইনি অপবাদে হাত-পা বেঁধে আদিবাসী মহিলাকে পিটিয়ে মারার ঘটনায় শিহরিত গোটা বাংলা

    দক্ষিণ দিনাজপুরে ডাইনি অপবাদে হাত-পা বেঁধে আদিবাসী মহিলাকে পিটিয়ে মারার ঘটনায় শিহরিত গোটা বাংলা। এটাই প্রথম নয়, পরিসংখ্যান বলছে গত দু মাসে এরকম প্রায় পাঁচটি ঘটনা ঘটেছে এরাজ্যে। বীরভূমের বোলপুরে ডাইনি সন্দেহে একই পরিবারের চার মহিলাকে বেধড়ক মারধর করা হয়। পশ্চিম মেদিনীপুরে আবার  ডাইনি সন্দেহে পিটিয়ে খুন করা হয় এক বৃদ্ধাকে। নৃশংসতায় পিছিয়ে নেই পুরুলিয়া, বর্ধমানও। জেটগতির যুগে এধরণের বর্বরোচিত ঘটনায় প্রশ্নের মুখে বাংলার শিক্ষা ও সংস্কৃতী।

    হিন্দিভাষী জিতেন্দ্র তিওয়ারিকে আসানসোলের মেয়র করে বিধানসভায় ভালো ফলের আশায় তৃণমূলহিন্দিভাষী জিতেন্দ্র তিওয়ারিকে আসানসোলের মেয়র করে বিধানসভায় ভালো ফলের আশায় তৃণমূল

    আসানসোলের মেয়র ও ডেপুটি মেয়র নির্বাচনে হিন্দিভাষী ও  সংখ্যালঘু ভোটব্যাঙ্ককেই প্রাধান্য দিলেন মমতা বন্দ্যোপাধ্যায়। মেয়র পদে জিতেন্দ্র তিওয়ারির নাম প্রস্তাব করেন প্রাক্তন মেয়র তাপস ব্যানার্জি। আর তাতেই সিলমোহর দেন তৃণমূল নেত্রী। মহিলা ও সংখ্যালঘু মুখ তবাসুম আরাকে ডেপুটি মেয়র করা হয়েছে।ছবারের কাউন্সিলর অমরনাথ চ্যাটার্জি চেয়ারম্যান হচ্ছেন।

    মালদা এখন 'কারগিল', রাতভর গুলিতে মালদার কালিয়াচক আতঙ্কে দিন গুনছে, নিহত ১মালদা এখন 'কারগিল', রাতভর গুলিতে মালদার কালিয়াচক আতঙ্কে দিন গুনছে, নিহত ১

    গুলি, বোমা, খুন শব্দগুলো বড় পরিচিত হয়ে উঠেছে বীরভূমের পাড়ুই থেকে মালদার কালিয়াচক। আবারও প্রকাশ্যে গুলি চলল দুষ্কৃতিদের গোষ্ঠীদ্বন্দ্বের জেরে। মালদার কালিয়াচকে।


    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

    Shame on you Ginnie, Shamless!


    How should be citizen,a woman or a child SAFE in Indian Capital if the Kerala House has been searched in quest of BEEF Menu?


    #Beefgate goes viral beyond mixed Demography in general and it inflicts the Kerala house situated in Indian capital which just recovered from yet another round of tremors which played havoc beyond borders!


    But the greatest calamity of intolerance and violence has struck Indian Nation and the epicenter is New Delhi!

    The President of India intervenes without any response from the governance of Fascism!

    Because Indian State might not bring back Daud or Black Money ,CHHOTA Rajan might be a BADA Catch to boast SAB Kuchh Thik thak Hai as far as rule of law is concerned,but it is anarchy all the round beyond control which kills or attacks humanity,civilization or Nature anywhere anytime!

    Palash Biswas

    How should be citizen,a woman or a child SAFE in Indian Capital if the Kerala House has been searched in quest of BEEF Menu?

    https://youtu.be/5O2_LNuW6VE

    It is about the history of Indigenous uprisings, insurrections and movements by UNITED INdian Peasantry!Please don`t Miss!


    Please download each video that I share subjected to unknown problems.Better to see it offline.Please share it as much as possible.I have discussed social realism in reference to Balzac, Mozart, Bach, Shakespeare, Sophocles,Kalidasa,Tagore and Indian Bhakti movement!


    Please download the Video supporting and explaining the TEXT.It is always better to see video offline to avert technical error and viral infliction.Might be ,you would not be allowed to see it again!

    https://www.youtube.com/watch?v=7sfhK_XOwJk


    1. Beef politics: Kerala CM objects to police raid

    2. by TIMES NOW

    • 4 hours ago

    • 61 views

  • Subscribe to Times Now | Click Here ▻ http://goo.gl/U9ibPb'Download the official TIMES NOW mobile app – Give a missed call ...

    • NEW

    https://www.youtube.com/watch?v=7sfhK_XOwJk

    1. 8:34

    2. "Beef Ularthiyathu" | Tasty Kerala "Beef Fry"

    3. by molly kichen

    • 1 year ago

    • 155,542 views

  • Recipe for Naadan Beef Olathiyathu / Ulathiyathu - Erachi olathiyathu Serves - 4 Total cooking time - 1 hour Recipe source ...

    • HD


    The President of India intervenes without any response from the governance of Fascism!

    ET has printed this report this morning:

    Why is the Prez Worried...



    

    

    In just over a month-and-a-half, a series of incidents, including two killings, have put the spotlight on the growing intolerance in society. Even President Pranab Mukherjee has come out in support of the right to dissent and the need for tolerance. Vasudha Venugopal takes a look...

    THE TRAIL OF INTOLERANCE...

    AUGUST 30

    DHARWAD, KARNATAKA

    Kannada writer MM Kalburgi, 77, was shot dead by two unidentified men.

    His murder raised a storm over threat to free speech.

    Police are probing the suspected role of right-wing elements

    SEPTEMBER 28

    DADRI, UTTAR PRADESH

    50-year-old Mohammad Iqlakh was beaten to death by a mob in Dadri over rumours that he and his family had consumed beef. He and his 22-year-old son were dragged from their house by around 100 villagers and clobbered

    OCTOBER 8

    MUMBAI Pakistani ghazal singer Ghulam Ali's concert in Mumbai was cancelled after the Shiv Sena raised objections

    OCTOBER 12

    MUMBAI Shiv Sena activists poured black paint on journalist & writer Sudheendra Kulkarni in protest against the launch of a book by a former Pak foreign minister

    OCTOBER 19

    MUMBAI A meeting between the Indian & Pakistani cricket board officials was cancelled after Shiv Sena workers stormed BCCI office

    OCTOBER 19,

    NEW DELHI Activists of Hindu Sena, a fringe Hindu outfit, threw ink on Independent MLA from J&K Sheikh Abdul Rashid in protest against the beef party he held in Srinagar earlier this month

    ...WORDS OF CAUTION

    OCTOBER 7

    RASHTRAPATI BHAVAN

    We should not allow the core values of our civilisation to wither away. Our civilisation has celebrated diversity, plurality and promoted and advocated tolerance. These values have kept us together over the centuries. India must remain true to its civilisational values

    OCTOBER 8

    IN AN INTERVIEW TO JORDAN'S PAPER AL GHAD

    We shouldn't permit religion to be used as a mask to satisfy hunger for power and control of some individuals. I agree that leaders of every nation, belief, neighbourhood need to take a clear and public stand against intolerance of any kind

    OCTOBER 12

    AT HEBREW UNIVERSITY OF JERUSALEM, ISRAEL

    India's strength lies in its capacity to blend contradictions into positive affirmations. India is a country held together by strong invisible threads. For us, diversity is an integrating factor

    OCTOBER 19

    AT A FUNCTION IN BIRBHUM DISTRICT, WEST BENGAL

    `Jato Mat Tato Path'. (As there are a number of beliefs, there are a number of ways.) Humanism and pluralism should not be abandoned under any circumstance.

    Is tolerance and acceptance of dissent on the wane. Our collective strength must to be harnessed to resist evil powers in society





    

    



    http://epaperbeta.timesofindia.com/index.aspx?eid=31817&dt=20151027


    I am scared of the linguistics of HATRED all the round and as a society we face degeneration, disorganization and as a Nation,we lose national unity and integrity!


    This morning I watched live on TV the Bihar Political circus of Identity KURUKSHETRA where every citizen of India is predestined to be killed in Chakravuha of Caste System,the racist Apartheid brute,merciless which is the BAJRANGI Culture so loud and agressive these days countrywide!


    Our national leaders and the spokespersons are attacking Beti,Beta,BiBi and MAA!


    Shame on you ginnie, Shamless!


    Because Indian State might not bring back Daud or Black Money ,CHHOTA Rajan might be a BADA Catch to boast SAB Kuchh Thik thak Hai as far as rule of law is concerned,but it is anarchy all the round beyond control which kills or attacks humanity,civilization or Nature anywhere anytime!


    #Beefgate goes viral beyond mixed Demography in general and it inflicts the Kerala house situated in Indian capital which just recovered from yet another round of tremors which played havoc beyond borders!


    Coincidentally,the President of India has been intervening time and again to remind the inherent pluralism and tolerance.But the disease is inflicting the civilization like viral infliction beyond control and humanity should not survive in such circumstances created by shameless politics of religion which has nothing to do with religion ,faith or fundamental right to religion.


    It is greater calamity consisting of personality disorder in our consciousness to make us subhuman without heart and mind.It is quite abnormal.Indian National Capital began the tsunami of unprecedented violence from adjoining Dadri in Uttar Pradesh represented by a Member of Parliament who is the Culture Minister of India and of course,the earthquake did not mean calamity in New Delhi as it had been in Nepal or it has turned out to be in Pakistan or Afghanistan.


    But the greatest calamity of intolernece and violence has struck Indan Nation and the epicenter is New Delhi!


    However we may never know  Casualty Toll in reality in any calamity and we would not be able to watch the TOLL so continuous looming Holocaust,continuous bloodshed amidst continuous partition!

    Thus,Indian Express Reports:

    Kerala House drops 'beef curry' from menu after police raid, MPs protest

    Kerala House, the state guest house in the capital, has removed beef curry from its menu after a little known group lodged a police complaint, an official said.

    hindu sena, hindu sena beef, kerala house, kerala house beef, beef ban, beef issue, delhi news, indian express

    Police officials at the Kerala House canteen on Monday. (Express Photo) -

    Kerala government today asserted that there was no beef being served at Kerala House here and lodged a complaint with Delhi Police over the unauthorised entry of some activists into the state-run guest house even as buffalo meat was removed from the menu.


    Briefing reporters at Kerala House in Delhi, Kerala Chief Secretary Jiji Thomson dismissed claims that beef was served in the canteen there.


    "No. I totally deny it. We have never done it. What they have done is they have given buffalo meat and that is what they term as beef. No cow meat was served," he said.


    He said a complaint has been lodged with Delhi Police over the entry of some activists into Kerala House without taking permission from the Resident Commissioner.


    Delhi CM condemns police action "Yesterday, we were told that some activists have entered without the permission of the Resident Commissioner. We have taken objection to that. We have lodged a complaint with the DCP (of Delhi Police)," he said.


    The Chief Secretary also said that police should have entered with permission yesterday. However, in the light of the events yesterday, Kerala House has temporarily taken buffalo meat off its menu, according to the officials running the canteen.


    Meanwhile, A Sampath, a CPI(M) MP representing Attingal Lok Sabha constituency in Kerala, said that the incident was "humiliating" for the state government.


    "As a member of Parliament, I feel that it is something humiliating to the state government…This (Kerala House) is the property of the Government of Kerala, just like a foreign nation having its embassy here in India. I am not challenging the powers of the Government of India. But what has happened here is highly deplorable. I suspect there might be some political motive behind it," he said. He also asked Kerala government to bring buffalo meat back on the menu.


    Meanwhile, frequent visitors to the canteen at Kerala House expressed their disappointment over the absence of buffalo meat.


    "I visit the restaurant more that once a week to have buffalo meat… But now I am disappointed to find buffalo meat off the menu," said Kerala-based Anu, who is presently residing in Delhi.


    A PCR call complaining about beef curry being served at Kerala House here threw police into a tizzy yesterday and a team had to be sent there to avert any "untoward incident".


    The call was received by the police control room around 4.15 PM, and the caller, claiming to be from a fringe right-wing group, told the police that beef was being served at Kerala House.


    The policemen took no chance and the input was immediately passed on to Parliament Street police station, from where a team was sent to Kerala House to deal with any potential violence. - See more at: http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/kerala-house-removes-beef-curry-from-menu-after-police-raid/#sthash.Vvcp6OGV.dpuf



    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

    0 0


    रागदरबारी के लेखक को विनम्र 

    श्रद्धांजलि 
    Gopal Rathi
    ------------------------------------------- 
    समकालीन कथा-साहित्य में उद्देश्यपूर्ण व्यंग्य लेखन के लिये विख्यात साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल की आज पुण्यतिथि है l आपका जन्म: 31 दिसंबर, 1925 - मृत्यु: 28 अक्टूबर, 2011 को हुई l
    श्रीलाल शुक्ल अंग्रेज़ी, उर्दू, संस्कृत और हिन्दी भाषा के विद्वान थे। श्रीलाल शुक्ल संगीत के शास्त्रीय और सुगम दोनों पक्षों के रसिक-मर्मज्ञ थे। श्रीलाल शुक्ल जी ने गरीबी झेली, संघर्ष किया, मगर उसके विलाप से लेखन को नहीं भरा। उन्हें नई पीढ़ी भी सबसे ज़्यादा पढ़ती है। वे नई पीढ़ी को सबसे अधिक समझने और पढ़ने वाले वरिष्ठ रचनाकारों में से एक रहे। न पढ़ने और लिखने के लिए लोग सैद्धांतिकी बनाते हैं। श्रीलाल जी का लिखना और पढ़ना रुका तो स्वास्थ्य के गंभीर कारणों के चलते। श्रीलाल शुक्ल का व्यक्तित्व बड़ा सहज था। वह हमेशा मुस्कुराकर सबका स्वागत करते थे। लेकिन अपनी बात बिना लाग-लपेट कहते थे। व्यक्तित्व की इसी ख़ूबी के चलते उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए भी व्यवस्था पर करारी चोट करने वाली राग दरबारी जैसी रचना हिंदी साहित्य को दी।
    Gopal Rathi's photo.
    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

    0 0
  • 10/28/15--00:37: https://youtu.be/BFXDZ6-yA-Y #OccupyUGC Wait for #HOK KOLOROB as we stand Divided,Let us unite to save Humanity and Nature! केसरिया सत्ता अब छात्रों को भी नहीं बख्शेगी! आग बोने वाले को अंगार की फ़सल मिलेगी नॉन नेट फेलोशिप : छात्र आंदोलन से घबराई सरकार, आंदोलनरत छात्रों पर भीषण लाठीचार्ज शिक्षा का बाजारीकरण करने पर उतारू केंद्र की मोदी सरकार नॉन नेट फेलोशिप को वापस लेने के… HASTAKSHEP.COM/HINDI-NEWS/NAT…|BY AMALENDU UPADHYAYA रोजगार नहीं है,शिक्षा स्मृतिबद्ध,अब शोध का मौका नहीं देगी,यूजूसी छात्र वृत्ति बंद,अब आरक्षण को लेकर लड़ना बंद भी करो! दोस्तों, पुलिस ने UGC से पचासों शोधार्थियों/स्टूडेंट्स को डिटेन कर कमला नगर थाने में बंद कर रखा है। सैंकड़ो स्टूडेंट्स अभी थाना पहुंच रहे हैं। लड़ाई जारी रहेगी। लाठी से लोग झुकेंगे नहीं। “Condemn the brutal lathi charge on #OccupyUGC protesters. 20 injured, 40 held, join gherao of Kamla Market Police station now if in Delhi” नॉन नेट फेलोशिप को वापस लेने के सरकार के फैसले के खिलाफ UGC पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बरसीं लाठियां!क्योंकि शोध वगैरह से

  • https://youtu.be/BFXDZ6-yA-Y


    #OccupyUGC

    Wait for #HOK KOLOROB as we stand Divided,Let us unite to save Humanity and Nature!

    केसरिया सत्ता अब छात्रों को भी नहीं बख्शेगी!

    आग बोने वाले को अंगार की फ़सल मिलेगी

    नॉन नेट फेलोशिप : छात्र आंदोलन से घबराई सरकार, आंदोलनरत छात्रों पर भीषण लाठीचार्ज

    शिक्षा का बाजारीकरण करने पर उतारू केंद्र की मोदी सरकार नॉन नेट फेलोशिप को वापस लेने के…

    HASTAKSHEP.COM/HINDI-NEWS/NAT…|BY AMALENDU UPADHYAYA



    रोजगार नहीं है,शिक्षा स्मृतिबद्ध,अब शोध का मौका नहीं देगी,यूजूसी छात्र वृत्ति बंद,अब आरक्षण को लेकर लड़ना बंद भी करो!

    दोस्तों, पुलिस ने UGC से पचासों शोधार्थियों/स्टूडेंट्स को डिटेन कर कमला नगर थाने में बंद कर रखा है। सैंकड़ो स्टूडेंट्स अभी थाना पहुंच रहे हैं। लड़ाई जारी रहेगी। लाठी से लोग झुकेंगे नहीं।


    "Condemn the brutal lathi charge on #OccupyUGC protesters. 20 injured, 40 held, join gherao of Kamla Market Police station now if in Delhi"


    नॉन नेट फेलोशिप को वापस लेने के सरकार के फैसले के खिलाफ UGC पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बरसीं लाठियां!क्योंकि शोध वगैरह से संघियों का कोई लेना-देना नहीं होता।

    संघ प्रवक्ता के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता बने राम माधव ने कहा है कि 'अगर साहित्यकारों को राजनीति करनी है तो उन्हें घोषित तौर पर राजनीति करनी चाहिए.'

    राम माधव जी ये देश में बुद्धिजीवियों की हत्या व बढ़ रही सांप्रदायिक असहिष्णुता के खिलाफ घोषित तौर पर राजनीति है, ये राजनीति और बढ़ेगी, सावधान हो जाओ.

    पलाश विश्वास

    दम है कितना दमन में तेरे, देख लिया फिर देखेंगे?-चंचल जी

    https://t.co/FnGhCNXC1O

    ‪#‎OccupyUGC‬

    यूजीसी भवन पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में सत्तर के दशक में बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष चंचल कुमार के विचार :

    Chanchal Bhu


    छात्रों के अधिकारों में कटौती कर कर के कोइ भी सरकार ज़िंदा नहीं रह सकती । इतिहास गवाह है । आज जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ जो कुछ भी हुआ कल पूरे देश के छात्र जे यन यु के साथ खड़े मिलेंगे ।

    दम है कितना दमन में तेरे ,देख लिया फिर देखेंगे ।


    लाड़ले तानाशाह, जान बाद में देना, पहले ये बता दे आरक्षण को खतरा किससे है,जो जान की बाजी लगा रहा है?

    Please download the videos and see it offline!In new Delhi,‪#‎OccupyUGC‬A sea of protestors has reached Kamla Market Police Station and police has released all of us. Red salute to students' movements.

    आशुतोष कुमार ने लिखा हैःसोशल मीडिया से खबर मिल रही है कि यूजीसी पर आज हुए लाठीचार्ज में छात्रसंघ अध्यक्ष सहित कई लड़कियां लड़के बुरी तरह घायल हुए है। खाली हाथ बैठे गीत गा रहे बच्चों से इतना भय? क्या दिल्ली पुलिस के पास बीफ रेड करने और बच्चों पर लाठी भांजने के सिवा कोई काम नहीं रह गया है ?

    "जब नाश मनुज पर छाता है / पहले विवेक मर जाता है"

    Waiting for #HOK KOLORAB yet again in response!as we stand Divided,Let us unite to save Humanity and Nature!

    In seventies we were rooted in ground.We were deep rooted in Indian peasantry.We were not vertically divided and had been engaged in the quest of knowledge.

    The latest status,RSS governance of fascism banks on youth and students converted to Bajrangi Brigade which would be allowed to break in foreign embassies including US ,Russian and Arabian embassies sooner or later!

    Scientists have joined us.Let it be #HOK Kolorob all the way.Students from South,West and North stand united rock solid.May the East stand detched?Let it be #HOK Kolorob!

    Meanwhile,Indian Express reports:

    In national interest, scrap quota in higher education institutions: Supreme Court

    Emphasising what the apex court held 27 years ago, the bench said it is now "inclined" to convey the same message to the central and state governments over reservation in institutions of higher education.

    It is high time,let us unite because quota and reservation disabled in Free Market which divided us.Now Let it be #HOK Kolorob all the way!

    युवाशक्ति ही देश,मनुष्यता सभ्यता और प्रकृति को बचा सकती है,छात्रयुवा एकता देश की एकता और अखंडता के लिए अनिवार्य है वरनाः

    कोई आश्चर्य नहीं कि कल देश भर के ‪#‎किसान‬शहरों के किनारे घर बनाते या फिर‪#‎पत्थर‬तोड़ते नजर आयेंगे। https://t.co/X1ngPAzPN4

    ‪#‎Smartcity‬

    हम सत्तर दशक के छात्र हैं और हम मंडल कमंडल की लड़ाई में उलझे नहीं और न हमने आरक्षण या पहचान और धर्म पर ध्यान बंटाया।

    इस आलेख के साथ नवारुण दा के बोल हैं वीडियो में जिसे सुनकर देखकर अंदाजा लगा सकते हैं कि इस फर्जी केसरिया सुनामी के आत्मध्वंस के मुकाबले सत्तर दशक क्या और कैसा रहा है।


    जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में जो छात्र सड़कों पर उतरे वे जातियों और धर्मों में,राजनीतिक दलों में बिखर गये और देश का छात्रआंदोलन खत्म हो गया।


    सत्ता को अब तानाशाही में बदलने के खिलाफ  किसी छात्र युवा का खून नहीं उबलता है क्योंकि शिक्षा अब नोट्स है या फिर आब्जेक्टिव प्रश्न।

    उच्च शिक्षा और शोध को तिलांजलि दी गयी है।

    शिक्षा अब कमोडिटी है।

    शिक्षा अब क्रयशक्ति का मामला है अबाध विदेशी पूंजी और विदेशी हितों में चप्पा चप्पा बिके हुए देश में।

    शिक्षा अब या तो हिंदुत्व का नरसंहारी एजंडा है या फिर नालेज इकोनामी और आरक्षण का फंडा छात्रो को विकलांग कबंध बनाने का आईपीएल आयोजन है।

    छात्र समाज और युवाशक्ति के इसी विखंडन की वजह से यह देश बजरंगियों का अनंत आखेटस्थल बनाये हुए हैंतो युवा और छात्र बी प्रतिक्रियावादी के शिकंजे में हैं जबकि उनका भविष्यअंधकार है और उनके हाथ पांव कटे हुए हैं।

    बलात्कार,हत्या,दमन,उत्पीड़न,घृणा,रंगभेद,बेदखली,नरसंहार की राजधानी नई दिल्ली में इसीलिए सत्ता शिक्षा के अधिकार मांग रहे छात्रों पर यह हमला करने की हिम्मत कर पा रही है।

    इसके खिलाफ देसभर के छात्र युवा गांव गांव शहर शहर खड़े हो जायें  तो हम भी नवारुणदा की तरह चीख कर कह सकते हैंः यह मृत्यु उपत्यका नहीं है।

    तानाशाह कभी नहीं जीतता और समूचे देश में फैलता जा रहा है छात्रों का यह आंदोलन।

    कंचन जोशी ने लिखा हैः

    विकास का पहला सबक RMSA /SSA यानि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के बजट में कटौती करके दिया गया। फिर आई बारी मनरेगा के बजट की। फिर काटा गया समाज कल्याण योजनाओं का बजट। फिर शिक्षा संस्थानों में मंत्री और निदेशक पद पर गैर अकादमिक और सिर्फ चापलूस लोगों को रखने का क्रम शुरू हुआ। और अब उच्च शिक्षा के बजट में कटौती के बाद UGC नॉन नेट फेलोशिप पर रोक। हर रोज किसी एक शहर से साम्प्रदायिक और जातीय हिंसा की खबर। डेली मेल के सर्वे में भारत सर्वाधिक नस्लीय घृणा वाले देशों में शुमार।इसके साथ ही IIT के निदेशकों ने सरकार को चिट्ठी लिखकर मंत्रालय के अनावश्यक हस्तक्षेप के कारण इस्तीफे की मंशा जताई है और वैज्ञानिकों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर देश में बढ़ती असहिष्णुता पर चिंता जताई है। साहित्यकारों को संस्कृरिकर्मियों को तो खैर सरकार ने दलाल घोषित कर ही दिया है।

    खैर विकास जारी है। जारी रहेगा। मुबारक़।

    Police lathicharge, detain students as they try to enter office!

    A protest by students in the national capital against the UGC's move to scrap non-NET fellowship escalated on Friday and led to police detaining scores of them as they tried to enter the premises of the academic body.

    The students, camping outside the University Grants Commission (UGC) office since Wednesday demanding revocation of the move, alleged they were lathicharged and about 100 of them detained when they tried to go inside to meet the officials.



    Non-NET fellowship row: Mumbai extends support to 'Occupy UGC' movement

    Researchers from various institutes of Mumbai have announced support for their peers in Delhi who are protesting since Tuesday against the University Grants Commission's (UGC) recent decision of discontinuing the non-National Eligibility Test (NET) fellowship.

    We, the students of University of Hyderabad, MANUU, TISS and EFLU marched together to UGC regional office in solidarity with the ongoing ‪#‎occupyUGC‬movement led by students in Delhi and registered our protest against the scrapping of non-NET fellowship. Instead of forming a delegation team, we demanded that the Joint Secretary of UGC should come down and address the students directly. Students raised slogans condemning the brahminical and imperialist onslaught on education. Students did not leave the place until Joint Secretary came and met the students. When she finally arrived, Students' Union President handed over the letter to be forwarded to UGC, Delhi and reiterated students' stand that we will not stop protesting until our three demands, ‪#‎restore‬, ‪#‎enhance‬ and ‪#‎expand‬ non-NET fellowship are met. Not surprisingly, the policemen, right from the beginning, threatened us of "dire consequences" if we raised slogans and created "nuisance". Students gave back police a staunch reply by continuing with the slogans rejecting the police raj! We reiterate our stand that we will continue our protests in the days to come until UGC and MHRD's agenda of privatization and saffronization is overthrown!!

    Inquilab Zindabad!!

    Students' unity across universities, long live!!


    जाग मेरे मन मछंदर jaag mere man machhandar

    https://www.youtube.com/watch?v=rEBN3q6A6Zw


    This video includes Ei Mrityu Upatyaka Aamar Desh Noi recited by Nabarun Bhattacharya!Miss not!He explains Ritwik and his Film Making!Merger of mediums!He remembers Bengali Creativity with the realist vision.He presents Ritwik in real light!

    Bijan Bhattachary said,Ritwik murdered.

    Nabarunda explains what killing means!

    फेलोशिप छोड़ो / लाठी खाओ

    यूजीसी पर आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं पर बर्बर लाठचार्ज | Gorakhpur News Line

    20 से अधिक छात्र-छात्राएं बुरी तरह घायल, 50 छात्र-छात्राओं को गिरफ्तार भी किया, विरोध में कमला नगर थाने का घेराव

    GORAKHPURNEWSLINE.COM



    नवारुण भट्टाचार्य को हिंदी में सुनिये।इस वीडियो में नवारुण दा ने सामाजिक यथार्थ के सौंदर्यबोध का विश्लेषण ऋत्विक के फिलमांकन के परिप्रेक्ष्य में करते हुए बदलाव की लड़ाई की रणनीतियों पर खुलकर चर्चा की।नवारुण दा की दृष्टि में ऋत्विक घटक की फिल्में महाकाव्यात्मक है।

    नवारुण दा ने काफ्का की बढ़ती हुई प्रासंगिकता पर भी चर्चा की है।नवारुण दा ने ऋत्विक घटक के साथ जो अंतरंग जीवन यापन किया,उसीसे उन्होंने साहित्य को गुरिल्ला युद्ध का मोर्चा बना दिया।नवारुण दा ने बिजन भट्टाचार्य के नाटक के मंचन के दौरान लाइटिंग का काम जबरन भी किया और अपनी फिल्म में वे कैमरे का काम भी ज्यादातर करते थे,जिसका श्रेयलूटने के बजाय साथी कैमरे मैन के साथ बांटने वाले ऋत्विक घटक ही थे।

    नवारुणदा की आवाज सुन रहा हूं और मुझे लग रहा है कि मेरे आमने सामने सिर्प नवारुण दा हैं और उनकी मौत की खबर सरासर झूठ है।

    आज का यथार्थ यही है।

    JNU HIRAWAL हम तोहसे पूछी ला जुल्मी सिपहिया

    जेएनयु में हिरावल पटना के कलाकार प्रस्तुति : वेद प्रकाश

    https://www.facebook.com/ActivistVed

    कल देर रात दिलीप खान ने स्टेटस में लिखाः

    दोस्तों, पुलिस ने UGC से पचासों शोधार्थियों/स्टूडेंट्स को डिटेन कर कमला नगर थाने में बंद कर रखा है। सैंकड़ो स्टूडेंट्स अभी थाना पहुंच रहे हैं। लड़ाई जारी रहेगी। लाठी से लोग झुकेंगे नहीं।

    दिलीप खान ने यह भी लिखा हैः

    आंदोलन में साथ हैं और रहेंगे। आप मेरे सलाहकार तो नहीं है कि मैं आपकी बात मानने को बाध्य होऊं!! स्मृति ईरानी को सलाह दीजिए जाकर। वैसे भी शोध वगैरह से संघियों का कोई लेना-देना नहीं होता।

    हम दिलीप खान की इसअपील का पुरजोर समर्थन करते हैंः

    तो भक्तों देख लिया? ये सरकार पढ़ने-लिखने की संस्कृति के कितने विरोध में है? शोध की मांग पर ये डंडा चलवाती है। 20 हेलीकॉप्टर से बिहार में मंत्री लोग रोज़ चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन M.Phil, Ph.D वालों को शोध के लिए पैसे नहीं देगी।

    और भक्ति करोगे तो आगे से सारे सरकारी विश्वविद्यालय ही बंद कर देगी।

    अभी भी मौक़ा है। लड़ो। भक्ति छोड़ो।

    उज्जवल भट्टाचार्य की वॉल से साभार -जेएनयू आंदोलन की ताज़ा खबर-

    अभी-अभी फ़ोन पर छात्र संघ उपाध्यक्ष शेहला से बात हुई. सभी गिरफ़्तार छात्र-छात्रायें कमला मार्केट थाने में हैं. पत्रकार अखिल, विद्या नाम की एक छात्रा, व डीयू के छात्र आसिफ़(?) को गंभीर रूप से चोटें पहुंची है. शायद जान का खतरा नहीं है. पांच-छः अन्य छात्रायें भी बुरी तरह घायल हैं. इसके अलावा कई दर्जन छात्र. छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए सैकड़ों अध्यापक सहित हज़ार से ऊपर छात्र थाने में पहुंच चुके हैं.

    इस बात की भी जांच होनी चाहिये कि शांतिपूर्ण छात्र धरने पर इस प्रकार के हिंसक लाठी चार्ज के लिये कौन ज़िम्मेदार रहा है ? क्या यह फ़ैसला राजनीतिक स्तर पर लिया गया ? इस लाठी चार्ज के बाद अगले दिनों में दिल्ली में व उससे परे तक छात्र जगत में एक भीषण अशांति का ख़तरा कहीं अधिक बढ़ गया है.


    BN Singhलाठियां चलाये सरकार छात्रों पर, तो क्या अभिभावक उन्हें अकेला छोड़ दें? साथ खड़े तो सबको होना चाहिए न्याय के के लिए लड़ते नौजवानो के साथ।

    UGC पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बरसीं लाठियां - Navbharat Times

    नॉन नेट फेलोशिप को वापस लेने के सरकार के फैसले का विरोध कर रहे छात्र मंगलवार को...

    NAVBHARATTIMES.INDIATIMES.COM



    NOW INDIAN SCIENTISTS RAISE ALARM OVER RISING INTOLERANCE; ASK PRESIDENT TO ACT

    Indian writers stage silent protests against the killing of writers and rising intolerance in New Delhi A highly polarized community is like a nuclear bomb…

    CARAVANDAILY.COM






    नॉन नेट फेलोशिप को वापस लेने के सरकार के फैसले का विरोध कर रहे छात्रों को हटाने के लिए पुलिस ने निर्मम लाठीचार्ज किया।

    Girija Pathak shared a link.

    1 hr·

    Kavita Krishnan on Twitter

    "Condemn the brutal lathi charge on #OccupyUGC protesters. 20 injured, 40 held, join gherao of Kamla Market Police station now if in Delhi"

    TWITTER.COM|BY KAVITA KRISHNAN

    Rahman Abbas


    The barbarism of police is unacceptable.

    Who order them?

    Must be held accountable.

    US Sharma i-

    जिस सरकार को भूतपूर्व सैनिको पे लाठीचार्ज करवाने में शर्म नहीं आयी

    उस से आप छात्रो पर किये गए अत्याचार का हिसाब पूछ रहे हो?

    सठिया तो नहीं गए हो बन्धु ?

    Ujjwal Bhattacharyaमेरी उम्र तो साठ हो चुकी है, लेकिन रहमान भाई नौजवान हैं.

    Prasad Suresh

    2 hrs· Edited·

    आरक्षण को लेकर सरकार के मदर ऑर्गनाइजेशन की बहुत आलोचना हुई तो कान दूसरी तरह से पकड़ लिया ...शोध छात्रवृति को ही बंद करवा दिया ...न पढाई-लिखाई कर पायोगे और न ही आरक्षण मांगोगे ....इस बार सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी !! बोलो मनु महाराज कि जय !!

    आग बोने वाले को अंगार की फ़सल मिलेगी



    मशहूर पत्रकार भाई दिलीप मंडल ने लिखा है फेसबुक वाल परः


    स्टूडेंट्स को फेलोशिप कहां मिल रही थी?

    - सरकारी विश्वविद्यालयों में.

    कोटा यानी आरक्षण कहां लागू है?

    - सरकारी विश्वविद्यालयों में.

    एससी, एसटी, ओबीसी के 50% से ज्यादा स्टूडेंट्स कहां हैं?

    - सरकारी विश्वविद्यालयों में.

    फेलोशिप बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा और किसकी पढ़ाई रुकेगी?

    - अब यह भी मुझे बताना होगा? सोचकर देखिए.

    और ऊपर से मोदी जी का रोज-रोज का क्लेम कि दलितों पिछड़ों का कितना विकास कर रहे है! छोडिए भी. कितना विकास करेंगे? सबको जीने दीजिए.


    अरावली पर्वत श्रृंखला के आखिरी छोर पर बने जेएनयू की लाल पथरीली बलुआ मिट्टी में कुछ तो खास है. इन दिनों यहां के हजारों छात्र और छात्राएं, देश भर के विश्वविद्यालयों के स्टूडेंट्स के सहयोग से, शोध छात्रों की फेलोशिप बचाने के संघर्ष में जुटी हैं. यह फेलोशिप केंद्र सरकार के जबड़े में फंसी है. वे हर दिन यूजीसी का घेराव कर रही हैं. उनकी मांग यह भी है कि फेलोशिप राज्यों में भी मिले. सरकार लगातार झूठ बोल रही है और दमन में जुटी है.

    जो छात्र छात्राएं इस आंदोलन में रात दिन लगी हैं, उनमें कईयों को दूसरी स्कॉलरशिप मिल रही है. उन्हें ये फेलोशिप नहीं मिलने वाली. लेकिन वे भी लड़ रही हैं. पुलिस की लाठियां खा रही हैं, गिरफ्तारियां दे रही हैं. कई के सिर फूटे हैं. उनके लिए यह न्याय का संघर्ष है.

    मेरा निजी निवेदन है कि जैसे और जितना बन पड़े, इनका साथ दीजिए. ये बेहतर देश बनाने की लड़ाई है.

    गौर करें,दिलीप ने यह भी लिखा हैः

    आरक्षण विरोधियों के खिलाफ लड़कर जान बाद में दीजिएगा मोदी जी, फिलहाल तो यह कीजिए कि प्रमोशन में आरक्षण का जो बिल आप डेढ़ साल से दबाकर बैठे हैं, उसे लागू करने के लिए अध्यादेश जारी कीजिए। यह काम आप कल भी कर सकते हैं। और हाँ, आपको बता दिया जाए कि प्रमोशन में आरक्षण "दूसरे धर्म वालों" को नहीं मिलता। सिर्फ एससी और एसटी को मिलता है। मुसलमानों का डर किसी और को दिखाइए।


    Himanshu Pandya


    ‪#‎occupyUGC‬यह लड़ाई तय करेगी कि भविष्य में उच्च शिक्षा और शोध में भारत कुछ सार्थक करेगा या कोर्पोरेट के चंगुल में फंसकर उनकी जी हुजूरी में शिक्षा को लगा देगा.

    यह लड़ाई तय करेगी कि समाज के किसी भी रूप में वंचित तबके के ( लडकियां, दलित, किसान, भूमिहीन आदिवासियों के बच्चे ) विद्यार्थी जिनके लिए अभिभावकों पर निर्भरता से मुक्त होकर अपने पांवों पर खडा होना एक उम्र के बाद जरूरी होता है, वे उच्च शिक्षा में बने रहकर इस प्रतिस्पर्धा में टिक पायेंगे या नहीं.

    यह लड़ाई तय करेगी कि सामाजिक विज्ञान और मानविकी जैसे विषय , जिनमें किसी निजी प्रायोजक के आगे आने की संभावना बहुत कम होती है , बचे रहेंगे या नहीं. ये विषय - जो समाज को दृष्टि देते हैं, जिसका भौतिक मूल्य आंका नहीं जा सकता.

    यह लड़ाई तय करेगी कि विद्यार्थी एक समुदाय के रूप में व्यवस्था को हिला सकता है या नहीं.

    यह लड़ाई जीती जानी बहुत जरूरी है !



    ‪#‎OccupyUGC‬

    In the police brutality 15 students badly injured and taken to the hospital. 50 students picked up by the police and beaten even inside the police van. Male Police beat up women students. Police charged at the protesters. Women were beaten up badly by male Police officers individually inside the bus after detention. Women were beaten in the middle of the road. The detained students have been taken to Kamla Market Police Station

    http://www.countercurrents.org/dsg271015.htm


    H L Dusadh Dusadh


    क्या मोदी एंड कं .अपनी हार मान चुकी है .मुझे लगता है 'हाँ '.अगर ऐसा नहीं होता तो वे नितीश-लालू पर यह घटिया आरोप का प्रयास नहीं करते कि वे हिन्दुओं के आरक्षण में कटौती कर मुसलमानों को ५ %आरक्षण देना चाहते हैं,जिसे मैं जीते जी होने नहीं दूंगा.हिन्दू ध्रुवीकरण के लिए क्या आपने इतनी सतही बात कहते सुनी है ?

    Urmilesh Urmil

    ·

    आरक्षण-विरोध की आंधी पैदा करने वालों में संघ-शक्तियां किस तरह दिन-रात एक किये हुए थीं? पार्टी के कई नेता और प्रवक्ता तो उस आरक्षण विरोधी आंदोलन की ही देन हैं। अब उसी पार्टी के लोग कह रहे हैं कि आरक्षण के लिये वह अपनी जान तक कुर्बान कर देंगे। कैसी विडम्बना है, मंडल के खिलाफ कमंडल निकालने वाले अब अपने को आरक्षणवादी साबित करना चाहते हैं! सत्ता के लिये वे किस कदर दयनीय नजर आ रहे हैं!

    Virendra Yadavये गोयबल्स के चेले हैं ,झूठ के सौदागर.गणेश मूरत को दूध पिलाने वाले.

    Like· Reply· 2· 37 mins

    Vivekanand Bharat

    Vivekanand Bharatहा हा हा, सर भाजपा किसी भी तरह से बिहार चुनाव हारना नहीं चाहती है। हर दावं लग चुके हैं। पहले दो चरण में लालू पर हमला बेकार गया! नीतीश के खिलाफ बोलने के लिए ज्यादा कुछ है नहीं क्योंकि 8 वर्ष साझीदार रहे हैं। अगड़े वोटों पर पूरा भरोसा है तो आरक्षण कार्ड खेलकर नीतीश कुमार के वोट को लालू से डाइवर्ट करने की कोशिश मात्र है।

    Like· Reply· 27 mins

    Chandra Prakash Jha

    Chandra Prakash Jha' वे ' पिछड़ों को आगे नहीं कर रहे , और बाँट - बाँट पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे ( थे) , टांय -टांय फिस्स हो गया उनका करतब. अब समय नहीं बचा लफ्फाजी का - 'वे ' जानते हैं


    "Academics and Scholars protest against Assault on Academic and Constitutional freedom".

    We, as social scientists, scholars, teachers and concerned citizens, feel extremely concerned about the lynching at Dadri, and the murders of scholars and thinkers like MM Kalburgi, Narendra Dabholkar, Govind Pansare and others, and wish to register our strong protest.

    We are not just shocked by Prime Minister Narendra Modi's late response, but also by the implications of the victim-blaming statement he made. To say that 'Hindus and Muslims should not fight each other but should fight poverty instead' puts the onus for peace and fighting poverty entirely on civil society and communities and absolves the state of any responsibility for both. As Prime Minister, he should have asserted that the state would defend the rule of law.

    In a country with some 4693 communities and over 415 living languages, each community is bound to have its own customs, including dietary choices. Individuals may also follow practices different from the ones followed by the majority of their community. Any attempt to impose a uniform belief or practice, on either individuals or communities, is antithetical to the freedom enshrined in the Constitution. It is the state's responsibility to ensure this freedom.

    Further, as scholars, we are extremely worried about the implications of these recent developments for our ability to study and write about different life ways, and to critically analyse society, including social phenomena like religion.

    1. Achin Vanaik (Retd.) University of Delhi

    2. Aditya Mukherjee, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    3. Aditya Sarkar, Warwick University

    4. Ajay Dandekar, Shiv Nadar University

    5. Ajit Menon, Madras Institute of Development Studies, Chennai

    6. Albeena Shakil, Indian Institute of Advanced Studies, Shimla

    7. Alito Siquira, University of Goa

    8. Amar Farooqui, University of Delhi, Delhi

    9. Amar Jesani, Researcher/teacher, Pubic health and Bioethics, Mumbai

    10. Amit Bhaduri, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    11. Amita Baviskar, Institute of Economic Growth, Delhi

    12. Amman Madan, Azim Premji University, Bangalore

    13. Amrita Pande, University of Cape Town

    14. Anand Chakravarti, (Retd.), Delhi School of Economics, University of Delhi

    15. Anand K. Sahay, Columnist, New Delhi

    16. Anjali Bhatia, University of Delhi

    17. Ankur Datta, South Asian University

    18. Annapurna Shaw, Indian Institute of Management Calcutta

    19. Anuj Bhuwania, South Asian University, New Delhi

    20. Anuja Agrawal, Delhi School of Economics, University of Delhi

    21. Anup Sinha, Indian Institute of Management Calcutta

    22. Anurekha Chari Wagh, University of Pune

    23. Aparna Basu, (Retd.) University of Delhi

    24. Aparna Rayaprol, University of Hyderabad

    25. Aparna Sundar,Azim Premji University, Bangalore

    26. Aparna Vaidik, Ashoka University, Kundli, Haryana

    27. Archana Prasad, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    28. Archana Sahare, JDB Govt. Girls' College, Kota (Rajasthan)

    29. Arif Waqif, Jawaharlal Nehru Technological University, Hyderabad

    30. Arima Misra, Azim Premji University, Bangalore

    31. Arindam Banerjee, Ambedkar University Delhi

    32. Arjun Dev (Retd)Professor of History, NCERT

    33. Arun Kumar, Retd. Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    34. Arupjyoti Saikia, Indian Institute of Technology, Guwahati

    35. Atulan Guha, IIM Kashipur

    36. Babu P. Remesh, IGNOU, New Delhi

    37. Badri Narayan, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    38. Balmurli Natarajan, William Paterson University, USA

    39. Balveer Arora, Institute of Social Sciences, New Delhi

    40. Bhupinder Yadav, Azim Premji University, Bangalore

    41. Birinder Pal Singh, Punjabi University, Patiala

    42. C T Kurien, formerly of Madras Institute of Development Studies, Chennai.

    43. C. Lakshmanan, Madras Institute of Development Studies, Chennai

    44. Carol Upadhya, National Institute of Advanced Study, Bangalore

    45. Chandan Gowda, Azim Premji University, Bangalore

    46. Chandra Chari, The Book Review, New Delhi

    47. Chayanika Shah, Somaiya College of Science and Commerce, Mumbai

    48. Chirashree Das Gupta, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    49. Chitra Joshi, Indraprastha College for Women, University of Delhi

    50. D N Dhanagare, former National Fellow, Indian Institute of Advanced Study, Shimla

    51. D. R. Sahu, University of Lucknow

    52. D.Nrasimha Reddy, Rtd. University of Hyderabad.

    53. Debarshi Das, IIT Guwahati

    54. Debashis Ghoshal, School of Physical Sciences, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    55. Debashish Bhattacherjee, Indian Institute of Management Calcutta

    56. Deepak Kumar, Punjabi University, Patiala

    57. Deepak Mehta, University of Delhi

    58. Dia Da Costa, University of Alberta, Canada

    59. Dilip M Menon, University of Witwatersrand, Johannesburg, South Africa

    60. Dinesh Abrol, ISID, New Delhi

    61. Divya Vaid, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    62. Dr. S.V. Nadkarni, Ex. Dean L.T.M. Med. College, Mumbai,

    63. Dulali Nag, Indian Institute for Social Welfare and Business Management, Kolkata

    64. Farhana Ibrahim, Indian Institute of Technology - Delhi

    65. G. Srinivas, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    66. Gayatri Menon, Azim Premji University, Bangalore

    67. Geet Lamba, Government College, Moonak, Punjab

    68. Geeta Kapur, Art Critic, New Delhi

    69. Geetha Nambissan, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    70. Girish Mishra, Author, Columnist and Teacher, New Delhi

    71. Gita Chadha, University of Mumbai

    72. Gopalji Pradhan, Ambedkar University Delhi

    73. Gopesh Talukdar, IISWBM, Kolkata

    74. Gyan Pandey, Emory University, USA

    75. Harbans Mukhia, (Retd ), Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    76. Harinder Kaur, Punjabi University, Patiala

    77. Hira Singh, York University, Canada

    78. Imtiaz Ahmad, (Retd) Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    79. Indira Chandrasekhar, Publisher, Tulika Books, New Delhi

    80. Indra Munshi, (Retd.) University of Mumbai

    81. Indrapramit Roy, Artist, Baroda.

    82. Jaiwanti Dimri, H.P. University, Shimla

    83. Janaki Abraham, Delhi School of Economics, University of Delhi

    84. Jasmeen Kaur, Punjabi University, Patiala

    85. Jesim Pais, Institute for Studies in Industrial Development, New Delhi

    86. Johannes Manjrekar, M.S. University of Baroda

    87. John Paul, Pondicherry University

    88. Jyothsna Belliappa, Azim Premji University, Bangalore

    89. Kalpana Kannabiran, Centre for Social Development, Hyderabad

    90. Kamala Ganesh,( Retd.) University of Mumbai

    91. Kamei Aphun, Delhi School of Economics, University of Delhi

    92. Kushal Deb, IIT Bombay

    93. Lakshmi Subramaniam, Centre for Studies in Social Sciences, Kolkata

    94. Leena Abraham, TISS, Mumbai.

    95. Madhumati Dutta, IIESTS, Howrah (WB)

    96. Madhura Swaminathan, Indian Statistical Institute, Bangalore

    97. Mahesh Sarma, Independent Researcher, New Delhi

    98. Mahuya Bandyopadhyay, University of Delhi

    99. Maitrayee Chaudhary, Jawaharlal Nehru University

    100. Mani Inderpal Singh, University College, Miranpur (Distt. Patiala)

    101. Manish Jain, Ambedkar University Delhi

    102. Manisha Sethi, Jamia Millia Islamia

    103. Manjeet Singh, Government College, Jind, Haryana

    104. Manoranjan Mohanty, (Retd) University of Delhi

    105. Manpreet Kaur, Lovely University, Jalandhar, Punjab

    106. Mariam Dossal, (Retd.) University of Mumbai

    107. Mary E. John, Centre for Women's Development studies, New Delhi

    108. Maya Rao, Shiv Nadar University, Uttar Pradesh

    109. Meena Gopal, Tata Institute of Social Sciences, Mumbai

    110. Meena Radhakrishna, formerly of Delhi School of Economics,University of Delhi

    111. Meher Engineer, independent scientist, Kolkata

    112. Mohan Rao, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    113. Mridula Mukherjee, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    114. Mritiunjoy Mohanty, Indian Institute of Management Calcutta

    115. Mushirul Hasan, former Vice Chancellor, Jamia Millia Islamia, New Delhi

    116. Nalini Nayak, PGDAV (M) College, Delhi University

    117. Namrata Vadhera, Punjabi University, Patiala

    118. Nandini Manjrekar, TISS , Mumbai

    119. Nandini Sundar, Delhi School of Economics, University of Delhi

    120. Narendra Panjwani, formerly at St. Xavier's College, Mumbai

    121. Narinder Singh, Punjabi University, Patiala

    122. Nasir Tyabji, formerly of Jamia Millia Islamia, New Delhi

    123. Nasreen Fazalbhoy, (Retd) University of Mumbai.

    124. Navdeep Mathur, Indian Institute of Management, Ahmedabad

    125. Nayanika Mathur, University of Cambridge

    126. Neeladri Bhattacharya, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    127. Neera Chandhoke, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    128. Neetha N., Centre for Women's Development Studies, New Delhi

    129. Neshat Quaiser, Jamia Millia Islamia, New Delhi

    130. Nilika Mehrotra, Jawaharlal Nehru University

    131. Nirmal Sengupta, Institute of Advanced Studies, Shimla

    132. Nissim Mannathukkaren, Jawaharlal Nehru University

    133. Padma Prakash, Director, esocialsciences

    134. Padma Velaskar, Tata Institute of Social Sciences, Mumbai.

    135. Parimal Ghosh, (Retd.) University of Calcutta.

    136. Partho Datta, Zakir Husain Delhi Evening College, University of Delhi

    137. Parveen Jha, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    138. Patricia Uberoi, (Retd.) Institute of Economic Growth, Delhi

    139. Pratiksha Baxi, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    140. Pratyush, Sarwahara newspaper, Delhi

    141. Praveen Jha, Jawharlal Nehru University, New Delhi

    142. Probal Dasgupta, Linguistic Research Unit, Indian Statistical Institute, Kolkata

    143. Pulin Nayak, (Retd) Delhi School of Economics, University of Delhi

    144. Purendra Prasad, University of Hyderabad

    145. R Nagaraj, Indira Gandhi Institute of Development Research, Mumbai.

    146. R. Siva Prasad, Central University, Hyderabad

    147. Rachna Dhingra Coordinator International Campaign for Justice in Bhopal

    148. Radhika Chopra, Delhi School of Economics, University of Delhi

    149. Radhika Gupta, Max Planck Institute, Göttingen

    150. Radhika Mongia, York University, Canada

    151. Radhika Singha, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    152. Rajan Barrett, MS University of Baroda

    153. Rajat Datta, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    154. Rajesh Kamble, University of Mumbai

    155. Rajni Palriwala, Delhi School of Economics, University of Delhi

    156. Raka Ray, University of California at Berkeley, USA

    157. Rama Baru, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    158. Ranabir Chakravarti, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    159. Rashmi Doraiswamy, Jamia Millia Islamia, New Delhi

    160. Ratna Raman, Sri Venkateshwara College, University of Delhi

    161. Ravi Duggal, Public Health Researcher, Anusandhan Trust, Mumbai

    162. Ravi Kumar, South Asian University, New Delhi

    163. Ravi Shukla, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    164. Ravi Sundaram, Centre for the Study of Developing Societies

    165. Ravinder Kaur, Indian Institute of Technology-Delhi

    166. Ravinder Singh, Punjabi University, Patiala

    167. Reema Bhatia, University of Delhi

    168. Rekha Basu, University of Delhi,

    169. Renny Thomas, University of Delhi

    170. Riddhi Shah, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    171. Rita Brara, Delhi School of Economics, University of Delhi

    172. Ritajyoti Bandyopadhyay, Centre for Studies in Social Sciences, Calcutta

    173. Ritu Dewan, formerly at University of Mumbai

    174. Roma Chatterji, Delhi School of Economics, University of Delhi

    175. Romila Thapar, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    176. Ruchi Chaturvedi, University of Cape Town

    177. Rudolf Heredia, Independent Researcher, Mumbai

    178. Rukmini Sen, Ambedkar University Delhi

    179. S.B. Upadhyay, IGNOU, New Delhi

    180. Sadhana Natu, Department of Psychology, Modern College, Pune University

    181. Sajal Lahiri, Southern Illinois University, USA

    182. Sajni Mukherji, Jadavpur University, West Bengal

    183. Sakshi Khurana, V. V. Giri National Labour Institute

    184. Sanjay Srivastava, Institute of Economic Growth

    185. Sasheej Hegde, University of Hyderabad

    186. Satendra Kumar, Lucknow

    187. Satinath Sarangi Member Bhopal Group for Information & Action, Bhopal

    188. Satish Deshpande, Delhi School of Economics, University of Delhi

    189. Savyasaachi, Jamia Millia Islamia, New Delhi

    190. Shail Mayaram, CSDS, Delhi

    191. Shalini Grover, Institute of Economic Growth, Delhi

    192. Shamsul Islam, Author/Dramatist, formerly of University of Delhi

    193. Sharada Srinivasan, National Institute of Advanced Studies, Bangalore

    194. Sheena Jain, formerly at Jamia Millia Islamia, New Delhi

    195. Shilpa Phadke, Tata Institute of Social Sciences- Mumbai

    196. Shivaji Panikkar, Ambedkar University Delhi

    197. Shivali Tukdeo, National Institute of Advanced Studies (NIAS), Bangalore

    198. Shruti Tambe, Savitribai Phule Pune University, Pune

    199. Soumyen Sikdar, Indian Institute of Management Calcutta

    200. Sreekala.E, Pondicherry University

    201. Sreemati Chakrabarti, Department of East Asian Studies, University of Delhi

    202. Sripad Motiram, University of Massachusetts, USA

    203. Subir Rana, National Institute Of Advanced Studies, Bengaluru

    204. Sucheta Mahahan, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    205. Sudha Vasan, Delhi School of Economics, University of Delhi

    206. Sujata Patel, University of Hyderabad

    207. Sumanta Banerjee, Independent researcher, Hyderabad

    208. Sumit Sarkar, (Retd) University of Delhi

    209. Suneet Chopra, Art Critic and Writer, New Delhi

    210. Superna Jindal, Punjabi University, Patiala

    211. Surajit Mazumdar, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    212. Surinder S. Jodhka, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    213. Susan Visvanathan, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    214. Sushil Khanna, Indian Institute of Management Calcutta

    215. Svati Shah, University of Massachusetts, USA

    216. Syed Ali Nadeem Rezavi, Aligarh Muslim University, Aligarh

    217. Tapati Talukdar, formerly at Rabindra Bharati University, Kolkata

    218. T. N. Madan, Institute of Economic Growth, Delhi

    219. Tanika Sarkar, (Retd) Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    220. Tanweer Fazal, Jamia Millia Islamia, New Delhi

    221. Tapan Basu, University of Delhi

    222. Tejaswini Niranjana, TISS, Mumbai

    223. Tejinder Pal Singh, University College, Miranpur (Distt. Patiala)

    224. Tina Chakravarty, Sophia College, Mumbai.

    225. Tiplut Nongbri, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    226. Tulsi Patel, Delhi School of Economics, University of Delhi

    227. Ujjwala Mhatre, Researcher and Writer, Mumbai

    228. Uma Iyengar, The Book Review , New Delhi

    229. Uma Das Gupta, Independent scholar, Kolkata.

    230. Urfat Anjem Mir, Ambedkar University Delhi

    231. Utsa Patnaik, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    232. V. Sujatha, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    233. Valerian Rodrigues, National Fellow - ICSSR, Mangalore

    234. Vasavi, A. R., Bangalore

    235. Vasundhara Bhojvaid, University of Delhi

    236. Veena Naregal, Institute of Economic Growth, Delhi

    237. Venkatesh Athreya, formerly of Bharathidasan University, Tiruchirapalli (TN)

    238. Vidhu Verma, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    239. Vijay Prashad, Chief Editor, LeftWord Books

    240. Vikas Maniar, Azim Premji University, Bangalore

    241. Vincent Ekka, Jawaharlal Nehru University, New Delhi

    242. Vinita Bhatia, St. Xavier's College, Mumbai

    243. Vinod Vyasulu, Formerly at Institute for Social and Economic Change, Bangalore

    244. Virginius Xaxa, Tata Institute of Social Sciences– Guwahati

    245. Vivan Sundaram, Artist, New Delhi

    246. Walter Fernandes, North Eastern Social Research Centre, Guwahati

    247. Xonzoi Barbora, Tata Institute of Social Sciences- Guwahati

    248. Yasmeen Arif, University of Delhi

    249. Yasmeen Lukmani, (Retd.) University of Mumbai

    250. Zoya Hasan, National Fellow, ICSSR.

    October 26, 2015


    अब असहिष्णुता के खिलाफ आगे आए वैज्ञानिक

    कन्नड़ विचारक एमएम कलबुर्गी की हत्या सहित असहिष्णुता की घटनाओं पर चिंता जताते हुए वैज्ञानिकों के एक समूह ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से उपयुक्त कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने केन्द्र और राज्य सरकारों से मानवता विरोधी और सभ्यता विरोधी गतिविधियों के…

    OUTLOOKHINDI.COM


    श्री संतोष खरे ने लौटाया मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का शरद जोशी सम्मान


    साथियो ,

    मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष मंडल के सदस्य और वरिष्ठ लेखक श्री संतोष खरे ने मध्य प्रदेश शासन की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बाधित करने वाली हस्तक्षेपकारी नीतियों के विरोध में और सम्मान व पुरस्कार लौटाने वाले तथा असहिष्णुता के प्रतिरोध में आगे आये लेखक साथियों के साथ अपनी आवाज़ मिलाते हुए उन्हें दिया गया शरद जोशी सम्मान, प्रतीक चिह्न तथा राशि समेत लौटा दिया है। हम प्रलेस की ओर से उनके इस कदम की सराहना करते हैं और विश्वास प्रकट करते हैं कि अन्य लेखक साथी भी कलाकारों और लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के साथ ही देश में दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, और आम मेहनतकश लोगों पर बेतहाशा बढ़ते ज़ुल्मों के खिलाफ अपने-अपने तरीकों से संगठित होकर आवाज़ उठाएंगे और देश में उभर रही फासीवादी प्रवृत्तियों को माकूल जवाब देकर हमारे समाज के उदात्त मानवीय मूल्यों को आगे बढ़ाएंगे।

    संलग्न है उनका वक्तव्य।

    - विनीत तिवारी

    महासचिव, मध्य प्रदेश प्रगतिशील संघ



    Sunny Kumar added 4 new photos.


    Mohd Asif, DU AISA activist, severely injured has not been taken to hospital. Police is simply refusing. Comrades arrested with him are treating him


    वैज्ञानिकों के एक समूह ने कन्नड़ लेखक एम.एम. कलबुर्गी की हत्या और पिछले दिनों हुईं कुछ सांप्रदायिक घटनाओं पर राष्ट्रपति से कार्रवाई करने की गुजारिश की है। पढ़ें:

    ध्रुवीकृत समुदाय परमाणु बम की तरह, कभी भी फट सकता है: वैज्ञानिक

    NAVBHARATTIMES.INDIATIMES.COM


    Kiritkumar Pravasi and Milind Dhumale shared a link.

    मीसा का करारा जवाब: पहले अपनी मां और पत्नी को सेट करें मोदी

    राजद की नेता मीसा भारती ने पीएम मोदी को करारा जवाब देते हुए कहा है कि पहले वह अपनी मां और पत्नी को 'सेट'करें. मीसा ने कहा कि पीएम मोदी ने सेट करने की बात कह कर…

    NAUKARSHAHI.IN

    Sangwari perform at ‪#‎OccupyUGC‬! !

    यूजीसी के सामने प्रदर्शन कर रहे छात्रों की लाइव तस्वीर... शोधवृति को बंद करने के खिलाफ हो रहा है आंदोलन…

    UGC के शिक्षा विरोधी फैसले के खिलाफ श्रीनगर (गढ़वाल) आइसा का विरोध..

    STUDENT UNREST

    In pictures: Police lathicharge and detain protesting #OccupyUGC students

    Students claim that the assault was so severe, at least 15 protestors are in hospital.

    Scroll Staff · Today · 08:05 pm

    In pictures: Police lathicharge and detain protesting #OccupyUGC students

    Photo Credit: Akhil Kumar/Facebook

    4.6K

    Total Views

    On Tuesday evening, the Delhi Police lathicharged on students who have been agitating outside the University Grants Commission office since last Wednesday to protest against the scrapping of so-called non-NET fellowships by the apex body.


    These fellowships were allowed approximately  35,000 students to pursue their M.Phil and Ph.Ds programmes in central universities across the country. These fellowships, which are not based on the National Eligibility Test, the exam that qualifies candidates to be lecturers, give researchers Rs 5,000-Rs 8,000 each month with some contingency grants.


    Even as the Ministry of Human Resources Development clarified that it will continue the fellowships and constitute a committee to decide the future of these grants, the students have been demanding that the fellowships be continued without any conditions and the stipends be linked to prevailing inflation rates.


    The protesting students were lathicharged near the ITO Metro Station around 6 pm before an as-yet undetermined number were taken in vans to Kamla Market Police Station. According to students at the site, more than 100 policemen chased protesters in an operation that continued for at least 10 minutes.


    Around 15 protesters have been severely injured and taken to the hospital, the students said. They alleged that the police beat up students in the bus that was transporting them to the station.


    A photo journalist named Akhil Kumar was also reported to have been beaten up. He suffered injuries on his face and student activists reported that the police tried to snatch his camera.


    Jawaharlal National University's Student Union vice president Shehla Rashid was among those who were detained. Rashid condemned the crackdown, but said that the protesters will be back with "even larger number".


    "We condemn the brutal lathi-charge on students, especially women protestors who were occupying the ITO Metro Station gate," she said. "It's shameful that the government and UGC are not hearing the genuine demands of students and turning an academic issue into a pitted battle between students and police. We will not let this action break our spirit. We appeal to students from all over the country to rush to Delhi and join the movement here. We will come in even larger numbers and reclaim our right to education."


    Here are some pictures of the crackdown.









    Late on Tuesday evening, about 30 teachers at Jawaharlal Nehru University and Delhi University issued a statement condemning the lathicharge. They said:



    "As faculty and students who stand together with the students protesting the revocation/review of the UGC non-NET fellowship, we are outraged at the brutal police action against students gathered in a protest demonstration since yesterday, without a single convincing response from the UGC or the MHRD that could allay the anxieties of thousands of students across India that the non-NET fellowship will not be discontinued. Prevarication on this basic demand by press releases announcing the setting up of a review committee has only indicated a malafide intent.


    We are deeply dismayed to hear of the reports of significant injuries to unarmed protestors and the detention of a number of students by the police. We demand the immediate release of all the detainees and the provision of medical aid. The MHRD Minister and the UGC Chairperson should understand that the situation can only be defused by their unequivocal assurance to the academic community that there shall be no rollback or any other amendment of the eligibility of students for the UGC Non-NET Fellowship scheme for the universities that are already in receipt of these fellowships in this or future academic years. Furthermore, it should take positive and visible steps to meet students demands for an enhancement of fellowship remuneration and undertake to extend this fellowship scheme to state universities as well."



    We welcome your comments at letters@scroll.in




    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

    0 0

    भारतीय सिनेमा अब प्रतिरोध में है

    वैज्ञानिक साथ हैं,युवाशक्ति भी साथ

    इस देश को न हिंदुत्व का महागबंधन तोड़ सकता है और न फासिज्म का मुक्तबाजारी नफरत और नरसंहार का एजंडा।

    पलाश विश्वास

    KOLOROB as we stand Divided,Let us unite to save Humanity and Nature!

    केसरिया सत्ता अब छात्रों को भी नहीं बख्शेगी!

    https://youtu.be/BFXDZ6-yA-Y


    जाग मेरे मन मछंदर jaag mere man machhandar

    https://www.youtube.com/watch?v=rEBN3q6A6Zw

    हमने अस्कार विजेता फिल्मकार गुलजार के बयान की नफरत की इस आंधी के खिलाफ विरोध का रास्ता एक ही है कि पुरस्कार लौटा दिये जाये,पर अंग्रेजी में हस्तक्षेप पर लिखते हुए उम्मीद जताई थी कि भारतीय सिनेमा के इतिहास और देश की एकता और अखंडता के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता के मद्देनजर उम्मीद है कि सारे फिल्मकार और कलाकार देश की बहुलता और विविधता और हमारे तमाम पुरखों की विरासत के मुताबिक अपने लबों की आजादी को देर सवेर अभिव्यक्ति देंगे।


    सिर्फ गुलजार क्यों,जाने माने फिल्मकार महेश भट्ट ने भी पुरस्कार लौटाने का समर्थन कर दिया है।यही नहीं,मशहूर फिल्मकार महेश भट्टने शिवसेना की धमकी के बाद यहां पाकिस्तानी ग़ज़ल उस्ताद ग़ुलाम अली का संगीत कार्यक्रम रद्द किए जाने की निंदा की है। लबों पर पहरे के खिलाफ हैं वे।


    हमें खुशी है कि दस फिल्मकारों ने पहल की है फिलहाल।ताजा खबरों के मुताबिक जाने माने फिल्मकारों दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन और आठ अन्य लोगों ने बुधवार को एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए और देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए।


    बनर्जी और अन्य फिल्मकारों ने कहा कि उन्होंने छात्रों के मुददों के निवारण और बहस के खिलाफ असहिष्णुता के माहौल को दूर करने में सरकार की ओर से दिखाई गई उदासीनता के मद्देनजर ये कदम उठाए हैं।


    बनर्जी ने कहा, 'मैं गुस्से, आक्रोश में यहां नहीं आया हूं। ये भावनाएं मेरे भीतर लंबे समय से हैं। मैं यहां आपका ध्यान खींचने के लिए हूं। 'खोसला का घोसला' के लिए मिला अपना पहला राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाना आसान नहीं है। यह मेरी पहली फिल्म थी और बहुत सारे लोगों के लिए मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म थी।'

       

    उन्होंने कहा, अगर बहस, सवाल पूछे जाने को लेकर असहिष्णुता और पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने की चाहत रखने वाले छात्र समूह को लेकर असहिष्णुता होगी, तो फिर यह असहिष्णुता उदासीनता में प्रकट होती है। इसी को लेकर हम विरोध जता रहे हैं।


    जानेमाने डाक्यूमेंट्री निर्माता पटवर्धन ने कहा कि सरकार ने अति दक्षिणपंथी धड़ों को प्रोत्साहित किया है।


    उन्होंने कहा, मैंने इस तरह से एक समय पर बहुत सारी घटनाएं होती नहीं देखी हैं। क्या होने वाला है, यह उसकी शुरूआत है और मुझे लगता है कि पूरे देश में लोग अलग अलग तरीकों से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।


    एफटीआईआई के छात्रों ने बुधवार को अपनी 139 दिनों पुरानी हड़ताल खत्म कर दी, हालांकि वे संस्थान के अध्यक्ष पद पर गजेंद्र चौहान की नियुक्ति का विरोध और उनको हटाने की मांग जारी रखेंगे।


    सबसे बड़ी बात है कि बंगाल में मंदाक्राता के बाद युवा फिल्मकार दिवाकर बनर्जी ने भी पुरस्कार लौटा दिये हैं।


    हम उम्मीद करते हैं कि सत्यजीत राय और ऋत्विक घटक नहीं रहे तो क्या मृणाल सेन,गौतम घोष,बुद्धदेव गुह,अपर्णा सेन,व दूसरे लोग बाकी देश के साथ खड़े होंगे।


    बंगाल के कवियों और लेखकों की तरह शुतुरमुर्ग की तरह आंधी के गुजर जाने का इंतजार नहीं करेंगे।


    हमें उम्मीद है कि एंग्री यंगमैन की भूमिकाओं में सत्तर दशक के छात्रों और युवाओं के गुस्से और मोहभंग को अभिव्यक्ति देने वाले अमिताभ बच्चन, सिनेमा की नई लहर के दिग्गज श्या बेनेगल,शबाना आजमी और लोकप्रिय सिनेमा के आमिर खान,शाहरुख खान,महेश भट्ट,सलमान खान,जावेद अख्तर,रजनीकांत,चिरंजीवी के साथ साथ अदूर गोपालकृष्णन,मोहनलाल जैसे हस्ती जब बोलेंगे तो केसरिया सुनामी बीच समुंदर दफन हो जायेगी।


    हमें खुशी है कि जयभीम कामरेड और राम के नाम जैसी रचनाओं के जरिये लाल नील एकता के लिए लगातार अभियान चला रहे हमारे प्रिय फिल्मकार पुरस्कार लौटाने वाले निर्देशकों में खास चेहरा हैं।


    हमारे मित्र जोशी जोसेफ के वे खास दोस्त हैं और इस नाते उनसे हमारा भी कुछ नाता है,जो आनंद भी मानते हैं।


    वे डा.आनंद तेलतुंबड़े के भी अखंड मित्र हैं।


    हम सारे लोग सर्वहारा बहुजन निनान्ब्वे फीसद भारतीय आम जनता की मोर्चाबंदी की कोशिश में है।


    देश दुनिया को जोड़ने में अमनचैन और मुहब्बत का संदेश देने में भारतीय सिनेमा का अखंड योगदान है।


    भारतीय सिनेमा ने हमेशा देश दुनिया को जोड़ा है और मजहबी सियासत ने देश दुनिया को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।


    मजहबी सियासत बंटवारे की साजिशों,सौदेबाजियों,मुक्तबाजार की बेशर्म दलाली औरनरसंहार संस्कृति की बुनियाद पर ही केसरिया सुनामी में तब्दील है और नवउदारवादी हिंदुत्व का यह फर्जी पुनरुत्थान दरअसल देश को अमेरिकी उपनिवेश बनाने का अबाध पूंजी,संपूर्ण निजीकरण का बेलगाम उपक्रम है और इसीलिए शिक्षा,उच्च शिक्षा और शोध को क्रयशक्ति के साथ नत्थी करके युवाशक्ति की हत्या का यह चाकचौबंद इंतजाम हैं।यह राष्ट्र के विवेक का संहार,महिषासुर वध है।


    देवि सर्वत्र पुज्यंते अब संपूर्ण पितृसत्ता है और महिलाएं अभूतपूर्व सशक्तीकरण औरअंतरिक्ष में उड़ान के बावजूद घर बाहर उत्पीड़न औरबलात्कार की शिकार हैं तो बच्चे बंधुआ मजदूर हैं।


    यह धर्म नहीं है।सिरे से अंत तक अधर्म है।अनैतिकता है।


    तमसो मा ज्योतिर्गमय और उतिष्ठित जाग्रत और सत्वमेव जयते के सनातन हिंदुत्व का दसदिगंत सर्वनाश है और हर हिंदू को इस आत्मध्वंस के हिंदुत्व एजंडे के खिलाफ खड़ा होना चाहिए क्योंकि सनातन धर्म का कोई संकट नहीं है और न सात सौ साल के इस्लामी शासन और दो सौ साल के ब्रिटिश राज के बावजूद सनातन हिंदुत्व का कभी अवसान हुआ है।


    वैदिकी हिंसा जारी है,मनुस्मति शासन जारी है,नस्ली रंगभेद जारी है,अश्वमेध और राजसूय जारी है लेकिन लोक और जनता में हिंदुत्व मरा नहीं है।


    यह केसरिया सुनामी फर्जी पुनररुत्थान के जरिये देश में युद्ध और गृहयुद्ध के मार्फत एक फीसद अरबपति करोड़ पति सत्तावर्ग के वर्चस्व और बेलगाम मुनाफावसूली,सांढ़ों को छुट्टा खोलकर हर कहीं चक्रव्यूह रचकर एकांतवासी नागरिकों को अलग अलग अभिमन्यु की तरह मारने की जहरीली साजिश है।


    कल रात लगातार आंदोलनकारी छात्रों की लाइव स्ट्रीम आज के प्रवचन के लिए सहेजते हुए,नवारुण दा को देखते सुनते हुए हमें सबसे अच्छा लगा मेरे भाई दिलीप मंडल और दूसरे नील साथियों का आंदोलनकारी छात्रों के हक में दीवाललेखन जारी करते हुए।वह लाइव स्ट्रीम हमने अपने प्रवचन के साथ जारी कर दिया है।


    खुशी की बात है कि अब आरक्षण की लड़ाई में भंगहुई छात्र युवा एकता फिर सही रास्ते पर है और अब फासिज्म के चारों खाने चित्त हो जाने का सबसे पवित्र शुभमुहूर्त हैं।इसे बेकार न जाने दें।


    उम्मीद है कि हस्तक्षेप पर यह डटिल रचनाप्रक्रिया भी भूत की तरह जनपक्षधरता के फोरम हस्तक्षेप के लिए अकेले ही अकेले मरते खपते खट रहे हमारे सिपाहसालार अमलेंदु लगा देंगे और अभिषेक,रंजीत वर्मा,सिनेमा का प्रतिरोध वाले मेरे सगे भाई संजय जोशी और रेयाज अपने अपने मंच से इस गोलबंदी को तेज करेंगे।

    हमें इंतजार है होक कलरवकी सिंह गर्जना की।


    नवारुण भट्टाचार्य इस लाल नील जनता के प्रतिरोध और उनके गुरिल्ला युद्ध के समामाजिक यथार्थ के प्रवक्ता रहे हैं  तो आज हमने अपने प्रवचन के साथ ओकुपाई यूजूसी आंदोलनकारियों की ओर से जारी उनके साक्षात्कार का विडियो भी जारी किया है,जिसमें उनने ऋत्विक घटक की तमाम फिल्मों का विश्लेषण के साथ अंतरंग संस्मरण सुनाते हुए भारतीय सिनेमा और तमाम माध्यमों,विधाओं की रचना प्रक्रिया और उनमें सामाजिक यथार्थ और बदलाव की ताकतों के अटूट समर्थन और भारतीय जनता की गोलबंदी एई मृत्यु उपत्यका आमार देश नय,की आवृत्ति के साथ अभिव्यक्त की है।


    कल देर रात तक हम नवारुण दा के मुखातिब थे और आज ही भारतीय सिनेमा ने दिखा दिया कि उसकी हैसियत फासिज्म से कहीं ज्यादा है।


    मेरा प्रवचन भले आप न सुनें,लेकिन नवारुण दा को जरुर सुनें ताकि समझ सकें कि सत्तर दशक में छात्र युवाशक्ति किस हद तक राष्ट्र व्यवस्था में बदलाव के लिए सक्रिय रहा है जनता के बीचोंबीच,खेतों और खलिहानों में,जंगल में,पहाड़ों में और वह विडंबना भी समझ लें कि आरक्षण और आरक्षण विरोधी दो खेमों में बंटकर कैसे समूची छात्र युवाशक्ति केसरिया बजरंगी,सोशल नेटवर्किंग,विजेट,गेजेट,व्हाट्स अप, ऐप्पस वगैरह वगैरह है और ज्ञान की खोज के बजाय तकनीकी चकाचौंध के आत्मध्वंस पर तुली है।


    दिल्ली में फासिज्म के खिलाफ उमड़ती छात्रों युवाओं का हुजूम और प्रतिरोध में खड़े लेखक, कवि, कलाकार, फिल्मकार, समाजशास्त्री,वैज्ञानिक इस देश को तबाह होने से फिर बचा लेंगे,इसकी हमें पक्की उम्मीद है।


    वरना केरल हाउस पर छापा मारने वाले बजरंगी किसी भी दिन अमेरिकी,ब्रिटिश,रूसी,जर्मन,फ्रेंच समेत विकसित देशों औरतमाम इस्लामी देशों में छापा मारते हुए गोरक्षा आंदोलन के अरब वसंत के तहत भारत को जलते हुए तेलकुंआ में तब्दील कर देंगे और हमें नदियों,झीलों,समुंदर के किनारे आईलान की लाश नसीब होगी या हम खुद जलते हुए तेल में छटफटाते हुए पंछी में तब्दील होंगे और इंसानियत,भाईचारे,मुहब्बत का यह बेमिसाल मुल्क,भारत तीर्थ अपनी अर्थव्यवस्था,उत्पादन प्रणाली और राजनीति की तरह तबाह हो जायेगा।इस कयामत के मंजर के खिलाफ खड़ा होना सियासती या मजहबी नहीं,इंसानियत का,कायनात का तकाजा है।


    सिनेमा की वजह से ही हिंदी देश विदेश में दुनियाभर में इतनी लोकप्रिय है और उसीमें हमारी बोलियां,हमारा लोक जिंदा हैं


    অসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে জাতীয় পুরস্কার ফেরালেন দিবাকর ব্যানার্জি সহ ১০ পরিচালকঅসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে জাতীয় পুরস্কার ফেরালেন দিবাকর ব্যানার্জি সহ ১০ পরিচালক

    ওয়েব ডেস্ক: মোদী সরকারের অস্বস্তি বাড়িয়ে দিল দেশের চলচ্চিত্র জগতের একাংশ। অসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে শিল্পীসমাজের পুরস্কার প্রত্যাখানের তালিকায় এবার যোগ হলেন বিশিষ্ট চলচ্চিত্র ব্যক্তিত্বরা। এবার একেবারে জাতীয় পুরস্কার প্রত্যাখান করলেন বিখ্যাত পরিচালক দিবাকর ব্যানার্জি। 'খোসলা কি ঘোসলা','লাভ-সেক্স অউর ধোকা', 'ডিটেকটিভ ব্যোমকেশ বক্সি'র পরিচালক দিবাকরের পাশাপাশি জাতীয় পুরস্কার প্রত্যখান করলেন পরেশ কামদার, লিপিকা সিং, নিশথা জৈন, আনন্দ পটবর্ধন, কীর্তি নাখাওয়া, হর্ষ কুলকার্নী, হরি নায়ার সহ বিশিষ্টরা।

    মুম্বই প্রেস ক্লাবে সাংবাদিক সম্মেলনে দিবাকর ব্যানার্জি জানান কালবুর্গি হত্যা ও এফটিটিআই ইস্যুতে সরকারের ভূমিকার প্রতিবাদেই তারা জাতীয় পুরস্কার ফিরিয়ে দেওয়ার সিদ্ধান্ত নিলেন।

    http://zeenews.india.com/bengali/entertainment/dibakar-banerjeeparesh-kamdar-13-others-return-national-awards_132805.html



    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

    0 0


    মা ব্যাতিরেক কে বা বুলতে পারে কার বাপ কেডা, দিবাকরকে কইতে হবে না বাপের নাম,সে যে বাপের ব্যাটা,প্রমাণ করিতে হইবে না।

    পলাশ বিশ্বাস

    KOLOROB as we stand Divided,Let us unite to save Humanity and Nature!

    केसरिया सत्ता अब छात्रों को भी नहीं बख्शेगी!

    https://youtu.be/BFXDZ6-yA-Y


    जाग मेरे मन मछंदर jaag mere man machhandar

    https://www.youtube.com/watch?v=rEBN3q6A6Zw


    রকেট ক্যাপসুল নিবেদিত মহিষাসুর বধ উত্সবে মাতৃতন্ত্রের দেবি সর্বত্র পুজ্যন্তে মন্ত্রোচ্চার মধ্যে সত্যি বড় দুর্গার আলোছায়ার শারদ তিলোত্তমা মন্দাক্রান্তা সেনকে ভারততীর্থের ভালোবাসারুপেণ দর্শন করিযাছি।


    এইবার দেখলাম খোসলা কা ঘোসলা,প্রথম সিনেমায় রাষ্ট্রীয় পুরস্কার হাসিল করা বাপের ব্যাটা দিবাকর বন্দোপাধ্যায়ের বুকের পাটা,যার তেজে ফ্যাসিজ্মের তেজ ধার গণসংহারী ছাপান্ন ইন্চির বুকে গৌরিক সুনামির বিপর্যয়।


    উটপাখি প্রজাতির বুদ্ধিজীবী অনেক দেখিয়াছি। জানি তেনাদেরও যাহাদের জারিজুরি চিটফান্ডে গচ্ছিত জনগণের টাকায়,লোক ঠকানো ক্ষমতার রাজনৈতিক সংরক্ষণ ও সহায়তায়,তাহাদের বিপ্লবের আগুনও দেখিলাম।


    সারা জীবন বিপ্লব কপচিয়ে ফ্যাসিজ্মের পদতলে নতজানু সুশীল সমাজের উলঙ্গ অবতার শাসকের রক্তচক্ষুর ভয়ে কুঁকড়াতেও দেখিলাম।


    মা ব্যাতিরেক কে বা বুলতে পারে কার বাপ কেডা, দিবাকরকে কইতে হবে না বাপের নাম,সে যে বাপের ব্যাটা,প্রমাণ করিতে হইবে না।


    সাহিত্যিকদের পর এবার ধর্মীয় ও সামাজিক অসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে সরব হলেন ভারতের চলচ্চিত্রকাররা। বুধবার সন্ধ্যায় দেশটির প্রখ্যাত চলচ্চিত্রকার দিবাকর বন্দ্যোপাধ্যায়সহ ১০ জন তাদের জাতীয় চলচ্চিত্র পুরস্কার ফিরিয়ে দিয়েছেন।

    বিশিষ্ট কন্নড় সাহিত্যিক এমএম কালবর্গীকে হত্যা এবং এফটিআইআইসহ ভারত জুড়ে ঘটে চলা সাম্প্রতিক নানা ঘটনার পরিপ্রেক্ষিতে রাষ্ট্রীয় সম্মান ফিরিয়ে দেওয়ার সিদ্ধান্ত নিয়েছেন বলে জানিয়েছেন তারা। খোসলা কা ঘোসলা, লাভ সেক্স অর ধোঁকাসহ সম্প্রতি ব্যোমকেশ বক্সীর সুবাদে দিবাকর বন্দোপাধ্যায় বলিউডে বেশ পরিচিত নাম। তাই তার এই পুরস্কার ফিরিয়ে দেওয়ার বিষয়টি তুমুল আলোচনা তৈরি করেছে ভারতের সর্বমহলে।

    পুরস্কার ফিরিয়ে দেওয়া চলচ্চিত্রকারদের তালিকায় আরও আছেন পরেশ কামদার, লিপিকা সিং, নিশিথা জাইন, আনন্দ পট্টবর্ধন, কীর্তি নাকওয়া, হর্ষ কুলকার্নি, হরি নাইর।

    বিষয়টি নিয়ে দিবাকর বন্দোপাধ্যায় বলেন, 'অসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে নিজেদের এই অর্জন ফিরিয়ে দেওয়া ছাড়া আমাদের কাছে আর ভালো উপায় ছিল না।'

    ধর্মীয় অসহিষ্ণুতা ও মোদি সরকারের বিরুদ্ধে মত প্রকাশে বাধা দেওয়ার প্রতিবাদে এর আগে ভারতের বেশ কয়েক জন সাহিত্যিক তাদের জাতীয় পুরস্কার ফিরিয়ে দিয়েছেন। পরে সাহিত্য অ্যাকাডেমির পক্ষে দেশটির বিভিন্ন প্রান্তে ঘটে চলা অসহিষ্ণুতার নানা ঘটনার প্রতিবাদ জানানো হয়। কালবর্গী হত্যা থেকে দাদরি, এমনকি মঙ্গলবার দিল্লির কেরল ভবনে গরুর মাংস নিয়ে পুলিশি তৎপরতার প্রতিবাদে এখন সরব হয়ে উঠেছে গোটা ভারত। সূত্র: টাইমস অব ইন্ডিয়া


    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

    0 0


    https://youtu.be/_Um30X9pECM


    Welcome Zuck!Red Salute to Vidya Bhandari,President of Nepal.Thanks Indian cinema!Humanity wins!

    মা ব্যাতিরেক কে বা বুলতে পারে কার বাপ কেডা, দিবাকরকে কইতে হবে না বাপের নাম,সে যে বাপের ব্যাটা,প্রমাণ করিতে হইবে না।

    Palash Biswas

    Our children would unite us,I hope red blue merger sooner or later as the students seem to be united in their fight for right to education,right to higher studies and right to research by the marketing agents of Knowledge economy.I have discussed economy,production system,religion and the aesthetics of creative activism and social realism,social networking and alternative media.Pl circulate.share.


    FaceBook is alternative media that we owe to Mark Zukerberg!It could be a forum of interactions,visual presentation of truth,dialogue on creativity to strengthen and humanity,nature and civilization as information explosion is captured by caste class hegemony.Please use FACEBOOK to sustain equality, justice, pluralism, diversity and universal brotherhood!The Bharat Teerth.


    Red salute to comrade Vidya Bhandari,the elected President of secular and democratic Nepal.I hope Nepalese Adivasi and Madheshi majority masses would join the mainstream to save sovereignty which is threatened by Super Powers.I am afraid of intensive intrusion,insurgency and intervention in Nepal.I appeal to Bhattrai and Prachand to stand together.


    Thanks Indian Cinema which has always consolidated fraternity,love,unity,integrity,equality and justice.


    I am proud of Diwakar Bandopadhyay,our friend Anand Patwardhan and the rest of ten directors who have led the great Indian Film Industry to echo the voices of humanity and Nature against the governance of fascism!

    Diwakar who got national award on his debut film KHOSLA KA GHOSLA stood high on the podium as the poet, Mandkranta became the face of a lovebird from Bengal!

    https://www.youtube.com/watch?v=YIjjxiSSEvY

    I reccomend to see again the Khosla ka Ghosla!

    Khosla Ka Ghosla - Wikipedia, the free encyclopedia

    https://en.wikipedia.org/wiki/Khosla_Ka_Ghosla



    Jai Bhim comrade discussion
    https://www.youtube.com/watch?v=1w8KL2_kaqU


    I recommend to see RAM Ke NAAM again!

    Ram ke Naam - Wikipedia, the free encyclopedia

    https://en.wikipedia.org/wiki/Ram_ke_Naam

    Ram Ke Naam\In the Name of God (1991,75 mn, Hindi version)
    https://www.youtube.com/watch?
    v=U3nqoIBgFJU

    Jai Bhim comrade 


    I recommend to see JAI BHEEM Comrade yet again!

    Jai Bhim Comrade - Wikipedia, the free encyclopedia

    https://en.wikipedia.org/wiki/Jai_Bhim_Comrade

    जय भीम कामरेड - भाग 1 (Hindi)
    https://www.youtube.com/watch?v=umIcbXVZaUg


    KOLOROB as we stand Divided,Let us unite to save Humanity and Nature!

    केसरिया सत्ता अब छात्रों को भी नहीं बख्शेगी!

    https://youtu.be/BFXDZ6-yA-Y


    जाग मेरे मन मछंदर jaag mere man machhandar

    https://www.youtube.com/watch?v=rEBN3q6A6Zw



    রকেট ক্যাপসুল নিবেদিত মহিষাসুর বধ উত্সবে মাতৃতন্ত্রের দেবি সর্বত্র পুজ্যন্তে মন্ত্রোচ্চার মধ্যে সত্যি বড় দুর্গার আলোছায়ার শারদ তিলোত্তমা মন্দাক্রান্তা সেনকে ভারততীর্থের ভালোবাসারুপেণ দর্শন করিযাছি।


    এইবার দেখলাম খোসলা কা ঘোসলা,প্রথম সিনেমায় রাষ্ট্রীয় পুরস্কার হাসিল করা বাপের ব্যাটা দিবাকর বন্দোপাধ্যায়ের বুকের পাটা,যার তেজে ফ্যাসিজ্মের তেজ ধার গণসংহারী ছাপান্ন ইন্চির বুকে গৌরিক সুনামির বিপর্যয়।


    উটপাখি প্রজাতির বুদ্ধিজীবী অনেক দেখিয়াছি। জানি তেনাদেরও যাহাদের জারিজুরি চিটফান্ডে গচ্ছিত জনগণের টাকায়,লোক ঠকানো ক্ষমতার রাজনৈতিক সংরক্ষণ ও সহায়তায়,তাহাদের বিপ্লবের আগুনও দেখিলাম।


    সারা জীবন বিপ্লব কপচিয়ে ফ্যাসিজ্মের পদতলে নতজানু সুশীল সমাজের উলঙ্গ অবতার শাসকের রক্তচক্ষুর ভয়ে কুঁকড়াতেও দেখিলাম।


    মা ব্যাতিরেক কে বা বুলতে পারে কার বাপ কেডা, দিবাকরকে কইতে হবে না বাপের নাম,সে যে বাপের ব্যাটা,প্রমাণ করিতে হইবে না।


    সাহিত্যিকদের পর এবার ধর্মীয় ও সামাজিক অসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে সরব হলেন ভারতের চলচ্চিত্রকাররা। বুধবার সন্ধ্যায় দেশটির প্রখ্যাত চলচ্চিত্রকার দিবাকর বন্দ্যোপাধ্যায়সহ ১০ জন তাদের জাতীয় চলচ্চিত্র পুরস্কার ফিরিয়ে দিয়েছেন।

    বিশিষ্ট কন্নড় সাহিত্যিক এমএম কালবর্গীকে হত্যা এবং এফটিআইআইসহ ভারত জুড়ে ঘটে চলা সাম্প্রতিক নানা ঘটনার পরিপ্রেক্ষিতে রাষ্ট্রীয় সম্মান ফিরিয়ে দেওয়ার সিদ্ধান্ত নিয়েছেন বলে জানিয়েছেন তারা। খোসলা কা ঘোসলা, লাভ সেক্স অর ধোঁকাসহ সম্প্রতি ব্যোমকেশ বক্সীর সুবাদে দিবাকর বন্দোপাধ্যায় বলিউডে বেশ পরিচিত নাম। তাই তার এই পুরস্কার ফিরিয়ে দেওয়ার বিষয়টি তুমুল আলোচনা তৈরি করেছে ভারতের সর্বমহলে।

    পুরস্কার ফিরিয়ে দেওয়া চলচ্চিত্রকারদের তালিকায় আরও আছেন পরেশ কামদার, লিপিকা সিং, নিশিথা জাইন, আনন্দ পট্টবর্ধন, কীর্তি নাকওয়া, হর্ষ কুলকার্নি, হরি নাইর।

    বিষয়টি নিয়ে দিবাকর বন্দোপাধ্যায় বলেন, 'অসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে নিজেদের এই অর্জন ফিরিয়ে দেওয়া ছাড়া আমাদের কাছে আর ভালো উপায় ছিল না।'

    ধর্মীয় অসহিষ্ণুতা ও মোদি সরকারের বিরুদ্ধে মত প্রকাশে বাধা দেওয়ার প্রতিবাদে এর আগে ভারতের বেশ কয়েক জন সাহিত্যিক তাদের জাতীয় পুরস্কার ফিরিয়ে দিয়েছেন। পরে সাহিত্য অ্যাকাডেমির পক্ষে দেশটির বিভিন্ন প্রান্তে ঘটে চলা অসহিষ্ণুতার নানা ঘটনার প্রতিবাদ জানানো হয়। কালবর্গী হত্যা থেকে দাদরি, এমনকি মঙ্গলবার দিল্লির কেরল ভবনে গরুর মাংস নিয়ে পুলিশি তৎপরতার প্রতিবাদে এখন সরব হয়ে উঠেছে গোটা ভারত। সূত্র: টাইমস অব ইন্ডিয়া


    --
    Pl see my blogs;


    Feel free -- and I request you -- to forward this newsletter to your lists and friends!

    0 0


    0 0

    কে বা বুলতে পারে কার বাপ কেডা, দিবাকরকে কইতে হবে না বাপের নাম,সে যে বাপের ব্যাটা,প্রমাণ করিতে হইবে না। Palash Biswas






    Welcome Zuck!Red Salute to Vidya Bhandari,President of Nepal.Thanks Indian cinema!Humanity wins!
    মা ব্যাতিরেক কে বা বুলতে পারে কার বাপ কেডা, দিবাকরকে কইতে হবে না বাপের নাম,সে যে বাপের ব্যাটা,প্রমাণ করিতে হইবে না।
    Palash Biswas
    Our children would unite us,I hope red blue merger sooner or later as the students seem to be united in their fight for right to education,right to higher studies and right to research by the marketing agents of Knowledge economy.I have discussed economy,production system,religion and the aesthetics of creative activism and social realism,social networking and alternative media.Pl circulate.share.

    FaceBook is alternative media that we owe to Mark Zukerberg!It could be a forum of interactions,visual presentation of truth,dialogue on creativity to strengthen and humanity,nature and civilization as information explosion is captured by caste class hegemony.Please use FACEBOOK to sustain equality, justice, pluralism, diversity and universal brotherhood!The Bharat Teerth.

    Red salute to comrade Vidya Bhandari,the elected President of secular and democratic Nepal.I hope Nepalese Adivasi and Madheshi majority masses would join the mainstream to save sovereignty which is threatened by Super Powers.I am afraid of intensive intrusion,insurgency and intervention in Nepal.I appeal to Bhattrai and Prachand to stand together.

    Thanks Indian Cinema which has always consolidated fraternity,love,unity,integrity,equality and justice.

    I am proud of Diwakar Bandopadhyay,our friend Anand Patwardhan and the rest of ten directors who have led the great Indian Film Industry to echo the voices of humanity and Nature against the governance of fascism!
    Diwakar who got national award on his debut film KHOSLA KA GHOSLA stood high on the podium as the poet, Mandkranta became the face of a lovebird from Bengal!
    https://www.youtube.com/watch?v=YIjjxiSSEvY
    I reccomend to see again the Khosla ka Ghosla!

    Khosla Ka Ghosla - Wikipedia, the free encyclopedia



    Jai Bhim comrade discussion
    https://www.youtube.com/watch?v=1w8KL2_kaqU


    I recommend to see RAM Ke NAAM again!

    Ram ke Naam - Wikipedia, the free encyclopedia

    Ram Ke Naam\In the Name of God (1991,75 mn, Hindi version)
    https://www.youtube.com/watch?
    v=U3nqoIBgFJU

    Jai Bhim comrade 


    I recommend to see JAI BHEEM Comrade yet again!

    Jai Bhim Comrade - Wikipedia, the free encyclopedia

    जय भीम कामरेड - भाग 1 (Hindi)
    https://www.youtube.com/watch?v=umIcbXVZaUg


    KOLOROB as we stand Divided,Let us unite to save Humanity and Nature!
    केसरिया सत्ता अब छात्रों को भी नहीं बख्शेगी!

    जाग मेरे मन मछंदर jaag mere man machhandar



    রকেট ক্যাপসুল নিবেদিত মহিষাসুর বধ উত্সবে মাতৃতন্ত্রের দেবি সর্বত্র পুজ্যন্তে মন্ত্রোচ্চার মধ্যে সত্যি বড় দুর্গার আলোছায়ার শারদ তিলোত্তমা মন্দাক্রান্তা সেনকে ভারততীর্থের ভালোবাসারুপেণ দর্শন করিযাছি।

    এইবার দেখলাম খোসলা কা ঘোসলা,প্রথম সিনেমায় রাষ্ট্রীয় পুরস্কার হাসিল করা বাপের ব্যাটা দিবাকর বন্দোপাধ্যায়ের বুকের পাটা,যার তেজে ফ্যাসিজ্মের তেজ ধার গণসংহারী ছাপান্ন ইন্চির বুকে গৌরিক সুনামির বিপর্যয়।

    উটপাখি প্রজাতির বুদ্ধিজীবী অনেক দেখিয়াছি। জানি তেনাদেরও যাহাদের জারিজুরি চিটফান্ডে গচ্ছিত জনগণের টাকায়,লোক ঠকানো ক্ষমতার রাজনৈতিক সংরক্ষণ ও সহায়তায়,তাহাদের বিপ্লবের আগুনও দেখিলাম।

    সারা জীবন বিপ্লব কপচিয়ে ফ্যাসিজ্মের পদতলে নতজানু সুশীল সমাজের উলঙ্গ অবতার শাসকের রক্তচক্ষুর ভয়ে কুঁকড়াতেও দেখিলাম।

    মা ব্যাতিরেক কে বা বুলতে পারে কার বাপ কেডা, দিবাকরকে কইতে হবে না বাপের নাম,সে যে বাপের ব্যাটা,প্রমাণ করিতে হইবে না।

    সাহিত্যিকদের পর এবার ধর্মীয় ও সামাজিক অসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে সরব হলেন ভারতের চলচ্চিত্রকাররা। বুধবার সন্ধ্যায় দেশটির প্রখ্যাত চলচ্চিত্রকার দিবাকর বন্দ্যোপাধ্যায়সহ ১০ জন তাদের জাতীয় চলচ্চিত্র পুরস্কার ফিরিয়ে দিয়েছেন।
    বিশিষ্ট কন্নড় সাহিত্যিক এমএম কালবর্গীকে হত্যা এবং এফটিআইআইসহ ভারত জুড়ে ঘটে চলা সাম্প্রতিক নানা ঘটনার পরিপ্রেক্ষিতে রাষ্ট্রীয় সম্মান ফিরিয়ে দেওয়ার সিদ্ধান্ত নিয়েছেন বলে জানিয়েছেন তারা। খোসলা কা ঘোসলা, লাভ সেক্স অর ধোঁকাসহ সম্প্রতি ব্যোমকেশ বক্সীর সুবাদে দিবাকর বন্দোপাধ্যায় বলিউডে বেশ পরিচিত নাম। তাই তার এই পুরস্কার ফিরিয়ে দেওয়ার বিষয়টি তুমুল আলোচনা তৈরি করেছে ভারতের সর্বমহলে।
    পুরস্কার ফিরিয়ে দেওয়া চলচ্চিত্রকারদের তালিকায় আরও আছেন পরেশ কামদার, লিপিকা সিং, নিশিথা জাইন, আনন্দ পট্টবর্ধন, কীর্তি নাকওয়া, হর্ষ কুলকার্নি, হরি নাইর।
    বিষয়টি নিয়ে দিবাকর বন্দোপাধ্যায় বলেন, 'অসহিষ্ণুতার প্রতিবাদে নিজেদের এই অর্জন ফিরিয়ে দেওয়া ছাড়া আমাদের কাছে আর ভালো উপায় ছিল না।'
    ধর্মীয় অসহিষ্ণুতা ও মোদি সরকারের বিরুদ্ধে মত প্রকাশে বাধা দেওয়ার প্রতিবাদে এর আগে ভারতের বেশ কয়েক জন সাহিত্যিক তাদের জাতীয় পুরস্কার ফিরিয়ে দিয়েছেন। পরে সাহিত্য অ্যাকাডেমির পক্ষে দেশটির বিভিন্ন প্রান্তে ঘটে চলা অসহিষ্ণুতার নানা ঘটনার প্রতিবাদ জানানো হয়। কালবর্গী হত্যা থেকে দাদরি, এমনকি মঙ্গলবার দিল্লির কেরল ভবনে গরুর মাংস নিয়ে পুলিশি তৎপরতার প্রতিবাদে এখন সরব হয়ে উঠেছে গোটা ভারত। সূত্র: টাইমস অব ইন্ডিয়া

    0 0
  • 10/29/15--07:40: पद्मभूषण लौटाया शीर्ष वैज्ञानिक ने और इतिहास भी मुखर है! मोदी के खिलाफ अब 53 इतिहासकारों ने खोला मोर्चा, वैज्ञानिक भी हुए शामिल! https://youtu.be/_Um30X9pECM कारवां लगातार लंबा हो रहा है हमारा ,आप तय करें कि किस तरफ हैं आखिर आप! अब भारतीय जनता को तय करना है कि यह केसरिया आपातकाल कब तक जारी रहना है। राष्ट्र के विवेक ने इंदिरा को भी माफ नहीं किया,राष्ट्र के उस विवेक से थोड़ा डरा भी कीजिये! छात्र युवाशक्ति मुक्तबाजारी चकाचौंध से मोहमुक्त होकर आरक्षण विवाद और अस्मिता चक्रव्यूह के आर पार तेजी से गोलबंद हो रही है और देश ही नहीं, दुनियाभर की मेधा भारत को गधों का चारागाह बनने देने की रियायत देने से इंकार कर रहे हैं। पलाश विश्वास

  • पद्मभूषण लौटाया शीर्ष वैज्ञानिक ने और इतिहास भी मुखर है!

    मोदी के खिलाफ अब 53 इतिहासकारों ने खोला मोर्चा, वैज्ञानिक भी हुए शामिल!

    https://youtu.be/_Um30X9pECM



    कारवां लगातार लंबा हो रहा है हमारा ,आप तय करें कि किस तरफ हैं आखिर आप!





    अब भारतीय जनता को तय करना है कि यह केसरिया आपातकाल कब तक जारी रहना है।


    राष्ट्र के विवेक ने इंदिरा को भी माफ नहीं किया,राष्ट्र के उस विवेक से थोड़ा डरा भी कीजिये!


    छात्र युवाशक्ति मुक्तबाजारी चकाचौंध से मोहमुक्त होकर आरक्षण विवाद और अस्मिता चक्रव्यूह के आर पार तेजी से गोलबंद हो रही है और देश ही नहीं, दुनियाभर की मेधा भारत को गधों का चारागाह बनने देने की रियायत देने से इंकार कर रहे हैं।




    पलाश विश्वास

    वैज्ञानिक पीएम भार्गव लौटाएंगे पद्म पुरस्कार, बोले- लोकतंत्र के रास्ते से दूर जा रही है मोदी सरकार

    फोटो सौजन्‍य: एएनआई ट्वीटर



    पद्मभूषण लौटाया वैज्ञानिक और इतिहास भी मुखर है!


    'असहिष्णुता के माहौल'के खिलाफ बढ़ते विरोध में आज इतिहासकार भी लेखकों, फिल्मकारों और वैज्ञानिकों के साथ शामिल हो गए। इस कड़ी में शीर्ष वैज्ञानिक पीएम भार्गव ने कहा कि वह अपना पद्म भूषण पुरस्कार लौटाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार भारत को एक 'हिंदू धार्मिक निरंकुश तंत्र'में बदलने की कोशिश कर रही है।


    बुद्धिजीवियों के विरोध प्रदर्शनों की लहर में वैज्ञानिकों के दूसरे समूह के शामिल होने के बीच रोमिला थापर, इरफान हबीब, केएन पन्निकर और मृदुला मुखर्जी सहित 53 इतिहासकारों ने देश में 'अत्यंत खराब माहौल'से उत्पन्न चिंताओं पर कोई 'आश्वासनकारी बयान'न देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला।

    कारवां लगातार लंबा हो रहा है हमारा ,आप तय करें कि किस तरफ हैं आखिर आप!


    अब भारतीय जनता को तय करना है कि यह केसरिया आपातकाल कब तक जारी रहना है।


    पुरस्कार लौटाने का सिलसिला जारी है।


    हालांकि बंगाल के फिल्म निर्देशकों दिवाकर बंदोपाध्याय और इंद्रनील लाहिड़ी के कवि मंदाक्रांता सेन के बाद परस्कार लौटाने पर अब भी बंगाल के सुशील समज के तमाम आइकन सरकारी कर्मचारियों की तरह अपने वेतन और भत्तों की फिक्र में बाकी देश दुनिया के साथ खड़ा होने से इंकार कर रहे हैं।


    नई लहर के सिनेमा के मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल जिन्हें हम उनकी फिल्मों की तरह वैज्ञानिक दृष्टि और सामाजिक यथार्थ के सौंद्रयबोध के धनी मानते रहे हैं,वे भी फिलहाल अलग सुर अलाप रहे हैं।मौन हैं मृणाल सेन और डा. अमर्त्य सेन से लेकर बिग बी अमिताभ बच्चन,पुणे फिल्म संस्थान का सबसे चमकदार चेहरा सांसद जया बच्चन,रजनीकांत,अदूर गोपालकृष्णन और गिरीश कर्नाड भी।पिर बी कारवां लंबा होता जा रहा है।


    हम निराश हैं कि जाने माने फिल्म निर्माता, निर्देशक श्याम बेनेगल ने कहा है कि कलाकारों का अपने पुरस्कारलौटाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। टीवी चैनल सीएनएन आईबीएन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पुरस्कारदेश देता है, सरकार नहीं। उनका ये बयान ऐसे वक्त आया है जब लेखक और कलाकार देश में बढ़ रही असहिष्णुता के खिलाफ़ लगातार अपने सम्मानों को लौटा रहे हैं। बुधवार को ही दस फिल्मकारों ने पूणे फिल्म संस्थान के हड़ताल कर रहे छात्रों के विरोध में अपने पुरस्कारलौटाए। इनमें मशहूर फिल्म निर्देशक दिबाकर बैनर्जी और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता आनंद पटवर्द्धन शामिल हैं।

    ऐसा ही कोलकाता के सुशील समाज के धुरंधरों के बयान का लब्बोलुआब है।


    इसीतरह हमारी प्रिय  बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन ने गुरुवार को कहा कि वह अपना राष्ट्रीय पुरस्कारनहीं लौटाएंगी क्योंकि यह सम्मान उन्हें राष्ट्र ने दिया है, सरकार ने नहीं। यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब कुछ प्रसिद्ध फिल्मी हस्तियों ने एफटीआईआई छात्रों के साथ एकजुटता दिखाते हुए और देश में बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ अपने राष्ट्रीय पुरस्कारलौटाए हैं। विद्या ने एक कनक्लेव में कहा, ''यह सम्मान (पुरस्कार) राष्ट्र द्वारा दिया गया, सरकार द्वारा नहीं। इसलिए मैं इसे लौटाना नहीं चाहतीं।''


    हमारी लड़ाई फिर भी जारी रहेगी लबों को आजाद करने के लिए।

    साझे चूल्हों की सेहत के लिए और हम जानते हैं कि इतिहास के निर्मायक मोड़ पर जरुरी फैसले करने में,आम जनता के साथ एक पांत में खड़े होने में अनेकमहान विभूतियों से भी चूक हो जाती है।

    इस नरसंहारी फासीवाद के  शरणागत जो हैं,उनसे कम गुनाहगार वे नहीं हैं जिनकी मेधा,जिनकी आत्मा सो रही है और विवेक का दंश भी उन्हें जगा नहीं पाता।इतिहास उनका किस्सा खोलेगा।


    फिरभी कारवां लंबा होता जा रहा है।

    गौरतलब है कि कल ही लेखक, कलाकारों और वैज्ञानिकों के बाद अब फिल्मकारों ने सरकार से नाराजगी जताते हुए राष्ट्रीय पुरस्कारलौटाने का ऐलान कर दिया है।


    गौरतलब है कि  जाने माने फिल्मकारों दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन और 11 अन्य लोगों ने बुधवार को एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए और देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कारलौटा दिए।


    गौरतलब है कि कल दस ही फिल्मकारों के पुरस्कार लौटाने की खबर थी,जो दरअसल बारह हैं।बंगाल के दूसरे निर्देशक लहिड़ी के बारे में आज ही पता चला है।


    वैज्ञानिक पीएम भार्गव लौटाएंगे पद्म पुरस्कार, बोले- लोकतंत्र के रास्ते से दूर जा रही है मोदी सरकार

    हैदराबाद से खबर है : पद्म भूषण से सम्मानित वैज्ञानिक पीएम भार्गव ने अपना पुरस्कार लौटाने की घोषणा की। जाने-माने वैज्ञानिक पुष्प मित्र भार्गव ने गुरुवार को कहा कि वह अपना पद्म भूषण पुरस्कार लौटा रहे और उन्होंने आरोप लगाया कि राजग सरकार भारत को 'हिंदू धार्मिक निरंकुशतंत्र'में बदलने का प्रयास कर रही है।। इस तरह वह भी अन्य वैज्ञानिकों की तरह 'बढ़ती असहिष्णुता'के विरोध में शामिल हो गए हैं।


    हम बार बार चेता रहे हैं कि कोई जनादेश निर्णायक और अंतिम नहीं होता।कोई चुनावी या जाति धर्म ध्रूवीकरण का समीकरण भी अंततः अंतिम नहीं होता।


    हिटलर ने भी जनादेश जीता था,बाकी इतिहास है।


    इतिहास और भूगोल और विज्ञान,साहित्य और कला,माध्यमों और विधाओं में इंद्रधनुषी मनुष्यता की अभिव्यक्ति होती है और आप उसका सम्मान करें,ऐसी तहजीब साझे चूल्हें की होती है।भारत तीर्थ की होती है।


    नस्ली रंगभेद,फासिज्म और मनुस्मृति शासन के त्रिशुल में फंसी है आपकी आत्मा तो आप धर्म की बात भी न किया करें तो मनुष्यता और प्रकृति के हित में बेहतर।


    साठ के दशक के मोहभंग के बाद जागा सत्तर का दशक फिर इतिहास के सिंहद्वार पर वापसी के लिए दस्तक दे रहा है।


    छात्र युवाशक्ति मुक्तबाजारी चकाचौंध से मोहमुक्त होकर आरक्षण विवाद और अस्मिता चक्रव्यूह के आर पार तेजी से गोलबंद हो रही है और देश ही नहीं, दुनियाभर की मेधा भारत को गधों का चारागाह बनने देने की रियायत देने से इंकार कर रहे हैं।


    कारवां लगातार लंबा हो रहा है हमारा ,आप तय करें कि किस तरफ हैं आखिर आप।


    भाजपा के नेता,इंडियन एक्सप्रेस के मशहूर पूर्व संपादक और दुनियाभर में पहले विनिवेशमंत्री अरुण शौरी ने मौजूदा पीएमओ को निकम्मा निठल्ला और सुस्त बताते हुए डा.मनमोहन सिंह के पीएमओ को ज्यादा एक्टिव बता दिया।


    गौरतलब है कि जन वैश्विक वित्तीय संस्थानों और बहुराष्ट्रीय कारपोरेट हितों के मद्देनजर माननीय शौरी महाशय का यह फतवा है,उनने अपने सृजित सुधारों के ईश्वर डा.मनमोहन सिंह की सरकार को नीतिगत विकलांगकता के महाभियोग से खारिज करते हुए अपना वरदहस्त हटा लिया तो इंडिया इंक ने अपने नय़े ईश्वर के बतौर वैदिकी इंद्रदेव का आवाहन कर दिया और मौजूदा वैदिकी हिंसा उसीकी तार्किक परिणति है।


    अब डाउ कैमिकल्स के कारपोरेट वकील जिनने भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को न्याय से वंचित करने की आर्थक समझ के तहत देश की अर्थ व्यवस्था की बागडोर संभाल ली है,उनका फतवा है कि जो साहित्यकार,कलाकार,लेखक,फिल्मकार,वैज्ञानिक वगैरह वगैरह हैं,वे भाजपा के चरम विरोधी हैं।


    माफ करें वकील साहेब,आप सर्वोच्च अदालत तक की अवमानना से परहेज नहीं करते और इसमें आपकी दक्षता हैरतअंगेज हैं,लेकिन राष्ट्र के विवेक का ऐसा अपमन भी न करे कि संघ परिवार इतिहास के कचरे में शामिल हो जाये।फासीवाद का अंत तो हो जायेगा।


    इसीतरह, कुछ फिल्मकारों के राष्ट्रीय पुरस्कारलौटाने पर अभिनेता अनुपम खेर बिफर गए हैं। उन्होंने पुरस्कारलौटाने वालों की मंशा पर, साथी  फिल्मकारों की मंशा पर सवाल उठाया है। अनुपम खेर ने ट्विटर पर लिखा, कुछ और लोग जो नहीं चाहते थे कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें, अब वो भी #AwardWapsi गैंग का हिस्सा बन गए हैं। जय होष अनुपम खेर ने दूसरे ट्वीट में लिखा, ये लोग किसी एजेंडे के तहत ऐसा कर रहे हैं। जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई थी तो इन्हीं में से कुछ लोग मुझे भी फिल्म सेंसर बोर्ड से बाहर करने वालों में शामिल थे।


    अनुपम जी के कहने का आशय और उनकी पृष्ठभूमि जाहिर है कि बहुत पारदर्शी है और कोई जवाब जरुरी भी नहीं है।

    भारतीय इतिहास में श्रीमती इंदिरा गांधी से ज्यादा सक्षम, साहसी,लोकप्रिय प्रधानमंत्री कोई हुआ नही है,उनके पिता प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु भी उनसे पीछे हैं।


    जिन्हें संघ परिवार के तत्कालीन सर्वेसर्वा देवरस जी दुर्गा बताये करते थे।उनका अवसान आपातकाल और सिख संहार की वजह से हुआ।


    तब  आपातकाल दो साल तक चला और अब भारतीय जनता को तय करना है कि यह केसरिया आपातकाल कब तक जारी रहना है।


    हम बार बार चेता रहे हैं कि कोई जनादेश निर्णायक और अंतिम नहीं होता।कोई चुनावी या जाति धर्म ध्रूवीकरण का समीकरण भी अंततः अंतिम नहीं होता।हिटलर ने भी जनादेश जीता था,बाकी इतिहास है।


    इंदिरा गांधी ने न सिर्फ सिंडिकेट नेताओं केतमाम समकरण और पालतू वोटबैंक को धता बताकर मासूम गुड़िया की छवि तोड़ी थी,उनने नीलम संजीव रेड्डी को आत्मा की आवाज से हराया था जैसे अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक कुशलता के जरिए उनने महाबलि अमेरिका के सातवें नौसैनिक बेड़ा को बीच समुंदर रोककर बांग्लादेश आजाद कराया था।


    अर्थशास्त्री डा.अशोक मित्र को मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाकर राष्ट्रीयसंसाधनों का राष्ट्रीयकरण किया थे और महान फिल्मकार ऋत्विक घटक को पुणे फिल्म इंस्टीच्युट का सर्वेसर्वा बना दिया था।वे नेहरु की बेटी इंदिरा प्रियदर्शिनी ही थीं।


    फिर वे 1971 में भारी बहुमत से जीतीं।


    1977 में हार का सामना करने के बावजूद वे फिर 1980 में भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौटी।


    राष्ट्र के विवेक ने इंदिरा को भी माफ नहीं किया,राष्ट्र के उस विवेक से थोड़ा डरा भी कीजिये।


    इतिहास और भूगोल और विज्ञान,साहित्य और कला,माध्यमों और विधाओं में इंद्रधनुषी मनुष्यता की अभिव्यक्ति होती है और आप उसका सम्मान करें,ऐसी तहजीब साझे चूल्हे की होती है।भारत तीर्थ की होती है।


    नस्ली रंगभेद,फासिज्म और मनुस्मृति शासन के त्रिशुल में फंसी है आपकी आत्मा तो आप धर्म की बात भी न किया करें तो मनुष्यता और प्रकृति के हित में बेहतर।


    हालात के मुताबिक समीकरण बदलते हैं।वरना बंगाल में वामपंथ के 35 साल के राजकाज का अवसान नहीं होता और न ही चार चार बार मुख्यमंत्री बनीं बहन मायावती अब हाशिये पर जुगाली कर रही होतीं।जेल के सींखचों में जानेवाली जयललिता फिर सुनामी बहुमत से न जीतती और न खलनायक से फिर महानायक बन जाने की दहलीज पर होते लोक के वैज्ञानिक लालू यादव मसखरा आपकी नजर में जो हैं लोक में बतियाने वाले।


    इतिहासकारों ने अपने बयान में दादरी घटना और मुंबई में एक किताब के विमोचन कार्यक्रम को लेकर सुधींद्र कुलकर्णी पर स्याही फेंके जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वैचारिक मतभेदों पर शारीरिक हिंसा का सहारा लिया जा रहा है। तर्कों का जवाब तर्क से नहीं दिया जा रहा, बल्कि गोलियों से दिया जा रहा है। इसमें कहा गया कि जब एक के बाद एक लेखक विरोध में अपने पुरस्कार लौटा रहे हैं, ऐसे में उन स्थितियों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की जा रही जिनके चलते विरोध की नौबत आई, इसके स्थान पर मंत्री इसे कागजी क्रांति कहते हैं और लेखकों को लिखना बंद करने की सलाह देते हैं। यह तो यह कहने के समान हो गया कि अगर बुद्धिजीवियों ने विरोध किया तो उन्हें चुप करा दिया जाएगा।


    बयान में कहा गया कि शासन जो देखना चाहता है, वह कालक्रम, जांच के स्रोतों और विधियों की परवाह किए बिना एक तरह का नियम कानून वाला इतिहास, भूतकाल की गढ़ी गई छवि, इसके कुछ पहलुओं को गौरवान्वित करना और अन्य की निन्दा करने जैसा है। इतिहासकारों ने मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि और जब यह उम्मीद की जाती है कि स्थितियों में स